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एमपी में अलग अलग जगहों पर मेडिकल जांचों और दवाइयों की कीमतों में जबर्दस्त अंतर है। एक ही फार्मूले की दवाइयों के अलग अलग कंपनियां के रेट में 4 गुना तक अंतर देखा जा रहा है। कुछ ऐसा ही हाल मेडिकल जांचों के रेट में भी है। अलग अलग लैब और अस्पतालों में एक ही जांच के अलग-अलग रेट वसूले जा रहे हैं। इतना ही नहीं, कई डॉक्टर दूसरे अस्पताल या लैब की रिपोर्ट को नहीं मानते हैं और नए सिरे से जांच कराते हैं। कीमतों में इस असमानता को लेकर इंदौर हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका पर बुधवार को सुनवाई होने की संभावना है।
वरिष्ठ अभिभाषक विजय कुमार आसुदानी के जरिए दायर याचिका में एक ही फार्मूले की दवाइयों की कीमतों और लैब की जांच फीस में भारी अंतर को समाप्त करने का मुद्दा उठाया गया है।
याचिका में बताया गया है कि एक ही तरह की दवाइयों की कीमतों में अलग-अलग कंपनियों में तीन से चार गुना तक अंतर है। उदाहरण के तौर पर बुखार की पैरासिटामॉल की एक कंपनी की टेबलेट 5 रुपए में उपलब्ध है, जबकि अन्य कंपनियों की कीमत इससे कई गुना अधिक है। ऐसी कई दवाइयों की लिस्ट और उनके अलग- अलग रेट की जानकारी कोर्ट के समक्ष रखी गई है।
मेडिकल जांच के रेट में असमानता को लेकर बताया गया है कि विभिन्न लैब और निजी अस्पताल एक ही जांच के लिए अलग-अलग राशि वसूलते हैं। अगर कोई मरीज सस्ती लैब में जांच कराता है तो कई डॉक्टर उस रिपोर्ट को मान्यता ही नहीं देते हैं और नई जांच कराने को कहते हैं।
सरकार ने करीब दस साल पहले इस मामले में कानून बनाया, लेकिन इसका नोटिफिकेशन आज तक जारी नहीं किया
याचिका में अदालत से आग्रह किया गया है कि जनता के साथ हो रही इस असमान वसूली पर रोक लगाई जाए और दवाइयों व मेडिकल जांच के रेट एक समान किए जाएं। सरकार ने करीब दस साल पहले इस मामले में कानून बनाया, लेकिन इसका नोटिफिकेशन आज तक जारी नहीं किया है।
जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की युगलपीठ में इस याचिका पर सुनवाई की संभावना
इंदौर हाईकोर्ट में आमजन से संबंधित इस अहम जनहित याचिका पर आज ही सुनवाई हो सकती है। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की युगलपीठ में इस याचिका पर सुनवाई की संभावना है।
]]>सीडीएससीओ अभी तक इन दवाओं की सूची सार्वजनिक करने से बच रहा है। दिल्ली में संगठन ने पुष्टि की कि सितंबर की रिपोर्ट में 112 दवाएं टेस्ट में फेल हुई हैं। लेकिन हर बार की तरह इस बार भी दवाओं और निर्माताओं के नाम अपने पोर्टल पर जारी नहीं किए गए। संगठन ने सिर्फ इतना बताया कि इनमें से 52 दवाओं की जांच केंद्रीय लैब में हुई जबकि 60 दवाएं विभिन्न राज्यों की लैब में फेल पाई गईं।
प्रदेश में बनी ये छह दवाएं अमानक
विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सितंबर की जांच में फेल हुई 112 दवाओं की सूची में मध्यप्रदेश की 6 दवाएं भी शामिल हैं
केलेक्सिया (डाइक्लोमाइन-हाइड्रोक्लोराइट टैबलेट) – क्वैस्ट लैबोरेटरीज, पीथमपुर
मेटरोनिडाजोल टैबलेट – बायोकैम हेल्थकेयर, उज्जैन
डायइथाइल कार्बामाजिन साइट्रेट टैबलेट – बायोकैम हेल्थकेयर, उज्जैन
जिंक सल्फेट टैबलेट – एमसी हेल्थकेयर, इंदौर
फेरस सल्फेट एंड फोलिक एसिड – जेनिथ ड्रग लिमिटेड, इंदौर
पैरासिटामोल टैबलेट – क्यूरेजा हेल्थकेयर, ग्वालियर
नकली कफ सिरप से बड़ा खतरा
रिपोर्ट के मुताबिक, मप्र की छह दवाओं को नॉट स्टैंडर्ड क्वालिटी (NSQ) घोषित किया गया है। ये इंडियन फार्माकोपिया मानकों पर लैब टेस्ट में खरे नहीं उतरीं, हालांकि स्वास्थ्य को गंभीर खतरा इनमें से नहीं था। लेकिन रायपुर लैब की जांच में बेस्टो काफ नामक कफ सिरप को स्प्यूरियस (जाली/नकली) घोषित किया गया। जिस कंपनी के नाम पर यह दवा रजिस्टर्ड है, उसने उस बैच को बनाने से इनकार किया है। इससे आशंका है कि यह किसी अवैध फैक्ट्री में तैयार कर आपूर्ति की गई। इस तरह की दवा का सेवन गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता था। जांच जारी है।
]]>संभावित खामी सामने आने के बाद दवा निगम ने इसके उपयोग और वितरण पर रोक लगा दी है। स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को निर्देश दिए हैं कि जब तक अगला आदेश न मिले, तब तक इस टैबलेट का इस्तेमाल और वितरण न किया जाए।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रेडनिसोलोन टैबलेट बैच नंबर T-240368 (निर्माण तिथि: 01 जुलाई 2024, समाप्ति तिथि: 30 जून 2026, निर्माता: सनलाइफ साइंसेस) की गुणवत्ता संदिग्ध मानी जा रही है। इस टैबलेट का उपयोग सूजन, एलर्जी, अस्थमा, त्वचा रोग, जोड़ों के दर्द और अन्य गंभीर बीमारियों के इलाज में किया जाता है।
क्या है खतरा?
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार, संदेह है कि यह दवा अमानक गुणवत्ता की हो सकती है। जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, लेकिन प्राथमिक रूप से यह माना जा रहा है कि दवा में कोई तकनीकी या निर्माण संबंधी खामी हो सकती है।
गौरतलब है कि इससे पहले भी सीजीएमएससी द्वारा खरीदी गई दवाओं और सामग्री में गंभीर खामियां पाई जा चुकी हैं। बीते सप्ताह ही सर्जिकल ब्लेड की गुणवत्ता खराब होने का मामला सामने आया था।
अस्पतालों को स्पष्ट निर्देश
रायपुर और बलौदाबाजार जिले के सभी सरकारी अस्पतालों, सीएचसी, पीएचसी और शहरी स्वास्थ्य केंद्रों को निर्देश दिए गए हैं कि यदि उनके पास यह दवा मौजूद है, तो उसे अलग सुरक्षित स्थान पर रख दें और किसी मरीज को इसका वितरण न करें। आदेशों के उल्लंघन पर जिम्मेदारी संबंधित अधिकारी की होगी।
बार-बार दोहराई जा रही लापरवाही
यह पहला मामला नहीं है जब सीजीएमएससी द्वारा खरीदी गई दवाएं अमानक पाई गई हों। पिछले एक वर्ष में कई बार ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं, जिससे सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि प्रेडनिसोलोन जैसी स्टेरॉइड दवा शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित करती है। यदि यह खराब गुणवत्ता की हो, तो इसके दुष्परिणाम जानलेवा हो सकते हैं। बिना परीक्षण के इस तरह की दवाओं को अस्पतालों तक भेजना सीधे मरीजों की जान से खिलवाड़ करने जैसा है।
प्रदेश में मरीजों की सेहत से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विस कॉरपोरेशन (सीजीएमएससी) की लापरवाही एक बार फिर उजागर हुई है। इस बार अस्थमा, एलर्जी, गठिया और आंतों में सूजन के इलाज में दी जाने वाली प्रेडनिसोलोन टैबलेट (दवा कोड D-427) के एक बैच की गुणवत्ता पर सवाल उठे हैं।
]]>केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने सितंबर में मानक गुणवत्ता परीक्षण में विफल होने वाली दवाओं की मासिक सूची जारी की है. जारी इस लिस्ट में CDSCO ने कैल्शियम सप्लीमेंट शेल्कल 500 और एंटासिड पैन डी सहित चार दवाओं के चुनिंदा बैचों को नकली घोषित किया और 49 दवाओं और फॉर्मूलेशन को मानक गुणवत्ता के अनुरूप नहीं बताया.
एक रिपोर्ट के मुताबिक CDSCO के सितंबर के लिए हाल ही में जारी मासिक अपडेट में नकली घोषित की गई अन्य दवाओं में यूरिमैक्स डी शामिल है, जिसका इस्तेमाल सौम्य प्रोस्टेट हाइपरप्लासिया (BPH) या प्रोस्टेट ग्रंथि के बढ़ने के इलाज के लिए किया जाता है. इसके साथ ही डेका-ड्यूराबोलिन 25 इंजेक्शन भी इस लिस्ट में है जिसका इस्तेमाल रजोनिवृत्ति के बाद की महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस के इलाज के लिए किया जाता है. क्योंकि इन दवाओं के निर्माता अभी भी जांच के दायरे में हैं, CDSCO अलर्ट में उनका नाम नहीं है, जैसा कि पिछले महीने हुआ था.
ये दवाइयां टेस्ट में हुईं फेल-
बता दें कि CDSCO ने पाया कि 4 दवाएं के सैंपल्स जो फेल हुए थे, वो नकली कंपनियों द्वारा बनाई जा रहे थे और सैंपल्स नकली दवाओं के थे. 3,000 दवाओं में से 49 दवाएं गुणवत्ता परीक्षण में विफल पाई गईं, इन्हें CDSCO द्वारा बैच के अनुसार वापस मंगाया गया है. CSDCO द्वारा की गई यह सतर्कतापूर्ण मासिक कार्रवाई गैर मानक गुणवत्ता वाली दवाओं के प्रतिशत को घटाकर 1% कर देती है.
इन दवाओं के सैंपल्स पाए गए नकली–
CDSCO प्रमुख ने कहा कि कुल सैंपल की गई दवाओं में से केवल लगभग 1.5% ही कम प्रभावकारी पाई गईं. इनमें हिंदुस्तान एंटीबायोटिक्स द्वारा मेट्रोनिडाजोल टैबलेट, रेनबो लाइफ साइंसेज द्वारा डोमपेरिडोन टैबलेट, पुष्कर फार्मा द्वारा ऑक्सीटोसिन, स्विस बायोटेक पैरेंटरेल्स द्वारा मेटफॉर्मिन, कैल्शियम 500 mg और लाइफ मैक्स कैंसर लैबोरेटरीज द्वारा विटामिन D3 250 IU टैबलेट, एल्केम लैब्स द्वारा PAN 40 आदि शामिल हैं
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सरकार की तरफ से टीबी, हार्ट और इमरजेंसी में इस्तेमाल होने वाली 8 दवाओं के दाम रिवाइज कर दिए गए हैं. इनका इस्तेमाल क्रिटिकल केयर में फर्स्ट लाइन ट्रीटमेंट में होता है. दवाओं की कीमतों की सीमा में करीब 50 फीसदी की कटौती की गई है. यानी पहले की तुलना में अब ये दवाएं आधी कीमत पर मिल सकेंगी.
नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी यानी एनपीपीए की तरफ से जिन दवाओं की कीमतों को रिवाइज किया गया है, उनमें अस्थमा, ग्लूकोमा, थैलीसीमिया, टीबी, मेंटल हेल्थ डिसऑर्डर आदि की दवाएं भी हैं. जिन दवाओं की सीलिंग प्राइस को रिवाइज किया गया है, उनमें Benzyl Penicillin 10 lakh IU इंजेक्शन, Atropine इंजेक्शन 06.mg/ml, इंजेक्शन 750 mg और 1000 mg के लिए Streptomycin पाउडर, Salbutamol टैबलेट 2 mg और 4 mg और respirator solution 5 mg/ml, Pilocarpine 2% drops, Cefadroxil शामिल हैं.
दवाओं की उपलब्धता जरूरी
अथॉरिटी का कहना है कि जरूरी दवाओं को सस्ते दाम पर उपलब्ध कराने के साथ-साथ ये भी सुनिश्चित करना जरूरी है कि ऐसी दवाओं की किल्लत ना हो. जरूर दवाएं हर वक्त उपलब्ध रहनी चाहिए. बता दें कि यह लाइफ सेविंग ड्रग्स हैं, ऐसे में इनकी कमी से किसी की जान भी जा सकती है. यह भी कहा है कि प्राइस रेगुलेशंस से ऐसे भी हालत पैदा नहीं होने चाहिए कि बाजार से दवाएं ही गायब हो जाएं.
क्या होते हैं शेड्यूल्ड ड्रग्स?
शेड्यूल्ड ड्रग्स ऐसी दवाओं को कहा जाता है, जिनके लिए डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन जरूरी होता है. कोई भी इन्हें बिना प्रिस्क्रिप्शन के काउंटर पर जाकर नहीं खरीद सकता. भारत में ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स रूल्स, 1945 के तहत दवाओं को अलग-अलग अनुसूचियों में बांटा हुआ है. इनमें से एक अनुसूची एच (H) है, जिसमें शामिल दवाओं को योग्य डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के बिना किसी को नहीं दिया जा सकता है.
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ये दवाएं क्वालिटी टेस्ट में फेल
CDSCO ने अपनी नई नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी (NSQ) अलर्ट लिस्ट में 53 दवाओं के नाम डाले हैं। स्टेट ड्रग अफसर हर महीने रैंडम सैंपलिंग करते हैं और उसी के आधार पर NSQ अलर्ट जारी किए जाते हैं। जो दवाएं क्वालिटी टेस्ट में फेल मिली हैं उनमें विटामिन C और D3 की गोलियां Shelcal, विटामिन B कॉम्प्लेक्स और विटामिन C सॉफ्टजेल, एंटासिड Pan-D, पैरासिटामोल टैबलेट IP 500 mg, डायबिटीज की दवाई Glimepiride, हाई ब्लड प्रेशर की दवा Telmisartan जैसी कई प्रसिद्ध दवाएं शामिल हैं। ये दवाएं Hetero Drugs, Alkem Laboratories, Hindustan Antibiotics Limited (HAL), Karnataka Antibiotics & Pharmaceuticals Ltd, Meg Lifesciences, Pure & Cure Healthcare जैसी कंपनियों की ओर से बनाई जाती हैं।
पैरासिटामॉल, पैन डी खाने वाले हो जाएं सावधान
पेट के संक्रमण के इलाज को लेकर इस्तेमाल की जाने वाली दवा Metronidazole भी क्वालिटी टेस्ट में फेल हो गई। इसे PSU Hindustan Antibiotic Limited (HAL) बनाती है। हाई ब्लड प्रेशर की दवा Telmisartan भी टेस्ट पास नहीं कर पाई Torrent Pharmaceuticals की ओर से डिस्ट्रिब्यूटेड और उत्तराखंड स्थित Pure & Cure Healthcare से निर्मित Shelcal भी टेस्ट में फेल हो गई। इसके अलावा, कोलकाता की एक ड्रग-टेस्टिंग लैब ने Alkem Health Science के एंटीबायोटिक्स Clavam 625 और Pan D को नकली बताया है। इसी लैब ने हैदराबाद स्थित Hetero के Cepodem XP 50 Dry Suspension, जो बच्चों को गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण के लिए दी जाती है, उसे भी घटिया स्तर का पाया है। Karnataka Antibiotics & Pharmaceuticals Ltd के पैरासिटामोल टैबलेट को भी क्वालिटी टेस्ट में फेल बताया गया है।
क्वालिटी टेस्ट में फेल दवाओं की दो लिस्ट जारी
भारत के ड्रग कंट्रोलर ने क्वालिटी टेस्ट में फेल होने वाली दवाओं की दो लिस्ट जारी की हैं। एक लिस्ट में 48 प्रसिद्ध दवाएं हैं, जबकि दूसरी लिस्ट में 5 और दवाओं के साथ-साथ टेस्ट में फेल होने वाली दवा कंपनियों के जवाब भी हैं। हालांकि, कंपनियों ने अपने जवाब में दवाओं की जिम्मेदारी लेने से इनकार करते हुए कहा है कि वे नकली हैं। दवा निर्माताओं के जवाब वाले कॉलम में लिखा है कि वास्तविक निर्माता (लेबल क्लेम के अनुसार) ने बताया है कि प्रोडक्ट का यह बैच उनके यहां से तैयार नहीं किया गया है और यह एक नकली दवा है। प्रोडक्ट के नकली होने की बात कही जा रही है, हालांकि, इसकी जांच की जा रही है।
156 दवाओं पर लगा था बैन
अगस्त में, CDSCO ने भारतीय बाजार में 156 से अधिक फिक्स्ड-डोज दवा कॉम्बिनेशन पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसमें कहा गया था कि ये लोगों के लिए लिए जोखिम भरे हैं। इन दवाओं में बुखार, दर्द निवारक और एलर्जी की गोलियां शामिल थीं।
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केंद्र सरकार ने कई दवाओं के मेल से बनी दवाइयों (FDCs) पर रोक लगा दी है। इनमें एंटीबायोटिक, एलर्जी की दवा, दर्द निवारक, मल्टीविटामिन और बुखार और हाई ब्लड प्रेशर के लिए दी जाने वाली दवाएं शामिल हैं। यह फैसला ड्रग टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (DTAB) और केंद्र सरकार द्वारा गठित एक विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के बाद लिया गया है। सरकार के नोटिफिकेशन में कहा गया है, 'केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त एक विशेषज्ञ समिति और औषधि तकनीकी सलाहकार बोर्ड ( DTAB) ने इस मामले की जांच की। दोनों ने सिफारिश की कि इन FDCs में शामिल सामग्री का कोई चिकित्सीय औचित्य नहीं है।'
ये दवाएं भी लिस्ट में शामिल
कुछ खास दवाओं को FDC लिस्ट में शामिल किया गया है। इनमें मेफेनैमिक एसिड और पैरासिटामोल इंजेक्शन का मिश्रण शामिल है। इसका उपयोग दर्द और सूजन को कम करने के लिए किया जाता है। इसके अलावा, ओमेप्राजोल मैग्नीशियम और डायसाइक्लोमाइन HCl का संयोजन भी शामिल है। इस संयोजन का उपयोग पेट दर्द के इलाज के लिए किया जाता है। DTAB ने इन दवाओं के दावों को सही नहीं पाया। उनका मानना है कि इनसे मरीजों को फायदा कम और नुकसान ज्यादा है। इसलिए, जनहित में इन दवाओं के उत्पादन, बिक्री और वितरण पर रोक लगा दी गई है। यह रोक Drugs and Cosmetics Act 1940 के सेक्शन 26A के तहत लगाई गई है।
नोटिफिकेशन के मुताबिक केंद्र द्वारा बनाई गई विशेषज्ञों की एक समिति ने इन दवाओं को अनुपयुक्त पाया है। इसके अलावा ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड जैसे शीर्ष पैनल ने भी इन दवाओं के कॉम्बिनेशंस को चेक किया है। इसमें बताया गया है कि दवाओं के मेल में कोई चिकित्सीय औचित्य नहीं है। इसलिए व्यापक जनहित में, ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 की धारा 26 ए के तहत इस एफडीसी के उत्पादन, बिक्री या वितरण पर प्रतिबंध लगाना जरूरी है। इन दवाओं को रोगियों के इस्तेमाल करने और बेचने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। हालांकि इंडस्ट्री अभी भी प्रतिबंध के प्रभाव की एनालिसिस कर रहा है। लेकिन प्रतिबंध की लिस्ट में शामिल कुछ प्रोडक्ट्स को पहले ही बंद कर दिया गया है। बंद की गई दवाओं में एक एडापेलीन के साथ एंटीबायोटिक एजिथ्रोमाइसिन का कॉम्बिनेशन है जो मुंहासे के इलाज के लिए इस्तेमाल होता है।
इन दवाओं पर लगा बैन
-एसिक्लोफेनाक 50एमजी+पैरासिटामॉल 125एमजी टैबलेट पर प्रतिबंध लगाया गया है। यह शीर्ष फार्मा कंपनियों द्वारा बनाए जाने वाले दर्द निवारक दवाओं के लोकप्रिय कॉम्बिनेशन में से एक है।
-पैरासिटामॉल+पेंटाजोसिन का कॉम्बिनेशन भी प्रतिबंधित है। इसका इस्तेमाल दर्द से राहत के लिए किया जाता है।
-लेवोसेट्रिजिन+फेनिलफ्रिन के कॉम्बिनेशन पर भी बैन लगा है। इसका यूज बहती नाक, छींकने, या मौसमी घास के बुखार या एलर्जी संबंधित लक्षणों के इलाज के लिए किया जाता है।
-इसके अलावा इसमें लेवोसेट्रिजिन से जुड़े कई अन्य कॉम्बिनेशन हैं। यह एक एंटीहिस्टामाइन है जो शरीर में पैदा होने वाले हिस्टामाइन के प्रभाव को रोकता है।
-मैग्नीशियम क्लोराइड पर पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। इसका इस्तेमाल पोषण संबंधी कमियों के उपचार में किया जाता है।
-पैरासिटामॉल, ट्रामाडोल, टॉरिन और कैफीन के कॉम्बिनेशन पर भी बैन लगा है। इसमें ट्रामाडोल एक ओपिओइड बेस्ड पेनकिलर है।
कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग की 'रेशम से समृद्धि योजना' में नवाचार किये जा रहे हैं। नर्मदापुरम जिले के रेशम विकास केन्द्र मालाखेड़ी में रेशम से दवाईयों का उत्पादन करने के लिये कार्यवाही तेज कर दी गयी है। यहाँ दवाईयाँ बनाने के लिये गत माह फाई ब्रोहित कंपनी तथा सरदार वल्लभ भाई पटेल शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज, भोपाल के बीच एक अनुबंध हुआ। इस अनुबंध के तहत मालाखेडी रेशम विकास केन्द्र में रेशम के धागे से पॉवडर, क्रीम, सेरी बैंडेज एवं सिजेरियन बैंडेज आदि का निर्माण (उत्पादन) किया जाएगा। रेशम के धागे से दवाईयों के अलावा अन्य प्रकार के उत्पादन करने के प्रयास भी किये जा रहे है। इस दिशा में जरूरी अनुसंधान एवं विकास कार्यों के लिये 50 करोड़ रूपये की आवश्यकता का मांग पत्र राज्य शासन को भेजा गया है।
आयुक्त रेशम ने बताया कि रेशम के विकास एवं विस्तार से जुड़ी सेवाओं के त्वरित क्रियान्वयन (संपादन) के लिये रेशम से समृद्धि योजना में 'न्यू सिल्क ईको सिस्टम' विकसित किया गया है। इसके लिये मध्यप्रदेश सिल्क फेडरेशन को 100 करोड़ रूपये उपलब्ध कराने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। रेशम विकास गतिविधियों के क्रियान्वयन में जरूरत के अनुसार इस राशि का उपयोग किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि रेशम संचालनालय की योजनाओं का क्रियान्वयन अब मध्यप्रदेश सिल्क फेडरेशन के माध्यम से किया जायेगा। इसके लिये मप्र सिल्क फेडरेशन को जरूरी धनराशि (ग्रान्ट के रूप में) उपलब्ध कराने का प्रस्ताव राज्य शासन को दिया गया है।
रेशम गतिविधियों का क्रियान्वयन अब क्लस्टर एप्रोच मोड में
आयुक्त रेशम ने बताया कि रेशम विकास के लिये एक और नवाचारी कदम उठाया जा रहा है। प्रदेश में रेशम विकास गतिविधियों का क्रियान्वयन अब क्लस्टर मोड में करने की शुरूआत कर दी गई है। रेशम गतिविधियों की पुनर्संरचना करते हुये न्यू सिल्क ईको सिस्टम करने के साथ ही पचमढ़ी में सिल्क टेक पार्क भी प्रारंभ किया गया। इसमें चार प्रकार के रेशम ककून का उत्पादन किया जा रहा है। म.प्र. सिल्क फेडरेशन को राज्य की स्टार्ट-अप नीति के तहत इन्क्यूबेटर बनाया गया है। रेशम विकास गतिविधियों के सुचारू क्रियान्वयन के लिये शासकीय महिला पॉलिटेक्निक महाविद्यालय भोपाल के फैशन टेक्नोलॉजी विभाग तथा आई.
आई.एम. इन्दौर के मध्य न्यू सिल्क ईको सिस्टम के क्रियान्वयन के लिए एक एम.ओ.यू. किया गया है। रेशम से समृद्धि योजना में किसानों को उनकी आजीविका बढ़ाने के लिए मुफ्त रेशमकीट बीज, सरलता से ऋण उपलब्ध कराकर उनका निर्यात बढ़ाने के लिये सहायता भी दी जा रही है। शासकीय महिला पॉलिटेक्टिनक महाविद्यालय के फैशन टेक्नालॉजी विभाग में ब्राण्डिंग प्रमोशन योजना में सिल्क केटेनेशन, सिल्क स्टूडियो तथा सिल्क टूरिज्म शुरू किया गया है।
आयुक्त रेशम ने बताया कि रेशम संचालनालय द्वारा आई.आई.एम. इंदौर के मॉडल पर रेशम विकास गतिविधियाँ क्रियान्वित की जा रही हैं। प्रदेश के रेशम उत्पादक किसानों द्वारा उत्पादित रेशम ककून का प्रतिस्पर्धा के जरिये समुचित मूल्य दिलाने के लिये नर्मदापुरम् जिले में अक्टूबर 2023 से रेशम ककून मण्डी की स्थापना भी की गई है।
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