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उच्च शिक्षा में डिजिटल परिवर्तन को गति देने के लिए इंदौर में आयोजित हुआ ‘डिजी100x मध्यप्रदेश समिट’
उच्च शिक्षा विभाग एवं डिजी के संयुक्त तत्वावधान में उच्च शिक्षा के डिजिटल भविष्य पर हुआ मंथन
मंत्री परमार ने किया समिट का शुभारंभ
भोपाल
उच्च शिक्षा विभाग द्वारा इंदौर के मेरियट होटल में “डिजी100x मध्यप्रदेश समिट” का आयोजन किया गया। उच्च शिक्षा विभाग एवं डिजी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस महत्वपूर्ण समिट का शुभारंभ प्रदेश के उच्च शिक्षा, आयुष एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने किया। कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन, उच्च शिक्षा आयुक्त प्रबल सिपाहा, आर.आर. कन्हेरे सहित प्रदेश के विभिन्न शासकीय एवं निजी विश्वविद्यालयों के कुलगुरु, कुलसचिव, शिक्षाविद, नीति-निर्माता, तकनीकी विशेषज्ञ तथा शिक्षा क्षेत्र से जुड़े अनेक प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
समिट का मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षा के बदलते स्वरूप, उभरती प्रौद्योगिकियों तथा डिजिटल नवाचारों के माध्यम से शिक्षण एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और आधुनिक बनाना था। कार्यक्रम में विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में डिजिटल परिवर्तन की संभावनाओं, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डेटा आधारित निर्णय प्रणाली, ई-गवर्नेंस, डिजिटल मूल्यांकन तथा भविष्य की शिक्षा व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक चर्चा की गई।
मंत्री परमार ने कहा कि प्रदेश सरकार उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में निरंतर सुधार के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि विभाग उत्तर पुस्तिकाओं के शत-प्रतिशत डिजिटल वैलिडेशन की दिशा में कार्य कर रहा है, जिससे मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और प्रभावी बन सकेगी। उन्होंने कहा कि तकनीक आधारित शिक्षा केवल प्रशासनिक सुधार का माध्यम नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को वैश्विक अवसरों से जोड़ने का सशक्त उपकरण भी है।
मंत्री परमार ने बताया कि विद्यार्थियों की अपार आईडी तैयार की जा रही है तथा उन्हें बहुभाषी शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तेलुगू, तमिल, मराठी सहित विभिन्न भारतीय भाषाओं में पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए डिजिटल तकनीकों का व्यापक उपयोग समय की मांग है। उच्च शिक्षा संस्थानों को विद्यार्थियों की बदलती आवश्यकताओं तथा वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप तकनीकी रूप से सशक्त बनाना होगा। इसके लिए विश्वविद्यालयों को शोध, नवाचार तथा डिजिटल अधोसंरचना के विकास पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि कार्यों में गति, पारदर्शिता और दक्षता लाने के लिए तकनीक को अपनाना आवश्यक है। जब तकनीकी विशेषज्ञ, विश्वविद्यालय और शासन मिलकर योजनाओं का स्वरूप तैयार करते हैं, तब शिक्षा एवं मूल्यांकन व्यवस्था को नई दिशा मिलती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी आधुनिक तकनीकों का प्रभावी उपयोग उच्च शिक्षा क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा तथा विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर संसाधन और सीखने के अधिक अवसर उपलब्ध कराएगा।
मंत्री परमार ने परीक्षा एवं मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता, दक्षता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल मूल्यांकन (डिजिटल इवैल्यूएशन) प्रणाली को अपनाने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में तकनीकी नवाचारों का उपयोग शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए अनिवार्य हो गया है। उन्होंने विश्वविद्यालयों, तकनीकी विशेषज्ञों तथा शासन के प्रतिनिधियों से इस विषय पर व्यापक विमर्श कर व्यवहारिक और प्रभावी समाधान विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को लागू करने से परीक्षा प्रक्रिया की गुणवत्ता में सुधार होगा, परिणामों की विश्वसनीयता बढ़ेगी तथा विद्यार्थियों को अधिक पारदर्शी और समयबद्ध सेवाएं मिल सकेंगी। उन्होंने इस कार्यशाला को समयानुकूल और महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि यह उच्च शिक्षा में डिजिटल परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन ने कहा कि विभाग विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए ‘सार्थक ऐप’ आधारित उपस्थिति प्रणाली को लागू करने के प्रयास कर रहा है। उन्होंने वर्तमान मूल्यांकन प्रणाली में 30 प्रतिशत आंतरिक मूल्यांकन और 70 प्रतिशत लिखित परीक्षा के अनुपात का उल्लेख करते हुए कहा कि बदलते शैक्षणिक परिवेश को देखते हुए इसे 40:60 करने पर विचार किया जाना चाहिए। इससे विद्यार्थियों की सतत शैक्षणिक सहभागिता और कक्षा आधारित सीखने की प्रक्रिया को अधिक महत्व मिलेगा।
उच्च शिक्षा आयुक्त प्रबल सिपाहा ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आज शिक्षा जगत की महत्वपूर्ण आवश्यकता बन चुकी है। विद्यार्थियों को एआई आधारित तकनीकों से परिचित कराने के लिए महाविद्यालयों में एआई से संबंधित सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों को विद्यार्थियों को एआई टूल्स के रचनात्मक, नैतिक और जिम्मेदार उपयोग के लिए प्रेरित करना चाहिए, ताकि वे भविष्य की चुनौतियों और अवसरों के लिए बेहतर रूप से तैयार हो सकें।
समिट में विशेषज्ञों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म, स्मार्ट प्रशासन, ऑनलाइन मूल्यांकन प्रणाली, डेटा आधारित प्रबंधन तथा तकनीक आधारित कौशल विकास जैसे विषयों पर अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने इस बात पर विशेष बल दिया कि डिजिटल संसाधनों और नवाचारों के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को अधिक सुलभ, प्रभावी और समावेशी बनाया जा सकता है। कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं, विश्वविद्यालय प्रशासकों तथा तकनीकी विशेषज्ञों के बीच सार्थक संवाद स्थापित कर उच्च शिक्षा में डिजिटल परिवर्तन की दिशा में साझा कार्ययोजना तैयार करना था। समिट में भाग लेने वाले प्रतिनिधियों ने उच्च शिक्षा को अधिक नवाचारी, विद्यार्थी-केंद्रित, समावेशी और भविष्य उन्मुख बनाने के लिए अनेक महत्वपूर्ण सुझाव भी प्रस्तुत किए।
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उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने कहा कि चार्टर्ड अकाउंटेंट्स केवल वित्तीय विशेषज्ञ नहीं, बल्कि देश की आर्थिक प्रगति, पारदर्शिता एवं सुशासन के सशक्त स्तंभ हैं। भारतीय परम्परा में अर्थव्यवस्था का चिंतन केवल लाभ और उपभोग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वह नैतिकता, लोककल्याण एवं मानवीय मूल्यों पर आधारित एक व्यापक दार्शनिक दृष्टि का प्रतिनिधित्व करता है। “शुभ-लाभ” भारतीय अर्थचिंतन का मूल दर्शन है, जिसमें कमाई ईमानदारी, सदाचार और कर्तव्यनिष्ठा से हो तथा उसका उपयोग समाजोपयोगी कार्यों एवं लोककल्याण के लिए किया जाए। मंत्री परमार शनिवार को, भोपाल स्थित कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट्स संस्थान (ICAI) द्वारा आयोजित दीक्षांत समारोह में नव-योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को संबोधित कर रहे थे।
मंत्री परमार ने कहा कि भारत का दृष्टिकोण “वसुधैव कुटुम्बकम्” का है, जहाँ दुनिया केवल बाजार नहीं, बल्कि आत्मीयता, सहअस्तित्व और मानवता से जुड़ा एक परिवार है। भारत की यही सांस्कृतिक चेतना, हमें विश्वमंच पर पुनः सिरमौर बनने की संकल्पना को साकार करने की प्रेरणा देती है। उन्होंने नव-योग्य सीए विद्यार्थियों से अपने ज्ञान, क्षमता एवं कौशल का उपयोग केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित न रखते हुए समाज, राष्ट्र एवं मानवता के कल्याण के लिए समर्पित करने का आह्वान किया।
मंत्री परमार ने युवाओं से जीवन को समाजोपयोगी बनाते हुए राष्ट्रीय पुनर्निर्माण में सक्रिय सहभागिता निभाने की अपील की। उन्होंने कहा कि आज देश को ऐसे युवा पेशेवरों की आवश्यकता है, जो नैतिक मूल्यों, पारदर्शिता एवं राष्ट्रहित को सर्वोच्च रखते हुए विकसित भारत के निर्माण में अपनी प्रभावी भूमिका निभाएँ। मंत्री परमार ने सभी नव-योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को उज्ज्वल एवं सफल भविष्य के लिए हार्दिक शुभकामनाएं दीं।
इस अवसर पर वरिष्ठ सदस्य सीए अभय छाजेड़ ने भी नव-योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को संबोधित करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य, प्रोफेशन में उपलब्ध नई संभावनाओं तथा बदलते समय के साथ निरंतर सीखते रहने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने युवाओं को प्रोफेशन में उत्कृष्टता प्राप्त करने एवं ICAI की गरिमा को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।
दीक्षांत समारोह में भोपाल शाखा के लगभग 80 नव-योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ने अपने अभिभावकों के साथ सहभागिता कर उपाधि एवं प्रमाण-पत्र प्राप्त किए। इस अवसर पर भोपाल शाखा के अध्यक्ष सीए आदित्य वास्तव, सचिव सीए अभिषेक जैन, पूर्व अध्यक्ष, पूर्व सचिव, वरिष्ठ सदस्यगण एवं बड़ी संख्या में सदस्य उपस्थित रहे।
उल्लेखनीय है कि भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट्स संस्थान (ICAI) द्वारा आयोजित इस राष्ट्रीय दीक्षांत समारोह में देशभर के 10 हजार 390 नव-योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ने एक साथ सहभागिता की। यह समारोह केंद्रीय स्तर पर आयोजित किया गया, जिसमें देश की विभिन्न शाखाओं ने ऑनलाइन माध्यम से भाग लिया। भोपाल शाखा को पहली बार इस गौरवपूर्ण आयोजन की मेजबानी का अवसर प्राप्त हुआ।
]]>विद्यार्थियों का सर्वांगीण हित, हमारी प्राथमिकता है। विद्यार्थियों को सरलता और सुलभता से सुविधाएं उपलब्ध हो, इस दिशा में कार्य करने की आवश्यकता है। समस्त विश्वविद्यालयों द्वारा विद्यार्थियों की अंकसूची, उपाधि एवं अन्य शैक्षणिक दस्तावेजों की डिजिलॉकर में उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, जिससे विद्यार्थियों को सुरक्षित, प्रमाणित एवं सरल डिजिटल सेवाओं का लाभ मिल सके। साथ ही प्रत्येक विद्यार्थी का स्वयं पोर्टल पर पंजीयन कराते हुए उन्हें उपलब्ध पाठ्यक्रमों में रुचि एवं आवश्यकता अनुसार चयन के लिए प्रेरित कर, शैक्षणिक उन्नयन से जोड़ा जाए। विश्वविद्यालयों के कार्यों का प्रभाव, सामाजिक परिवर्तन की अभिप्रेरणा बने। विश्वविद्यालय, सामाजिक परिवर्तन के वाहक बनें। यह बात उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने बुधवार को भोपाल स्थित निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के सभागार में, (एनएडी-डिजिलॉकर) एवं स्वयं पोर्टल के प्रभावी क्रियान्वयन" विषयक एक दिवसीय कार्यशाला का शुभारम्भ अवसर पर कही। मंत्री परमार ने एनएडी-डिजिलॉकर एवं स्वयं पोर्टल के क्रियान्वयन में, देश भर में प्रदेश की वर्तमान स्थिति पर संतोष व्यक्त किया एवं देश भर में प्रदेश को अग्रणी बनाने के लिए प्रोत्साहित भी किया।
उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के यशस्वी नेतृत्व में, हमारा प्रदेश उच्च शिक्षा को आधुनिक, नवाचारयुक्त, पारदर्शी एवं विद्यार्थी-केंद्रित बनाने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है। हमारा लक्ष्य हर विद्यार्थी तक सरल, सुरक्षित, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुँचाना है। मंत्री परमार ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों को धरातल पर प्रभावी रूप से लागू करने की दिशा में, यह एक महत्वपूर्ण पहल है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुसरण में, नई शिक्षा व्यवस्था में तकनीक केवल सुविधा का ही माध्यम नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य का सशक्त आधार है। हमारा प्रयास है कि प्रदेश का प्रत्येक विद्यार्थी डिजिटल रूप से सक्षम, ज्ञानसम्पन्न एवं वैश्विक अवसरों के लिए तैयार बने। विश्वविद्यालयों में परीक्षा एवं परिणाम को पारदर्शितापूर्ण बनाने की दिशा में कार्य हो रहा है। डिजिटल मूल्यांकन पद्धति से परीक्षा एवं परिणाम की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ेगी।
मंत्री परमार ने कहा कि विद्यार्थी को संवेदनशील एवं श्रेष्ठ नागरिक बनाना, विश्वविद्यालयों का दायित्व है। इसके लिए राष्ट्रहित एवं समाज हित में संस्कार रोपित करने की आवश्यकता हैं। मंत्री परमार ने कहा कि शिक्षकों के आचरण को विद्यार्थी आत्मसात करते हैं, इसलिए शिक्षण व्यावहारिक होना चाहिए। मंत्री परमार ने कहा कि स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 तक भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने के संकल्प को साकार करने के लिए, भारतीय दृष्टि के साथ शैक्षणिक परिदृश्य सृजन करना होगा।
मंत्री परमार ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप तकनीक आधारित शिक्षण, डिजिटल गवर्नेंस एवं गुणवत्तापूर्ण ऑनलाइन शिक्षा को बढ़ावा देना, हमारी प्राथमिकताओं में समाहित है। एनएडी-डिजिलॉकर के माध्यम से विद्यार्थियों के शैक्षणिक दस्तावेज सुरक्षित, प्रमाणित एवं डिजिटल रूप में सहज उपलब्ध होंगे, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी तथा समय और संसाधनों की बचत होगी। एनएडी-डिजिलॉकर, शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता एवं विश्वसनीयता को सुदृढ़ बना रहा है। वहीं (स्वयं) पोर्टल, युवाओं को देश के श्रेष्ठ शिक्षकों एवं संस्थानों से ऑनलाइन गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान कर रहा है।
अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा अनुपम राजन ने कहा कि सभी विश्वविद्यालय, छात्र हित को प्राथमिकता देते हुए एनएडी-डिजिलॉकर एवं स्वयं पोर्टल का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें जिससे विद्यार्थियों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े। राजन ने कहा कि विश्वविद्यालय, स्वयं पोर्टल के विनियमन को अपनाते हुए समस्त विद्यार्थियों का स्वयं पोर्टल पर पंजीयन एवं परीक्षा में प्रतिभागिता सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य करें। उन्होंने कहा कि सभी विश्वविद्यालय, अकादमिक कैलेंडर का शत प्रतिशत पालन सुनिश्चित करें ताकि विद्यार्थियों के शैक्षणिक सत्र प्रभावित न हों। राजन ने विश्वविद्यालयों को पारदर्शितापूर्ण प्रशासनिक प्रबंधन के लिए, समर्थ पोर्टल पर शिफ्ट करने के लिए भी प्रेरित किया।
उद्घाटन सत्र में स्वागत उद्बोधन देते हुए मप्र निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के चेयरमैन प्रो खेमसिंह डेहरिया ने, कार्यशाला के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। विषयविद सु दीक्षा राजपूत संयुक्त सचिव विश्वविद्यालय अनुदान आयोग नई दिल्ली एवं अभिनव शर्मा क्षेत्रीय समन्वयक एनएडी-डिजिलॉकर ने, कार्यशाला की प्रासंगिकता, आवश्यकता एवं महत्ता के आलोक में अपने विचार साझा किए। कार्यशाला में विभिन्न तकनीकी सत्रों में विषयविद एनएडी-डिजिलॉकर एवं स्वयं पोर्टल के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तृत संवाद करेंगे और विभिन्न विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों की जिज्ञासाओं का समाधान भी करेंगे।
कार्यशाला में आयुक्त उच्च शिक्षा प्रबल सिपाहा, मप्र निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के प्रशासनिक सदस्य महेशचंद चौधरी एवं आयोग के सचिव डॉ देवेंद्र सिंह गुर्जर सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलगुरु एवं प्रतिनिधि उपस्थित थे।
]]>इस अवसर पर मंत्री परमार ने, महाविद्यालय के शैक्षणिक व बौद्धिक प्रयासों की सराहना करते हुए, इसे विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के लिए प्रेरणादायी पहल बताया। इस अवसर पर मप्र हिंदी ग्रंथ अकादमी के निदेशक अशोक कड़ेल, प्रवेश एवं शुल्क विनियामक समिति के अध्यक्ष डॉ रविंद्र कान्हेरे, महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. शालिनी सक्सेना, वनस्पति शास्त्र विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ कीर्ति जैन, गणित विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ राजेश श्रीवास्तव, डॉ. एस डी सिंह एवं डॉ एस के मल्होत्रा उपस्थित थे।
]]>हिन्दी ग्रंथ अकादमी की पुस्तकों के माध्यम से महाविद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों तक भारतीय ज्ञान परंपरा का शाश्वत ज्ञान पहुंच रहा है। मंगलवार को मंत्रालय में आयोजित हिन्दी ग्रंथ अकादमी के प्रबंधक मंडल की बैठक की अध्यक्षता करते हुए उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने यह बात कही। मंत्री परमार ने कहा कि इन पुस्तकों में निहित ज्ञान जहां एक ओर विद्यार्थियों के उज्जवल भविष्य की नींव तैयार करेगा, वहीं दूसरी ओर उन्हें अच्छे नागरिक और बेहतर इंसान बनने की दिशा में भी अग्रसर करेगा।
मंत्री परमार ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि स्नातक प्रथम वर्ष के लगभग सभी प्रमुख विषयों की पुस्तकों में नवीन पाठ्यक्रम के अनुसार भारतीय ज्ञान परंपरा का समावेश किया जा चुका है। उन्होंने निर्देश दिए कि द्वितीय वर्ष की पुस्तकों के लेखन का कार्य शीघ्र प्रारंभ किया जाए, जिससे विद्यार्थियों को समय पर पुस्तकें प्राप्त हो सकें।
बैठक में मंत्री परमार ने विद्यार्थियों में घटती अध्ययन रुचि पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मोबाइल और डिजिटल डिस्टर्बेंस के इस दौर में विद्यार्थी अपना अधिकतर समय मोबाइल और कंप्यूटर पर व्यतीत कर रहे हैं, जिससे अध्ययन में उनकी रुचि कम होती जा रही है। ऐसे में विश्वविद्यालयों का दायित्व है कि वे विद्यार्थियों में पुनः अध्ययन के प्रति रुचि विकसित करें। मंत्री परमार ने निर्देश दिए कि विद्यार्थियों की रुचि बढ़ाने के लिए विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में प्रश्न-उत्तर प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाए।
इस अवसर पर उच्च शिक्षा विभाग के अपर सचिव अनुपम राजन ने कहा कि विभाग के लाखों विद्यार्थियों तक हिन्दी ग्रंथ अकादमी की पुस्तकें पहुंचती हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि पुस्तकों के निर्माण में मानक प्रक्रिया का पालन किया जाए तथा विद्यार्थियों से फीडबैक प्राप्त करने के लिए एक व्यवस्थित प्रणाली भी विकसित की जानी चाहिए, जिससे उनकी अपेक्षाओं के अनुसार पुस्तकों में आवश्यक सुधार किए जा सकें।
बैठक में अकादमी के संचालक डॉ. अशोक कड़ेल ने अकादमी के वार्षिक बजट की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्नातक प्रथम वर्ष की लगभग सभी प्रमुख विषयों की पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं और उन्हें महाविद्यालयों को प्रेषित किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि अकादमी द्वारा द्वितीय वर्ष की पुस्तकों के लेखन की प्रक्रिया शीघ्र ही प्रारंभ की जाएगी। प्रयास किया जा रहा है कि शैक्षणिक सत्र प्रारंभ होते ही ये पुस्तकें विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जा सकें।
बैठक में पुस्तकों के कागज की गुणवत्ता बढाने पर भी सहमति जताई गई। निर्णय लिया गया कि आगामी वर्ष से पुस्तकों को और अधिक गुणवत्तापूर्ण कागज पर प्रकाशित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त अकादमी से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया और आवश्यक निर्णय लिए गए।
बैठक में प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों के कुलगुरु, मनोनीत सदस्य, उच्च शिक्षा मंत्री के ओएसडी डॉ. भरत व्यास,हिन्दी ग्रंथ अकादमी के संयुक्त संचालक डॉ. उत्तम सिंह चौहान एवं सहायक संचालक रामविश्वास कुशवाहा सहित उच्च शिक्षा विभाग के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
अकादमी की पुस्तकों का किया विमोचन
उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने हिन्दी ग्रंथ अकादमी द्वारा प्रकाशित, स्नातक प्रथम वर्ष की निम्न पुस्तकों का विमोचन किया। इनमें “व्यावसायिक संगठन एवं संचार” (लेखक: डॉ. राकेश खंड, डॉ. दिनेश दवे, डॉ. राजीव नयन, डॉ. प्रज्ञा यादव) “भारत का इतिहास (606 से 1205 ई. तक)” (लेखक: स्नेहा खरे)) “राजनीति सिद्धांत” (लेखक: डॉ. उत्तम सिंह चौहान, डॉ. पुनित प्रताप पाण्डेय, डॉ. मनीष दुबे, डॉ. मंगला गौरी) तथा “भारतीय समाज एवं संस्कृति” (लेखक: डॉ. आलोक कुमार निगम) पुस्तक शामिल रही।
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मंत्री परमार ने चयनित अभ्यर्थियों से कहा कि आप सभी सौभाग्यशाली हैं कि आपको समाज और राष्ट्र की सेवा करने का पुनीत अवसर मिला है। संघ लोक सेवा आयोग सिविल सेवा परीक्षा जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में उत्तीर्ण होना केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के प्रति एक महान उत्तरदायित्व है। मंत्री परमार ने कहा कि अपनी इस असाधारण योग्यता को समाज और देश के उत्थान के लिए समर्पित करने का संकल्प लें। मंत्री परमार ने कहा कि कृतज्ञता ही मानवता का वास्तविक आभूषण है। हम चाहे सफलता के किसी भी शिखर पर पहुँच जाएँ, अपनी माटी का ऋण और अपनों के साथ को कभी नहीं भूलना चाहिए। यही कृतज्ञता का भाव 'लोक-कल्याण' की नींव रखता है।
मंत्री परमार ने कहा कि देश की उन्नति का मार्ग गुरुओं के प्रति सम्मान से ही प्रशस्त होता है। शिक्षक चाहे विद्यालयीन शिक्षा के हो अथवा महाविद्यालयीन शिक्षा के हों, उनका स्थान हमारे जीवन में सदैव सर्वोच्च रहना चाहिए। मंत्री परमार ने कहा कि जब हम अपने गुरुजनों का सम्मान करते हैं, तो राष्ट्र स्वतः ही ज्ञान के शिखर की ओर अग्रसर होता है। मंत्री परमार ने कहा कि वास्तविक विकास तभी संभव है जब समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति का जीवन स्तर सुधरे। ग्रामीण अंचल के विकास की मुख्यधारा से पिछड़े हुए लोगों का हाथ पकड़कर उन्हें आगे बढ़ाना ही हमारा पुनीत कर्तव्य है। सशक्त ग्रामीण भारत ही 'विकसित भारत' की नींव है।
मंत्री परमार ने कहा कि मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में चंद्रशेखर आजाद और भगत सिंह जैसे महान क्रांतिकारियों के बलिदान को स्मरण करते हुए, राष्ट्र निर्माण में प्रत्येक नागरिक की सहभागिता पर बल दिया। आइए, हम सब मिलकर समन्वय के भाव से भारत को विश्व का सर्वश्रेष्ठ राष्ट्र बनाने का दृढ़ संकल्प लें और अपनी प्रतिबद्ध सहभागिता से विकसित भारत@2047 की संकल्पना सिद्धि में सहभागिता सुनिश्चित करें।
कार्यक्रम में संघ लोक सेवा आयोग सिविल सेवा परीक्षा-2025 में चयनित अभ्यर्थियों ने अपनी सफलता के विभिन्न पहलुओं और प्रयासों से अवगत करवाया। साथ ही सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों से संवाद कर, उनकी जिज्ञासाओं पर अपने विचार भी साझा किए।
संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा में, हर वर्ष प्रदेश के अभ्यर्थियों के चयन की संख्या निरंतर बढ़ रही है। सिविल सेवा परीक्षा-2025 में, प्रदेश के 61 अभ्यर्थियों का चयन हुआ है, इनमें से दो अभ्यर्थियों ने देश भर में टॉप 10 में जगह बनाई है।
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भोपाल
वार्षिक स्नेह सम्मेलन, हर संस्थान में विद्यार्थियों के वर्ष भर की गतिविधियों एवं उपलब्धियों के सार्वजनिक प्रकटीकरण का सशक्त मंच है और महाविद्यालय की प्रतिष्ठा के प्रदर्शन का भी यह सुअवसर है। प्रदेश के समस्त महाविद्यालय बेहतर हों, शैक्षणिक एवं अकादमिक गुणवत्ता में उत्तरोत्तर वृद्धि हो, इसके लिए राज्य सरकार प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। कक्षाओं, प्रयोगशालाओं एवं पुस्तकालयों के सुदृढ़ीकरण के लिए संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित कर रहे हैं और महाविद्यालयों में आवश्यक शैक्षणिक पदों की पूर्ति प्रक्रिया प्रचलन में है। यह बात उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने, सोमवार को भोपाल स्थित सरोजिनी नायडू शासकीय कन्या स्नातकोत्तर स्वशासी (नूतन) महाविद्यालय में, महाविद्यालय के 'वार्षिकोत्सव : स्वयं प्रभा 2026' के शुभारम्भ अवसर पर कही। मंत्री परमार ने बेटियों को विविध महाविद्यालयीन गतिविधियों में प्रतिभागिता करने के लिए बधाई एवं उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं भी दीं।
उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने कहा कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास एवं उनके हितों से जुड़े समस्त विषयों पर विस्तृत कार्य हो रहा है। परमार ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नेतृत्व में, संस्थानों की स्वायत्तता को लेकर भी लगातार कार्य कर रहे हैं ताकि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने की दिशा में प्रदेश, देश भर में अग्रणी भूमिका में स्थापित हो सके। परमार ने कहा कि सार्थक ऐप के माध्यम से, प्राध्यापकों की संस्थान में अधिकतम उपस्थिति सुनिश्चित की जा रही है। इस अनुक्रम में विद्यार्थियों की संस्थान परिसर में अधिकतम उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए अगले सत्र से, सार्थक ऐप के माध्यम से उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी और विद्यार्थियों को अधिकतम उपस्थिति पर क्रेडिट भी दिया जाएगा। मंत्री परमार ने कहा कि संस्थान पर परिवेश पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण हो, यही हमारा मूल ध्येय है। मंत्री परमार ने कहा कि मूल्यांकन की पारदर्शिता बढ़ाने के लिए डिजिटल मूल्यांकन की कार्ययोजना पर कार्य हो रहा है।
मंत्री परमार ने कहा कि कृतज्ञता ही मानवता का वास्तविक आभूषण है। हम चाहे सफलता के किसी भी शिखर पर पहुँच जाएँ, अपनी माटी का ऋण और अपनों के साथ को कभी नहीं भूलना चाहिए। यही कृतज्ञता का भाव 'लोक-कल्याण' की नींव रखता है। मंत्री परमार ने कहा कि शिक्षा, विद्यार्थी के सर्वांगीण विकास का मुख्य माध्यम है और राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। मंत्री परमार ने वर्तमान परिदृश्य में, शिक्षक-विद्यार्थी परंपरा के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अपने पूर्वजों के परंपरागत ज्ञान के आधार पर, भारत स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 तक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा, शिक्षा, खाद्यान्न सहित हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर होकर, अन्य देशों की पूर्ति में भी सामर्थ्यवान बनेगा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने यह महत्त्वपूर्ण अवसर प्रदान किया है।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सुरेन्द्र बिहारी गोस्वामी ने स्वागत उद्बोधन देते हुए अतिथियों का अभिनंदन किया। प्रो. गोस्वामी ने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उनकी प्रतिभा को निखारने का सशक्त मंच प्रदान करते हैं। वार्षिकोत्सव "स्वयंप्रभा-2026" के प्रथम दिवस को "पारंपरिक दिवस" के रूप में मनाया गया, जिसमें छात्राओं ने भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को पारंपरिक वेशभूषा के माध्यम से प्रस्तुत किया। "अतुल्य भारत" थीम पर आधारित प्रस्तुति में 21 छात्राओं ने भाग लेकर देश की विविधता और सांस्कृतिक वैभव का आकर्षक प्रदर्शन किया। इस अवसर पर एनसीसी की 28 छात्राओं द्वारा "ऑपरेशन सिंदूर" पर आधारित नृत्य नाटिका ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। साथ ही, प्रदेश की जनजातीय संस्कृति पर आधारित कर्मा नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति ने वातावरण को जीवंत बना दिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. रंजना उपाध्याय एवं आभार प्रदर्शन छात्रसंघ प्रभारी डॉ. नीना श्रीवास्तव द्वारा किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राध्यापकगण एवं छात्राएं उपस्थित थीं।
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भोपाल
उच्च शिक्षा, तकनीकी एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने कहा कि भारत देश कभी गरीब नहीं था, बल्कि एक समृद्ध देश था। भारत को सोने की चिड़िया के नाम से जाना जाता था। भारत का ज्ञान सर्वश्रेष्ठ था और यहां का किसान आत्मविश्वासी और सामर्थ्यवान था। भारत का समाज, शिक्षित समाज था। भारत की संस्कृति और परंपराएं मजबूत थी। वैज्ञानिक भारतीय समाज की विशेषता थी। भारत की इसी समृद्धि के कारण ही विदेशी लुटेरे, मुगल और अंग्रेज भारत आए तथा समृद्ध भारत को हर स्तर पर लूटने का प्रयास किया। संस्कृति, परंपराओं,वेदों , शिक्षा केंद्रों, खेल परिसरों आदि को नष्ट करने के कार्य के साथ भारतीय समाज के अशिक्षित होने, रूढ़िवादी होने, अंधविश्वासी होने का दुष्प्रचार भी किया। अब समय आ गया है जब हम भारत के महानतम ज्ञान एवं भारतीय समाज के बारे में भ्रांतियां को दूर करने के सशक्त उपाय करते हुए देश की स्वतंत्रता की 100वी वर्षगांठ वर्ष-2047 तक भारत को, विकसित भारत के महानतम लक्ष्य के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा के वैशिष्ट्य को पूरी क्षमता से मनाए।
मंत्री परमार ने कहा भारतीय समाज की अवधारणा को समझने और पुनः स्मरण करने के लिए राष्ट्रीय विज्ञान दिवस एक उपयुक्त अवसर है कि जब हम वैज्ञानिक शोध करें और यदि हमें सामाजिक मान्यताओं में रूढ़िवाद, अंध विश्वास दिखे, तो हमें छोड़ना पड़ेगा। हम युगानुकल परिवर्तन के पक्षधर हैं। मंत्री परमार नेसोमवार को महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय में आयोजित 2 दिवसीय राष्ट्रीय विज्ञान दिवस कार्यक्रम 2026 का शुभारंभ कर संबोधित कर रहे थे। इसके पहले मंत्री परमार ने एविएशन विंग का भ्रमण कर गतिविधियों की जानकारी प्राप्त की। मंत्री परमार ने उड़ान अकादमी के अधिकारियों से विचार विमर्श कर कार्यक्रम के प्रगति की जानकारी भी ली।
कार्यक्रम में महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. आलोक चौबे, मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष एवं केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, भारत सरकार, नई दिल्ली के पूर्व अध्यक्ष प्रो. एस. पी. गौतम एवं अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा के कुलगुरु प्रो. राजेंद्र कुमार कुडरिया, अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा डॉ आर पी सिंह, पूर्व कुलगुरु प्रो भरत मिश्रा, पूर्व कुलगुरु प्रो कपिल देव मिश्रा सहित शिक्षकगण, शोधार्थी, विद्यार्थी एवं विभिन्न संस्थानों से आए प्रतिभागी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
]]>मंत्री परमार ने कहा कि समाज में खुशहाली और संतोष की भावना तभी संभव है, जब प्रत्येक व्यक्ति अपने आसपास के लोगों की मदद और सहयोग के लिए आगे आए। श्री परमार ने प्रशिक्षुओं से आह्वान किया कि वे प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान और अनुभव को समाज के बीच ले जाकर जनहित के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाएं। इस अवसर पर विधायक चित्रकूट सुरेंद्र सिंह गहरवार, रीवा संभाग के कमिश्नर बी.एस. जामोद, कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस, पुलिस अधीक्षक हंसराज सिंह, सीईओ जिला पंचायत शैलेंद्र सिंह, कुलगुरू महात्मा गांधी चित्रकूट विश्वविद्यालय आलोक चौबे, प्रशिक्षक और विभिन्न जिलों से आए प्रतिभागी उपस्थित थे।
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सरदार पटेल की दृढ़ इच्छाशक्ति ने भारत को एकसूत्र में बांधा : मंत्री परमार
मंत्री परमार ने राष्ट्रीय एकता दिवस पर रन फॉर यूनिटी को झंडी दिखाकर किया रवाना
राष्ट्रीय एकता, अखंडता एवं सुरक्षा के संकल्प की शपथ दिलाई
भोपाल
उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने कहा है कि भारत में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आज हर निर्णय ऐसे हो रहे हैं जैसे सरदार वल्लभ भाई पटेल ही फिर से भारत का नेतृत्व करने के लिए खड़े हों। प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत ने स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 तक विश्व का सबसे समृद्ध एवं विकसित देश बनने का संकल्प लिया है। भारत 'वसुधैव कुटुंबकम्' के अपने दृष्टिकोण के साथ विश्वमंच पर पुनः आगे बढ़ रहा है। मंत्री परमार ने कहा कि भारत पुनः विश्वगुरु बनेगा और हर विधा-हर क्षेत्र में विश्वभर में सिरमौर देश बनेगा। स्वाभिमान के साथ देश को वैश्विक मंच पर सिरमौर बनाने की संकल्पना में सहभागिता करने की आवश्यकता है।
मंत्री परमार ने शुक्रवार को 'लौह पुरुष' सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती 'राष्ट्रीय एकता दिवस' पर शाजापुर जिले के शुजालपुर स्थित माँ शारदा सांदीपनी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में 'रन फॉर यूनिटी' (एकता दौड़) को झंडी दिखाकर रवाना किया और प्रेरक संबोधन दिया।
मंत्री परमार ने राष्ट्रीय एकता-अखंडता एवं सुरक्षा के संकल्प की शपथ दिलाई। इस अवसर पर उन्होंने विद्यालय परिसर में पौध-रोपण भी किया।
उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने कार्यक्रम में सहभागी बनने को गौरवपूर्ण बताते हुए प्रदेशवासियों को 'राष्ट्रीय एकता दिवस' की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य सरदार पटेल के राष्ट्र निर्माण में दिए गए योगदान का स्मरण करना और 'एक भारत-श्रेष्ठ भारत' के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाना है। मंत्री परमार ने सभी को सरदार वल्लभ भाई पटेल की 150वीं जयंती की शुभकामनाएं देते हुए उनके पुरुषार्थ पर प्रकाश डाला। मंत्री परमार ने बताया कि स्वतंत्रता के उपरांत सभी रियासतों के एकीकरण में सरदार वल्लभ भाई पटेल ने दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय दिया और सभी रियासतों का भारत में विलीनीकरण कर देश को एक सूत्र में पिरोया।
कार्यक्रम में अशोक नायक, विजय बैस, शुजालपुर महाविद्यालय जनभागीदारी समिति अध्यक्ष आलोक खन्ना सहित नागरिक और अधिकारी उपस्थित थे।
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