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प्रयागराज कचहरी परिसर में 46 साल पहले दिनदहाड़े हुई हत्या के मामले में एमपी-एमएलए कोर्ट ने मंगलवार को पूर्व विधायक विजय मिश्रा समेत चार आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने चारों को मंगलवार को दोषी करार दिया था। सजा का एलान बुधवार को किया गया। यह आदेश विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार तृतीय की अदालत ने विशेष लोक अभियोजक वीके सिंह, अपर जिला शासकीय अधिवक्ता सुशील कुमार वैश्य और सहायक अधिवक्ता संजीव कुमार यादव को सुनकर दिया। कोर्ट ने सभी पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। उम्रकैद की सजा मिलने के बाद पूर्व विधायक विजय मिश्र को कड़ी सुरक्षा के बीच फिर आगरा जेल ले जाया गया। बाकी तीनों दोषियों को नैनी जेल में भेजा गया है। कोर्ट का फैसला आने के पहले कचहरी को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था। काफी सुरक्षा के बीच विजय मिश्र को कोर्ट में पेश किया गया।
क्या है मामला
अभियोजन के अनुसार नवाबगंज के हथिगहां गांव निवासी वादी श्याम नारायण पांडेय ने कर्नलगंज थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप था कि उनके भाई प्रकाश नारायण पांडेय 11 फरवरी 1980 की दोपहर दीवानी परिसर में एक मामले में जमानत कराने आए थे।
परिसर स्थिति वह एक चाय नाश्ते की दुकान पर बैठे थे। तभी पीछे के रास्ते से हंडिया निवासी संतराम, बलराम, जीत नारायण और विजय मिश्रा असलहा लेकर पहुंचे और धमकी देते हुए सीने में गोली मार दी। दिनदहाड़े गोलीबारी से कचहरी परिसर में अफरातफरी मच गई थी। कई घायल भी हुए थे। घायल अवस्था में प्रकाश नारायण पांडेय को पुलिस स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल ले गई, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था।
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प्रयागराज कचहरी परिसर में 46 साल पहले दिनदहाड़े हुई हत्या के मामले में एमपी-एमएलए कोर्ट ने मंगलवार को पूर्व विधायक विजय मिश्रा समेत चार आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने चारों को मंगलवार को दोषी करार दिया था। सजा का एलान बुधवार को किया गया। यह आदेश विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार तृतीय की अदालत ने विशेष लोक अभियोजक वीके सिंह, अपर जिला शासकीय अधिवक्ता सुशील कुमार वैश्य और सहायक अधिवक्ता संजीव कुमार यादव को सुनकर दिया। कोर्ट ने सभी पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। उम्रकैद की सजा मिलने के बाद पूर्व विधायक विजय मिश्र को कड़ी सुरक्षा के बीच फिर आगरा जेल ले जाया गया। बाकी तीनों दोषियों को नैनी जेल में भेजा गया है। कोर्ट का फैसला आने के पहले कचहरी को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था। काफी सुरक्षा के बीच विजय मिश्र को कोर्ट में पेश किया गया।
क्या है मामला
अभियोजन के अनुसार नवाबगंज के हथिगहां गांव निवासी वादी श्याम नारायण पांडेय ने कर्नलगंज थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप था कि उनके भाई प्रकाश नारायण पांडेय 11 फरवरी 1980 की दोपहर दीवानी परिसर में एक मामले में जमानत कराने आए थे।
परिसर स्थिति वह एक चाय नाश्ते की दुकान पर बैठे थे। तभी पीछे के रास्ते से हंडिया निवासी संतराम, बलराम, जीत नारायण और विजय मिश्रा असलहा लेकर पहुंचे और धमकी देते हुए सीने में गोली मार दी। दिनदहाड़े गोलीबारी से कचहरी परिसर में अफरातफरी मच गई थी। कई घायल भी हुए थे। घायल अवस्था में प्रकाश नारायण पांडेय को पुलिस स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल ले गई, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था।
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