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महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही। वैसे-वैसे राजनीतिक गलियारे में हलचल तेज होती जा रही है। इस बीच, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुंबई में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा का 'संकल्प पत्र' जारी किया। इस दौरान उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, राज्य भाजपा प्रमुख चंद्रशेखर बावनकुले, मुंबई भाजपा प्रमुख आशीष शेलार, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और पार्टी के अन्य नेता मौजूद रहे।
संकल्प पत्र में क्या कुछ –
0- युवाओं के लिए 25 लाख नई नौकरियों का वादा
0- महिलाओं को हर महीने 2100 रुपये देने का वादा
0- किसानों का कर्ज माफ करने का वादा
0- किसानों के लिए भावांतर योजना लाएगी
0- वृद्ध पेंशन योजना- सीमा 1500 रुपये से बढ़ाकर 2100 रुपये की जाएगी
0- स्कील सेंटर खोले जाएंगे
भारत के लिए विकसित महाराष्ट्र बनाने की रूपरेखा
उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र के लिए भाजपा का चुनाव संकल्प पत्र विकसित भारत के लिए विकसित महाराष्ट्र बनाने की रूपरेखा है।
कब होने हैं चुनाव?
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 20 नवंबर को होने हैं और सभी 288 निर्वाचन क्षेत्रों के लिए मतगणना 23 नवंबर को होगी। 2019 के विधानसभा चुनावों में, भाजपा ने 105 सीटें, शिवसेना ने 56 और कांग्रेस ने 44 सीटें जीतीं। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 122, शिवसेना को 63 और कांग्रेस को 42 सीटें मिली थीं।
आरएसएस का 'सजग रहो' अभियान लोकसभा चुनावों और बांग्लादेश में हिंदुओं पर हाल ही में हुए हमलों के बाद चलाए जा रहे तीन राष्ट्रीय अभियान का सबसे नया हिस्सा है। इस तीन सूत्रीय अभियान के पहले दो सूत्र हैं योगी आदित्यनाथ की टिप्पणी 'बांटेंगे तो काटेंगे' और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टिप्पणी 'एक है तो सेफ हैं'।
पीएम ने धुले में दिया था ये बयान
प्रधानमंत्री मोदी ने 'एक है तो सेफ है' टिप्पणी धुले में की थी, जहां बीजेपी-आरएसएस का कहना है कि मालेगांव में मुस्लिम वोटों के एकजुट होने के कारण लोकसभा चुनावों में बीजेपी उम्मीदवार को मामूली अंतर से हार का सामना करना पड़ा था। इसी कड़ी में योगी आदित्यनाथ ने महाराष्ट्र के वाशिम में कहा था 'एक है तो नेक हैं'। यहां 'नेक' का मतलब है कि अगर हिंदुओं को बांटा नहीं गया तो वे नेक बने रहेंगे। उन्हें सिर्फ़ आत्मरक्षा के हिंसा का सहारा लेने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा।
"किसी के खिलाफ नहीं है ये अभियान'
हालांकि संघ के सूत्रों ने कहा कि 'सजग रहो' और 'एक है तो सेफ हैं' किसी के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि इनका मकसद हिंदुओं के बीच जाति विभाजन को खत्म करना है। बीजेपी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि आरएसएस के 'स्वयंसेवकों' और 65 से ज़्यादा गैर सरकारी संगठनों द्वारा इस संदेश को लोगों तक पहुंचाने के लिए बैठकें आयोजित की जा रही हैं। संघ के सूत्रों के मुताबिक, हालांकि इस अभियान का तात्कालिक उद्देश्य महाराष्ट्र चुनाव हैं, लेकिन यह एक बड़ी घटना के जवाब में वैचारिक और बौद्धिक प्रतिक्रिया के उभार को दर्शाता है। यह घटना यह है कि जहां एक तरफ हिंदू जाति के आधार पर बंटे हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ़ मुस्लिम अपने मतभेदों को भुलाकर एकजुट होकर वोट बैंक के रूप में उभर रहे हैं और उनका मकसद बीजेपी को सत्ता से बाहर देखना है।
इस अभियान में ये शामिल
इस अभियान में शामिल समूहों में चाणक्य प्रतिष्ठान, मातंग साहित्य परिषद और रणरागिनी सेवाभावी संस्था शामिल हैं। महाराष्ट्र में संघ की सभी चारों 'प्रांत' या क्षेत्रीय इकाइयां- कोंकण (मुंबई और गोवा सहित), देवगिरि (मराठवाड़ा), पश्चिम महाराष्ट्र (जिसमें नासिक और उत्तरी महाराष्ट्र के कुछ हिस्से शामिल हैं) और विदर्भ (जहां RSS का मुख्यालय है) शाखा स्तर पर बैठकें आयोजित करके इस अभियान में शामिल हैं। इस अभियान के मुख्य आकर्षणों में से एक है धुले लोकसभा और मुंबई उत्तर पूर्व लोकसभा सीट के नतीजों का उदाहरण के तौर पर इस्तेमाल करना। यह उस चीज़ की ओर इशारा करता है जिसे संघ 'मालेगांव मॉडल' कहता है और जिसके बारे में उसका कहना है कि इससे 'बंटे हुए' हिंदू समुदाय को नुकसान पहुंचा है।
आधिकारित तौर पर इस अभियान की जिम्मेदारी नहीं ले रहा आरएसएस
आरएसएस आधिकारिक तौर पर संगठन के तौर पर इस अभियान की ज़िम्मेदारी नहीं ले रहा है, बल्कि इसे केवल 'स्वयंसेवकों की एक पहल' बता रहा है। आरएसएस के एक पदाधिकारी ने कहा कि स्वयंसेवकों ने हिंदू समाज को यह बताने की अगुवाई की है कि उन्हें जाति के आधार पर विभाजित नहीं होना चाहिए, खास तौर पर ऐसे समय में जब राज्य में मराठा-ओबीसी विभाजन गहरा गया है।
पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख इस विधानसभा क्षेत्र से पांच बार विधायक रह चुके हैं। अनिल देशमुख भी घड़ी चुनाव चिह्न पर ही चुने गए थे। ऐसे में अजित को उम्मीद है कि अनिल देशमुख के नाम पर कुछ वोट बंट सकते हैं। इस बार एनसीपी के उम्मीदवार अनिल देशमुख का पूरा नाम अनिल शंकरराव देशमुख है। उनके सामने एनसीपी-शरद पवार के सलिल देशमुख हैं, जो अपने पिता अनिल देशमुख के नाम पर वोट जुटाना चाहेंगे। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक राजनीतिक पंडितों का मानना है कि ऐसे में वोटरों के बीच काफी कंफ्यूजन होगा और सलिल चौधरी के लिए चुनौतियां भी बढ़े सकती हैं। एनसीपी उम्मीदवार अनिल देशमुख द्वारा पेश चुनावी घोषणापत्र के मुताबिक उनके पास सिर्फ 6.6 लाख रुपए की कुल संपत्ति है।
गौरतलब है महाराष्ट्र में सियासी लड़ाई काफी दिलचस्प हो गई है। एनसीपी ने नवाब मलिक को उम्मीदवार बनाया है। इसको लेकर भी महायुति में दरार की आशंकाएं जताई जा रही हैं। हालांकि एनसीपी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल का कहना है कि ऐसा करने से राज्य में अन्य जगहों पर ‘महायुति’ पर कोई असर नहीं पड़ेगा। मलिक को धन शोधन मामले में गिरफ्तार किया गया था और उन पर गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम के करीबी लोगों से संबंध रखने का भी आरोप है। वह राज्य में 20 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए मुंबई की मानखुर्द-शिवाजीनगर सीट से राकांपा के आधिकारिक उम्मीदवार हैं।
]]>दरअसल, प्रकाश अंबेडकर को अचानक सीने में दर्द होने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनकी एंजियोग्राफी की गई। फिलहाल उनकी हालत स्थिर है। बता दें कि वंचित बहुजन अघाड़ी की ओर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट किया था। पोस्ट में जारी एक बयान में कहा गया था कि 31 अक्टूबर की सुबह सीने में दर्द की शिकायत के बाद पुणे के एक अस्पताल में प्रकाश अंबेडकर को भर्ती कराया गया था।
2 नंवबर को वंचित बहुजनअघाड़ी की ओर से सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया। इसमें प्रकाश अंबेडकर अखबार पढ़ते हुए दिखाई दिए हैं। पोस्ट में बताया गया है कि उन्हें आईसीयू से अस्पताल के दूसरे क्षेत्र में स्थानांतरित किया जाएगा।
बता दें कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में वंचित बहुजन अघाड़ी मैदान में है। हालांकि, पार्टी ने किसी भी दल के साथ गठबंधन न करते हुए अकेले चुनाव में जाने का फैसला किया। हालांकि शुरुआत में वंचित बहुजन अखाड़ी की महा विकास अघाड़ी के साथ सीटों को लेकर बातचीत हुई। लेकिन, सीट शेयरिंग का फॉर्मूला नहीं निकलने की वजह से गठबंधन नहीं हो सका। इसलिए वंचित बहुजन अघाड़ी ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया। वहीं, चुनाव के बीच प्रकाश अंबेडकर की तबीयत बिगड़ने से कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरा है। पार्टी के कार्यकर्ता चिंतित हैं कि प्रकाश अंबेडकर की अनुपस्थिति में चुनाव प्रचार कैसे होगा।
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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने 80 कैंडिडेट उतारे हैं। दूसरे उप-मुख्यमंत्री अजित पवार की NCP ने 288 सदस्यीय राज्य विधानसभा के लिए 20 नवंबर को होने वाले चुनावों के लिए 53 सीटों पर अपने कैंडिडेटों को उतारा है। पांच सीटें अन्य महायुति सहयोगियों को दी गईं हैं, जबकि दो खंडों पर कोई निर्णय नहीं लिया गया।
MVA में सीट बंटवारे की व्यवस्था
विपक्षी महाविकास अघाड़ी (MVA) में कांग्रेस ने 103 सीटों पर उम्मीदवार उतारे। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) ने 89 और NCP (SP) ने 87 उम्मीदवार नामित किए। 6 सीटें अन्य एमवीए सहयोगियों को दी गईं हैं, जबकि तीन विधानसभा क्षेत्रों पर कोई स्पष्टता नहीं थी।
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में इस 8,000 उम्मीदवार मैदान में
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 में सत्तारूढ़ और विपक्षी खेमे के प्रमुख राजनीतिक दलों सहित लगभग 8,000 उम्मीदवारों ने 288 विधानसभा सीटों के लिए अपने नामांकन दाखिल किए हैं। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि 20 नवंबर को होने वाले चुनावों के लिए 7,995 उम्मीदवारों ने चुनाव आयोग (EC) के पास 10,905 नामांकन पत्र दाखिल किए हैं।
कब होगी नामांकन पत्रों की जांच, नाम वापसी की लास्ट डेट?
उम्मीदवारों द्वारा नामांकन पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया 22 अक्टूबर को शुरू हुई और 29 अक्टूबर को समाप्त हो गई। नामांकन पत्रों का सत्यापन और जांच 30 अक्टूबर को होगी और उम्मीदवारी वापस लेने की अंतिम तिथि 4 नवंबर (अपराह्न 3 बजे तक) है।
]]>उन्होंने इस सरकारी कार्यक्रम में महाराष्ट्र के लोगों से देश के विकास को सर्वोपरि रखते हुए और एकजुट होकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उसके गठबंधन ‘महायुति’ के पक्ष में मतदान करने की अपील की। हरियाणा के चुनाव परिणामों का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि इसने बता दिया है कि आज देश का मिजाज क्या है। उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस का पूरा इकोसिस्टम, अर्बन नक्सल का पूरा गिरोह… जनता को गुमराह करने में जुटा था लेकिन उसकी सारी साजिशें ध्वस्त हो गईं। उन्होंने दलितों के बीच झूठ फैलाने की कोशिश की लेकिन दलित समाज ने उनके खतरनाक इरादों को भांप लिया। दलितों को एहसास हो गया कि कांग्रेस उनका आरक्षण छीन कर अपने वोट बैंक को बांटना चाहती है।’’
उन्होंने कहा कि हरियाणा के दलित वर्ग ने भाजपा का रिकॉर्ड समर्थन किया तो अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) ने भी भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि किसानों और नौजवानों को ‘भड़काने’ में भी कोई कसर नहीं छोड़ी लेकिन हरियाणा की जनता ने दिखा दिया कि वह अब कांग्रेस और अर्बन नक्सल के नफरत के षड्यंत्र का शिकार नहीं होने वाली है। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘कांग्रेस पूरी तरह से सांप्रदायिक और जातिवाद का चुनाव लड़ती है। हिंदू समाज को तोड़कर उसे अपनी जीत का फॉर्मूला बनाना, यही कांग्रेस की राजनीति का आधार है। कांग्रेस भारत के 'सर्वजन हिताय-सर्वजन सुखाय' की परंपरा का दमन कर रही है, सनातन परंपरा का दमन कर रही है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस की नीति है, हिंदुओं की एक जाति को दूसरी जाति से लड़ाओ। कांग्रेस जानती है कि जितना हिंदू बंटेगा, उतना ही उसका फायदा होगा। कांग्रेस किसी भी तरीके से हिंदू समाज में आग लगाए रखना चाहती है, ताकि वो उस पर राजनीतिक रोटियां सेंकती रहे। भारत में जहां भी चुनाव होते हैं, वहां कांग्रेस यही फॉर्मूला लागू करती है।’’ प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि ‘हमेशा बांटों और सत्ता पाओ’ के फार्मूले पर चलने वाली कांग्रेस ने बार-बार यह सिद्ध किया है कि वह एक ‘गैर-जिम्मेदार’ दल बन गया है।
उन्होंने कहा, ‘‘वह अभी भी देश को बांटने के लिए नए-नए विमर्श गढ़ रही है…कांग्रेस के एक भी नेता ने आज तक कभी नहीं कहा कि हमारे मुस्लिम भाई-बहनों में कितनी जातियां होती हैं। मुस्लिम जातियों की बात आते ही कांग्रेस के नेता मुंह पर ताला लगाकर बैठ जाते हैं।’’उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन जब हिंदू समाज की बात आती है तो कांग्रेस उनकी चर्चा जाति से ही शुरू करती है। कांग्रेस की नीति है हिंदुओं की एक जाति को दूसरी जाति से लड़ाओ। कांग्रेस जानती है जितना हिंदू बंटेगा, उतना ही उसका फायदा होगा। भारत में जहां भी चुनाव होते हैं, वहां कांग्रेस यही फार्मूला लागू करती है।’’
मोदी ने कहा कि कांग्रेस सत्ता में वापसी के लिए इतनी बेचैन है कि हर रोज नफरत की राजनीति कर रही है और कांग्रेस की पुरानी पीढ़ी के नेता भी बेबस और असहाय हैं। उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस नफरत फैलाने की सबसे बड़ी फैक्ट्री बनने वाली है, यह गांधी जी(महात्मा गांधी) ने आजादी के बाद ही समझ लिया था। इसीलिए गांधी जी ने कहा था कांग्रेस को खत्म कर देना चाहिए। कांग्रेस खुद खत्म नहीं हुई लेकिन आज देश को खत्म करने पर तुली हुई है। इसलिए हमें सावधान और सतर्क रहना है।’’
मोदी ने कहा, ‘‘मेरा पक्का विश्वास है कि समाज को तोड़ने की आज जो कोशिश हो रही है, इसे महाराष्ट्र के लोग नाकाम करके रहेंगे। महाराष्ट्र के लोगों को देश के विकास को सर्वोपरि रखते हुए एकजुट होकर भाजपा और महायुति के लिए वोट करना है।’’ महाराष्ट्र की 288 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव अगले महीने संभावित हैं।
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