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स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने मंगलवार को कहा कि भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मौजूद नहीं होने की धारणा गलत है।
श्री नड्डा ने राज्यसभा के प्रश्नकाल के दौरान एक पूरक प्रश्न के उत्तर में कहा कि कोरोना के दौरान सभी नागरिकों को कोविड के टीके लगाये गये हैं, जो इसका सबूत है कि स्वास्थ्य कार्यकर्ता देश के प्रत्येक कोने में पहुंच चुके हैं। उन्होंने कहा कि देश में शिशु मृत्यु दर और जच्चा बच्चा मृत्यु दर में भारी कमी आयी है। नौ करोड़ से ज्यादा माता बहनों की कैंसर जांच की गयी है। दो वर्ष तक के सभी बच्चों को अनिवार्य टीके लगाये जा रहे हैं। यह इसलिए संभव हो पा रहा है कि चिकित्सा कर्मी प्रत्येक व्यक्ति तक पहु्ंच रहे है।
उन्होंने कहा कि आरोग्य मंदिरों और टेली मेडिसिन के माध्यम से देश के दूर दराज के क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाएं पहुंच रही है। उन्होंने कहा कि यह धारणा गलत है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं माैजूद नहीं है।
आयुष मंत्री प्रतापराव गणपतराव जाधव ने कहा कि आयुर्वेद औषधि की निर्माण प्रक्रिया की लगातार निगरानी की जाती है। इसके लिए एक समर्पित संस्थान है। उन्हाेंने कहा कि देश में आयुर्वेद औषधि का प्रयोग परंपरागत रूप से होता है। इसके लिए किये गये एक सर्वेक्षण के अनुसार ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आयुर्वेद औषधि के बारे में जानकारी है।
श्री जाधव ने कहा कि ई – संजीवनी पोर्टल विभिन्न भाषाओं में उपलब्ध हैं और अनुरोध मिलने पर इसमें अन्य भाषाएं भी जोड़ी जा सकती है। एक अन्य पूरक प्रश्न के उत्तर में श्री नड्डा ने कहा कि ई – संजीवनी सस्ता और सरल है तथा दूर दराज के क्षेत्रों में बहुत प्रभावी हो रहा है। उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत से जुड़े आभा कार्ड में कोई भी व्यक्ति अपना चिकित्सा ब्याेरा रख सकता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि देश में चिकित्सकों की जरुरत है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की संख्या बढ़ाने के प्रयास किये जा रहे हैं।
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एड्स पॉजिटिव माता-पिता दे रहे स्वस्थ बच्चे को जन्म
एमवायएच में संचालित एआरटी सेंटर के नोडल अधिकारी डॉ. अशोक ठाकुर ने बताया कि जागरूकता के कारण अब एड्स पाजिटिव माता-पिता एड्स निगेटिव बच्चे को जन्म दे रहे हैं। वहीं यदि माता-पिता में से कोई एक पॉजिटिव है तो वह भी स्वस्थ बच्चे को जन्म दे रहे हैं।
मरीज यदि नियमित उपचार लेता है तो वायरल लोड नगण्य हो जाता है। जागरूकता के कारण निगेटिव नवजात को जन्म देने की संख्या हर वर्ष बढ़ रही है। सेंटर में अभी पांच हजार से अधिक मरीज रजिस्टर्ड हैं। एड्स के मरीजों की संख्या का प्रतिशत हर वर्ष कम हो रहा है।
]]>केन्द्रीय स्वास्थ्य, परिवार कल्याण, रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान एक सवाल के जवाब में यह जानकारी दी। तृणमूल कांग्रेस के प्रो. सौगत राय ने एक सवाल में कहा कि कोवैक्सीन काेरोना संक्रमण के विरुद्ध दुनिया का सबसे प्रभावी टीका माना गया है जिसे आईसीएमआर और एनआईवी ने संयुक्त रूप से 35 करोड़ रुपए की लागत से विकसित किया था। लेकिन इस टीके के पेटेंट के लिए बीबीआईएल ने आवेदन किया है और उसमें आईसीएमआर और एनआईवी का उल्लेख नहीं किया है। इस पर सरकार क्या दंडात्मक कार्रवाई करेगी।
नड्डा ने कहा कि यह सही है कि कोवैक्सीन के विकास के लिए आईसीएमआर और एनआईवी ने बीबीआईएल के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये थे। वैक्सीन के विकास के दो भाग थे -एक, विषाणु को अलग थलग करना और दूसरा, विषाणु को निष्क्रिय करना। ये काम आईसीएमआर ने एनआईवी की प्रयोगशाला में किया जिस पर सात करोड़ रुपए की लागत आयी और बीबीआईएल ने प्रयोगशाला परीक्षण एवं विकास का काम किया जिसमें सात करोड़ से अधिक राशि व्यय हुई। बीबीआईएल ने भी इस काम पर 60 करोड़ से अधिक राशि खर्च की है।
उन्होंने कहा कि जब हमें पता चला कि बीबीआईएल ने पेटेंट आवेदन में सिर्फ खुद के नाम का उल्लेख किया था। लेकिन जैसे ही सरकार को इसका पता लगा, हमने तुरंत आपत्ति दाखिल की और कहा कि यह तो संयुक्त एमओयू के तहत विकसित किया गया है और तीनों का संयुक्त स्वामित्व है। इस पर बीबीआईएल ने स्वीकार किया कि अनजाने में गलती से वैक्सीन के विकास के लिए जिम्मेदार नामों में आईसीएमआर एवं एनआईवी के नाम छूट गये थे। बहरहाल अब तीनों नाम संयुक्त रूप में पेटेंट के आवेदन में दर्ज हो गये हैं।
एक पूरक प्रश्न के उत्तर में नड्डा ने कहा कि कोविड काल में वैक्सीन मैत्री ऑपरेशन के तहत भारत ने 100 देशों को वैक्सीन की आपूर्ति की थी और उनमें से 48 देशों को मुफ्त वैक्सीन भेजी थी। सात देशों को कोवैक्सीन दी गयी थी। कुछ 220 करोड़ डबल डोज़ का उत्पादन हुआ था। भारत में काेविड टीकाकरण का कार्यक्रम विश्व का सबसे बड़ा टीकाकरण कार्यक्रम था।
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