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मध्य प्रदेश में चीता प्रोजेक्ट का लगातार सफलता मिल रही है, सोमवार को ज्वाला चीता ने पांच शावकों को जन्म दिया है। इसी के साथ मध्य प्रदेश में कुल चीतों की संख्या 50 के पार पहुंच गई है। ज्वाला तीसरी बार मां बनी है। देश में जन्में चीतों की संख्या 33 पहुंच गई है। वहीं इन चीतों के जन्म के साथ कुल चीतों की संख्या 53 हो गई है।
सीएम डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया के जरिए ज्वाला चीता और उसके शावकों का वीडियो शेयर कर यह खुशखबरी दी है। बता दें कि दक्षिण अफ्रीका से लाई गई मादा चीता ‘गामिनी’ ने तीन स्वस्थ शावकों को जन्म दिया था। गामिनी दूसरी बार मां बनी। इससे पहले उसने 10 मार्च 2024 को छह शावकों को जन्म दिया था जिसमें से पांच शावक जिंदा हैं। इन नए शावकों के साथ भारत में जन्मे जीवित शावकों की संख्या बढ़कर 27 हो गई है, जबकि देश में कुल चीता आबादी अब 38 तक पहुंच गई है। वन विभाग के अनुसार, सभी नवजात पूरी तरह स्वस्थ हैं और विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों की टीम उनकी सतत निगरानी कर रही है।
प्रोजेक्ट चीता को मिल रही मजबूती
अधिकारियों का कहना है कि लगातार मिल रही प्रजनन सफलताएं प्रोजेक्ट चीता की प्रभावशीलता को साबित कर रही हैं। फील्ड स्टाफ और पशु चिकित्सकों की समर्पित निगरानी के कारण कूनो में चीतों का अनुकूलन और प्रजनन दोनों सकारात्मक दिशा में बढ़ रहे हैं। हर नया जन्म इस महत्वाकांक्षी परियोजना को नई ऊर्जा दे रहा है।
मध्य प्रदेश में चीता प्रोजेक्ट का लगातार सफलता मिल रही है, सोमवार को ज्वाला चीता ने पांच शावकों को जन्म दिया है। इसी के साथ मध्य प्रदेश में कुल चीतों की संख्या 50 के पार पहुंच गई है। ज्वाला तीसरी बार मां बनी है। देश में जन्में चीतों की संख्या 33 पहुंच गई है। वहीं इन चीतों के जन्म के साथ कुल चीतों की संख्या 53 हो गई है।
सीएम डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया के जरिए ज्वाला चीता और उसके शावकों का वीडियो शेयर कर यह खुशखबरी दी है। बता दें कि दक्षिण अफ्रीका से लाई गई मादा चीता ‘गामिनी’ ने तीन स्वस्थ शावकों को जन्म दिया था। गामिनी दूसरी बार मां बनी। इससे पहले उसने 10 मार्च 2024 को छह शावकों को जन्म दिया था जिसमें से पांच शावक जिंदा हैं। इन नए शावकों के साथ भारत में जन्मे जीवित शावकों की संख्या बढ़कर 27 हो गई है, जबकि देश में कुल चीता आबादी अब 38 तक पहुंच गई है। वन विभाग के अनुसार, सभी नवजात पूरी तरह स्वस्थ हैं और विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों की टीम उनकी सतत निगरानी कर रही है।
प्रोजेक्ट चीता को मिल रही मजबूती
अधिकारियों का कहना है कि लगातार मिल रही प्रजनन सफलताएं प्रोजेक्ट चीता की प्रभावशीलता को साबित कर रही हैं। फील्ड स्टाफ और पशु चिकित्सकों की समर्पित निगरानी के कारण कूनो में चीतों का अनुकूलन और प्रजनन दोनों सकारात्मक दिशा में बढ़ रहे हैं। हर नया जन्म इस महत्वाकांक्षी परियोजना को नई ऊर्जा दे रहा है।
इंदौर
मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) के 400 के.वी. सबस्टेशन, इंदौर में गत दिवस अर्धरात्रि के समय अचानक एक तेंदुआ घुस आया। इस आकस्मिक और जोखिमपूर्ण स्थिति में ड्यूटी पर तैनात कर्मियों ने अदम्य साहस, सतर्कता और उत्कृष्ट टीम भावना का परिचय देते हुए संभावित दुर्घटना को टाल दिया। वन विभाग की सहायता से तेंदुए को सकुशल पकड़वाने में सफलता प्राप्त की।
ड्यूटी पर तैनात आउटसोर्स सिक्योरिटी गार्ड कृष्णा बघेला, सूरज मोहनिया तथा मेंटेनेंस टीम के सदस्य राम अभिलाष ने यार्ड क्षेत्र में तेंदुए की मौजूदगी को देखकर तत्काल सबस्टेशन की ऑपरेशन एवं मेंटेनेंस टीम को सूचित किया।
इन कर्मियों ने अत्यंत धैर्य और सूझबूझ का परिचय देते हुए सभी कार्मिकों को सावधानीपूर्वक सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया और किसी भी प्रकार की अफरा-तफरी या नुकसान से स्थिति को बचाया।
वन विभाग को दी गई त्वरित सूचना
कर्मियों को सुरक्षित करने के उपरांत परीक्षण परिचारक के.के. मिश्रा ने तुरंत वन विभाग को सूचना दी। सूचना मिलते ही वन विभाग की रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची और सबस्टेशन यार्ड में अस्थायी पिंजरा स्थापित कर रेस्क्यू अभियान आरंभ किया। अथक प्रयासों के बाद तेंदुए को सुरक्षित रूप से पिंजरे में कैद किया गया। वन विभाग की टीम ने उसे बिना किसी हानि के सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।
रही इनकी सक्रिय भूमिका
इस सराहनीय और अनुकरणीय कार्य में आउटसोर्स कर्मियों के साथ परीक्षण परिचारक के.के. मिश्रा, सहायक अभियंता अतुल पराड़कर, कार्यपालन अभियंता मती नूतन शर्मा एवं अधीक्षण अभियंता जयेश चोपड़ा की सक्रिय एवं समन्वित भूमिका रही।
प्रबंध संचालक ने की सराहना
एम.पी. ट्रांसको के प्रबंध संचालक ने इस घटना में कर्मियों द्वारा दिखाई गई सतर्कता, टीमवर्क और मानवीय संवेदनशीलता की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यह घटना न केवल सबस्टेशन में कार्यरत कर्मियों की कार्यकुशलता और समर्पण का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि आकस्मिक परिस्थितियों में ट्रांसको कर्मी सजगता और जिम्मेदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने में पूर्णतः सक्षम हैं।
आउटसोर्स कर्मियों को मिलेगा सम्मान
प्रबंध संचालक ने कहा है कि इस साहसिक एवं प्रेरणादायी कार्य के लिए एम.पी. ट्रांसको प्रबंधन द्वारा संबंधित आउटसोर्स कर्मियों सहित सभी को सम्मानित कर पुरस्कृत किया जाएगा।
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दरअसल, नौरादेही अभ्यारण को चीतों का नया ठिकाना बनाने की केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही एनटीसीए ( नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी ) ने तैयारियों के लिए सेंट्रल कैंपा फंड से 4 करोड़ रुपए जारी किए हैं। यह तैयारियों की पहली किस्त है। इसके बाद जल्दी ही 3 करोड़ की दूसरी किस्त जारी की जाएगी।
तैयार होगा चीतों का ठिकाना
एनटीसीए की तरफ से जारी किए गए फंड से नौरादेही में चीतों के लिए नया घर तैयार होगा। इसमें सागर और दमोह जिले में फैले नौरादेही अभ्यारण में 4 क्वारेंटाइन बोमा और एक सॉफ्ट रिलीज बोमा तैयार किया जाएगा। साथ ही फेंसिंग सहित इंफ्रास्ट्रक्चर के अन्य जरूरी काम जल्द शुरू होंगे। वहीं, दूसरे फंड मिलने के बाद 2339 वर्ग किमी क्षेत्र में फैले प्रदेश के सबसे बड़े टाइगर रिजर्व नौरादेही में चीते बसाए जाएंगे।
एनटीसीए की टीम करेगी दौरा
केंद्र सरकार से नौरादेही अभ्यारण बनाने की मंजूरी मिलने के बाद यहां चीतों को बसाने की कवायद तेज हो गई है। 4 महीने पहले किए गए निरीक्षण में नौरादेही के सिंघपुर, मोहली और झापा फॉरेस्ट रेंज को चीतों के सबसे बेस्ट माना गया। जल्दी ही एनटीसीए की टीम इन तीनों इलाकों का दौरा करने के लिए आएगी।
फॉरेस्ट रेंज से कई गांव होंगे विस्थापित
नौरादेही में जिन तीन क्षेत्रों सिंघपुर, झापा और मोहली को चीतों को उपर्युक्त माना है। उसके अंदर 13 गांव आते हैं। चीतों को बसाने से पहले यहां के लोगों को पुनर्वासित किया जाएगा। चीतों को लाने से पहले 30 किमी के रेंज पर बाड़ेबंदी की जाएगी।
राजस्थान और गुजरात नहीं जाएंगे चीते
चीतों की अगली बसाहट राजस्थान या गुजरात में करने की तैयारी थी। हालांकि एनटीसीए ने स्पष्ट कर दिया है कि चीतों को कहीं और नहीं बसाया जाएगा। एमपी में इनकी संख्या बढ़ाई जाएगी। ऐसी संभावना है कि नए साल 2026 में अफ्रीका से आने वाले चीतों की नई खेप को नौरादेही में बसाया जाएगा। यदि ऐसा नहीं हो पाया तो कूनो में पले बढ़े और जवान हो चुके शावकों को शिफ्ट किया जाएगा।
1952 से विलुप्त हो गए थे चीते
देश में चीतों को आखिरी बार 1952 में देखा गया था। इसके बाद से विलुप्त हो चुके चीतों को रीइंट्रोडक्शन करने के लिए साल 2022 में नामीबिया से 8 चीतों की पहली खेप लाई गई। इनको कूनो में बसाया गया। फिर फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 चीतों को लाया गया। इन्हें भी कूनो में ही रखा गया। दो खेप में कुल 20 चीतों को भारत में लाया गया। कूनो में पिछले दो सालों में इन चीतों ने कुल 26 शावकों को जन्म दिया। हालांकि बीमारी, हमलों और अन्य कारणों के चलते केवल 19 ही जीवित बच पाए हैं।
रानीपुर टाइगर रिजर्व में तेंदुआ, बाघ, भालू और हिरण जैसे वन्य जीव पाए जाते हैं, लेकिन अब तेंदुओं की सक्रियता से ग्रामीण इलाकों में दहशत है। मानिकपुर के टिकरिया में स्काई वॉक ब्रिज के पास पांच तेंदुओं को देखे जाने के बाद यह कदम उठाया गया। बभिया गांव के ग्रामीणों का कहना है कि पिछले 15-20 दिनों से दो तेंदुए दिख रहे हैं, जिन्होंने गोशाला और पशु बाड़े से कई जानवरों को मार डाला है। इससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।
वन विभाग ने खतरे को देखते हुए जागरूकता अभियान तेज कर दिया है। ग्रामीणों से जंगल के पास न जाने की अपील की गई है, क्योंकि गर्मी में पानी की तलाश में जंगली जानवर रिहायशी इलाकों की ओर आ सकते हैं। डीएफओ प्रत्यूष कटियार ने बताया कि नदीम रेंजर से तेंदुओं की सूचना मिलने के बाद एहतियातन कुछ क्षेत्रों को पर्यटकों के लिए बंद किया गया है। वन विभाग की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं और लोगों को सतर्क कर रही हैं ताकि कोई अप्रिय घटना न हो। ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए यह कदम जरूरी बताया गया है।
]]>जिसके बाद इलाके में तेंदुआ होने की पुष्टि की गई है। वन विभाग के अधिकारी के.के निनामा ने अधीनस्थ अमले को जरूरी दिशा निर्देश देते हुए रहवासियों से भी अकेले न घूमने की अपील की है।
बता दें की इसी इलाके से कुछ दिन पूर्व एक तेंदुआ वन विभाग की टीम ने भारी मशक्कत के बाद रेस्क्यू किया था। ऐसे में लगातार इस इलाके में तेंदुए के मूवमेंट से रहवासी जहां दहशत में हैं। तो वहीं इससे किसी दिन बड़ी और अनहोनी घटना से भी इनकार नहीं किया जा सकता है।
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