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जिले के लवकुशनगर में एक अनोखी प्रेम कहानी इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। केंद्रीय जेल सतना में पदस्थ मुस्लिम महिला सहायक जेल अधीक्षिका फिरोजा खातून ने हत्या के मामले में सजा काट चुके हिंदू युवक धर्मेंद्र सिंह चंदला से हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार विवाह कर लिया। यह शादी 5 मई को वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक रस्मों के बीच संपन्न हुई। खास बात यह रही कि लड़की पक्ष के परिजन शादी में शामिल नहीं हुए, जिसके बाद बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने कन्यादान की रस्म निभाई।
जानकारी के मुताबिक रीवा निवासी फिरोजा खातून केंद्रीय जेल सतना में सहायक जेल अधीक्षक के पद पर कार्यरत हैं। जेल में उनकी जिम्मेदारी वारंट इंचार्ज के रूप में थी, वहीं धर्मेंद्र सिंह चंदला हत्या के एक चर्चित मामले में उम्रकैद की सजा काट चुका था। जेल में अच्छे व्यवहार के चलते वह प्रशासनिक और वारंट संबंधी कार्यों में सहयोग करता था।
बताया जा रहा है कि ड्यूटी के दौरान दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई, जो धीरे-धीरे दोस्ती और फिर प्रेम संबंध में बदल गई। लंबे समय तक एक-दूसरे को समझने के बाद दोनों ने विवाह करने का फैसला लिया।
सूत्रों के अनुसार फिरोजा खातून के परिजन इस रिश्ते के खिलाफ थे, जिसके चलते परिवार का कोई सदस्य शादी समारोह में शामिल नहीं हुआ। ऐसे में बजरंग दल के कार्यकर्ता आगे आए और विवाह की रस्मों में सहयोग करते हुए कन्यादान की जिम्मेदारी निभाई। शादी पूरी तरह हिंदू रीति-रिवाज और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न हुई, जहां दूल्हा-दुल्हन ने सात फेरे लेकर साथ जीवन बिताने का संकल्प लिया।
जानकारी के अनुसार धर्मेंद्र सिंह वर्ष 2007 में नगर परिषद चंदला के तत्कालीन उपाध्यक्ष कृष्ण दत्त दीक्षित की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। इस चर्चित मामले में उसे आजीवन कारावास की सजा हुई थी। करीब 14 साल जेल में रहने और अच्छे आचरण के आधार पर उसे रिहा किया गया था और पिछले चार वर्षों से वह जेल से बाहर था।
विवाह की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। लोग इस शादी को अलग-अलग नजरिए से देख रहे हैं। कुछ लोग इसे प्रेम, भाईचारे और गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल बता रहे हैं, तो कुछ सरकारी सेवा के दौरान कैदी से संबंध बनने को लेकर सवाल उठा रहे हैं। फिलहाल यह विवाह सतना केंद्रीय जेल से लेकर स्थानीय क्षेत्र और सोशल मीडिया तक चर्चा और बहस का विषय बना हुआ है।
]]>जानकारी के मुताबिक रीवा निवासी फिरोजा खातून केंद्रीय जेल सतना में सहायक जेल अधीक्षक के पद पर कार्यरत हैं। जेल में उनकी जिम्मेदारी वारंट इंचार्ज के रूप में थी, वहीं धर्मेंद्र सिंह चंदला हत्या के एक चर्चित मामले में उम्रकैद की सजा काट चुका था। जेल में अच्छे व्यवहार के चलते वह प्रशासनिक और वारंट संबंधी कार्यों में सहयोग करता था।
बताया जा रहा है कि ड्यूटी के दौरान दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई, जो धीरे-धीरे दोस्ती और फिर प्रेम संबंध में बदल गई। लंबे समय तक एक-दूसरे को समझने के बाद दोनों ने विवाह करने का फैसला लिया।
सूत्रों के अनुसार फिरोजा खातून के परिजन इस रिश्ते के खिलाफ थे, जिसके चलते परिवार का कोई सदस्य शादी समारोह में शामिल नहीं हुआ। ऐसे में बजरंग दल के कार्यकर्ता आगे आए और विवाह की रस्मों में सहयोग करते हुए कन्यादान की जिम्मेदारी निभाई। शादी पूरी तरह हिंदू रीति-रिवाज और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न हुई, जहां दूल्हा-दुल्हन ने सात फेरे लेकर साथ जीवन बिताने का संकल्प लिया।
जानकारी के अनुसार धर्मेंद्र सिंह वर्ष 2007 में नगर परिषद चंदला के तत्कालीन उपाध्यक्ष कृष्ण दत्त दीक्षित की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। इस चर्चित मामले में उसे आजीवन कारावास की सजा हुई थी। करीब 14 साल जेल में रहने और अच्छे आचरण के आधार पर उसे रिहा किया गया था और पिछले चार वर्षों से वह जेल से बाहर था।
विवाह की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। लोग इस शादी को अलग-अलग नजरिए से देख रहे हैं। कुछ लोग इसे प्रेम, भाईचारे और गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल बता रहे हैं, तो कुछ सरकारी सेवा के दौरान कैदी से संबंध बनने को लेकर सवाल उठा रहे हैं। फिलहाल यह विवाह सतना केंद्रीय जेल से लेकर स्थानीय क्षेत्र और सोशल मीडिया तक चर्चा और बहस का विषय बना हुआ है।
]]>मप्र के विदिशा जिले में रिश्तों के बदलते स्वरूप और सामाजिक ताने-बाने को चुनौती देने वाला एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस प्रशासन को भी हैरत में डाल दिया है। दो विवाहित महिलाएं एक-दूसरे के साथ जीवन बिताने की जिद पर अड़ी हैं। इससे उपजा विवाद अब थाने की दहलीज तक जा पहुंचा है।
इस उलझे हुए रिश्ते की कहानी तब उजागर हुई जब एक पीड़ित पति ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर अपनी पत्नी से तलाक दिलाने और दूसरी महिला के खिलाफ कार्रवाई की गुहार लगाई। बीते दिन जनसुनवाई के दौरान एएसपी डॉ. प्रशांत चौबे के पास आवेदकों की लंबी कतार थी। अपनी बारी का इंतजार कर रहे एक युवक का आवेदन जब अधिकारी के हाथ में पहुंचा, तो वे भी चौंक गए।
महिला ने स्वयं स्वीकार किया
युवक ने अपनी पत्नी के किसी और पुरुष के साथ नहीं, बल्कि एक अन्य विवाहित महिला के साथ समलैंगिक संबंधों का हवाला देते हुए सुरक्षा और न्याय की मांग की थी। पीड़ित पति ने आवेदन में बताया कि उसकी शादी महज एक साल पहले जिले के ही दूसरे थाना क्षेत्र की एक युवती से हुई थी। विवाह के बाद से ही स्थितियां सामान्य नहीं थीं।
एक साल के भीतर उसकी पत्नी केवल दो-तीन बार ही ससुराल आई। जांच-पड़ताल और बातचीत में खुलासा हुआ कि पत्नी के मायके में रहने वाली उसकी एक हमउम्र रिश्तेदार महिला के साथ प्रगाढ़ संबंध हैं। पति का दावा है कि उक्त महिला ने स्वयं स्वीकार किया है कि उन दोनों के बीच समलैंगिक संबंध हैं और वे आपस में समलैंगिक विवाह भी कर चुकी हैं। परेशान पति तलाक देने को है तैयार मानसिक और सामाजिक प्रताडऩा से टूट चुके है।
तलाक देने के लिए तैयार पति
मानसिक और सामाजिक प्रताडऩा से टूट चुके पति अपनी पत्नी को तलाक देने के लिए तैयार है। उसने पुलिस से मांग की है कि पिछले 15 दिनों से जांच के नाम पर रखा गया उसका मोबाइल वापस दिलाया जाए। उसे तलाक दिलाया जाए।
तीन शादियां कर चुकी है महिला
फरियादी ने मामले की गंभीरता बताते हुए कहा कि जिस महिला के मोहपाश में उसकी पत्नी है, वह पहले ही तीन शादियां कर चुकी है और तीनों पतियों को छोड़ चुकी है। आरोप है कि दो महीने पहले वह महिला कुछ अज्ञात लोगों के साथ फरियादी के घर पहुंची और उसे जान से मारने की धमकी देते हुए पत्नी को छोडऩे का दबाव बनाया। इतना ही नहीं, वह महिला सोशल मीडिया पर अनर्गल वीडियो डालकर युवक को बदनाम कर रही है और थाने में उसके खिलाफ झूठी शिकायतें भी दर्ज कराई गई हैं।
आवेदन प्राप्त हुआ है। चूंकि मामला काफी पेचीदा और संवेदनशील है, इसलिए तीनों पक्षों (पति, पत्नी और दूसरी महिला) के बयान दर्ज होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। जांच के बाद ही वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। डॉ. प्रशांत चौबे, एडिशनल एसपी, विदिशा
]]>उस समय मुस्लिम समाज के लोगों ने नौगांव थाने पहुंचकर घेराव किया था और युवतियों की जल्द तलाश की मांग की थी।
घटना के कुछ दिनों बाद 13 और 14 फरवरी के आसपास दोनों युवतियों ने अपने साथियों के साथ सोशल मीडिया पर वीडियो जारी किया। वीडियो में उन्होंने बताया कि वे अपनी मर्जी से घर से गई हैं और दोनों ने अपने-अपने साथियों से शादी कर ली है। युवतियों ने यह भी कहा कि वे बालिग हैं और किसी दबाव में नहीं हैं। सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद मामला तेजी से वायरल हो गया।
अब करीब एक महीने बाद सोमवार 16 मार्च को दोनों जोड़े नौगांव थाने पहुंचे और यहां थाना प्रभारी वाल्मीकि चौबे की मौजूदगी में अपने बयान दर्ज कराए। इस दौरान दोनों पक्षों के परिजन और समाज के लोग भी थाने पहुंचे।
युवाओं ने पुलिस को बताया कि उन्होंने नागपुर में आर्य समाज मंदिर में हिंदू रीति-रिवाज से विवाह किया है और अब वे पति-पत्नी के रूप में साथ रहना चाहते हैं। उनका कहना है कि यह विवाह दोनों की सहमति से हुआ है और इस पर किसी तरह का दबाव नहीं है। विवाह के बाद दोनों युवतियों ने हिंदू धर्म अपनाने की बात कही और अपने नए नाम भी रख लिए।
उन्होंने पुलिस को बताया कि वे पिछले 7-8 साल से एक-दूसरे को जानते थे और एक-दूसरे से प्रेम करते थे। दोनों ने बालिग होने का इंतजार किया और इसके बाद अपनी मर्जी से शादी करने का फैसला लिया। दोनों जोड़ों ने पुलिस से सुरक्षा की मांग भी की है। उनका कहना है कि शादी के बाद उन्हें किसी तरह के खतरे की आशंका है, इसलिए प्रशासन उन्हें सुरक्षा उपलब्ध कराए।
पुलिस ने दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर लिए हैं और पूरे मामले की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि यदि सुरक्षा की आवश्यकता पाई जाती है तो नियमानुसार सुरक्षा दी जाएगी। जब दोनों युवतियां थाने पहुंचीं तो मुस्लिम समाज के कई लोग भी वहां पहुंचे और उन्हें समझाने की कोशिश की लेकिन युवतियों ने स्पष्ट कहा कि उन्होंने अपनी मर्जी से विवाह किया है और अब वे अपने पति के साथ ही रहेंगी। इस पूरे घटनाक्रम के बाद नौगांव क्षेत्र में यह मामला लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है।
]]>छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल से एक ऐसी खबर आई है जो उम्मीद, बदलाव और नई शुरुआत की मिसाल पेश करती है. कभी जंगलों में बंदूक थामे घूमने वाले नक्सली अब समाज की मुख्यधारा में लौट आए हैं, और अब उन्हीं हाथों में मेहंदी और रिश्तों की डोर सजी है.
कांकेर जिले का पखांजुर थाना परिसर रविवार को एक अनोखे और प्रेरणादायक विवाह का साक्षी बना. यहां आत्मसमर्पित नक्सली सागर हिरदो और सचिला मांडवी ने एक-दूसरे का हाथ थामकर नई जिंदगी की शुरुआत की. फूलों से सजे मंडप में मंत्रोच्चार के बीच दोनों ने सात फेरे लिए और जीवनभर साथ निभाने का वादा किया.
थाना परिसर में हुआ यह विवाह किसी फिल्मी दृश्य से कम नहीं था. जहां कभी बंदूक और हिंसा का साया था, वहां अब प्रेम, शांति और विश्वास का संदेश गूंज रहा था. पुलिस अधिकारी, ग्रामीण और समाज के लोग इस नए जीवन की शुरुआत के गवाह बने.
जानकारी के अनुसार, सागर हिरदो वर्ष 2014 में नक्सल संगठन से जुड़ा था और दिसंबर 2024 में पखांजुर पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया. वहीं, सचिला मांडवी ने वर्ष 2020 में नक्सल संगठन का दामन छोड़ा और उसी वर्ष पुलिस के समक्ष सरेंडर किया. आत्मसमर्पण के बाद दोनों पुनर्वास योजना के तहत समाज की मुख्यधारा में शामिल हुए. इसी दौरान दोनों की पहचान हुई और यह रिश्ता विवाह के रूप में परिणित हुआ.
इस सकारात्मक पहल में पखांजुर थाना प्रभारी लक्ष्मण केवट और गोण्डाहुर थाना प्रभारी रामचंद्र साहू की अहम भूमिका रही, जिन्होंने समाज में लौटे इन युवाओं को नई शुरुआत के लिए प्रेरित किया.
कभी जिन हाथों में बंदूक थी, अब उनमें मेहंदी सजी है. जंगलों की राह छोड़ अब ये जोड़ा समाज की नई राह पर बढ़ चला है. इस जोड़े ने यह साबित कर दिया है कि नक्सलियों के लिए भी हिंसा की अंधेरी राह से नए जीवन का सूरज निकल सकता है, अगर वे मुख्यधारा से जुड़ जाएं. यह विवाह सिर्फ एक रिश्ता नहीं, बल्कि शांति, विश्वास और प्रेम से भरे नए बस्तर की तस्वीर है.
]]>घटना तितावी थाना क्षेत्र की है। दोनों युवतियां पिछले करीब डेढ़ साल से एक साथ रह रही थीं। परिवार के लोगों ने उनके इस रिश्ते का विरोध किया। इस कारण कुछ महीने पहले दोनों घर छोड़कर गाजियाबाद चली गईं। वहां दोनों ने एक किराए के मकान में रहना शुरू किया। इसके बाद एक निजी फैक्ट्री में नौकरी करने लगीं।
परिवार ने दर्ज कराई थी शिकायत
दोनों लड़कियों के गायब होने के परिवार में हड़कंप मच गया। परिवार के लोगों ने दोनों को खोजने की भरसक कोशिश की। जब परिवार को उनकी कोई जानकारी नहीं मिली तो एक युवती के पिता ने आईजीआरएस पोर्टल पर अपहरण की शिकायत दर्ज करा दी। पुलिस ने मोबाइल लोकेशन के जरिए युवतियों से संपर्क साधा।
गुरुवार शाम दोनों युवतियां तितावी थाने पहुंचीं। इनमें से एक ने मांग में सिंदूर लगाया हुआ था, जबकि दूसरी पैंट-शर्ट में नजर आई। उनके इस रूप को देखकर पुलिस अधिकारी भी हैरान रह गए।
साथ रहने का जताया इरादा
तितावी पुलिस ने दोनों युवतियों के बयान दर्ज किए हैं। सिंदूर लगाए युवती ने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्होंने कुछ दिन पहले शादी कर ली है। अब वे एक-दूसरे के साथ रहना चाहती हैं। दोनों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें अपने परिवारों से जान का खतरा है। इसलिए उन्होंने परिवार से सुरक्षा की भी मांग पुलिस के सामने रखी है।
थाना प्रभारी मानवेंद्र भाटी ने बताया कि दोनों युवतियां ममेरी और फुफेरी बहन हैं। अब लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही हैं। उन्होंने थाने में आकर एक-दूसरे के साथ रहने की इच्छा जाहिर की है। पुलिस ने उनकी सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उन्हें घर भेजा है। उनके परिवारों को भी कानून का पालन करने की सख्त हिदायत दी गई है।
सोशल मीडिया पर मामला वायरल
मुजफ्फरनगर के इस अनोखे रिश्ते का मामला सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। कुछ लोग इस मामले पर समर्थन जता रहे हैं, वहीं कुछ लोगों की ओर से विरोध भी देखने को मिल रहा है। हालांकि, दोनों युवतियों ने साफ कहा है कि वे अपनी मर्जी से साथ रह रही हैं। वे अपने फैसले से खुश हैं।
राहुल पराशर
समाज में कई किस्से ऐसे बनते हैं, जो मिसाल बन जाते हैं और जिंदगीभर याद रह जाते हैं. हाल में गुजरात के सबसे बड़े शक्तिपीठ अंबाजी में भी कुछ ऐसा ही हुआ. यहां अपने परिवार के साथ रहने वाले प्रवीणसिंह राणा ने बेटे की मृत्यु के बाद अपनी बहू का विवाह कराकर दुनिया के सामने बेहतर उदाहरण रखा है.
दरअसल, प्रवीणसिंह ने कुछ समय पहले अपने बेटे को खो दिया था. बीते साल उनके घर दीवाली का त्यौहार मानो दुःख लेकर आया. त्योहार के दिन बड़े लड़के सिद्धराजसिंह की हार्ट अटैक से मौत हो गई. सिद्धराजसिंह की जब मौत हुई तब उनकी बेटी दीक्षिता महज 6 महीने की थी. सिद्धराजसिंह की पत्नी कृष्णा पर दुखों का पहाड़ गिर गया था. पर अब उनके ससुर ने अपनी बहू को बेटी मानकर फिर से शादी कराकर एक पिता का फर्ज निभाया.
प्रवीणसिंह राणा,अंबाजी के पेट्रोल पंप के पीछे परिवार के साथ रहते थे. उनके बड़े बेटे की मौत के बाद वह अपनी बहू को नया जीवन देना चाहते थे. बही की कम उम्र में जीवनसाथी के बगैर अकेल हो जाना और साथ में छोटी बच्ची होना उसके लिए बड़ा संघर्ष था. ऐसे में प्रवीणसिंह ने समाज की परवाह किए बीना अपनी बहू की फिर से धामधूम से शादी कराकर पिता का फर्ज निभाया.
शादी में विदाई के वक्त ससुर पिता की भूमिका में नजर आए और उन्होंने अपनी आंखों से रोते- रोते बहु नहीं बेटी को विदाई दी. शादी करने वाला दुल्हा संजय भी प्रवीणसिंह के बड़े बेटे और बहु का भी दोस्त था. संजय ने बताया कि मैं दोस्त की बेटी ओर बहू को नया जीवन देना चाहता था. ट्रेन से विदाई होते समय छोटी पोती दादा को प्यार करते नजर आए. यह शादी पूरे गुजरात में मिसाल बन गई है.
]]>छिंदवाड़ा जिले में अपनी पसंद से शादी करना उपसरपंच को महंगा पड़ गया। दस गावों की पंचायत ने उस पर सवा लाख का जुर्माना लगा दिया है।जानकारी के मुताबिक हर्रई ब्लॉक के सालढाना गांव के उपसरपंच उरदलाल यादव ने एक आदिवासी युवती पंचवती उईके से कोर्ट मैरिज कर ली, और बस… इलाके के 'ठेकेदारों' को यह रास नहीं आया। नतीजा? दस गांवों के सरपंचों ने मिलकर पंचायत बिठाई और फरमान जारी कर दिया – 1.30 लाख का हर्जाना दो, नहीं तो समाज से बाहर!
पंचायत बनी 'अदालत', प्यार बना 'गुनाह'
सितंबर 2024 में सालढाना समेत 10 गांवों के सरपंच एकजुट हुए। उनकी 'अदालत' बैठी और 'गुनाह' तय हुआ – एक गैर-आदिवासी का आदिवासी महिला से विवाह। सजा भी तुरंत सुना दी गई – मोटा जुर्माना और सामाजिक बहिष्कार का खौफ।
एक साल बीता, दर्द अब भी ताजा
शादी को सालभर हो गया, लेकिन पंचायत का 'इंसाफ' अभी बाकी है। एक साल बीतने के बाद भी जब उपसरपंच ने जर्माना राशि अदा नहीं की तो पंचायत की तरफ से ही बिरजू पिता जहरलाल जनसुनवाई में पहुंच गए और प्रशासन से गुहार लगाई – हुजूर, हमारा जुर्माना वसूल करवाओ! जनसुनवाई में अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को समझा है और जांच के आदेश दे दिए हैं। सूत्रों की मानें तो अगर पंचायत का यह आदेश गैरकानूनी निकला, तो सरपंचों पर गाज गिरना तय है।
किसने क्या कहा
सालढ़ाना पंचायत के सरपंच पति सुरेंद्र ने बताया कि दस गांव की पंचायत ने सर्वसम्मति से ये फैसला सुनाया था, जिसकी जुर्माना राशि अभी तक नहीं मिल सकी है। उपसरपंच उरदलाल पिता हंसराज ने बताया कि मैंने आदिवासी महिला से विवाह किया था। दोनों की मर्जी थी। मैं जुर्माने की राशि देने की स्थिति में नहीं हूं।
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यूपी के सीतापुर में एक कम उम्र लड़की ने अधेड़ से शादी कराने पर खुद को फांसी लगाकर जान दे दी। लड़की के पिता दुनिया में नहीं है। गांववालों के मुताबिक परिजनों ने लड़की की मर्जी के खिलाफ शादी कर दी थी। लड़की गांव के ही प्राइवेट स्कूल में कक्षा आठ की छात्रा है और गुरुवार को भी स्कूल गई थी। हालांकि पुलिस लड़की को बालिग बता रही है। पुलिस ने शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।
मामला जिले के थाना तालगांव के एक गांव का है। गांववालों का कहना है कि लड़की की शादी तीन महीने पहले गांव के ही एक अधिक उम्र के शख्स से हुई थी। लड़की के पिता की मौत एक साल पहले हो चुकी थी। अधिक उम्र के पुरुष से शादी करने पर लड़की नाराज चल रही थी। अंतत: उसने अपनी जान दे दी। बताते हैं गरीबी के चलते मां और परिवारी जनों ने उसकी शादी गांव में ही उससे ज्यादा उम्र के अधेड़ के साथ कर दी थी। अधिक उम्र के व्यक्ति के साथ लड़की की जोड़ी मैच नहीं कर रही थी। आए दिन घर में मारपीट होती थी।
लड़की की एक सहेली ने बताया कि उसने मारपीट से शरीर पर पड़े निशान को दिखाया था। रोज की तरह वह गुरुवार को भी स्कूल गई थी। छुट्टी में वापस आने के बाद अपनी ससुराल में दुपट्टे से फंदा बनाकरआत्महत्या कर ली। आत्महत्या के समय ससुरालीजन खेत की तरफ गए थे। गांव के बच्चों ने शव लटकते हुए देखा। उन्होंने चीख पुकार मचाई तो लड़की की मां भी रोती बिलखते हुए पहुंची। ग्रामीणों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।
क्या बोली पुलिस
इस बारे में कोतवाली प्रभारी का कहना है कि किसी ने कोई आरोप नहीं लगाया है। शादी के बाद उम्र से कोई मतलब नहीं है। किसी भी उम्र में कोई भी पढ़ाई कर सकता है।
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