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मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MPMRCL) ने एक पहल शुरू की है, जिसके तहत मेट्रो ट्रेनों और स्टेशन परिसर में बर्थडे पार्टी, प्री-वेडिंग शूट, फिल्म की शूटिंग और अन्य सामाजिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों की अनुमति दी जाएगी। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब इंदौर और भोपाल में मेट्रो सेवाओं में यात्रियों की संख्या उम्मीद से कम है।
MPMRCL ने बताया कि 'सेलिब्रेशन्स ऑन व्हील्स' पहल के तहत, मेट्रो कोच और चुनिंदा स्टेशन क्षेत्रों का उपयोग विभिन्न रचनात्मक और सामाजिक गतिविधियों के लिए किया जाएगा, बशर्ते निर्धारित शुल्क और सुरक्षा नियमों का पालन किया जाए।
MPMRCL के प्रबंध निदेशक एस. कृष्णा चैतन्य ने कहा, "सेलिब्रेशन्स ऑन व्हील्स पहल इंदौर और भोपाल की जीवंत संस्कृति, तेजी से बढ़ते शहरी वातावरण और नागरिकों की बदलती जीवनशैली को ध्यान में रखते हुए शुरू की गई है।"
उन्होंने कहा, "यह मेट्रो को जनता के करीब लाने का एक प्रयास है, जिससे लोग मेट्रो के सुरक्षित और आधुनिक वातावरण में अपने खास मौकों का जश्न मना सकें। इससे मेट्रो सेवाएं नागरिकों के दैनिक जीवन का एक अभिन्न अंग बन जाएंगी।"
सुरक्षा और अनुशासन को ध्यान में रखते हुए कुछ पाबंदियां भी तय की गई हैं. मेट्रो परिसर में शराब, बीड़ी-सिगरेट और पटाखों पर पूरी तरह मनाही रहेगी. आयोजन में शामिल होने से पहले सभी लोगों की स्टेशन पर जांच की जाएगी।
पिछले साल शुरू हुई थी भोपाल मेट्रो
भोपाल मेट्रो का उद्घाटन 20 दिसंबर 2025 को हुआ था और 21 दिसंबर से इसे आम यात्रियों के लिए खोला गया था. शुरुआती दिनों में यात्रियों की अच्छी खासी तादाद देखने को मिली, लेकिन वक्त के साथ फुटफॉल में गिरावट आई. ऐसे में अब मेट्रो एडमिनिस्ट्रेश ने कमाई बढ़ाने के लिए यह नया प्रयोग शुरू किया है।
भोपाल और इंदौर के मेट्रो स्टेशन पर अब ऑटोमैटिक फेयर कनेक्शन सिस्टम शुरू हो रहा है। 27 अप्रैल से यात्रियों को मैन्युअली की जगह ऑनलाइन तरीके से ही टिकट मिलेगी। वहीं, टिकट और वॉलेट रिचार्ज पर छूट भी दी जाएगी।मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MPMRCL) इस सिस्टम की शुरुआत करने जा रही है। भोपाल और इंदौर में ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन सिस्टम (AFC) शुरू किया जा रहा है। इसके साथ ही मेट्रो यात्रियों को विशेष रियायत दी जाएगी।
टिकट पर ये मिलेगी छूट राउंड ट्रिप (आवागमन) टिकट पर कुल किराए में 5 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। इससे उन यात्रियों को विशेष लाभ मिलेगा जो एक ही दिन में आवागमन करते हैं। ग्रुप में यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए भी विशेष प्रावधान किया गया है। समूह टिकट पर कुल किराए में 10 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। यह सुविधा (एकल समूह टिकट पर) न्यूनतम 8 एवं अधिकतम 40 यात्रियों के समूह के लिए उपलब्ध होगी।
MP Metro एप पर वॉलेट रिचार्ज पर अतिरिक्त बचत मेट्रो के आधिकारिक मोबाइल एप MP Metro के माध्यम से यात्री क्यूआर टिकट बुक कर सकेंगे। इस एप के वॉलेट रिचार्ज पर विशेष रियायत दी जाएगी। मोबाइल एप के माध्यम से टिकट प्राप्त करने पर यात्रियों का समय भी बचेगा।
इस तरह से मिलेगी रिचार्ज स्लैब में छूट 200 से 499 रुपए के टिकट पर 8 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। 500 से 999 के टिकट पर 10% की छूट मिलेगी। 1000 से 1499 रुपए पर 12% और 1500 से 2000 में 15% की छूट दी जाएगी।
राउंड ट्रिप और ग्रुप टिकट पर विशेष छूट
मेट्रो के अनुसार अब राउंड ट्रिप (आने-जाने) का टिकट एक साथ लेने पर यात्रियों को कुल किराए में पांच प्रतिशत की छूट मिलेगी। यह उन लोगों के लिए फायदेमंद होगा जो रोजाना मेट्रो से सफर करते हैं। वहीं समूह में यात्रा करने वालों के लिए 10 प्रतिशत की छूट का प्रावधान किया गया है। यह सुविधा कम से कम आठ और अधिकतम 40 यात्रियों के समूह को एक ही टिकट पर मिलेगी। एमपी मेट्रो मोबाइल ऐप के वॉलेट रिचार्ज पर अलग-अलग स्लैब में छूट दी जाएगी। यात्री ऐप के माध्यम से क्यूआर टिकट बुक कर अपना समय भी बचा सकेंगे।
ऐप वॉलेट रिचार्ज पर 15 प्रतिशत तक की बचत
एमपी मेट्रो ऐप के वॉलेट रिचार्ज पर यात्रियों को शानदार बचत का मौका मिलेगा। इसके लिए निम्नलिखित स्लैब तय किए गए हैं-
200 से 499 रुपये के रिचार्ज पर: आठ प्रतिशत
500 से 999 रुपये के रिचार्ज पर: 10 प्रतिशत
1000 से 1499 रुपये के रिचार्ज पर: 12 प्रतिशत
1500 से 2000 रुपये के रिचार्ज पर: 15 प्रतिशत
टिकटिंग के मिलेंगे दो विकल्प
यात्री अपनी सुविधा के अनुसार पेपर क्यूआर या मोबाइल क्यूआर टिकट चुन सकते हैं। पेपर क्यूआर टिकट स्टेशन के काउंटर से नकद या यूपीआई के माध्यम से मिलेंगे, जबकि मोबाइल क्यूआर टिकट एमपी मेट्रो ऐप से खरीदे जा सकेंगे। यह ऐप गूगल प्ले स्टोर और ऐपल स्टोर दोनों पर उपलब्ध है। ध्यान रहे कि ऐप के वॉलेट में जमा राशि का उपयोग केवल टिकट खरीदने के लिए ही किया जा सकेगा और यह राशि वापस नहीं होगी।
टिकटिंग के प्रकार : पेपर QR और मोबाइल QR
यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए टिकटिंग के विभिन्न विकल्प उपलब्ध कराए गए हैं। पेपर क्यूआर टिकट, टाम (टिकट काउंटर)/ईएफओ (ग्राहक सेवा केंद्र) रूम से नकद या यूपीआई के माध्यम से प्राप्त किए जा सकते हैं।
मोबाइल क्यूआर टिकट MPMRCL के आधिकारिक मोबाइल एप्प “MP Metro” के माध्यम से डिजिटल भुगतान द्वारा आसानी से खरीदे जा सकेंगे। MP Metro मोबाइल एप्प एंड्रॉयड (Google Play Store) एवं iOS (Apple App Store) दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है।
MPMRCL वॉलेट में जमा की गई राशि का उपयोग केवल मेट्रो टिकट खरीद के लिए ही किया जा सकेगा और यह राशि किसी भी स्थिति में वापस नहीं की जाएगी।
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मध्य प्रदेश के इंदौर में मेट्रो प्रोजेक्ट के 17 किलोमीटर हिस्से में मेट्रो के संचालन की राह आसान होती नजर आ रही है। सोमवार को कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेलवे सेफ्टी (CMRS)की टीम ने मेट्रो ट्रेन में सवार होकर कोच की सुरक्षा, स्टेशनों की स्थिति देखी।
ट्रेन को अलग-अलग स्पीड पर चलाकर भी देखा गया। इस दौरान ट्रेक के जिस हिस्से में मोड़ है या ढलान है, वहां पर बारिकी से जांच की गई, ताकि 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेन के संचालन के दौरान कोई परेशानी न हो। टीम ने रविवार से फाइनल निरीक्षण शुरू किया है और ट्रैक, स्टेशनों और मेट्रो सिस्टम की बारीकी से जांच की गई। रविवार को टीम ट्राली पर दौरा कर रही थी। सोमवार को मेट्रो ट्रेन में सवार होकर सर्वे किया।
निरीक्षण के पहले दिन ट्रॉली रन किया गया। निरीक्षण 18 मार्च तक चलेगा। मंगलवार और बुधवार को मेट्रो ट्रेन को 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलाकर ट्रैक की क्षमता और सुरक्षा का परीक्षण किया जाएगा। यह देखा जाएगा कि तेज रफ्तार में ट्रेन और ट्रैक का प्रदर्शन कैसा रहता है। इसके बाद ही मेट्रो ट्रेन के संचालन की अनुमति मिलेगी। टीम के सर्वे के कारण गांधी नगर से बागड़दा तक छह किलोमीटर के हिस्से में मेट्रो का संचालन बंद कर दिया गया है।
80 रुपये तक होगा किराया
मेट्रो के संचालन की मंजूरी मिलने के बाद मेट्रो रेल कार्पोरेशन किराए का निर्धारण करेगी। गांधी नगर से रेडिसन चौराहा तक अधिकतम किराया 80 रुपये तक तक हो सकता है। गांधी नगर से रेडिसन चौराहे तक की दूरी 17 किलोमीटर है। अगले माह से मेट्रो का कमर्शियल संचालन हो सकता है। सरकार इसके लिए बड़ा लोकार्पण कार्यक्रम भी रख सकती है। फिलहाल मेट्रो साढ़े छह किलोमीटर हिस्से में संचालित हो रही है, लेकिन उस हिस्से में मेट्रो के लिए यात्री नहीं मिल रहे है।
]]>ग्रेटर नोएडा वेस्ट में रहने वाले लोगों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है. लंबे समय से मेट्रो कनेक्टिविटी की मांग कर रहे इस इलाके को अब मेट्रो का तोहफा मिलने जा रहा है. नोएडा मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (NMRC) की एक्वा लाइन मेट्रो का विस्तार करने की तैयारी लगभग पूरी कर ली गई है. इस नए रूट के बनने से ग्रेटर नोएडा वेस्ट के करीब 5 लाख लोगों और करीब 113 हाउसिंग सोसाइटी को सीधा फायदा मिलेगा.
योजना के मुताबिक मेट्रो की यह नई लाइन नोएडा सेक्टर-61 से शुरू होकर ग्रेटर नोएडा वेस्ट के गौर चौक तक जाएगी. इस पूरे रूट पर कुल 4 नए मेट्रो स्टेशन बनाए जाएंगे. फिलहाल ग्रेटर नोएडा वेस्ट में मेट्रो की कमी के कारण लोगों को रोजाना भारी जाम, बसों और निजी वाहनों पर निर्भर रहना पड़ता है. मेट्रो के आने से यह परेशानी काफी हद तक कम हो जाएगी.
जेवर एयरपोर्ट पहुंचने में होगी आसानी
अधिकारियों के अनुसार यह रूट यूपी कैबिनेट से पहले ही मंजूर नॉलेज पार्क-5 तक मेट्रो विस्तार योजना का ही हिस्सा है, लेकिन इसे ग्रेटर नोएडा वेस्ट के सेक्टर-4 स्टेशन पर आरआरटीएस (रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) से भी जोड़ा जाएगा. इससे लोगों को सिर्फ मेट्रो ही नहीं, बल्कि तेज रफ्तार आरआरटीएस की सुविधा भी मिलेगी. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि ग्रेटर नोएडा वेस्ट से जेवर में बन रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक पहुंच आसान हो जाएगी.
बताया जा रहा है कि आरआरटीएस सराय काले खां से चलकर गाजियाबाद होते हुए नॉलेज पार्क-5 तक जाएगी और वहीं से यह मेट्रो लाइन ग्रेटर नोएडा वेस्ट को जोड़ेगी. सेक्टर-61 में पहले से दिल्ली मेट्रो और आगे जाने वाली एनएमआरसी मेट्रो की कनेक्टिविटी मौजूद है. ऐसे में लोग दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद के बीच बिना ज्यादा परेशानी के आ-जा सकेंगे.
रूट की फाइनल डीपीआर बनकर तैयार
इस रूट की फाइनल डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार कर ली गई है. कुछ जरूरी संशोधन के बाद इसे दोबारा यूपी कैबिनेट के पास भेजा जाएगा. वहां से मंजूरी मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू किया जा सकता है. माना जा रहा है कि इस मेट्रो लाइन के शुरू होने से ग्रेटर नोएडा वेस्ट में ट्रैफिक जाम कम होगा, प्रॉपर्टी के दाम बढ़ेंगे और लोगों को सुरक्षित, सस्ता और भरोसेमंद सार्वजनिक परिवहन मिलेगा.
कुल मिलाकर, मेट्रो विस्तार की यह योजना ग्रेटर नोएडा वेस्ट के विकास को नई रफ्तार देने वाली साबित होगी और यहां रहने वाले आम लोगों के रोजमर्रा के सफ़र को आसान बनाएगा.
]]>ग्रेटर नोएडा वेस्ट में रहने वाले लोगों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है. लंबे समय से मेट्रो कनेक्टिविटी की मांग कर रहे इस इलाके को अब मेट्रो का तोहफा मिलने जा रहा है. नोएडा मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (NMRC) की एक्वा लाइन मेट्रो का विस्तार करने की तैयारी लगभग पूरी कर ली गई है. इस नए रूट के बनने से ग्रेटर नोएडा वेस्ट के करीब 5 लाख लोगों और करीब 113 हाउसिंग सोसाइटी को सीधा फायदा मिलेगा.
योजना के मुताबिक मेट्रो की यह नई लाइन नोएडा सेक्टर-61 से शुरू होकर ग्रेटर नोएडा वेस्ट के गौर चौक तक जाएगी. इस पूरे रूट पर कुल 4 नए मेट्रो स्टेशन बनाए जाएंगे. फिलहाल ग्रेटर नोएडा वेस्ट में मेट्रो की कमी के कारण लोगों को रोजाना भारी जाम, बसों और निजी वाहनों पर निर्भर रहना पड़ता है. मेट्रो के आने से यह परेशानी काफी हद तक कम हो जाएगी.
जेवर एयरपोर्ट पहुंचने में होगी आसानी
अधिकारियों के अनुसार यह रूट यूपी कैबिनेट से पहले ही मंजूर नॉलेज पार्क-5 तक मेट्रो विस्तार योजना का ही हिस्सा है, लेकिन इसे ग्रेटर नोएडा वेस्ट के सेक्टर-4 स्टेशन पर आरआरटीएस (रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) से भी जोड़ा जाएगा. इससे लोगों को सिर्फ मेट्रो ही नहीं, बल्कि तेज रफ्तार आरआरटीएस की सुविधा भी मिलेगी. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि ग्रेटर नोएडा वेस्ट से जेवर में बन रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक पहुंच आसान हो जाएगी.
बताया जा रहा है कि आरआरटीएस सराय काले खां से चलकर गाजियाबाद होते हुए नॉलेज पार्क-5 तक जाएगी और वहीं से यह मेट्रो लाइन ग्रेटर नोएडा वेस्ट को जोड़ेगी. सेक्टर-61 में पहले से दिल्ली मेट्रो और आगे जाने वाली एनएमआरसी मेट्रो की कनेक्टिविटी मौजूद है. ऐसे में लोग दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद के बीच बिना ज्यादा परेशानी के आ-जा सकेंगे.
रूट की फाइनल डीपीआर बनकर तैयार
इस रूट की फाइनल डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार कर ली गई है. कुछ जरूरी संशोधन के बाद इसे दोबारा यूपी कैबिनेट के पास भेजा जाएगा. वहां से मंजूरी मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू किया जा सकता है. माना जा रहा है कि इस मेट्रो लाइन के शुरू होने से ग्रेटर नोएडा वेस्ट में ट्रैफिक जाम कम होगा, प्रॉपर्टी के दाम बढ़ेंगे और लोगों को सुरक्षित, सस्ता और भरोसेमंद सार्वजनिक परिवहन मिलेगा.
कुल मिलाकर, मेट्रो विस्तार की यह योजना ग्रेटर नोएडा वेस्ट के विकास को नई रफ्तार देने वाली साबित होगी और यहां रहने वाले आम लोगों के रोजमर्रा के सफ़र को आसान बनाएगा.
]]>सीएमआरएस की तीन सदस्यीय टीम ने 15 और 16 अक्टूबर को एम्स से सुभाष नगर स्टेशन तक प्रायोरिटी कॉरिडोर का गहन निरीक्षण किया। इस दौरान मुख्य लाइन, ट्रैक, विद्युत और यांत्रिक (ई एंड एम) सिस्टम, स्टेशन भवन और परिचालन से जुड़ी सभी व्यवस्थाओं की बारीकी से जांच की गई। यह भोपाल मेट्रो की अंतिम परीक्षा मानी जा रही है। अब सिर्फ ‘ओके टू रन’ रिपोर्ट का इंतजार है।
इससे पहले 25 सितंबर को मुख्य रेलवे संरक्षा आयुक्त (सीसीआरएस) और उनकी टीम ने डिपो और रोलिंग स्टॉक का परीक्षण किया था। वहीं इस बार सीएमआरएस टीम ने सभी स्टेशनों पर सुरक्षा और तकनीकी मानकों की समीक्षा की ताकि संचालन शुरू होने से पहले सभी सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित और मानक अनुरूप हों।
CMRS की दूसरी जांच में डिपो से AIIMS Bhopal तक के आठ मेट्रो स्टेशन शामिल होंगे। इस जांच में यात्रियों के लिए सुविधाओं पर खास ध्यान दिया गया। इसमें स्टेशन के आने-जाने के रास्ते, लिफ्ट, एस्केलेटर, शौचालय, कंट्रोल रूम, आग से सुरक्षा के इंतजाम, ट्रैक और बिजली की व्यवस्था, टेलीकॉम नेटवर्क और सुरक्षा व्यवस्थाएं शामिल हैं। स्टेशनों की सुंदरता बढ़ाने के कामों को भी देखा गया। CMRS की दूसरी जांच का यह हिस्सा प्राथमिकता वाले कॉरिडोर के एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्से को कवर करेगा। यह हिस्सा सुभाश नगर डिपो को AIIMS Bhopal से जोड़ता है। इस खंड में आठ मेट्रो स्टेशन हैं और यह शुरुआती यात्री सेवा का मुख्य आधार बनेगा।
MPMRCL के अधिकारियों ने बताया कि CMRS की यह जांच मेट्रो के संचालन की सुरक्षा और यात्रियों की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए बहुत ज़रूरी है। उन्होंने बताया कि जांच में हर छोटी-बड़ी चीज़ का बारीकी से मुआयना किया जा रहा है। स्टेशन के अंदर और बाहर की सुरक्षा व्यवस्थाएं, यात्रियों के लिए आरामदायक माहौल और आपातकालीन स्थिति से निपटने के इंतजामों को परखा जा रहा है।
यह भी बताया गया कि मेट्रो के ट्रैक और बिजली की सप्लाई की जांच भी की जा रही है ताकि संचालन के दौरान कोई दिक्कत न आए। टेलीकॉम नेटवर्क की जांच यह सुनिश्चित करेगी कि यात्रियों को संचार की कोई समस्या न हो।
इस पूरे प्रोजेक्ट में MPMRCL के अधिकारी पूरी मेहनत से लगे हुए हैं ताकि भोपालवासी जल्द से जल्द इस आधुनिक सुविधा का लाभ उठा सकें।
दिवाली के बाद होगा अंतिम निरीक्षण
मेट्रो प्रबंधन के अनुसार अब अगला कदम सीसीआरएस द्वारा अंतिम निरीक्षण है। उनकी स्वीकृति मिलने पर ही भोपाल मेट्रो को ‘ओके टू रन’ रिपोर्ट जारी होगी। रिपोर्ट मिलते ही राजधानी के लोगों का लंबे समय से चल रहा इंतजार खत्म हो जाएगा और भोपाल मेट्रो अपने पहले चरण में एम्स से सुभाष नगर तक दौड़ने लगेगी।
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भोपाल में मेट्रो की ब्लू लाइन के लिए एलिवेटेड कॉरिडोर का जमीनी काम शुरू हो गया है। जेके रोड क्षेत्र में पीयर्स के लिए लोहे के जाल बिछने लगे है। पीयर्स पर ही स्लैब बिछेगी और यहां पटरियों का काम होगा। ब्लू लाइन में करीब 13 किमी लंबाई की एलिवेटेड लाइन बनना है। 14 किमी लंबाई की लाइन एम्स से करोद तक की है।
मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन की ओर से ब्लू लाइन से जुड़े निर्माणों के लिए 1200 नोटिस तैयार किए गए है। एक सप्ताह में ये नोटिस दे दिए जाएंगे। यदि कोई नहीं हटेगा(Demolishe) तो पुलिस और प्रशासनिक क्षरा कार्रवाई की जाएगी।
700 मामलों में चल रही सुनवाई
मेट्रो रेल की लाइन में आ रहे निर्माणों में से 700 की प्रशासन ने नियमित सुनवाई शुरू की है। तहसीलदार-एसडीएम कोर्ट में इन्हें सुना जा रहा है। मुआवजे के राशि व विस्थापन की नीति से ये सहमत नहीं है। ब्लू लाइन में तो जहांगीराबाद का बाजार ही पूरा आ रहा है और लगभग सभी दुकानदार इसके विरोध में है।
गौरतलब है कि ब्लू लाइन भदभदा से शुरू होकर रत्नागिरी तिराहा तक है। जबकि ओरेंज लाइन एम्स से करोद तक है। ओरेंज लाइन में सुभाष ब्रिज तक 6.22 किमी का काम पूरा हो चुका है और यहां अक्टूबर में कमर्शियल रन शुरू करने की तैयारी है।
]]>भोपाल में मेट्रो की ब्लू लाइन के लिए एलिवेटेड कॉरिडोर का जमीनी काम शुरू हो गया है। जेके रोड क्षेत्र में पीयर्स के लिए लोहे के जाल बिछने लगे है। पीयर्स पर ही स्लैब बिछेगी और यहां पटरियों का काम होगा। ब्लू लाइन में करीब 13 किमी लंबाई की एलिवेटेड लाइन बनना है। 14 किमी लंबाई की लाइन एम्स से करोद तक की है।
मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन की ओर से ब्लू लाइन से जुड़े निर्माणों के लिए 1200 नोटिस तैयार किए गए है। एक सप्ताह में ये नोटिस दे दिए जाएंगे। यदि कोई नहीं हटेगा(Demolishe) तो पुलिस और प्रशासनिक क्षरा कार्रवाई की जाएगी।
700 मामलों में चल रही सुनवाई
मेट्रो रेल की लाइन में आ रहे निर्माणों में से 700 की प्रशासन ने नियमित सुनवाई शुरू की है। तहसीलदार-एसडीएम कोर्ट में इन्हें सुना जा रहा है। मुआवजे के राशि व विस्थापन की नीति से ये सहमत नहीं है। ब्लू लाइन में तो जहांगीराबाद का बाजार ही पूरा आ रहा है और लगभग सभी दुकानदार इसके विरोध में है।
गौरतलब है कि ब्लू लाइन भदभदा से शुरू होकर रत्नागिरी तिराहा तक है। जबकि ओरेंज लाइन एम्स से करोद तक है। ओरेंज लाइन में सुभाष ब्रिज तक 6.22 किमी का काम पूरा हो चुका है और यहां अक्टूबर में कमर्शियल रन शुरू करने की तैयारी है।
]]>देश के शहरी परिवहन में तेजी लाने और स्थायी परिवहन समाधान सुनिश्चित करने के लिए, सरकार ने कई परिवर्तनकारी पहल शुरू की हैं। इन कदमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मेट्रो परियोजनाएं टिकाऊ, आर्थिक रूप से व्यवहार्य और तकनीकी रूप से उन्नत हों। दूरदर्शी नीतियों, साहसिक निवेशों और स्मार्ट साझेदारियों के माध्यम से, सरकार एक स्वच्छ, तेज़ और अधिक कनेक्टेड शहरी भविष्य की नींव रख रही है।
भारत का मेट्रो नेटवर्क 248 किमी (2014) से बढ़कर 1,013 किमी (2025) हो गया है। भारत ने ₹2.5 लाख करोड़ (28.86 बिलियन अमेरिकी डॉलर) का निवेश किया है और घरेलू स्तर पर 2,000 से ज्यादा मेट्रो कोच बनाए हैं। वहीं, मेक इन इंडिया, सौर ऊर्जा से चलने वाले स्टेशन और चालक रहित मेट्रो जैसी पहल स्वच्छ और भविष्य के लिए तैयार परिवहन (मोबिलिटी) को बढ़ावा दे रही हैं।
भारत की मेट्रो यात्रा इसकी शहरी जागृति का प्रतीक
वर्ष 2000 के दशक की शुरुआत में दिल्ली के बड़े उपनगरों में बिछाई गई पहली रेल पटरियों से लेकर अब 20 से ज्यादा भारतीय शहरों में फैले व्यस्त, तकनीक-संचालित नेटवर्क तक, भारत की मेट्रो यात्रा इसकी शहरी जागृति का प्रतीक है। तेज जन परिवहन की दिशा में एक सतर्क कदम के रूप में शुरू हुआ यह सफर आज एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन में बदल गया है, जिसने दैनिक आवागमन को सुव्यवस्थित किया है, शहर की भीड़भाड़ को कम किया है और इस क्षेत्र को नया आकार दिया है।
देखा जाये तो, मेट्रो अब केवल परिवहन का एक साधन नहीं है, यह भारत की विकास गाथा के केंद्र में धड़कती एक जीवनरेखा है, जो महत्वाकांक्षा, नवाचार और टिकाऊ शहरी जीवन के दृष्टिकोण से प्रेरित है। भारत अब दुनिया के तीसरे सबसे बड़े मेट्रो नेटवर्क के रूप में गर्व से खड़ा है, जिससे शहरी परिवहन विस्तार में इसकी तेज प्रगति का पता चलता है।
परिचालन का विस्तार
आपको बता दें, भारत का परिचालन मेट्रो नेटवर्क 5 शहरों में 248 किमी (2014) से बढ़कर मई 2025 तक 23 शहरों में 1,013 किमी हो गया है, यानी केवल 11 वर्षों में 763 किमी की वृद्धि हुई है। औसत दैनिक सवारियों की संख्या 28 लाख (2013-14) से बढ़कर 1.12 करोड़ से अधिक हो गई है, जो शहरी आवागमन में एक परिवर्तनकारी बदलाव का प्रतीक है।
मेट्रो विकास के आंकड़े
नई लाइनें चालू करने की गति नौ गुना बढ़ गई है: 0.68 किमी/माह (2014 से पहले) से बढ़कर आज लगभग 6 किमी/माह हो गई है।
2025-26 के लिए वार्षिक मेट्रो बजट ₹34,807 करोड़ है, जो 2013-14 के ₹5,798 करोड़ से छह गुना से भी अधिक है।
भविष्य की दिशा: सरकार द्वारा उठाए गए प्रमुख कदम-
मेट्रो रेल नीति, 2017
मेट्रो रेल नीति 2017 शहरों को कॉम्प्रिहेंसिव मोबिलिटी प्लान्स (सीएमपी) तैयार करने और शहरी महानगरीय परिवहन प्राधिकरण (यूएमटीए) स्थापित करने का निर्देश देती है ताकि मेट्रो प्रणालियों के विकास का मार्गदर्शन किया जा सके और स्थिरता, आर्थिक व्यवहार्यता और एकीकृत शहरी गतिशीलता पर विशेष बल दिया जा सके। केंद्रीय वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए, मेट्रो परियोजनाओं को न्यूनतम 14% का इकोनॉमिक इंटरनल रेट ऑफ रिटर्न (ईआईआरआर) सुनिश्चित करना होगा और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के माध्यम से निजी क्षेत्र की अनिवार्य भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी।
मेट्रो रेल प्रणालियों के लिए मेक इन इंडिया
महत्वाकांक्षी मेक-इन-इंडिया अभियान के तहत, सरकार ने कम से कम 75% मेट्रो कारों और 25% प्रमुख उपकरणों व उप-प्रणालियों की घरेलू खरीद का प्रावधान किया है- यह स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने और परिवहन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में एक साहसिक कदम है।
वहीं, पिछले दस वर्षों में, भारत ने अपने मेट्रो नेटवर्क के विस्तार में लगभग ₹2.5 लाख करोड़ (28.86 बिलियन अमेरिकी डॉलर) का निवेश किया है। इस गति ने मेट्रो कोचों के स्थानीय निर्माण को बढ़ावा दिया है। रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत एक सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम (पीएसयू), भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (बीईएमएल) ने मई 2024 तक दिल्ली, जयपुर, कोलकाता, बेंगलुरु और मुंबई जैसे शहरों में 2,000 से अधिक मेट्रो कोचों की आपूर्ति की है, जिससे घरेलू क्षमताएं मज़बूत हुई हैं और आयात पर निर्भरता कम हुई है।
वैश्विक साझेदारियों से मेट्रो नेटवर्क के विकास को भी गति
वैश्विक साझेदारियां देश में मेट्रो नेटवर्क के विकास को भी गति दे रही हैं। ऐसी ही एक परियोजना, मुंबई मेट्रो लाइन 3 (एमएमएल-3), ₹23,136 करोड़ (2.67 बिलियन अमेरिकी डॉलर) के भारी निवेश से शहरी परिवहन में आमूल-चूल परिवर्तन लाएगी। ₹13,235 करोड़ (1.53 बिलियन अमेरिकी डॉलर) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा या कुल वित्तपोषण का 57.2%, जापान इंटरनेशनल कॉर्पोरेशन एजेंसी (जेआईसीए) द्वारा ऋण सहायता के रूप में प्रदान किया जा रहा है। शेष धनराशि भारत सरकार, महाराष्ट्र राज्य सरकार/मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) द्वारा संयुक्त रूप से प्रदान की जा रही है, जो इसे बुनियादी ढांचे के विकास में अंतर्राष्ट्रीय और घरेलू सहयोग का एक सशक्त उदाहरण बनाता है।
ग्रीन अर्बन मोबिलिटी
भारत की मेट्रो रेल प्रणालियां हरित नवाचारों को अपना रही हैं। दिल्ली मेट्रो ने ओखला विहार में एक एलिवेटेड वायडक्ट पर एक वर्टिकल बाइ-फेसियल सोलर प्लांट और खैबर पास डिपो में 1 मेगावाट का रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित किया है, जो भूमि-मुक्त नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग में अग्रणी है। रिजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम जैसी अन्य हरित पहल, जिन्हें महानगरों में व्यापक रूप से अपनाया गया है, ब्रेकिंग ऊर्जा को बिजली में परिवर्तित करके बिजली बचाने और कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद करती हैं। इसके अतिरिक्त, दिल्ली, कोच्चि, नागपुर और पुणे जैसे शहरों के कई मेट्रो स्टेशनों को इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल (आईजीबीसी) प्रमाणन प्राप्त हुए हैं, जो पर्यावरण-अनुकूल बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देते हैं। ये प्रयास भारत के स्थिरता लक्ष्यों के अनुरूप हैं और स्वच्छ शहरी गतिशीलता में मेट्रो की बढ़ती भूमिका को दर्शाते हैं।
भारत की मेट्रो रेल में अत्याधुनिक नवाचार
उल्लेखनीय है, देश की मेट्रो प्रणालियां न केवल आकार में बढ़ रही हैं, बल्कि उनकी बुद्धिमत्ता भी विकसित हो रही है। स्वचालन, डिजिटलीकरण और स्थिरता की ओर बढ़ते ज़ोर के साथ, देश भर की मेट्रो कंपनियां नई तकनीकों को अपना रही हैं।
नमो भारत ट्रेन
भारत की पहली अत्याधुनिक हाई-स्पीड क्षेत्रीय ट्रेन
160 किमी/घंटा की परिचालन गति (डिजाइन गति: 180 किमी/घंटा) पर चलती है।
दिल्ली-मेरठ क्षेत्रीय रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) पर चलाई गई
अंडरवाटर मेट्रो
2024 में, भारत ने कोलकाता में अपनी पहली अंडरवाटर मेट्रो सुरंग शुरू करके एक बड़ी उपलब्धि हासिल की, जो हुगली नदी के नीचे एस्प्लेनेड को हावड़ा मैदान से जोड़ेगी।
इंजीनियरिंग का यह चमत्कार भारत की बढ़ती तकनीकी और अवसंरचनात्मक क्षमता का प्रतीक है।
वाटर मेट्रो
केरल का कोच्चि, वाटर मेट्रो शुरू करने वाला भारत का पहला शहर बन गया।
वाटर मेट्रो निर्बाध और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन के लिए इलेक्ट्रिक-हाइब्रिड नावों का उपयोग करके 10 द्वीपों को जोड़ती है
यूरोपियन ट्रेन कंट्रोल सिस्टम (ईटीसीएस) लेवल II सिग्नलिंग
एलटीई रेडियो बैकबोन का उपयोग करते हुए हाइब्रिड लेवल III सिस्टम वाला दुनिया का पहला ईटीसीएस लेवल II।
नमो भारत मार्ग पर ट्रेन सुरक्षा, गति और वास्तविक समय की निगरानी को बेहतर बनाता है।
प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर (पीएसडी)
भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) द्वारा संयुक्त रूप से विकसित।
यात्री सुरक्षा को बढ़ाता है और प्लेटफॉर्म-स्तरीय दुर्घटनाओं को कम करता है।
नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड
एकीकृत एक राष्ट्र, एक कार्ड समाधान।
मेट्रो, बसों, उपनगरीय रेल, टोल और खुदरा दुकानों में निर्बाध यात्रा को सक्षम बनाता है।
क्यूआर-आधारित टिकटिंग
मोबाइल ऐप-आधारित क्यूआर टिकट, टिकटिंग अनुभव को सरल और डिजिटल बनाते हैं।
मानवरहित रेल संचालन (यूटीओ)
गौरतलब हो, दिल्ली मेट्रो के कई हिस्सों में चालक रहित तकनीक काम कर रही है, और इसकी शुरुआत 2020 में मैजेंटा लाइन पर की गई थी। इससे दक्षता बढ़ती है और मानव निर्भरता कम होती है।
स्वदेशी स्वचालित रेल पर्यवेक्षण प्रणाली (आई-एटीएस)
भारत में पहली बार स्थानीय स्तर पर विकसित, एटीएस रेल संचालन और सिग्नलिंग का स्वचालित स्थानीय और केंद्रीय नियंत्रण और निगरानी प्रदान करता है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) और बीईएल द्वारा संयुक्त रूप से निर्मित, यह प्रणाली अब दिल्ली मेट्रो की रेड लाइन पर सक्रिय है।
प्रस्तावित मेट्रो परियोजनाएं
भारत में मेट्रो का विस्तार योजना और अनुमोदन के चरणों में नई परियोजनाओं की बाढ़ के साथ गति पकड़ रहा है। इसका उद्देश्य अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी में सुधार, शहरी विकास को बढ़ावा देना और उभरते और स्थापित शहरों में स्वच्छ, तेज और अधिक समावेशी सार्वजनिक परिवहन प्रदान करना है। इन आगामी परियोजनाओं में से कुछ इस प्रकार हैं-
पुणे मेट्रो रेल परियोजना चरण-2
पुणे मेट्रो चरण-2, जिसमें 13 स्टेशनों के साथ 12.75 किमी लंबाई का दो एलिवेटेड कॉरिडोर (वनाज़-चांदनी चौक और रामवाड़ी-वाघोली) शामिल है, को मंजूरी दे दी गई है और इसे चार वर्षों के भीतर पूरा करने की योजना है। विस्तार से आईटी केंद्रों, शैक्षणिक संस्थानों और इंटरसिटी बस टर्मिनलों तक पहुंच में सुधार होगा, जिससे सार्वजनिक परिवहन का हिस्सा बढ़ेगा।
दिल्ली मेट्रो
एरोसिटी-तुगलकाबाद कॉरिडोर का इंदिरा गांधी घरेलू टर्मिनल-1 तक विस्तार (2.16 किमी, भूमिगत)।
मैजेंटा लाइन विस्तार (लाइन 8) – रामकृष्ण आश्रम मार्ग से इंद्रप्रस्थ (9.913 किमी, भूमिगत)।
गोल्डन लाइन विस्तार (लाइन 10) – तुगलकाबाद से कालिंदी कुंज (9 किमी, एलिवेटेड)।
नोएडा सेक्टर-51 से नॉलेज पार्क V (17.435 किमी)।
अहमदाबाद मेट्रो रेल परियोजना चरण-2ए
सरदार वल्लभभाई पटेल हवाई अड्डे (6.032 किमी) से सीधी कनेक्टिविटी के लिए अहमदाबाद मेट्रो का विस्तार।
इस विस्तार से दैनिक यात्रियों, हवाई अड्डे के कर्मचारियों और शहर भर के निवासियों के लिए हवाई अड्डे तक सुविधाजनक और तेज पहुंच सुनिश्चित होगी।
बेंगलुरु मेट्रो चरण-3
केंद्र सरकार ने ₹15,600 करोड़ की लागत से चरण-3 के 45 किमी हिस्से को मंजूरी दी है।
वर्तमान में, शहर में 75 किमी मेट्रो चालू है और 145 किमी निर्माणाधीन है।
जल मेट्रो का विस्तार
कोच्चि मेट्रो के मॉडल के अनुरूप, सरकार ने असम के गुवाहाटी, डिब्रूगढ़ और तेजपुर सहित भारत भर के 24 शहरों में जल मेट्रो विस्तार सेवाओं के लिए तकनीकी व्यवहार्यता अध्ययन को मंजूरी दे दी है। इस विस्तार से कनेक्टिविटी में सुधार, सड़क भीड़भाड़ को कम करने और शहरों में स्थायी परिवहन को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।
दरअसल, दिल्ली के चहल-पहल वाले प्लेटफॉर्म से लेकर सूरत और भोपाल की उभरती हुई रेल लाइनों तक, मेट्रो चुपचाप एक नए भारत का ताना-बाना बुन रही हैं, जो तेज, कुशल और स्वच्छ हैं। ये सिर्फ़ ट्रेनें नहीं हैं, ये कल के भारत की जीवनरेखा हैं, जो न सिर्फ यात्रियों को, बल्कि महत्वाकांक्षा, समानता और लचीलापन भी प्रदान करती हैं।
भारत 2030 तक 7.3 ट्रिलियन डॉलर की अनुमानित जीडीपी के साथ दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की आकांक्षा रखता है, ऐसे में मेट्रो रेल जैसा मजबूत सार्वजनिक परिवहन इसके विकास की रीढ़ बनेगा, लोगों को जोड़ेगा, शहरों को ऊर्जा प्रदान करेगा और पृथ्वी की रक्षा करेगा।
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भोपाल मेट्रो ट्रेन प्रोजेक्ट को पूरा करने बड़ी संख्या में वैध-अवैध निर्माणों को हटाने की योजना तैयार हो गई है। करोद से एम्स व रत्नागिरी से भदभदा तक करीब 30 किमी लंबाई के ट्रैक के लिए कुल 1342 संपत्तियों को हटाना होगा। इनमें 34 धार्मिक स्थल, 21 टॉयलेट्स, 19 बस स्टॉप भी शामिल है।
मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने इन्हें हटाने प्रशासन को सूची सौंपी है। मेट्रो का काम तेजी से पूरा करने कॉर्पोरेशन को 52 हजार 863 वर्गमीटर जमीन की जरूरत है। गौरतलब है कि प्रोजेक्ट में 12.3 हेक्टेयर सरकारी जमीन के साथ 2.7 हेक्टेयर निजी जमीन का अधिग्रहण अभी ओर होगा। 446.87 करोड़ रुपए का पुनर्विस्थापन बजट तय किया हुआ है।
ऐसे समझे मेट्रो लाइन
करोंद से एम्स लाइन- 16.546 किमी लंबाई। 14 एलीवेटेड स्टेशन, दो अंडरग्राउंड स्टेशन।
भदभदा चौराहा से रत्नागिरी तिराहा तक– 14.164 किमी लंबाई। 14 रेलवे स्टेशन एलीवेटेड।
दो लाइन की कुल लंबाई- 30.170 किमी है। 30 मेट्रो स्टेशन कुल
ऐसे आंकड़ों में समझे प्रभावित संपत्तियां
1342 कुल प्रभावित
809 सरकारी
533 निजी
1218 पूरी तरह से प्रभावित
124 आंशिक प्रभावित
1563 मकान प्रभावित
373 मकान टाइटल होल्डर
1190 नॉन टाइटल होल्डर
496 अपना पूरा मकान खो देंगे
514 की पूरी दुकान जाएगी
133 पूरे मकान-दुकान खोएंगे
04 खुले प्लॉट
195 कम्युनिटी संपत्तियां
52 हजार 863.85 वर्गमीटर क्षेत्र प्रभावित
26 हजार 617.3 वर्गमीटर टाइटल होल्डर्स की
26 हजार 246.55 वर्गमीटर नॉन टाइटल होल्डर की
सुभाष ब्रिज से करोंद तक इन्हें हटाना टेढ़ी खीर
18 संपत्तियां पुल बोगदा
44 संपत्तियां एशबाग
23 संपत्तियां अंडरग्राउंड टनल के एंट्री रैंप के लिए
103 संपत्तियां भोपाल स्टेशन
45 संपत्तियां नादरा बस स्टैंड
108 संपत्तियां सिंधी कॉलोनी
15 संपत्तियां डीआइजी बंगला
06 संपत्तियां कृषि मंडी
36 संपत्तियां करोंद
95 संपत्तियां अर्जुन नगर
प्रभावित संपत्तियां के प्रकार समझे
34 धार्मिक स्थल
03 कार्यालय
19 बस स्टॉप
21 टॉयलेट
04 रेलवे केबिन
36 बाउंड्रीवॉल
02 फैक्ट्री
03 पुलिस चौकी
07 वाटर टैंक
19 पुलिस क्वार्टर
02 कम्युनिटी हॉल
13 सरकारी भवन
राजधानी भोपाल को मिलेगी अत्याधुनिक मेट्रो, 90km प्रति घंटे की रफ्तार, 7000 करोड़ की होगी लागत
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आरकेएमपी स्टेशन पर भोपाल मेट्रो ट्रेन प्रोजेक्ट के बारे में विस्तार से जानकारी दी है. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भोपाल मेट्रो मध्य प्रदेश की प्रगति का प्रतीक है. इस परियोजना को कुल 6941.40 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जा रहा है.
सुभाष नगर स्टेशन से एम्स स्टेशन तक अनुमानित 2225 करोड़ की लागत से प्रायोरिटी कॉरिडोर बनाया जा रहा है. इसका कार्य अंतिम चरण में है. अक्टूबर 2025 तक इस प्रायोरिटी कॉरीडोर में मेट्रो ट्रेन का संचालन शुरू कर देना सरकार का लक्ष्य है. भोपाल मेट्रो के दोनों कॉरिडोर्स (ऑरेंज और ब्लू लाइन) साल 2030 से पहले पूर्ण रूप से चालू कर देने का हमारा रोडमैप तैयार है.
भोपाल मेट्रो की डिजाइन
भोपाल में चलने वाली मेट्रो की स्पीड 90 किमी प्रति घंटा होगी. इसकी ऑपरेशनल स्पीड 40-60 किमी घंटा होगी. हर मेट्रो स्टेशन के बीच मात्र 2 मिनट का समय लगेगा. मेट्रो में यात्रियों के लिए एस्केलेटर, लिफ्ट, ब्रेल साईनेज, शुद्ध पेयजल, स्वच्छ शौचालय और त्वरित सूचनाएं देने की सभी प्रकार की आधुनिक सुविधाएं होंगी.
भोपाल मेट्रो में दिव्यांगों के लिए पूरी सुविधा
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार मेट्रो ट्रेन में दिव्यांगजनों के लिए भी पूरी तरह से समावेशी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रही है.
सभी मेट्रो स्टेशन्स पर दिव्यांगजनों के लिए सुगम आवागमन की सुविधाएं होंगी.
मेट्रो से कंट्रोल होगा प्रदूषण
भोपाल मेट्रो ट्रेन परियोजना के लिए कुल 27 अत्याधुनिक मेट्रो ट्रेन सेट होंगे. इनमें से 7 ट्रेन सेट भोपाल पहुंच चुके हैं. मेट्रो से न केवल सुविधाजनक यात्रा ही संभव होगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण में भी इसकी प्रभावी भूमिका होगी.
इंदौर मेट्रो का काम भी होगा पूरा
इंदौर मेट्रो का पूरा सेक्शन इसी साल के अंत तक प्रारंभ करने की तैयारी हो रही है. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर मेट्रो ट्रेन के शेष कार्यों की प्रगति की जानकारी भी मीडिया को दी. उन्होंने कहा कि इंदौर में मेट्रो ट्रेन की सेवाएं शुरू हो चुकी हैं. सरकार का लक्ष्य है कि इंदौर मेट्रो का पूरा सेक्शन, जो सुपर कॉरीडोर से मालवीय नगर चौराहा (रेडिसन चौराहा) तक इसी साल के अंत तक प्रारंभ हो जाए. इससे इंदौर शहरवासियों को पूर्ण मेट्रो ट्रेन सुविधा मिल सकेगी.
सीएम मोहन यादव ने कहा कि हमारी सरकार इस बात के लिए प्रतिबद्ध है कि इंदौर और भोपाल में विश्वस्तरीय मेट्रो ट्रेन सेवा समय पर शुरू हो, जिससे आमजन को सार्वजनिक परिवहन का एक सरल, सहज, सुगम, बेहतर और सुरक्षित माध्यम मिल सके.
सीएम ने की मेट्रों की सैर, अक्टूबर में संचालन शुरू करने पर जोर
भोपाल मेट्रो में सीएम डॉ. मोहन यादव ने सवारी की। मेट्रो 35 से 40 किमी प्रतिघंटा की गति से चली और गणेश मंदिर रेलवे ओवरब्रिज को पार कर एम्स तक पहुंची। स्टेशन से रवाना मेट्रो एम्स तक पहुंची और तुरंत रानी कमलापति मेट्रो स्टेशन पर लौट आई। सीएम बताया कि हमारी मेट्रो कमर्शियल रन के लिए तैयार है। अक्टूबर में प्रधानमंत्री नन्द्र मोदी से समय मांगा है। जो समय मिलेगा, उसपर कमर्शियल यानि यात्रियों के साथ मेट्रो का संचालन शुरू कर दिया जाएगा।
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