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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कारगिल विजय दिवस की बधाई देते हुए कहा है कि भारतीय सैनिकों ने पराक्रम की पराकाष्ठा करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में पाकिस्तान को पराजित किया था। साठ दिन तक चलने वाले युद्ध की छवियां आज भी देशवासियों के मन मस्तिष्क पर बनी हुई है। भारतीय सैनिकों ने दुर्गम पहाड़ी परिस्थितियों में एक-एक चोटी को फतह कर अपने शौर्य का परचम फहराया, देश को गौरवान्वित किया और हमारा मनोबल बढ़ाया।
हमें विश्वास है कि भारतीय सेना सभी चुनौतियों का सामना करने मैं सदैव समर्थ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शौर्य और बलिदान की अमर गाथा, कारगिल विजय दिवस हम सभी के लिए गौरव का उत्सव है। मां भारती के वीर सपूतों ने सर्वस्व न्यौछावर कर कारगिल में शत्रु का संहार कर विजय प्राप्त की। यह अवसर राष्ट्र के प्रति समर्पण के प्रण का है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया के माध्यम से जारी अपने संदेश में, प्रदेशवासियों से मां भारती की सेवा में सर्वस्व समर्पित करने का संकल्प लेने का आहवान किया है।
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एक आधिकारिक प्रवक्ता ने बताया कि 25वें कारगिल विजय दिवस के अवसर पर मोदी सुबह करीब 9.20 बजे कारगिल युद्ध स्मारक जाएंगे और वहां श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। विजय दिवस के उपलक्ष्य में तीन दिवसीय समारोह 24 जुलाई को कारगिल जिले के द्रास में शुरू हुआ।
मोदी अपनी यात्रा के दौरान वर्चुअल रूप से शिंकुन ला सुरंग परियोजना का पहला विस्फोट भी करेंगे, जो एक बार पूरा हो जाने पर दुनिया की सबसे ऊंची सुरंग होगी। शिंकुन ला सुरंग परियोजना में 4.1 किलोमीटर लंबी ट्विन-ट्यूब सुरंग है, जिसका निर्माण निमू-पदुम-दारचा रोड पर लगभग 15,800 फुट की ऊंचाई पर किया जाएगा, ताकि लेह को हर मौसम में संपर्क प्रदान किया जा सके। एक बार पूरा हो जाने पर, यह दुनिया की सबसे ऊंची सुरंग होगी।
प्रवक्ता ने कहा, “शिंकुन ला सुरंग न केवल हमारे सशस्त्र बलों और उपकरणों की तेज और कुशल आवाजाही सुनिश्चित करेगी, बल्कि लद्दाख में आर्थिक और सामाजिक विकास को भी बढ़ावा देगी।
गौरतलब है कि 1999 में, पाकिस्तानी सैनिकों और कई समूहों के आतंकवादियों ने रणनीतिक श्रीनगर-लेह राजमार्ग पर नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास द्रास से बटालिक सेक्टर तक की चोटियों पर कब्जा कर लिया था। भारतीय सेना ने बाद में भारतीय वायु सेना के साथ मिलकर एक बड़ा अभियान चलाया और 74 दिन की लड़ाई के बाद अपने क्षेत्र को वापस जीतने में कामयाब रही। तब से, सेना 26 जुलाई को विजय दिवस के रूप में मनाती आ रही है, जिसका मुख्य समारोह द्रास में आयोजित किया जाता है।
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