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मध्यप्रदेश का कूनो नेशनल पार्क अब चीतों का केवल आश्रय स्थल नहीं रहा, बल्कि एक सफल चीता प्रजनन केन्द्र के रूप में दुनिया भर में अलग पहचान बना चुका है। नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से लाए गए चीते यहां की जलवायु और पारिस्थितिकी तंत्र में पूरी तरह से रच बस गये हैं। कूनो की धरती अब आये दिन नन्हे शावकों की किलकारियों से गूंज रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का लुप्त हो चुके चीतों के देश में फिर से बसाने का सपना ‘प्रोजेक्ट चीता’ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में केन्द्र-राज्य के विभागों के समन्वय और प्रबंधन से वन्य-जीव संरक्षण के क्षेत्र में नये इतिहास लिखे जाने के साथ साकार हो रहा है।
चुनौतियों पर विजय के बाद मिली ऐतिहासिक सफलता
प्रोजेक्ट चीता का प्रारंभिक चरण शुरुआती चुनौतियों से भरा हुआ था, लेकिन कूनो की आबोहवा और विभाग के विशेषज्ञों के कुशल प्रबंधन ने सभी चुनौतियों से पार पाते हुए वन्य-जीव संरक्षण की इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लुप्त प्रजाति की पुनर्स्थापना का सफलतम पर्याय बना दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यहां की भौगोलिक परिस्थितियां और पर्याप्त शिकार चीतों के प्रजनन के लिए बेहद अनुकूल सिद्ध हुए हैं। मादा चीतों द्वारा लगातार शावकों को जन्म देना इस बात का प्रमाण है कि वे तनावमुक्त हैं और कूनो को अपना प्राकृतिक आवास मान चुकी हैं।
बढ़ता कुनबा : प्रोजेक्ट चीता की नई उड़ान
पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बूस्ट
कूनो का ब्रीडिंग सेंटर बनना केवल पर्यावरणीय उपलब्धि नहीं, बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। चीतों की बढ़ती संख्या के साथ यहां वाइल्डलाइफ टूरिज्म की संभावनाएं कई गुना बढ़ गई हैं। इससे श्योपुर और आसपास के जिलों में रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं और स्थानीय युवाओं के लिए नई संभावनाएं खुल रही हैं।
प्रोजेक्ट चीता-एक ऐतिहासिक यात्रा
17 सितंबर 2022: प्रधानमंत्री श्री मोदी ने नामीबिया से आए 8 चीतों को कूनो में छोड़ा— यह दुनिया का पहला अंतरमहाद्वीपीय बिग प्रेडेटर स्थानांतरण पुनर्स्थापना प्रोजेक्ट था।
नई पीढ़ी और भविष्य की दिशा
कूनो में अब दूसरी पीढ़ी के चीते भी विकसित हो रहे हैं। मुखी जैसी भारत में जन्मी मादा चीता का शावकों को जन्म देना पुनर्स्थापना प्रोजेक्ट में जैनेटिक ब्रीडिंग के रूप में मील का पत्थर माना जा रहा है। वन विभाग अब शावकों की पहचान नामों के बजाय कोड (जैसे KP-1, KP-2) से कर रहा है, ताकि उनकी वंशावली को वैज्ञानिक तरीके से ट्रैक किया जा सके।
आगे की योजना-दूसरा घर तैयार
कूनो पर बढ़ते दबाव को देखते हुए अब प्रदेश के गांधी सागर अभयारण्य को चीतों के दूसरे घर के रूप में विकसित करने की योजना पर काम किया जा रहा है। इससे प्रोजेक्ट चीता को और विस्तार मिलेगा और भारत में चीतों की स्थायी वापसी सुनिश्चित होगी।
कूनो नेशनल पार्क में चीतों की बढ़ती संख्या और सफल प्रजनन ने यह साबित कर दिया है कि भारत में चीतों की वापसी का सपना अब साकार हो रहा है। यह परियोजना न केवल वन्यजीव संरक्षण का उदाहरण बन रही है, बल्कि पर्यावरण, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था — तीनों क्षेत्रों में एक नई ऊर्जा का संचार कर रही है।
कूनो नेशनल पार्क : ‘प्रोजेक्ट चीता’ की विस्तृत टाइमलाइन
शुरुआत और ऐतिहासिक आगमन (2022)
विस्तार और पहली बड़ी सफलता (2023)
मई–अगस्त 2023: संक्रमण व अन्य कारणों से कुछ चीतों और शावकों की मृत्यु हुई। इसके बाद सभी चीतों को स्वास्थ्य परीक्षण हेतु बोमामें रखा गया।
पुनर्वास और नई पीढ़ी का उदय (2024)
जनवरी 2024: मादा चीता आशा ने 3 शावकों को जन्म दिया।
इसके बाद ज्वालाने दोबारा 4 शावकों को जन्म देकर प्रजनन क्षमता साबित की।
मार्च 2024: मादा चीता गामिनीने एक साथ 5 शावकों को जन्म देकर रिकॉर्ड बनाया।
नई उपलब्धियां और विस्तार (2025–2026)
नवंबर 2025: भारत में जन्मी मादा चीता मुखी ने वयस्क होकर 5 शावकों को जन्म दिया — इसे ‘जेनेटिक मील का पत्थर’ माना गया।
पहचान और नामकरण की विशेष व्यवस्था
नामीबिया से आए प्रमुख चीते (2022)
दक्षिण अफ्रीका से आए चीते (2023)
भारत में जन्मी नई पीढ़ी
मुखी: भारत में जन्मी पहली मादा चीता जिसने आगे शावकों को जन्म दिया
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चीता परियोजना के लिए दक्षिण अफ्रीका के बोत्सवाना से 9 चीते सुरक्षित रूप से कूनो नेशनल पार्क पहुंच चुके हैं। लगभग 12 घंटे की हवाई यात्रा के बाद वे ग्वालियर एयरफोर्स स्टेशन पहुंचे, जहां से तीन हेलीकॉप्टरों के जरिए उन्हें कूनो लाया गया। नई खेप के साथ देश में चीतों की कुल संख्या 39 से बढ़कर 48 हो गई है।
हेलीकॉप्टर से पहुंची 9 चीतों की खेप
कुनो नेशनल पार्क में बोत्सवाना से आए 9 चीतों की खेप पहुंचने के बाद भारत में चीता प्रोजेक्ट के इतिहास में एक और नया अध्याय जुड़ गया है. 2022 में पहली बार भारत की धरती पर चीतों की वापसी हुई थी. इसके बाद से लगातार चीतों के बढ़ने का सफर जारी है. शनिवार सुबह करीब 9.30 पर हेलीकॉप्टर से चीतों की खेप बोत्सवाना से ग्वालियर एयरबेस पर पहुंची.
केंद्रीय मंत्री ने किया प्रतीकात्मक रिलीज
इस मौके पर केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव कूनो में मौजूद रहे। उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से क्रेट का हैंडल घुमाकर चीतों को विशेष क्वारंटीन बाड़ों में छोड़ा। नई खेप में 6 मादा और 3 नर चीते शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इससे कूनो में लिंगानुपात संतुलित होगा और भविष्य में प्रजनन की संभावनाएं मजबूत होंगी।
निर्धारित कार्यक्रम के तहत केंद्रीय मंत्री सुबह नई दिल्ली से रवाना होकर ग्वालियर पहुंचे। वहां से वे हेलीकॉप्टर द्वारा कूनो पहुंचे और सुबह करीब 9:30 बजे चीतों को पार्क में रिलीज किया गया।
बढ़ गया कूनो में चीतों का कुनबा
नए चीतों के आने से अब भारत में चीतों की संख्या बढ़कर 48 हो चुकी है. अब तक कूनो नेशनल पार्क में 36 चीते थे, जिनमें 26 व्यस्क और 10 शावक थे. व्यस्कों में 14 नर चीते और 12 मादा चीता रह रही हैं. वहीं अब 9 नए वयस्क चीतों के आने से कूनो में कुल 45 वयस्क चीते हो गए हैं, वहीं नर चीतों की संख्या 17 और मादा चीतों की संख्या 18 हो गई है. इनके अलावा मध्य प्रदेश के गांधी सागर अभयारण्य में भी 3 चीते शिफ्ट किए जा चुके हैं.
फरवरी के माह में ही चीता प्रोजेक्ट के लिए दूसरी खुशखबरी है. इससे पहले हाल ही में कूनो में रह रही मादा चीता गामिनी ने शावकों को जन्म दिया था. पहले तीन शावक पैदा होने की जानकारी सामने आई थी. लेकिन शुक्रवार को केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्री भूपेंद्र यादव ने चौथे चीता शावक की अधिकारिक जानकारी सोशल मीडिया के जरिए साझा की थी.
जेनेटिक विविधता होगी मजबूत
नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका के बाद अब बोत्सवाना से चीतों के आने से कूनो में जेनेटिक विविधता और सुदृढ़ होगी। पार्क में अब 18 मादा और 16 नर वयस्क चीते हैं। सभी नए चीतों को लगभग एक महीने तक क्वारंटीन बाड़ों में विशेषज्ञों की निगरानी में रखा जाएगा। संरक्षण विशेषज्ञों का मानना है कि तीन अलग-अलग देशों के चीतों का संगम परियोजना की सफलता के लिए निर्णायक साबित होगा।
गामिनी ने दिए 4 शावक
परियोजना के लिए एक और खुशखबरी यह रही कि मादा चीता गामिनी ने 18 फरवरी को तीन नहीं बल्कि चार शावकों को जन्म दिया। घनी झाड़ियों के कारण चौथा शावक पहले नजर नहीं आया था लेकिन मॉनिटरिंग टीम और पशु चिकित्सकों की निगरानी में उसकी पुष्टि हो गई। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस जानकारी को सोशल मीडिया पर साझा किया था।
गौरतलब है कि 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से 8 चीते भारत लाए गए थे, जबकि 18 फरवरी 2023 को दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते कूनो पहुंचे थे। अब बोत्सवाना से आए 9 नए चीतों के साथ परियोजना ने एक और महत्वपूर्ण चरण पार कर लिया है।
]]>पक्षी विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, स्थानिक और लुप्त प्राय फॉरेस्ट ऑउलेट(एथिन ब्लेविटी) को पहली बार कूनो राष्ट्रीय उद्यान में देखा गया है, जो इस प्रजाति के ज्ञात वितरण क्षेत्र में उल्लेखनीय विस्तार का संकेत है। कूनो राष्ट्रीय उद्यान में फॉरेस्ट ऑउलेट की खोज भारत में जैव विविधता संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण घटना है। यह खोज इस तथ्य को देखते हुए अत्यंत महत्वपूर्ण है कि यह पक्षी विश्व के सबसे दुर्लभ शिकारी पक्षियों में से एक है और चीता परियोजना से जुड़े पर्यावास प्रबंधन के साथ इसके संभावित पारिस्थितिक संबंध हैं।
फॉरेस्ट आउलेट मध्य भारत का एक स्थानिक (endemic) पक्षी है, जिसे 1872 में पहली बार खोजा गया था, लेकिन 1884 के बाद इसे विलुप्त मान लिया गया था। लगभग 113 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद, 1997 में इसे महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले में फिर से खोजा गया, जिसने पक्षी विज्ञान की दुनिया में सनसनी फैला दी थी।
वर्तमान में यह मध्य भारत के खंडित वन क्षेत्रों में पाया जाता है, जिसमें मध्यप्रदेश (खकनार, पीपलोद), महाराष्ट्र (तोरणमाल, मेलघाट) और गुजरात (डांग, पूर्णा वन्य जीव अभयारण्य) के हिस्से शामिल हैं।
मध्यप्रदेश में फॉरेस्ट ऑउलेट पहले केवल पूर्वी खंडवा, बुरहानपुर और बैतूल जिलों में ही पाया जाता था। इस दुर्लभ पक्षी को सबसे पहले कूनो में स्थानीय पर्यटन क्षेत्र से जुड़े श्री लाभ यादव ने पारोंद बीट में क्षेत्र भ्रमण के दौरान देखा था, जिससे प्रजाति के अत्यधिक सीमित वितरण और संरक्षण स्थिति के कारण वन विभाग का ध्यान तुरंत आकर्षित हुआ। प्रमुख पहचान लक्षणों के आधार पर,वाइल्ड लाइफ रिसर्च एण्ड कंजर्वेशन सोसायटी, पुणे के श्री विवेक पटेल ने मौके पर ही इसकी पुष्टि की, जिससे यह कूनो राष्ट्रीय उद्यान से प्रजाति का पहला प्रामाणिक रिकॉर्ड बन गया।
अधिकांश उल्लुओं के व्यवहार के विपरीत, फॉरेस्ट ऑउलेट मुख्य रूप से दिन में सक्रिय रहने वाला पक्षी है। यह सुबह 6:00 से 10:00 बजे के बीच सबसे अधिक सक्रिय रहता है और कड़ी धूप में भी ऊंचे पेड़ों की टहनियों पर बैठा देखा जा सकता है।
फॉरेस्ट ऑउलेट को वर्तमान में अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ द्वारा 'लुप्त प्राय' श्रेणी में रखा गया है।इसकी कुल वैश्विक वयस्क संख्या 250 से 999 के बीच होने का अनुमान है।
मध्यप्रदेश में इसके वितरण को समझने के लिए और सर्वेक्षण किए जाने की आवश्यकता है। फॉरेस्ट ऑउलेट, जिसे कभी विलुप्त माना जाता था और 1997 में पुनः खोजा गया था, वर्तमान में मध्य भारत के सीमित क्षेत्रों में पाया जाता है और पर्यावास के क्षरण और विखंडन से लगातार खतरे का सामना कर रहा है। यह नया रिकॉर्ड कूनो राष्ट्रीय उद्यान के जंगलों के पारिस्थितिक महत्व को उजागर करता है।
फॉरेस्ट आउलेट का दिखाई देना संकेत दे रहा है कि चीता के लिये किये जा रहे संरक्षण प्रयासों से पारिस्थितिकीय तंत्र में सुधार होने से अन्य लुप्तप्राय प्रजातियों की भी वापसी हो रही है। मध्यप्रदेश के उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में इस प्रजाति के मिलने से पक्षी संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों में उत्साह की लहर है।
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मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से एक बार फिर खुशखबरी आई है। मादा चीता निर्वा ने पांच नन्हें शावकों को जन्म दिया है। जिसके बाद कूनो में अब चीतों की संख्या बढ़कर 29 हो गई है। सीएम डॉ मोहन यादव ने इसकी जानकारी दी है। मुख्यमंत्री ने नन्हें शावकों की तस्वीर भी शेयर की है।
सीएम ने शेयर की खुशखबरी
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक्स पर इस खुशखबरी को साझा किया। उन्होंने कूनो नेशनल पार्क की टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह भारत के जैव विविधता संरक्षण प्रयासों की सफलता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रकृति संरक्षण की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है।मध्य प्रदेश के मुखिया CM डॉक्टर मोहन यादव ने भी देशवासियों के साथ यह खुशी साझा की. उन्होंने अपने सोशल मीडिया हैंडल 'X' पर वीडियो पोस्ट करते हुए प्रदेश की जनता को बधाई दी और साथ ही लिखा कि "कूनो में नए मेहमानों का स्वागत है…अत्यंत प्रसन्नता है कि कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीतों का कुनबा निरंतर बढ़ रहा है. हाल ही में 5 वर्षीय नीरवा ने 5 शावकों को जन्म दिया है. इन नन्हे शावकों का आगमन चीता प्रोजेक्ट की सफलता और भारत की समृद्ध जैव-विविधता का प्रतीक है. प्रधानमंत्री नरेंद्री मोदी के मार्गदर्शन में वन्यजीव संरक्षण के लिए बनाया गया अनुकूल वातावरण आज समृद्ध हो रहा है. कूनो नेशनल पार्क की पूरी टीम, वन्यजीव विशेषज्ञों और संरक्षण में जुटे हर कर्मठ साथी को इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई.''
निर्वा दूसरी बार मां बनी
चीता निर्वा ने इससे पहले 25 नवंबर 2024 को दो शावकों को जन्म दिया था, उनके शव क्षत विक्षत हालत में मिले थे। निर्वा अब दूसरी बार मां बनी है। कूनो में इससे पहले ज्वाला 5, आशा 3, गामिनी 4 और वीरा चीता दो 2 शावकों को जन्म दे चुकी है।
दो चीते गांधी सागर अभयारण्य भेजे गए
इसमें से एक शावक मुखी दो साल की तो कई शावक सवा साल तक के हो चुके हैं। कूनो में चीतों की संख्या 12 थी, जिनमें से दो चीते प्रभाष और पावक गांधी सागर अभयारण्य भेज दिए गए हैं। सात साल की हो चुकी निर्वा चीता दक्षिण अफ्रीका के मेपस रिजर्व से लाई गई थी।
भारत में सबसे ज्यादा शावकों की मां बनी नीरवा
बता दें कि, भारत की धरती पर जन्में जीवित शावकों की संख्या अब 19 हो चुकी है. हालांकि मादा चीता नीरवा इससे पहले 22 नवंबर 2024 को भी मां बन चुकी है उसने तब 4 शावकों को जन्म दिया था. लेकिन 5 दिन बाद उसके 2 शावकों के शव मिले थे. अब 5 और चीता शावक के जन्म के साथ कूनो में नीरवा के 7 चीता शावक जीवित हैं.
17 सितंबर, 2022 को भारत आए थे चीते
17 सितंबर, 2022 को अफ्रीका के नामीबिया से 8 चीते भारत आए थे. उन्हें मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में छोड़ा गया था. फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीते कुनो लाए गए. इन पांच शावकों के जन्म से पहले, पार्क में 24 चीते थे, जिनमें 14 भारत में जन्मे शावक थे. इनमें से दो चीतो को अब गांधी सागर अभ्यारण्य में स्थानांतरित कर दिया गया है.
कूनो नेशनल पार्क में चीता परियोजना के तहत अफ्रीकी देशों से लाए गए चीतों के प्राकृतिक वातावरण में सफल प्रजनन को वन विभाग और विशेषज्ञों की कड़ी मेहनत का परिणाम बताया जा रहा है. हाल ही में कूनो से 2 चीते मंदसौर के गांधीसागर अभ्यारण्य में शिफ्ट किए गए थे, जिससे पार्क में चीतों की संख्या 24 रह गई थी. लेकिन अब नीरवा के पांच शावकों के आगमन से यह आंकड़ा फिर से 29 पर पहुंच गया है. भारत में कुल चीतों की संख्या बढ़कर 31 हो गई है.
]]>चीतों का दूसरा घर मंदसौर जिले का गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य(Gandhi Sagar Sanctuary) होगा। यहां दक्षिण अफ्रीका से चीते लाने में देरी के बीच अब कूनो नेशनल पार्क(Kuno National Park) से ही आज 20 अप्रेल को 2 चीते भेजेंगे। केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव व सीएम डॉ. मोहन यादव ने सीएम निवास पर हुई चीता प्रोजेक्ट की समीक्षा बैठक में इसे हरी झंडी दी।
18 फरवरी 2023 को जो 12 चीते दक्षिण अफ्रीका से लाए गए, उनमें से पावक और प्रभाष को गांधी सागर में छोड़ा जाएगा। 5 साल के पावक और साढ़े पांच साल के प्रभाष को खेमला वन क्षेत्र में बने 15.04 वर्ग किमी बाडे़ में छोड़ा जाएगा। दोनों भाई हैं, अभी बाडे़ में हैं। देश के अंदर चीतों की इस पहली शिफ्टिंग की शुरुआत शनिवार रात से होगी, रविवार अपराह्न तीन बजे खत्म होगी। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और सीएम डॉ. मोहन यादव अपराह्न 3 बजे दोनों को गांधीसागर में छोड़ेंगे।
सीएम बोले- कूनो में रोड टू एयर कनेक्टिविटी
सीएम डॉ. यादव (CM Mohan Yadav) ने कहा, ग्वालियर से कूनो तक पक्की सड़क बनेगी। टेंट सिटी बनेगी। युवाओं-महिलाओं को वन्य पर्यटन से जोड़ेंगे, चीता मित्र, महिला स्व-सहायता समूह को टूरिस्ट गाइड बनाएंगे। दीदी कैफे से रोजगार मिलेगा। 10 किंग कोबरा लाने पर विचार हो रहा है। सीएम ने चंबल से घड़ियाल व कछुओं को 4 बड़ी नदियों में छोड़ने के निर्देश दिए।
गुजरात भी शिफ्ट किए जाएंगे चीते
केंद्रीय मंत्री यादव ने कहा कि आज सुबह NTCA की बैठक हुई। बैठक में, NTCA ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की बैठक के दौरान लिए गए निर्णय पर एक व्यापक योजना पर चर्चा करने का फैसला किया। भविष्य में गुजरात के बन्नी घास के मैदानों और मध्य प्रदेश के गांधीसागर अभयारण्य में चीतों को पेश करने की कार्य योजना पर भी विचार-विमर्श किया गया।
सीएम हाउस में विस्तार से होगी समीक्षा
उन्होंने यह भी बताया कि चीता परियोजना से संबंधित एक विस्तृत समीक्षा बैठक मुख्यमंत्री आवास पर होगी। इस बैठक में चीतों को शिफ्ट करने पर बात होगी।
देश में हैं 58 टाइगर रिजर्व
केंद्रीय मंत्री यादव ने आगे कहा कि अब हमारे देश में 58 टाइगर रिजर्व हैं। 58वें टाइगर रिजर्व का श्रेय मध्य प्रदेश को जाता है। यह वास्तव में एक टाइगर स्टेट है और यहां माधव टाइगर रिजर्व बनाया गया है। उन्होंने कहा कि हमारा मानना है कि मध्य प्रदेश देश में एक विशेष राज्य है, जो वन, इको-टूरिज्म और सांस्कृतिक विरासत पर ध्यान केंद्रित करता है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव पर्यटन, वन और आदिवासी लोगों के विकास के लिए काम कर रहे हैं।
गांधी सागर में सारी तैयारी पूरी
इस बीच, मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री विजय शाह ने कहा कि गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में सभी जरूरी इंतजाम कर लिए गए हैं। विजय शाह उस समय राज्य के वन मंत्री थे जब चीतों को पहली बार लाया गया था। उन्होंने कहा कि लोगों को जल्द ही चीतों को वहां शिफ्ट करने की खुशखबरी मिलेगी।
कूनो नेशनल पार्क में चीतों को बसाने के बाद, अब गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य को चुना गया है। यह अभयारण्य चीतों के लिए एक नया घर होगा। सरकार चीतों की सुरक्षा और उनके विकास के लिए पूरी तरह से तैयार है।
मई में बोत्सवाना से आएंगे 4 चीते
इस शिफ्टिंग के साथ ही दक्षिण अफ्रीका, बोत्सवाना और केन्या से चीते लाने की प्रक्रिया भी जारी रहेगी। अगले एक साल में 8 और चीते मध्यप्रदेश लाए जाएंगे। बैठक में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने बताया, 4 चीते मई 2025 तक बोत्सवाना से लाए जाने हैं। भारत और केन्या के बीच अनुबंध पर सहमति प्रक्रिया चल रही है। इनमें से 4 चीते गांधी सागर अभयारण्य में रखे जाने हैं, बाकी कूनो में ही छोड़े जाएंगे।
अपने यहां सबसे ज्यादा सर्वाइवल रेट
अफसरों ने बताया, देश में जन्मे चीता शावकों का सर्वाइवल रेट विश्व में सबसे अधिक है। अन्य देशों में जलवायु अनुकूलन के अभाव में आसानी से सर्वाइव नहीं कर पाते। गांधीसागर अनुकूल है, इसलिए यहां चीते छोड़ने का फैसला लिया गया।
आइआइएफएम की मदद से ट्रेनिंग
केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा, श्योपुर के 80 गांवों के 400 चीता मित्रों को प्रशिक्षित करने के लिए आइआइएफएम भोपाल की मदद लेंगे। सैटेलाइट कॉलर आइडी से निगरानी होगी। चीता सफारी शुरू करने की प्रक्रिया तेज होगी। कूनो (Kuno National Park)और गांधी सागर से जुड़े रिजर्व व दूसरे प्रदेशों के पार्कों के बीच वन्यप्राणी कॉरिडोर के साथ पर्यटन कॉरिडोर बनाएं।
]]>बछ़ड़े पर हमला होते देख उसके मालिक व ग्रामीणों ने चीतों पर पत्थर मारना शुरू कर दिया। लाठी से भी भगाने का प्रयास किया। पास खड़ी कूनो की टीम ने ग्रामीणों को समझाया कि बछड़े का मुआवजा मिल जाता है, चीतों पर हमला न किया जाए। इस पर बछड़े के मालिक ने कहा कि हमारे सामने हमारे मवेशियों को मरता हुआ नहीं देख सकते हैं, ऐसा होगा तो हम तो हमला करेंगे।
पार्क की सीमा से बाहर आ गए थे
बता दें कि एक महीने पहले खुले जंगल में छोड़ी गई मादा चीता ज्वाला और उसके 4 शावक शनिवार शाम को पहली बार पार्क की सीमा से बाहर आ गए थे। ये चीते रविवार को दोपहर बाद फिर कूनो के जंगल की ओर लौट गए थे।
सामने बछड़ा आ गया था
रविवार रात को ये चीते वीरपुर तहसील के ग्राम भैरोपुरा के पास देखे गए। वे निर्माणाधीन श्योपुर-ग्वालियर ब्राडगेज रेल ट्रैक से करीब 1 किलोमीटर की दूरी पर थे। सोमवार सुबह मादा चीता ज्वाला के सामने बछड़ा आ गया, तो उसने शिकार की नीयत से हमला कर दिया।
लेकिन ग्रामीणों के पत्थर मारने से चीते पीछे हट गए। लाठी डंडे लेकर चिल्लाते हुए ग्रामीणों को देख चीते डर गए। मादा चीता काफी देर तक बछड़े का गला पकड़े रही, लेकिन फिर छोड़ दिया।
15 लोगों का दल कर रहा ज्वाला व शावकों की निगरानी
मादा चीता ज्वाला व शावकों की निगरानी में 15 लोगों का दल निगरानी कर रहा है, जब सोमवार सुबह यह घटना हुई तो एक दल पीछे रह गया था और एक वहीं चीतों के आसपास ही मौजूद था। ग्रामीणों से दल ने बात की और समझाने का प्रयास किया कि आगे से ऐसा न करें।
]]>कूनो नेशनल पार्क में एक माह पहले बाड़े से निकालकर खुले जंगल में छोड़ी गई मादा चीता और उसके 4 शावक बीती शनिवार की शाम को पार्क की सीमा से बाहर निकल गए. हालांकि रविवार शाम को फिर से पांचों ने कूनो के जंगल की ओर रुख कर लिया. लेकिन ज्वाला और चारों शावक बीती रात श्यामपुर के पास देखे गए. वहीं, सुबह वीरपुर के नजदीक कूनो नदी में नजर आए. इस दौरान रात और सुबह के वक्त चहलकदमी करते नजर आई चीता फैमली के वीडियो बनाकर लोगों ने सोशल मीडिया पर वायरल भी किए.
बीती आधी रात को मादा चीता ज्वाला और उसके ये शावक वीरपुर तहसील के ग्राम श्यामपुर से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर निर्माणधीन श्योपुर-ग्वालियर ब्रॉडगेज ट्रैक से गुजरते नजर आए. इस दौरान यहां से निकल रहे ट्रक चालकों ने इनके वीडियो भी बनाए.
वहीं, सुबह ये पांचों चीते निकलकर कूनो सायफन के निकट से निकलते हुए कूनो नदी में दिखे. कूनो नदी में ज्वाला और चारों शावक निर्माणधीन रेलवे पुल के नीचे काफी देर तक बैठे रहे. यही वजह है कि कूनो सायफन से गुजरने वाले राहगीरों की चीतों को देखने के लिए भीड़ भी लग गई. बताया गया है कि इसके बाद ये पांचों कूनो पार्क के जंगल की ओर बढ़ गए.
कूनो नेशनल पार्क के डीएफओ आर थिरुकुराल ने आजतक को फोन कॉल पर बताया कि हम चीतों की लोकेशन शेयर नहीं कर सकते हैं. चीते जहां भी हैं, हमारी ट्रैकिंग टीमें उन पर निगरानी बनाए हुए हैं. सभी चीता पूरी तरह फिट हैं और स्वछंद विचरण कर रहे हैं.
बता दें कि मादा चीता ज्वाला और उसके 4 शावकों को गत 21 फरवरी को खुले जंगल में खजूरी क्षेत्र में छोड़ा गया था. हालांकि, बीते एक माह से ये कूनो पार्क की सीमा में ही थे, लेकिन अब ये पहली बार पार्क की सीमा से बाहर निकले हैं.
वहीं, चीतों के बाहर निकलने पर क्षेत्र के चीता मित्र रवि रावत श्यामपुर और उनकी टीम ने आसपास के लोगों केा जागरूक किया और कहा कि चीतों की सुरक्षा हम सबकी जिमेदारी है. चीता लोगों पर हमला नहीं करता है, लिहाजा इसे भगाएं नहीं और सुरक्षा करें.
पता हो कि कूनो नेशनल पार्क में कुल 17 चीते खुले जंगल में आजाद घूम रहे हैं. इनमें 11 शावक शामिल हैं. जबकि पार्क के बाड़े में अभी 9 चीते बंद हैं.
]]>मध्यप्रदेश का कूनो नेशनल पार्क आज फिर नन्हे चीता शावकों की किलकारियों से गूंज उठा। मादा चीता वीरा ने मंगलवार को दो शावकों को जन्म दिया है। इस खुशी को लेकर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा, मादा चीता वीरा ने दो नन्हे शावकों को जन्म दिया है। मध्यप्रदेश की धरती पर फिर से चीता शावकों का स्वागत है। सीएम मोहन ने अपने एक्स हैंडल से शावकों की तस्वीरें शेयर की हैं।
सीएम डॉक्टर मोहन यादव ने एक्स हैंडल पर लिखा, मुझे यह जानकारी साझा करते हुए अत्यंत आनंद की अनुभूति हो रही है कि मध्यप्रदेश की धरती पर चीतों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। आज मादा चीता वीरा ने दो नन्हे शावकों को जन्म दिया है। मध्यप्रदेश की धरती पर चीता शावकों का स्वागत है और प्रदेशवासियों को इन नन्हे शावकों के आगमन पर हार्दिक बधाई प्रेषित करता हूं।
नन्हें चीतों की किलकारी से फिर गूंजा कूनो.. मध्यप्रदेश की 'जंगल बुक' में 2 चीता शावकों की दस्तक…
मुझे यह जानकारी साझा करते हुए अत्यंत आनंद की अनुभूति हो रही है कि मध्यप्रदेश की धरती पर चीतों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। आज मादा चीता वीरा ने 2 नन्हें शावकों को जन्म… pic.twitter.com/fCs01pIOtP
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) February 4, 2025
सीएम मोहन ने लिखा है कि प्रोजेक्ट से संबंधित सभी अधिकारियों, चिकित्सकों और फील्ड स्टॉफ को ढेर सारी बधाई। प्रदेश में चीतों का कुनबा निरंतर बढ़ने से प्रदेश के पर्यटन को नई उड़ान मिल रही है, जिससे रोजगार के नए द्वार खुल रहे हैं। हम चीतों के साथ ही समस्त वन जीवन के संरक्षण, संवर्धन और पुनर्स्थापना के लिए सदैव तत्पर हैं।
दोनों शावक स्वस्थ
कूनो प्रबंधन ने बताया कि वीरा द्वारा जन्मे गए दोनों शावक पूरी तरह स्वस्थ्य हैं। इन चीता शावकों के जन्म के बाद कूनो पार्क में कुल 14 शावक हो गए हैं। वहीं 12 वयस्कों समेत अब चीतों की संख्या 24 से बढ़कर 26 हो गई है।
वहीं नेशनल पार्क में डाक्टरों की टीम नन्हे शावकों पर नजर बनाए हुए है। इनमें से दो चीता अग्नी और वायु खुले जंगल में घूम रहे हैं।
अब इतनी कूनो पार्क में चीतों की संख्या
कूनो नेशनल पार्क में दो नए शावकों को आने के बाद अब चीतों की संख्या में भी बढ़ोतरी हो गई है। फिलहाल, कूनो पार्क में चीतों की कुल संख्या 26 हो गई है, जिनमें 12 वयस्क चीता और 14 शावक हैं। चीतों की संख्या बढ़ने से पार्क प्रबंधन ने भी राहत की सांस ली है।
चीतों की वापसी का ऐतिहासिक अभियान
बता दें कि सितंबर 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 'प्रोजेक्ट चीता' की शुरुआत की गई थी। इसके तहत नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से 20 चीतों को कूनो नेशनल पार्क में लाया गया था।भारत में करीब 70 साल पहले चीतों की प्रजाति विलुप्त हो गई थी। लेकिन इस पुनर्वास परियोजना से उनकी संख्या बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। कूनो में चीतों का प्राकृतिक वातावरण तैयार किया गया है, ताकि वे सुरक्षित और सहज रूप से जीवन व्यतीत कर सकें। इस परियोजना के तहत अब तक कई चीता शावकों का जन्म हो चुका है, जो इस संरक्षण प्रयास की सफलता को दर्शाता है।
सीएम बोले चीतों का कुनबा बढ़ने से प्रदेश के पर्यटन को मिल रही नई उड़ान
प्रदेश में चीतों का कुनबा निरंतर बढ़ने से प्रदेश के पर्यटन को नई उड़ान मिल रही है जिससे रोजगार के नये द्वार खुल रहे हैं। हम चीतों के साथ ही समस्त वन्यजीवों के संरक्षण, संवर्धन एवं पुनर्स्थापन हेतु सदैव तत्पर हैं।
कूनो में अब 26 चीते
बता दें कि इन चीता शावकों के जन्म के बाद जंगल बुक कूनो नेशनल पार्क (Kuno National Park) में अब कुल 14 शावक हो गए हैं। वहीं 12 वयस्कों समेत अब एमपी में चीतों की संख्या 24 से बढ़कर 26 हो गई है।
कूनो में चीता प्रजनन प्रक्रिया एक नजर में
27 मार्च, 2023 को मादा चीता ज्वाला ने चार शावकों को जन्म दिया।
कूनो में जन्मी मादा लगभग डेढ़ वर्ष का मुखी नामकरण किया गया।
तीन जनवरी 2024 को चीता आशा ने तीन शावकों को जन्म दिया, ये सभी नर हैं।
22 जनवरी 2024 को एक और मादा ज्वाला ने चार शावकों को जन्म दिया।
10 मार्च 2024 को मादा चीता गामिनी ने छह शावकों को जन्म दिया।
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हालांकि नर चीता कौन सा छोड़ा जाएगा यह स्पष्ट नहीं है। आशा चीता के तीन शावक भी एक साल से अधिक आयु के हो चुके हैं, ऐसे में चीता स्टियरिंग कमेटी से चर्चा कर शावकों को भी जंगल में छोड़ा जा सकता है। ताकि आशा शावकों को जंगल में शिकार के गुर सिखा सके।
मौसम हो रहा है अनुकूल
कूनो प्रबंधन का कहना है कि चीतों को एक प्रक्रिया के तहत जंगल में छोड़ा जाना तय है, अब मौसम भी अनुकूल होता जा रहा है, ऐसे में जल्द ही और चीते छोड़े जाएंगे। प्रबंधन से जुड़े सूत्र बताते हैं कि मुख्यमंत्री मोहन यादव का चार फरवरी को कराहल दौरा प्रस्तावित है, चीतों के छोड़ने के लिए उन्हें कूनो बुलाने का कार्यक्रम बनाया जा रहा है।
चीता दिवस पर खुले जंगल में छोड़ा था
चीतों की बीमारी से मौत और संक्रमण के बाद बाड़े में बंद किए गए चीतों में से दो को लंबे समय बाद अंतरराष्ट्रीय चीता दिवस पर चार दिसंबर को खुले जंगल में छोड़ा गया था। ये चीते पिछले डेढ़ माह से अधिक समय से स्वछंद विचरण कर रहे हैं।
चीते शिकार भी कर रहे हैं
वायु चीता कूनो नेशनल पार्क की सीमा में है वहीं अग्नि चीता लगभग दस दिनों से पार्क की सीमा से बाहर श्योपुर शहर से सटे श्यामपुर के जंगल में डेरा डाले है। ट्रेकिंग टीम के मुताबिक चीते समय समय पर शिकार कर भोजन की व्यवस्था भी करने लगे हैं।
चीतों के जंगल में रहने पर चिंता की बात नहीं
ऐसे में चीतों के जंगल में रहने को लेकर कोई चिंता की बात सामने नहीं आई है। बाड़े में अभी 10 चीते और 12 शावक हैं, इसमें सबसे उम्रदराज आशा चीता के तीन शावक हैं, इस चीता को जंगल में छोड़ा जाएगा। जंगल में प्रजनन की दृष्टि से एक नर चीता को और छोड़ा जा सकता है।
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