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ईरान-इजराइल युद्ध(Iran-Israel War) का असर अब बुरहानपुर के प्रमुख कपड़ा उद्योग पर पड़ने लगा है। यहां सबसे अधिक 20-23 और 50-60 काउंट के यार्न से कपड़ा उत्पादन होता है और इन्हीं दोनों यार्न के भाव पर 10 रुपए तक तेजी आई है। इससे डिमांड में भी कमी आ गई है। ऐसे में युद्ध लंबा खिंचा तो इसका असर कपड़ों की कीमतों पर भी पड़ेगा। वहीं युद्ध के कारण पंजाब और कोयंबटूर से आने वाले यार्न के सप्लाई पर भी असर पड़ा है।
बुरहानपुर देशभर में कपड़ा उत्पादन के लिए जाना जाता है। यहां हर दिन दस गाड़ी यानी 2.5 लाख किलो तक यार्न की आवक होती है। व्यापारियों ने कहा कि कोविड के बाद जो हालात बने थे, वैसे तो नहीं हैं, लेकिन यार्न के भाव में अचानक वृद्धि हो गई है। पहले 20-23 नंबर का यार्न 105-108 था, जो अब 112 रुपए किलो तक हो गया है। वहीं 50 से 60 नंबर का यार्न 180-200 से बढ़कर 190-210 रुपए किलो तक पहुंच गया है। इससे नए यार्न की डिमांड में कमी आई है। फिलहाल कपड़ा उत्पादन पर असर नहीं हुआ है, लेकिन हालत नहीं सुधरे तो कपड़ा भी महंगा होगा।
यह है मुख्य कारण
यार्न कारोबारी अशोक अग्रवाल बताते हैं कि यह युद्ध(Iran-Israel War) का साइड इफेक्ट है। कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी के कारण पॉलिएस्टर यार्न और सिंथेटिक फाइबर के दाम बढ़ गए हैं, जिसका सीधा असर टेक्सटाइल उद्योग पर पड़ा है। कच्चे माल की लागत में वृद्धि का कारण यह है कि पॉलिएस्टर धागा पेट्रोकेमिकल से बनता है, जो कच्चे तेल का एक उत्पाद है। तेल की कीमतें बढ़ने से इसके मुख्य कच्चे माल जैसे प्यूरीफाइड टेरेफ्थेलिक एसिड और मोनोएथिलीन ग्लाइकॉल महंगे हो गए हैं। शिपिंग और लॉजिस्टिक्स में भी रुकावट आई है। तनाव के कारण जहाजों को दूसरे लंबे रूट से जाना पड़ रहा है, जिससे माल ढुलाई का खर्च बढ़ गया है।
यहां से आता है यार्न
यार्न के भाव बढ़ने का एक कारण देशभर में सरकारी यार्न की एनटीसी मिलें बंद होना भी है। बुरहानपुर में यार्न की आवक कोयंबटूर, महाराष्ट्र व पंजाब से हो रही है, जिससे बुरहानपुर में कैमरिक का कपड़ा बनता है। कच्चा माल तैयार होने के बाद इसे बाहर सप्लाई किया जाता है। अभी जो यार्न के दाम बढ़े हैं, उससे बुरहानपुर में 60 फीसदी लूमों पर यही कपड़ा तैयार होता है।
युद्ध लंबा चला तो आएगा संकट
युद्ध शुरू होने के बाद से इसका असर दिखने लगा है। एलपीजी गैस महंगी हो गई है। घरेलू गैस पर 60 और व्यावसायिक गैस 115 रुपए तक महंगी हो गई है। अब युद्ध लंबा चलता है तो बुरहानपुर के कपड़ा उत्पादन पर भी असर आएगा। फिलहाल 50 फीसदी कपड़ा इसी यार्न से बनता है। इसमें मुख्य रूप से गमछा तैयार होता है। यार्न के भाव तो बढ़ गए हैं, लेकिन कपड़े के भाव में अभी कोई तेजी नहीं आई है।
ईरान और इजरायल के बीच जारी जंग का असर चीन पर भी पड़ता नजर आ रहा है। खबर है कि ईरान से मिलने वाले सस्ते तेल पर चीन खासा निर्भर है और उसके पास इसका कोई और विकल्प नहीं है। हालांकि, इसे लेकर चीन या ईरान की ओर से आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। इजरायल ने ऑपरेशन राइजिंग लॉयन के तहत शुक्रवार को ईरान पर एयर स्ट्राइक कर दी थी। तब से ही दोनों देशों में संघर्ष जारी है।
न्यूज18 की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के डिस्काउंट रेट पर मिलने वाले तेल पर निर्भर होने और दूसरा विकल्प नहीं होने के कारण चीन उर्जा सुरक्षा संकट का सामना कर रहा है। सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि रूसी तेल का एक विकल्प है, लेकिन उसकी सीमित सप्लाई है और सिर्फ करीब 1 डॉलर प्रति बैरल का डिस्काउंट देता है। वहीं, वेनेजुएला का तेल कमजोर गुणवत्ता का माना जाता है। साथ ही इसके चीन तक ट्रांसपोर्ट किए जाने में भी परेशानियां हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों ने कहा कि ईरान का पतन होता है, तो इससे न सिर्फ ऊर्जा संकट खड़ा हो जाएगा, बल्कि चीन की अर्थव्यवस्था पर भी खतरा मंडराने लगेगा। इसके अलावा ईरान में शासन परिवर्तन होता है, तो संभव है कि ईरान दोबारा डॉलर पर व्यापार करने लगे, जिससे चीन की मुद्रा पर भी असर पड़ सकता है। उनका कहना है कि अगर ऐसा होता, तो चीन को हर साल 20-30 बिलियन डॉलर का नुकसान हो सकता है, क्योंकि ईरान का तेल एक बार फिर खुले बाजार में पहुंच जाएगा।
सूत्रों ने चैनल को बताया है कि मौजूदा शासन का पतन BRI यानी बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव के तहत ईरान और मध्य एशिया में चीन की डील को भी नुकसान होगा। उन्होंने बताया कि ईरान पर पश्चिमी देशों की पाबंदियां हैं, जिसके चलते चीन के पास मोल भाव करने की शक्तियां हैं और वह ईरानी तेल का बड़ा खरीदार है।
सूत्रों ने यह भी कहा है कि इस सुविधा के खत्म होने और डिस्काउंट रेट पर तेल नहीं मिलने का खासा असर टीपॉट रिफाइनरी पर होगा। उन्होंने बताया कि अगर ये डिस्काउंट खत्म होता है, तो ऐसी 40 फीसदी रिफाइनरी बंद हो सकती है, जिसके चलते नौकरियां जाना और ईंधन की कमी जैसे हालात पैदा हो सकते हैं।
]]>ईरान और इजरायल के बीच चल रहा युद्ध अभी तक शांत नहीं हो सका है. इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक सोशल मीडिया पोस्ट शेयर की है. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि सभी को ईरान की राजधानी तेहरान को खाली कर देना चाहिए. ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान का न्यूक्लियर डील साइन न करने का फैसला मुर्खता से भरा है.
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को लेकर एक पोस्ट शेयर की है. उन्होंने लिखा, ''ईरान को उस सौदे पर हस्ताक्षर कर देने चाहिए था जिस पर मैंने कहा था. यह कितनी शर्म की बात है और मानव जीवन की बर्बादी है. सीधे शब्दों में कहें तो, ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं हो सकता. मैंने इसे बार-बार कहा है! सभी को तुरंत तेहरान खाली कर देना चाहिए!
ट्रंप ने इजरायल-ईरान युद्ध रुकवाने का किया था दावा
ट्रंप ने हाल ही में दावा किया था कि उनके प्रयासों से इजरायल और ईरान के बीच भी जल्द शांति स्थापित हो सकती है. ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा था कि जिस तरह उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापार के जरिए तनाव कम किया था, उसी तरह वह इजरायल और ईरान को भी बातचीत की मेज पर ला सकते हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था, ''मैंने भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापार के माध्यम से समझदारी और स्थिरता लाई. दो शानदार नेताओं के साथ बातचीत से एक बड़ा टकराव टल गया. इजरायल और ईरान के बीच भी वैसा ही समझौता जल्द संभव है.''
लोगों को तुरंत तेहरान छोड़ देना चाहिए’
उन्होंने कहा, ‘ईरान को उस सौदे पर हस्ताक्षर कर देना चाहिए था, जिसके लिए मैंने कहा था. यह एक शर्मनाक स्थिति है और इससे बेवजह मानव जीवन की हानि हो रही है. मैं बार-बार कह चुका हूं कि ईरान को परमाणु हथियार नहीं रखने दिए जा सकते. सभी लोगों को तुरंत तेहरान छोड़ देना चाहिए.’
दोनों देशों के बीच टकराव जारी
यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव के आसार लगातार बढ़ते जा रहे हैं. इजरायल की सेना ने ईरान के कुछ सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है, जिसके जवाब में ईरान ने भी मिसाइल हमले किए. इस बीच अमेरिका समेत कई देश अपने नागरिकों को ईरान से निकालने की प्रक्रिया में जुट गए हैं.
जल्द हो सकता है समझौता
ट्रंप ने अपनी पोस्ट से दो घंटे पहले कनाडा में G7 सम्मेलन के दौरान कहा था कि अमेरिका ईरान के साथ फोन पर बातचीत कर रहा है और यह सुझाव भी दिया कि आमने-सामने बात करना और बेहतर रहेगा. उन्होंने उम्मीद जताई कि ईरान के साथ कोई समझौता जल्द हो सकता है. ट्रंप ने कहा, ‘मुझे लगता है कि एक डील साइन की जाएगी. अगर ईरान ऐसा नहीं करता तो वह मूर्खता करेगा.’
]]>इजरायल और ईरान के बीच शुरू हुआ युद्ध अभी तक थम नहीं सका है. इजरायल के हमले के बाद ईरान ने भी उस पर ड्रोन और मिसाइलों से हमला किया है. इस बीच एक और अहम खबर सामने आयी है. ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई इजरायल के खौफ से बंकर में जाकर छिप गए हैं. खामेनेई के साथ उनका पूरा परिवार भी है. इजरायल ने ईरान पर अटैक करके उसके कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था. इसके जवाब में ईरान ने भी भयंकर नुकसान पहुंचाया है.
'ईरान इंटरनेशनल' की एक खबर के मुताबिक खामेनेई के बेटे मोजतबा सहित उनके परिवार के सभी सदस्य उनके साथ हैं. वे सभी बंकर में छिपे हैं. इजरायल के खिलाफ पिछले ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 1 और ट्रू प्रॉमिस 2 के दौरान खामेनेई के परिवार को भी बंकर में ले जाया गया था. उस समय मोजतबा उनके साथ थे, लेकिन उनके दो बेटे मसूद और मुस्तफा उनके साथ नहीं थे.
खामेनेई को मारने की योजना
इससे पहले रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई को मारने के संबंध में इजरायल की योजना को वीटो कर दिया। एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि इजरायल हाल ही में अमेरिका के पास यह प्रस्ताव लेकर गया था कि उन्होंने खामेनेई को मारने की एक विश्वसनीय योजना बनाई है। हालांकि ट्रंप ने इस योजना की अनुमति नहीं दी। जानकारी के मुताबिक ट्रंप प्रशासन ने कहा कि यह कदम संघर्ष को और भड़का सकता है।
ईरान के 224 नागरिकों की मौत
इससे पहले ईरान ने सोमवार को बताया है कि बीते शुक्रवार इजरायल द्वारा शुरू किए गए ताजा हमलों में अब तक 224 ईरानियों की मौत हो चुकी है। इनमें ईरान के सैन्य प्रमुख और कई परमाणु अधिकारी भी शामिल हैं। वहीं हजार से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। वहीं दूसरी तरफ इजरायल ने कहा है कि ईरान की ओर से किए गए हमलों में उसके यहां 14 लोगों की मौत हो गई है। वहीं 300 से अधिक लोग घायल हैं। गौरतलब है कि इजरायल ने शुकवार सुबह ईरान के परमाणु कार्यक्रम को निशाना बनाते हुए ऑपरेशन राइजिंग लॉयन शुरू किया था। इस दौरान इजरायल ने ईरान के कई परमाणु, मिसाइल और सैन्य ढांचे को निशाना बनाया। वहीं ईरान ने भी इजरायल पर कई जवाबी हमले किए हैं।
खामनेई को क्यों नहीं निशाना बनाया?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायल ने ऑपरेशन की पहली रात को खामनेई को निशाना नहीं बनाया, ताकि उन्हें अपनी यूरेनियम संवर्धन योजना को पूरी तरह छोड़ने का आखिरी मौका दिया जा सके। यह जानकारी टाइम्स ऑफ इजरायल ने अपने सूत्रों के हवाले से दी है।
इजरायली डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने बताया कि उसने ईरान में हथियार बनाने की ताकत को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। इन हमलों में IRGC, उसकी कुद्स फोर्स और ईरानी फौज के ढांचे को नुकसान पहुंचाया गया। IDF ने कहा, "ईरान में हथियार बनाने वाली कई फैक्ट्रियां निशाना बनीं।"
ईरान ने सीजफायर पर बातचीत से किया इनकार
इस बीच यह खबरें भी सामने आई हैं कि ईरान ने सीजफायर पर बातचीत से साफ इनकार कर दिया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने मध्यस्थ देश कतर और ओमान के जरिए यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि वह इजरायल के हमलों का जवाब देने के बाद ही सीजफायर पर विचार करेगा। ईरान ने साफ कह दिया है कि ईरान इजरायली हमले के बीच समझौता नहीं करेगा।
क्या खामेनेई पर अटैक का प्लान बना रहा है इजरायल
इजरायल ने अभी तक ईरान के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वह अब खामेनेई को भी निशाने पर ले सकता है. अमेरिका इस मामले में इजरायल का साथ दे सकता है. एक अमेरिकी अधिकारी ने हाल ही में यह कहा कि इजरायल ने खामेनेई को मारने का प्लान बनाया है और वह इसको लेकर डोनाल्ड ट्रंप के पास भी गया था, लेकिन ट्रंप ने इसकी इजाजत नहीं दी.
ईरान-इजरायल के युद्ध को शांत करवाएंगे ट्रंप
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को एक बार फिर अपने कार्यकाल की विदेश नीति से जुड़ी उपलब्धियों को गिनाते हुए दावा किया कि उनके प्रयासों से इजरायल और ईरान के बीच भी जल्द शांति स्थापित हो सकती है. सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में ट्रंप ने कहा कि जिस तरह उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापार के जरिए तनाव कम किया था, उसी तरह वह इजरायल और ईरान को भी बातचीत की मेज पर ला सकते हैं.
]]>इजरायल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और अरब देशों ने मिडिल ईस्ट में सभी मोर्चों पर एक साथ लड़ी जा रही जंग को रोकने के लिए कथित तौर पर ईरान के साथ बैकडॉर बातचीत शुरू कर दी है.
कहा जा रहा है कि इजरायल फिलहाल इस बैकडॉर बातचीत में शामिल नहीं है लेकिन उन्हें इस बारे में बता दिया गया है. हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इन प्रयासों से गाजापट्टी पर कितना असर पड़ेगा.
रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल ने अभी तक इस बैकडॉर बातचीत को लेकर अमेरिका को अपनी स्थिति के बारे में नहीं बताया है. इजरायल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हम फिलहाल मजबूत स्थिति में है. सीजफायर हमारी शर्तों पर होगा. इन शर्तों में इजरायली सीमावर्ती इलाकों में हिज्बुल्लाह के सभी सैन्य ठिकानों को नष्ट करना भी शामिल है.
यह रिपोर्ट ऐसे समय पर सामने आई है, जब हिज्बुल्लाह लेबनान में सीजफायर चाहता है. हिज्बुल्लाह के डिप्टी लीडर नईम कासिम ने हाल ही में कहा था कि उनका संगठन इजरायल के खिलाफ हमास और फिलिस्तीन के साथ मजबूती से खड़ा रहेगा. बता दें कि नसरल्लाह के बाद कासिम ही अभी हिज्बुल्लाह के शीर्ष अधिकारियों में शामिल है. उन्होंने सीजफायर के लिए लेबनान की संसद के स्पीकर नबीह बेरी के उन प्रयासों का समर्थन किया है, जिन्होंने बिना किसी शर्त पर सीजफायर की पैरवी की.
कासिम ने कहा कि हम सीजफायर के लिए बेरी की अगुवाई का समर्थन करते हैं. अगर इजरायल जंग जारी रखेगा तो युद्ध के मैदान में ही इसका फैसला होगा.
हिज्बुल्लाह पर कहर बनकर टूटा इजरायल
हिज्बुल्लाह पर इजरायल के हमले में हसन नसरल्लाह सहित संगठन के कई बड़े कमांडर्स और अधिकारी मारे गए हैं. जिनमें हिज्बुल्लाह के सर्वोच्च कमांडर फौद शुक्र, सदर्न फ्रंट के कमांडर अली कराकी, ऑपरेशन रेड इब्राहिम अकील सहित हिज्बुल्लाह चीफ के तौर पर नसरल्लाह के संभावित उत्तराधिकारी हाशिम सफीद्दीन भी शामिल हैं.
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