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मध्य प्रदेश में 18 जून को राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनाव हैं। कांग्रेस के खाते में एक सीट जा रही है। यह सीट दिग्विजय सिंह की है। दिग्विजय सिंह पहले ही राज्यसभा जाने से मना कर चुके हैं। ऐसे में अटकलें हैं कि पूर्व सीएम कमलनाथ को राज्यसभा भेजा सकता है। बुधवार को नई दिल्ली में उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की है। इसके बाद चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
राज्यसभा की तीन सीटें हो रही हैं खाली
मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटें खाली हो रही हैं। इनमें दो सीटें बीजेपी की हैं। जनवरी में पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने घोषणा की थी कि वह मध्य प्रदेश से जून में होने वाले राज्यसभा चुनावों के लिए कांग्रेस की एकमात्र सीट खाली कर देंगे।
उम्मीदवारों की है लंबी सूची
प्रदेश कांग्रेस सूत्रों के अनुसार जून में होने वाले राज्यसभा चुनावों के लिए एआईसीसी के पास उम्मीदवारों की एक लंबी सूची है। इस सूची में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पवन खेड़ा, पूर्व राज्यसभा सांसद बी के हरिप्रसाद और राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत सहित कई अन्य नाम शामिल हैं।
कांग्रेस की आएंगी पांच सीटें
वहीं, इस रेस में कमलनाथ का नाम शामिल होता है तो इससे चयन प्रक्रिया आसान नहीं होगी, क्योंकि राज्यसभा की कुल 26 सीटें खाली होने के बावजूद कांग्रेस के हिस्से में केवल पांच सीटें ही आएंगी। मध्य प्रदेश में कांग्रेस की एक सीट खाली हो रही है। ऐसे में यह काफी महत्वपूर्ण है।
कांग्रेस में नहीं मिला कोई पद
दरअसल, 2022-23 में कमलनाथ को कथित रूप से एआईसीसी अध्यक्ष बनने का प्रस्ताव मिला था। 2024 में कमलनाथ और उनके बेटे नकुलनाथ को बीजेपी में जाने की चर्चा हुई थी। इसके बाद से कांग्रेस में उन्हें कोई पद नहीं मिला है। कमलनाथ छिंदवाड़ा से सांसद रह चुके हैं। अपनी सीट उन्होंने बेटे के लिए छोड़ दी थी लेकिन 2024 में नकुलनाथ चुनाव हार गए।
माना जा रहा है प्रबल दावेदार
वहीं, दिग्विजय सिंह के बाद मध्य प्रदेश के कमलनाथ ही कांग्रेस में ऐसे कद्दावर नेता हैं, जिनके नाम पर उम्मीद की जा सकती है कि क्रॉस वोटिंग न हो। इसी साल मार्च में हुए राज्यसभा चुनावों में हरियाणा और ओडिशा में कांग्रेस के लिए क्रॉस-वोटिंग एक बड़ी समस्या बनकर उभरी थी। प्रदेश कांग्रेस के पदाधिकारियों का दावा है कि कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के अलावा किसी अन्य उम्मीदवार को शायद ही 61 विधायकों का समर्थन मिल पाए।
दो विधायक हैं वोट से वंचित
मध्य प्रदेश में कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता खत्म हो गई है। विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा को वोटिंग का अधिकार नहीं है। तीसरी एमलए निर्मला सप्रे के खिलाफ हाईकोर्ट में दल बदल का मामला लंबित है। ऐसे में हो सकता है कि वह भी वोट न दें। एमपी से राज्यसभा की एक सीट पर जीत के लिए 58 विधायकों की जरूरत है। कांग्रेस के पास इस आंकड़े से सिर्फ तीन वोट अधिक हैं। इसलिए स्थिति नाजुक है।
बीजेपी के पास हैं 165 विधायक
वहीं, मध्य प्रदेश में बीजेपी के पास 165 विधायक हैं। ऐसे में दो सीटों पर उनकी जीत पक्की है। इसके बाद उनके पास 49 विधायक बचते हैं। राज्य बीजेपी के एक वरिष्ठ प्रवक्ता ने कहा कि अगर कांग्रेस के अंदर गुटबाजी होती है तो बीजेपी तीसरी सीट पर चुनाव करवाने का मौका भुनाने से पीछे नहीं हटेगी।
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने X हैंडल पर एक पोस्ट शेयर की है। इसमें उन्होंने लिखा है कि 'अब तो कांग्रेस नेता कमलनाथ जी ने भी स्वयं कह दिया है कि देश में पेट्रोल-डीजल और गैस की कोई कमी नहीं है' 'झूठ और भ्रम के बलबूते जनता को इतने दिनों तक गुमराह कर रही कांग्रेस को अब शर्म आना चाहिए। अब समय है कि कांग्रेस जनता में डर और विश्वास पैदा कर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकना बंद कर दे।'
क्या है मामला, ऐसे समझें
कमलनाथ ने गैस क्राइसिस पर बयान दिया था
उन्होंने कहा था, गैस की ऐसी कोई कमी नहीं है
उनका बयान पार्टी लाइन से इतर आया था
भाजपा ने तत्काल इसे कांग्रेस लपक लिया
सिंधिया ने कहा, कांग्रेस जनता को गुमराह कर रही
कांग्रेस को शर्म आना चाहिए
कमलनाथ का वीडियो भी शेयर किया है
मंत्री सिंधिया ने भाजपा मध्य प्रदेश के X की पोस्ट को शेयर किया था, जिसमें पार्टी ने लिखा था कि 'अब तो कांग्रेस नेता कमलनाथ ने भी राहुल गांधी द्वारा एलपीजी को लेकर फैलाए जा रहे प्रोपेगेंडा की पोल खोल दी' इसमें कमलनाथ का छिंदवाड़ा का वह वीडियो भी लगाया गया था, जिसमें कमलनाथ ने कहा था कि, गैस की कमी नहीं है, सिस्टम में गड़बड़ी है और एक भ्रम फैलाया गया है।
कमलनाथ ने LPG पर क्या कहा था
दरअसल बीते रोज कमलनाथ छिंदवाड़ा आए थे। उन्होंने हेलीपेड पर मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा था कि, 'गैस की कोई कमी नहीं है, यह अव्यवस्था है, लेकिन माहौल बना दिया कि कमी है।' उनके इस बयान के कई मायने निकाले जा रहे हैं। उनका यह बयान पार्टी लाइन से हटकर दिया है। कांग्रेस पार्टी पूरे देश में एलपीजी और पेट्रोलियम क्राइसिस को लेकर MP सहित पूरे देश में विरोध-प्रदर्शन कर रही है। जबकि कमलनाथ कह रहे हैं कि ऐसी कोई कमी नहीं है।
BJP ने मौके को तत्काल लपक लिया
कमलनाथ का 'गैस ऐसी कोई कमी नहीं है' बयान को BJP ने तत्काल पलक लिया और इसके 'कांग्रेस के गैस की क्राइसिस कैंपेन' की हवा निकालने के लिए उपयोग कर रही है। भाजपा इस मौके को कतई छोड़ने वाली नहीं है। MP से लेकर दिल्ली तक भाजपा ने इसको लेकर राहुल गांधी और कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
दरअसल, पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने हाल ही में MPTAK के पॉडकास्ट में बताया कि कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच मतभेद विचारधारा (आइडियोलॉजिकल) नहीं, बल्कि व्यक्तिगत (पर्सनालिटी) थे.
वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय ने बताया कि उन्होंने कई बार दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता की कोशिश की. यहां तक कि एक उद्योगपति के घर डिनर मीटिंग आयोजित कर कई मुद्दों पर सहमति बनाई गई और एक 'विशलिस्ट' तैयार हुई, जिसमें ग्वालियर-चंबल संभाग से जुड़े मुद्दों पर सहयोग का आश्वासन भी था.
दिग्विजय सिंह ने कहा कि उन्होंने भी उस लिस्ट पर दस्तखत किए थे, लेकिन बाद में उसका कोई पालन नहीं हुआ. इसी वजह से विवाद बढ़ा और सरकार गिर गई. दिग्विजय ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने सरकार गिरने की चेतावनी पहले ही दी थी, न कि भरोसा दिलाया था कि सरकार बचेगी.
अब दिग्विजय सिंह के इस बयान के बाद राजनीति गरमा गई है. कमलनाथ ने भी कड़ा पलटवार किया है. कमलनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर लिखा, ''मध्य प्रदेश में 2020 में मेरे नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार गिरने को लेकर हाल ही में कुछ बयानबाजी हुई है. मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूं कि पुरानी बातें उखाड़ने से कोई फायदा नहीं. लेकिन यह सच है कि व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा के अलावा ज्योतिरादित्य सिंधिया को लगता था कि सरकार दिग्विजय सिंह चला रहे हैं. इसी नाराजगी में उन्होंने कांग्रेस के विधायकों को तोड़ा और हमारी सरकार गिराई.''
2018 में सरकार बनी, 2020 में गिरी
बता दें कि साल 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 114 सीटें जीतकर सत्ता में वापसी की थी, जबकि BJP को 109 सीटें मिली थीं. बसपा (2), सपा (1) और निर्दलियों (4) के समर्थन से कमलनाथ के नेतृत्व में सरकार बनी. लेकिन डेढ़ साल बाद मार्च 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने 22 समर्थक विधायकों के साथ कांग्रेस छोड़कर BJP में शामिल हो गए, जिसके बाद कमलनाथ सरकार अल्पमत में आ गई और 20 मार्च 2020 को गिर गई.
BJP ने कहा- अब सच्चाई सामने है
इस मुद्दे पर BJP ने भी प्रतिक्रिया दी. पार्टी के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने कहा, ''अब सच्चाई सामने है कि कांग्रेस की कमलनाथ सरकार मिस्टर बंटाधार चला रहे थे. सरकार पर माफियाओं और भ्रष्टाचार का शिकंजा था. कुशासन और अव्यवस्था का बोलबाला था. इसलिए ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मध्य प्रदेश को बचाने और सुशासन व विकास की पटरी पर लाने के लिए भाजपा की स्थिर सरकार बनाई.''
BJP मीडिया प्रभारी ने यह भी आरोप लगाया कि कमलनाथ का बयान कांग्रेस के भीतर चल रही गुटबाजी और दिग्विजय सिंह के प्रभाव को उजागर करता है.
]]>बीते दिनों प्रदेश कांग्रेस कमेटी की राजनीतिक मामलों की समिति की बैठक हुई थी और उसके बाद इस बात की चर्चा जोरों पर थी कि कमलनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कुछ मसलों पर अपनी नाराजगी जताई है। नाराजगी की चर्चाओं के बीच कमलनाथ ने कहा कि कांग्रेस की मजबूती के लिए और प्रदेश की व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए हम सब कांग्रेस जन एक हैं। विवाद का कोई प्रश्न ही नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि पिछले दिनों हुई प्रदेश की राजनीतिक मामलों की समिति की बैठक को लेकर मीडिया में नाराजगी के जो कयास लगाए जा रहे हैं, वह निराधार हैं।
ज्ञात हो कि राज्य में विधानसभा चुनाव के बाद प्रदेश अध्यक्ष की कमान जब से जीतू पटवारी को सौंपी गई है, उसके बाद से वरिष्ठ नेताओं और नई पीढ़ी के नेताओं के बीच दूरी होने के आरोप लगते रहे हैं। कार्यकारिणी के गठन से लेकर अन्य नियुक्तियों में वरिष्ठ नेताओं की सहमति न लिए जाने की चर्चाएं भी जोरों पर रही। इसी बीच बीते दिनों और राजनीतिक मामलों की समिति की बैठक हुई और इस बैठक के दौरान कुछ मसलों पर विचार विमर्श हुआ।
बैठक के बाद कुछ ऐसी बातें सामने आई जिसमें कहा गया कि वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी अपने वरिष्ठ नेता कमलनाथ और दिग्विजय सिंह की राय को अहमियत नहीं देते हैं। कहा तो यहां तक गया कि कमलनाथ को कार्यक्रमों की जानकारी अखबारों के जरिए मिलती है, जिस पर दिग्विजय सिंह ने भी सहमति जताई, हां यह बात अलग है कि इन नेताओं के बयान खुले तौर पर सामने नहीं आए। यह सारी बातें बैठक में कहे जाने का जिक्र जरूर किया गया और यही कारण है कि अब कमलनाथ को सफाई देना पड़ी है।
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वरिष्ठ कांग्रेस नेता कमलनाथ 28 साल बाद अपने जन्मदिन पर 18 नवंबर को छिंदवाड़ा में सभी कांग्रेस नेताओं-कार्यकर्ताओं के साथ होंगे। उनके जन्मदिन की तैयारियां कांग्रेसजनों ने शुरू कर दी हैं। इस बार वे हम सभी के साथ अपना जन्मदिन केक काटेंगे। यह जानकारी शुक्रवार को जिला कांग्रेस अध्यक्ष विश्वनाथ ओक्टे ने राजीव भवन में पत्रकारों को दी।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष ओक्टे ने बताया कि पिछली बार कमलनाथ जब 50 वर्ष की उम्र में थे, तब उन्होंने कांग्रेसजनों के साथ अपना जन्म दिन मनाया था। लम्बे अरसे के बाद वे अपने कार्यकर्ताओं के साथ होंगे, इससे उनका उत्साह दोगुना हो गया है। इस दिन 18 नवंबर को कमलनाथ और नकुलनाथ सुबह सबसे पहले सिमरिया हनुमान मंदिर दर्शन करने जाएंगे। फिर राजीव भवन में आयोजित जन्मदिन कार्यक्रम में सम्मिलित होंगे।
ऐसे में छिंदवाड़ा में प्रदेश भर के दिग्गज नेता जुट रहे हैं। जिले के अधिकांश होटल और लॉज के कमरे बुक हैं।
विधानसभा नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा, पूर्व मंत्री सुखदेव पांसे, पूर्व मंत्री लखन घनघोरिया, पूर्व मंत्री बाला बच्चन सहित प्रदेश के दर्जनों बड़े नेता जन्म दिन समारोह में शामिल होंगे। 18 नवंबर को जन्मदिन पर कमलनाथ व नकुलनाथ सुबह सिमरिया हनुमान मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना करेंगे।
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राजीव भवन में धर्मसभा का आयोजन
जिला कांग्रेस कार्यालय राजीव भवन में धर्मसभा का आयोजन होगा। इस दौरान कार्यकर्ता केक काटकर जन्मदिन मनाएंगे। कार्यकर्ता शहर के प्रमुख मंदिरों में पूजा अर्चना व मजार पर चादर चढ़ाएंगे। जिला अस्पताल में मरीजों को फल वितरण और वृद्धाश्रम में वृद्धों को भोज कराएंगे।
शाम 6.30 बजे से कवि सम्मेलन
जबकि शाम 6.30 बजे से दशहरा मैदान (पोलोग्राउंड) में कवि सम्मेलन होगा। जाने माने कवि डॉ. कुमार विश्वास, हास्य कवि पद्मश्री डॉ. सुनील जोगी, रमेश मुस्कान, वीर रस की कवयित्री कविता तिवारी, लाफ्टर चैलेंज के दिनेश बावरा व शृंगार रस की कवयित्री प्रीति पांडे काव्य पाठ प्रस्तुत करेंगे। निनाद ललित कला समिति के सचिव आनंद बक्षी ने बताया कि 18 नवंबर शाम 6.30 बजे स्थानीय दशहरा मैदान पोलाग्राउंड में कमलनाथ के जन्मोत्सव पर कमलनाथ-नकुलनाथ की गरिमामयी उपस्थिति में विशाल कवि सम्मेलन आयोजित किया गया है।
पास या आमंत्रण की आवश्यकता नहीं
उल्लेखनीय है कि, कार्यक्रम स्थल में परिवर्तन कर अब यह कार्यक्रम दशहरा मैदान पोला ग्राउंड में होगा। आनंद बक्षी ने बताया कि आयोजन में प्रवेश हेतु पास अथवा आमंत्रण की आवश्यकता नहीं है। यह पूर्णतः निशुल्क कार्यक्रम है। महिलाओं के बैठने के लिए व्यवस्था की गई है।
ऐसे मनाएंगे कमलनाथ का जन्मदिन
कांग्रेसजन उनकी दीर्घायु की कामना के लिए अनगढ़ हनुमान मंदिर और भैय्याजी की दरगाह जाएंगे। निनाद ललित कला समिति के पदाधिकारी व कांग्रेस समन्वयक आनंद बक्षी ने बताया कि कमलनाथ के जन्मदिन पर शाम 6.30 बजे पोला ग्राउण्ड में देश के सुप्रसिद्ध कवि डॉ. कुमार विश्वास अपनी ओजस्वी वाणी से रचनाएं पाठ करेंगे। उनके साथ पद्मश्री डॉ. सुनील जोगी, रमेश मुस्कान, दिनेश बावरा, कविता तिवारी और प्रीति पाण्डेय भी अपनी रचनाएं पेश करेंगी। प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष गंगा तिवारी ने कहा कि कमलनाथ के जन्मदिन की तैयारियों में कार्यकर्ता जुटे हुए हैं। यह भव्य कार्यक्रम होगा। शहर कांग्रेस अध्यक्ष पप्पू यादव और प्रवक्ता नितिन उपाध्याय ने भी जानकारी दी।
कमलनाथ ने नोटबंदी के चलते बैंको तक वापस आई रकम का हवाला देते हुए कहा, एक आंकड़े के मुताबिक नोटबंदी के बाद लगभग 99 प्रतिशत पैसा वापस बैंकों में आ गया, जो साबित करता है कि नोटबंदी से कालेधन पर वार करने का सरकार का दावा झूठा निकला। नोटबंदी से आतंकवाद की कमर तोड़ने की भी बात कही गई थी, लेकिन हकीकत में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। देश में आतंकी घटनाएं नोटबंदी के बाद भी लगातार जारी हैं।
उन्होंने कहा, नोटबंदी से सिर्फ गरीबों की जेब और देश की अर्थव्यवस्था पर डाका डाला गया। गरीबों की छोटी-छोटी बचत नोटबंदी से खत्म हो गई। सैकड़ों लोग कतार में मर गए, कई शादियां टूट गईंं, लेकिन इस सरकार के पास नोटबंदी की सफलता के नाम पर सिर्फ झूठे दावे और आंकडे़ ही हैं। 1000 रुपये के नोट बंद कर 2000 रुपये के नोट चलन में लाना और फिर ये कहना कि बडे़ नोट भ्रष्टाचार रोकने के लिए बंद किए गए, सरकार का हास्यास्पद तर्क नजर आया। 2000 रुपये का नोट क्यों लाया गया था, और क्यों वापस लिया गया, आज तक इसका कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। ज्ञात हो कि काले धन पर रोक, आतंकवाद पर अंकुश, भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के मकसद से नौ नवंबर 2016 को नोटबंदी अमल में लाई गई थी।
]]>पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की 2023 की रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं से बलात्कार के मामले में मध्य प्रदेश देश में तीसरे नंबर पर है। इस अवधि में मध्य प्रदेश में बलात्कार के 3,029 मामले दर्ज किए गए। इसके अलावा 3,049 महिलाएं छेड़खानी का शिकार हुई और 1445 महिलाएं शारीरिक शोषण का शिकार हुई। प्रदेश में पास्को से जुड़े अपराधों में 5,951 मामले दर्ज किए गए इनमें से बलात्कार के 3,641 मामले हैं। महिलाओं और नाबालिग से हुए बलात्कारों को देखें तो प्रदेश में हर दिन 18 बलात्कार हो रहे हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि महिला अधिकारों के प्रति भारतीय जनता पार्टी की सरकार कितनी असंवेदनशील है, इसे इसी बात से समझा जा सकता है कि पिछले चार वर्ष से राज्य महिला आयोग में अध्यक्ष का पद खाली पड़ा है। महिला आयोग में शिकायतों का अंबार लगता जा रहा है लेकिन सुनवाई करने के लिए वहां कोई जिम्मेदार व्यक्ति नहीं है।
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भाजपा सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा किसी भी राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। लेकिन मध्य प्रदेश में ऐसा लगता है कि पहले शिवराज सिंह चौहान की सरकार में और अब डॉ मोहन यादव की सरकार में बेटियां लगातार असुरक्षित बनी हुई हैं। महिला सुरक्षा के मामले जब सरकार के सामने लाए जाते हैं तो उस पर कार्रवाई करने की बजाय भाजपा के नेता कुतर्क करने पर ज्यादा ध्यान देते हैं।
बीते कुछ समय में हुई घटनाओं का जिक्र करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि महिलाओं पर अत्याचार की घटनाओं से प्रदेश का सिर शर्म से झुक जाता हैं। राज्य के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव स्वयं गृह मंत्री हैं, उन्हें इन मामले में सख्त कदम उठाना चाहिए और कानून व्यवस्था का ऐसा माहौल प्रदेश में तैयार किया जाए कि अपराधी इस तरह का कदम उठाने से भयभीत हों।
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राहुल गांधी, कमल नाथ से मिले
प्रदेश कांग्रेस के पदाधिकारियों का कहना है कि राहुल गांधी, कमल नाथ से मिलने उनके आवास पर पहुंचे थे। दोपहर भोज पर दोनों के बीच आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के अलावा प्रदेश में संगठन की सक्रियता बढ़ाने सहित अन्य विषयों पर लंबी चर्चा हुई। विधानसभा चुनाव के बाद कमल नाथ को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटाकर जीतू पटवारी को अध्यक्ष बनाया था। लोकसभा चुनाव में भी कमल नाथ छिंदवाड़ा तक ही सीमित रहे। हालांकि, उनकी पहल पर ही यहां के ब्लाक कांग्रेस और विधानसभा अध्यक्षों को बदला गया है।
उमंग सिंघार को बनाया विदर्भ का वरिष्ठ समन्वयक
उधर, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने महाराष्ट्र चुनाव के लिए अलग-अलग क्षेत्रों के वरिष्ठ समन्वयक नियुक्त किए हैं। इसमें मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को विदर्भ (अमरावती और नागपुर) क्षेत्र का समन्वयक बनाया है। इसके पहले प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता कुणाल चौधरी को राष्ट्रीय सचिव बनाकर महाराष्ट्र का प्रभारी बनाया है।
प्रदेश कांग्रेस सेवादल ने नौ जिला अध्यक्ष बदले
मध्य प्रदेश में कांग्रेस के 11 ब्लाक अध्यक्ष बदलने के बाद अब सेवादल ने नौ जिला अध्यक्षों को बदल दिया है। इसके साथ ही छह प्रदेश सचिव और इतने ही सह सचिव बनाए गए हैं। प्रदेश कांग्रेस सेवादल के अध्यक्ष योगेश यादव ने बताया कि संगठन द्वारा दिए जाने वाले कार्यक्रमों में जो पदाधिकारी सक्रिय भागीदारी नहीं कर रहे हैं, उनके स्थान पर नए नियुक्तियां की गई हैं।
इनमें सीधी जिला अध्यक्ष अरविंद कुमार सिंह, उज्जैन शहर कुलदीप जाट, दतिया मोहनसिंह कुशवाहा, दमोह संजय चौरसिया, आगर देवकरण पाटीदार, धार जितेन्द्र जोशी, सतना शहर आनंद सेन, सतना ग्रामीण बरमेन्द्र सिंह परिहार और मैहर जिला अध्यक्ष अरुण तनय मिश्रा को बनाया है।
रकीब खान को इंदौर, ओमप्रकाश सिकरवार ग्वालियर, ब्रजकिशोर उपाध्याय मुरैना, अजय नागेश्वर नर्मदापुरम, दिनेश कलोसिया इंदौर और चन्द्रशेखर राज बबलू सागर को प्रदेश सचिव बनाया गया है। अनिल कुमार शर्मा उज्जैन, बीके नामदेव दतिया, मनीष गोमे उज्जैन, इमरान अंसारी अनूपपुर, रामनिवास शर्मा दतिया और वीरेन्द्र ठाकुर दमोह को सह सचिव का दायित्व दिया गया है।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष भी बदले जाएंगे
सूत्रों का कहना है कि प्रदेश कांग्रेस की कार्यकारिणी घोषित होने के बाद कुछ जिला कांग्रेस अध्यक्ष भी बदल जाएंगे। नए और ऐसे चेहरों को आगे लाया जाएगा, जो सभी नेताओं से सामंजस्य बनाकर संगठन की गतिविधियों का विस्तार कर सकें।
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पिता पूनमचंद यादव के निधन पर शोक व्यक्त करने भोपाल स्थित मुख्यमंत्री आवास पहुंचे। कमलनाथ ने मुख्यमंत्री से मिलकर उनके पिता के निधन पर गहरी संवेदना प्रकट की। पूनमचंद यादव का उज्जैन में 100 वर्ष की आयु में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था।
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास पहुंचे, जहां उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात कर उनके पिता के निधन पर शोक संवेदना प्रकट की। बता दें कि पिता के निधन के बाद शुक्रवार को ही मुख्यमंत्री मोहन यादव उज्जैन से भोपाल लौटे हैं, जहां उनके सरकारी आवास पर शोक व्यक्त करने के लिए विभिन्न जनप्रतिनिधि और नेता आ रहे हैं। कमलनाथ ने इस दुखद घड़ी में मुख्यमंत्री और उनके परिवार को सांत्वना दी और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। इस दौरान अन्य वरिष्ठ नेताओं और अधिकारियों ने भी मुख्यमंत्री से मिलकर संवेदना व्यक्त की।
राज्यपाल मंगूभाई पटेल, मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के पिताजी के अवसान पर शोक संवेदना व्यक्त करने समत्व भवन पहुंचे। राज्यपाल पटेल ने स्वर्गीय श्री पूनम चंद यादव जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की।
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भारतीय जनता पार्टी की मध्य प्रदेश इकाई की महामंत्री व राज्यसभा सांसद कविता पाटीदार ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ और उनके पुत्र पूर्व सांसद नकुलनाथ पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि कमलनाथ और नकुलनाथ चुनावी पर्यटन के लिए छिंदवाड़ा आते हैं।छिंदवाड़ा जिले के अमरवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में 10 जुलाई को उपचुनाव होने वाला है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ दो जुलाई को छिंदवाड़ा पहुंच रहे हैं। कमलनाथ के छिंदवाड़ा प्रवास को लेकर भाजपा नेता व राज्यसभा सांसद कविता पाटीदार ने तंज कसा है।
उन्होंने कहा कि लोकसभा का चुनाव हारने के बाद कांग्रेस नेता कमलनाथ छिंदवाड़ा की जनता के भी नहीं हुए। लोकसभा चुनाव परिणाम आने के बाद कमलनाथ और उनके बेटे नकुलनाथ छिंदवाड़ा छोड़कर चले गए। वे यहां की जनता के दुख दर्द में भी उनके साथ खड़े नहीं हो सके। छिंदवाड़ा जिले के दो वीर सपूत सीमा पर शहीद हुए, लेकिन कमलनाथ और उनका परिवार शहीद के घर श्रद्धांजलि देने और उनके परिवार को ढांढस बंधाने तक नहीं पहुंचा। चुनावी पर्यटन पर आने वाले कमलनाथ और नकुलनाथ को अमरवाड़ा की जनता करारा जवाब देगी।
सांसद कविता पाटीदार ने कहा कि सच तो यह है कि कमलनाथ मध्यप्रदेश के मूल निवासी नहीं है। वे छिंदवाड़ा की जनता को कभी अपना मानते ही नहीं थे। राजनीति करने, चुनाव जीतने के लिए छिंदवाड़ा की भोली-भाली जनता के साथ खड़े होने की बात कहते थे, लेकिन जब चुनाव हार गए, तो शहीद के परिजनों के आंसू पोंछने तक नहीं पहुंचे।
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