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कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने शनिवार को कहा कि घरेलू स्तर पर धन प्रेषण (रेमिटेंस) में लगने वाला समय और लागत कम होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे उत्तर प्रदेश सहित कई पूर्वी और उत्तरी राज्यों की अर्थव्यवस्थाओं को मदद मिलती है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर पोस्ट किया, ''भारत को 2025 में विदेशों से पहले लगभग 135 अरब डॉलर की राशि (रेमिटेंस) प्राप्त हुई। यह देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग 3.4 प्रतिशत है। देश के भुगतान संतुलन के प्रबंधन में विदेश से भारतीय नागरिकों द्वारा भेजे जाने वाले पैसे की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका रही है और केरल जैसे कई राज्यों की अर्थव्यवस्था के लिए ये निर्णायक रहे हैं।
इन धन प्रेषण (रेमिटेंस) पर व्यापक अध्ययन भी हुआ है।'' उन्होंने कहा कि इसके विपरीत, देश के भीतर एक राज्य से दूसरे राज्य में प्रवासी श्रमिकों द्वारा भेजी जाने वाली राशि की मात्रा के बारे में अपेक्षाकृत कम जानकारी उपलब्ध है। रमेश ने कहा, ''केरल के संबंध में कुछ अनुमान लगाए गए हैं, जिनके अनुसार एक अध्ययन बताता है कि केरल के भीतर से होने वाले घरेलू धन प्रेषण, केरल को विदेशों से प्राप्त प्रेषणों का लगभग एक-तिहाई हो सकते हैं।'' रमेश ने इस बात का उल्लेख किया, ''एमस्टर्डम विश्वविद्यालय के शिक्षाविद रॉबिन वैन जेन ड्यूजिन ने अत्यंत उपयोगी लेख लिखा है।
उनके अनुसार, 2024 में पूरे भारत में घरेलू धन प्रेषण का अनुमान 36 से 48 अरब डॉलर के बीच है। यह भारत को विदेशों से प्राप्त प्रेषण का लगभग एक-तिहाई से अधिक है।'' रमेश ने कहा, ''दुर्भाग्यवश, घरेलू धन प्रेषण को कम सुर्खियां मिलती हैं, वे कम उत्साह पैदा करते हैं और उन्हें विदेशों से आने वाले धन प्रेषण की तुलना में कम नीतिगत ध्यान प्राप्त होता है। यह स्थिति बदलनी चाहिए, क्योंकि घरेलू प्रेषण की मात्रा भी महत्वपूर्ण है और उनका सामाजिक-आर्थिक प्रभाव भी व्यापक है।'' उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इन प्रेषण में लगने वाले समय और लागत को कम किया जाना चाहिए। रमेश का यह भी कहना है कि घरेलू प्रेषण पूर्वी राज्यों तथा उत्तर प्रदेश जैसे कुछ उत्तरी राज्यों की अर्थव्यवस्था को महत्वपूर्ण रूप से सुदृढ़ कर रहे हैं।
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जयराम रमेश ने लिखा, ‘विपक्षी INDI अलायंस से जुड़े सभी दलों के पास राज्यसभा के चेयरमैन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। वह राज्यसभा की कार्यवाही का संचालन पक्षपात के साथ कर रहे थे। INDI अलायंस के दलों के लिए यह एक कठिन फैसला है, लेकिन संसदीय लोकतंत्र के हित में है। इसलिए हमें ऐसा कदम उठाना पड़ा है। अविश्वास प्रस्ताव को हमने राज्यसभा के जनरल सेक्रेटरी को सौंप दिया है।’ हालांकि सूत्रों का कहना है कि इस प्रस्ताव में विपक्षी दलों के किसी भी नेता सदन के हस्ताक्षर नहीं हैं। यहां तक कि सोनिया गांधी के साइन भी इस प्रस्ताव में नहीं हैं। कहा जा रहा है कि कुल 60 सांसदों ने इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं।
]]>रमेश ने कहा, ‘कन्याकुमारी से कश्मीर तक निकाली गई ‘भारत जोड़ो यात्रा’ की शुरुआत के आज दो साल पूरे हो गए। राहुल गांधी के नेतृत्व में 200 से अधिक ‘भारत यात्रियों’ ने 145 दिनों की अवधि में 12 राज्यों और दो केंद्र-शासित प्रदेशों से गुजरते हुए 4,000 किलोमीटर लंबी यात्रा पूरी की, जिनमें अधिकांश पैदल यात्री शामिल थे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इस यात्रा से अभूतपूर्व संपर्क और सामूहिकता की भावना पैदा हुई और यह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के लिए एक ‘बड़ी बूस्टर खुराक’ थी। इसने हमारे देश की राजनीति में भी बदलाव की शुरुआत की।’’ रमेश ने कहा कि ‘भारत जोड़ो यात्रा’ की सफलता ने जनवरी-मार्च 2024 के दौरान मणिपुर से मुंबई तक ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के लिए प्रोत्साहित किया।
राहुल ने सात सितंबर 2022 को कन्याकुमारी से ‘भारत जोड़ो यात्रा’ शुरू की थी। उन्होंने 30 जनवरी 2023 को श्रीनगर में 145 दिन लंबी इस यात्रा का समापन किया था।
यात्रा के दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल ने 12 सार्वजनिक बैठकों, 100 से अधिक नुक्कड़ सभाओं और 13 प्रेस वार्ताओं को संबोधित किया। 4,000 किलोमीटर लंबी यात्रा के दौरान वह समर्थकों से लेकर विरोधियों तक का ध्यान खींचने में कामयाब रहे थे।
‘भारत जोड़ो यात्रा’ में अलग-अलग क्षेत्र की हस्तियों ने हिस्सा लिया, जिनमें कमल हासन, पूजा भट्ट, रिया सेन, स्वरा भास्कर, रश्मि देसाई, आकांक्षा पुरी और अमोल पालेकर जैसे फिल्म एवं टीवी कलाकार शामिल थे।
पूर्व सेना प्रमुख जनरल (सेवानिवृत्त) दीपक कपूर, पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल (सेवानिवृत्त) एल रामदास, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन और पूर्व वित्त सचिव अरविंद मायाराम ने भी इस यात्रा में हिस्सा लिया था।
नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के नेता फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की महबूबा मुफ्ती, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के आदित्य ठाकरे, प्रियंका चतुर्वेदी व संजय राउत तथा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरदचंद्र पवार (राकांपा-एसपी) की सुप्रिया सुले जैसे विपक्षी नेता भी अलग-अलग पड़ाव पर इस यात्रा से जुड़े थे।
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पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने सरकार से आग्रह किया कि किसान कर्ज माफी की आवश्यकता का आकलन करने, परिमाण का आकलन करने और कृषि ऋण माफी के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए एक स्थायी आयोग की स्थापना की जानी चहिए।
रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘केंद्र सरकार की तमाम विफलताओं में से कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय की क्षमताहीनता और दुर्भावना से भरा व्यवहार सबसे अधिक हानिकारक है।’ उन्होंने दावा किया, ‘जहां संप्रग (संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन) ने गेहूं की एमएसपी 119 प्रतिशत और धान की एमएसपी 134 प्रतिशत बढ़ाई थी, वहीं मोदी सरकार ने इसे क्रमशः 47 प्रतिशत और 50 प्रतिशत बढ़ाया है। यह महंगाई और कृषि इनपुट की बढ़ती कीमतों के हिसाब से बिल्कुल भी पर्याप्त नहीं है।’
रमेश ने कहा, ‘किसानों का कर्ज बहुत बढ़ गया है। एनएसएसओ के अनुसार, 2013 के बाद से बकाया ऋण में 58 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। आधे से ज्यादा किसान कर्ज में डूबे हैं। 2014 के बाद से हमने एक लाख से अधिक किसानों को आत्महत्या करते देखा है।’
कांग्रेस नेता ने इस बात पर जोर दिया कि कृषि कल्याण के लिए केंद्र सरकार की तरफ से आगामी बजट में तीन मुख्य घोषणाएं किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने केंद्र से मांग की, “स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप सी2+50 प्रतिशत के फॉर्मूले के अनुरूप एमएसपी के अंतर्गत आने वाली 22 फसलों के लिए एमएसपी बढ़ाएं, एमएसपी को कानूनी दर्जा दें और इसे मजबूती से लागू करने के लिए एक प्रणाली स्थापित करें।’
रमेश ने यह भी कहा कि किसान कर्ज माफी की आवश्यकता का आकलन करने, परिमाण का आकलन करने और कृषि ऋण माफी के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए एक स्थायी आयोग की स्थापना की जानी चहिए।
रमेश के मुताबिक, 2008 में मनमोहन सिंह के नेतृत्व में संप्रग ने 72,000 करोड़ रुपये का कृषि ऋण माफ किया था, जिससे बड़ी संख्या में किसानों को लाभ हुआ था।
उन्होंने दावा किया, ‘नॉन-बायोलॉजिकल प्रधानमंत्री की सरकार ने पूंजीपतियों के 16 लाख करोड़ रुपये के बैंक ऋण माफ किए हैं। लेकिन दूसरी तरफ इस साल आरबीआई से रिकॉर्ड 2.11 लाख करोड़ का लाभांश मिलने के बावजूद उसने किसानों का एक रुपये का भी कृषि ऋण माफ नहीं किया।’
कांग्रेस नेता ने सवाल किया, ‘चार जून को मिली व्यक्तिगत, राजनीतिक और नैतिक हार के घावों से अभी भी उबर रहे स्वयंभू नॉन-बायोलॉजिकल प्रधानमंत्री क्या कृषि कल्याण के लिए ये महत्वपूर्ण कदम उठाएंगे?’
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आरोप लगाया गया कि जयराम रमेश ने सर्वदलीय बैठक के बीच ही सारी जानकारियां सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर कर दी। जिसके बाद भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने कांग्रेस नेता पर जमकर निशाना साधा। इसके साथ ही उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस को इन बैठकों के लिए ज्यादा अनुभवी लोगों को भेजने पर विचार करना चाहिए।
अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि इन सभी पार्टियों की बैठकों में एक निश्चित शिष्टाचार और प्रोटोकॉल होता है। विचारों का स्वतंत्र और स्पष्ट आदान-प्रदान होता है और उसके बाद मीडिया ब्रीफिंग होती है। लेकिन, जयराम रमेश की टाइमलाइन पर नज़र डालें तो ऐसा लगता है कि वे कार्यवाही को लाइव पोस्ट कर रहे थे। अगली बार, कांग्रेस को इन बैठकों के लिए ज़्यादा अनुभवी लोगों को भेजने पर विचार करना चाहिए।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने बड़ा दावा करते हुए कहा, ''रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में आज हुई सर्वदलीय बैठक में जदयू ने बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग की। वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग की। हैरानी की बात यह है कि टीडीपी नेता इस मामले पर चुप रहे।''एक अन्य पोस्ट में उन्होंने लिखा, "राजनीतिक परिदृश्य किस तरह बदल गया है। सर्वदलीय बैठक में बीजू जनता दल के नेता ने रक्षा मंत्री (राजनाथ सिंह) और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा को याद दिलाया कि भाजपा ने 2014 के विधानसभा चुनाव से पहले अपने घोषणापत्र में ओडिशा को विशेष राज्य का दर्जा देने का वादा किया था।"
बता दें कि रविवार को संसद के बजट सत्र से पहले केंद्र सरकार ने एक सर्वदलीय बैठक बुलाई थी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में सरकार की तरफ से राज्यसभा में सदन के नेता जेपी नड्डा, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान सहित कई मंत्री मौजूद रहे। कांग्रेस की तरफ से जयराम रमेश, गौरव गोगोई, के. सुरेश और प्रमोद तिवारी, समाजवादी पार्टी से रामगोपाल यादव, डीएमके से तिरुचि शिवा एवं टीआर. बालू, आप से संजय सिंह और एआईएमआईएम से असदुद्दीन ओवैसी सहित अन्य राजनीतिक दलों से भी कई नेता बैठक में शामिल हुए। संसद का बजट सत्र 22 जुलाई से 12 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान दोनों सदनों की 16-16 बैठकें होंगी। पहले दिन सोमवार को आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया जाएगा। दूसरे दिन 23 जुलाई को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का पहला बजट लोकसभा में पेश करेंगी।
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