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इंदौर में मेट्रो के अंडरग्राउंड रूट का काम अब तेजी पकड़ने जा रहा है. सुपर कॉरिडोर से रेडिसन तक के हिस्से को सीएमआरएस (कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेल सेफ्टी) से हरी झंडी मिल चुकी है, जिसके बाद अब टनल निर्माण की तैयारियां तेज कर दी गई हैं. इस प्रोजेक्ट के लिए 4 बड़ी टनल बोरिंग मशीनें (टीबीएम) जल्द ही इंदौर पहुंचेंगी. ये मशीनें लगभग 20 मीटर गहराई तक खुदाई करने में सक्षम होंगी. इन मशीनों के कुछ अहम हिस्से जर्मनी में बनाए गए हैं और उनका अंतिम असेंबलिंग कार्य थाईलैंड में किया जा रहा है।
इन मशीनों को खास तौर पर इंदौर की जमीन और भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. शहर के मध्य हिस्से में मेट्रो का अंडरग्राउंड रूट पुराने और घनी आबादी वाले इलाकों से होकर गुजरेगा, जहां 100 साल से भी पुराने मकान मौजूद हैं. ऐसे में खुदाई के दौरान किसी भी तरह के नुकसान से बचने के लिए स्पेशल टेक्निक का इस्तेमाल किया जा रहा है. इंदौर की मिट्टी में हार्ड रॉक, सॉफ्ट सॉइल और मुरम जैसी परतें हैं, इसलिए ‘मिक्स लेयर’ तकनीक वाली मशीनें चुनी गई हैं. हाल ही में मेट्रो कॉर्पोरेशन, कंसल्टेंट और ठेकेदारों की टीम ने जर्मनी और थाईलैंड जाकर मशीनों का अंतिम निरीक्षण भी किया है।
टनल खुदाई का काम शुरू
भास्कर की रिपोर्ट के हवाले से जुलाई 2026 से टनल खुदाई का काम शुरू करने की योजना है. ये चारों मशीनें शहर के अलग-अलग हिस्सों में काम करेंगी, जिसमें एयरपोर्ट और नगर निगम क्षेत्र से जुड़े स्टेशन और ट्रैक का निर्माण शामिल है. मशीनें जमीन के नीचे जाकर सुरक्षित तरीके से टनल तैयार करेंगी. वहीं, छोटा गणपति स्टेशन पर ‘नेटाम’ तकनीक से निर्माण कार्य पहले से जारी है और वहां खुदाई का काम चल रहा है।
इसके अलावा शहीद पार्क से खजराना तक मेट्रो ट्रैक और स्टेशन का काम भी तेजी से आगे बढ़ रहा है. पहले इस रूट को एलिवेटेड बनाने की योजना थी, लेकिन अब इसे अंडरग्राउंड कर दिया गया है. इस बदलाव के चलते टेंडर प्रोसेस में संशोधन किया जा रहा है. फिलहाल, शहीद पार्क से खजराना तक कई स्टेशन और ट्रैक का ढांचा आकार ले रहा है. रेडिसन तक 17 किलोमीटर का मेट्रो कॉरिडोर तैयार हो चुका है और यहां लगातार ट्रायल रन चल रहा है. हालांकि, इसे आम जनता के लिए शुरू करने के लिए अभी पीएम ऑफिस की अंतिम मंजूरी का इंतजार है. इसकी मंजूरी मिलते ही इंदौर में
मेट्रो सेवाएं और व्यापक स्तर पर शुरू हो जाएंगी।
यात्रियों की सुविधा के लिए भोपाल रेल मंडल ने बड़ी कवायद की है। गर्मी के मौसम में मंडल ने सुरक्षित और ठंडक से भरा सफर कराने की पहल की है। इसके लिए ट्रेनों में इकोनॉमी एसी कोच लगाए जा रहे हैं। भोपाल रेल मंडल के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार इन कोचों में यात्रियों को कम किराए में एसी का आरामदायक सफर करने की सुविधा मिलेगी। इससे लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिल सकेगी।
समर सीजन में हमेशा की तरह इस बार भी ट्रेनों में जबर्दस्त भीड़ चल रही है। भीषण गर्मी के कारण लोग एसी में यात्रा करने को प्राथमिकता दे रहे हैं। इससे खासतौर पर एसी थ्री कोच में लंबी वेटिंग चल रही है। ऐसे में यात्रियों की परेशानी
बढ़ गई है।
एसी का सस्ता विकल्प उपलब्ध कराने के लिए भोपाल रेल मंडल ने ट्रेनों में इकोनॉमी एसी कोच लगाने का निर्णय लिया
यात्रियों को लंबी वेटिंग से निजात दिलाने और एसी का सस्ता विकल्प उपलब्ध कराने के लिए भोपाल रेल मंडल ने ट्रेनों में इकोनॉमी एसी कोच लगाने का निर्णय लिया है। भोपाल रेल मंडल के सीनियर डीसीएम सौरभ कटारिया ने बताया कि
यात्रियों की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए दस ट्रेनों में एसी इकोनॉमी कोच लगाए जाएंगे।
रेल यात्रियों को जून से ये सुविधा मिलनी शुरू हो जाएगी। मई के महीने में पहले ही 5 ट्रेनों में एसी इकोनॉमी के एक्सट्रा कोच लगाने का शेड्यूल जारी कर दिया गया है। रेलवे का मानना है कि एसी इकॉनॉमी कोच के जुडऩे से ज्यादा यात्रियों को कम किराए में एसी सुविधा मिल सकेगी।
रेलवे से संबंधित एक गंभीर वारदात
इधर रेलवे से संबंधित एक गंभीर वारदात भी सामने आई है। हरदा जिले में टिमरनी के पास 5 मवेशियों को चुराकर रेलवे ट्रैक पर बांध दिया जिससे ट्रेन से कटने पर उनकी मौत हो गई। छिदगांव मेल के गंजालेश्वर आश्रम से चोरों ने शनिवार रात को पांच गोवंश को चुराकर रेलवे ट्रैक पर बांध दिया। ट्रेन की चपेट में आने से सभी की मौत हो गई। रविवार सुबह छिदगांव मेल में ट्रैक के पास मवेशियों के शव और रस्सी के टुकड़े मिले।
जानकारी लगते ही विश्व हिंदू परिषद बजरंग दल के कार्यकर्ता सुबह मौके पर पहुंचे और छिदगांव मेल में हाइवे किनारे पर पांच घंटे तक प्रदर्शन करते हुए धरना दिया। इस बीच टिमरनी एसडीएम संजीव कुमार नागू, टिमरनी थाना प्रभारी मुकेश गौड़ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने बजरंग दल के कार्यकर्ताओं व ग्रामीणों को समझाइश दी। जल्द ही आरोपियों की तलाश कर गिरफ़्तारी का विश्वास दिलाया। बजरंग दल के विकास शर्मा ने कहा कि पुलिस को आरोपियों की गिरफ़्तारी के लिए 30 अप्रेल का समय दिया है। आरोपी नहीं पकड़े गए तो आंदोलन करेंगे। इस मामले में रेलवे ने भी नियमानुसार कार्यवाही शुरु कर दी है।
]]>यात्रियों की सुविधा के लिए भोपाल रेल मंडल ने बड़ी कवायद की है। गर्मी के मौसम में मंडल ने सुरक्षित और ठंडक से भरा सफर कराने की पहल की है। इसके लिए ट्रेनों में इकोनॉमी एसी कोच लगाए जा रहे हैं। भोपाल रेल मंडल के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार इन कोचों में यात्रियों को कम किराए में एसी का आरामदायक सफर करने की सुविधा मिलेगी। इससे लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिल सकेगी।
समर सीजन में हमेशा की तरह इस बार भी ट्रेनों में जबर्दस्त भीड़ चल रही है। भीषण गर्मी के कारण लोग एसी में यात्रा करने को प्राथमिकता दे रहे हैं। इससे खासतौर पर एसी थ्री कोच में लंबी वेटिंग चल रही है। ऐसे में यात्रियों की परेशानी
बढ़ गई है।
एसी का सस्ता विकल्प उपलब्ध कराने के लिए भोपाल रेल मंडल ने ट्रेनों में इकोनॉमी एसी कोच लगाने का निर्णय लिया
यात्रियों को लंबी वेटिंग से निजात दिलाने और एसी का सस्ता विकल्प उपलब्ध कराने के लिए भोपाल रेल मंडल ने ट्रेनों में इकोनॉमी एसी कोच लगाने का निर्णय लिया है। भोपाल रेल मंडल के सीनियर डीसीएम सौरभ कटारिया ने बताया कि
यात्रियों की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए दस ट्रेनों में एसी इकोनॉमी कोच लगाए जाएंगे।
रेल यात्रियों को जून से ये सुविधा मिलनी शुरू हो जाएगी। मई के महीने में पहले ही 5 ट्रेनों में एसी इकोनॉमी के एक्सट्रा कोच लगाने का शेड्यूल जारी कर दिया गया है। रेलवे का मानना है कि एसी इकॉनॉमी कोच के जुडऩे से ज्यादा यात्रियों को कम किराए में एसी सुविधा मिल सकेगी।
रेलवे से संबंधित एक गंभीर वारदात
इधर रेलवे से संबंधित एक गंभीर वारदात भी सामने आई है। हरदा जिले में टिमरनी के पास 5 मवेशियों को चुराकर रेलवे ट्रैक पर बांध दिया जिससे ट्रेन से कटने पर उनकी मौत हो गई। छिदगांव मेल के गंजालेश्वर आश्रम से चोरों ने शनिवार रात को पांच गोवंश को चुराकर रेलवे ट्रैक पर बांध दिया। ट्रेन की चपेट में आने से सभी की मौत हो गई। रविवार सुबह छिदगांव मेल में ट्रैक के पास मवेशियों के शव और रस्सी के टुकड़े मिले।
जानकारी लगते ही विश्व हिंदू परिषद बजरंग दल के कार्यकर्ता सुबह मौके पर पहुंचे और छिदगांव मेल में हाइवे किनारे पर पांच घंटे तक प्रदर्शन करते हुए धरना दिया। इस बीच टिमरनी एसडीएम संजीव कुमार नागू, टिमरनी थाना प्रभारी मुकेश गौड़ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने बजरंग दल के कार्यकर्ताओं व ग्रामीणों को समझाइश दी। जल्द ही आरोपियों की तलाश कर गिरफ़्तारी का विश्वास दिलाया। बजरंग दल के विकास शर्मा ने कहा कि पुलिस को आरोपियों की गिरफ़्तारी के लिए 30 अप्रेल का समय दिया है। आरोपी नहीं पकड़े गए तो आंदोलन करेंगे। इस मामले में रेलवे ने भी नियमानुसार कार्यवाही शुरु कर दी है।
]]>मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में मेट्रो रेल प्रोजेक्ट के दूसरे चरण का काउंटडाउन शुरू हो गया है. मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MPMRCL) के अनुसार, मेट्रो रेल सुरक्षा आयुक्त (CMRS) की टीम ने 15 से 18 मार्च 2026 तक 17.5 किलोमीटर लंबे प्रायोरिटी कॉरिडोर का विस्तृत निरीक्षण पूरा कर लिया है।
MPMRCL की ओर से बताया गया कि मेट्रो रेल सुरक्षा आयुक्त (CMRS) की टीम ने 15 से 18 मार्च तक 17.5 किलोमीटर लंबे प्रायोरिटी कॉरिडोर का निरीक्षण किया और स्टेशन मैनेजमेंट, यात्रियों की सुविधाओं, गति, ब्रेकिंग सिस्टम, सिग्नलिंग और आपातकालीन स्थितियों जैसे पैमानों पर प्रोजेक्ट का मूल्यांकन किया।
मेट्रो रेल प्रायोरिटी कॉरिडोर के 6 किलोमीटर लंबे रूट पर कमर्शियल ऑपरेशन 31 मई 2025 को शुरू किए गए थे।
MPMRCL के मैनेजिंग डायरेक्टर एस कृष्णा चैतन्य ने कहा, "CMRS से हरी झंडी मिलने के बाद मेट्रो के दूसरे चरण के कमर्शियल ऑपरेशन जल्द ही शुरू हो सकते हैं।
मूल योजना के अनुसार, शहर में 31.32 किलोमीटर लंबा मेट्रो रेल कॉरिडोर 7500.8 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जाना है।
इसका निर्माण कार्य 2019 में शुरू हुआ था, लेकिन घनी आबादी वाले आवासीय और कमर्शियल इलाकों में आई बाधाओं के कारण प्रोजेक्ट में देरी हुई, और अब इसकी लागत बढ़ने की उम्मीद है।
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मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में मेट्रो रेल प्रोजेक्ट के दूसरे चरण का काउंटडाउन शुरू हो गया है. मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MPMRCL) के अनुसार, मेट्रो रेल सुरक्षा आयुक्त (CMRS) की टीम ने 15 से 18 मार्च 2026 तक 17.5 किलोमीटर लंबे प्रायोरिटी कॉरिडोर का विस्तृत निरीक्षण पूरा कर लिया है।
MPMRCL की ओर से बताया गया कि मेट्रो रेल सुरक्षा आयुक्त (CMRS) की टीम ने 15 से 18 मार्च तक 17.5 किलोमीटर लंबे प्रायोरिटी कॉरिडोर का निरीक्षण किया और स्टेशन मैनेजमेंट, यात्रियों की सुविधाओं, गति, ब्रेकिंग सिस्टम, सिग्नलिंग और आपातकालीन स्थितियों जैसे पैमानों पर प्रोजेक्ट का मूल्यांकन किया।
मेट्रो रेल प्रायोरिटी कॉरिडोर के 6 किलोमीटर लंबे रूट पर कमर्शियल ऑपरेशन 31 मई 2025 को शुरू किए गए थे।
MPMRCL के मैनेजिंग डायरेक्टर एस कृष्णा चैतन्य ने कहा, "CMRS से हरी झंडी मिलने के बाद मेट्रो के दूसरे चरण के कमर्शियल ऑपरेशन जल्द ही शुरू हो सकते हैं।
मूल योजना के अनुसार, शहर में 31.32 किलोमीटर लंबा मेट्रो रेल कॉरिडोर 7500.8 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जाना है।
इसका निर्माण कार्य 2019 में शुरू हुआ था, लेकिन घनी आबादी वाले आवासीय और कमर्शियल इलाकों में आई बाधाओं के कारण प्रोजेक्ट में देरी हुई, और अब इसकी लागत बढ़ने की उम्मीद है।
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भोपाल की 'शहर सरकार' का बजट 23 मार्च को पेश होगा। अबकी बार करीब साढ़े 3 हजार करोड़ रुपए का बजट प्रस्तावित है। टैक्स बढ़ाने को लेकर फिलहाल कोई निर्णय नहीं लिया गया है। पिछले साल टैक्स बढ़ने की वजह से मंत्री-विधायकों ने टैक्स बढ़ाने पर आपत्ति ली है।
बैठक में 14 नई पार्किंग को लेकर प्रस्ताव आएगा। इनमें से 5 पार्किंग मेट्रो स्टेशन के नीचे प्रस्तावित की गई है। जहां 40 फोर व्हीलर और 250 टू व्हीलर्स खड़े किए जा सकेंगे। 16 मार्च को हुई मेयर इन कौंसिल की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई थी। अब परिषद में यह प्रस्ताव आएगा। पार्किंग को लेकर निगम ने पुलिस की भी सहमति ली है।
मेट्रो स्टेशन बने, लेकिन पार्किंग नहीं बनाई
बता दें कि भोपाल मेट्रो की ऑरेंज लाइन का प्रायोरिटी कॉरिडोर 6.22 किलोमीटर लंबा है। इसमें कुल 8 स्टेशन- सुभाष नगर, केंद्रीय स्कूल, डीबी मॉल, एमपी नगर, रानी कमलापति, डीआरएम तिराहा, अलकापुरी और एम्स शामिल हैं। इनमें से एक भी स्टेशन पर पार्किंग की व्यवस्था नहीं होने से यात्रियों को अपनी गाड़ियां खड़ी करने के लिए मुश्किलें झेलनी पड़ रही है।
मेट्रो स्टेशनों पर सिर्फ पिक एंड ड्रॉप की व्यवस्था ही है। यानी, यात्री किसी गाड़ी से उतर और चढ़ तो रहे हैं, लेकिन वे अपने वाहन यहां खड़ा नहीं कर सकते। इस मुद्दे पर मेट्रो अफसर दो महीने से पार्किंग के लिए व्यवस्था कर रहे हैं। नगर निगम ने इस समस्या का हल निकाला है।
इन जगहों पर पार्किंग रहेगी
सुभाषनगर मेट्रो स्टेशन के दोनों गेट, केंद्रीय स्कूल, डीबी मॉल, डीआरएम ऑफिस और अलकापुरी मेट्रो स्टेशन के नीचे पार्किंग बनेगी। एमपी नगर, रानी कमलापति और एम्स स्टेशन के नीचे फिलहाल को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। हालांकि, तीनों जगह पर दूसरी पार्किंग है। रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पर ही बड़ी पार्किंग है। मेट्रो से आने-जाने वाले यात्री यहां पर अपनी गाड़ियां खड़ी कर रहे हैं। एम्स के पास मेट्रो की खुद की जमीन है। जहां पार्किंग विकसित होगी। एमपी नगर में ही निगम की एक पार्किंग है। यात्री वहां पर अपनी गाड़ियां खड़ी कर सकेंगे।
लेगेसी वेस्ट के निपटारे का प्रस्ताव आएगा
परिषद की बैठक में आदमपुर खंती लीगेसी वेस्ट के निपटान के लिए प्रस्ताव भी आएगा। दो दिन पहले एमआईसी ने इसे परिषद में लाने का निर्णय लिया था। इसमें 55.54 करोड़ रुपए खर्च होंगे।
निगम के 145 वाहनों को कंडम घोषित किया जाएगा
निगम के अनुपयोगी 145 वाहनों को कंडम घोषित कराए जाने के संबंध में भी प्रस्ताव परिषद की बैठक में आएगा। इसे भी एमआईसी मंजूरी दे चुकी है।
मेट्रो ट्रेन की ब्लू लाइन के लिए जिला प्रशासन ने भदभदा डिपो चौराहा से रत्नागिरी करोंद तक 9 हेक्टेयर जमीन को अधिसूचित कर दिया है। इसमें बाधक निर्माण पहले ही चिह्नित कर लिए गए थे। इन्हें नोटिस देने, मुआवजा देने की प्रक्रिया की जा रही थी। हालांकि बीते एक साल में 40% को ही खाली कराया जा सका है। छह हेक्टेयर जमीन रेकॉर्ड में सरकारी दर्ज है। हालांकि मौके पर बाजार, आबादी है। अब इसे हटाने बड़ी कार्रवाई शुरू होगी।
की थी अंडरग्राउंड मेट्रो की मांग
बता दें, इसी लाइन के डिपो चौराहा से लिली टॉकीज तक के क्षेत्र में सांसद आलोक शर्मा ने अंडरग्राउंड की मांग की थी। हालांकि अधिसूचना पर में इसका जिक्र नहीं था।
14 किमी की लाइन, पुल बोगदा पर करेगी क्रॉस
भोपाल के भदभदा से रत्नागिरी तक 14 किमी की एलीवेटेड लाइन बनाई जाएगी। पियर्स यानी मेट्रो एलीवेटेड लाइन के खंभों के लिए जमीन की टेस्टिंग हो चुकी है। अप्रेल तक काम दिखना शुरू हो जाएगा इस लाइन का काम वर्ष 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है।
]]>बजट से कई सड़कों के निर्माण को लेकर भी बजट मिलने की उम्मीद है। पिछली बार 41 सड़कें और 3 फ्लाईओवर मंजूर किए गए थे। वहीं, शहर के लगभग हर इलाके और ग्रामीण क्षेत्र की सड़कों के निर्माण के लिए टोकन राशि बजट में रखी गई थी। इनकी अनुमानित लागत 447.21 करोड़ रुपए थी।
पिछले बजट में शैतान सिंह तिराहे से कोलार मेन रोड को जोड़ने वाली सड़क और बावड़िया के प्रस्तावित नए आरओबी की एप्रोच रोड बनाने का प्रावधान था। हालांकि, एक साल में यह काम नहीं हो सका है।
बजट से भोपाल में खेल और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विभागों को लेकर भी उम्मीदें हैं। पिछले बजटों में इन दोनों ही विभागों को लेकर बजट मिला था।
]]>परी चौक से बॉटनिकल गार्डन का सफर भी होगा आसान, यात्रा समय घटेगा
योगी सरकार की शहरी कनेक्टिविटी रणनीति को मिलेगा बल, नोएडा-ग्रेटर नोएडा में सक्रिय मेट्रो नेटवर्क 61.62 किमी तक पहुंचेगा
लखनऊ,
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नोएडा मेट्रो रेल परियोजना के सेक्टर-142 से बॉटनिकल गार्डन तक 11.56 किलोमीटर लंबे एक्सटेंशन कॉरिडोर को मंजूरी दे दी है। इस नए एलिवेटेड कॉरिडोर में कुल 8 स्टेशन होंगे। इसके संचालन में आने के बाद नोएडा और ग्रेटर नोएडा में मेट्रो नेटवर्क की कुल लंबाई बढ़कर 61.62 किलोमीटर हो जाएगी। यह कॉरिडोर नोएडा से ग्रेटर नोएडा की यात्रा भी सुगम बनाएगा। इस फैसले को उत्तर प्रदेश में शहरीकरण और औद्योगिक विकास के अनुरूप सार्वजनिक परिवहन ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम बताया जा रहा है।
योगी आदित्यनाथ सरकार के शहरी विकास और निवेश प्रोत्साहन मॉडल में मजबूत कनेक्टिविटी को आधार स्तंभ माना गया है और यह परियोजना उसी रणनीति का विस्तार मानी जा रही है। यह नया कॉरिडोर नोएडा के सेक्टर-142 से बॉटनिकल गार्डन तक जाएगा, जहां दिल्ली मेट्रो की ब्लू लाइन और मैजेंटा लाइन से इंटरचेंज की सुविधा मिलेगी। इससे नोएडा व ग्रेटर नोएडा के निवासियों को सीधे दिल्ली और अन्य प्रमुख ट्रांजिट हब से जुड़ने का लाभ मिलेगा। इससे दिल्ली एयरपोर्ट, प्रमुख रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों तक पहुंच और सुगम होगी।
एक्सटेंशन कॉरिडोर से नोएडा के कई प्रमुख व्यावसायिक, औद्योगिक और शैक्षणिक क्षेत्रों को सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी। सेक्टर-142 स्थित एडवांट बिजनेस पार्क, सेक्टर-98 का स्काईमार्क वन मॉल, सेक्टर-93 का मॉल ऑफ नोएडा, सेक्टर-145 में माइक्रोसॉफ्ट, सेक्टर-157 में टीसीएस, सेक्टर-126 में हैवेल्स, सेक्टर-132 में इंफोसिस और एडोबी, सेक्टर-135 में कॉग्निजेंट तथा सेक्टर-127 में ओरेकल जैसे बड़े संस्थानों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र भी इस विस्तार से जुड़ेंगे। सेक्टर-125 स्थित एमिटी विश्वविद्यालय, सेक्टर-91 का पंचशील बालक इंटर कॉलेज, सेक्टर-44 का महामाया बालिका इंटर कॉलेज और सेक्टर-128 का मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल अब मेट्रो नेटवर्क से बेहतर तरीके से कनेक्ट होंगे। इसके अलावा बॉटनिकल गार्डन और सेक्टर-93 पार्क जैसे प्रमुख सार्वजनिक स्थलों तक पहुंच आसान होगी।
इस विस्तार से सड़क यातायात का दबाव कम होगा और यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी। मेट्रो को सड़क परिवहन का प्रभावी विकल्प बताते हुए अधिकारियों का कहना है कि इससे ट्रैफिक जाम में कमी, सड़क सुरक्षा में सुधार और ईंधन की बचत होगी। पर्यावरणीय दृष्टि से भी यह परियोजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मेट्रो नेटवर्क के विस्तार से जीवाश्म ईंधन आधारित परिवहन पर निर्भरता घटेगी और कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी।
“बुनियादी ढांचे के विकास में बेहतर कनेक्टिविटी की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। जिस तरह से नोएडा व ग्रेटर नोएडा विभिन्न औद्योगिक गतिविधियों का हब बन रहे हैं, यह नया मेट्रो रूट दिल्ली व नोएडा/ग्रेटर नोएडा के बीच कनेक्टिविटी को सुगम कर नए निवेश को बढ़ावा देने के साथ-साथ मेट्रो स्टेशनों के आसपास व्यावसायिक गतिविधियों को भी बल देगा। योगी सरकार का लक्ष्य नोएडा और ग्रेटर नोएडा को राष्ट्रीय और वैश्विक निवेश मानचित्र पर और मजबूत स्थान दिलाना है। यह परियोजना उसी व्यापक दृष्टि का हिस्सा है, जो उत्तर प्रदेश को आधुनिक, सुव्यवस्थित और सतत शहरी विकास की दिशा में आगे बढ़ा रही है।”
– शरद कोहली, आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ
मेट्रो ट्रेन प्रोजेक्ट के तहत अब भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन यानी बीएमआर में भी रूट तय होगा। भोपाल से सीहोर, विदिशा, रायसेन, राजगढ़ की ओर मेट्रो की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। बीएमआर के लिए बन रही डीपीआर में इसके प्रावधान किए जा रहे हैं। भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन की योजना में मेट्रो को शामिल करने शासन ने बीडीए को निर्देशित किया है। रोड नेटवर्क के साथ मेट्रो नेटवर्क से पास के शहरों में प्रस्तावित सैटेलाइट टाउनशिप को भोपाल से सीधे जोड़ा जाएगा।
भोपाल शहर में 6 लाइनें तय
अभी मेट्रो ट्रेन प्रोजेक्ट में भोपाल शहर में ही छह लाइनें तय की हुई है। 103 किमी लंबी लाइन में से फिलहाल 6.22 किमी की लाइन पर मेट्रो का कमर्शियल रन शुरू किया जा चुका है। पहले चरण की दो लाइनों के 32 किमी में मेट्रो को आमजन यात्रियों के साथ चलाने 2028 से 2030 तक की समय सीमा तय की है। मेट्रो रेल कारपोरेशन धीरेधीरे मेट्रो को चरणबद्ध तरीके से तैयार करने की योजना बना रहा है। अब वहभोपाल के भीतर के साथ मेट्रोपॉलिटन रीजन वाले क्षेत्रों तक भी रूट तय करेगा।
उपनगरीय परिवहन में बदलेगी मेट्रो
बीएमआर की डीपीआर तैयार करने वाले अफसरों के अनुसार भोपाल के लिए लोकल ट्रांसपोर्ट का हिस्सा बनने जा रही मेट्रो बीएमआर में उपनगरीय रेल की भूमिका में रहेगी। इससे मौजूदा व बीएमआर में प्रस्तावित उपनगरों को जोड़ा जाएगा। बीएमआर में भोपाल की बसाहट को सैटेलाइट टाउनशिप से पास के शहरों में शिफ्ट किया जाएगा। यहां आबादी का दबाव बढऩे से रोकने के लिए नई टाउनशिप विकसित होगी। इन्हीं को आवाजाही में मदद के लिए मेट्रो उपनगरीय सेवा विकसित होगी।
सवाल: छह किमी में दस साल, बीएमआर कब बनेगी?
बीएमआर में मेट्रो की प्लानिंग तो ठीक है, लेकिन मौजूदा 103 किमी के प्रस्तावित नेटवर्क में से महज सात फीसदी ही बन पाया है। शहरी नेटवर्क का 93 फीसदी बनना बाकी है। सात फीसदी निर्माण में यूरोपियन बैंक से लोन लिया हुआ है। बचे हुए हिस्से को बनाने और बीएमआर से जुड़े शहरों तक मेट्रो पहुंचाने कई गुना ज्यादा बजट और समय लगेगा।
मेट्रो, रोड सबका विकल्प है
बीएमआर के लिए शासन की मंशा के अनुसार योजना तय की जा रही है। संबंधित क्षेत्रों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट सभी माध्यमों से जोड़ा जाएगा। मेट्रो, रोड सबका विकल्प है।
-संजीव सिंह, अध्यक्ष बीडीए- संभागायुक्त
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