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केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि ‘विकसित भारत के लिए परमाणु ऊर्जा मिशन’ भारत की परमाणु क्षमताओं को बढ़ाने, निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करने और उन्नत परमाणु तकनीक को स्थापित करने की एक बड़ी योजना है।
गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए डॉ. सिंह ने बताया कि केंद्रीय बजट में छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMR) के अनुसंधान और विकास के लिए ₹20,000 करोड़ का आवंटन किया गया है। सरकार का लक्ष्य 2033 तक कम से कम पांच स्वदेशी SMR को चालू करना है।
उन्होंने कहा कि यह पहल 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने के भारत के महत्वाकांक्षी लक्ष्य के अनुरूप है। यह कदम कार्बन उत्सर्जन को कम करने और स्वच्छ एवं सस्टेनेबल ऊर्जा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
डॉ. सिंह ने परमाणु उद्योग में निजी क्षेत्र की भागीदारी की अनुमति देने को गेमचेंजर बताया और कहा कि इससे ऊर्जा आत्मनिर्भरता के साथ-साथ भारत को वैश्विक परमाणु प्रौद्योगिकी में अग्रणी बनने में मदद मिलेगी।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि जिस तरह स्पेस सेक्टर को निजी कंपनियों के लिए खोला गया, उसी तरह परमाणु क्षेत्र में भी सुधारों से नवाचार और विकास को बढ़ावा मिलेगा।
सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि परमाणु ऊर्जा भारत की ऊर्जा रणनीति की आधारशिला बनेगी, जिससे देश तकनीकी रूप से उन्नत और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा। –
]]>केंद्रीय राज्यमंत्री (कार्मिक) जितेंद्र सिंह ने बताया कि भारत में बायोटेक स्टार्टअप्स की संख्या पिछले 10 वर्षों में तेजी से बढ़कर 50 से लगभग 9,000 हो गई है। उन्होंने इस वृद्धि को देश की जैव-अर्थव्यवस्था में हुए शानदार बदलाव का नतीजा बताया। नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने बताया कि 2014 में भारत की जैव-अर्थव्यवस्था 10 बिलियन डॉलर की थी, जो 2024 में बढ़कर 130 बिलियन डॉलर से अधिक हो गई। यह उद्योग 2030 तक 300 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।
मंत्री ने कहा कि प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने स्थिरता (सस्टेनेबिलिटी) को प्राथमिकता दी है। उन्होंने यह भी कहा कि एक समय था जब भारत को जलवायु और हरित मुद्दों पर गंभीरता से नहीं लिया जाता था, लेकिन अब स्थिति बदल गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2021 में सीओपी-26 में 2070 तक भारत को “शुद्ध शून्य” उत्सर्जन लक्ष्य हासिल करने की प्रतिबद्धता का जिक्र करते हुए, मंत्री ने कहा कि सरकार ने इस दिशा में कई कदम उठाए हैं। इनमें ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, जलवायु परिवर्तन मिशन और गहरे समुद्र मिशन जैसे कार्यक्रम शामिल हैं।
हाल ही में शुरू की गई ‘बायो E-3 नीति’ को मंत्री ने जलवायु परिवर्तन और अनसस्टेनेबल वेस्ट जैसी समस्याओं के समाधान की दिशा में एक अहम कदम बताया। यह नीति सस्टेनेबल डेवलपमेंट को बढ़ावा देने में मददगार साबित होगी। मंत्री ने कहा कि बायोटेक स्टार्टअप्स का विकास भारत की भविष्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों ने भारत को वैश्विक बायोप्लास्टिक मूवमेंट में अग्रणी बना दिया है, जो यह दिखाता है कि जैव प्रौद्योगिकी कैसे एक स्वच्छ और टिकाऊ भविष्य में योगदान कर सकती है।
]]>मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के गठन के बाद आज पार्टी की पहली बैठक हुई, बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और मध्य प्रदेश के प्रभारी जितेंद्र सिंह विशेष रूप से मौजूद रहे, बैठक में कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई और दिशा निर्देश जारी किये गए, प्रभारी जितेंद्र सिंह ने कहा कि अब हर 6 महीने में कार्यकारिणी की समीक्षा की जाएगी।
कार्यकारिणी की बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के सामने लोकसभा चुनाव से लेकर अब तक के कई मुद्दों पर बात हुई, नेताओं ने स्पष्ट तौर पर कहा कि जिन नेताओं ने पार्टी के साथ गद्दारी की उनकी वापसी अब कभी संभव नहीं होगी, पार्टी जल्दी ही जिला और ब्लॉक समितियों का गठन करेगी और ये जातिगत समीकरण और राजनीतिक समीकरण देखकर होगा इसके अलावा अब कांग्रेस गाँव, वार्ड और मोहल्ला स्तर पर भी समितियों का गठन करेगी।
मीडिया से बात करते हुए मप्र प्रभारी जितेंद्र सिंह ने कहा कि पार्टी अब एक मजबूत मॉनिटरिंग सिस्टम बना रही है नेताओं को उनकी जिम्मेदारी दी जा रही है वे अपने जिलों में रहेंगे फंक्शनल टास्क पूरे करेंगे, हर 6 महीने में हम समीक्षा करेंगे जो अच्छा काम करेगा उसे प्रमोट किया जायेगा और जो अच्छा काम नहीं किया जायेगा उसे कहीं और भेजा जायेगा।
]]>भारतीय वायुसेना के चार ग्रुप कैप्टन – प्रशांत बालकृष्णन नायर, अजीत कृष्णन और अंगद प्रताप तथा विंग कमांडर शुभांशु शुक्ला को 2025 के लिए निर्धारित मिशन के लिए चुना गया है। मंत्री ने यह भी बताया कि "भारत का डीप-सी मिशन 2025 में तीन भारतीयों को गहरे समुद्र में भेजेगा।"
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस) की पहल 'समुद्रयान' के नाम से जानी जाने वाली यह पहल स्वदेशी रूप से विकसित मानवयुक्त पनडुब्बी वाहन मत्स्य 6000 पर सवार होकर मध्य हिंद महासागर में 6,000 मीटर की गहराई तक जाने वाला एक चालक दल अभियान होगा। विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री ने अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की हाल की उपलब्धियों के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि रॉकेट और उपग्रहों को लॉन्च करने के अलावा, अंतरिक्ष क्षेत्र कृषि, बुनियादी ढांचे, संचार, स्वास्थ्य सेवा आदि पर सकारात्मक प्रभाव डालेगा।
उन्होंने कहा,“2022 में हमारे पास केवल एक अंतरिक्ष स्टार्टअप था और 2024 में अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोलने के बाद हमारे पास लगभग 200 स्टार्टअप होंगे और उनमें से कई की वैश्विक क्षमता है। उन्होंने यह भी बताया कि कुछ ही महीनों में अंतरिक्ष क्षेत्र में 1,000 करोड़ रुपये का निजी क्षेत्र का निवेश आया है।”
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