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भारत के दिग्गज निशानेबाजी कोच जसपाल राणा का गुरुवार रात को निधन हो गया। उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक व्यक्त किया है। राणा 49 साल के थे और देश के जाने-माने कोचेस में उनकी गिनती होती थी।
पूरा देश उनके निधन की खबर से हैरान है। महज 49 साल की उम्र में राणा दुनिया छोड़ गए। वह भारत को दो ओलंपिक मेडल दिलाने वाली मनु भाकर के कोच थे। पेरिस ओलंपिक में राणा और मनु की जोड़ी ने ही भारत को ऐतिहासिक सफलता दिलाई थी।
देश का नाम किया रोशन
पीएम मोदी ने अपने एक्स हैंडल पर राणा का याद करते हुए पोस्ट किया है और उन्हें देश का हीरा बताया है। मोदी ने लिखा, "जसपाल राणा जी के निधन की खबर सुनकर काफी दुखी हूं। उनका जाना भारतीय खेल जगत के लिए बहुत बड़ी हानि है। निशानेबाजी में उन्होंने अपने अविश्वनीय खेल से देश को कई सफलताएं दिलाईं। एक मेंटर के तौर पर भी उनका योगदान उतना ही शानदार था। उन्होंने देश के युवा निशानेबाजों को बनाया और उन्हें दिशा दिखाई। उनकी मजबूत प्रतिबद्धता, अनुशासन और खेल जगत की सेवा के कारण उनको काफी माना जाता है।"
उन्होंने आगे लिखा, " इस दुख की घड़ी में मेरी सांत्वना उनके परिवार, दोस्तों और पूरे खेल जगत के साथ है।"
गौतम गंभीर ने भी किया याद
भारतीय क्रिकेट टीम के हेड कोच गौतम गंभीर ने भी राणा के निधन पर शोक जाहिर किया है। उन्होंने एक्स पर लिखा, "जसपाल राणा भारतीय खेल जगत के दिग्गज थे। उनके जाने से एक बड़ा शून्य पैदा हो गया है। ओम शांति।"
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राणा जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ विश्व कप से भारतीय दल की वापसी की उड़ान के दौरान बीमार पड़ गए थे और उन्हें एक चिकित्सा प्रक्रिया से गुजरना पड़ा था.
नई दिल्ली में उतरते ही उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया और उन्हें स्टेंट डाले गए थे. राणा भारतीय पिस्टल निशानेबाजों के लिए ‘हाई परफार्मेंस कोच’ के रूप में कार्यरत थे.
जसपाल राणा अपने पीछे पत्नी रीना राणा, पुत्री देवांशी, पुत्र युवराज, पिता नारायण सिंह राणा तथा दो भाई-बहन सुषमा सिंह और सुभाष राणा को छोड़ गए हैं.
गढ़वाल से ग्लोबल मंच तक
28 जून 1976 को उत्तराखंड के एक गढ़वाली परिवार में जन्मे जसपाल राणा का संबंध एक खेल-प्रेरित परिवार से था. उनके पिता नारायण सिंह राणा सेना के पूर्व अधिकारी रहे और बाद में उत्तराखंड के पहले खेल मंत्री बने. बचपन से ही निशानेबाजी का माहौल उन्हें विरासत में मिला और उनके पिता ही उनके पहले कोच बने.
महज 12 वर्ष की उम्र में उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का परिचय दे दिया था, जिससे उनका नाम तेजी से उभरने लगा.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिग्गज निशानेबाज जसपाल राणा के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है. उन्होंने X पर लिखा कि राणा का निधन भारतीय खेल जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है.
करियर की शुरुआत और अंतरराष्ट्रीय पहचान
1988 में अहमदाबाद में हुए राष्ट्रीय शूटिंग चैम्पियनशिप में सिल्वर मेडल जीतकर उन्होंने देश का ध्यान खींचा.
इसके बाद 1994 में मिलान (इटली) में जूनियर वर्ल्ड शूटिंग चैम्पियनशिप में उन्होंने वर्ल्ड रिकॉर्ड स्कोर बनाकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सनसनी फैलाई.
1996 अटलांटा ओलंपिक में उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया और 10 मीटर एयर पिस्टल व 50 मीटर फ्री पिस्टल इवेंट में हिस्सा लिया.
कॉमनवेल्थ गेम्स के सबसे सफल भारतीय
जसपाल राणा का नाम कॉमनवेल्थ गेम्स इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है.
– कुल 15 पदक
– 9 स्वर्ण, 4 रजत, 2 कांस्य
– 1994, 1998, 2002 और 2006 में लगातार चार संस्करणों में पदक
2002 मैनचेस्टर कॉमनवेल्थ गेम्स उनका सबसे सफल संस्करण रहा, जहां उन्होंने 6 पदक जीतकर इतिहास रचा.
एशियन गेम्स में ऐतिहासिक प्रदर्शन
2006 दोहा एशियन गेम्स में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए-
– 3 स्वर्ण पदक
– 1 रजत पदक
25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल में 590 अंक बनाकर उन्होंने विश्व रिकॉर्ड की बराबरी की, जो उनके करियर का सबसे प्रतिष्ठित क्षण माना जाता है.
सम्मान और राष्ट्रीय पहचान
उनकी उपलब्धियों के लिए उन्हें देश के सर्वोच्च खेल और नागरिक सम्मानों से सम्मानित किया गया-
– अर्जुन पुरस्कार (1994)
– पद्मश्री (1997)
– द्रोणाचार्य पुरस्कार (2020 में- कोचिंग के लिए)
कोचिंग में सुनहरा अध्याय
खेल करियर के बाद उन्होंने कोचिंग को अपना मिशन बनाया. 2012 के बाद उन्होंने युवा भारतीय निशानेबाजों को तैयार करना शुरू किया और भारतीय शूटिंग की नई पीढ़ी को मजबूत आधार दिया.
2018 से वे ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर के कोच बने. दोनों के बीच 2021 में कुछ समय का अलगाव रहा, लेकिन 2023 में वे फिर साथ आए और 2024 ओलंपिक की तैयारी की.
उनकी ट्रेनिंग शैली को बेहद अनुशासित और अंतरराष्ट्रीय स्तर का माना जाता था, जिसमें ओलंपिक जैसी परिस्थितियों का अभ्यास कराया जाता था.
राणा हमेशा कहते थे कि कोचिंग उनका जुनून है और उनका उद्देश्य खिलाड़ियों को विश्व स्तर पर तैयार करना है, न कि व्यावसायिक लाभ. देहरादून स्थित उनकी अकादमी से कई युवा निशानेबाज निकले जिन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया.
दिग्गज निशानेबाज जसपाल राणा का निधन, 49 साल की उम्र में ली आखिरी सांस
एक युग का अंत
जसपाल राणा का जाना भारतीय शूटिंग के लिए एक अपूरणीय क्षति है. उन्होंने न केवल पदक जीते, बल्कि एक पूरी पीढ़ी तैयार की जिसने भारत को वैश्विक खेल मानचित्र पर मजबूत स्थान दिलाया.
उनकी विरासत भारतीय खेल इतिहास में हमेशा जीवित रहेगी -एक ऐसे खिलाड़ी
]]>हाल ही में, जर्मनी के म्यूनिख में हुए ISSF वर्ल्ड कप से भारतीय टीम की वापसी की फ़्लाइट के दौरान बीमार पड़ने के बाद राणा का एक मेडिकल प्रोसीजर हुआ था। नई दिल्ली पहुंचने पर उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया और स्टेंट लगाने के लिए एक मेडिकल प्रोसीजर किया गया। राणा भारतीय पिस्टल शूटर्स के लिए हाई-परफॉर्मेंस कोच के तौर पर काम कर रहे थे।
कैसे हुई जसपाल राणा की मौत?
निशानेबाज से कोच बने जसपाल राणा जर्मनी से लौट रहे थे। इसी दौरान उनकी अचानक तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें दिल्ली के MAX अस्पताल में भर्ती करवाया गया और फिर आज कुछ देर पहले उन्होंने अस्पताल में अंतिम सांस ली।
सूत्रों के मुताबिक, फ्लाइट में उनके सीने में तेज दर्द हुआ था। दिल्ली में विमान लैंड होने के बाद, उन्हें दिल का दौरा (हार्ट अटैक) पड़ने के कारण तुरंत साकेत के मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालांकि, अभी डॉक्टर की तरफ से उनकी मौत की वजह नहीं बताया गई है।
मूल रूप से उत्तराखंड के उत्तरकाशी निवासी जसपाल राणा को निशानेबाजी के क्षेत्र में उनकी उत्कृष्ट सफलता के लिए साल 2002 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था. दिग्गज निशानेबाज जसपाल राणा के निधन पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर गहरा दुख व्यक्त किया है।
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