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इंदौर के प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर में विराजित भगवान गणेश को अब नए स्वर्ण आभूषणों से श्रृंगारित किया जाएगा। इसको लेकर वर्तमान लगभग 7 किलो के सोने के आभूषणों को गलाकर नई डिजाइन में आभूषणों को तैयार किया जाएगा। जिनसे गणेश चतुर्थी पर खजराना गणेश का श्रृंगार किया जाएगा। इसके चलते जिला प्रशासन द्वारा गठित एक विशेष समिति ने बुधवार को जिला कोषालय में रखे गए पुराने स्वर्ण आभूषणों का निरीक्षण कर नए मुकुट और आभूषणों की रूपरेखा तय की।
दो चरणों में तैयार होंगे नए आभूषण
मंदिर के प्रमुख पुजारी पं. अशोक भट्ट ने बताया कि खजराना गणेश के पुराने आभूषणों को गलाकर ही नए स्वर्ण आभूषण तैयार किए जाएंगे। निर्माण कार्य को दो चरणों में किया जाएगा। पहले चांदी से मॉडल तैयार किया जाएगा, जिसमें सभी डिजाइन और माप की पुष्टि की जाएगी, फिर उसी आधार पर स्वर्ण आभूषण बनाए जाएंगे। चांदी के मॉडल बनाने में लगभग एक महीने का समय लगेगा।
भगवान के पुराने सोने के एक मुकुट में क्रैक आ गया था, जिसके चलते नया सोने का मुकुट बनाने का निर्णय कुछ समय पहले लिया गया। इसके लिए एक समिति का भी गठन किया है। भगवान गणेश के साथ ही रिद्धि-सिद्धि और शुभ-लाभ के भी नए मुकुट तैयार किए जाएंगे। करीब 6-7 किलो सोने का भगवान गणेश का मुकुट तैयार किया जाएगा।
बता दें, इंदौर का खजराना गणेश मंदिर लाखों भक्तों की आस्था का केंद्र है। रोजाना हजारों भक्त यहां भगवान के दर्शन को आते हैं। त्योहार पर ये संख्या काफी बढ़ जाती है।
गणेश चतुर्थी, तिल चतुर्थी पर बड़ी संख्या में भक्त यहां भगवान के दर्शन करने आते हैं। इसके अलावा नए साल पर भी काफी संख्या में यहां भक्त आते हैं। वहीं, बुधवार और रविवार को भी यहां भक्तों की संख्या बाकी दिनों से ज्यादा रहती है।
करीब 7 किलो है मौजूदा स्वर्ण आभूषणों का कुल वज़न
पंडित भट्ट के अनुसार, भगवान गणेश सहित रिद्धि-सिद्धि और शुभ-लाभ की मूर्तियों के लिए कुल मिलाकर लगभग 7 किलो स्वर्ण आभूषण मौजूद हैं। इनमें शामिल हैं—
भगवान गणेश के दो स्वर्ण मुकुट
रिद्धि-सिद्धि के दो मुकुट और एक चंद्रिका
शुभ-लाभ के दो मुकुट और स्वर्ण सिक्के
इन सभी पुराने गहनों को गलाकर नए और भव्य स्वरूप में ढाला जाएगा। सबसे पहले भगवान गणेश का नया स्वर्ण मुकुट और चंद्रिका तैयार की जाएगी।
गणेश चतुर्थी और तिल चतुर्थी पर होते हैं अलंकृत
हर साल गणेश चतुर्थी और तिल चतुर्थी के पावन अवसर पर भगवान को स्वर्ण आभूषण पहनाए जाते हैं। इसलिए समिति का प्रयास रहेगा कि नए मुकुट और आभूषण गणेश चतुर्थी तक तैयार हो जाएं ताकि इस वर्ष भगवान गणेश को नए स्वरूप में सजाया जा सके।
इंदौर के ज्वेलर को सौंपी गई जिम्मेदारी
पं. भट्ट ने बताया कि नए आभूषणों को इंदौर के ही एक प्रतिष्ठित ज्वेलर द्वारा तैयार किया जाएगा। सुरक्षा और पारदर्शिता के लिए इस प्रक्रिया की निगरानी समिति के सदस्य और मंदिर ट्रस्ट के प्रतिनिधि करेंगे।
समिति ने निरीक्षण कर तैयार की कार्ययोजना
बुधवार को समिति के सदस्य कलेक्टर ऑफिस स्थित कोषालय पहुंचे और मौजूद सभी स्वर्ण आभूषणों का निरीक्षण कर नए आभूषण निर्माण की कार्ययोजना तैयार की। इस दौरान मंदिर के पुजारी, ट्रस्ट के सदस्य और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।
]]>देश में इन दिनों मंदिरों के प्रसाद की शुद्धता जांच पर सबकी नजरें टिकी हैं। तिरुपति लड्डू tirupati laddu विवाद के बाद से सभी मंदिर प्रबंधन प्रसाद की शुद्धता जांच करवा रहे हैं। इसी क्रम में खजराना गणेश मंदिर का लड्डू प्रसाद और भोजन प्रसादी भी जांचा गया। भारत सरकार की एजेंसी भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने वर्ष 2023-24 में मंदिर को हाइजीनिक सर्टिफिकेट दिया है। यानी यहां के दोनों प्रसाद शुद्ध हैं।
प्रसाद और अन्नक्षेत्र दोनों में पूरी शुद्धता
श्री गणपति मंदिर प्रबंध समिति खजराना के संचालक पं. अशोक भट्ट ने बताया अन्नक्षेत्र व लड्डू प्रसादी में लगने वाली सामग्री उच्च गुणवत्ता वाली उपयोग की जाती है। लड्डू बनाने के पहले घी, बेसन, शकर, ड्रायफ्रूट्स की क्वालिटी चेक की जाती है। इसी तरह अन्नक्षेत्र में भी तुअर दाल, चावल, मसाले, तेल, केसर, आटा व सभी सामग्री ब्रांडेड होने के साथ उपयोग से पहले परखी जाती है। वर्ष 2022-23 में मंदिर प्रबंधन ने 83 लाख 90 हजार 139 रुपए की सामग्री मानक नियमों के अनुसार खरीदी। इसी कारण एफएसएसएआई द्वारा समय-समय पर शुद्धता का प्रमाण पत्र दिया जाता रहा है। चालू वित्त वर्ष में भी प्रमाण पत्र मिला है।
श्री गणपति मंदिर प्रबंध समिति खजराना के संचालक पं. अशोक भट्ट ने बताया अन्नक्षेत्र व लड्डू प्रसादी में लगने वाली सामग्री उच्च गुणवत्ता वाली उपयोग की जाती है। लड्डू बनाने के पहले घी, बेसन, शकर, ड्रायफ्रूट्स की क्वालिटी चेक की जाती है। इसी तरह अन्नक्षेत्र में भी तुअर दाल, चावल, मसाले, तेल, केसर, आटा व सभी सामग्री ब्रांडेड होने के साथ उपयोग से पहले परखी जाती है।
वर्ष 2022-23 में मंदिर प्रबंधन ने 83 लाख 90 हजार 139 रुपए की सामग्री मानक नियमों के अनुसार खरीदी। इसी कारण एफएसएसएआई द्वारा समय-समय पर शुद्धता का प्रमाण पत्र दिया जाता रहा है। चालू वित्त वर्ष में भी प्रमाण पत्र मिला है।
1 लाख लोग हर बुधवार दर्शन करने पहुंचते हैं
25-30 हजार भक्त आम दिनों में जाते हैं
3 लाख से ज्यादा भक्त त्योहारों पर दर्शन लाभ लेते हैं
4 हजार से अधिक श्रद्धालु यहां रोज लेते हैं भोजन प्रसादी अन्न क्षेत्र में रोज 4000 से अधिक श्रद्धालु दोनों समय भोजन प्रसादी लेते हैं। सुबह दाल, चावल, सब्जी, रोटी और खीर तो शाम को पनीर की सब्जी और खिचड़ी देते हैं। भोजन प्रसादी की गुणवत्ता को लेकर आज तक शिकायत नहीं आई। जहां तक श्रद्धालुओं की बात है, बुधवार को 1 लाख लोग दर्शन करने पहुंचते हैं वहीं अन्य दिनों में 25-30 हजार श्रद्धालु रोज आते हैं। त्योहारों पर आंकड़ा 3 लाख पार कर जाता है।
15 से 500 क्विंटल बिकते हैं मंदिर में अंदर 55 व बाहर 30 दुकानों के साथ ही समिति के 3 काउंटर से लड्डू प्रसाद बिकता है। बुधवार को 75 क्विंटल लड्डू बिकते हैं वहीं सप्ताह के अन्य दिनों में औसत 15 क्विंटल बिक्री होती है। प्रमुख त्योहार जैसे गणेश चतुर्थी, तिल चतुर्थी, 1 जनवरी को 500 क्विंटल तक लड्डू बिकते हैं। दुकानदारों को भी ताकीद करते रहते हैं कि वे गुणवत्ता से कतई समझौता नहीं करें। समिति सदस्यों द्वारा दुकानों पर बिक रहे लड्डू की आकस्मिक जांच भी की जाती है।
दुनियाभर के भक्तों को शुद्ध भोजन प्रसादी
अमर उजाला से बातचीत में अन्नक्षेत्र की प्रबंधक जया महाजन ने बताया कि हर दिन यहां तीन हजार लोग भोजन प्रसादी ग्रहण करते हैं। लोग दान देते हैं जिससे यह सेवा कार्य चलता है। अभी 600 दानदाता हर साल 51 हजार रुपए का दान देते हैं। इसके अलावा हर दिन भी दानदाता मदद करते हैं। दानदाता स्वयं अपने हाथों से भक्तों को भोजन करवाते हैं। भोजन में दाल चावल सब्जी रोटी और खीर रहती है। दोपहर में कड़ी खिचड़ी रहती है। अन्नक्षेत्र 13 साल से यहां पर चल रहा है और दुनियाभर के भक्तों को भोजन प्रसादी कर रहा है।
आंकड़ों में मंदिर
3 हजार भक्त हर दिन भोजन प्रसादी ग्रहण करते हैं
1 लाख भक्त हर बुधवार दर्शन करने पहुंचते हैं
25-30 हजार भक्त आम दिनों में जाते हैं
3 लाख से ज्यादा भक्त त्योहारों पर दर्शन लाभ लेते हैं
कितने लड्डू बिकते हैं हर दिन
मंदिर में अंदर 55 व बाहर 30 दुकानें हैं। इसके साथ ही समिति के 3 काउंटर से लड्डू प्रसाद बिकता है। बुधवार को लगभग 75 क्विंटल लड्डू बिकते हैं वहीं सप्ताह के अन्य दिनों में औसत 15 क्विंटल लड्डू की बिक्री होती है। प्रमुख त्योहार जैसे गणेश चतुर्थी, तिल चतुर्थी, नववर्ष के दिन 500 क्विंटल तक लड्डू बिकते हैं। समिति के सदस्यों द्वारा दुकानों पर बिक रहे लड्डू की आकस्मिक जांच की जाती है जिससे दुकानदार भी क्वालिटी के लिए जागरूक रहते हैं।