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पाकिस्तान के महान तेज गेंदबाज वसीम अकरम ने भारत के स्टार पेसर जसप्रीत बुमराह की तारीफ की है। उन्होंने भारतीय गेंदबाज को मॉडर्न डे ग्रेट बताते हुए उनके वर्कलोड को सफलता से मैनेज करने के लिए भारतीय टीम मैनेजमेंट की भी खास तौर पर तारीफ की है। हंसना मना है शो पर अकरम ने कहा कि बुमराह वर्ल्ड-क्लास बोलर हैं, इसमें कोई संदेह नहीं है। अपने दौर के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजों में शुमार रहे पाकिस्तानी लीजेंड ने बुमराह को लेकर कहा, 'उनका ऐक्शन बहुत ही अलग हटकर है। उनके पास गति है और जिस तरह से भारत उन्हें मैनेज कर रहा है, वो अविश्वसनीय है। इसका पूरा श्रेय मैनेजमेंट और उनके माइंडसेट को है।'
वसीम अकरम से जब यह पूछा गया कि क्या बुमराह ऑल-टाइम ग्रेट हैं तब उनका जवाब था, 'किसी को अलग-अलग दौर की तुलना नहीं करनी चाहिए। वह दाहिने हाथ के तेज गेंदबाज हैं, मैं बाएं हाथ का गेंदबाज था। मैंने सोशल मीडिया पर बहस देखी हैं लेकिन उनकी न तो वह परवाह करते हैं और न ही मैं करता हूं। वह आधुनिक दौर के महान हैं। मैंने अपने समय में अपना योगदान दिया, लेकिन वह बहुत ही प्रभावशाली हैं।'
आज के दौर के क्रिकेट में आए बदलाव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि गेंदबाजों को विकेट मिलने के अवसर ज्यादा हैं क्योंकि बैटर हर वक्त शॉट खेलना चाहते हैं। उन्होंने कहा, '90 के दशक में टी20 नहीं था। वनडे में बल्लेबाज अकसर खराब गेंदों को छोड़ दिया करते थे लेकिन अब तो टेस्ट में अच्छी गेंदों तक पर शॉट लग रहे हैं। इन दिनों गेंदबाजों पर दबाव बहुत है। जसप्रीत के पास विकेट लेने के अवसर ज्यादा हैं क्यों बल्लेबाज की नजर हमेशा शॉट पर रहती है। गेंदबाज के तौर पर हम उस आक्रामकता का आनंद लेते हैं।'
टेस्ट क्रिकेट को कुछ टीमों के लिए 5 दिन के बजाय 4 दिन तक का करने यानी टू-टियर सिस्टम के प्रस्ताव को लेकर उन्होंने अपनी असहमति जताई। उन्होंने कहा, 'अगर पाकिस्तान, वेस्टइंडीज और बांग्लादेश उनके बीच खेलेंगे तो उनमें सुधार कैसे होगा। मैं टू-टियर सिस्टम से सहमत नहीं हूं। टेस्ट क्रिकेट में गुणवत्ता वाली टीमों की जरूरत होती है। एसोसिएट टीमों को अपने फर्स्ट-क्लास क्रिकेट के इन्फ्रास्ट्रक्चर को विकसित किए बिना टेस्ट खेलने देने का कोई मतलब नहीं है।'
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इस मामले में ताजा टिप्पणी आई है भारत के पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर मनोज तिवारी की। उन्होंने तो एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी के लिए जसप्रीत बुमराह के चयन पर ही सवाल उठा दिए हैं। क्रिकट्रैकर से बातचीत में तिवारी ने कहा कि कोई भी खिलाड़ी क्रिकेट से बड़ा नहीं होता, अगर किसी का किसी सीरीज के लिए टीम में चयन हुआ है तो मतलब ये होना चाहिए कि वह हर मैच में उपलब्ध रहे। अगर ऐसा नहीं है तो उसका चयन ही क्यों? मनोज तिवारी ने कहा, ‘मेरी राय है कि अगर कोई खिलाड़ी 5 टेस्ट की सीरीज के लिए फिट नहीं है, और आप यह पहले से जानते हैं तब आप उस शख्स को नहीं चुनेंगे।’
उन्होंने आगे कहा, 'आप उस शख्स को क्यों नहीं चुनेंगे? इसलिए कि कोई भी क्रिकेट के खेल से तो बड़ा नहीं है। और यह सभी से कहा जाना चाहिए, वो चाहें जसप्रीत बुमराह हों या विराट कोहली या रोहित शर्मा हो या इस दुनिया का कोई भी हो। क्रिकेट के गेम से बड़ा कोई नहीं है।' वैसे बुमराह ने एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी से पहले हुए बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के सभी 5 टेस्ट मैच खेले थे। वह सिडनी में खेले गए निर्णायक टेस्ट के दौरान बैक इंजरी के शिकार हो गए थे। इस वजह से वह आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी भी नहीं खेल पाए थे। यही वजह थी कि चयनकर्ताओं को टीम मैनेजमेंट ने बुमराह को इंग्लैंड दौरे पर सिर्फ 3 टेस्ट खिलाने का फैसला किया था। इसके बाद भी मनोज तिवारी को लगता है कि अगर कोई खिलाड़ी हर मैच के लिए उपलब्ध नहीं है तो उसे स्क्वाड में चुनना ही नहीं चाहिए, भले ही वह कितना ही बड़ा खिलाड़ी हो।
मनोज तिवारी ने कहा, 'अगर टीम मैनेजमेंट को पता है या चयनकर्ता को पता है कि वह लगातार 5 टेस्ट तक नहीं खेल पाएंगे तब उन्हें चुना ही नहीं जाना चाहिए। दूसरा कारण ये है कि अगर बेंच स्ट्रेथ मौजूद न हो, कोई दूसरा गेंदबाज न हो जो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उनकी भरपाई करने को तैयार हो, तब तो ठीक है। लेकिन जब आप जानते हैं कि आपके पास बेंच स्ट्रेंथ भी है। जब आपके पास तेज गेंदबाजों का एक पूल है और वो बढ़िया कर भी रहा है तब आपको उन्हें पहले ही नहीं चुनना चाहिए था।' मनोज तिवारी ने मुख्य कोच गौतम गंभीर और बाकी के मैनेजमेंट की इस बात के लिए भी आलोचना की कि बुमराह सभी 5 टेस्ट नहीं खेलेंगे, सिर्फ 3 खेलेंगे यह इंग्लैंड को पहले ही क्यों बता दिया गया।
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जसप्रीत बुमराह इंग्लैंड में सबसे ज्यादा टेस्ट विकेट लेने वाले भारतीय गेंदबाजों में तीसरे नंबर पर हैं। उन्होंने इंग्लैंड में अब तक 9 टेस्ट मैच खेले हैं जिसकी 17 पारियों में 26.27 की औसत से 37 विकेट झटके हैं। वहां उनका पारी में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 64 रन देकर 5 विकेट है। इंग्लैंड में किसी टेस्ट मैच में उनके सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन की बात करें तो उन्होंने एक टेस्ट की दोनों पारियों में 110 रन देकर 9 विकेट झटके थे।
सिर्फ 2 भारतीय गेंदबाज ही ऐसे हैं जिन्होंने इंग्लैंड में बुमराह से ज्यादा टेस्ट विकेट लिए हैं। ईशांत शर्मा 48 टेस्ट विकेट के साथ टॉप पर हैं और 43 विकेट के साथ दूसरे नंबर पर हैं महान ऑलराउंडर कपिल देव। बुमराह को इंग्लैंड में खेलना काफी रास आता है। 2018 में ट्रेंट ब्रिज में खेला गया मैच उनका इंग्लैंड में पहला टेस्ट था और अपने पहले ही मैच में उन्होंने एक पारी में 5 विकेट झटके। भारत ने उस टेस्ट मैच में जीत हासिल की थी।
2021 दौरे में दोनों देशों के बीच पहला टेस्ट मैच भी ट्रेंट ब्रिज में खेला गया था और उसमें भी बुमराह ने पारी में 5 विकेट लिए थे। उस दौरे का दूसरा मैच लॉर्ड्स में हुआ था। उस मैच में बुमराह ने बल्ले से भी जौहर दिखाया था। उन्होंने मोहम्मद शमी के साथ मिलकर आखिरी विकेट के लिए 89 रनों की नाबाद साझेदारी की थी। भारत ने उस टेस्ट में यादगार जीत हासिल की थी। उसी मैच में बुमराह ने ओली रॉबिनसन को जिस तरह धीमी गेंद से चकमा देकर आउट किया था, वो देखने लायक था।
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यह 31 वर्षीय तेज गेंदबाज बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ श्रृंखला का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी रहा और उन्होंने पांच टेस्ट मैच में 32 विकेट चटकाए। आईसीसी की साल की सर्वश्रेष्ठ महिला एकदिवसीय क्रिकेटर मंधाना ने 2024 में 743 रन बनाए।
उन्होंने चार एकदिवसीय शतक बनाए जो महिलाओं के प्रारूप में एक साल में सर्वाधिक शतक का रिकॉर्ड है। उन्होंने पिछले साल सौ से अधिक बाउंड्री लगाई जिसमें 95 चौके और छह छक्के शामिल हैं। इस 28 वर्षीय क्रिकेटर के एकदिवसीय मुकाबलों में 57.86 की औसत और 95.15 के प्रभावशाली स्ट्राइक रेट से रन बनाए।
]]>जसप्रीत बुमराह ने साल 2024 में टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा विकेट हासिल किए थे. बुमराह ने इस साल कुल 13 टेस्ट मैच खेले, जिसमें 14.92 के औसत से 71 विकेट चटकाए. बुमराह 32 विकेट्स के साथ बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी 2024-25 में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज रहे थे.
घरेलू और विदेशी मैदानों पर रहा धांसू प्रदर्शन
इसी प्रदर्शन के आधार पर ICC ने बुमराह को मेन्स टेस्ट क्रिकेटर ऑफ द ईयर चुना. बुमराह ने घरेलू और विपक्षी टीमों के मैदानों पर खुद को साबित किया है. इस दाएं हाथ के तेज गेंदबाज ने घरेलू मैदान पर इंग्लैंड और बांग्लादेश के खिलाफ टेस्ट सीरीज जीतने में अहम भूमिका निभाई थी.
इसके अलावा विदेशी जमीन पर साउथ अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ धांसू प्रदर्शन किया था. हालांकि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारतीय टीम बॉर्डर-गावस्कर सीरीज नहीं जीत सकी थी. मगर बुमराह ने इस 5 मैचों की टेस्ट सीरीज में सबसे ज्यादा 32 विकेट चटकाए थे.
]]>टी20 विश्व कप में शानदार प्रदर्शन के लिए भारतीय तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह को प्लेयर आफ द टूर्नामेंट चुना गया। बुमराह ने आठ मैचों में 15 विकेट लिए लेकिन उनका योगदान इन आंकड़ों से कहीं अधिक था जिसकी बदौलत भारत ने 17 साल बाद टी20 विश्व कप जीता। बुमराह ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ फाइनल में रीजा हेंडरिक्स और मार्को जेनसन के विकेट लिए। विक्ट्री परेड के बाद भारतीय तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह ने कहा कि आज मैंने जो देखा, ऐसा पहले कभी नहीं देखा। जसप्रीत बुमराह के लिए यह जिंदगी में एक बार होने वाला अनुभव था।
जसप्रीत बुमराह ने भारत के सम्मान समारोह के दौरान कहा, "मेरा रिटायरमेंट अभी बहुत दूर है, मैंने अभी शुरुआत की है। यह मैदान सही में बहुत विशेष है। मैं तब बच्चा था तो यहां आया था और आज मैंने जो देखा, ऐसा पहले कभी नहीं देखा। बुमराह ने आगे कहा, ''अपने बेटे को देखकर मैं भावुक हो गया और मेरे पास शब्द नहीं थे। मैंने अपनी पत्नी से कहा कि मैं अपने बेटे को देखना चाहता हूं (मुझे खेलते हुए देखना)।''
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