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अप्रैल 2026 विवाह मुहूर्त की पूरी लिस्ट
अप्रैल 2026 में शादी के लिए कई अच्छे मुहूर्त बन रहे हैं, जिनमें अलग-अलग तारीखों पर शुभ नक्षत्र और समय का खास संयोग देखने को मिलेगा. अगर आप इस महीने विवाह की योजना बना रहे हैं, तो ये तारीखें आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकती हैं।
15 अप्रैल, बुधवार को उत्तर भाद्रपद नक्षत्र में दोपहर 3:22 बजे से रात 10:31 बजे तक का समय बेहद शुभ और सफल वैवाहिक जीवन की शुरुआत के लिए अच्छा माना जा रहा है।
20 अप्रैल, सोमवार को रोहिणी नक्षत्र में सुबह 4:35 बजे से 7:28 बजे तक विवाह के लिए अनुकूल मुहूर्त है।
21 अप्रैल, मंगलवार को मृगशिरा नक्षत्र में सुबह 4:15 बजे से 5:52 बजे तक का समय अच्छा माना गया है।
25 अप्रैल, शनिवार की बात करें तो इस दिन भी विवाह करना शुभ रहेगा, क्योंकि उस समय संधि काल का प्रभाव कम रहेगा।
26 अप्रैल, रविवार को मघा नक्षत्र में सुबह 5:47 बजे से रात 8:27 बजे तक लंबा और अनुकूल समय है।
27 अप्रैल, सोमवार को उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में रात 9:18 बजे से 9:35 बजे तक का छोटा लेकिन शुभ मुहूर्त बन रहा है, जो दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि लाने वाला माना जाता है।
28 अप्रैल, मंगलवार को भी पूरे दिन विवाह के लिए अच्छा समय उपलब्ध रहेगा और नक्षत्र का प्रभाव सकारात्मक रहेगा।
महीने के अंत में 29 अप्रैल, बुधवार को हस्त नक्षत्र के दौरान सुबह 5:59 बजे से शाम 7:52 बजे तक का समय शादी के लिए काफी शुभ माना गया है।
अबूझ मुहूर्त अक्षय तृतीया
इस महीने का सबसे खास दिन अक्षय तृतीया का माना जा रहा है, जो 19 अप्रैल 2026 को पड़ रही है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह एक ऐसा दिन है, जिसे अबूझ मुहूर्त कहा जाता है. यानी इस दिन बिना ज्यादा गणना किए भी शादी या कोई भी शुभ काम किया जा सकता है. कहा जाता है कि इस दिन किए गए शुभ कार्य और दान का फल कभी समाप्त नहीं होता और इससे जीवन में स्थिरता और सुख-समृद्धि बनी रहती है,
ग्रहों का गोचर और वैवाहिक सुख
अप्रैल 2026 में शादी-ब्याह के लिए ग्रहों की चाल भी काफी अनुकूल मानी जा रही है. इस दौरान गुरु और शुक्र दोनों ही अच्छी स्थिति में रहेंगे. ज्योतिष के अनुसार, गुरु रिश्तों में समझ और स्थिरता लाते हैं, जबकि शुक्र प्रेम, आकर्षण और सुख-सुविधाओं का कारक माना जाता है. इन ग्रहों का शुभ होना वैवाहिक जीवन के लिए अच्छा संकेत देता है. खास बात यह है कि इस महीने के अधिकतर मुहूर्तों में भद्रा और पंचक जैसे अशुभ योग नहीं बन रहे, जिससे शादी के लिए समय और भी बेहतर हो जाता है।
]]>पंचांग के अनुसार, साल में कुछ ऐसे समय आते हैं जब मांगलिक और शुभ कार्यों को करने से परहेज किया जाता है. ऐसा ही एक विशेष समय खरमास होता है, जिसे कई जगहों पर मलमास भी कहा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश और अन्य शुभ कार्यों को टालने की सलाह दी जाती है. पंचांग के अनुसार साल 2026 में खरमास की शुरुआत 15 मार्च से हो चुकी है, जो 14 अप्रैल 2026 तक रहेगा. इस पूरे एक महीने के दौरान धार्मिक रूप से कुछ नियमों का पालन करना शुभ माना जाता है.
क्या होता है खरमास?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब सूर्य देव गुरु ग्रह की राशियों यानी धनु या मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तब खरमास लगता है. इस समय सूर्य की स्थिति ऐसी मानी जाती है कि मांगलिक कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त नहीं बन पाता. इसलिए इस अवधि में विवाह, सगाई, गृह प्रवेश जैसे बड़े और शुभ कार्यों को टाल दिया जाता है. हालांकि खरमास भले ही मांगलिक कार्यों के लिए अनुकूल न माना जाता हो, लेकिन यह समय भक्ति, साधना और दान-पुण्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना गया है.
खरमास में क्यों नहीं किए जाते मांगलिक कार्य?
धार्मिक मान्यता के अनुसार इस समय सूर्य की गति और स्थिति ऐसी होती है कि शुभ कार्यों के लिए ग्रहों का पूर्ण सहयोग नहीं मिल पाता. इसी कारण से शास्त्रों में कहा गया है कि इस अवधि में नए और बड़े कार्य शुरू करने से अपेक्षित परिणाम नहीं मिलते. इसलिए परंपरा के अनुसार लोग इन कार्यों को खरमास खत्म होने के बाद ही करते हैं.
खरमास में कौन-कौन से काम करने से बचें?
खरमास के दौरान कुछ मांगलिक कार्यों को करने से परहेज करने की सलाह दी जाती है.
विवाह और सगाई
गृह प्रवेश
नए घर का निर्माण शुरू करना
नया व्यवसाय या दुकान शुरू करना
मुंडन और नामकरण जैसे संस्कार
बड़े शुभ आयोजन
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2026 में खरमास कब से शुरू होगा?
ज्योतिष गणना के अनुसार सूर्य देव 15 मार्च 2026 को कुंभ राशि से निकलकर मीन राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य का यह राशि परिवर्तन रात 01 बजकर 08 मिनट पर होगा।
सूर्य के मीन राशि में प्रवेश करते ही खरमास की शुरुआत हो जाएगी। इस दिन मीन संक्रांति का पर्व भी मनाया जाएगा।
खरमास प्रारंभ: 15 मार्च 2026
समाप्ति: 14 अप्रैल 2026
इस पूरे एक महीने की अवधि को ज्योतिष में शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता। इसलिए इस दौरान शादी-विवाह समेत कई मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है।
खरमास में कौन-कौन से काम नहीं किए जाते?
खरमास के दौरान परंपरागत रूप से कई शुभ कार्यों को टाल दिया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में निम्न कार्य नहीं किए जाते: शादी-विवाह, सगाई या रोका, गृह प्रवेश, नामकरण संस्कार, मुंडन संस्कार, नया व्यापार या बिजनेस शुरू करना और किसी बड़े प्रोजेक्ट की शुरुआत। हालांकि इस समय पूजा-पाठ, दान-पुण्य और आध्यात्मिक कार्यों को बहुत शुभ माना जाता है।
खरमास में शुभ कार्य क्यों नहीं किए जाते?
धर्म शास्त्रों और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार जब सूर्य देव धनु या मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तब खरमास की अवधि शुरू होती है। इन दोनों राशियों का स्वामित्व गुरु बृहस्पति के पास होता है। ज्योतिष के अनुसार इस दौरान सूर्य की ऊर्जा और प्रभाव थोड़ा मंद हो जाता है, जिससे उनकी शुभता कम हो जाती है।
किसी भी शुभ और मांगलिक कार्य को सफल बनाने के लिए सूर्य और गुरु दोनों ग्रहों का मजबूत और शुभ होना जरूरी माना जाता है। लेकिन जब सूर्य इन राशियों में प्रवेश करते हैं, तो गुरु का प्रभाव भी कमजोर हो जाता है। यही कारण है कि इस अवधि में विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है।
खरमास में क्या करना होता है शुभ?
खरमास को भले ही मांगलिक कार्यों के लिए अशुभ माना जाता हो, लेकिन धार्मिक दृष्टि से यह समय पूजा-पाठ और दान-पुण्य के लिए बहुत शुभ माना जाता है।
इस दौरान इन कार्यों को करना लाभकारी माना जाता है। ऐसा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक लाभ मिलने की मान्यता है। भगवान विष्णु और सूर्य देव की पूजा। गरीबों को दान देना। गीता या धार्मिक ग्रंथों का पाठ। तीर्थ यात्रा। ध्यान और साधना।
ज्योतिषीय गणना के अनुसार 15 मार्च 2026 से खरमास की शुरुआत होगी, जो 14 अप्रैल 2026 तक चलेगा। इस दौरान शादी-विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों को टालना शुभ माना जाता है। हालांकि यह समय पूजा-पाठ, दान और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में भगवान की भक्ति और सेवा करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है।
]]>खरमास के दौरान गृह प्रवेश, मुंडन, विवाह आदि शुभ काम सब रोक दिए जाते हैं. मान्यता है कि जब सूर्य देव गुरु की राशि धनु या मीन में प्रवेश करते हैं, तो सूर्य के प्रभावों में कमी आ जाती है. वहीं गुरु के शुभ प्रभाव भी कम हो जाते हैं. शुभ कामों विशेषकर विवाह के लिए सूर्य और गुरु की शुभता आवश्क मानी जाती है. मार्च के माह में खरमास लगने वाला है. ऐसे में आइए जानते हैं कि खरमास से पहले मार्च के महीने में कितने विवाह मुहूर्त हैं.
मार्च में कब लग रहा है खरमास?
अभी सूर्य देव शनि की राशि कुंभ में गोचर कर रहे हैं. पंचांग के अनुसार, सूर्य मीन राशि में 15 मार्च दिन रविवार को 1 बजकर 8 मिनट पर प्रवेश करेंगे. उस समय सूर्य की मीन संक्रांति होगी. उसके साथ ही मार्च के खरमास का प्रारंभ हो जाएगा. ये खरमास एक माह तक रहेगा. इसके बाद सूर्य का मेष राशि में गोचर 14 अप्रैल को सुबह में 9 बजकर 38 मिनट पर होगा. इसी दिन खरमास का समापन होगा.
मार्च 2026 में विवाह मुहूर्त
2 मार्च- सोमवार, 3 मार्च- मंगलवार, 4 मार्च- बुधवार, 7 मार्च- शनिवार, 8 मार्च- रविवार, 9 मार्च- सोमवार, 11 मार्च- बुधवार, 12 मार्च- गुरुवार.
विवाह मुहूर्त तय करते समय रखें इन बातों ध्यान
अभिजीत मुहूर्त और गोधूलि बेला विवाह के लिए अत्यंत शुभ कही जाती है.
शुभ करण: किस्तुघ्न, बव, बालव, कौलव, तैतिल, गर, वणिज
विवाह के लिए शुभ तिथियां: द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, एकादशी, त्रयोदशी
विवाह के लिए शुभ वार:सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार शास्त्रों के अनुसार, ब्रह्म मुहूर्त को सबसे सात्विक और सकारात्मक ऊर्जा वाला होता है. यही कारण है कि प्राचीन काल में विवाह प्रातःकाल या सूर्यास्त के समय होते थे.
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ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार, इस वर्ष 14 मार्च 2025 को सूर्य देव कुंभ राशि से निकलकर मीन राशि में प्रवेश करेंगे, जिससे खरमास आरंभ हो जाएगा। इसके बाद 14 अप्रैल को सूर्य मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करेंगे, तब जाकर मांगलिक कार्यों वापस शुरू हो पाएंगे। बता दें कि खरमास के दौरान विवाह, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाते। अन्यथा, शुभ फलों की प्राप्ती नहीं होती है।
विवाह मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, 1 मार्च 2025 के दिन उत्तर भाद्रपद नक्षत्र का शुभ संयोग बन रहा है। यह फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया और तृतीया तिथि का दिन होगा, जो विवाह के लिए शुभ माना जाता है।
हिंदू पंचांग के अनुसार, 2 मार्च 2025 के दिन भी विवाह के लिए शुभ संयोग है। उत्तर भाद्रपद और रेवती नक्षत्र का मेल इस दिन को विवाह के लिए उत्तम बनाता है।
हिंदू पंचांग के अनुसार, 6 मार्च 2025 को फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि के साथ-साथ रोहिणी और मृगशिरा नक्षत्र का संयोग बन रहा है। इस दिन प्रीति योग भी रहेगा, जो विवाह के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
हिंदू पंचांग के अनुसार, 7 मार्च 2025 के दिन मृगशिरा नक्षत्र और आयुष्मान योग का संयोग रहेगा, जिससे वैवाहिक जीवन सुखद और समृद्ध रहने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।
हिंदू पंचांग के अनुसार, 12 मार्च 2025 को मघा नक्षत्र और रवि-शिव योग का मेल विवाह के लिए अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है। यह संयोग दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि लाने वाला होगा।
गृह प्रवेश के शुभ मुहूर्त
इसके अलावा, यदि गृह प्रवेश करना चाहते हैं तो मार्च के महीने में 1 मार्च, 5 मार्च, 6 मार्च और 14 मार्च शुभ है। इन तिथियों पर गृह प्रवेश करने से परिवार में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है।
]]>दृक पंचांग के अनुसार सूर्य देव 15 दिसंबर को रात 10:19 बजे धनु राशि में गोचर करेंगे और तभी से खरमास आरंभ हो जाएंगे। खरमास 14 जनवरी यानी मकर संक्रांति के दिन समाप्त होगा। खरमास के दौरान कुछ विशेष कार्यों को करने की मनाही होती है। आइए जानते हैं विस्तार से।
खरमास में क्या करें
धार्मिक विद्वानों के अनुसार खरमासमें प्रतिदिन भगवान विष्णु और सूर्य देव की पूजा करनी चाहिए।
इस दौरान प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सूर्य को अर्घ्य दें और उनके मंत्रों का जाप करें।
मानसिक शांति प्राप्त करने के लिए खरमास के दौरान ध्यान करें।
खरमास के दौरान अपनी क्षमता के अनुसार गरीबों की मदद करें।
खरमास में क्या ना करें
खरमास के दौरान भूलकर भी तामसिक भोजन नहीं करना चाहिए।
इस समय नया वाहन खरीदना या घर बनवाना भी अशुभ माना जाता है।
जब तक खरमास रहता है, सगाई, विवाह, सामाजिक समारोह और गृहप्रवेश निषिद्ध माने जाते हैं।
इस अवधि में आपको किसी से भी बहस करने से बचना चाहिए।
सूर्य देव को प्रसन्न करने के उपाय
खरमास के दौरान कुछ उपाय करके सूर्य देव को प्रसन्न किया जा सकता है। खरमस के दौरान सूर्य देव को अर्घ्य औदें और पूजा के बाद र पूजा करने के बाद गुड़, दूध और चावल समेत कुछ चीजों का दान करें। कहा जाता है कि इससे सूर्य देव प्रसन्न होते हैं और मनुष्य को अपना आशीर्वाद प्रदान करते हैं। साथ ही मनुष्य की सभी इच्छाएं पूरी होती हैं।
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