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भोपाल के पटेल नगर स्थित इस्कॉन मंदिर श्री गौर राधा वल्लभ में इस बार जन्माष्टमी महोत्सव ऐतिहासिक होने जा रहा है।16 अगस्त, शनिवार को होने वाला यह आयोजन मंदिर के इतिहास में खास रहेगा, क्योंकि यह श्री गौर राधा वल्लभ विग्रह की पहली जन्माष्टमी होगी।आयोजकों का दावा है कि यह मध्यप्रदेश की अब तक की सबसे बड़ी जन्माष्टमी होगी, जिसमें 75 हजार से ज्यादा श्रद्धालु शामिल हो सकते हैं।
500 किलो फूलों से सजावट पूरे मंदिर परिसर को करीब 500 किलो फूलों से सजाया जाएगा। रंग-बिरंगे पर्दे, झूमर, कलश, बंदनवार, राजस्थानी पेंटिंग्स और हैंडीक्राफ्ट से वातावरण में वृंदावन और मेवाड़ की झलक देखने को मिलेगी।
दिनभर भजन, कीर्तन और कथा के बीच सबसे खास पल होगा कलश अभिषेक, जिसमें फल-रस, औषधि, दूध, दही और शहद से भगवान का अभिषेक किया जाएगा।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों में शाम 6:30 बजे मुख्य नाट्य प्रस्तुति 'शांति दूत कृष्ण' और बच्चों की प्रस्तुति 'माखन चोर कृष्ण' होगी।
तीन दिन तक चलेगा उत्सव
15 अगस्त – अधिवास समारोह, कृष्ण कथा और भजन संध्या।
16 अगस्त – प्रातः 4:30 बजे मंगल आरती, कथा, संकीर्तन, कलश अभिषेक, सांस्कृतिक कार्यक्रम, मध्यरात्रि महा आरती।
17 अगस्त – श्रील प्रभुपाद व्यास पूजा एवं नंदोत्सव।
भक्तों की सेवा में जुटेंगे 500 से ज्यादा स्वयंसेवक पूरे आयोजन में 500 से अधिक ब्रह्मचारी, युवा और गृहस्थ भक्त सेवा देंगे। सुरक्षा, पार्किंग, सुविधा केंद्र, फर्स्ट-एड और प्रसाद वितरण के लिए विशेष व्यवस्था की गई है।
पूरे दिन प्रेमपूर्वक बना प्रसाद सभी आगंतुकों को परोसा जाएगा। इस्कॉन मंदिर प्रबंधन ने भोपाल और आसपास के लोगों से इस अद्वितीय जन्माष्टमी महोत्सव में शामिल होकर श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के उल्लास को साझा करने का आग्रह किया है।
]]>मध्य प्रदेश में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर बीजेपी और कांग्रेस में जुबानी जंग चल रही है। राज्य की डॉ. मोहन यादव सरकार ने सभी स्कूलों और कॉलेजों में कृष्ण जन्माष्टमी मनाने का आदेश दिया है। सरकार ने 21 अगस्त को सभी डिविजनल कमिश्नर और जिला कलेक्टरों को जारी आदेश में कहा कि 26 अगस्त को कृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर हर जिले में भगवान कृष्ण के मंदिरों की सफाई और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। कांग्रेस ने इसका विरोध किया है। पार्टी का कहना है कि शिक्षण संस्थान शिक्षा का केंद्र हैं और इसे केवल इसके लिए ही रहने दोना चाहिए।
सरकार ने आदेश में आगे कहा गया है कि कृष्ण जन्माष्टमी पर सभी सरकारी, गैर सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में भगवान कृष्ण की शिक्षा, मित्रता और जीवन दर्शन को लेकर विभिन्न विषयों पर विद्वानों के जरिए व्याख्यान और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए। आदेश को लेकर कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने आपत्ति जताते हुए कहा कि उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि राज्य सरकार शैक्षणिक संस्थानों को बर्बाद करने में क्यों लगी हुई है। आप आखिर चाहते क्या हैं?
कांग्रेस विधायक ने उठाए सवाल
कांग्रेस विधायक ने एएनआई से कहा, 'मुझे यह समझ नहीं आ रहा है कि सरकार शिक्षण संस्थानों को बर्बाद करने में क्यों लगी हुई है? शिक्षण संस्थान केवल पढ़ाई और अच्छे माहौल के लिए होते हैं। धार्मिक कार्यक्रमों के लिए छुट्टी होती है, जिसे हिंदू और मुसलमान अपने तरीके से मनाते हैं। हाल ही में हमने राखी मनाई और हम जन्माष्टमी के कई आयोजनों में भी शामिल हुए, लेकिन आप शिक्षण संस्थानों के लिए इसे (जन्माष्टमी) अनिवार्य बनाते हैं और दूसरी तरफ मदरसों पर उंगली उठाते हैं। आप आखिर क्या चाहते हैं? यह देश संविधान से चलेगा और हमारा संविधान बहुत बढ़िया है, सभी ने इसे स्वीकार किया है। इसलिए इसे संविधान से चलाएं, गोडसे के विचारों से नहीं।'
आपको ईद मनानी है तो मनाइए
इस बीच, भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने पूरे प्रदेश में कृष्ण जन्माष्टमी मनाने के फैसले पर मोहन यादव के नेतृत्व वाली राज्य सरकार का आभार जताया। उन्होंने कहा, 'हमारी सरकार ने पूरे प्रदेश में जन्माष्टमी धूमधाम से मनाने का फैसला लिया है और जिन कांग्रेस नेताओं को इस पर आपत्ति है, वे सुन लें कि यह एक भारतीय त्योहार है और कांग्रेस को जन्माष्टमी पर आपत्ति क्यों है? अगर वे जन्माष्टमी की जगह ईद मनाना चाहते हैं, तो कांग्रेस ऐसा कर सकती है, उन्हें कौन मना रहा है? हम जन्माष्टमी मनाएंगे। भगवान कृष्ण ने उज्जैन में शिक्षा प्राप्त की थी, इसलिए यह प्रदेश की जिम्मेदारी है कि जन्माष्टमी को बड़े उत्साह के साथ मनाया जाए। मैं मोहन यादव सरकार को इस त्योहार को सरकारी स्तर पर मनाने के लिए बधाई और धन्यवाद देता हूं'
]]>दो दिन जन्माष्टमी मनाने के कारण मथुरा आनेवाले उन तीर्थयात्रियों को इस बार कुछ मन्दिरों का दधिकाना यानी नन्दोत्सव देखने को नही मिलेगा जहां जन्माष्टमी 27 अगस्त को मनाई जाएगी तथा जो जन्माष्टमी के लिए केवल दो दिन की तीर्थयात्रा पर आएंगे। हालांकि तीन दिन की यात्रा पर आने वाले कृष्ण भक्तों कोजन्माष्टमी पर विभिन्न मंदिरों में होने वाले कार्यक्रमों का पूरा आनन्द मिलेगा।
भारत में अलग अलग तिथियों में जन्माष्टमी मनाने का कारण बताते हुए मशहूर ज्योतिषाचार्य अजय तैलंग ने बताया कि जिन मंदिरों में उदयात तिथि से गणना की जाती है उनमें जन्माष्टमी 26 अगस्त को मनाई जाएगी लेकिन जिनमें रोहिणी नक्षत्र से गणना की जाती है उनमें 27 अगस्त को जन्माष्टमी मनाई जाएगी। गोकुल में जन्माष्टमी दधिकाना के रूप में मनाई जाती है जिसमें एक प्रकार से हल्दी मिश्रित दही से होली की तरह मस्ती में इस त्योहारो मनाया जाता है।
राजा ठाकुर मन्दिर के प्रबंधक भीखू जी महराज के अनुसार इस बार यह पर्व 27 अगस्त को पूर्वान्ह 9 बजे से 12 बजे तक गोकुल की चैक पर मनाया जाएगा।
गोवर्धन के प्रमुख दानघाटी मन्दिर के सेवायत आचार्य मथुरा प्रसाद कौशिक ने बताया कि मन्दिर में जन्माष्टमी 26 अगस्त को मनाई जाएगी। इस दिन तीर्थयात्री दानघाटी मन्दिर में गिर्राज जी महराज का अभिषेक कर गोवर्धन की परिक्रमा करते हैं।
नन्दबाबा मन्दिर के सेवायत सुशील गोस्वामी ने बताया कि नन्दबाबा मन्दिर में जन्माष्टमी रक्षाबंधन के बाद आठवें दिन मनाई जाती है। ऐसा इसलिये किया जाता है कि रक्षाबंधन के बाद ठाकुर की बधाई गायन का एक क्रम निर्धारित है ।तिथि के घटने बढ़ने से बधाई गायन में अन्तर आ जाएगा इसलिए ही नन्दबाबा मन्दिर में रक्षाबंधन के बाद आठवें दिन जन्माष्टमी मनाई जाती है।
बांकेबिहारी मन्दिर के सेवायत आचार्य ज्ञानेन्द्र गोस्वामी ने बताया कि मंदिर में जन्माष्टमी 27 अगस्त को मनाई जाएगी। रात लगभग 12 बजे ठाकुर का महाअभिषेक होगा मगर इसके दर्शन भक्तों को नही होंगे। लगभग दो बजे मंगला आरती होगी तथा 5 बजे मन्दिर के पट बन्द हो जाएंगे।इस मन्दिर में मंगला आरती वर्ष में केवल एक ही बार होती है इसलिए हर तीर्थयात्री मंगला आरती के दर्शन करने को लालायित रहता है। ब्रज में कहावत है कि ’’जो करे मंगला कभी न रहे कंगला’’ अर्थात जो मंगला के दर्शन करता है उसे कभी धन की कमी नही होती तथा वह निरोगी भी रहता है।
वृन्दावन के सप्त देवालयों में राधारमण मन्दिर एवं राधा दामोदर मन्दिर में जन्माष्टमी दिन में मनाई जाएगी। इस बार इन दोनो मन्दिरों में यह पर्व 27 अगस्त को मनाया जाएगा । राधारमण मन्दिर के सेवायत आचार्य दिनेश चन्द्र गोस्वामी ने बताया कि गोपाल भट्ट गोस्वामी ने दिन में जन्माष्टमी मनाने की परंपरा डाली थी।
राधा दामोदर मन्दिर के सेवायत आचार्य कृष्ण बलराम गोस्वामी ने बताया कि शाह जी मन्दिर में यद्यपि सप्त देवालयों की श्रेणी में नही आता किंतु इस मन्दिर में भी जन्माष्टमी दिन में ही मनाई जाती है। उन्होंने बताया कि गोकुलानन्द मन्दिर, एवं मदनमोहन मन्दिर में 27 अगस्त को तथा गोपीनाथ मन्दिर , रंग जी मन्दिर एवं राधाश्यामसुन्दर मन्दिर, में जन्माष्टमी 26 अगस्त को मनाई जाएगी। इसी श्रंखला में रंगजी मन्दिर में 27 अगस्त को लटठे के मेले का आयोजन होगा।महाबन के नन्दभवन चैरासी खंभा मन्दिर के कन्हैयालाल के अनुसार इस मन्दिर में जन्माष्टमी 26 अगस्त को मनाई जाएगी।
श्रीकृष्ण जन्मस्थान के मन्दिरों,मे तथा प्राचीन केशवदेव मन्दिर एवं इस्कान मन्दिर में जन्माटमी 26 अगस्त को मनाई जाएगी।श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि इस बार की जन्माष्टमी विशेष प्रकार से मनाई जाएगी जब कि भारत विख्यात द्वारकाधीश मन्दिर के जनसंपर्क एवं विधि विशेषज्ञ राकेश तिवारी ने बताया कि मन्दिर इस बार की जन्माष्टमी में आध्यात्मिकता का माॅडल होगा।
विदेशों में भी जन्माष्टमी वहां बसे भारतीय मूल के लोग तथा इस्काॅन के अनुयायी धूमधाम से मनाते हैं। लंदन स्कूल आफ एकनामिक्स में अध्ययन कर रही भारतीय मूल की खुशी ने बताया लंदन के इस्कान में भीं भी इस वर्ष 26 अगस्त को जन्माष्टमी मनाई जाएगी जबकि कनाडा में कार्य कर रहे भारतीय मूल के अविनाश त्रिपाठी ने बताया कि कनाडा में यह त्योहार 25 अगस्त को मनाया जाएगा।
नन्दबाबा मन्दिर के सेवायत सुशील गोस्वामी ने बताया कि नन्दबाबा मन्दिर में जन्माष्टमी रक्षाबंधन के बाद आठवें दिन मनाई जाती है। बांकेबिहारी मन्दिर के सेवायत आचार्य ज्ञानेन्द्र गोस्वामी ने बताया कि मंदिर में जन्माष्टमी 27 अगस्त को मनाई जाएगी। रात लगभग 12 बजे ठाकुर का महाअभिषेक होगा मगर इसके दर्शन भक्तों को नही होंगे। लगभग दो बजे मंगला आरती होगी और 5 बजे मन्दिर के पट बन्द हो जाएंगे।इस मन्दिर में मंगला आरती वर्ष में केवल एक ही बार होती है।
वृन्दावन के सप्त देवालयों में राधारमण मन्दिर एवं राधा दामोदर मन्दिर में जन्माष्टमी दिन में मनाई जाएगी। इस बार इन दोनों मन्दिरों में यह पर्व 27 अगस्त को मनाया जाएगा ।
श्रीकृष्ण जन्मस्थान के मन्दिरों में और प्राचीन केशवदेव मन्दिर एवं इस्कान मन्दिर में जन्माटमी 26 अगस्त को मनाई जाएगी।श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि इस बार की जन्माष्टमी विशेष प्रकार से मनाई जाएगी जब कि भारत विख्यात द्वारकाधीश मन्दिर के जनसंपर्क एवं विधि विशेषज्ञ राकेश तिवारी ने बताया कि मन्दिर इस बार की जन्माष्टमी में आध्यात्मिकता का माॅडल होगा।
पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि 26 और 27 अगस्त को जन्माष्टमी का उत्सव होने से भीड़ दो दिन में बंट जाएगी। इसके अलावा पूर्व के वर्षों में एक ही दिन श्रीकृष्ण जन्मभूमि में भीड़ को नियंत्रित करना और उसी दिन वृंदावन में बांकेबिहारी मंदिर पर मंगला आरती के दौरान भीड़ को नियंत्रित करना चुनौतीपूर्ण होता था। अधिकारी एक से दूसरे स्थान पर भागते रहते थे। इसके अलावा फोर्स भी दो भागों में बांटनी होती थी। इस बार यह राहत है।
26 को श्रीकृष्ण जन्मभूमि में सकुशल कार्यक्रम संपन्न कराने के बाद अगले दिन बांकेबिहारी मंदिर में पर्याप्त मात्रा में फोर्स के साथ कार्यक्रम को सकुशल संपन्न कराया जा सकता है। हालांकि चुनौती इस बात की होगी कि दो दिन तक कम भीड़ मथुरा-वृंदावन में रहेगी। बाहर से आने वाले पुलिस बल को भी इतने दिन तक जिले में रोकने और खानपान के इंतजाम चुनौती भरे होंगे।
होटल-गेस्ट हाउस संचालकों की बल्ले-बल्ले
दो तिथियों पर जन्माष्टमी का पर्व होने से होटल और गेस्ट हाउस संचालकों की बल्ले-बल्ले हो गई है। होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन मथुरा के उपाध्यक्ष अमित जैन ने बताया कि इस बार लोग होटल की बुकिंग दो दिन के लिए कर रहे हैं। इससे होटल इंडस्ट्री को फायदा होगा। इसके अलावा मेले के दौरान विभिन्न प्रकार के पदार्थों की बिक्री करने वाले लोगों को भी इसका लाभ होगा। कुल मिलाकर इस बार जन्माष्टमी पर्व ब्रज में धनवर्षा वाला साबित होगा।
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