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क्या है मैनोपॉज?
मैनोपॉज हर महिला की जिंदगी का एक नैचुरल पड़ाव है, जब पीरियड्स हमेशा के लिए बंद हो जाते हैं तब मैनोपॉज होता है. इसका मतलब है कि अब महिला प्रेग्नेंट नहीं हो सकती. ये शरीर में होने वाला एक नॉर्मल बदलाव है, लेकिन इसके साथ कई हेल्थ प्रॉब्लम्स का खतरा भी बढ़ जाता है, जिनमें से एक स्ट्रोक है. CDC के मुताबिक, स्ट्रोक महिलाओं में मौत के मुख्य कारणों में से एक है. मैनोपॉज के दौरान या उसके बाद ये खतरा और बढ़ जाता है. माना जाता है कि 55 से 75 साल की उम्र के बीच हर पांच में से एक महिला को स्ट्रोक हो सकता है.
WHO के अनुसार, मैनोपॉज आमतौर पर 45 से 55 साल की उम्र के बीच होता है. यही वो समय है जब स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ने लगता है. अपोलो हॉस्पिटल, बैंगलोर के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. सूर्यनारायण शर्मा बताते हैं कि मैनोपॉज के समय शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन कम हो जाता है, जो दिल और दिमाग दोनों की सेहत पर असर डालता है. जिन महिलाओं को 40 साल से पहले मैनोपॉज हो जाता है, उनमें स्ट्रोक का खतरा लगभग 1.6 गुना ज्यादा होता है, खासकर इस्केमिक स्ट्रोक. ये स्ट्रोक खून का थक्का जमने के कारण होता है. मैनोपॉज सिर्फ स्ट्रोक ही नहीं, बल्कि दिल की बीमारियों का खतरा भी बढ़ा देता है. इसलिए इस दौर में महिलाओं के लिए अपनी सेहत पर खास ध्यान देना बहुत जरूरी है.
क्यों स्ट्रोक का खतरा बढ़ाता है मैनोपॉज?
मैनोपॉज के दौरान शरीर में कई हार्मोनल बदलाव होते हैं, जो दिल और दिमाग की सेहत को प्रभावित करते हैं.
1. एस्ट्रोजन का कम होना: मैनोपॉज में शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन कम हो जाता है. ये हार्मोन दिल और ब्लड वेसल्स को हेल्दी रखता है. जब इसका लेवल गिरता है तो आर्टरीज सख्त होने लगती हैं, ब्लड प्रेशर बढ़ता है और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है.
2. कोलेस्ट्रॉल में बदलाव: मैनोपॉज के बाद खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) बढ़ जाता है और अच्छा कोलेस्ट्रॉल (HDL) कम हो जाता है. इससे आर्टरीज में ब्लॉकेज आने लगती है, जिससे इस्केमिक स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है.
3. शरीर में सूजन बढ़ना: एस्ट्रोजन की कमी से शरीर में सूजन बढ़ जाती है और खून में थक्के बनने का चांस ज्यादा हो जाता है, जो स्ट्रोक का बड़ा कारण है.
4. वजन और ब्लड शुगर बढ़ना: मैनोपॉज के दौरान ज्यादातर महिलाओं का वजन, खासकर पेट के आसपास, बढ़ जाता है. इससे ब्लड शुगर और इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या हो सकती है, जो स्ट्रोक का खतरा बढ़ाती है.
5. हाई ब्लड प्रेशर: एस्ट्रोजन कम होने से शरीर ब्लड प्रेशर को कंट्रोल नहीं कर पाता. इससे हाई ब्लड प्रेशर हो सकता है, जो स्ट्रोक का एक बड़ा कारण है.
स्ट्रोक आने से पहले मैनोपॉज वाली महिलाओं में क्या दिखते हैं संकेत?
स्ट्रोक एक गंभीर और अचानक होने वाली बीमारी है, जिसमें हर पल बहुत कीमती होता है. डॉ. सूर्यनारायण का कहना है कि अगर किसी को स्ट्रोक के लक्षण दिखें, तो उसे तुरंत डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए. वो कहते हैं, 'मरीज को जितनी जल्दी इलाज मिलता है, ठीक होने की संभावना उतनी ही ज्यादा होती है. पहले एक घंटे को ‘गोल्डन ऑवर’ कहा जाता है, इस दौरान इलाज मिलना बहुत जरूरी है.'
डॉ. सूर्यनारायण बताते हैं कि स्ट्रोक के कुछ संकेत होते हैं, जिन्हें हर किसी को पहचानना आना चाहिए.
चेहरे, हाथ या पैर में अचानक कमजोरी या सुन्नपन आना, खासकर शरीर के एक ही तरफ.
बोलने या समझने में दिक्कत होना, जैसे शब्द ठीक से न निकलें या सामने वाले की बात समझ न आए.
चलने में इंबैलेंस या चक्कर आना, जिससे खड़ा रहना या चलना मुश्किल लगे.
धुंधला दिखना या एकदम से दिखाई न देना.
बिना किसी वजह के अचानक और तेज सिरदर्द होना
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मेनोपॉज महिलाओं के जीवन में होने वाला एक प्राकृतिक बदलाव है। जब एक महिला को लगातार 12 महीनों तक मासिक धर्म नहीं आता, तो इस स्थिति को मेनोपॉज के रूप में जाना जाता है। आमतौर पर महिलाओं को 45 से 50 साल की उम्र तक मेनोपॉज की अवस्था आ जाती है। जिसकी वजह से महिलाओं को कई तरह के शारीरिक और मानसिक बदलावों का सामना करना पड़ता है। इतना ही नहीं, इस स्थिति का महिलाओं के यौन जीवन या यौन स्वास्थ्य पर भी गहरा असर पड़ता है। इस दौरान महिलाओं की यौन इच्छा में कमी आ सकती है। ऐसे में मेनोवेदा की फाउंडर और मेनोपॉज कोच तमन्ना सिंह से जानते हैं आखिर मेनोपॉज का महिलाओं के जीवन और सेक्सुअल हेल्थ पर क्या असर पड़ता है।
मेनोपॉज महिलाओं के यौन स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करता है?
मेनोपॉज के दौरान महिलाओं के शरीर में कई तरह के हार्मोनल बदलाव होते हैं। इन्हीं हार्मोनल बदलावों की वजह से, महिलाओं को अपने यौन जीवन में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। दरअसल, मेनोपॉज के दौरान महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर गिरने लगता है। जिसकी वजह से वजाइन में ड्राइनेस की समस्या, वजाइना में दर्द और असुविधा का भी अनुभव होने लगता है। इन समस्याओं की वजह से महिला को यौन क्रियाओं में मुश्किल महसूस हो सकती है। जिससे महिलाओं में यौन इच्छा में कमी हो सकती है।
मेनोपॉज के दौरान यौन स्वास्थ्य में बदलाव होने पर क्या करें?
मेनोपॉज के दौरान यौन स्वास्थ्य प्रभावित होने पर महिलाओं को तनाव महसूस हो सकता है। जिसकी वजह से उनके आत्मविश्वास की कमी आ सकती है। ऐसे में महिला को अपने पार्टनर से खुलकर बातचीत करनी चाहिए, उन्हें अपनी समस्या के बारे में बताएं।
-मेनोपॉज के दौरान महिला को अपनी स्थिति को लेकर डॉक्टर से भी कंसल्ट करना चाहिए। डॉक्टर कुछ दवाइयों की मदद से यौन जीवन में आने वाली समस्याओं को दूर कर सकते हैं।
-यौन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी की मदद भी ली जा सकती है।
-मेनोपॉज के दौरान महिला को अपनी डाइट का खास ख्याल रखना चाहिए। हेल्दी खाना खाएं और अनहेल्दी फूड्स से दूरी बनाकर रखें।
-मेनोपॉज के दौरान तनाव और चिंता से बाहर निकलने के लिए मेडिटेशन जरूर करें।
-फिट और हेल्दी बने रहने के लिए योग और एक्सरसाइज जरूर करें।
रजोनिवृत्ति में योनि संबंधी लक्षण
मासिक धर्म की अनियमितता, नए दर्द और पीड़ा, मनोदशा में बदलाव, कामेच्छा में कमी और संज्ञानात्मक क्षमता में कमी इस समय आम शिकायतें हैं जिनकी गंभीरता और दैनिक जीवन पर प्रभाव अलग-अलग डिग्री के साथ होते हैं ( बीएमएस अगस्त, 2023 )।
रजोनिवृत्ति के दौरान एस्ट्रोजन के स्तर में उतार-चढ़ाव और गिरावट के कारण कुछ लोग कुछ दिनों में सामान्य कार्य करने में असमर्थ हो जाते हैं, वे उदास महसूस करते हैं, उनमें आत्मविश्वास या प्रेरणा की कमी होती है तथा वे एक सप्ताह से दूसरे सप्ताह तक दिन में लाल चकत्ते और रात में पसीने से तर-बतर हो जाते हैं।
सलाह
मेनोपॉज के दौरान, यौन स्वास्थ्य में आने वाले बदलाव बेहद सामान्य हैं। इसलिए आपको इनके प्रति जानकारी रखना बेहद जरूरी है। मेनोपॉज के दौरान अगर आपको कुछ असामान्य लक्षणों का अनुभव हो, तो मेनोपॉज एक्सपर्ट से जरूर संपर्क करें।
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