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महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने बताया कि प्रदेश में छः नये वन स्टॉप सेंटर जल्द खोले जाएँगे । केंद्रीय महिला बाल विकास मंत्रालय द्वारा इसके लिए स्वीकृति प्रदान की गई है। उन्होंने बताया कि वन स्टॉप सेंटर झाबुआ जिले के पेटलावाद, इंदौर के रसूलिया, धार के पीथमपुर और मनावर सहित नए जिले पांढुर्ना, मऊगंज और मैहर में खोले जाएँगे ।
मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि इन जिलों में वन स्टॉप सेंटर खुलने से पीड़ित महिलाएं उनके साथ हुए अत्याचार अथवा घरेलू हिंसा के बारे में बता पाएंगी और व्यवस्था अनुसार अपने जीवन को एक नई दिशा दे सकेंगी। उन्होंने कहा कि यहां पर हिंसा से प्रभावित महिलाओं को तत्काल आपातकालीन प्रतिक्रिया और बचाव सेवाएं, चिकित्सा सहायता, प्राथमिकी दर्ज करने में महिलाओं की सहायता, मनोवैज्ञानिक या परामर्श सहायता, कानूनी सहायता, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा के साथ-साथ मुफ्त पुलिस और अदालती कार्यवाही के दौरान सहायता प्रदान की जाती है। साथ ही इन केंद्रों पर सभी तरह की हिंसा से पीडि़त महिलाओं और बालिकाओं को अस्थाई रूप से रहने की सुविधा दी जाती है।
मंत्री सुश्री भूरिया के अथक प्रयासों से झाबुआ के पेटलावद में नवीन वन स्टॉप सेंटर खुलने से इस क्षेत्र की महिलाओं को किसी भी प्रकार की हिंसा के पश्चात न्याय पाने के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। प्रदेश में अब तक 57 ओएससी सेंटर्स संचालित किये जा रहे थे। इन 7 नये वन स्टॉप सेंटर की स्वीकृति मिलने से अब इनकी संख्या 64 हो जाएगी।
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मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने कहा कि किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 एक व्यापक कानून है जो किशोरों की समृद्धि और विकास के लिए न्याय और अवसरों की व्यवस्था करता है। यह कानून बच्चों का सर्वोत्तम हित सुनिश्चित करता है और देखरेख एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों एवं विधि विवादित बच्चों के मूलभूत मानव अधिकारों के संरक्षण हेतु प्रतिबद्धता व्यक्त करता है। उन्होंने कहा कि बच्चों के सर्वोत्तम हित में इस कानून को और किशोर न्याय प्रणाली के प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रशिक्षण दिया जायेगा। सुश्री भूरिया ने कहा कि आप सभी को बच्चों के कल्याण और संरक्षण का दायित्व सौंपा जा रहा है, उसका निर्वहन आप ही कर सकते हैं, कोई और यह नहीं कर सकता, इसलिए आप अपना कार्य पूरी तन्मयता और सतर्कता के साथ करें।
कार्यक्रम में विभागीय आयुक्त श्रीमती सूफिया फारूकी वली ने भी प्रतिभागियों को संबोधित कर किशोर न्याय अधिनियम के प्रावधानों के प्रति पर्याप्त समझ विकसित कर पूरी संवेदनशीलता के साथ बच्चों के पुनर्वास से सम्बंधित निर्णय लेने की आवश्यकता पर जोर दिया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में पोक्सो अधिनियम, किशोर न्याय अधिनियम एवं नियम, दत्तक ग्रहण विनियम, मिशन वात्सल्य दिशा निर्देश, बाल संरक्षण हेतु केंद्र एवं राज्य शासन द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं जैसे – पी एम केयर्स फॉर चिल्ड्रन स्कीम, मुख्यमंत्री कोविड-19 बाल सेवा योजना, मुख्यमंत्री बाल आशीर्वाद योजना आदि के क्रियान्वयन हेतु बाल कल्याण समिति एवं किशोर न्याय बोर्ड की भूमिका के सम्बन्ध में विस्तृत जानकारी प्रदान की जाएगी।
तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के पहले दिन प्रदेश के 17 जिलों में नव नियुक्त बाल कल्याण समिति और किशोर न्याय बोर्ड के 157 अध्यक्ष एवं सदस्य एवं जिला बाल संरक्षण इकाई के 54 नवनियुक्त कर्मचारियों को ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया गया।
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