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पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ 21 नवंबर को भोपाल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ पदाधिकारी डॉ. मनमोहन वैद्य की पुस्तक ‘हम और यह विश्व’ के विमोचन कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में शामिल होंगे। यह कार्यक्रम रवीन्द्र भवन में आयोजित किया जाएगा। आयोजन की जानकारी सुरुचि प्रकाशन के अध्यक्ष राजीव तुली ने दी।
उन्होंने बताया कि इस अवसर पर वृंदावन-मथुरा के आनंदम आश्रम के प्रमुख ऋतेश्वर जी महाराज भी उपस्थित रहेंगे।यह पहला अवसर होगा जब धनखड़ उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के बाद किसी सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करेंगे। उन्होंने 21 जुलाई को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से त्यागपत्र दिया था। त्यागपत्र के बाद वे केवल उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन के शपथ ग्रहण समारोह में नजर आए थे। उधर, कांग्रेस ने धनखड़ के अचानक इस्तीफे पर सवाल उठाए थे। विपक्ष ने कहा था कि पिछले महीने कहा था कि धनखड़ को उनके सभी पूर्ववर्तियों की तरह विदाई समारोह मिलना चाहिए था, जो अब तक नहीं हुआ।
]]>रमेश ने एक्स पर कहा, "अचानक और चौंकाने वाली बात यह है कि 21 जुलाई की देर रात, भारत के उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने इस्तीफा दे दिया। यह साफ था कि उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर किया गया था – भले ही वह दिन-रात पीएम की तारीफ करते थे।" कांग्रेस नेता ने कहा कि 100 दिनों से, पूर्व वाइस प्रेसिडेंट जो रोजाना सुर्खियों में रहते थे, पूरी तरह चुप – अनदेखे और अनसुने हैं। रमेश ने आगे कहा कि पूर्व वाइस प्रेसिडेंट, राज्यसभा के चेयरमैन के तौर पर, विपक्ष के अच्छे दोस्त नहीं थे।
कांग्रेस महासचिव ने आगे कहा, "वह लगातार और गलत तरीके से विपक्ष की खिंचाई करते थे। फिर भी, डेमोक्रेटिक परंपराओं को ध्यान में रखते हुए, विपक्ष कह रहा है कि वह कम से कम एक फेयरवेल फंक्शन के हकदार हैं, जैसा कि उनके पहले के सभी नेताओं के साथ हुआ था। ऐसा नहीं हुआ है।" धनखड़ के इस्तीफे के बाद, कांग्रेस ने दावा किया था कि उपराष्ट्रपति पद से उनके इस्तीफे के पीछे के कारण उनके द्वारा बताई गई हेल्थ प्रॉब्लम से कहीं ज्यादा गहरे है। विपक्षी पार्टी ने सरकार से धनखड़ के इस्तीफे पर सफाई देने के लिए भी कहा था।
बता दें कि अचानक से बड़ा कदम उठाते हुए धनखड़ ने 21 जुलाई को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजा और कहा कि वह तुरंत पद छोड़ रहे हैं। 74 साल के धनखड़ ने अगस्त 2022 में पद संभाला था और उनका कार्यकाल 2027 तक था। वे राज्यसभा के चेयरमैन भी थे और उन्होंने संसद के मॉनसून सेशन के पहले दिन इस्तीफा दे दिया था। राज्यसभा चेयरमैन के तौर पर अपने अहम कार्यकाल में, धनखड़ का विपक्ष के साथ कई बार टकराव हुआ, जिसने उन पर महाभियोग चलाने का प्रस्ताव भी पेश किया था। यह प्रस्ताव, जो आजाद भारत में किसी वाइस प्रेसिडेंट को हटाने का पहला प्रस्ताव था, बाद में राज्यसभा के डिप्टी चेयरमैन हरिवंश ने खारिज कर दिया था।
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जगदीप धनखड़ का राजनीतिक सफर लंबा और विविध रहा है. वे 1989 से 1991 तक झुंझुनू लोकसभा क्षेत्र से जनता दल के सांसद रहे और चंद्रशेखर सरकार में संसदीय कार्य राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया. इसके बाद 1993 में वे कांग्रेस के टिकट पर किशनगढ़ से विधायक चुने गए. 2019 से 2022 तक पश्चिम बंगाल के राज्यपाल और 2022 से 2025 तक भारत के उपराष्ट्रपति के रूप में उन्होंने अपनी सेवाएं दीं. अब उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के बाद उन्होंने पूर्व विधायक के रूप में पेंशन के लिए आवेदन किया है.
पेंशन स्वीकृति की प्रक्रिया
राजस्थान विधानसभा सचिवालय ने धनखड़ के आवेदन की जांच शुरू कर दी है. राजस्थान सरकार के नियमों के अनुसार, पूर्व विधायकों को उनके कार्यकाल के आधार पर पेंशन और अन्य सुविधाएं प्रदान की जाती है. धनखड़ के मामले में, उनके 1993-1998 के कार्यकाल को देखते हुए पेंशन की पात्रता निर्धारित की जाएगी. स्वीकृति मिलने पर उन्हें प्रतिमाह 42 हजार रुपये की पेंशन के साथ-साथ चिकित्सा सुविधाएं, यात्रा भत्ता और अन्य लाभ मिल सकते हैं.
राजस्थान में पूर्व विधायकों को पेंशन के अलावा कई अन्य सुविधाएं प्रदान की जाती है.जिसमें पूर्व विधायकों और उनके परिवार को मुफ्त चिकित्सा सुविधाएं दी जाती है. इसके अलावा सरकारी कार्यों या विधानसभा से संबंधित यात्राओं के लिए भत्ता दिया जाता है.वहीं विधानसभा द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में भागीदारी और अन्य प्रशासनिक सुविधाएं भी दी जाती है. धनखड़ के आवेदन ने राजस्थान की राजनीति में एक नई चर्चा को जन्म दिया है. उनके इस कदम को उनके लंबे राजनीतिक करियर के एक और अध्याय के रूप में देखा जा रहा है. विधानसभा सचिवालय जल्द ही उनके आवेदन पर अंतिम निर्णय ले सकता है.
]]>OTT पर सीरियल देख रहे हैं धनखड़
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, धनखड़ दिल्ली में अपने सरकारी आवास में एक सुकूनभरा जीवन बिता रहे हैं। सूत्रों के हवाले से पता चला है कि 15 एकड़ में फैले इस उच्च सुरक्षा वाले आवास में धनखड़ सुबह योग करते हैं और शाम को टेबल-टेनिस खेलते दिखते हैं। उनकी बेटी कमना वाजपेयी लगभग हर दिन गुरुग्राम से उनसे मिलने आती हैं। वकील रह चुके धनखड़ इन दिनों राजनीति और अदालती मामलों पर बनी सीरियल्स देखकर समय व्यतीत कर रहे हैं। वे OTT प्लेटफॉर्म पर ‘द लिंकन लॉयर’ और ‘हाउस ऑफ कार्ड्स’ सीरियल देख रहे हैं।
सरकारी गाड़ी का इस्तेमाल छोड़ दिया
अखबार के मुताबिक, धनखड़ की पत्नी सुदेश धनखड़ ने पिछले एक महीने में कम से कम तीन बार राजस्थान की यात्रा की। इनमें से दो बार उन्होंने सड़क मार्ग से जयपुर पहुंचा, जहां उनके परिवार की जमीन पर दो व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स का निर्माण कार्य चल रहा है। सुदेश धनखड़ ने इन यात्राओं में सरकारी वाहन उपयोग न करते हुए हाल ही में खरीदी गई पारिवारिक कार का इस्तेमाल किया। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले इन विज़िट्स के दौरान भारी-भरकम कारकूद होता था, लेकिन इस्तीफे के बाद वाहनों की संख्या में काफी कमी आई है।
जयपुर में बन रही भव्य इमारत
जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) की मंजूरी के अनुसार, दोनों कॉम्प्लेक्स लगभग 3,600 वर्गमीटर क्षेत्र में बन रहे हैं। इनमें दो बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर और आठ मंजिलें होंगी। एक इमारत लगभग पूरी हो चुकी है, जबकि दूसरी निर्माणाधीन है। स्थानीय दुकानदार बताते हैं कि सुदेश धनखड़ साइट पर नियमित रूप से आती-जाती रहती हैं।
नई शुरुआत का इंतजार
धनखड़ दंपति ने इस्तीफा देने के तुरंत बाद पैकिंग शुरू कर दी थी और अब वे सरकार की ओर से नए आवास आवंटित किए जाने का इंतजार कर रहे हैं। जैसे ही उन्हें नया बंगला मिलेगा, वे पूर्व उपराष्ट्रपति के तौर पर मिलने वाली सभी सुविधाओं के साथ कार, सुरक्षा गार्ड सहित नवीन आवास में शिफ्ट हो जाएंगे।
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार शाम अपने पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजे गए अपने इस्तीफे में धनखड़ ने लिखा कि वे "स्वास्थ्य देखभाल को प्राथमिकता देने" के लिए यह फैसला ले रहे हैं। उनके इस अचानक फैसले से राजनीतिक गलियारों में अटकलों का दौर तेज हो गया है। धनखड़ का इस्तीफा संसद के मॉनसून सत्र के पहले ही दिन आ गया। फिलहाल उनके उत्तराधिकारी की दौड़ शुरू हो गई है। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को निर्वाचक मंडल में बहुमत प्राप्त है, जिसमें लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य शामिल हैं। आगामी दिनों में संभावित नामों पर विचार किए जाने की संभावना है।
धनखड़ के उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के बाद उनके उत्तराधिकारी की नियुक्ति के लिए चुनाव ‘‘जल्द से जल्द’’ कराना होगा। संविधान के अनुच्छेद 68 के खंड दो के अनुसार, उपराष्ट्रपति की मृत्यु, इस्तीफे या उन्हें पद से हटाए जाने या अन्य किसी कारण से होने वाली रिक्ति को भरने के लिए चुनाव, रिक्ति होने के बाद "यथाशीघ्र" आयोजित किया जाएगा। रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचित व्यक्ति "अपने पदभार ग्रहण करने की तिथि से पांच वर्ष की अवधि तक" पद धारण करने का हकदार होगा।
भाजपा के पास कई बड़े नेता कतार में
भाजपा के पास इस पद पर चुनने के लिए नेताओं का एक बड़ा समूह है। राज्यपालों में से या संगठन के अनुभवी नेताओं अथवा केंद्रीय मंत्रियों में से किसी का चुनाव किया जा सकता है। धनखड़ भी उपराष्ट्रपति बनने से पहले पश्चिम बंगाल के राज्यपाल थे। धनखड़ के पूर्ववर्ती एम वेंकैया नायडू थे। वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में थे। पार्टी ने 2017 में उन्हें उपराष्ट्रपति पद के लिए चुना था। नायडू भाजपा के अध्यक्ष भी रहे। जनता दल (यूनाइटेड) के सांसद और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश को भी संभावित उम्मीदवार के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि वह 2020 से इस पद पर कार्यरत हैं और उन्हें सरकार का विश्वास प्राप्त है।
मानसून सत्र के पहले दिन एक्टिव दिखे
इंडिया टुडे की सीनियर रिपोर्टर मौसमी सिंह बताती हैं कि मानसून सत्र के पहले दिन जगदीप धनखड़ पूरी सक्रियता से संसद में दिखे. संसद में उन्होंने कई मीटिंग भी ली. 21 जुलाई की शाम 6 बजे उन्होंने विपक्ष के सांसदों से मुलाकात भी की. इस दौरान उन्होंने खराब स्वास्थ्य का कोई जिक्र नहीं किया था. लेकिन 3 घंटे बाद ही उनका इस्तीफा हो गया.
23 जुलाई को जयपुर दौरा तय था
जगदीप धनखड़ का ये फैसला इसलिए भी सवालों के घेरे में है, क्योंकि उनके आगे के कार्यक्रम भी प्रस्तावित थे. 23 जुलाई को उनको जयपुर जाना था. वहां उपराष्ट्रपति रियल एस्टेट डेवलपर्स संघ के साथ संवाद करने वाले थे. उपराष्ट्रपति सचिवालय की ओर से इस कार्यक्रम को लेकर प्रेस विज्ञप्ति भी जारी की गई थी.
विपक्ष टाइमिंग पर सवाल उठा रहा है
जगदीप धनखड़ के खिलाफ महाभियोग लाने वाला विपक्ष भी उनके अचानक इस्तीफे से हैरान हैं. विपक्षी नेताओं ने इसको लेकर सवाल उठाए हैं. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने उपराष्ट्रपति के इस कदम को रहस्यमयी बताया. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा,
कार्यकाल और विवादों से भरा रहा सफर
जगदीप धनखड़ ने अगस्त 2022 में उपराष्ट्रपति पद की शपथ ली थी और उनका कार्यकाल 2027 तक था। अपने कार्यकाल के दौरान उनका विपक्ष से कई बार टकराव हुआ और उनके खिलाफ पहली बार महाभियोग प्रस्ताव लाया गया जिसे राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने खारिज कर दिया था। मार्च 2025 में AIIMS दिल्ली में उनकी एंजियोप्लास्टी हुई थी और वे कुछ दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहे थे। हालांकि वे कई सार्वजनिक कार्यक्रमों में सक्रिय रहे, पर उनकी तबीयत को लेकर समय-समय पर चर्चा होती रही।
एक सियासी तूफान आकार ले रहा था
ऊपर से सामान्य दिखने वाले राजनीतिक गतिविधियों के ठीक पीछे एक सियासी तूफान आकार ले रहा था. सोमवार को सभापति जगदीप धनखड़ ने जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव के विपक्षी सदस्यों के नोटिस को स्वीकार कर लिया. यह लगभग उसी समय (दोपहर 2 बजे) हुआ जब यह खबर आई कि निचले सदन में सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के 100 से ज़्यादा सांसदों ने जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव के नोटिस पर हस्ताक्षर कर दिए हैं.
लगभग 4:07 बजे राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने महाभियोग प्रस्ताव पर 63 विपक्षी सांसदों से नोटिस मिलने की विस्तृत जानकारी दी.
उन्होंने उस प्रक्रिया की याद दिलाई जब किसी न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर दोनों सदनों में नोटिस दिए जाते हैं. धनखड़ ने प्रक्रिया का विवरण दिया और कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल से यह पुष्टि करने के लिए भी कहा कि क्या निचले सदन में नोटिस दिया गया है. फिर उन्होंने एक संयुक्त समिति के गठन और नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की बात कही.
इस तरह पता चलता है कि उन्होंने अपने अंतिम संबोधन और उपस्थिति में भी उन्होंने अपने स्वास्थ्य या इस्तीफा देने के किसी अन्य इरादे की ओर कोई इशारा नहीं किया.
राजनाथ सिंह के घर क्या हो रहा था?
शाम को संसद में राजनाथ सिंह के कार्यालय के बाहर भी काफी हलचल रही और बैठकें भी खूब हुईं. सूत्रों का कहना है कि भाजपा सांसद राजनाथ के कार्यालय में घुसे और बिना कुछ बोले ही बाहर निकल गए. एक भाजपा सांसद ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उनसे कोरे कागज पर दस्तखत करवाए जा रहे थे.
हालांकि विपक्षी सांसद इस बात को लेकर उत्साहित थे और उन्हें विश्वास था कि महाभियोग प्रस्ताव सबसे पहले राज्यसभा में लाया जाएगा क्योंकि राज्यसभा के सभापति भारत के उपराष्ट्रपति भी होते हैं और प्रोटोकॉल के अनुसार सरकार में स्पीकर से पद में बड़े होते हैं.
धनखड़ के इस्तीफे के बाद असमंजस में कांग्रेस
राज्यसभा के पिछले कुछ सत्र धनखड़ के लिए एक कठिन परीक्षा थी, क्योंकि उन्होंने सहयोग किया और दोनों पक्षों की नाराज़गी झेली. विपक्षी सदस्यों ने धनखड़ पर पक्षपात करने का आरोप लगाया, उन्होंने चेयरमैन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया. इस मामले में उपसभापति ने फैसला सुनाया और उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव खारिज कर दिया.
अब जगदीप धनखड़ के इस्तीफे को लेकर कांग्रेस असमंजस में दिख रही है. इंडिया ब्लॉक के सदस्यों की मंगलवार सुबह 10 बजे सदन के नेताओं की बैठक है. इस बैठक में धनखड़ के इस्तीफे के बाद पैदा हुए परिस्थितियों पर विचार किया जाएगा.
क्या होगा अब? जानिए 10 अहम बातें
अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि अगला उप राष्ट्रपति कौन होगा और क्या यह फैसला सत्ताधारी दल के भीतर किसी बड़े बदलाव का संकेत है। इधर कांग्रेस ने सोमवार को कहा कि उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का त्यागपत्र समझ से परे है और उन्हें अपने इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए, क्योंकि यही राष्ट्रहित में होगा। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री मोदी, धनखड़ को अपना मन बदलने के लिए मनाएंगे। रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, "उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति का अचानक इस्तीफा देना जितना चौंकाने वाला है, उतना ही समझ से परे भी। मैं आज शाम लगभग पांच बजे तक कई अन्य सांसदों के साथ उनके साथ था और शाम साढ़े सात बजे उनसे फोन पर बात की थी।"
एक सियासी तूफान आकार ले रहा था
ऊपर से सामान्य दिखने वाले राजनीतिक गतिविधियों के ठीक पीछे एक सियासी तूफान आकार ले रहा था. सोमवार को सभापति जगदीप धनखड़ ने जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव के विपक्षी सदस्यों के नोटिस को स्वीकार कर लिया. यह लगभग उसी समय (दोपहर 2 बजे) हुआ जब यह खबर आई कि निचले सदन में सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के 100 से ज़्यादा सांसदों ने जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव के नोटिस पर हस्ताक्षर कर दिए हैं.
लगभग 4:07 बजे राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने महाभियोग प्रस्ताव पर 63 विपक्षी सांसदों से नोटिस मिलने की विस्तृत जानकारी दी.
उन्होंने उस प्रक्रिया की याद दिलाई जब किसी न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर दोनों सदनों में नोटिस दिए जाते हैं. धनखड़ ने प्रक्रिया का विवरण दिया और कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल से यह पुष्टि करने के लिए भी कहा कि क्या निचले सदन में नोटिस दिया गया है. फिर उन्होंने एक संयुक्त समिति के गठन और नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की बात कही.
इस तरह पता चलता है कि उन्होंने अपने अंतिम संबोधन और उपस्थिति में भी उन्होंने अपने स्वास्थ्य या इस्तीफा देने के किसी अन्य इरादे की ओर कोई इशारा नहीं किया.
राजनाथ सिंह के घर क्या हो रहा था?
शाम को संसद में राजनाथ सिंह के कार्यालय के बाहर भी काफी हलचल रही और बैठकें भी खूब हुईं. सूत्रों का कहना है कि भाजपा सांसद राजनाथ के कार्यालय में घुसे और बिना कुछ बोले ही बाहर निकल गए. एक भाजपा सांसद ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उनसे कोरे कागज पर दस्तखत करवाए जा रहे थे.
हालांकि विपक्षी सांसद इस बात को लेकर उत्साहित थे और उन्हें विश्वास था कि महाभियोग प्रस्ताव सबसे पहले राज्यसभा में लाया जाएगा क्योंकि राज्यसभा के सभापति भारत के उपराष्ट्रपति भी होते हैं और प्रोटोकॉल के अनुसार सरकार में स्पीकर से पद में बड़े होते हैं.
धनखड़ के इस्तीफे के बाद असमंजस में कांग्रेस
राज्यसभा के पिछले कुछ सत्र धनखड़ के लिए एक कठिन परीक्षा थी, क्योंकि उन्होंने सहयोग किया और दोनों पक्षों की नाराज़गी झेली. विपक्षी सदस्यों ने धनखड़ पर पक्षपात करने का आरोप लगाया, उन्होंने चेयरमैन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया. इस मामले में उपसभापति ने फैसला सुनाया और उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव खारिज कर दिया.
अब जगदीप धनखड़ के इस्तीफे को लेकर कांग्रेस असमंजस में दिख रही है. इंडिया ब्लॉक के सदस्यों की मंगलवार सुबह 10 बजे सदन के नेताओं की बैठक है. इस बैठक में धनखड़ के इस्तीफे के बाद पैदा हुए परिस्थितियों पर विचार किया जाएगा.
'इसके पीछे कुछ और गहरे कारण'
जयराम ने लिखा, 'इससे साफ है कि कल दोपहर 1 बजे से लेकर शाम 4:30 बजे के बीच जरूर कुछ गंभीर बात हुई है, जिसकी वजह से जेपी नड्डा और किरेन रिजिजू ने जानबूझकर शाम की बैठक में हिस्सा नहीं लिया। अब एक बेहद चौंकाने वाला कदम उठाते हुए जगदीप धनखड़ ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने इसकी वजह अपनी सेहत को बताया है। हमें इसका मान रखना चाहिए, लेकिन सच्चाई यह भी है कि इसके पीछे कुछ और गहरे कारण हैं।'
'विपक्ष को जगह देने की कोशिश की'
उन्होंने आगे कहा कि धनखड़ ने हमेशा 2014 के बाद के भारत की तारीफ की, लेकिन साथ ही किसानों के हितों के लिए खुलकर आवाज उठाई। उन्होंने सार्वजनिक जीवन में बढ़ते अहंकार की आलोचना की और न्यायपालिका की जवाबदेही व संयम की जरूरत पर जोर दिया। मौजूदा ‘G2’ सरकार के दौर में भी उन्होंने जहां तक संभव हो सका, विपक्ष को जगह देने की कोशिश की।
'नियमों, प्रक्रियाओं और मर्यादाओं के पक्के थे'
अंत में जयराम रमेश ने कहा कि वह नियमों, प्रक्रियाओं और मर्यादाओं के पक्के थे। उन्हें लगता था कि उनकी भूमिका में लगातार इन बातों की अनदेखी हो रही है। जगदीप धनखड़ का इस्तीफा उनके बारे में बहुत कुछ कहता है। साथ ही यह उन लोगों की नीयत पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है, जिन्होंने उन्हें उपराष्ट्रपति पद तक पहुंचाया था।
भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ सोमवार को मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर पहुंचे। यहां उन्होंने कृषि उद्योग समागम कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस मौके पर एमपी के राज्यपाल मंगुभाई पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव समेत प्रदेश सरकार के कई मंत्री और स्थानीय विधायक मौजूद रहे। मंच पर पहुंचे अतिथियों का मंत्री प्रहलाद पटेल और मंत्री उदयप्रताप सिंह ने स्वागत किया फिर राष्ट्रीय गान के साथ दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम शुरु हुआ। किसान उद्योग समागम कार्यक्रम में किसान पंजीकरण कार्यालय, किसान सहायता केंद्र से कृषि में उपयोग होने वाले कृषि यंत्रों का मेला भी लगा है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि, सरकार पहलगाम आतंकी हमले का जवाब ऑपरेशन सिंदूर से दिया है। ऑपरेशन सिंदूर का लोहा दुनिया ने माना है। भारत अब आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगा। पूरा देश राष्ट्र प्रेम की भावना से ओत-प्रोत है और आतंकवाद के खिलाफ एकजुट है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने लौह पुरुष की तरह फैसला लिया।
ये दिग्गज भी कार्यक्रम में मौजूद
नरसिंहपुर में कृषि समागम मेले के उद्घाटन कार्यक्रम में उपराष्ट्रति की पत्नी सुदेश धनखड़ भी मौजूद रहीं। वहीं, राज्यपाल मंगुभाई पटेल के साथ सीएम डॉ. मोहन यादव भी मौजूद रहे। इसके अलावा, कार्यक्रम में प्रदेश सरकार के मंत्री नारायण कुशवाह, गोविंद सिंह राजपूत, ऐंदल सिंह कंषाना, प्रहलाद सिंह पटेल, राव उदय प्रताप सिंह और राज्यसभा सांसद माया नरोलिया मौजूद थीं।
अबकी बार आतंकवाद बर्दाश्त नहीं करेगा भारत
उपराष्ट्रपति ने कहा कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश है कि, जिसने सिंदूर मिटाया, उसे धरती पर रहने का कोई अधिकार नहीं है। अंतरराष्ट्रीय सीमा में घुसकर सेना ने क्या सटीक बमबारी की। कोई प्रमाण नहीं मांग रहा, जिन्हें चोट लगी, उन्होंने खुद प्रमाण दे दिया। अब हर व्यक्ति राष्ट्र भावना से ओत-प्रोत है। ये बड़ी उपलब्धि है। भारत आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगा। जो 70 साल में नहीं हुआ, वो कठोर निर्णय पीएम ने लिया। खून और पानी एक साथ नहीं बहेगा, ये बड़ा संदेश दिया है।
दुनिया की तीसरी महा शक्ति बनने वाला है भारत
उपराष्ट्रपति ने कहा कि पिछले दशक में भारत ने बड़ी आर्थिक उछाल लगाई। हम बड़ी कमजोर स्थिति में थे। आज भारत दुनिया की चौथी अर्थव्यवस्था बना है। हमने जापान जैसे बड़े देशों को पीछे छोड़ दिया है। भारत दुनिया की तीसरी महाशक्ति बनने वाला है। विकसित भारत का रास्ता किसान के खेत और गांव से निकलता है। पूंजी किसान के पास है। इससे अर्थव्यवस्था में बड़ा उछाल आएगा।
धनखड़ बोले- देश का भविष्य खेतों में लिखा जाएगा
धनखड़ ने कहा कि अमेरिका में किसान परिवार की आय सामान्य परिवार से ज्यादा है। देश को आगे बढ़ाने के लिए सांसद, विधायक कृषि आधारित उद्योग गांव को गोद लें। उसके विकास का संकल्प लें। किसान एंटरप्रेन्योरशिप को बढ़ावा दें। भारत का भविष्य खेतों में लिखा जाएगा।
सीएम बोले- प्रदेशभर में लगाए जाएंगे किसान मेले
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में 2002-03 से आज तक 1 लाख 32 हजार रुपए प्रति व्यक्ति आयहुई है। आने वाले समय में बिजली बिल से मुक्ति मिल जाएगी। 32 लाख किसानों को सोलर पंप देने की योजना लागू की है। यहां प्रदर्शनी के माध्यम से आधुनिक कृषि यंत्र आए हैं। फसल का उत्पादन बढ़ेगा। कृषि आधारित फूड प्रोसेसिंग कम है। इसी के मकसद से किसान मेला शुरू हुआ है। 3 दिन तक प्रदर्शनी लगेगी। किसान सब्सिडी के जरिए जो यंत्र चाहेंगे, उन्हें सरकार देगी। नरसिंहपुर में 102 हेक्टेयर में नए कृषि आधारित फूड पार्क तैयार किया जा रहा है। 1300 करोड़ से ज्यादा के उद्योग के नए संकल्प लेकर आकार लेंगे।
किसान को मिलेगा 5 रुपए में परमानेंट बिजली कनेक्शन
सरकार ने मद्य प्रदेश के किसान तो 5 रुपए में परमानेंट बिजली कनेक्शन मुहैय्या कराने का फैसला लिया है। किसानों को पटवारी के पास जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। बंटवारा, रजिस्ट्री और नामांतरण को भी ऑनलाइन कर दिया गया है। पूरे प्रदेश में किसान मेले लगाए जाएंगे। अगले कार्यक्रम के संबंध में जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा- इसके बाद सीहोर के पास 12-13 अक्टूबर को बड़ा मेला आयोजित किया जाएगा।
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उपसभापति हरिवंश ने अस्वीकृति के कारणों को बताते हुए कहा कि 14 दिन का नोटिस, जो इस तरह के प्रस्ताव को पेश करने के लिए अनिवार्य है, नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि सभापति महोदय जगदीप धनखड़ का नाम भी सही ढंग से नहीं लिखा गया था।
पिछले हफ्ते उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को पद से हटाने संबंधी प्रस्ताव के मुद्दे पर राज्यसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष में आरोप-प्रत्यारोप का जोरदार दौर चला, जिसके कारण हुए भारी हंगामे के बाद उच्च सदन की कार्यवाही शुक्रवार को दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई थी। कार्यवाही स्थगित होने से पहले धनखड़ ने विपक्ष पर उनके खिलाफ दिन-रात अभियान चलाने का आरोप लगाते हुए कहा था कि वह एक किसान के बेटे हैं और कभी ‘कमजोर’ नहीं पड़ेंगे। उन्होंने कहा था, ‘‘दिन भर सभापति के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है…..यह अभियान मेरे खिलाफ नहीं है, यह उस वर्ग के खिलाफ अभियान है जिससे मैं जुड़ा हूं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैं व्यक्तिगत रूप से इस कारण से दुखी हूं कि मुख्य विपक्षी दल ने इसे सभापति के खिलाफ अभियान के रूप में पेश किया है। उन्हें मेरे खिलाफ प्रस्ताव लाने का अधिकार है। यह उनका संवैधानिक अधिकार है लेकिन वे संवैधानिक प्रावधानों से भटक रहे हैं।’’
]]>ग्वालियर उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ 15 दिसंबर को ग्वालियर के एक दिवसीय प्रवास पर आएंगे, वे यहाँ जियो साइंस म्यूजियम का उदघाटन करेंगे। जीवाजी विश्वविद्यालय पहुँचकर जीवाजीराव सिंधिया की प्रतिमा के अनावरण कार्यक्रम में शामिल होंगे और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के आवास जयविलास पैलेस जायेंगे।
जिला प्रशासन द्वारा जारी किये गए कार्यक्रम के अनुसार उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ 15 दिसंबर को सुबह लगभग 10:55 बजे वायुसेना के विशेष विमान द्वारा एयरबेस विमानतल पर आएंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार उप राष्ट्रपति विमानतल से सड़क मार्ग द्वारा रवाना होकर 11:25 बजे महाराज बाड़ा पहुँचेंगे और जियो साइंस म्यूजियम का उदघाटन करेंगे। इसके बाद प्रात: लगभग 11:45 बजे जीवाजी विश्वविद्यालय पहुँचकर जीवाजीराव सिंधिया की प्रतिमा के अनावरण कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होंगे।
केंद्रीय मंत्री सिंधिया के आवास जयविलास पैलेस जायेंगे
प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम में शामिल होने के बाद उप राष्ट्रपति धनखड़ दोपहर एक बजे जयविलास पैलेस पहुँचेंगे। जयविलास पैलेस से दोपहर 2 बजे रवाना होकर वायुसेना के विमानतल पर पहुँचेंगे और अपरान्ह लगभग 2:30 बजे वायुसेना के विशेष विमान द्वारा नई दिल्ली के लिये रवाना होंगे।
मंत्री राकेश शुक्ला होंगे “मिनिस्टर इन वेटिंग”
उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की अगवानी व विदाई के लिये राज्य शासन की ओर से नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला को “मिनिस्टर इन वेटिंग” नामित किया गया है। मंत्री राकेश शुक्ला उप राष्ट्रपति का ग्वालियर विमानतल पर स्वागत करेंगे और उनके वापस लौटते समय विमानतल पर उन्हें विदा भी करेंगे।
दो गैलरी बनी हैं म्यूजियम के अंदर
विक्टोरिया मार्केट में 4 जून 2010 की रात्रि में भयानक आग लग गई थी। इससे इमारत का हिस्सा ढह गया था। नगर निगम ने उक्त इमारत को संवारने का काम सुदर्शन इंजीनियरिंग को दिया था। डायरेक्टर संजय मित्तल का कहना है कि दो फेज में इमारत में काम हुआ। पहले फेज में हूबहू इमारत को खड़ा करना और फिर दूसरे फेज में बिल्डिंग के अंदर एयर कंडीशनिंग और इलेक्ट्रिक आदि का काम करना किया गया।
जीएसआई ने उक्त इमारत को म्यूजियम के लिए अधिकृत लिया। इसमें 25 करोड़ की लागत से दो गैलरी को पर्यटकों के लिए तैयार किया गया। यहां पर्यटकों को भूकंप का अनुभव होगा। धरती के अंदर ज्वालामुखी कैसे फटता है। ये भी दिखाया जाएगा। यहां पर डायनासोर का अंडा सहित कई कीमती वस्तुएं देखने को मिलेंगी। डिप्टी डायरेक्टर जनरल एसएस सरकार का कहना है कि ये एशिया का पहला इस तरह का म्यूजियम होगा।
सुबह 10:55 पर आएंगे दोपहर 2 बजे होंगे रवाना
उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ 15 दिसंबर को सुबह लगभग 10.55 बजे वायुसेना के विशेष विमान द्वारा एयरबेस विमानतल पर आएंगे। इसके बाद सड़क मार्ग से 11.25 बजे बाड़े पहुंचकर म्यूजियम का उद्घाटन करेंगे। इसके बाद 11.45 बजे जेयू में जीवाजीराव सिंधिया की प्रतिमा के अनावरण करेंगे। दोपहर 1 बजे जयविलास पैलेस जाएंगे और दोपहर 2 बजे वायुसेना विमान से रवाना होंगे।” नामित किया गया है।
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