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संसद के दोनों सदनों, राज्यसभा और लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा संपन्न हो गई है. अब दोनों ही सदनों में सामान्य कामकाज चल रहा है. लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान विपक्ष ने हंगामा किया. वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल अमेरिका की ओर से लगाए गए 25 फीसदी टैरिफ को लेकर बयान दे रहे हैं.
लोकसभा में गुरुवार को केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए 25% आयात शुल्क (टैरिफ) को लेकर विस्तृत बयान दिया. उन्होंने कहा कि भारत सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और घरेलू उद्योगों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है.
पीयूष गोयल ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच चार दौर की द्विपक्षीय बैठकें हुईं. समझौते को अंतिम रूप देने के लिए कई अहम बैठकें हुईं. आयात पर 10 से 15 फीसदी टैरिफ की बात थी. द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बात हुई थी. कई वर्चुअल बैठकें भी हुईं. हम अपने घरेलू उद्योगों की सुरक्षा करेंगे. देशहित में जरूरी हर कदम उठाएंगे.
उन्होंने कहा कि दुनिया के विकास में भारत का योगदान 16 फीसदी है और हम दुनिया की पांच सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक हैं. अमेरिका के इस कदम से होने वाले असर का आकलन किया जा रहा है.
उन्होंने जोर देकर कहा कि आज भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य पर अग्रसर है. उन्होंने कहा, "सरकार उद्योगपतियों से बात कर रही है. हम देश को सुरक्षित रखने के लिए सारे कदम उठाएंगे. हम कुछ ही वर्षों में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएंगे. हमारे निर्यात में बढ़ौतरी हुई है. हम किसानों के लिए कार्य कर रहे हैं. सरकार को विश्वास है कि हम 2047 तक विकसित देश बन जाएंगे."
उन्होंने संसद में कहा कि भारत आज भी वैश्विक अर्थव्यवस्था का ‘ब्राइट स्पॉट’ है. सरकार किसानों, MSMEs और उद्यमियों के हितों की पूरी तरह से रक्षा करेगी. हम हर जरूरी कदम उठाएंगे ताकि देश के व्यापारिक हितों को कोई नुकसान न हो. भारत ने UAE और ऑस्ट्रेलिया के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स किए हैं, जिससे निर्यात को नई गति मिली है. भारत वैश्विक व्यापार में मजबूती से खड़ा रहेगा, और सरकार देशहित में हर चुनौती का सामना करेगी.
टैरिफ के जवाब में पलटवार नहीं करेगा भारत: सूत्र
सरकारी सूत्रों का कहना है कि फिलहाल भारत अमेरिका के 25 इस टैरिफ के जवाब में कोई पलटवार नहीं करेगा. सूत्रों ने बताया कि सरकार इससे घबराई नहीं है. इस पर जो भी प्रतिक्रिया होगी वह शांति से, रणनीति के तहत और केवल बातचीत के जरिए ही होगी.
'अपने घरेलू उद्योगों की सुरक्षा करेंगे', ट्रंप के टैरिफ पर लोकसभा में बोले पीयूष गोयल
लोकसभा में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से किए गए टैरिफ के ऐलान पर बयान दे रहे हैं. पीयूष गोयल ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच चार दौर की द्विपक्षीय बैठकें हुईं. समझौते को अंतिम रूप देने के लिए कई अहम बैठकें हुईं. आयात पर 10 से 15 फीसदी टैरिफ की बात थी. द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बात हुई थी. कर् वर्चुअल बैठकें भी हुईं. हम अपने घरेलू उद्योगों की सुरक्षा करेंगे. देशहित में जरूरी हर कदम उठाएंगे. विश्व के विकास में भारत का योगदान 16 फीसदी है और हम दुनिया की पांच सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक हैं. उन्होंने कहा कि अमेरिका के इस कदम से होने वाले असर का आकलन किया जा रहा है.
'दोनों सदनों में मुंबई हमले पर हो चर्चा', राज्यसभा में जेपी नड्डा की डिमांड
नेता सदन जेपी नड्डा ने विपक्ष के हंगामे के बीच कहा कि ऑपरेशन सिंदूर पर लंबी चर्चा के बाद गृह मंत्री अमित शाह की ओर से जवाब के समय विपक्ष वॉकआउट कर गया. लोकसभा में प्रधानमंत्री और राज्यसभा में गृह मंत्री ने जवाब दिया. विपक्षी दलों ने बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में चर्चा की मांग की थी, जब मौका आया तब वॉकआउट कर गईं. यह डबल स्टैंडर्ड है. हम दोनों सदनों में मुंबई हमले पर चर्चा की मांग करते हैं.
राज्यसभा में विपक्ष का हंगामा जारी, चल रहा प्रश्नकाल
राज्यसभा की कार्यवाही फिर शुरू हो गई है. राज्यसभा में आसन पर घनश्याम तिवाड़ी आए हैं. उच्च सदन में अब प्रश्नकाल की कार्यवाही शुरू हुई है. प्रश्नकाल की कार्यवाही चल रही है और विपक्षी सदस्य वेल में आ गए हैं. वेल में आकर विपक्षी सदस्य बिहार एसआईआर के मुद्दे पर नारेबाजी कर रहे हैं.
लोकसभा और राज्यसभा, संसद के दोनों सदनों में निसार सैटेलाइट लॉन्च पर दी गई बधाई
लोकसभा और राज्यसभा, संसद के दोनों सदनों में नासा और इसरो के संयुक्त मिशन में NISAR मिसाइल के सफल प्रक्षेपण के लिए बधाई दी गई. लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला ने श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र पर जीएसएलवी-एफ16 के सफल प्रक्षेपण पर इसरो और नासा को बधाई दी और कहा कि यह अपनी तरह का पहला मिशन है, जिसमें उपग्रह को सूर्य समकालिक कक्षा में स्थापित किया गया है. इस उपग्रह को माइक्रोवेव इमेजिंग के उद्देश्य से भारत के इसरो और अमेरिका के नासा ने संयुक्त रूप से विकसित किया है. इस मिशन का उद्देश्य वैश्विक लैंड इकोसिस्टम और समुद्री क्षेत्रों का अध्ययन करना है. हमें अंतरिक्ष वैज्ञानिकों की इस उपलब्धि पर अत्यंत गर्व है. स्पीकर ने सदन की ओर से इसरो के वैज्ञानिकों की टीम को बधाई दी और कहा कि हम उनकी ओर भविष्य में किए जाने वाले प्रयासों की सफलता के लिए कामना करते हैं.
US Tariff लागू हुआ तो भारत को कितना होगा नुकसान? इन प्रोडक्ट्स पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को भारत पर एक अगस्त से 25 फीसदी आयात शुल्क और अतिरिक्त जुर्माना लगाने की घोषणा की है। उन्होंने भारत के रूस से घनिष्ठ संबंधों को भी इस फैसले की वजह बताया। ट्रंप ने कहा कि भारत ने व्यापार में 'बेहद सख्त और आपत्तिजनक गैर-आर्थिक बाधाएं' खड़ी कर रखी हैं। इस घोषणा के बाद केंद्र सरकार हरकत में आ गई। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने आपात बैठक बुलाई, जिसमें व्यापार सचिव, विदेश मंत्रालय के अधिकारी, निर्यात परिषदों व प्रमुख इंडस्ट्री बॉडीज के प्रतिनिधि शामिल हुए। पीयूष गोयल ने कहा, भारत अपने व्यापारिक हितों की रक्षा करना जानता है। अमरीकी टैरिफ अनुचित है। हम डब्ल्यूटीओ नियमों के तहत उचित कदम उठाएंगे और अपने निर्यातकों को समर्थन देंगे।
टैरिफ से क्या होगा नुकसान?
-भारत अमेरिका को जिन वस्तुओं का ज्यादा निर्यात करता है, जैसे कि दवाएं, ऑटो पार्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और आभूषण, उन पर टैरिफ का सीधा असर पड़ेगा। टैरिफ बढ़ने से भारतीय कंपनियों को अमेरिका में सामान भेजने में अधिक लागत आएगी, जिससे उनकी मांग घटेगी।
-ट्रंप के 25 फीसदी टैरिफ से भारत को निर्यात में 4 से 7 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है। इससे एमएसएमई सेक्टर सीधे तौर पर प्रभावित होगा।
-25% टैरिफ से अब अमरीका में वियतनाम, इंडोनेशिया और फिलीपींस जैसे देश भारतीय निर्यातकों को कड़ी टक्कर देंगे।
-अमेरिका में नए ऑर्डर होल्ड पर चले गए हैं। यूरोप में चीनी माल की बाढ़ से भारतीय कंपनियों का मार्जिन पहले ही घट रहा है, इससे भारतीय निर्यातकों को नुकसान होगा।
-टैरिफ के चलते पहले से ही डॉलर के मुकाबले कमजोर हो रहा रुपया और नीचे जा सकता है। टैरिफ से भारतीय सामान अमरीका में महंगा बिकेगा तो बिक्री घटने से देश में कम डॉलर आएंगे। इससे भारत का चालू खाता घाटा बढ़ सकता है। डॉलर की मांग ज्यादा व आपूर्ति कम होगी।
| देश | टैरिफ |
| ब्रिटेन | 10% |
| जापान | 15% |
| ईयू | 15% |
| इंडोनेशिया | 19% |
| वियतनाम | 20% |
| द. कोरिया | 25% |
| भारत | 25% |
| चीन | 30% |
| बांग्लादेश | 35% |
ऐसा खेल पहले भी खेल चुके हैं ट्रंप
ट्रंप द्विपक्षीय व्यापार समझौते में शह और मात का खेल खेल रहे हैं। भारत पहला ऐसा देश नहीं है जिसके साथ ट्रंप ने इस तरह का खेल खेला है। ट्रंप ने जापान पर भी 25% टैरिफ का लेटर जारी किया था और डील होने पर टैरिफ घटाकर 15% कर दिया था। इसी तरह यूरोपीय संघ (ईयू) पर 30% टैरिफ का लेटर जारी कर डील के बाद टैरिफ 15% कर दिया था। ट्रंप यह चाल व्यापार साझेदारों पर दबाव बनाने के लिए चलते हैं। इसी के दम पर अमरीका ने जापान, ईयू, ताइवान, इंडोनेशिया जैसे देशों के साथ अमरीकी उत्पादों के लिए जीरो टैरिफ की डील की है।
जेम्स-ज्वैलरी: भारत अमरीका को 10 अरब डॉलर का निर्यात करता है। नए टैरिफ से अमरीका में जेम्स-ज्वैलरी पर आयात शुल्क 13.3% बढ़ जाएगा, जिससे निर्यात 15% घट जाएगा और 1.80 अरब डॉलर का नुकसान होने की आशंका है।
इलेक्ट्रॉनिक्स: भारत हर साल अमरीका को 14 अरब डॉलर से अधिक के इलेक्ट्रॉनिक आइटम भेजता है। अमरीका आए 44 फीसदी स्मार्टफोन मेड इन इंडिया हैं। नया टैक्स लगने से कीमतें और प्रतिस्पर्धा प्रभावित होगी। इससे भारत को करीब 1.7 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है।
ऑटो पार्ट्स: भारत से अमेरिका को 2.8 अरब डॉलर के ऑटो कंपोनेंट्स भेजे जाते हैं। अब ये सामान 12 फीसदी महंगे हो सकते हैं। इससे देश को 33.9 करोड़ डॉलर का नुकसान हो सकता है।
वस्त्र परिधान: अमेरिका हर साल भारत से 8 से 10 अरब डॉलर के कपड़े और गारमेंट्स मंगवाता है। अब भारत से वस्त्र परिधान के निर्यात पर 10-12 फीसदी असर पड़ सकता है। लेकिन भारतीय उत्पाद अभी भी बांग्लादेश और चीन से सस्ते रहेंगे।
सीफूड व खाद्य उत्पाद: झींगा मछली और अन्य खाद्य उत्पादों का निर्यात लगभग 3.5 अरब डॉलर का है। अमेरिका में अब ये 20% तक महंगे होंगे। इससे भारत को 40 करोड़ डॉलर का नुकसान होने की आशंका है।
लोकसभा चुनावों के दौरान भारतीय वायु सेना की भी अहम भूमिका रही है। युद्ध और शांति काल में विभिन्न कार्य करने वाले वायु सेना के परिवहन और हेलीकॉप्टर बेड़े को चुनावों के बीच प्रशासनिक मशीनरी को एयरलिफ्ट करने के लिए तैनात किया गया था। वायु सेना के मीडियम लिफ्ट हेलीकॉप्टरों (एमआई-17 वेरिएंट), लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टरों (चेतक) और स्वदेशी रूप से निर्मित एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (एएलएच) ध्रुव ने इस दौरान पर्याप्त उड़ान भरकर पोलिंग पार्टी को दूरस्थ स्थानों तक पहुंचाने और वापस लाने का कार्य किया है।
वायु सेना का हवाई बेड़ा घरेलू और अंतरराष्ट्रीय अभ्यासों के दौरान लड़ाकू सैनिकों को हवाई मार्ग से ले जाने और शांतिकालीन भूमिका के अलावा राष्ट्र निर्माण की दिशा में कई कार्य करता है। नागरिक शक्ति की सहायता में भारतीय वायुसेना विशेष रूप से सबसे आगे रही है। हाल ही में हुए लोकसभा आम चुनाव के दौरान मीडियम लिफ्ट हेलीकॉप्टरों (एमआई-17 वेरिएंट), लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टरों (चेतक) और स्वदेशी रूप से निर्मित एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (एएलएच) ध्रुव ने पर्याप्त उड़ान भरी हैं।
वायु सेना इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) को पोलिंग पार्टी के साथ एयरलिफ्ट करने और चुनाव ड्यूटी पर भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) के कर्मियों को तैनात करने के कार्य में सक्रिय रूप से शामिल रही है। आम चुनावों के दौरान भारतीय वायु सेना ने देश के दूरदराज के इलाकों तक चुनाव कर्मियों की पहुंच बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जहां सड़क मार्ग से आवाजाही एक सुरक्षा चिंता का विषय थी। यह कार्य समयबद्ध था, क्योंकि मतदान अधिकारियों को चुनाव तिथि से दो दिन पहले प्रत्येक दूरस्थ मतदान केंद्र तक पहुंचाने के साथ ही मतदान के बाद वापस लाना था।
भारतीय वायु सेना ने आम चुनाव के सात चरणों में से पांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसमें 1750 से अधिक उड़ानों में 1000 घंटे से अधिक की उड़ान भरी। सुरक्षा, मौसम, सड़क संपर्क आदि को ध्यान में रखते हुए परिसंपत्तियों के उपयोग को अनुकूलित करने के लिए नोडल अधिकारियों के माध्यम से ईसीआई और विभिन्न राज्यों के मुख्य चुनाव आयुक्तों (सीईसी) के साथ घनिष्ठ समन्वय के माध्यम से यह कठिन कार्य पूरा किया गया। आम चुनाव के सुचारू संचालन की दिशा में समग्र योजना में भारतीय सेना और बीएसएफ की हेलीकॉप्टर परिसंपत्तियों को भी शामिल किया गया।
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चुनाव के परिणाम आने के बाद से ही, प्रदेश के कई दिग्गज नेताओं को दिल्ली बुलाने के कयास लगाए जा रहे है. इसी बीच प्रदेश में इस बार सबसे ज्यादा महिला सासंद जीतने का नया रिकॉर्ड बना है. MP से 6 महिलाएं संसद पहुंचेंगी.इनमें से कौन-सी महिला सांसद बन सकती हैं मंत्री ? जब 29 में से 6 महिलाएं लोकसभा के लिए निर्वाचित हुई हैं। इस बार भाजपा ने सागर से लता वानखेड़े, भिंड से संध्या राय, शहडोल से हिमाद्री सिंह, बालाघाट से भारती पारधी, धार से सावित्री ठाकुर और रतलाम से अनीता नागर सिंह चौहान को मैदान में उतारा था।
इन सभी ने पार्टी की उम्मीदों के मुताबिक नतीजे दिए। बालाघाट ऐसा संसदीय क्षेत्र बना है, जहां पहली बार कोई महिला सांसद चुनी गई है। वहीं, सागर को 44 साल बाद महिला सांसद मिली है। राज्य में हुए इससे पहले के चुनावों पर गौर करें तो वर्ष 2009 में भी छह महिला सांसद लोकसभा के लिए निर्वाचित हुई थीं। इनमें दो कांग्रेस की और चार बीजेपी की थीं। इसके अलावा वर्ष 2004 के चुनाव में दो और 2014 के चुनाव में पांच महिलाएं जीती थीं।
भाजपा के पक्ष में आए नतीजे
इसी तरह वर्ष 2019 के चुनाव में चार महिला सांसद थीं। वर्ष 2024 के चुनाव में भाजपा ने शहडोल से हिमाद्री सिंह और भिंड से संध्या राय को दोबारा मौका दिया। वहीं, चार नए महिला चेहरों को मैदान में उतारा। सभी छह सीटों पर परिणाम भाजपा के पक्ष में आए हैं। राज्य से निर्वाचित कई महिलाओं की राष्ट्रीय स्तर पर हनक रही है। इंदौर से लगातार आठ बार निर्वाचित होने वाली सुमित्रा महाजन लोकसभा की अध्यक्ष बनीं।
वहीं, उमा भारती को अटल बिहारी वाजपेई की सरकार में स्थान मिला था। इसके अलावा प्रज्ञा ठाकुर भोपाल का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। इस बार भाजपा ने मध्य प्रदेश में इतिहास रचा है। पार्टी ने यहां की सभी 29 सीटों पर जीत दर्ज की। अब से लगभग छह महीने पहले हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने भारी बहुमत के साथ जीत हासिल कर सरकार बनाई थी और अब लोकसभा के चुनाव में भी उसने क्लीन स्वीप किया है।
आम चुनाव के लिए चुनी गईं 74 महिला सांसद, पिछले आम चुनाव के मुकाबले संख्या घटी
मंगलवार को आए नतीजों में कुल 74 महिलाएं चुनी गईं जबकि 2019 के आम चुनाव में यह संख्या 78 थी. देश भर से निचले सदन के लिए चुनी गईं कुल महिला सांसदों में से पश्चिम बंगाल 11 महिलाओं के साथ सबसे आगे है. कुल 797 महिला उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा था, जिसमें भाजपा ने सबसे अधिक 69 को और कांग्रेस ने 41 महिलाओं को उम्मीदवार बनाया था.
संसद में महिला आरक्षण विधेयक पारित होने के बाद यह पहला चुनाव है. इस कानून में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रावधान है. यह कानून अभी लागू नहीं हुआ है.
निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार, इस बार भाजपा की 30 महिला उम्मीदवारों ने लोकसभा चुनाव जीता, कांग्रेस की 14, तृणमूल कांग्रेस की 11, समाजवादी पार्टी की चार, द्रमुक की तीन और जनता दल (यूनाइटेड) और लोजपा (आर) की दो-दो महिला उम्मीदवार जीतीं.
सत्रहवीं लोकसभा में महिला सांसदों की संख्या सबसे अधिक 78 थी, जो कुल संख्या का 14 प्रतिशत थी. 16वीं लोकसभा में 64 महिलाएं सदस्य थीं जबकि 15वीं लोकसभा में यह संख्या 52 थी. भाजपा की हेमा मालिनी, तृणमूल की महुआ मोइत्रा, राकांपा (शरदचंद्र पवार) की सुप्रिया सुले और समाजवादी पार्टी की डिंपल यादव ने लोकसभा चुनाव में अपनी सीटें बरकरार रखीं जबकि कंगना रनौत और मीसा भारती जैसी उम्मीदवारों ने अपनी जीत से सबका ध्यान अपनी ओर खींचा.
मछलीशहर से समाजवादी पार्टी की 25 वर्षीय उम्मीदवार प्रिया सरोज और कैराना सीट से 29 वर्षीय इकरा चौधरी जीत हासिल करने वाली सबसे कम उम्र की उम्मीदवारों में शामिल हैं.
]]>जम्मू-कश्मीर में कभी एक प्रमुख राजनीतिक ताकत रही पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) अब खुद को प्रदेश में सबसे निचले पायदान पर पाती है।हाल ही में संपन्न लोकसभा चुनाव में पार्टी न केवल एक भी सीट हासिल करने में कामयाब नहीं हो सकी। यहीं नहीं पार्टी कश्मीर के जिलों और पुंछ, राजौरी में 54 विधानसभा क्षेत्रों में से केवल पांच पर ही बढ़त हासिल कर पाई – जो अब अनंतनाग संसदीय क्षेत्र का भी हिस्सा है। प्रदेश से संबंधित संविधान के अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद हुआ पहला चुनाव पीडीपी के संभावित पुनरुद्धार के लिए महत्वपूर्ण था। पिछले पांच वर्षों में पार्टी ने कई प्रमुख नेताओं को पार्टी से बाहर होते देखा है, जिससे इसकी स्थिति काफी कमजोर हुई है।
पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती को अनंतनाग राजौरी लोकसभा सीट पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के दिग्गज गुज्जर नेता मियां अल्ताफ से लगभग तीन लाख वोटों से हार का सामना करना पड़ा। वह दक्षिण कश्मीर के केवल तीन विधानसभा क्षेत्रों में आगे चल रही थीं। यह एक ऐसा क्षेत्र है, जिसे कभी पार्टी का गढ़ माना जाता था।
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, सुमहबूबा ने तीन विधानसभा क्षेत्रों- अनंतनाग, अनंतनाग पश्चिम, और श्रीगुफवारा-बिजबेहरा में बढ़त बनाई, लेकिन शेष क्षेत्रों में मियां अल्ताफ से पीछे रहीं। दक्षिण कश्मीर के तीन क्षेत्रों में नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कांग्रेस के समर्थन के कारण स्पष्ट रूप से बढ़त बनाई और एक क्षेत्र में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट (माकपा) नेता वाई तारिगामी के कारण। गौरतलब है कि इस संसदीय क्षेत्र में कुल 18 विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं।
एक राजनीतिक पर्यवेक्षक ने कहा, “सुमहबूबा हालांकि पिछले कुछ सालों से केंद्र की लूट की रणनीति की जोरदार आलोचना कर रही हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि लोगों ने अभी भी पीडीपी को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से गठबंधन करने के लिए माफ नहीं किया है।”
श्रीनगर लोकसभा क्षेत्र में, पीडीपी के युवा नेता वहीद पर्रा नेकां नेता आगा रूहुल्लाह से हार गए। वह केवल दो विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त हासिल करने में कामयाब रहे। पर्रा ने 1,68,450 वोट प्राप्त किए। वह श्रीनगर संसदीय क्षेत्र के 18 विधानसभा क्षेत्रों में से पुलवामा और राजपोरा विधानसभा क्षेत्रों में आगे रहे। पीडीपी का प्रदर्शन विशेष रूप से उत्तरी कश्मीर की बारामूल्ला लोकसभा सीट पर निराशाजनक रहा, जहाँ पार्टी के उम्मीदवार मीर फैयाज ने अपनी जमानत जब्त करा ली। उन्हें केवल 27,488 वोट मिले।
राजनीतिक पर्यवेक्षक ने कहा, “चुनाव नतीजे पीडीपी के लिए एक बड़ा झटका है। यह कश्मीर के राजनीतिक परिदृश्य में अपनी स्थिति फिर से हासिल करने के पार्टी के संघर्ष को दर्शाता है। इन चुनावों का निश्चित रूप से आगामी विधानसभा चुनावों पर प्रभाव पड़ेगा।”
पीडीपी के वरिष्ठ नेता नईम अख्तर ( जो महबूबा के करीबी सहयोगी भी हैं) ने चुनाव परिणामों को पार्टी के लिए चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा, “बेशक यह चिंताजनक है। हमें देखना होगा कि अपनी सद्भावना को वोटों में बदलने में कहां गलती हुई। एक कारण भाजपा सरकार द्वारा किए गए पलायन के बाद संगठनात्मक स्तर पर समन्वय की कमी है। इसे और कुछ अन्य मुद्दों को ठीक करना होगा।”
उल्लेखनीय है कि पीडीपी का गठन 1999 में महबूबा मुफ्ती के पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद ने कांग्रेस छोड़ने के बाद किया था। पार्टी ने 2003 में कांग्रेस के साथ और बाद में 2015 में भारतीय जनता पार्टी के साथ सरकार बनाई। अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म करने के बाद, कई संस्थापक सदस्य पीडीपी छोड़ चुके हैं।
वैशाली और शिवहर से सर्वाधिक छह बार महिला राजनेत्री पहुंची संसद
बिहार के वैशाली संसदीय सीट से वीणा देवी और शिवहर से लवली आनंद के जीतने के साथ ही वैशाली और शिवहर बिहार में अबतक सर्वाधिक महिला राजनेत्री को संसद तक पहुंचाने वाला संसदीय क्षेत्र बन गया है।आजादी के बाद वर्ष 2019 तक हुये लोकसभा चुनाव में सर्वाधिक पांच बार महिला प्रत्याशी ने शिवहर, बांका, वैशाली और धनबाद संसदीय सीट से जीत हासिल कर आधी आबादी की आवाज को संसद में बुलंद किया था। इस बार के चुनाव में वैशाली संसदीय सीट से लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) प्रत्याशी वीणा देवी और शिवहर संसदीय सीट से लवली आनंद ने जीत का परचम लहराया है। इसके साथ हीं वैशाली और शिवजर से सर्वाधिक छह बार महिला राजनेत्री संसद पहुंचने में सफल हो गयी हैं।
लोकतंत्र का उद्गम स्थल माने जाने वाले वैशाली लोकसभा सीट से वर्ष 1980 और वर्ष 1984 में पूर्व मुख्यमंत्री सत्येन्द्र नारायण सिंह की पत्नी किशोरी सिन्हा सांसद निर्वाचित हुयी। वर्ष 1989 में उषा सिन्हा सांसद बनीं। उषा सिन्हा केन्द्रीय मंत्री भी रही हैं।वहीं 1994 उपचुनाव में पूर्व सांसद आनंद मोहन सिंह की पत्नी लवली आनंद सांसद बनीं। लवली आनंद ने श्रीमती किशोरी सिन्हा को पराजित किया था और वह पहली बार सांसद बनीं। वर्ष 2019 में वीणा देवी सांसद बनीं। इस तरह वर्ष 2019 तक के आम चुनाव वैशाली जिले से पांच महिला प्रतिनिधि संसद पहुंची थी।इस बार के चुनाव में लोजपा (रामविलास) प्रत्याशी वीणा देवी ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रत्याशी पूर्व विधायक विजय शुक्ला उर्फ मुन्ना शुक्ला को 89 हजार 634 मतों के अंतर से पराजित किया।
शिवहर संसदीय सीट से वर्ष 1980 और वर्ष 1984 में रामदुलारी सिन्हा और वर्ष 2009, 2014 और 2019 में लगातार तीन बार पूर्व मंत्री बृज बिहारी प्रसाद की पत्नी रमा देवी ने जीत हासिल की है। पूर्व सासंद स्वर्गीय ठाकुर युगल किशोर सिंह की पत्नी रामदुलारी सिन्हा बिहार से राज्यपाल नियुक्ति होने वाली प्रथम महिला रहीं तथा भारत में चंद उन महिलाओं में से हैं जिनकी केरल के राज्यपाल पद पर नियुक्ति हुई। रामदुलारी सिन्हा विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों में मंत्री पद पर रही। वह बिहार की पहली महिला पोस्ट ग्रेजुएट थीं। इस बार के चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने भाजपा की वर्तमान सांसद रमा देवी को बेटिकट कर दिया था।राजग में सीटों में बंटवारे के तहत शिवहर सीट जदयू को मिली थी।
शिवहर संसदीय सीट पर जदयू के टिकट पर पूर्व सांसद लवली आनंद चुनावी समर में उतरी। श्रीमती लवली आनंद का मुकाबला राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रत्याशी पूर्व मुखिया रितु जायसवाल को 29 हजार 143 मतों के अंतर से परास्त किया।
आरा की आवाम ने सुदामा प्रसाद को कहा ‘लाल सलाम’, 35 साल बाद लहराया ‘लाल झंडा’
दलित-गरीबों और किसानों की राजनीतिक दावेदारी के अग्रणी योद्धा सुदामा प्रसाद ने आरा संसदीय सीट पर तत्कालीन केन्द्रीय मंत्री राजकुमार सिंह(आर.के.सिंह) के न सिर्फ हैट्रिक लगाने के सपने को चूर किया साथ ही 35 साल के लंबे इंतजार के बाद इस सीट पर अपनी पार्टी के ‘लाल झंडे’ को भी बुंलद किया।
बिहार में आरा संसदीय संसदीय सीट से भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी-लेनिनवादी (भाकपा-माले) उम्मीदवार सुदामा प्रसाद ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रत्याशी केन्द्रीय मंत्री आर.के.सिंह को 59 हजार 808 मतों के अंतर से पराजित किया।चुनाव आयोग के अनुसार, भाकपा माले उम्मीदवार सुदामा प्रसाद को 529382 मत मिले जबकि उनके प्रतिद्धंदी भाजपा के सिंह को 469574 मत मिले। सुदामा प्रसाद न सिर्फ पहली बार सांसद बनें, वहीं वह आरा संसदीय सीट पर 35 साल बाद अपनी पार्टी के लाल झंडा को बुंलद करने में भी कामयाब हुये।
इससे पूर्व वर्ष 1989 के लोकसभा चुनाव में इंडियन पीपुल्स फ्रंट (आईपीएफ) के बैनर तले आरा संसदीय सीट से रामेश्वर प्रसाद चुनाव जीते थे। भाकपा माले पहले आईपीएफ के बैनर तले चुनाव लड़ते रहा है। इस चुनाव में आईपीएफ ने 10 प्रत्याशी उतारे लेकिन उसे केवल आरा सीट पर जीत मिली। आरा संसदीय सीट पर रामेश्वर प्रसाद ने जनता दल के तुलसी सिंह को पराजित किया था। कांग्रेस के दिग्गज बलिराम भगत तीसरे नंबर पर रहे थे।
बिहार के भोजपुर जिले के अगिआंव प्रखंड के पवना में मिठाई की एक छोटी सी दुकान चलाने वाले स्व. गंगादयाल साह के घर दो फरवरी 1961 को जन्में सुदामा प्रसाद भोजपुर में भूमिहीन-गरीब-बटाईदार किसानों के संघर्षो, गरीबों-वंचितों की राजनीतिक दावेदारी और सामाजिक बदलाव की लड़ाई के चर्चित योद्धा हैं। बचपन में ही मिठाई की दुकान पर कभी-कभार बैठने के क्रम में उन्हें सामंती और पुलिस जुल्म का सामना करना पड़ा, जिसने उस छोटे से बालक को भीतर से बेचैन कर दिया और वे भाकपा-माले के नेतृत्व में भोजपुर में चल रहे बदलाव की लड़ाई में खींचे चले आए।
वर्ष 1978 में सुदामा प्रसाद ने हर प्रसाद दास जैन स्कूल, आरा से मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद जैन कॉलेज आरा में नामांकन कराया, लेकिन 1982 में पढ़ाई बीच में ही छोड़कर वह भाकपा-माले के पूर्णकालिक कार्यकर्ता बन गए और सांस्कृतिक मोर्चे पर काम की शुरूआत की। युवा नीति के निर्देशन में उन्होंने सरकारी सांढ़, पत्ताखोर, कामधेनु, सिंहासन खाली करो जैसे नाटकों में जबरदस्त अभिनय किया। पुलिस एवं सामंती ताकतों से दो-दो हाथ करते हुए सुदामा प्रसाद ने भोजपुर में क्रांतिकारी सांस्कृतिक राजनीति को एक नई धार देने का काम किया।
वर्ष 1979 से 83 तक सुदामा प्रसाद मूलतः सांस्कृतिक संगठन में सक्रियता के बाद वर्ष1984 में भोजपुर-रोहतास जिला के आइपीएफ के सचिव चुने गए और इसके बाद शुरू हुई संघर्षों की असली कहानी। वर्ष 1989 में उनके नेतृत्व में भोजपुर जगाओ-भोजपुर बचाओ आंदोलन काफी चर्चित रहा। इसके तहत सोन नहरों के आधुनिकीकरण, कदवन जलाशय का निर्माण, सोन एवं गंगा में पुल निर्माण, आरा-सासाराम बड़ी रेल लाइन का निर्माण सहित जमीन-मजदूरी के सवालों पर लंबा आंदोलन चलाया गया। आज उसी आंदोलन का नतीजा है कि सोन एवं गंगा नदी में पुल का निर्माण हो चुका है, आरा-सासाराम बड़ी रेल लाइन का निर्माण भी हो चुका है।
सुदामा प्रसाद ने वर्ष 1990 में आइपीएफ के बैनर से पहली बार आरा विधानसभा से चुनाव मैदान में ताल ठोका लेकिन जीत नहीं मिली।उन्होंने शोभा मंडल से अंतरजातीय शादी करके सामाजिक सुधारों की प्रक्रिया में एक अनुकरणीय उदाहरण पेश किया। सुदामा प्रसाद ने 2015 के विधानसभा चुनाव में तरारी विधानसभा सीट पर पहली जीत हासिल की और फिर 2020 के चुनाव में भी इसी सीट पर सफलता हासिल की।विधानसभा के भीतर किसानों और जनता के विभिन्न तबकों के सवालों पर अपने आक्रामक तेवर एवं एजेंडे के जरिए उन्होंने पूरे बिहार में जनता के एक सच्चे जनप्रतिनिधि की पहचान बनाई है। वह बिहार विधानसभा में पुस्तकालय समिति के सभापति बनाए गए। उनके नेतृत्व में संभवतः भारत के संपूर्ण विधायी इतिहास में पहली बार पुस्तकालय समिति की ओर से प्रतिवेदन पेश किया.।अंतराष्ट्रीय हेरिटेज घोषित पटना स्थिति खुदाबख्श लाइब्रेरी को बचाने के संघर्ष में का. सुदामा प्रसाद की भूमिका इतिहास में दर्ज हो चुकी है।उन्हें कृषि एवं उद्योग विकास समिति का सभापति बनाया गया और वे अभी इस पद पर बने हुए हैं।
इस समिति के सभापति रहते हुए उन्होंने बटाईदार किसानों के पंजीकरण एवं उनके लिए पहचान पत्र जारी करने जैसी पहले से उठाई जा रही मांगों को समिति के विमर्श का एजेंडा बनाया। यह उनकी समिति द्वारा उठाए गए कदमों का ही नतीजा है कि आज बिहार में सीमित दायरे में ही सही बटाईदार किसानों का पंजीकरण शुरू हो चुका है। कृषि बजट में बटाईदार किसानों के लिए अलग से राशि व योजनाओं का प्रावधान करने के सवाल पर उन्होंने हाल ही में राज्य के 20 जिलों का दौरा किया और उससे संबंधित प्रतिवेदन राज्य सरकार को सौंपा है।सदन के बाहर सड़कों पर भी वे धान खरीदो आंदोलन का लगातार नेतृत्व करते रहे हैं। वर्ष 2014 में उनके द्वारा शुरू किए गए आंदोलन का ही नतीजा था कि भोजपुर में 1660 रु. प्रति क्विंटल की दर से बटाईदार किसानों का 28 हजार धान खरीदा गया। कदवन जलाशय सहित छोटे व्यापारियों के सवालों पर भी उनकी पहलकदमियां काफी चर्चा में रही हैं।सुदामा प्रसाद फिलहाल भाकपा (माले) की राज्य स्थायी समिति के सदस्य तथा अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय संगठन सचिव भी हैं।
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भोपाल
मध्य प्रदेश में चार चरण में लोक सभा चुनाव की प्रक्रिया संपन्न हुई। चारों चरणों में जिनमें पहले चरण में 67.75 फीसदी मतदान हुए, वहीं दूसरे चरण में 58.59 फीसदी मतदान, तीसरे चरण में 66.74 फीसदी मतदान और चौथे चरण में 72.05 फीसदी मतदान हुए। इसके बाद आगामी 4 जून को मतगणना होनी है। जिसे लेकर पूरी तैयारियां की जा चुकी है। प्रशासन से लेकर निर्वाचन आयोग तक सभी की कड़ी सुरक्षा में मतगणना की प्रक्रिया संपन्न होगी । इसी कारण से भोपाल में रूट डायवर्ट किया जा रहा है।
बता दें, कि 4 जून मंगलवार के दिन भोपाल के ट्रैफिक रूट्स में बदलाव किया गया है। यह सिस्टम सुबह 6 बजे से लागू हो जाएगा। इसे लेकर यातायात पुलिस ने एडवाइजरी जारी की है जिससे लोगों को दिक्कतों का सामना ना करना पड़े। मतगणना के दौरान पुरानी जेल परिसर के आसपास डायवर्जन व्यवस्था की गई है।
ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक जेल परिसर के आसपास से लेकर पुलिस कंट्रोल रूम तिराहा, होमगार्ड टर्निंग से पुरानी जेल को आने रोड़ पर सभी प्रकार के दो पहिया, चार पहिया, हेवी वाहन का आना जाना पूरी तरह से बंद रहेगा। इस दौरान केवल मतदान कर्मी और अधिकारी गण ही आ जा सकेंगे। शहर वासी एमपी नगर, सुभाष नगर, बोगदा पुल, जिंसी चौराहे की ओर से यातायात का इस्तेमाल कर सकेंगे।
इस दौरान भोपाल कलेक्टर और जिला निर्वाचन अधिकारी कौशलेंद्र विक्रम सिंह की ओर से मतगणना के लिए की गई तैयारियों के बारे में बताया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा है कि तेज गर्मी को देखते हुए मतगणना स्थल पर सभी जरूरी व्यवस्थाएं और संसाधन उपलब्ध कराए जाए। ठंडा पानी, कूलर, पंखे, मेडिकल किट, एम्बुलेंस, अग्नि शामक यंत्र, फायर ब्रिगेड सहित सभी व्यवस्थाएं की जाए। जिससे वहां लोगों को दिक्कतों का सामना न करना पड़े।मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने भोपाल के पुरानी केंद्रीय जेल स्थित मतगणना स्थल और स्ट्रांग रूम का निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था और मतगणना की तैयारियों का जायजा लिया।
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सातवें चरण की चर्चित सीटों का समीकरण
नरेंद्र मोदी: उत्तर प्रदेश की वाराणसी लोकसभा सीट इस चुनाव की सबसे चर्चित सीट है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीसरी बार यहां से भाजपा के उम्मीदवार हैं। कांग्रेस ने अपने प्रदेश अध्यक्ष अजय राय को एक बार फिर चुनावी मैदान में उतारा है। वहीं बसपा ने अतहर जमाल लारी को अपना चेहरा बनाया है। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उतरे थे। उनके सामने कांग्रेस ने अजय राय और सपा ने शालिनी यादव को उतारा था। नतीजे भाजपा के पक्ष में रहे और यहां प्रधानमंत्री ने सपा की शालिनी यादव को 4,79,505 मतों से बड़े अंतर से शिकस्त दी थी। इस चुनाव में नरेंद्र मोदी को 6,74,664 वोट, सपा उम्मीदवार शालिनी को 1,95,159 और कांग्रेस के अजय राय को 1,52,548 वोट मिले थे। पिछले चुनाव में वाराणसी में कुल 57.13% लोगों ने मतदान किया था।
कंगना रनौत: इस चुनाव में उतरे उम्मीदवारों में कुछ ऐसे हैं जिनकी चर्चा सबसे ज्यादा है। ऐसी ही एक उम्मीदवार हैं कंगना रनौत। फिल्म अभिनेत्री कंगना को भारतीय जनता पार्टी ने हिमाचल प्रदेश की मंडी सीट से अपना उम्मीदवार बनाया है। विक्रमादित्य सिंह यहां से कांग्रेस के उम्मीदवार हैं। विधायक विक्रमादित्य सिंह मंडी से मौजूदा कांग्रेस सांसद प्रतिभा सिंह के बेटे हैं। विक्रमादित्य सिंह का परिवार मंडी लोकसभा सीट का छह बार प्रतिनिधित्व कर चुका है। 2019 के लोकसभा चुनाव में यहां से भाजपा के राम स्वरुप शर्मा जीते थे। 2019 में मंडी में 73.6% लोगों ने मतदान में हिस्सा लिया था। 2021 में मंडी सांसद रामस्वरूप शर्मा का निधन हो गया। इसके बाद मंडी सीट पर उप-चुनाव हुआ जिसमें कांग्रेस से पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह सांसद चुनी गईं।
उपेंद्र कुशवाहा vs पवन सिंह: बिहार की काराकाट सीट इस चुनाव में खूब चर्चा बटोर रही है। रालोमो अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा यहां से एनडीए गठबंधन के प्रत्याशी हैं। महागठबंधन की ओर से भाकपा-माले के राजा राम सिंह उतरे हैं। इसके अलावा निर्दलीय उतर कर भोजपुरी कलाकार पवन सिंह ने काराकाट की लड़ाई को दिलचस्प बना दिया है। 2019 में यहां जदयू के महाबली सिंह को जीत मिली थी। बीते चुनाव में काराकाट सीट पर 49.09% लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था।
अभिषेक बनर्जी: पश्चिम बंगाल की डायमंड हार्बर लोकसभा सीट भी चर्चित सीटों में शामिल है। टीएमसी ने यहां पार्टी के महासचिव और मौजूदा सांसद अभिषेक बनर्जी को उम्मीदवार बनाया है। दूसरी ओर भाजपा ने अभिजीत दास (बॉबी) को टिकट दिया है। दास भाजपा की दक्षिण 24 परगना जिला इकाई के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं। इसके अलावा माकपा के युवा नेता प्रतिकुर रहमान भी मैदान में हैं। पिछले चुनाव में इस सीट से टीएमसी के अभिषेक बनर्जी को जीत मिली थी। 2019 के चुनाव में डायमंड हार्बर में 81.98% लोगों ने मतदान किया था।
ये केंद्रीय मंत्री मैदान में
सीट मंत्री मंत्रालय
वाराणसी नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री
आरा आरके सिंह ऊर्जा मंत्री
महराजगंज पंकज चौधरी वित्त राज्य मंत्री
मिर्जापुर अनुप्रिया पटेल वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री
चंदौली महेंद्रनाथ पांडेय भारी उद्योग मंत्री
हमीरपुर अनुराग ठाकुर खेल मंत्री
किस सीट पर किन चेहरों के बीच मुकाबला
राज्य लोकसभा सीट भाजपा+ कांग्रेस+ अन्य उम्मीदवार-4 पार्टी-4
बिहार नालंदा कौशलेंद्र कुमार (जदयू) संदीप सौरभ (भाकपा (माले))
बिहार पटना साहिब रवि शंकर प्रसाद अंशुल अविजीत
बिहार पाटलीपुत्र राम कृपाल यादव मीसा भारती (राजद)
बिहार आरा आरके सिंह सुदामा प्रसाद (भाकपा (माले))
बिहार बक्सर मिथिलेश तिवारी सुधाकर सिंह (राजद)
बिहार सासाराम (एससी) शिवेश कुमार मनोज कुमार
बिहार काराकाट उपेन्द्र कुशवाहा (आरएलएम) राजा राम सिंह (भाकपा (माले)) पवन सिंह (निर्दलीय)
बिहार जहानाबाद चंदेश्वर प्रसाद (जदयू) सुरेंद्र यादव (राजद)
चंडीगढ़ चंडीगढ़ संजय टंडन मनीष तिवारी
हिमाचल प्रदेश कांगड़ा डॉ. राजीव भारद्वाज आनंद शर्मा
हिमाचल प्रदेश मंडी कंगना रनौत विक्रमादित्य सिंह
हिमाचल प्रदेश हमीरपुर अनुराग ठाकुर सतपाल रायजादा
हिमाचल प्रदेश शिमला सुरेश कश्यप विनोद सुल्तानपुरी
झारखंड राजमहल ताला मरांडी विजय हांसदा (झामुमो)
झारखंड दुमका सीता सोरेन नलिन सोरेन (झामुमो)
झारखंड गोड्डा निशिकांत दुबे प्रदीप यादव
ओडिशा मयूरभंज नाबा चरण माझी अंजनी सोरेन (झामुमो) सुदाम मरांडी (बीजद)
ओडिशा बालासोर प्रताप चंद्र सारंगी श्रीकांत कुमार जेना लेखासामंतसिंघर (बीजद)
ओडिशा भद्रक अभिमन्यु सेठी अनंत प्रसाद सेठी मंजूलता मंडल (बीजद)
ओडिशा जाजपुर रबिन्द्र नारायण बेहरा आंचल दास शर्मिष्ठा सेठी (बीजद)
ओडिशा केंद्रपाड़ा बैजयंत जय पांडा सिद्धार्थ स्वरूप दास अंशुमन मोहंती (बीजद)
ओडिशा जगतसिंहपुर बिभू प्रसाद तराई रवीन्द्र कुमार सेठी राजमल्लिक (बीजद)
पंजाब गुरदासपुर दिनेश सिंह बब्बू सुखजिंदर सिंह रंधावा अमनशेर सिंह (आप) दलजीत चीमा शिअद
पंजाब अमृतसर तरणजीत सिंह संधू गुरजीत सिंह औजला कुलदीप धालीवाल (आप) अनिल जोशी शिअद
पंजाब खडूर साहिब मनजीत सिंह मन्ना कुलबीर सिंह जीरा लालजीत भुल्लर (आप) विरसा सिंह वल्टोहा शिअद
पंजाब जालंधर सुशील कुमार रिंकू चरणजीत सिंह चन्नी पवन टीनू (आप) मोहिंदर सिंह केपी शिअद
पंजाब होशियारपुर अनिता सोम प्रकाश यामिनी गोमर डॉ. राजकुमार (आप) सोहन सिंह शिअद
पंजाब आनंदपुर साहिब सुभाष शर्मा विजय इंदर सिंगला मालविंदर कंग (आप) प्रेम सिंह चंदूमाजरा शिअद
पंजाब लुधियाना रवनीत सिंह बिट्टू अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग अशोक पराशर (आप) रंजीत सिंह ढिल्लों शिअद
पंजाब फतेहगढ़ साहिब गेजा राम अमर सिंह गुरप्रीत सिंह (आप) बिक्रमजीत सिंह खालसा शिअद
पंजाब फरीदकोट हंस राज हंस अमरजीत कौर साहोके कर्मजीत अनमोल (आप) राजविंदर सिंह धर्मकोट शिअद
पंजाब फिरोजपुर गुरमीत सिंह सोढ़ी शेर सिंह घुबाया जगदीप सिंह (आप) नरदेव सिंह बॉबी मान शिअद
पंजाब बठिंडा परमपाल कौर सिद्धू जीत मोहिंदर सिंह सिद्धू गुरमीत खुड्डियां (आप) हरसिमरत कौर बादल शिअद
पंजाब संगरूर अरविंद खन्ना सुखपाल सिंह खैरा गुरमीत मीत हेयर (आप) सिमरजीत सिंह मान शिअद (अमृतसर) (एसएसएम)
पंजाब पटियाला परनीत कौर धर्मवीर गांधी डॉ. बलबीर सिंह (आप) एनके शर्मा शिअद
उत्तर प्रदेश महराजगंज पंकज चौधरी वीरेन्द्र चौधरी मौसमे आलम (बसपा)
उत्तर प्रदेश गोरखपुर रवि किशन काजल निषाद (सपा) जावेद अशरफ (बसपा)
उत्तर प्रदेश कुशीनगर विजय कुमार दुबे अजय सिंह (सपा) शुभ नारायण चौहान (बसपा)
उत्तर प्रदेश देवरिया शशांक मणि त्रिपाठी अखिलेश प्रताप सिंह सन्देश (बसपा)
उत्तर प्रदेश बांसगांव कमलेश पासवान सदल प्रसाद रामसमुझ (बसपा)
उत्तर प्रदेश घोसी अरविंद राजभर (सुभासपा) राजीव राय (सपा) बालकृष्ण चौहान (बसपा)
उत्तर प्रदेश सलेमपुर रवींद्र कुशवाह रमाशंकर राजभर (सपा) भीम राजभर (बसपा)
उत्तर प्रदेश बलिया नीरज शेखर सनातन पांडेय (सपा) लल्लन सिंह यादव (बसपा)
उत्तर प्रदेश गाजीपुर पारस नाथ राय अफजाल अंसारी (सपा) उमेश कुमार सिंह (बसपा)
उत्तर प्रदेश चंदौली महेंद्रनाथ पांडेय बीरेंद्र सिंह (सपा) सत्येन्द्र कुमार मौर्य (बसपा)
उत्तर प्रदेश वाराणसी नरेंद्र मोदी अजय राय अतहर जमाल लारी (बसपा)
उत्तर प्रदेश मिर्जापुर अनुप्रिया पटेल (अपना दल) रमेश बिन्द (सपा) मनीष कुमार (बसपा)
उत्तर प्रदेश राबर्ट्सगंज रिंकी सिंह (अपना दल) छोटेलाल (सपा) धनेश्वर गौतम (बसपा)
पश्चिम बंगाल दमदम सिलभद्र दत्ता सुजान चक्रवर्ती (माकपा) सौगत रॉय (टीएमसी)
पश्चिम बंगाल बारासात स्वपन मजूमदार संजीब चटर्जी (फॉरवर्ड ब्लॉक) काकोली घोष (टीएमसी)
पश्चिम बंगाल बशीरहाट रेखा पात्रा निरापद सरकार (माकपा) सेख नुरुल इस्लाम (टीएमसी)
पश्चिम बंगाल जयनगर अशोक कंडारी समरेंद्र मंडल (आरएसपी) प्रतिमा मंडल (टीएमसी)
पश्चिम बंगाल मथुरापुर अशोक पुरकैत शरतचंद्र हलधर (माकपा) बापी हलदर (टीएमसी)
पश्चिम बंगाल डायमंड हार्बर अभिजीत दास प्रतीक उर रहमान (माकपा) अभिषेक बनर्जी (टीएमसी)
पश्चिम बंगाल जाधवपुर अनिर्बान गांगुली सृजन भट्टाचार्य (माकपा) सयानी घोष (टीएमसी)
पश्चिम बंगाल कोलकाता दक्षिण देबाचौधरी सायरा शाह हलीम (माकपा) माला रॉय (टीएमसी)
पश्चिम बंगाल कोलकाता उत्तर डॉ. तापस रॉय प्रदीप भट्टाचार्य सुदीप बंधोपाध्याय (टीएमसी)
2019 में इन 57 सीटों पर कैसे थे नतीजे?
पार्टी सीटें
भाजपा 25
टीएमसी 9
कांग्रेस 8
बीजद 4
जदयू 3
बसपा 2
शिअद 2
अपना दल 2
झामुमो 1
आप 1
जिन सीटों पर 1 जून को मतदान, वहां 2019 में कैसी थी वोटिंग?
प्रदेश 2019 में वोट %
बिहार 51.34
चंडीगढ़ 70.61
हिमाचल प्रदेश 72.42
झारखंड 71.54
ओडिशा 74.61
पंजाब 65.94
उत्तर प्रदेश 58.46
पश्चिम बंगाल 78.80
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