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मातृ दिवस (Mother's Day 2026) के अवसर पर रायपुर महिला केंद्रीय जेल में बंद महिला बंदियों को बड़ी सौगात मिली। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा की घोषणा के अनुरूप रविवार को प्रिजन इनमेट वीडियो कॉलिंग सिस्टम का विधिवत शुभारंभ किया गया। इस सुविधा के शुरू होने से अब महिला बंदी जेल परिसर से ही अपने स्वजन और अधिवक्ताओं से वीडियो कॉल के माध्यम से बातचीत कर सकेंगी।
पहले चरण में रायपुर महिला केंद्रीय जेल के साथ कवर्धा, जशपुर समेत सात जेलों में यह सुविधा शुरू की गई है। यह व्यवस्था जेल विभाग और BSNL के बीच हुए एमओयू के तहत लागू की गई है।
परिवार को देखकर छलक उठीं आंखें
वीडियो कॉलिंग सिस्टम के उद्घाटन के दौरान भावुक दृश्य देखने को मिले। कई महिला बंदियों की आंखें नम हो गईं, जब उन्होंने वर्षों बाद अपने परिवार के सदस्यों को स्क्रीन पर देखा और उनसे बातचीत की। जेल अधिकारियों का कहना है कि इस तकनीक से बंदियों के मानसिक तनाव को कम करने में मदद मिलेगी और वे भावनात्मक रूप से अपने परिवार से जुड़े रह सकेंगे।
कौशल विकास से आत्मनिर्भर बनने की पहल
कार्यक्रम के दौरान निश्चय योजना के अंतर्गत व्यावसायिक प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली 38 महिला बंदियों को कौशल प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। अधिकारियों ने बताया कि यह पहल रिहाई के बाद बंदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और आत्मनिर्भर बनाने में सहायक होगी।
मदर्स डे के मौके पर जेल प्रशासन ने अपनी माताओं के साथ जेल में रह रहे 14 बच्चों को विशेष उपहार भी भेंट किए। बच्चों के चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दी।
कंप्यूटर प्रशिक्षण केंद्र का शुभारंभ
निश्चय कार्यक्रम के तहत जेल में बंद युवाओं को अपराध की दुनिया से दूर कर रोजगार के योग्य बनाने के लिए कंप्यूटर प्रशिक्षण भी शुरू किया गया है। रविवार को केंद्रीय और महिला जेल रायपुर में प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले 67 बंदियों, जिनमें 38 महिलाएं और 29 पुरुष शामिल हैं, को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। इस अवसर पर केंद्रीय जेल में कंप्यूटर प्रशिक्षण केंद्र का भी उद्घाटन किया गया। यहां बंदियों को आधुनिक डिजिटल शिक्षा प्रदान की जाएगी।
बंदियों के लिए लोन मेला भी लगेगा
बंदियों के पुनर्वास को ध्यान में रखते हुए 13 मई को इंडियन ओवरसीज बैंक की ओर से जेल परिसर में लोन मेला आयोजित किया जाएगा। इसका उद्देश्य रिहा होने वाले बंदियों को स्वरोजगार के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। कार्यक्रम में डीजी जेल हिमांशु गुप्ता, जेल अधीक्षक योगेश सिंह क्षत्री, बीएसएनएल के विजय छबलानी, महिला जेल प्रभारी गरिमा पांडेय सहित जेल विभाग का स्टाफ उपस्थित रहा।
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बड़वानी की तृतीय जिला एवं सत्र न्यायालय ने महिला पटवारी के साथ दुष्कर्म और प्रताड़ना के गंभीर मामले में तत्कालीन एसडीएम (सेंधवा) और वर्तमान उज्जैन डिप्टी कलेक्टर अभय सिंह खराड़ी को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने आरोपी अफसर को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 1 लाख 1 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
फैसले के तुरंत बाद पुलिस ने आरोपी डिप्टी कलेक्टर को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया। इस मामले में एफआईआर के बाद फरार होने पर 4 मई 2024 को बड़वानी पुलिस ने खराड़ी को भोपाल से गिरफ्तार किया गया था। उस वक्त तत्कालीन उज्जैन कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने उन्हें सस्पेंड किया था। तभी से वह सस्पेंड थे। अभियोजन के अनुसार, आरोपी अभय सिंह खराड़ी वर्ष 2016 से 2024 के बीच महिला का लगातार यौन शोषण करता रहा। पीड़िता ने आरोप लगाया कि आरोपी ने अपने पद का रसूख दिखाकर 4 से 5 बार उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। दिसंबर 2023 में आरोपी ने पीड़िता के घर में घुसकर उसके साथ मारपीट की और जान से मारने की धमकी भी दी थी।
ब्लैकमेलिंग और सिंदूर भरकर तस्वीरें लीं
न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों के अनुसार, आरोपी अफसर महिला को मानसिक रूप से भी प्रताड़ित करता था। वह महिला के आने वाले रिश्तों को तुड़वा देता था और फोन पर तेजाब डालने और अपहरण करने की धमकी देता था। पीड़िता ने बताया कि आरोपी ने उसे बेहोश कर उसकी मांग में सिंदूर भर फोटो खींची थी, ताकि समाज में उसे अपनी पत्नी बताकर बदनाम और ब्लैकमेल कर सके।
पत्नी को जान से मारने के आरोप भी लग चुके
31 अक्तूबर 2017 में खराड़ी पर पत्नी को बेहोशी का इंजेक्शन देकर जान से मारने के आरोप भी लगे थे। खराड़ी उस वक्त झाबुआ डिप्टी कलेक्टर थे और पत्नी सुनीता खराड़ी धार जिले के दीनदयालपुरम में रहती थीं। कोतवाली पुलिस ने खराड़ी को बेहोशी की हालत में मिलने पर इलाज करवाया था। सुनीता खराड़ी ने पुलिस को बताया उनके पति ने गुंडे बुलाकर उनके साथ मारपीट की और उसको बेहोशी का इंजेक्शन लगाया। घटना के दिन रात 3 बजे उनके पति ने उनकी दूसरी पत्नी के तीन भाइयों के साथ दो और लोगों को बुलाया। दूसरी पत्नी का मुंह दबा दिया और अपने साथियों के साथ मिलकर बेहोशी का इंजेक्शन लगा दिया, जिसके बाद जान से मारने की कोशिश की। कोतवाली पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था।
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यूपी के अयोध्या में जिला कारागार से दो बंदी फरार हो गए। दोनों बंदियों ने बैरक मे लगी ग्रिल काट कर बाहर निकले, उसके बाद बांस के सहारे जिला कारागार के पीछे जहां कैमरे का सर्विलांस नहीं था उस क्षेत्र से चारदीवारी फांद कर भाग गए। सूचना पर जिला पुलिस ने तीन टीमों को बनाकर उनकी गिरफ्तारी के प्रयास शुरू कर दिए। इसमें अमेठी निवासी गोलू अग्रहरि उर्फ सूरज अग्रहरी पुत्र साधु राम निवासी, मुसाफिरखाना और सुल्तानपुर निवासी शेर अली नाम के बंदी शामिल हैं। दोनों बंदियों के फरार होने की जानकारी पर जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया।
एसपी सिटी चक्रपाणि त्रिपाठी ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली उन्होंने मौका का मुआयना किया। उन लोगों ने जेल के पिछले हिस्से जिस तरफ हरियाली ज्यादा है वहां बांस के ऊंचे पेड़ों के सहारे दीवार फान गए। हमने उनकी गिरफ्तारी के लिए तीन टीमों को लगा दिया है जल्द सफलता मिलेगी। इनमें एक बंदी हत्या के प्रयास के मामले में व दूसरा बलात्कार के आरोप में जेल में निरुद्ध थे।
जेल अधीक्षक समेत 7 सस्पेंड
अयोध्या जिला कारागार अयोध्या से दो बंदियों के फरार होने पर विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। डीजी जेल पीसी मीणा ने ऐक्शन लेते हुए वरिष्ठ जेल अधीक्षक यूसी मिश्रा को सस्पेंड कर दिया है। इसके साथ ही जेलर जेके यादव,डिप्टी जेलर मयंक त्रिपाठी को भी निलंबित कर दिया है। यही नहीं ड्यूटी पर तैनाती के दौरान लापरवाही पर हेड जेल वॉर्डर व 3 जेल वॉर्डर को भी सस्पेंड कर दिया है। उधर मामले की जांच के लिए डीआईजी जेल ए के मैत्रेय अयोध्या पहुंच गए हैं । कुछ देर पहले ही जिलाधिकारी निखिल टीकाराम एवं एसएसपी डॉक्टर गौरव ग्रोवर भी जेल पहुंच गए।
जिला जेल से दो बंदियों के फरार होने के मामले में जांच करने पहुंचे डीआईजी जेल मैत्रीए ने कहा कि दोनों बंदी विशेष चार नंबर बैरक में बंद थे। रोशनदान की ईंट तोड़कर दोनों बाहर निकले थे। मौके से 25 फीट का बांस, 30 फुट की सरिया व कंबल बरामद हुआ है। कंबल की रस्सी बनाकर बाउंड्री वाल कूदे थे दोनों।
]]>जिले में पुलिस लगातार नशे के अवैध कारोबार और तस्करी पर शिंकजा कस रही है. इसी कड़ी में वाड्रफनगर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है. यूपी से आ रही लग्जरी कार की चेकिंग के दौरान प्रतिबंधित कफ सिरप और कैश बरामद किया गया है. 3 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया है.
जानकारी के मुताबिक, पुलिस को सूचना मिली की यूपी के बनारस की ओर से एक लग्जरी इनोवा कार (UP 70 ED 7121) में प्रतिबंधित कफ सिरप परिवहन किया जा रहा है. जिसके बाद नाकेबंदी कर कार को रोका गया, चेकिंग के दौरान 5 कार्टून में 495 शीशी प्रतिबंधित कफ सिरप (मात्रा 49.5 लीटर) मिला. वहीं 73,755 नगद कैश भी बरामद किया गया.
पुलिस ने तीन युवकों पर कार्रवाई करते हुए एन.डी.पी.एस. एक्ट की धारा 21(ख) के तहत मामला दर्ज किया. सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है.
गिरफ्तार आरोपी — नागेश्वर यादव, अतुल यादव, और सुशीत उर्फ पिंटू यादव. सभी सरगुजा के निवासी हैं.
]]>भोपाल
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर जेल विभाग को प्रदेश की जेलों के पात्र दंडित बंदियों की सजा में लगभग 60 दिन की छूट देने के निर्देश दिए हैं। सजा में दी गई इस छूट से विभिन्न जेलों में बंद 21 हजार बंदियों में से लगभग 14 हजार बंदी लाभान्वित होंगे। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार की इस समय पूर्व रिहाई नीति में आतंकवादी गतिविधि, लैंगिक अपराध (पास्को, बलात्कार), मादक पदार्थ और दो से अधिक हत्या जैसे गंभीर अपराध के दोषी बंदी पात्र नहीं होते हैं, उनकी सजा यथावत रहेगी।
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मलेशिया के टेरेंगानु राज्य में जुमे की नमाज न पढ़ने वाले मुस्लिम पुरुषों को दो साल तक की जेल हो सकती है। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार ने शरिया कानून को सख्ती से लागू करने की चेतावनी दी है। बिना किसी उचित कारण के शुक्रवार की नमाज छोड़ने पर दो साल की कैद की सजा हो सकती है।
जुमे की नमाज न पढ़ने पर सजा
रिपोर्ट के मुताबिक, टेरेंगानु में पैन-मलेशियाई इस्लामिक पार्टी (पीएएस) की सरकार है। इसने घोषणा की कि पहली बार जुमे की नमाज न पढ़ने वाला व्यक्ति 3,000 रिंगिट (लगभग 710 अमेरिकी डॉलर) तक के जुर्माने, जेल की सजा, या दोनों का सामना कर सकता है। यह सजा तब लागू होगी, जब कोई बिना वैध कारण के नमाज में शामिल न हो।
पहले तीन बार चूकने पर ही सजा
राज्य की कार्यकारी परिषद के सदस्य मुहम्मद खलील अब्दुल हादी ने बेरिटा हरियन अखबार को बताया कि शुक्रवार की नमाज न केवल एक धार्मिक प्रतीक है, बल्कि मुसलमानों के लिए आज्ञाकारिता का प्रतीक भी है। पहले, केवल वे लोग जो लगातार तीन शुक्रवार को नमाज छोड़ते थे, उन्हें सजा दी जाती थी।
मलेशियाई वकील अजीरा अजीज ने तर्क दिया कि यह कुरान के सिद्धांत 'धर्म में कोई ज़बरदस्ती नहीं' के खिलाफ है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि जुमे की नमाज अनिवार्य है, लेकिन इसे अपराध बनाना जरूरी नहीं। जागरूकता कार्यक्रम ही पर्याप्त हैं।
हम तालिबान बन जाएंगे
एससीएमपी के अनुसार, अहमद अजहर ने कहा कि हमें सभी मलेशियाई लोगों की चिंताओं को आवाज़ देनी होगी, वरना हम तालिबान बन जाएंगे। कुछ लोगों का मानना है कि कानूनी दबाव सच्ची धार्मिकता को कमजोर करता है। एक आलोचक ने कहा कि धार्मिकता दिल से आनी चाहिए, डर से नहीं। वहीं, केनी टैन ने लिखा कि मुसलमानों को यह मामला संभालने दें। हमें अनावश्यक टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।
टेरेंगानु में कोई विपक्ष नहीं
रिपोर्ट के अनुसार, टेरेंगानु की 12 लाख की आबादी में अधिकतर मलय मुस्लिम हैं। यह मलेशिया का एकमात्र राज्य है, जहां विधानसभा में कोई विपक्ष नहीं है। 2022 के चुनाव में पीएएस ने सभी 32 सीटें जीतीं। उल्लेखनीय है कि इस्लाम मलेशिया का आधिकारिक धर्म है, लेकिन देश का समाज धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों पर आधारित है।
]]>भारत सरकार ने लोकसभा में बड़ा खुलासा करते हुए बताया है कि इस समय दुनियाभर की जेलों में कुल 10,574 भारतीय नागरिक बंद हैं। इनमें से कई दोषी करार दिए जा चुके हैं, कुछ मुकदमे का इंतजार कर रहे हैं और कुछ ऐसे हैं जिन्होंने अपनी सजा पूरी कर ली है लेकिन उन्हें अब तक रिहा नहीं किया गया है। विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने यह जानकारी संसद में एक लिखित उत्तर के जरिए दी। उनके मुताबिक, कुछ भारतीय नागरिकों को विदेशों में फांसी की सजा भी सुनाई गई है।
किन देशों में सबसे ज्यादा भारतीय कैदी?
विदेश मंत्रालय के अनुसार, सबसे अधिक भारतीय नागरिक संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की जेलों में बंद हैं- कुल 2,773। इसके बाद सऊदी अरब में 2,379, क़तर में 795, नेपाल में 1,357 और कुवैत में 342 भारतीय नागरिक जेल में हैं।
दुनिया के अलग-अलग जेलों में फिलहाल 10,574 भारतीय नागरिक कैद हैं। इनमें से 43 लोगों को मौत की सजा सुनाई गई है। संसद में शुक्रवार को यह जानकारी दी गई है।
विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में सबसे अधिक संख्या में भारतीय कैदी हैं, जहां वर्तमान में 2,773 भारतीय नागरिक सलाखों के पीछे हैं।
किन देशों में कितने कैदी हैं?
इसके बाद सऊदी अरब में 2,379 और नेपाल में 1,357 कैदी हैं। जिन अन्य देशों में भारतीय कैदियों की संख्या अच्छी-खासी है, उनमें कतर में 795, मलेशिया में 380, कुवैत में 342, यूनाइटेड किंगडम में 323, बहरीन में 261, पाकिस्तान में 246, चीन में 183 और अन्य देश शामिल हैं।
कई देशों में केवल एक-एक भारतीय कैदी है, जिनमें अंगोला, बेल्जियम, कनाडा, चिली, मिस्र, इराक, जमैका, मॉरीशस, सेनेगल, सेशेल्स, दक्षिण अफ्रीका, सूडान, ताजिकिस्तान और यमन शामिल हैं।
सऊदी में हैं मौत की सजा पाने वाले सबसे ज्यादा कैदी
बात करें मृत्यु दंड की सजा भुगत रहे कैदियों की तो सबसे ज्यादा 21 भारतीय संयुक्त अरब अमीरात में हैं। उसके बाद सऊदी अरब (7), चीन (4), इंडोनेशिया (3) और कुवैत (2) हैं। अमेरिका, मलेशिया, ओमान, पाकिस्तान, कतर और यमन में एक-एक भारतीय को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई है।
किन देशों में भारतीयों को दी गई है फांसी की सजा?
विदेश मंत्रालय ने बताया कि दुनिया भर के 11 देशों में 43 भारतीय नागरिकों को फांसी की सजा सुनाई गई है। इनमें सबसे ज्यादा 21 भारतीय संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में हैं, जबकि सऊदी अरब में 7, चीन में 4, और इंडोनेशिया में 3 भारतीयों को यह सजा मिली है। इसके अलावा, कुवैत में 2, और मलेशिया, ओमान, पाकिस्तान, कतर, अमेरिका, और यमन में एक-एक भारतीय नागरिक फांसी की सजा का सामना कर रहा है। इनमें से कई मामले अभी कोर्ट में चल रहे हैं, और भारतीय दूतावास इन कैदियों को कानूनी सहायता देने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं। मंत्रालय ने यह भी खुलासा किया कि 2020 से 2024 के बीच UAE में किसी भी भारतीय कैदी को फांसी नहीं दी गई, लेकिन इस साल फरवरी 2025 में तीन भारतीयों को फांसी दी गई, जिनमें उत्तर प्रदेश की एक नर्स और केरल का एक व्यक्ति शामिल था।
कौन हैं ये कैदी?
इन कैदियों में अपराध के दोषी लोग, मुकदमे का इंतजार कर रहे लोग और ऐसे लोग भी हैं जिन्होंने अपनी सजा पूरी कर ली है लेकिन किसी कारणवश उन्हें रिहा नहीं किया गया है। सरकार ने यह भी माना है कि कुछ कैदी ऐसे भी हैं जिनके मामले में विदेशों की कानूनी प्रक्रिया लंबी चलती है या उनका पासपोर्ट और दस्तावेज अधूरे होते हैं।
क्या कर रही है सरकार?
भारत सरकार ने बताया कि विदेशों में बंद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, सम्मान और रिहाई उसकी प्राथमिकता में शामिल है। जैसे ही किसी भारतीय नागरिक की गिरफ्तारी की सूचना विदेशों में भारतीय दूतावास को मिलती है, मिशन संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर तत्काल राजनयिक (कांसुलर) पहुंच की मांग करता है।
विदेशी जेलों में बंद भारतीयों की मदद के लिए क्या करता है दूतावास?
विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने बताया कि विदेशी जेलों में बंद भारतीय नागरिकों की मदद के लिए भारतीय दूतावास कई महत्वपूर्ण कदम उठाते हैं। सबसे पहले, वे कांसुलर एक्सेस के जरिए गिरफ्तार भारतीय से मिलते हैं, उनकी पहचान की पुष्टि करते हैं, और उनके केस की स्थिति का पता लगाते हैं। इसके अलावा, जरूरत पड़ने पर दूतावास स्थानीय वकीलों के जरिए कानूनी सहायता उपलब्ध कराते हैं। भारतीय सामुदायिक कल्याण कोष (ICWF) का इस्तेमाल करके कैदियों को कानूनी मदद, यात्रा दस्तावेज, या वापसी के लिए टिकट जैसी आर्थिक सहायता दी जाती है। दूतावास सजा पूरी करने के बाद प्रत्यर्पण की प्रक्रिया में भी मदद करते हैं ताकि कैदी भारत लौट सकें। साथ ही, वे विदेशी सरकारों से आम माफी (Amnesty) या सजा में छूट की अपील करते हैं। भारत सरकार ने कई देशों के साथ कैदी प्रत्यर्पण संधियां की हैं, जिनके तहत दोषी भारतीय नागरिक अपनी सजा भारत में काट सकते हैं।
तमिलनाडु के मछुआरों की रिहाई का मामला
लोकसभा में पूछे गए सवाल के एक हिस्से में यह जानकारी भी सामने आई कि 15 जुलाई 2025 तक 28 भारतीय मछुआरे श्रीलंका की हिरासत में थे, जिनमें से 27 तमिलनाडु के हैं और 1 पुडुचेरी से। भारत सरकार ने श्रीलंका के साथ कई दौर की बातचीत में मछुआरों की वापसी का मुद्दा उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 अप्रैल 2025 को श्रीलंकाई राष्ट्रपति से हुई बैठक में भी इस मसले को मानवीय आधार पर हल करने की अपील की थी। इसके अलावा, भारत और श्रीलंका के बीच नियमित फिशरीज ज्वाइंट वर्किंग ग्रुप (JWG) बैठकों में भी इस मुद्दे को उठाया जाता है। आखिरी बैठक 29 अक्टूबर 2024 को हुई थी। दूतावास के अधिकारी श्रीलंकाई जेलों में जाकर भारतीय मछुआरों की स्थिति की जानकारी लेते हैं और उन्हें कानूनी सहायता उपलब्ध कराते हैं।
बिना शुल्क मिलती है मदद
जैसे ही किसी भारतीय नागरिक के विदेश में गिरफ्तारी की सूचना मिलती है, भारतीय दूतावास तुरंत स्थानीय विदेश मंत्रालय और संबंधित एजेंसियों से संपर्क करके कांसुलर सहायता मांगता है। इसका मकसद होता है गिरफ्तार व्यक्ति से मिलना, उनके ऊपर लगे आरोपों और हालात को समझना, जरूरत पड़ने पर वकील की व्यवस्था करना, और अगर व्यक्ति सहमति दे तो उनके परिवार को सूचना देना। यह सारी सहायता बिना किसी शुल्क के दी जाती है। भारत सरकार ने साफ किया है कि विदेशों में भारतीय मिशन और दूतावास इन सेवाओं के लिए किसी भी भारतीय नागरिक से कोई शुल्क नहीं लेते। जरूरतमंद भारतीयों को भारतीय समुदाय कल्याण कोष (ICWF) के जरिए आर्थिक और अन्य सहायता प्रदान की जाती है।
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महिला बंदियों ने रंगों और शब्दों के ज़रिये अपनी ज़िंदगी को कागज़ पर उकेरा
तिनका-तिनका उम्मीद: जेल की दीवारों के भीतर उगती नई ज़िंदगी की किरणें
भोपाल
कभी टूटी हुई उम्मीदों के सहारे जी रही केन्द्रीय जेल भोपाल की महिलाएं अब सपनों को नया आकार दे रही हैं। केंद्रीय जेल के महिला वार्ड में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में जब इन महिला बंदियों ने रंगों और शब्दों के ज़रिये अपनी ज़िंदगी को कागज़ पर उकेरा, तो वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें गर्व से नम हो गई।
यह कार्यशाला मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग और तिनका-तिनका फाउंडेशन के सहयोग से “टीवी और समाचार पत्रों के माध्यम से सुधार और व्यक्तित्व विकास” विषय पर आयोजित की गई थी। कार्यशाला में महिला बंदियों ने न सिर्फ संवाद के गुर सीखे बल्कि आत्मविश्लेषण, सुधार और एक बेहतर भविष्य की ओर अग्रसर होने का संकल्प भी लिया।
बहुत कुछ सीखा मैंने यहाँ
56 वर्षीय पुतलीबाई, जो कभी अनपढ़ थीं, आज अख़बार पढ़ती हैं, टीवी समाचार देखती हैं और चित्र बनाना जानती हैं। भावुक होकर उन्होंने कहा,“मेरा जीवन बहुत कठिन था। लेकिन यहां मैंने पढ़ना, चित्र बनाना और अपने भीतर छिपी शक्ति को पहचानना सीखा है। परिवार में औरत की ज़िंदगी कहीं ज़्यादा कठिन होती है। यहां मुझे आज़ादी महसूस होती है।”
“मैं फैशन डिज़ाइनर बनना चाहती हूं”
कल्पना, जो किन्नर समुदाय से हैं, ने कहा “बाहर हमारे साथ भेदभाव होता है, यहां नहीं। यहां पढ़ाई की, कुछ नया करने की प्रेरणा मिली। अब मैं बाहर जाकर फैशन डिज़ाइनर बनना चाहती हूं।”
“खेतों में मेहनत करूंगी, बच्चों को पालूंगी”
सुनीता बाई ने अपने भीतर के पश्चाताप को शब्द दिए “मुझसे गलती हुई, उसका पछतावा है। यहां रहकर मैंने बागवानी सीखी है। अब बाहर जाकर खेती करूंगी और अपने बच्चों का पालन-पोषण करूंगी।”
कला और शब्दों से उभरे भाव
कार्यशाला में महिलाओं ने “जेल में सपना”, “जेल में उत्सव”, “जेल में रेडियो” जैसे विषयों पर चित्र बनाकर अपने मन की स्थिति को व्यक्त किया।
हर बंद दरवाज़े के पीछे खुलती है एक उम्मीद की खिड़की
कार्यक्रम की सूत्रधार और तिनका-तिनका फाउंडेशन की अध्यक्ष सुवर्तिका नंदा ने कहानियों और संवाद के ज़रिए महिलाओं को संदेश दिया कि “हर परिस्थिति में डटे रहना ही असली नारी शक्ति है। सीखते रहना, आगे बढ़ते रहना ही जीत है।”
सतत कौशल विकास की प्रतिबद्धता
राज्य महिला आयोग के सदस्य सचिव सुरेश तोमर ने बताया कि महिला बंदियों के लिए आयोग द्वारा कौशल विकास के कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं और आगे भी प्रदेश में इन्हें विस्तारित किया जाएगा। कार्यशाला में डीआईजी जयपटेल, जेल अधीक्षक राकेश भांगरे, और आनंद विभाग के संचालक प्रवीण गंगराड़े भी उपस्थित रहे। यह आयोजन सिर्फ एक कार्यशाला नहीं, बल्कि उन ज़िंदगियों की कहानी है जो तिनका-तिनका जोड़कर खुद को फिर से गढ़ रही हैं। जहां दीवारें हैं, वहीं नए रास्ते भी हैं। जहां सज़ा है, वहीं पुनर्जन्म भी।
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उत्तर प्रदेश में डिजिटल अरेस्ट मामले में पहली बार सजा सुनाई गई. राजधानी लखनऊ में महिला डॉक्टर से 85 लाख ठगने वाले एक ठग को कोर्ट द्वारा 7 साल की सजा दी गई. आपको बता दें कि खुद को CBI अधिकारी बताकर केजीएमयू की वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सौम्या गुप्ता से 85 लाख रुपये ठगने वाले साइबर अपराधी देवाशीष को कोर्ट ने दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है. यह ऐतिहासिक फैसला स्पेशल सीजेएम कस्टम अमित कुमार ने सुनाया.
मामले की विवेचना साइबर थाना लखनऊ ने की थी और इंस्पेक्टर ब्रजेश कुमार यादव द्वारा कोर्ट में ठोस साक्ष्य पेश किए गए. साइबर क्राइम के इतिहास में यह देश का पहला मामला है जिसमें डिजिटल अरेस्ट के आरोप में 14 महीने के भीतर कोर्ट से सजा सुनाई गई है.
जानिए पूरा मामला
अभियोजन अधिकारी मषिन्द्र ने बताया कि 15 अप्रैल 2024 को डॉ. सौम्या गुप्ता केजीएमयू में अपनी ड्यूटी कर रही थीं. तभी आरोपी देवाशीष ने उन्हें कॉल कर खुद को कस्टम विभाग का अधिकारी बताया और कहा कि वह दिल्ली के इंदिरा गांधी एयरपोर्ट से बोल रहा है.
उसने दावा किया कि डॉ. गुप्ता के नाम से एक कार्गो बुक है जिसमें जाली पासपोर्ट, एटीएम कार्ड और 140 ग्राम एमडीएम मिला है. इसके बाद देवाशीष ने कॉल को ट्रांसफर कर खुद को फर्जी CBI अधिकारी बताने वाले व्यक्ति से बात करवाई, जिसने डॉ. गुप्ता को धमकाया कि उन्हें सात साल की जेल हो सकती है. डर के चलते डॉक्टर ने अपनी पर्सनल जानकारी जैसे- बैंक खाता, पैन नंबर और संपत्ति विवरण साझा कर दिया.
आरोपियों ने डर और धमकी के माध्यम से डॉक्टर को 10 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट में रखा और अलग-अलग चार बैंक खातों में कुल 85 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए. जांच-पड़ताल के क्रम में आरोपी की पहचान देवाशीष के रूप में हुई जिसे गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया. मजबूत साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने दोषी करार देते हुए उसे सात साल की सजा और जुर्माना भी लगाया. देवाशीष आजमगढ़ के अजमतगढ़ क्षेत्र के मसौना गांव का रहने वाला है.
]]>उत्तर प्रदेश में डिजिटल अरेस्ट मामले में पहली बार सजा सुनाई गई. राजधानी लखनऊ में महिला डॉक्टर से 85 लाख ठगने वाले एक ठग को कोर्ट द्वारा 7 साल की सजा दी गई. आपको बता दें कि खुद को CBI अधिकारी बताकर केजीएमयू की वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सौम्या गुप्ता से 85 लाख रुपये ठगने वाले साइबर अपराधी देवाशीष को कोर्ट ने दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है. यह ऐतिहासिक फैसला स्पेशल सीजेएम कस्टम अमित कुमार ने सुनाया.
मामले की विवेचना साइबर थाना लखनऊ ने की थी और इंस्पेक्टर ब्रजेश कुमार यादव द्वारा कोर्ट में ठोस साक्ष्य पेश किए गए. साइबर क्राइम के इतिहास में यह देश का पहला मामला है जिसमें डिजिटल अरेस्ट के आरोप में 14 महीने के भीतर कोर्ट से सजा सुनाई गई है.
जानिए पूरा मामला
अभियोजन अधिकारी मषिन्द्र ने बताया कि 15 अप्रैल 2024 को डॉ. सौम्या गुप्ता केजीएमयू में अपनी ड्यूटी कर रही थीं. तभी आरोपी देवाशीष ने उन्हें कॉल कर खुद को कस्टम विभाग का अधिकारी बताया और कहा कि वह दिल्ली के इंदिरा गांधी एयरपोर्ट से बोल रहा है.
उसने दावा किया कि डॉ. गुप्ता के नाम से एक कार्गो बुक है जिसमें जाली पासपोर्ट, एटीएम कार्ड और 140 ग्राम एमडीएम मिला है. इसके बाद देवाशीष ने कॉल को ट्रांसफर कर खुद को फर्जी CBI अधिकारी बताने वाले व्यक्ति से बात करवाई, जिसने डॉ. गुप्ता को धमकाया कि उन्हें सात साल की जेल हो सकती है. डर के चलते डॉक्टर ने अपनी पर्सनल जानकारी जैसे- बैंक खाता, पैन नंबर और संपत्ति विवरण साझा कर दिया.
आरोपियों ने डर और धमकी के माध्यम से डॉक्टर को 10 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट में रखा और अलग-अलग चार बैंक खातों में कुल 85 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए. जांच-पड़ताल के क्रम में आरोपी की पहचान देवाशीष के रूप में हुई जिसे गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया. मजबूत साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने दोषी करार देते हुए उसे सात साल की सजा और जुर्माना भी लगाया. देवाशीष आजमगढ़ के अजमतगढ़ क्षेत्र के मसौना गांव का रहने वाला है.
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