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तमिलनाडु के कोयंबटूर स्थित ईशा योग केंद्र में महाशिवरात्रि 2026 का भव्य आयोजन किया गया, जहाँ बॉलीवुड और साउथ फिल्म इंडस्ट्री की कई दिग्गज अभिनेत्रियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। तमन्ना भाटिया, सारा अर्जुन, श्रीनिधि शेट्टी और मौनी रॉय जैसे सितारों ने सद्गुरु के सानिध्य में ध्यान और पूजा-अर्चना की। समारोह के दौरान जब भक्ति संगीत गूंजा, तो ये अभिनेत्रियां खुद को रोक नहीं पाईं और झूमकर नाचने लगीं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इन वीडियो में सितारों का ऐसा आध्यात्मिक अवतार देख उनके फैंस उन पर खूब प्यार लुटा रहे हैं।
समारोह में अपने अनुभव साझा करते हुए तमन्ना भाटिया ने कहा कि वे इस पूरी रात जागने और ध्यान लगाने के लिए बेहद उत्साहित थीं। उन्होंने बताया कि उन्होंने इस ऊर्जावान माहौल में जितना हो सके उतना नृत्य किया। वहीं, ‘धुरंधर’ अभिनेत्री सारा अर्जुन और ‘KGF’ फेम श्रीनिधि शेट्टी ने भी मंच के पास जमकर ठुमके लगाए। मौनी रॉय ने इस अनुभव को बेहद भावुक बताया और कहा कि महादेव की भक्ति में बिताई यह रात उनके लिए जीवन के सबसे खास पलों में से एक है। इन सितारों के साथ हजारों श्रद्धालु पूरी रात शिव की आराधना में मगन रहे।
इस समारोह की भव्यता केवल फिल्मी सितारों तक सीमित नहीं थी, बल्कि कई दिग्गज राजनेताओं ने भी इसमें हिस्सा लिया। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन सहित कई नेताओं ने विशेष पूजा-अर्चना में शिरकत की। ईशा योग केंद्र की यह महाशिवरात्रि अपनी पारंपरिक प्रस्तुतियों, आधी रात के ध्यान और वैश्विक संगीत के मिश्रण के कारण दुनिया भर में चर्चा का विषय बनी रही। प्रशासनिक और सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच लाखों लोगों ने इस उत्सव का डिजिटल माध्यमों से भी सीधा आनंद लिया।
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तमिलनाडु के कोयंबटूर स्थित ईशा योग केंद्र में महाशिवरात्रि 2026 का भव्य आयोजन किया गया, जहाँ बॉलीवुड और साउथ फिल्म इंडस्ट्री की कई दिग्गज अभिनेत्रियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। तमन्ना भाटिया, सारा अर्जुन, श्रीनिधि शेट्टी और मौनी रॉय जैसे सितारों ने सद्गुरु के सानिध्य में ध्यान और पूजा-अर्चना की। समारोह के दौरान जब भक्ति संगीत गूंजा, तो ये अभिनेत्रियां खुद को रोक नहीं पाईं और झूमकर नाचने लगीं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इन वीडियो में सितारों का ऐसा आध्यात्मिक अवतार देख उनके फैंस उन पर खूब प्यार लुटा रहे हैं।
समारोह में अपने अनुभव साझा करते हुए तमन्ना भाटिया ने कहा कि वे इस पूरी रात जागने और ध्यान लगाने के लिए बेहद उत्साहित थीं। उन्होंने बताया कि उन्होंने इस ऊर्जावान माहौल में जितना हो सके उतना नृत्य किया। वहीं, ‘धुरंधर’ अभिनेत्री सारा अर्जुन और ‘KGF’ फेम श्रीनिधि शेट्टी ने भी मंच के पास जमकर ठुमके लगाए। मौनी रॉय ने इस अनुभव को बेहद भावुक बताया और कहा कि महादेव की भक्ति में बिताई यह रात उनके लिए जीवन के सबसे खास पलों में से एक है। इन सितारों के साथ हजारों श्रद्धालु पूरी रात शिव की आराधना में मगन रहे।
इस समारोह की भव्यता केवल फिल्मी सितारों तक सीमित नहीं थी, बल्कि कई दिग्गज राजनेताओं ने भी इसमें हिस्सा लिया। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन सहित कई नेताओं ने विशेष पूजा-अर्चना में शिरकत की। ईशा योग केंद्र की यह महाशिवरात्रि अपनी पारंपरिक प्रस्तुतियों, आधी रात के ध्यान और वैश्विक संगीत के मिश्रण के कारण दुनिया भर में चर्चा का विषय बनी रही। प्रशासनिक और सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच लाखों लोगों ने इस उत्सव का डिजिटल माध्यमों से भी सीधा आनंद लिया।
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महाशिवरात्रि पर गोरखनाथ मंदिर के शक्तिपीठ में सीएम योगी ने किया देवाधिदेव महादेव का रुद्राभिषेक
मानसरोवर और भरोहिया स्थित पितेश्वरनाथ शिव मंदिर में दर्शन-पूजन कर किया दुग्धाभिषेक-जलाभिषेक
गोरखपुर
देवाधिदेव महादेव भोले शंकर की उपासना के पावन पर्व महाशिवरात्रि पर मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने सुबह गोरखनाथ मंदिर के शक्तिपीठ में भगवान शिव का रुद्राभिषेक कर प्रदेशवासियों के आरोग्यमय, सुखमय, समृद्धमय व शांतिमय जीवन की मंगलकामना की। मुख्यमंत्री ने अंधियारी बाग स्थित प्राचीन मानसरोवर मंदिर और भरोहिया के पितेश्वरनाथ शिव मंदिर में भी दर्शन, पूजन व दुग्धाभिषेक-जलाभिषेक किया और चराचर जगत के कल्याण की प्रार्थना की।
रविवार सुबह जनता दर्शन के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर परिसर में मठ के प्रथम तल पर स्थित शक्ति मंदिर में भगवान भोले शंकर का दुग्ध, दही, घी, मधु और शर्करा से पंच स्नान कराया। इसके बाद विधि विधान से रुद्राभिषेक किया। मठ के पुरोहित एवं वेदपाठी ब्राह्मणों ने शुक्ल यजुर्वेद संहिता के रुद्राष्टाध्यायी के महामंत्रों द्वारा रुद्राभिषेक का अनुष्ठान पूर्ण कराया। रुद्राभिषेक के बाद मुख्यमंत्री ने महादेव भगवान शिव से चराचर जगत के मंगल की प्रार्थना की।
गोरक्षपीठ में रुद्राभिषेक करने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अंधियारी बाग के प्राचीन मानसरोवर मंदिर भी गए। यहां उन्होंने भोलेनाथ का दर्शन पूजन किया। भगवान शिव को पूजन सामग्री अर्पित कर, पंचस्नान कराकर दूध और जल से उनका अभिषेक किया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुए पूजन, अभिषेक का अनुष्ठान हवन और आरती के साथ पूर्ण हुआ। इस अवसर पर सांसद रविकिशन शुक्ल, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, कालीबाड़ी के महंत रविंद्रदास आदि भी उपस्थित रहे।
इसी क्रम में महाशिवरात्रि पर सीएम योगी रविवार दोपहर बाद भरोहिया स्थित पितेश्वरनाथ शिव मंदिर पहुंचे। यहां बाबा पितेश्वरनाथ का दर्शन, पूजन व विधि विधान से जलाभिषेक कर संपूर्ण मानव जाति के कल्याण, सुख-समृद्धि एवं शांति की प्रार्थना की। पांडवकालीन मान्यता वाले पितेश्वरनाथ मंदिर का गोरक्षपीठ से गहरा नाता है। गोरक्षपीठाधीश्वर हर महाशिवरात्रि यहां जलाभिषेक करने आते हैं। जलाभिषेक करने के बाद मुख्यमंत्री ने भरोहिया में शिव मंदिर के सामने स्थित गुरु गोरखनाथ विद्यापीठ के परिसर में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और लोगों से मुलाकात कर उनका कुशलक्षेम जाना। बच्चों से बातचीत कर उन्हें आशीर्वाद दिया। स्थानीय खिलाड़ियों के साथ फोटो खिंचवाई और उनका उत्साहवर्धन किया। भरोहिया में मुख्यमंत्री के आगमन पर विधायक फतेह बहादुर सिंह, भरोहिया के ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि संजय सिंह समेत कई लोग मौजूद रहे।
]]>'वसुधैव कुटुम्बकम्' की भावना को साकार करने की दिशा में बड़ा कदम
वाराणसी,
महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास, वाराणसी द्वारा एक अद्वितीय और अभिनव आध्यात्मिक पहल का शुभारंभ किया गया है। इस पहल के अंतर्गत भगवान श्री विश्वेश्वर महादेव के श्रीचरणों में देश-विदेश के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों, सिद्धपीठों, शक्तिपीठों और प्राचीन तीर्थस्थलों से पावन प्रसाद, पूजित वस्त्र, रज, पवित्र जल तथा श्रद्धा उपहार अर्पित किए जाने की परंपरा प्रारंभ की गई है। इस आध्यात्मिक समन्वय का उद्देश्य संपूर्ण सनातन समाज को एक सूत्र में पिरोते हुए वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना को मूर्त रूप प्रदान करना और वैश्विक आध्यात्मिक एकात्मता को सुदृढ़ करना है।
62 मंदिरों से अब तक पहुंची पावन भेंट
इस क्रम में, शनिवार तक श्री काशी विश्वनाथ धाम में देश-विदेश के कुल 62 मंदिरों से पावन भेंट और प्रसाद प्राप्त हो चुके हैं। इन मंदिरों में तमिलनाडु से भक्त मंडली, श्री रत्नगिरिस्वरर मंदिर चेन्नई, श्री अनंता पद्मनाभा स्वामी मंदिर चेन्नई, तेन सबनायाकर मंदिर कोविलूर, अरुल्मिगु वामनपुरफेश्वरर तिरुमणिकुझी, अरुल्मिगु द्रौपथी अम्मन मंदिर, अरुल्मिगु रीना विमोशनर तिरुकांडीश्वरम्, अरुल्मिगु तिरु सनगरी काली अम्मन वझापेट, अरुल्मिगु भूलोगा नाथर नेल्लिकुप्पम, अरुल्मिगु भूमिनाथ ईश्वरर वैटिपक्कम, श्री मदुरै वीरन मंदिर, अरुल्मिगु कुमारा गुरु परमस्वामी एस कुमारापुरम, अरुल्मिगु वेधा अरुल्पुरीश्वर कंदरकोट्टई, अरुल्मिगु सबनायगर कीरापालयम, अरुल्मिगु काशी विश्वनाथर गेडिलम नदी, सीयूओ, अरुल्मिगु विरुथा गिरिश्वरर तिरुकांडीश्वरम्, अरुल्मिगु अमृत लिंगेश्वर पेरिया, अरुल्मिगु मार्गबंधु तिरुकांडीश्वरम्, अरुल्मिगु नादन पाथेश्वरर तिरुकांडीश्वरम्, अरुल्मिगु सिंगारणाथर कोंगरायनूर शामिल हैं।
श्री कृष्ण जन्मस्थान, श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड समेत कई मंदिरों से आए उपहार
इसी प्रकार, मथुरा से श्री कृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान, जम्मू कश्मीर से श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड जम्मू, मलेसिया से श्री महा मरिअम्मन मंदिर, अरुल्मिगु श्री राजाकलियम्मन ग्लास मंदिर, श्री कंदस्वामी कोविल, श्री वीरा मुनिस्वरर मंदिर, श्री नगराथर शिवन मंदिर, अरुल्मिगु बालथंडायुथपानी मंदिर, श्री कुंज बिहार मंदिर भी इस आध्यात्मिक अभियान में सहभागी बने हैं।
काशी के प्रमुख मंदिरों से भी सहभागिता
वाराणसी से सप्तमात्रिका सिद्धपीठ श्री बड़ी शीतलाधाम शीतलाघाट, काशी त्रिलोचन महादेव मंदिर, सिद्ध पीठ बड़ी काली जी मंदिर कालिका गली, श्री बड़ा गणेश मंदिर लोहटिया, श्री केदारेश्वर मंदिर केदार घाट, श्री ओम कालेश्वर मंदिर कोयला बाजार, श्री कालभैरव मंदिर भैरोनाथ, विन्ध्यवासिनी, दशाश्वमेध, तुलजा देवी, दशाश्धमध्येश्वर, जमेश्वर, प्राचीन रुद्रसरोवर, श्री श्रीयन्त्रराज, श्री दक्षिणी आदि शीतला बुढ़ीय माई, कपिलधारा पंचकोशी, शूलटंकेश्वर, प्रयागघाट, रामेश्वर पंचकोशी, महिषासुर मां मंदिर, लोलार्क कुंड, बैजनाथ मंदिर बैजनत्था, श्री चन्द्रेश्वर मंदिर केदारघाट, श्री लोलार्क कुंड मंदिर भदैनी, श्री अन्नपूर्णा मंदिर विश्वनाथ गली, श्री महालक्ष्मी मंदिर लक्सा, श्री बटुक भैरव मंदिर कमच्छा, श्री कामख्या मंदिर कमच्छा, अन्य प्रमुख मंदिर काशी और विशालाक्षी मंदिर काशी से भी पावन भेंट प्राप्त हुई है।
देश-विदेश के अन्य तीर्थस्थलों की सहभागिता
उत्तराखंड से श्री केदारनाथ, मुंबई से लाल बाग के राजा और श्री सिद्धिविनायक मंदिर, गुजरात से द्वारकाधीश मंदिर, श्रीलंका से श्री ऐश्वर्या लक्ष्मी मंदिर कोलंबो तथा राजस्थान से नाथद्वारा मंदिर उदयपुर से भी पावन प्रसाद और भेंट काशी विश्वनाथ धाम पहुंच चुकी है।
पवित्र सामग्री में जल, रज, वस्त्र और पुष्प शामिल
इन भेंटों में विभिन्न तीर्थस्थलों का पवित्र जल, मंदिरों में पूजित पुष्पमालाएं, रज, चंदन, वस्त्र तथा अन्य पूजनीय सामग्री सम्मिलित है। यह संपूर्ण प्रक्रिया सनातन परंपरा की आध्यात्मिक एकता का सजीव प्रतीक बनकर सामने आई है।
कूरियर और प्रतिनिधियों के माध्यम से जारी है क्रम
इसके अतिरिक्त, अनेक मंदिरों से प्रसाद कूरियर माध्यम से प्रेषित किया जा रहा है, जबकि कुछ प्रतिष्ठित मंदिरों के प्रतिनिधि स्वयं पावन भेंट लेकर धाम में पधारने वाले हैं। इस प्रकार, यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान न होकर संपूर्ण राष्ट्र और विश्व के विविध तीर्थों के मध्य भावनात्मक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक सेतु के रूप में स्थापित हो रहा है।
आध्यात्मिक एकात्मता का वैश्विक संदेश
मंदिर न्यास की यह अभिनव पहल सनातन संस्कृति में निहित पारिवारिक समरसता, आध्यात्मिक बंधुत्व और सांस्कृतिक अखंडता के संदेश को व्यापक रूप से प्रसारित कर रही है। महाशिवरात्रि के दिव्य अवसर पर प्रारंभ की गई यह परंपरा न केवल काशी की आध्यात्मिक गरिमा को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित करती है, बल्कि समस्त सनातन आस्थाओं को एकात्म भाव से जोड़ते हुए धार्मिक सद्भाव और आध्यात्मिक समन्वय के नए अध्याय का उद्घाटन कर रही है। निश्चय ही, यह पहल राष्ट्र और विश्व के विविध तीर्थस्थलों को एक आध्यात्मिक सूत्र में संगठित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायी कदम सिद्ध हो रही है।
नेपाल की राजधानी काठमांडू में स्थित पशुपतिनाथ मंदिर में महाशिवरात्रि के अवसर पर हजारों हिंदू श्रद्धालु श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ पहुंचे। फल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को मनाया जाने वाला यह पर्व शिवभक्ति के सबसे पावन दिनों में गिना जाता है। शिव पुराण के अनुसार, यह वही रात्रि है जब शिव तत्व का प्रकटीकरण हुआ। इसे कालरात्रि, मोहरात्रि, सुखरात्रि और शिवरात्रि इन चार महत्त्वपूर्ण रात्रियों में शामिल किया गया है।
मान्यता है कि यह दिन आध्यात्मिक जागरण देता है और दुख-संताप से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करता है। श्रद्धालु उत्सव कटुवाल ने बताया कि गौशाला से पशुपति तक दो–तीन किलोमीटर लंबी कतारें लगी थीं और लोग घंटों धैर्यपूर्वक दर्शन के लिए खड़े रहे। सुबह से ही नदी-तालाबों और मंदिरों में स्नान, पूजा, ध्यान और मंत्रोच्चार का सिलसिला जारी रहा।भक्त शांति भक्त ने कहा कि शिवरात्रि पर पूरा दिन पूजा, ध्यान और जप में बिताया जाता है।
वहीं, अनीता सिंह ने बताया कि मंदिर में अनुष्ठान के बाद वे घर जाकर पूजा और उपवास रखेंगी।महाशिवरात्रि, “शिव की रात्रि”, नेपाल और भारत सहित कई देशों में व्यापक श्रद्धा से मनाई जाती है। स्कंद पुराण में भी इस पर्व के महत्व का उल्लेख है। मान्यता है कि इस अवधि में उत्तरी गोलार्ध में तारों की स्थिति आध्यात्मिक ऊर्जा को उन्नत करती है और शिव तत्व सर्वाधिक सक्रिय रहता है।
]]>महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर राजधानी भोपाल में आयोजित किन्नर धर्म सम्मेलन में एक ऐतिहासिक फैसला लिया गया। इस भव्य आयोजन में हिमांगी सखी को देश की पहली किन्नर शंकराचार्य के रूप में घोषित कर उनका पट्टाभिषेक किया गया।
पुष्कर पीठ से संभालेंगी कमान
किन्नर अखाड़े के संस्थापक ऋषि अजय दास की उपस्थिति में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यह ऐतिहासिक घोषणा की गई। हिमांगी सखी राजस्थान के पुष्कर पीठ को देश की पहली किन्नर शंकराचार्य पीठ के रूप में संभालेंगी। मूल रूप से मुंबई निवासी हिमांगी सखी 'मां वैष्णो किन्नर अखाड़ा' की प्रमुख हैं और वे पहली किन्नर भागवत कथा वाचक भी हैं।
60 किन्नरों की हिंदू धर्म में वापसी
सम्मेलन के दौरान एक बड़ा दावा किया गया कि विभिन्न कारणों से धर्म परिवर्तन कर चुके 60 किन्नरों की 'घर वापसी' कराई गई है। आयोजकों ने बताया कि मुस्लिम धर्म अपना चुके इन किन्नरों ने शुद्धिकरण की प्रक्रिया के बाद पुनः हिंदू धर्म स्वीकार किया है।
नए जगद्गुरु और महामंडलेश्वरों की नियुक्ति
सम्मेलन में किन्नर समुदाय के धार्मिक नेतृत्व को मजबूती देने के लिए महत्वपूर्ण नियुक्तियां भी की गईं…
घोषित जगद्गुरु: काजल ठाकुर (भोपाल), तनीषा (राजस्थान), संजना (भोपाल), संचिता (महाराष्ट्र)।
घोषित महामंडलेश्वर: सरिता भार्गव, मंजू, पलपल, रानी ठाकुर, सागर।
यह सम्मेलन किन्नर समुदाय के भीतर चल रहे गद्दी विवाद और धर्म परिवर्तन के आरोपों के बीच आयोजित किया गया, जिसे काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
]]>मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा भाव से शिव-शक्ति की पूजा करने पर अविवाहित कन्याओं को योग्य वर की प्राप्ति होती है, जबकि विवाहित दंपतियों को सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद मिलता है। ज्योतिषीय दृष्टि से कुछ राशियों के लिए यह दिन विशेष फलदायी माना गया है। कहा जाता है कि इन राशियों पर भगवान शिव की विशेष कृपा बनी रहती है। आइए जानते हैं यह कौन सी राशियां हैं।
वृषभ राशि
वृषभ राशि के जातकों के लिए महाशिवरात्रि शुभ संकेत लेकर आ सकती है। इस दौरान आर्थिक लाभ के योग बन सकते हैं, जिससे वित्तीय स्थिति मजबूत होगी। मानसिक तनाव में कमी आएगी और परिवार में सुख-शांति का वातावरण रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चंद्रमा का भगवान शिव से गहरा संबंध है, और वृषभ राशि पर चंद्रमा का विशेष प्रभाव माना जाता है।
कर्क राशि
कर्क राशि वालों के लिए भी यह पर्व सकारात्मक परिणाम दे सकता है। करियर में उन्नति के अवसर मिल सकते हैं और व्यापार से जुड़े लोगों को अच्छा लाभ हो सकता है। आय में बढ़ोतरी के संकेत हैं। यदि पहले से कोई निवेश किया हुआ है, तो उससे भी लाभ मिलने की संभावना बन सकती है। जीवन में खुशियों का आगमन होगा।
मकर राशि
मकर राशि के जातकों को महाशिवरात्रि के आसपास धन लाभ के योग दिखाई दे सकते हैं। लंबे समय से चली आ रही परेशानियों से राहत मिलने के संकेत हैं। किसी शुभ समाचार से मन प्रसन्न हो सकता है। ज्योतिष में शनि देव को मकर राशि का स्वामी माना जाता है और धार्मिक मान्यता के अनुसार शनि देव भगवान शिव के बड़े भक्त हैं।
कुंभ राशि
कुंभ राशि वालों के लिए यह पर्व आर्थिक और पेशेवर जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। करियर में सफलता मिलने के योग हैं और आय में वृद्धि संभव है। पुराने निवेश से भी फायदा हो सकता है। साथ ही मानसिक शांति और पारिवारिक सुख-समृद्धि बनी रहने के संकेत हैं।
महाशिवरात्रि का शुभ समय 15 से 16 फरवरी तक है. आइए इस दिन से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियों पर एक नजर डालते हैं.
यह महाशिवरात्रि खास क्यों है?
इस वर्ष शिवरात्रि में दिव्य और ज्योतिषीय शक्तियों का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है. ऐसा माना जाता है कि यह शुभ योगों का ऐसा संयोजन है जो लगभग 300 सालों में एक बार ही होता है. ये विशेष राज योग और शुभ योग इस पर्व को और भी अधिक शुभ बनाते हैं.
11 शुभ योगों की विशेषताएं
शिव योग- शिव के लिए सबसे शुभ योग, सुबह 5.45 बजे से पूरे दिन चलता है.
सर्वार्थ सिद्धि योग- सुबह 6.43 बजे से 9.37 बजे तक सभी कार्यों में सफलता.
प्रीति योग- प्रेम और मित्रता की शक्ति, सुबह 11.19 बजे से 11.23 बजे तक.
आयुष्मान योग- दीर्घायु, दोपहर 12.17 बजे से रात 1.54 बजे तक.
सौभाग्य योग- शाम 5.07 बजे से शाम 5.53 बजे तक.
शोभना योग- सौंदर्य, विकास, शाम 7.47 बजे से रात 8.34 बजे तक.
सत्य योग- साधना में सफलता, रात 8.54 बजे से रात 10.02 बजे तक.
शुक्ल योग- शुद्ध विचार, रात 10.42 बजे से रात 11.58 बजे तक.
ध्रुव योग- स्थिरता, सुबह 2.57 बजे से अगली सुबह 5.53 बजे तक.
महाशिवरात्रि पर पांच दुर्लभ राजयोग
बुद्धादित्य राज योग -बुद्धि, आदर और सम्मान की एक अद्भुत अवस्था.
लक्ष्मी-नारायण योग- आर्थिक शक्ति, धन और सफलता
शुक्रदित्य योग- सुख, कला और सौंदर्य
साशा राज योग कुछ लाभ, स्थिरता
चतुर्ग्राही योग- एक दुर्लभ स्थिति जिसमें सूर्य, बुध, शुक्र और राहु एक साथ आते हैं.
इन पांच राज योगों के लाभ आम दिनों में शायद ही देखने को मिलते हैं. ये दुर्लभ योग धन, समृद्धि, विलासिता और व्यापार में भारी लाभ लाते हैं.
महाशिवरात्रि पर आराधना का समय
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:13 बजे से दोपहर 12:58 बजे तक.
शाम की पूजा का समय: राहु काल के बाद से शाम 7:28 बजे तक.
निशीत काल (पूजा का सबसे शुभ समय): दोपहर 12:09 बजे से रात 1:00 बजे तक.
राहु काल: 15 फरवरी, शाम 4:47 से 6:11 बजे तक. ज्योतिष के अनुसार, इस समय पूजा-अर्चना शुरू नहीं करनी चाहिए.
]]>महाशिवरात्रि का शुभ समय 15 से 16 फरवरी तक है. आइए इस दिन से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियों पर एक नजर डालते हैं.
यह महाशिवरात्रि खास क्यों है?
इस वर्ष शिवरात्रि में दिव्य और ज्योतिषीय शक्तियों का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है. ऐसा माना जाता है कि यह शुभ योगों का ऐसा संयोजन है जो लगभग 300 सालों में एक बार ही होता है. ये विशेष राज योग और शुभ योग इस पर्व को और भी अधिक शुभ बनाते हैं.
11 शुभ योगों की विशेषताएं
शिव योग- शिव के लिए सबसे शुभ योग, सुबह 5.45 बजे से पूरे दिन चलता है.
सर्वार्थ सिद्धि योग- सुबह 6.43 बजे से 9.37 बजे तक सभी कार्यों में सफलता.
प्रीति योग- प्रेम और मित्रता की शक्ति, सुबह 11.19 बजे से 11.23 बजे तक.
आयुष्मान योग- दीर्घायु, दोपहर 12.17 बजे से रात 1.54 बजे तक.
सौभाग्य योग- शाम 5.07 बजे से शाम 5.53 बजे तक.
शोभना योग- सौंदर्य, विकास, शाम 7.47 बजे से रात 8.34 बजे तक.
सत्य योग- साधना में सफलता, रात 8.54 बजे से रात 10.02 बजे तक.
शुक्ल योग- शुद्ध विचार, रात 10.42 बजे से रात 11.58 बजे तक.
ध्रुव योग- स्थिरता, सुबह 2.57 बजे से अगली सुबह 5.53 बजे तक.
महाशिवरात्रि पर पांच दुर्लभ राजयोग
बुद्धादित्य राज योग -बुद्धि, आदर और सम्मान की एक अद्भुत अवस्था.
लक्ष्मी-नारायण योग- आर्थिक शक्ति, धन और सफलता
शुक्रदित्य योग- सुख, कला और सौंदर्य
साशा राज योग कुछ लाभ, स्थिरता
चतुर्ग्राही योग- एक दुर्लभ स्थिति जिसमें सूर्य, बुध, शुक्र और राहु एक साथ आते हैं.
इन पांच राज योगों के लाभ आम दिनों में शायद ही देखने को मिलते हैं. ये दुर्लभ योग धन, समृद्धि, विलासिता और व्यापार में भारी लाभ लाते हैं.
महाशिवरात्रि पर आराधना का समय
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:13 बजे से दोपहर 12:58 बजे तक.
शाम की पूजा का समय: राहु काल के बाद से शाम 7:28 बजे तक.
निशीत काल (पूजा का सबसे शुभ समय): दोपहर 12:09 बजे से रात 1:00 बजे तक.
राहु काल: 15 फरवरी, शाम 4:47 से 6:11 बजे तक. ज्योतिष के अनुसार, इस समय पूजा-अर्चना शुरू नहीं करनी चाहिए.
]]>महाशिवरात्रि से पहले काशी में शिव विवाह की पावन रस्मों का शुभारंभ शुक्रवार को बाबा विश्वनाथ की सगुन हल्दी के साथ होगा। सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार बाबा को विवाह से पूर्व हल्दी अर्पित की जाएगी और उन्हें दूल्हा रूप में सजाया जाएगा।
बांसफाटक से निकलेगी हल्दी की पारंपरिक यात्रा
बांसफाटक स्थित श्रीमहंत लिंगिया महाराज (शिव प्रसाद पांडेय) के आवास, श्रीयंत्र पीठम “श्री धर्म निवास” से हल्दी की पारंपरिक यात्रा टेढ़ीनीम स्थित पूर्व महंत आवास के लिए रवाना होगी। यहां बाबा की पंचबदन चल प्रतिमा पर विधि-विधान से हल्दी अर्पित की जाएगी।
बड़ी शीतला माता मंदिर के उपमहंत अवशेष पांडेय (कल्लू महाराज) ने बताया कि काशी की लोकपरंपरा में शिव विवाह से पूर्व सगुन की हल्दी चढ़ाने की विशेष मान्यता है। इस वर्ष विशेष रूप से नासिक से मंगाई गई हल्दी बाबा को अर्पित की जाएगी।
सारंगनाथ से आएंगे ससुरालीजन
शिव विवाह की इस रस्म में बाबा के ‘ससुराल’ सारंगनाथ मंदिर से भी ससुरालीजन शामिल होंगे। सामूहिक रुद्राभिषेक पीठ के पदाधिकारियों के अनुसार, सारंगनाथ से हल्दी लेकर श्रद्धालु बांसफाटक पहुंचेंगे और वहां से शोभायात्रा के साथ टेढ़ीनीम महंत आवास जाएंगे। डमरू, शंखनाद और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष के बीच बाबा को सगुन की हल्दी अर्पित की जाएगी।
विशेष पूजन और भव्य श्रृंगार
हल्दी चढ़ाने से पहले महंत परिवार की संरक्षिका मोहिनी देवी के सानिध्य में 11 वैदिक ब्राह्मणों द्वारा पंचबदन प्रतिमा का विशेष पूजन कराया जाएगा। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बाबा का पारंपरिक और भव्य श्रृंगार होगा। दूल्हे के रूप में सजे श्रीविश्वनाथ की झलक पाने को भक्त उत्साहित हैं।
नृत्यांजलि और स्वरांजलि से भक्तिमय माहौल
हल्दी अनुष्ठान के उपरांत सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी होंगी। नृत्यांजलि और स्वरांजलि के माध्यम से शिव भक्ति का रस बिखरेगा और पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठेगा।
काशी में शिव विवाह की इन रस्मों के साथ महाशिवरात्रि महापर्व की तैयारियां भी चरम पर पहुंच गई हैं। श्रद्धालुओं के लिए यह आयोजन आस्था, परंपरा और उत्सव का अद्भुत संगम बनकर सामने आएगा।
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