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सावन मास के पावन अवसर पर सीहोर का कुबेरेश्वरधाम देश की सबसे बड़ी कांवड़ यात्रा का साक्षी बनने जा रहा है। सीवन नदी से लेकर कुबेरेश्वरधाम तक का संपूर्ण मार्ग 'बोल बम' के नारों और शिवभक्तों के जयघोष से गूंज उठा है। पं. प्रदीप मिश्रा के मार्गदर्शन में आयोजित इस यात्रा के दौरान इस बार विशेष आकर्षण के रूप में हेलिकॉप्टर से श्रद्धालुओं पर पुष्पवर्षा की जाएगी।
हर कदम पर सेवा, श्रद्धालुओं का पुष्पवर्षा से स्वागत
यात्रा मार्ग पर विभिन्न स्थानों पर सेवा पंडाल लगाए गए हैं, जहां भक्तों को चाय, नाश्ता और पेयजल की सुविधा दी जा रही है। स्थानीय निवासी भी श्रद्धालुओं का पुष्पवर्षा कर स्वागत कर रहे हैं। इस बार यात्रा में देशभर से दो दर्जन से अधिक हाई-टेक डीजे शामिल किए गए हैं। इनमें सीहोर का बाबा डीजे, झारखंड का सार्जन डीजे, उत्तर प्रदेश का रावण डीजे, दिल्ली का कसाना डीजे, महाराष्ट्र का प्रशांत डीजे और इंदौर का श्याम बैंड प्रमुख हैं। ये डीजे भक्ति संगीत और धमाकेदार धुनों से भक्तों को झूमने पर मजबूर कर देंगे।
भारत की सबसे बड़ी भोजनशाला से बंटेगी प्रसादी
विठलेश सेवा समिति के व्यवस्थापक समीर शुक्ला ने बताया कि लाखों की संख्या में कांवड़िये देश के विभिन्न राज्यों से यहां पहुंच रहे हैं। इनके लिए देश की सबसे बड़ी भोजनशाला से प्रसादी वितरित की जाएगी। यह आयोजन शिवभक्ति के महाकुंभ का स्वरूप ले चुका है। विठलेश सेवा समिति के संयोजक मनोज दीक्षित ने कहा कि यह आयोजन कलियुग में शिव युग की वापसी जैसा प्रतीत हो रहा है। बीते 20-25 दिनों में 10 लाख से अधिक श्रद्धालु सीवन नदी से जल लेकर कुबेरेश्वरधाम पहुंच चुके हैं और भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर चुके हैं।
हर आयु वर्ग में उमंग, लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की भीड़
यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाएं, युवा और बुजुर्ग शामिल हो रहे हैं। पूरे क्षेत्र में भगवान शंकर के भजन, ढोल-नगाड़ों, डमरू और डीजे की धुनें गूंज रही हैं। 6 अगस्त को सुबह 9 बजे मुख्य यात्रा निकाली जाएगी, जिसमें लाखों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। जिला कलेक्टर बालागुरु के. और पुलिस अधीक्षक दीपक कुमार शुक्ला ने सीवन नदी घाट और यात्रा मार्ग का निरीक्षण किया। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता बनाने के लिए होमगार्ड, मोटरबोट, फायर ब्रिगेड और सफाई व्यवस्था को लेकर विशेष निर्देश जारी किए हैं। यातायात सुचारु रखने के लिए पुलिस अधिकारियों को भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
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कांवड़ यात्रा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत का कहना है कि कांवड़ यात्रा मार्ग पर स्थित दुकानों में क्यूआर कोड लगाने के फैसले के सही करार दिया है। योगी आदित्यनाथ सरकार की तरफ से यह आदेश दिया गया था, जिसे प्रोफेसर अपूर्वानंद समेत कई लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इसी पर अदालत का कहना है कि दुकानदारों को क्यूआर कोड और अपना लाइसेंस लगाना चाहिए। इसमें कुछ भी गलत नहीं है। इस तरह यूपी सरकार की ओर से जारी आदेश जारी रहेगा। हालांकि इस फैसले का अब कोई खास असर नहीं होगा। इसकी वजह यह है कि बुधवार को कांवड़ यात्रा का महाशिवरात्रि के साथ समापन होना है।
फिर भी अदालत का यह फैसला आने वाले सालों के लिए लागू हो सकता है। योगी सरकार ने बीते साल भी एक आदेश जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि दुकानदारों को अपना नाम बोर्ड पर लिखना होगा। इसे लेकर भी अदालत का रुख किया गया था और तब सुप्रीम कोर्ट ने उस फैसले को गलत करार दिया था। हालांकि तब भी फैसला आते-आते कांवड़ यात्रा का समापन हो गया था। फिर भी अदालत का आदेश ऐसे मामलों में भविष्य के लिए एक नजीर होता है।
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में कहा, ‘हमें बताया गया है कि आज यात्रा का अंतिम दिन है. बहरहाल, निकट भविष्य में इसके समाप्त होने की संभावना है. इसलिए इस समय हम केवल यह आदेश पारित करेंगे कि सभी संबंधित होटल मालिक वैधानिक आवश्यकताओं के अनुसार लाइसेंस और पंजीकरण प्रमाणपत्र प्रदर्शित करने के आदेश का पालन करें. हम स्पष्ट करते हैं कि हम अन्य विवादित मुद्दों पर विचार नहीं कर रहे हैं. आवेदन समाप्त किया जाता है.
पिछली सुनवाई में उत्तर प्रदेश प्रशासन द्वारा 25 जून को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति का हवाला देते हुए झा ने कहा था, ‘नए उपायों में कांवड़ मार्ग पर स्थित सभी भोजनालयों पर क्यूआर कोड प्रदर्शित करना अनिवार्य है जिससे मालिकों के नाम और पहचान का पता चलता हो। इस तरह उसी भेदभावपूर्ण तरीके से पहचान की बात हो रही है जिस पर पहले इस अदालत ने रोक लगा दी थी.’ याचिका में कहा गया था कि राज्य सरकार का निर्देश, जिसमें दुकान मालिकों को ‘‘कानूनी लाइसेंस आवश्यकताओं’’ के तहत धार्मिक और जातिगत पहचान बताने के लिए कहा गया है, दुकान, ढाबा और रेस्टोरेंट मालिकों की निजता के अधिकार का उल्लंघन है.
हिंदू कैलेंडर के अनुसार श्रावण महीने में शिवलिंगों का जलाभिषेक करने के लिए बड़ी संख्या में कांवड़िए गंगा और अन्य नदियों से जल लेकर आते हैं. कई श्रद्धालु इस महीने में मांसाहार से परहेज करते हैं. कई लोग तो प्याज और लहसुन युक्त भोजन भी नहीं खाते.
]]>उत्तर प्रदेश की राह पर एमपी
मध्य प्रदेश में अब कावड़ यात्री सरकार के वीआईपी अतिथि होंगे, क्योंकि कांवड़ियों को मोहन यादव सरकार ने खाने पीने से लेकर रहने तक की सुविधा देने का फैसला किया है. जिसकी तैयारियां खंडवा इंदौर मार्ग पर हो गई हैं. दरअसल, श्रावण मास शुरू होते ही शिव के दर्शन के लिए कावड़ यात्रियों की बड़ी संख्या में उज्जैन और ओंकारेश्वर सहित शिव तीर्थों की ओर से यात्रा आरंभ हो चुकी है. लिहाजा उत्तर प्रदेश सरकार की तर्ज पर सीएम मोहन यादव ने भी यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं. जिसके बाद इंदौर जिले में कांवड़ यात्रियों के लिए जिला प्रशासन द्वारा विशेष व्यवस्था की गई है.
भोजन एवं फलाहार की विशेष व्यवस्था
मुख्यमंत्री के निर्देश पर कावड़ यात्रियों के लिए राजोदा (सांवेर रोड) और बाईग्राम (खंडवा रोड, महू क्षेत्र) में ठहराव, भोजन और विश्राम की समुचित व्यवस्था की गई हैं. इसी प्रकार इंदौर-उज्जैन महाकालेश्वर मार्ग पर राजोदा ग्राम में रामा फास्फेट फैक्ट्री के सामने और इंदौर-ओंकारेश्वर मार्ग पर बाईग्राम में वाटरप्रूफ डोम बनाए गए हैं, जिनमें यात्रियों को शयन, भोजन, चाय, फलाहार और प्राथमिक उपचार जैसी सुविधाएं प्रदान की जा रही है. भोजन की व्यवस्था प्रतिदिन 8 बजे से रात्रि 10 बजे तक रहेगी.
उपवास वाले कांवड़ियों का खास ख्याल
कांवड़ यात्रियों के साथ चलने वाले श्रद्धालुओं के लिए बनाए गए कैंपों में चाय, रोटी, पूरी, सब्जी, दाल, चावल, खिचड़ी आदि भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है. वहीं, उपवास रखने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा का भी विशेष ध्यान रखा गया है. उनके लिए फलाहार में मोरधन की खिचड़ी, केले, ककड़ी तथा साबूदाने की खिचड़ी उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे उपवास वाले यात्री भी बिना कठिनाई के अपनी यात्रा पूरी कर सकें.
खंडवा रोड पर भारी वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध
श्रावण मास के अवसर पर इंदौर-खंडवा रोड में ट्रक भार वाहक वाहनों की आवाजाही सुबह 8 बजे से रात्रि 9 बजे तक (केवल श्रावण मास हेतु) प्रतिबंधित रहेगी. उक्त वाहन एबी रोड होते हुए सनावद की ओर जा सकेंगे. यह प्रतिबंध केवल भारी मालवाहक वाहनों पर लागू होगा. यात्री बस, कार, जीप, दोपहिया वाहन, दूध-वाहन, एलपीजी गैस सप्लाई, पानी टैंकर, एम्बुलेंस, अग्निशमन वाहन आदि आवश्यक सेवाओं से संबंधित वाहन प्रतिबंध से मुक्त रहेंगे.
कलेक्टर आशीष सिंह ने कहा, "कांवड़ यात्रा को देखते हुए इंदौर-खंडवा रोड में भारी वाहनों की आवाजाही को प्रतिबंधित किया गया है. इस साल से हम लोगों ने दो जगहों पर कांवड़ियों के लिए सुविधा केंद्र बनाने का फैसला किया है. जहां पर विभिन्न प्रकार की सुविधाएं दी जाएंगी."
]]>बरेली के बारादरी थाना क्षेत्र के जोगी नवादा में एक बार फिर सौहार्द बढ़ाने की तैयारी है। कांवड़ियों को पहले जत्था शाहनूरी मस्जिद के पास से निकलेगा। कांवड़ियों पर मुस्लिम समुदाय के लोग फूल बरसाएंगे। दो समुदायों में सौहार्द बढ़ाने में अफसर लगातार कवायद कर रहे हैं। एहतियात के तौर पर इलाके में फोर्स भी तैनात किया गया है।
हरिद्वार के लिए रवाना होंगे कांवड़िये
शुक्रवार को जोगी नवादा में शाहनूरी मस्जिद के पास से कांवड़ियों का पहला जत्था निकलेगा। शिवनंदन शर्मा के इस जत्थे में कांवड़िये गंगाजल लेने के लिए हरिद्वार को रवाना होंगे। वहां से गंगाजल लाकर सावन के पहले सोमवार को वह शहर के प्रमुख शिवालयों पर जलाभिषेक करेंगे। इसको लेकर कांवड़ियों में उत्साह है।
जोगी नवादा में पुलिस प्रशासन के अधिकारी भी लगातार नजर बनाए हुए हैं। कोई विवाद न हो, इसलिए पुलिस अलर्ट है। शुक्रवार को जुमा की नमाज के बाद जब नमाजी चले जाएंगे तो दोपहर करीब तीन बजे कांवड़ियों का जत्था गुजरेगा। बताया जा रहा है कि इस बार मुस्लिम पक्ष के लोग कांवड़ियों के जत्थे पर सौहार्द के फूल बरसाएंगे।
32 साल से मिश्रित बस्ती के वाशिंदों में थी अनबन
करीब 32 साल से मौर्य गली में पीपल के पेड़ की डाल की वजह से समस्या बनी हुई थी। यहां सड़क पार कर राकेश की छत पर जा रही डाल की वजह से सड़क पर ऊंचाई वाले वाहन या कोई चीज नहीं ले जाई जा सकती थी। चूंकि ताजियेदार अपने ताजियों की ऊंचाई कम नहीं करते थे, इसलिए करीब डेढ़ सौ मीटर सड़क छह फुट गहराई तक खोदकर ताजिया निकाला जाता था। इसकी वजह से कांवड़ यात्रा को लेकर तनातनी होती थी।
दो साल पहले विवाद के दौरान तत्कालीन एसएसपी प्रभाकर चौधरी का तबादला कर दिया गया, इंस्पेक्टर बारादरी समेत कई पुलिसकर्मी निलंबित हुए थे। पेड़ की डाल कटने के बाद से ही जोगी नवादा में सकारात्मक माहौल बनने लगा था। एसएसपी अनुराग आर्य के निर्देश पर सीओ तृतीय पंकज श्रीवास्तव ने डेढ़ महीने के अंतराल में दोनों समुदायों की बस्तियों में 18 बैठकें कर लोगों को एकमत किया था। इसके बाद पिछले सप्ताह ताजिया का जुलूस सौहार्द के माहौल में निकाला गया था।
]]>सावन महीने की शुरुआत के साथ ही कांवड़ यात्रा की तैयारियां जोरों पर हैं. हर साल लाखों श्रद्धालु शिवभक्ति में लीन होकर कांवड़ लेकर हरिद्वार से अपने-अपने शहरों की ओर निकलते हैं.
इस दौरान सड़क पर भारी भीड़ होती है, जिसे देखते हुए ट्रैफिक और सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने सख्ती शुरू कर दी है. खासकर दिल्ली-मेरठ रोड पर नियम और कड़े किए जा रहे हैं.
वाहनों को वैकल्पिक मार्ग से जाना होगा
अतिरिक्त पुलिस आयुक्त के अनुसार, रूट डायवर्जन प्लान लागू होने के बाद दिल्ली से आने वाले वाहन चौधरी चरण सिंह मार्ग (रोड नंबर 58) का प्रयोग कर यूपी गेट (गाजीपुर बॉर्डर) होते हुए एनएच-9 से जा सकेंगे। वहीं, दिल्ली से जिन्हें हरिद्वार, अमरोहा, मुरादाबाद और लखनऊ आदि स्थानों पर जाना है, वे यूपी गेट से प्रवेश कर एनएच-9 का प्रयोग करते हुए डासना से ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे होते हुए जा सकेंगे। इसके अलावा एनएच नौ के जरिये हापुड़ होते हुए मेरठ भी जा सकेंगे। वहीं, बुलंदशहर और हापुड़ की ओर से आने वाले वाहन लालकुआं से सीधे गाजियाबाद शहर की ओर न आकर एनएच-9 का प्रयोग करते हुए दिल्ली जा सकेंगे।
जीटी रोड भी बंद होगा
अतिरिक्त पुलिस आयुक्त के मुताबिक, सावन के पहले सोमवार से जीटी रोड स्थित दूधेश्वरनाथ मंदिर के आसपास का मार्ग बंद करने की योजना है। अभी बनी योजना के अनुसार, चौधरी मोड़ से हापुड़ तिराहा या मेरठ तिराहा की ओर जाने वाले वाहन घंटाघर फ्लाईओवर से होकर भेजे जा सकते हैं।फ्लाईओवर के नीचे से किसी भी वाहन को जाने नहीं देने की योजना है। विजयनगर की तरफ से भी वाहन को गोशाला बैरियर से आगे दूधेश्वरनाथ की ओर नहीं भेजने की योजना है। हालांकि, यह व्यवस्था श्रद्धालुओं की भीड़ देखते हुए लागू की जाएगी।
मेरठ तिराहे पर कंट्रोल रूम बनाया गया
नगर निगम ने कांवड़ यात्रा की तैयारी शुरू कर दी है। मेरठ तिराहे पर कांवड़ यात्रा पर नजर रखने के लिए कंट्रोल रूम बना दिया है। 200 से ज्यादा स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। कैमरों को कंट्रोल रूम से जोड़कर कांवड़ यात्रा पर नजर रखी जाएगी। दस जुलाई से कांवड़ यात्रा शुरू हो रही है। नगर आयुक्त ने तीन दिन पहले बैठक कर अधिकारियों को कांवड़ यात्रा की तैयारियां शुरू करने के निर्देश दिए। इसी क्रम में निगम के निर्माण विभाग ने मेरठ तिराहे पर कंट्रोल रूम बना दिया है। यह मुख्य कंट्रोल रूम है। कंट्रोल रूम से मेरठ रोड और जीटी रोड पर नजर रखी जाएगी। कैमरों को कंट्रोल रूम से जोड़ा जाएगा। नगर आयुक्त ने बताया कि कांवड़ यात्रा के दौरान कांवड़ मार्ग पर 24 घंटे सफाई व्यवस्था रहेगी। मेरठ रोड पर दस किलोमीटर तक अस्थाई प्रकाश व्यवस्था की जाएगी।
पड़ोसी राज्यों और जनपदों के अधिकारी मौजूद रहे
पुलिस लाइन में हुई समन्वयक बैठक में बताया गया कि तीन मुख्य कंट्रोल रूम, एक यातायात कंट्रोल रूम के अलावा 12 सब कंट्रोल रूम के जरिए पूरे कांवड़ मार्ग और यात्रा पर नजर रखी जाएगी। बैठक में पड़ोसी राज्यों और जनपदों के अधिकारी मौजूद रहे।
11 जुलाई से भारी वाहनों पर रोक
प्रशासन ने फैसला लिया है कि 11 जुलाई से दिल्ली-मेरठ रोड पर भारी वाहनों की आवाजाही पूरी तरह से रोक दी जाएगी.
इस दौरान ट्रक, बड़े मालवाहक और दूसरे भारी वाहन इस रास्ते पर नहीं चल सकेंगे. ये कदम कांवड़ यात्रियों की सुरक्षा और ट्रैफिक जाम से बचने के लिए उठाया गया है.
वन-वे ट्रैफिक व्यवस्था लागू करने की तैयारी
यात्रा के दौरान ट्रैफिक को सुचारु रखने के लिए वन-वे सिस्टम भी लागू किया जा सकता है. जानकारी के मुताबिक 22 जुलाई से लेकर 26 जुलाई के बीच किसी भी दिन यह व्यवस्था लागू की जा सकती है.
इससे रास्ते में होने वाले जाम और टकराव की स्थिति से बचा जा सकेगा.
इन रास्तों पर होगा डायवर्जन
दिल्ली से मेरठ, गाजियाबाद होते हुए हरिद्वार जाने वाले रास्तों पर खास ध्यान दिया जा रहा है. जहां जरूरत होगी, वहां डायवर्जन लगाया जाएगा ताकि कांवड़ियों को बिना किसी रुकावट के रास्ता मिल सके.
खबर है कि चौधरी मोड़ से हापुड़ तिराहा और मेरठ तिराहा जाने वाले वाहन घंटाघर फ्लाईओवर से होकर भेजे जाएंगे. साथ ही फ्लाइओवर के नीचे से किसी भी वाहन को जाने देने की अनुमति नहीं होगी.
यात्रा के बीच में पड़ने वाली टूटी सड़को की मरम्मत शुरू कर दी गई है. पुलिस और ट्रैफिक विभाग के अधिकारी लगातार रूट प्लानिंग कर रहे हैं.
कांवड़ियों की सुविधा के लिए पुख्ता इंतजाम
सुरक्षा के साथ-साथ प्रशासन ने जगह-जगह आराम करने के लिए शिविर, पानी और स्वास्थ्य सेवाओं की भी व्यवस्था की है. साथ ही मेडिकल टीम और वॉलंटियर्स को भी मुस्तैद रखा गया है ताकि किसी भी इमरजेंसी में तुरंत मदद पहुंचाई जा सके.
बता दें कि यह सारी तैयारी इस बार की कांवड़ यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए की जा रही है.
]]>मेरठ में बढ़ते कावड़ियों की तादाद को देखते हुए प्रशासन ने दौराला टोल से लेकर मोदीपुरम और दिल्ली मेरठ एक्सप्रेस वे तक अलग-अलग जगहों पर तीसरी आंख यानी ड्रोन से सुरक्षा का निरीक्षण किया। साथ ही डॉग स्क्वाड और बम निरोधक दस्ते से भी चेकिंग करवाई जा रही है । मेरठ के आलाधिकारी कावड़ मार्ग पर हर वक्त स्वयं निरीक्षण कर रहे है। इतना ही नहीं रात्रि में निकलने वाली बड़ी कावड़ो को पुलिस की गाड़ी अपनी निगरानी में उनके गंतव्य की तरफ बढ़ाती नजर आ रही है। लेकिन इस बार कावडियों के भेष में पुलिस कर्मी कम नजर आ रहे हैं।
सुरक्षा का बनाया अभेद घेरा, फिर भी हो रही घटनाएं
प्रशासन ने सुरक्षा का अभेद घेरा बनाते हुए हर 200 कदम पर स्थानीय पुलिस और यातायात पुलिस जवानों को तैनात कर रखा है। मेरठ DM और SSP ने बताया है कि कावड़ यात्रा के लिए मेरठ को 6 सुपर जोन, 22 जोन और 63 सेक्टर में पूरे शहर को बांटा गया है। पुलिस-प्रशासन कोशिश में जुटा हुआ है कि जनता और कावड़ियों को किसी को दिक्कत नही होनी चाहिए। वहीं जगह-जगह चिकित्सा कैम्प और खाने पीने और आराम करने के लिए शिविर लगे हुए है।
एसएसपी डॉ. विपिन टाडा ने बताया कि कांवड़ यात्रा को सकुशल चलाने के लिए आर ए एफ, एटीएस कमांडो महिला पुलिस, ट्रैफिक पुलिस, सिविल पुलिस, गोताखोर, पीएसी के जवान लगे हैं। मेरठ जनपद 200 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे, 1000 से ज्यादा पुलिसकर्मी डटे हुए हैं। शहर के सारे कट को बंद किया है, टोल प्लाजा पर भी फोर्स तैनात की गई है। और कंट्रोल रूम से निगरानी की जा रही है। फिर भी कई स्थानों पर कावड़ खंडित होने पर उग्र हो रहे कांवड़िए व्यवस्था की पोल खोलते नजर आ रहे हैं।
हरिद्वार से प्रतिदिन उठने लगी लाखों कांवड़
हरिद्वार से प्रतिदिन लाखों की संख्या में शिवभक्त भोले गंगाजल लेकर अपने शिवालयों की तरफ बढ़ रहे है। अभी फिलहाल ज्यादा कावड़िए हरियाणा , पंजाब, राजस्थान, दिल्ली, अलावा गाजियाबाद, हापुड़, बुलंदशहर, अलीगढ़ और.गौतमबुद्धनगर के मेरठ कावड़ मार्ग से होकर गुजर रहें है। 3 दिन बाद मेरठ के कावड़ भी जिले में प्रवेश करेंगी जो प्रशासन के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होगा।
सीएम धामी ने कहा कि किसी को परेशान करने या टारगेट के लिए ऐसा नहीं किया जा रहा है बल्कि इस फैसले का मकसद यह है कि सभी की पहचान के बारे में पता हो। हरकी पैड़ी पर कई ऐसी घटनाएं भी सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड अपने भाईचारे की वजह से जाना जाता है। हम सभी लोग यहां शांतिपूर्वक रहते हैं। एडीजी लॉ एंड ऑर्डर एपी अंशुमान ने कहा, “कांवड़ियों की ओर से कई बार शिकायतें मिली हैं। इसके कारण विवाद की घटनाएं भी सामने आई हैं। इन विवादों के मद्देनजर ही कानून-व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए उत्तराखंड में प्रशासन द्वारा होटल, रेस्टोरेंट और छोटे कारोबारियों पर सत्यापन ड्राइव चलाया जा रहा है।
इसलिए उन्हें अपने नाम की प्लेट लगाने का निर्देश दिया गया है, ताकि उनकी पहचान पता चल सके। ऐसा न करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।” बता दें कि उत्तराखंड सरकार ने फैसला किया है कि कांवड़ यात्रा के रूट पर पड़ने वाले सभी होटल, रेहड़ी, ठेली वालों को दुकान के आगे अपना नाम लिखना होगा। उत्तरप्रदेश में भी इसे लेकर दिशा निर्देश जारी कर दिए गए हैं जिसे लेकर सियासी हंगामा बरपा हुआ है।
]]>हरिद्वार के एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल ने बताया, "कांवड़ की तैयारियों के संबंध में जो होटल, ढाबे, रेस्तरां और कांवड़ मार्ग पर जो रेड़ी-पटरी वाले हैं उन्हें हमारे द्वारा सामान्य निर्देश दिया गया है कि वे अपनी दुकानों पर मालिक का नाम लिखेंगे और ऐसा न करने पर उनके खिलाफ हम कानूनी कार्रवाई करेंगे… कई बार इसके कारण विवाद की स्थिति उतपन्न होती है, इसलिए हमारे द्वारा यह निर्णय लिया गया है।"
कांवड़ मेले को लेकर अलर्ट रहें अफसर : डोबाल
कांवड़ मेले की तैयारियों को लेकर एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल ने गुरुवार को जिले के राजपत्रित अधिकारियों के साथ बैठक की। इसमें अधिकारियों को दिए गए अलग-अलग टास्क की समीक्षा की। एसएसपी ने स्पष्ट किया कि हर छोटी से छोटी जिम्मेदारी को लेकर अलर्ट रहें। अधीनस्थों से समन्वय बनाएं और लगातार अपडेट लेकर आवश्यक निर्देश देते रहें। किसी भी स्तर पर लापवारही नहीं चलेगी।
एसएसपी ने कहा कि हाईवे पर स्थित होटल, ढाबों व अन्य खाने-पीने की दुकानों का निरीक्षण कर रेट लिस्ट लगवाएं। हाइवे पर लगने वाले भंडारों की सूची, भंडारा स्थल की क्षमता, वाहन पार्किंग की व्यवस्था और बिजली आपूर्ति को लेकर आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जाए। प्रत्येक ड्यूटी प्वाइंट पर लगने वाले पुलिस बल की संख्या की सूचना और जिन सामान, उपकरणों और संसाधनों की आवश्यकता है, उसकी पूर्ति की जाए।
इसके साथ ही थानों में ड्रोन की उपलब्धता, ड्रोन संचालक के नाम व मोबाईल नम्बर की सूची तैयार रहे। कांवड़ मेला क्षेत्र में कहां-कहां बडे फायर टेंडर लगेंगे, छोटे फायर टेंडर कहा-कहां लगे, उन जगहों को चिन्हित करें। बैरागी कैम्प में कितने छोटे फायर टेंडर लगेंगे। उनकी सूची, कहां-कहां पर फायर पुलिस बल की ड्यूटी लगेगी, छोटे फायर टेंडर कितने लगाए जाएं। इस संबंध में जल्द कार्यवाही पूरी करें। मेला ड्यूटी के लिए गैर जनपद व पैरामिल्ट्री फोर्स की रहने और खाने की व्यवस्था पर भी एसएसपी ने जानकारी ली। उन्होंने कहा कि बरसात के मौसम को देखते हुए सभी कर्मचारियों को बरसाती, छाता इत्यादि दे दिया जाए।
उत्तर प्रदेश में भी हरिद्वार जैसा आदेश
बता दें कि, इससे पहले उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कांवड़ यात्रा पर डीआईजी अजय कुमार साहनी ने कहा था कि सारे कांवड़ मार्ग पर पुलिस द्वारा लगातार गश्त की जा रही है। कांवड़ समितियों, होटल-ढाबों वालों से बातचीत की जा रही है और यह निर्धारित किया जा रहा है कि जितने होटल-ढाबे हैं, सभी साफ-सफाई रखें, रेट लिस्ट लगाएं…होटल-ढाबे मालिकों का नाम लिखा जाए…सभी को इस बारे में बताया गया है और सभी लोग इससे सहमत हैं। अनिवार्य रूप से सभी को यह करना है…कांवड़ के शिविरों की पर्याप्त व्यवस्था की गई है।
आदेश पर विपक्ष के विरोध की विहिप ने की आलोचना
न्यूज एजेंसी भाषा की रिपोर्ट के अनुसार, मुजफ्फरनगर में कांवड़ यात्रा मार्ग पर स्थित होटल, ढाबों और रेस्टोरेंट संचालकों से उनके मालिकों के नाम लिखने के उत्तर प्रदेश पुलिस के आदेश पर विपक्षी दलों की आपत्ति जताई है। हालांकि, विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने उनकी आलोचना की और कहा कि हिंदुओं की आस्था की रक्षा के लिए यह आवश्यक है।
विहिप की यह प्रतिक्रिया तब आई जब कांग्रेस ने मुजफ्फरनगर पुलिस के आदेश की आलोचना करते हुए इसे “भारत की संस्कृति पर हमला” बताया और आरोप लगाया कि इस तरह के आदेश के पीछे की मंशा ‘मुसलमानों के आर्थिक बहिष्कार का सामान्यीकरण करने’ का प्रयास है।
ओवैसी ने आदेश को बताया भेदभावपूर्ण
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने इस आदेश को स्पष्ट रूप से ‘भेदभावपूर्ण’ करार दिया और आरोप लगाया कि यह दर्शाता है कि सरकार उत्तर प्रदेश और पूरे देश में मुसलमानों को ‘दूसरे दर्जे’ का नागरिक बनाना चाहती है।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस आदेश को “सामाजिक अपराध” करार दिया और अदालतों से मामले का स्वतः संज्ञान लेने को कहा है।
इस पर पलटवार करते हुए विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा, “मैं उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस को ‘साधुवाद’ देना चाहता हूं, जिसने लोगों (होटल-ढाबा मालिकों) को अपना नाम और पहचान बताने के लिए मजबूर किया। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ विपक्षी दल भक्तों को गुमराह करने वालों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि इस तरह का आदेश “हिंदू समाज और उसकी आस्था की रक्षा के लिए बहुत जरूरी है” क्योंकि ऐसी घटनाएं हुई हैं जब “कुछ लोगों” ने ग्राहकों को खाद्य पदार्थ बेचने से पहले उसमें थूक दिया। उन्होंने विपक्षी दलों से ऐसे लोगों का साथ न देने का आग्रह किया।
विहिप प्रवक्ता ने कहा कि अगर दुकानदार अपनी पहचान और नाम बताकर कारोबार करेंगे तो किसी को कोई आपत्ति नहीं होगी। उन्होंने पूछा, “आप (दुकानदार) अपनी पहचान छिपाकर क्या करना चाहते हैं?”
मुजफ्फरनगर पुलिस ने कांवड़ यात्रा मार्ग पर स्थित सभी भोजनालयों को अपने मालिकों के नाम प्रदर्शित करने का आदेश दिया है, ताकि ‘भ्रम की स्थिति’ से बचा जा सके।
इससे कुछ दिन पहले विश्व हिंदू परिषद ने दावा किया था कि मुसलमान अपनी पहचान छिपाकर विभिन्न हिंदू तीर्थ स्थलों पर पूजा सामग्री बेच रहे हैं। साथ ही, उसने सभी राज्य सरकारों से आग्रह किया था कि वे मुसलमानों को ऐसी दुकानें चलाने से रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाएं, ताकि “हिंदुओं की आस्था को ठेस न पहुंचे”।
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दरअसल, प्रदेश सरकार ने मोहर्रम के दौरान अस्त्र-शस्त्र पर पाबंदी लगाई है। मुरादाबाद के पूर्व सांसद एसटी हसन सरकार के इस आदेश से नाराज हैं। इस पर सपा नेता एवं पूर्व सांसद एसटी हसन का कहना है कि अगर पाबंदी लगाई जा रही है, तो फिर सब पर बराबर लगाई जानी चाहिए। सभी के धार्मिक जुलूसों में अस्त्र-शस्त्र पर पाबंदी लगाई जाए। फिर हमें कोई ऐतराज नहीं होगा। हसन ने पूछा कि मोहर्रम में इस तरह की पाबंदी की क्या जरूरत थी। कई सौ साल से मुसलमान मोर्हरम के जुलूस में अपनी कला का प्रदर्शन करते आ रहे हैं।
'मस्जिद से लाउडस्पीकर उतार ले जाते हैं'
एसटी हसन का कहना है कि इतने हैवी डीजे लेकर लोग चलते हैं कि दिल धड़कने लगते हैं, खिड़कियां हिलने लगती हैं और कार के अंदर तक वाइब्रेशन आता है। कहा कि सुप्रीम कोर्ट और योगी सरकार दोनों का ही आदेश 60 डेसिबल का है, लेकिन इसे लागू सिर्फ मस्जिदों पर कराया जाता है। अजान की आवाज अगर 60 डेसिबल से ऊपर जाती है, तो पुलिस तुरंत मस्जिद का एक लाउडस्पीकर उतार कर ले जाती है। सवाल किया कि डीजे को क्यों नहीं रोका जाता? कहा कि अगर सभी के साथ बराबरी का इंसाफ होगा, तब किसी को परेशानी ही नहीं होगी।
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आगामी 22 जुलाई से शुरू हो रहे श्रावण मास में शिवभक्त कांवड़ यात्रा के लिए निकलते हैं, लेकिन श्रावण में कांवड़ यात्रा शुरू होने से पहले कांवड़ियों को लेकर यूपी प्रशासन ने एक एडवाइजरी जारी की है, जिसके मुताबिक अब कांवड़िए कांवड़ा यात्रा के दौरान हथियारों का प्रदर्शन नहीं कर सकेंगे.
22 जुलाई से शुरू हो रहे श्रावण मास में शिव भक्त कांवड़ यात्रा करते हैं, लेकिन नई एडवाइजरी में कांवड़ यात्रा के दौरान हथियारों के प्रदर्शन पर रोक लगा दी गई है. यही नहीं,1 महीने तक चलने वाली कांवड़ यात्रा के दौरान कांवड़िए डीजे व धार्मिक गाने भी तय सीमा के भीतर बजा सकेंगे.
22 जुलाई से शुरू हो रही कांवड़ यात्रा 19 अगस्त तक चलेगी
श्रावण मास कृष्ण प्रतिपदा की शुरूआत 21 जुलाई को आरंभ हो रहा है, लेकिन उदयातिथि में श्रावण मास का शुरूआत 22 जुलाई से होगी. इसी दिन शिवभक्त गंगा जल लेकर कांवड़ यात्रा पर निकलते हैं. यूपी डीजीपी प्रशांत कुमार ने बताया कि यात्रा के मद्देनजर यातायात व्यवस्था में बदलाव किया गया है. वहीं, कांवड़ मार्गों पर भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक रहेगी.
कांवड़ियों को भाला और त्रिशूल जैसे हथियार लेकर नहीं चलने की सलाह
कांवड़ियों को भाला, त्रिशूल या किसी भी तरह का हथियार लेकर नहीं चलने की सलाह दी गई है. हालांकि कांवड़ यात्रा मार्ग पर डीजे बजाने पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा, लेकिन ध्वनि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार तय सीमा के भीतर होनी चाहिए. यात्रा मार्गों पर शराब और मांस की दुकानें भी बंद रहेंगी.
कांवड़ यात्रा पर सीसीटीवी और ड्रोन से प्रशासन रखेगी नजर
कांवड़ यात्रा पर सीसीटीवी और ड्रोन से नजर रखी जाएगी और अयोध्या-बस्ती मार्ग पर सामान्य यातायात प्रतिबंधित रहेगा. इस पर केवल एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन वाहनों को ही जाने की इजाजत होगी. एक अन्य अधिकारी ने कहा कि पुलिस अधिकारी पंजीकृत संगठनों और श्रद्धालुओं के साथ समन्वय कर रहे हैं.
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