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उमरिया
उमरिया जिले के बिलासपुर तहसील अंतर्गत ग्राम झांपी से जमुना कोल पिता पंजू कोल उम्र लगभग 19 वर्ष 2मार्च से लापता है। जिसकी कोई भी सुराग नहीं मिल रही है। वही लड़के के पिता ने जानकारी देते ही बताएं कि 2 मार्च की रात लगभग 8:00 बजे ग्राम बड़खेरा से दो लड़के बाइक से आए थे। और उसे बिरसिंहपुर से अखड़ार की ओर रास्ते से लेकर गए हैं। उसी दिन से मेरे लड़के का कुछ भी पता नहीं चल रहा है। और बताया कि मेरे द्वारा पुलिस चौकी बिलासपुर में भी जानकारी दी गई है।लेकिन अभी तक कुछ भी पता नहीं चल रहा है। लड़के के न मिलने से परिजनों का रो-रो करके बुरा हाल है।तीन दिनों से लड़का लापता है।
]]>छत्तीसगढ़ में एक महिला अपने तीन बच्चों के साथ रहस्यमयी तरीके से लापता हो गई है. महिला कबीरधाम जिले के पांडा तराई क्षेत्र से करीब सात दिन पहले अपने मायके बिलासपुर के अशोकनगर जाने के लिए निकली थी. परिजनों के अनुसार, वह घर से यह कहकर निकली थी कि बच्चों के साथ अस्पताल में इलाज कराने के लिए बिलासपुर जा रही है, लेकिन वहां पहुंचने ही नहीं। घटना के बाद से परिजन परेशान हैं, महिला और बच्चों की तलाश की जा रही है.
पांडातराई थाना क्षेत्र अंतर्गत वार्ड क्रमांक 15 निवासी बिसेन कार्निक पिता राजेन्द्र कार्निक (34 वर्ष) ने पत्नी पुष्पनंदनी कार्निक (26 वर्ष) के तीन बच्चों सहित लापता होने की रिपोर्ट थाने में दर्ज कराई है. बिसेन कार्तिक ने पुलिस को सिविल लाइन पुलिस को बताया कि, 2 फरवरी को दोपहर लगभग 12 बजे उसकी पत्नी तबीयत खराब होने की बात कहकर इलाज कराने मायके बिलासपुर जाने के लिए तीन बच्चों के साथ शारदा बस से रवाना हुई थी. शाम करीब 6 बजे संपर्क करने पर पत्नी के दोनों मोबाइल नंबर बंद मिले. इसके बाद ससुराल पक्ष से संपर्क करने पर जानकारी मिली कि, पुष्पनन्दनी वहां भी नहीं पहुंची है. परिजनों द्वारा देर रात तक रिश्तेदारों, बस स्टैंड एवं रेलवे स्टेशन में तलाश की गई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला. अगले दिन बस चालक से पूछताछ करने पर उसने महाराणा प्रताप चौक में महिला और बच्चों को उतारने की जानकारी दी.
लापता पति का पुलिस पर आरोप
लापता महिला के पति की शिकायत पर पुलिस थाना में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है. वहीं पति का आरोप है कि पुलिस उसकी पत्नी और बच्चों को ढूंढने में दिलचस्पी नहीं दिखा रही. उसने पुलिस और प्रशासन से मदद की गुहार लगाई.
]]>इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक मामले की सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश में गुमशुदा लोगों की बढ़ती संख्या पर गंभीर चिंता जताई है। अदालत के समक्ष प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, पिछले करीब दो वर्षों में प्रदेश में 1 लाख 8 हजार 300 लोगों के लापता होने की गुमशुदगी रिपोर्ट दर्ज की गई है, लेकिन इनमें से केवल 9,700 लोगों का ही अब तक पता लगाया जा सका है। अदालत ने इस स्थिति को बेहद गंभीर और चिंताजनक बताया है।
खंडपीठ ने इस पूरे मामले को ‘प्रदेश में गुमशुदा व्यक्तियों के संबंध में’ शीर्षक से जनहित याचिका के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई गुरुवार को निर्धारित की गई है। यह आदेश न्यायमूर्ति अब्दुल मोईन और न्यायमूर्ति बबीता रानी की पीठ ने विक्रमा प्रसाद द्वारा दायर याचिका पर पारित किया।
क्या है मामला
याची, जो लखनऊ के चिनहट क्षेत्र का निवासी है, ने अदालत को बताया कि उसका बेटा जुलाई 2024 में लापता हो गया था। इस संबंध में उसने चिनहट थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई, लेकिन पुलिस की ओर से कोई प्रभावी या संतोषजनक कार्रवाई नहीं की गई।
इस पर न्यायालय ने न केवल याची की शिकायत पर उचित कार्रवाई के निर्देश दिए, बल्कि प्रदेश भर में लापता व्यक्तियों से जुड़ी विस्तृत जानकारी प्रस्तुत करने का आदेश अपर मुख्य सचिव (गृह) को भी दिया।
अधिकारियों का रवैया लापरवाही भरा
अदालत के आदेश के अनुपालन में दाखिल हलफनामे में अपर मुख्य सचिव की ओर से बताया गया कि 1 जनवरी 2024 से 18 जनवरी 2026 के बीच पुलिस के पास दर्ज मामलों के अनुसार कुल 1,08,300 लोग लापता हुए हैं, जिनमें से सिर्फ 9,700 लोगों का ही अब तक पता लगाया जा सका है। इन आंकड़ों पर टिप्पणी करते हुए न्यायालय ने कहा कि इससे साफ जाहिर होता है कि गुमशुदा व्यक्तियों के मामलों में संबंधित अधिकारियों का रवैया लापरवाही भरा रहा है।
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