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बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में नई सरकार के गठन की कवायद चल रही है. मंगलवार को जेडीयू और भाजपा दोनों दलों के विधायक दलों की बैठक होने वाली है. इन बैठकों में दोनों दल अपने-अपने विधायक दल के नेता का चुनाव करेंगे. इस बीच मंत्रिमंडल के स्वरूप और मंत्री पद को लेकर दोनों दलों के बीच चर्चा चल रही है. अभी तक की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों दल बिहार सरकार में बराबर मंत्री पद लेंगे. इस बीच सूत्रों से यह भी जानकारी मिली है कि दोनों दल विधानसभा अध्यक्ष पद चाहते हैं. इसी के मद्देनजर जेडीयू-बीजेपी के शीर्ष नेता आज दिल्ली में मीटिंग करेंगे. जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा और जेडीयू कोटे के केंद्रीय मंत्री ललन सिंह बीती रात पटना से दिल्ली रवाना हुए थे. मंगलवार को ये दोनों नेता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात कर सकते हैं.
स्पीकर के अलावा सरकार में महत्वपूर्ण विभागों को लेकर भी दोनों दलों की ओर से दावेदारी चल रही है. बीजेपी हर हाल में स्पीकर का पद अपने पास रखना चाहती है. सोमवार देर रात तक पटना में प्रदेश बीजेपी के नेताओं ने इस पर चर्चा की थी. इसके अलावा चिराग पासवान, जीतनराम मांझी और उपेन्द्र कुशवाहा से बातचीत का जिम्मा धर्मेंद्र प्रधान संभाल रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक, इन तीनों सहयोगी दलों के साथ सरकार गठन को लेकर सहमति बन चुकी है.
छोटे दलों से बात कर रहे हैं धर्मेंद्र प्रधान
इस बीच बुधवार 19 नवंबर को बीजेपी और जेडीयू विधानमंडल दल की अलग–अलग बैठकें बुलाई गई हैं. दोनों दलों की बैठक के बाद एनडीए विधानमंडल दल की बैठक भी 19 नवंबर को होगी. 20 नवंबर को पटना के गांधी मैदान में शपथ ग्रहण समारोह होगा.
मौजूदा विधानसभा में तीन बार स्पीकर बदल चुके हैं. फिलहाल यह पद भाजपा के नंदकिशोर यादव के पास है. इससे पहले जेडीयू और राजद के बीच गठबंधन के वक्त स्पीकर पद राजद के अवध बिहारी चौधरी के पास था. उससे पहले भाजपा के विजय सिन्हा विधानसभा अध्यक्ष थे. हालांकि, इससे पहले यानी 2020 से पहले नीतीश कुमार की जेडीयू ने हमेशा अपने पास विधानसभा अध्यक्ष का पद रखा. विधायकों की अदला-बदली या फिर कमजोर बहुमत वाली सरकार होने की स्थिति में विधानसभा अध्यक्ष का पद राजनीतिक रूप से काफी अहम हो जाता है. वैसे एक मजबूत सरकार होने की स्थिति में इस पद को पार्टियां अपने किसी वरिष्ठ नेता को समायोजित करने का जरिया मानती हैं.
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लोकसभा चुनाव के नतीजे आ गए हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की अगुआई वाली एनडीए की फिर से केंद्र में सरकार बनी है। नरेंद्र मोदी ने लगातार तीसरी बाद प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी संभाली है। अब 18वीं लोकसभा का अध्यक्ष कौन होगा? यह सवाल सबकी जुबान पर है। इसको लेकर सियासत शुरू हो गई है। विपक्षी गठबंधन ने इस पद के लिए चुनाव से पहले बड़ी मांग की है।
वहीं एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भाजपा के प्रमुख सहयोगियों टीडीपी और जदयू की नजरें लोकसभा स्पीकर की कुर्सी पर हैं। इन सबके बीच जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के प्रवक्ता केसी त्यागी ने इंडी गठबंधन की आलोचना की और बताया कि कुर्सी का हकदार कौन हैं।
सदन का सबसे गरिमापूर्ण पद
लोकसभा स्पीकर के चुनाव पर केसी त्यागी ने कहा, 'लोकसभा स्पीकर का पद सदन का सबसे गरिमापूर्ण पद होता है। उस पद पर पहला अधिकार सत्तारूढ़ दल का है। इंडी गठबंधन की मांगें और बयान आपत्तिजनक हैं।'
भाजपा एनडीए की बड़ी पार्टी
उन्होंने आगे कहा, 'हम मानते हैं कि भाजपा एनडीए की बड़ी पार्टी है। उस पद पर भाजपा या एनडीए का पहला अधिकार है। मैं पिछले 35 सालों से एनडीए में हूं। भाजपा ने कभी जनता दल को तोड़ने की कोशिश नहीं की। टीडीपी और जदयू ने अहम भूमिका निभाई है। मगर हम एनडीए को कमजोर करने की कोशिश कभी नहीं करेंगे।'
केसी त्यागी से कुछ विपक्षी नेताओं की टिप्पणियों के बारे में सवाल पूछा गया। उनसे कहा गया कि क्या नया लोकसभा अध्यक्ष टीडीपी या जेडीयू से हो सकता है? इसके जवाब में उन्होंने भाजपा की ओर से नामित उम्मीदवार को समर्थन देने की बात कही। मालूम हो कि भाजपा केंद्र में अपने सहयोगियों के साथ गठबंधन सरकार का नेतृत्व कर रही है। जेडीयू लीडर त्यागी की टिप्पणी इस टिप्पणी को बड़े संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। ऐसा माना जा रहा है कि बीजेपी स्पीकर पद के लिए अपना उम्मीदवार खड़ा कर सकती है। अध्यक्ष पद का उम्मीदवार पार्टी के सहयोगियों में से नहीं होने वाला है।
26 जून को लोकसभा अध्यक्ष पद का चुनाव
लोकसभा 26 जून को अपने नए अध्यक्ष का चुनाव करेगी। सदन के सदस्य उम्मीदवारों के समर्थन में प्रस्ताव के लिए एक दिन पहले दोपहर 12 बजे तक नोटिस दे सकते हैं। 18वीं लोकसभा की पहली बैठक 24 जून को होगी और सत्र 3 जुलाई को समाप्त होगा। लोकसभा की ओर से इसे लेकर बुलेटिन जारी किया गया। इसमें कहा गया कि अध्यक्ष के चुनाव के लिए तय तिथि से एक दिन पहले कोई भी सदस्य अध्यक्ष पद के लिए किसी अन्य सदस्य के समर्थन में प्रस्ताव के लिए महासचिव को लिखित रूप से नोटिस दे सकता है। मौजूदा मामले में अध्यक्ष के चुनाव के लिए प्रस्ताव के वास्ते नोटिस मंगलवार, 25 जून दोपहर 12 बजे से पहले दिए जा सकते हैं।
सत्र के पहले 2 दिन नवनिर्वाचित सदस्यों के शपथ ग्रहण के लिए समर्पित होंगे। अध्यक्ष के चुनाव के लिए 26 जून की तिथि तय की गई है, जबकि 27 जून को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू लोकसभा और राज्यसभा की संयुक्त बैठक को संबोधित करेंगी। प्रस्ताव के लिए नोटिस का समर्थन किसी तीसरे सदस्य द्वारा किया जाना चाहिए। साथ ही, चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार द्वारा यह बयान भी दिया जाना चाहिए कि वह निर्वाचित होने पर अध्यक्ष के रूप में काम करने के लिए तैयार है। लोकसभा सचिवालय ने नियमों का हवाला देते हुए बताया कि कोई सदस्य अपना नाम प्रस्तावित नहीं कर सकता है या अपने नाम वाले किसी प्रस्ताव का समर्थन नहीं कर सकता है।
]]>क्या अंदरखाने इंडिया ब्लॉक की ओर से केंद्र में सरकार बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं और इसके लिए उनके द्वारा जेडीयू से संपर्क किया गया है, इस सवाल के जवाब में केसी त्यागी ने कहा, 'हमारे नेता नीतीश कुमार ने किसी भी ऐसी पेशकश को सिरे से नकार दिया है. वरना प्रपोजल तो यहां तक आए हैं कि नीतीश जी प्रधानमंत्री हो जाएं. और ऐसे प्रपोजल उन लोगों की ओर से आ रहे हैं, जिन्होंने नीतीश कुमार को इंडी गठबंधन का संयोजक बनाने तक से इनकार कर दिया था. हम इसके जन्मदाता थे. हमने कांग्रेस पार्टी की पॉलिटिकल अनटचेबिलिटी खत्म की. अखिलेश यादव, अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी… ये कांग्रेस के साथ मंच शेयर करने को तैयार नहीं थे.'
इंडिया ब्लॉक ने नीतीश के साथ ठीक व्यवहार नहीं किया: केसी त्यागी
जेडीयू नेता केसी त्यागी ने आगे कहा, 'जिस तरीके का व्यवहार हमारे नेता और हमारी पार्टी के साथ हुआ, उसी का नतीजा था कि हम इंडी गठबंधन से बाहर आए और एनडीए जॉइन किया. इतिहास गवाह है कि उस दिन से ही फिजा बननी शुरू हो गई.' जब केसी त्यागी से यह पूछा गया कि विपक्ष के किन नेताओं ने नीतीश कुमार को अपने पाले में लाने के लिए उनसे संपर्क किया था, तो उन्होंने कहा, 'राजनीति में नाम बताना ठीक नहीं रहता है. लेकिन मैं बहुत जिम्मेदारी से कहता हूं कि इस तरह के प्रपोजल हमारे नेता के पास आए थे. विपक्ष के कई शीर्ष नेता नीतीश कुमार से बात करना चाहते थे. लेकिन पार्टी ने तय किया है कि पीछे झांकने का प्रश्न ही पैदा नहीं होता. हम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए को ही मजबूत करेंगे.'
केंद्र सरकार में कैसा होगा बिहार का प्रतिनिधित्व? JDU नेता ने बताया
प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में जो नई केंद्रीय मंत्रिपरिषद बनेगी उसमें बिहार और जदयू का प्रतिनिधित्व कितना और कैसा होगा, इस सवाल के जवाब में केसी त्यागी ने कहा, 'हमें तो इसी बात की प्रसन्नता है कि जिन्होंने चुनाव के दौरान और उससे पहले नीतीश कुमार और जदयू को खारिज कर दिया था, उन्हें जवाब मिल गया. आज हमारे नेता का सम्मान भी पुनर्स्थापित हुआ है और जदयू के कार्यकर्ताओं का भी विश्वसनीयता बनी है. जहां तक मंत्रिमंडल का प्रश्न है, ये प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के बीच में चर्चा और समन्वय का विषय है. उस पर मैं कोई टिप्पणी नहीं करूंगा.'
क्या केंद्रीय कैबिनेट में बिहार को प्रतिनिधित्व देने में जातीगत समीकरण का भी ध्यान रखा जाएगा, इस पर जदयू नेता केसी त्यागी ने कहा, 'जदयू सभी वर्गों की पार्टी है. लेकिन कोर कॉन्स्टिचुएंसी जिसका निर्माण कर्पूरी ठाकुर और बाद में नीतश कुमार ने किया है, वे समाज के बहुत पिछड़े वर्ग से आते हैं. उनको सही प्रतिनिधित्व मिले यह जनता दल यूनाइटेड की दिली इच्छा है. पिछली बार बिहार से जिन वर्गों को केंद्रीय कैबिनेट में प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया था, इस बार उनको भी मौका मिलेगा इसकी हमें पूरी उम्मीद है. पिछड़े वर्ग से जो सांसद चुनकर आए हैं, उन्हें बिल्कुल केंद्रीय कैबिनेट में जगह मिलेगी.'
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एनडीए की सहयोगी पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) पर हमारा रुख आज भी जस का तस है. जेडीयू महासचिव और प्रवक्ता केसी त्यागी ने कहा कि हमने तब भी कहा था कि इस मामले पर सभी स्टेक होल्डर को साथ लेकर चलने की आवश्यकता है.
केसी त्यागी ने कहा, 'हमने तब भी कहा था कि इस मामले पर सभी स्टेट होल्डर को साथ लेकर उनके विचारों को समझने की जरूरत है. UCC पर नीतीश कुमार ने विधि आयोग के अध्यक्ष को चिट्ठी लिखी थी और कहा था कि हम इसके खिलाफ नहीं हैं लेकिन इसमें व्यापक विचार विमर्श की आवश्यकता है.'
अग्निवीर योजना पर फिर से विचार करने की जरूरत
अग्निवीर योजना का जिक्र करते हुए केसी त्यागी ने कहा, 'अग्निवीर योजना को लेकर के बहुत विरोध हुआ था और चुनाव में भी उसका असर देखने को मिला है. इस पर दोबारा से विचार करने की जरूरत है. अग्निवीर योजना को नए तरीके से सोचने की आवश्यकता है. जो सुरक्षाकर्मी थे सेना में तैनात थे और जब भी अग्निवीर योजना आई तो बड़े तबके में असंतोष थ. मेरा ऐसा मानना है कि उनके परिवार जनों ने भी चुनाव में विरोध जारी किया इसलिए आज इसमें नए तरीके से विचार विमर्श की जरूरत है.'
बिहार को विशेष राज्य का दर्जा मिलना चाहिए
वहीं वन नेशन, वन इलेक्शन का समर्थन करते हुए केसी त्यागी ने कहा कि जहां तक एक देश एक चुनाव की बात है हम उसके समर्थन में हैं. केसी त्यागी ने कहा, 'हम एनडीए के मजबूत हिस्सेदार के रूप में सामने आए हैं. हम अटबिहारी की एनडीए सरकार में कई अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं. हम लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि अगर बिहार से पलायन रोकना है तो उसे विशेष राज्य का दर्जा देना चाहिए. वो प्रधानमंत्री का प्रोवोगेटिव है कि वो किस को कौन सा मंत्रालय देंगे. हमारी ऐसी कोई मांग नहीं है.'
केसी त्यागी ने बातचीत में कहा कि यह स्कीम जब आई थी, तब लोगों ने काफी विरोध किया था। सेना में तैनात लोगों के परिवार के लोग भी इससे नाराज थे। इसलिए इसमें बदलाव हो जाना चाहिए। वहीं समान नागरिक संहिता के मसले पर पूछा गया तो नीतीश कुमार की पार्टी ने कहा कि हम इसके समर्थन में हैं। लेकिन इसे लेकर हमारी मांग है कि सभी संबंधित पक्षों की इसमें राय ली जाए। इसके बाद ही कोई फैसला लेना चाहिए। केसी त्यागी ने कहा कि यही स्टैंड हमारा पहले भी था और आज भी हम इस बात पर कायम हैं।
वहीं एक देश एक चुनाव के मुद्दे पर समर्थन की बात भी कही। जेडीयू ने कहा कि हम इस मसले पर पहले भी साथ थे। गौरतलब है कि भाजपा को लोकसभा चुनाव में 240 सीटें मिली हैं, जबकि जेडीयू को 12 पर विजय हासिल हुई है। आंध्र प्रदेश की टीडीपी को 16 सीटें हासिल हुई हैं। इन दोनों दलों के सहारे ही अब भाजपा सरकार बनाने की स्थिति में है। खबर है कि नरेंद्र मोदी 8 या फिर 9 जून को पीएम पद की शपथ ले सकते हैं। सरकार गठन को लेकर दिल्ली में भाजपा के शीर्ष नेताओं की मीटिंग भी चल रही है।
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