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इस वक्त पूरी दुनिया ट्रंप की डील और अमेरिका-ईरान की बातचीत पर चर्चा कर रही है. लेकिन ग्लोबल पॉलिटिक्स की असली हलचल भारत में मची हुई है. ट्रंप की डील अब पूरी तरह कबाड़ होती दिख रही है. ईरान कुछ और कह रहा है और ट्रंप के बयान अलग आ रहे हैं. दुनिया यह तमाशा देख रही है कि अमेरिका में चल क्या रहा है. इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बहुत बड़ा ग्लोबल मैसेज दे दिया है. अमेरिका से ईरान हैंडल नहीं हो रहा है. लेकिन नरेंद्र मोदी ने चीन-अमेरिका और ईरान-इजराइल जैसे कट्टर दुश्मनों को एक जगह ला दिया है. भारत अब इन सभी देशों के साथ बड़ी डील कर रहा है. नरेंद्र मोदी वह काम कर रहे हैं जो दुनिया में कोई सोच भी नहीं सकता. ग्लोबल पॉलिटिक्स का पूरा नैरेटिव अब भारत ने चेंज कर दिया है. मोदी ने भारत की डिप्लोमेसी को सुपरफास्ट ट्रैक पर दौड़ा दिया है. दुनिया अब अमेरिका नहीं बल्कि भारत की तरफ देख रही है।
ब्रिक्स की मीटिंग में पीएम मोदी ने ट्रंप को कैसे दे दिया सबसे बड़ा झटका?
कुछ महीने पहले तक डॉनल्ड ट्रंप ब्रिक्स को लेकर बड़ी धमकियां देते थे. ट्रंप ब्रिक्स का नाम लेकर दुनिया को धमकाते थे कि ऐसा मत करो. लेकिन आज ट्रंप की ऐसी हालत है कि कोई उनका लोड नहीं ले रहा है. नरेंद्र मोदी तो ट्रंप का बिल्कुल भी लोड नहीं लेते. पीएम मोदी ने पहले ट्रंप को मुंह पर सीधा सुना दिया था. अब ब्रिक्स देशों की मीटिंग से मोदी ने तगड़ा मैसेज दे दिया है।
भारत में ब्रिक्स देशों के एनएसए की अहम मीटिंग हो रही है. पीएम मोदी खुद इस ग्लोबल मीटिंग में पहुंच गए. वहां ब्रिक्स नेताओं की ग्रुप फोटो हुई और वन-टू-वन मुलाकात भी हुई. पीएम मोदी ने जो कड़क मैसेज दिया है, उससे ट्रंप के लोगों में हड़कंप मच गया है. पीएम मोदी ने कहा कि बदलते ग्लोबल हालात में ब्रिक्स की भूमिका बहुत अहम है. उन्होंने आतंकवाद और साइबर सुरक्षा पर बहुत ज्यादा जोर दिया।
पीएम मोदी ने साफ कर दिया कि भारत ग्लोबल साउथ का पूरा समर्थन करेगा. भारत एक सुरक्षित और समावेशी दुनिया बनाने के लिए अपनी ताकत लगाएगा. पीएम मोदी ने एक ही मीटिंग से दो बड़े काम निपटा दिए हैं. एक तरफ ब्रिक्स को अहम बताकर अमेरिका को पीछे हटने का मैसेज दे दिया. दूसरी तरफ ब्रिक्स के मंच से आतंकवाद का मुद्दा उठाकर सबको अलर्ट कर दिया।
ट्रंप को अमेरिका में वोट वाला झटका कैसे लगा और अब वह क्या बहाने बना रहे हैं?
अमेरिका में मध्यावधि चुनाव बहुत नजदीक हैं और डॉनल्ड ट्रंप लगातार दावे कर रहे हैं. लेकिन ट्रंप को हाल ही में एक बहुत बड़ा वोट वाला झटका लगा है. अमेरिका के भीतर ही ट्रंप का वोट बेस अब खिसकता हुआ नजर आ रहा है. ट्रंप पहले जो वादे कर रहे थे, अब वहां की जनता उन पर सवाल उठा रही है. चुनाव में अपनी स्थिति कमजोर होते देख ट्रंप अब रोज नए बहाने बना रहे हैं।
ट्रंप खुद कह चुके हैं कि अगर दुनिया में कुछ हुआ तो वह भारत के साथ खड़े होंगे. ट्रंप को यह अच्छे से पता है कि भारतीय मूल के वोटर अमेरिका में क्या ताकत रखते हैं. इसलिए ट्रंप अब भारत और पीएम मोदी की तारीफ करके अपना वोट बैंक बचाने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन उनकी खुद की विदेश नीति अब पूरी तरह से फेल हो चुकी है।
ईरान को लेकर ट्रंप का स्टैंड अमेरिका में ही एक बड़ा मजाक बन गया है. ट्रंप को समझ नहीं आ रहा है कि इस बड़े ग्लोबल शिफ्ट को कैसे हैंडल किया जाए. अब ग्लोबल पॉलिटिक्स ऐसे नहीं चलेगी कि सब कुछ सिर्फ ट्रंप की मर्जी से होगा. अमेरिका जो तय कर लेगा अब दुनिया में वही नियम नहीं चलने वाला है।
चीन के विदेश मंत्री के साथ मुलाकात में पीएम मोदी ने कौन सा बड़ा खेल कर दिया?
ट्रंप के लिए सबसे बड़ा मैसेज यह है कि मोदी ने चीन के विदेश मंत्री से मुलाकात की. ब्रिक्स की बैठक में वांग यी के साथ हुई बातचीत की डिटेल से अमेरिका परेशान हो जाएगा. चीन के विदेश मंत्री ने बताया कि मोदी ने शी जिनपिंग को शुभकामनाएं भेजने को कहा है. पीएम मोदी ने कहा कि मौजूदा हालात में दोनों देशों को अपनी पारंपरिक दोस्ती आगे बढ़ानी चाहिए. दोनों देश हाई लेवल बातचीत जारी रखें और ग्लोबल साउथ के हितों को पूरी तरह सुरक्षित करें. चीन के साथ पीएम मोदी की इस बात से अमेरिका को जरूर बड़ी आग लग जाएगी।
ट्रंप तो शुरू से ही ब्रिक्स और चीन के बिल्कुल खिलाफ रहे हैं. चीन ने भी साफ कर दिया है कि वह भारत के साथ मिलकर काम करना चाहता है. चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा, ‘दोनों देश एकजुटता बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.’ चीन अब ब्रिक्स की अध्यक्षता में भारत की जिम्मेदारियों का पूरा समर्थन करेगा. चीन अब भारत के साथ भरोसा बढ़ाने और संदेह दूर करने के लिए पूरी तरह तैयार है. चीन के बयान से साफ है कि वह भारत से टकराव नहीं बल्कि दोस्ती चाहता है।
ईरान और इजराइल जैसे कट्टर दुश्मनों को पीएम मोदी कैसे एक साथ हैंडल कर रहे हैं?
ब्रिक्स की अहम बैठक से अलग पीएम मोदी ने ईरान के टॉप अधिकारियों से भी मुलाकात की है. ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के डिप्टी सेक्रेटरी डॉ गदीर निजामीपुर पीएम मोदी से मिले. यह मीटिंग ऐसे वक्त में हो रही है जब अमेरिका ने ईरान के तेल पर भारी छूट दी है।
ग्लोबल मार्केट में ईरान का तेल आने से भारत को बड़ा आर्थिक फायदा हो सकता है. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने पीएम मोदी को ईरान आने का बड़ा न्योता दिया है. उन्होंने सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के विदाई कार्यक्रम का औपचारिक निमंत्रण भेजा है. यहां लोग कह रहे थे कि इजराइल से दोस्ती के चक्कर में भारत ने ईरान से रिश्ते बिगाड़ लिए. लेकिन मोदी ईरान के टॉप अधिकारियों से मिलकर नया ग्लोबल नैरेटिव सेट कर रहे हैं।
उधर भारत इजराइल से भी अपने रिश्तों को लगातार और ज्यादा मजबूत कर रहा है. सोमवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इजराइल के रक्षा मंत्रालय के डायरेक्टर जनरल से मिले. दोनों देशों के बीच डिफेंस सहयोग बढ़ाने और ज्वाइंट प्रोडक्शन पर अहम बातचीत हुई है. एक तरफ ईरान और दूसरी तरफ इजराइल के साथ भारत का यह बैलेंस अमेरिका को हैरान कर रहा है।
मोदी सरकार ने कौन सी विदेशी फंडिंग रोक दी जिससे इकोसिस्टम की कमर टूट गई?
नरेंद्र मोदी एक तरफ भारत को ग्लोबल पॉलिटिक्स के सेंटर में पूरी तरह ला रहे हैं. दूसरी तरफ मोदी उस इकोसिस्टम पर भी कड़ी स्ट्राइक कर रहे हैं जो सरकार गिराने का काम करता है. यह विदेशी इकोसिस्टम पीएम मोदी को कुर्सी से हटाने के लिए कुछ भी करने को तैयार रहता है. लेकिन मोदी सरकार ने एक ऐसा बड़ा फैसला लिया है जिसने इस इकोसिस्टम की कमर तोड़ दी है. सरकार ने विदेशी फंडिंग वाले कई बड़े एनजीओ के लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द कर दिए हैं।
देश में अशांति फैलाने और सरकार के खिलाफ माहौल बनाने के लिए विदेशों से भारी फंडिंग आती थी. मोदी सरकार ने इस अवैध फंडिंग के पाइपलाइन को ही पूरी तरह ब्लॉक कर दिया है. विदेशी पैसे से चलने वाला सरकार गिराने का यह बड़ा ‘हथियार’ अब हमेशा के लिए निपट गया है. इसी वजह से इस पूरे लेफ्ट इकोसिस्टम में अब भारी हंगामा मचा हुआ है. बिना विदेशी पैसे के यह गैंग अब भारत में अपना झूठा एजेंडा नहीं चला पा रहा है. भारत के खिलाफ काम करने वाले सभी संगठनों की फंडिंग पर अब सरकार की सख्त नजर है।
एफएटीएफ के डर से पाकिस्तान के पसीने क्यों छूट रहे हैं और यूएई को क्या चाहिए?
डॉनल्ड ट्रंप ने ग्लोबल कूटनीति में अमेरिका का जो भरोसा था उसे पूरी तरह हिला दिया है. आज दुनिया भारत की तरफ एक भरोसेमंद और पावरफुल पार्टनर के रूप में देख रही है. पाकिस्तान से अपना मुल्क नहीं संभल रहा है और वह भारत पर अटैक करने की बातें करता है. पाकिस्तान बुरी तरह से अलबलाया हुआ है क्योंकि उसे भारत की ताकत का अंदाजा है. पाकिस्तान को डर है कि भारत कभी भी उस पर एक बड़ा मिलिट्री स्ट्राइक कर सकता है।
दूसरी तरफ एफएटीएफ की नंगी तलवार भी पाकिस्तान की गर्दन पर लगातार लटकी हुई है. एफएटीएफ की ग्लोबल मीटिंग में पाकिस्तान के टेरर फंडिंग को लेकर बड़ा एक्शन लिया जा सकता है. पाकिस्तान अगर आतंकवाद को पालेगा तो एफएटीएफ उसे फिर से अपनी ब्लैक लिस्ट में डाल देगा. भारत एफएटीएफ में पाकिस्तान के सभी काले कारनामों के पक्के सबूत पेश करने की तैयारी कर चुका है.
इधर गल्फ के देश अब डिफेंस के लिए अमेरिका की जगह भारत की तरफ देख रहे हैं. यूएई भारत से सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने के लिए बहुत अहम बातचीत कर रहा है. यूएई को ब्रह्मोस के साथ-साथ भारत का फुली ऑटोमेटेड आकाशतीर सिस्टम भी तुरंत चाहिए. ब्रह्मोस मिसाइल ने ही ऑपरेशन सिंदूर में कमाल किया था और पाकिस्तान के एयरबेस फोड़ दिए थे।
भारत का डिफेंस प्रोडक्शन और एक्सपोर्ट किस तरह से दुनिया के रिकॉर्ड तोड़ रहा है?
भारत का डिफेंस सेक्टर अब ग्लोबल लेवल पर अपनी धाक जमा रहा है. भारत अब सिर्फ हथियार खरीद नहीं रहा है बल्कि दुनिया को अपने हथियार बेच भी रहा है. नरेंद्र मोदी लगातार ग्लोबल मंच पर भारत को एक पावरफुल मिलिट्री प्लेयर बना रहे हैं. भारत एक ऐसा देश बन गया है जिस पर अब पूरी दुनिया आंख बंद करके भरोसा कर सकती है. इसी भरोसे की वजह से इस साल कई बड़े देशों के नेता भारत आ चुके हैं. इस साल अभी तक पीएम मोदी 27 ग्लोबल लीडर्स को भारत बुलाकर मीटिंग कर चुके हैं. यूरोपियन यूनियन के अलावा फ्रांस और जर्मनी के बड़े नेता भी भारत का चक्कर लगा चुके हैं।
भारत का डिफेंस प्रोडक्शन आज के समय में बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है. साल 2013-14 में भारत का डिफेंस प्रोडक्शन सिर्फ 43746 करोड़ रुपये के करीब था. लेकिन साल 2025-26 में यह प्रोडक्शन बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट भी अब पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़कर आसमान छू रहा है. साल 2014 में भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट सिर्फ 686 करोड़ रुपये था. अब यह एक्सपोर्ट बड़ी छलांग लगाकर 38424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
]]>हालांकि, पीएम मोदी को मिले निमंत्रण के बारे में भारत की ओर से कोई पुष्टि नहीं हुई है।
28 फरवरी को हुई थी खामेनेई की मौत
तीन दशकों तक ईरान पर शासन करने वाले खामेनेई की मौत 28 फरवरी को हुई थी, जो तेहरान पर अमेरिका और इजरायल के बड़े हवाई हमलों का पहला दिन था।
राजनयिक सूत्रों ने बताया कि राष्ट्रपति पेजेशकियान ने भारतीय प्रधानमंत्री को अंतिम संस्कार समारोह के लिए आमंत्रित किया है। अंतिम संस्कार तेहरान और कोम में 5,6 और 7 जुलाई को आयोजित किया जाएगा। अंतिम समारोह 9 जुलाई को मशहद शहर में होगा।
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हालांकि, पीएम मोदी को मिले निमंत्रण के बारे में भारत की ओर से कोई पुष्टि नहीं हुई है।
28 फरवरी को हुई थी खामेनेई की मौत
तीन दशकों तक ईरान पर शासन करने वाले खामेनेई की मौत 28 फरवरी को हुई थी, जो तेहरान पर अमेरिका और इजरायल के बड़े हवाई हमलों का पहला दिन था।
राजनयिक सूत्रों ने बताया कि राष्ट्रपति पेजेशकियान ने भारतीय प्रधानमंत्री को अंतिम संस्कार समारोह के लिए आमंत्रित किया है। अंतिम संस्कार तेहरान और कोम में 5,6 और 7 जुलाई को आयोजित किया जाएगा। अंतिम समारोह 9 जुलाई को मशहद शहर में होगा।
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प्रधानमंत्री ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करके बताया कि कतर के रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी में हुए हादसे को लेकर कतर के अमीर ने जान गंवाने वाले भारतीय नागरिकों के लिए संवेदना व्यक्त की है।
पीएम मोदी ने क्या कहा?
पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा- 'मैं कतर के अमीर का शुक्रिया अदा करता हूं कि उन्होंने फोन करके कतर के रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी में हुए दुखद हादसे में जान गंवाने वाले भारतीय नागरिकों के लिए संवेदना जताई। हम दोनों उन परिवारों के दुख में शामिल हैं जिन्होंने अपने अपनों को खो दिया है और घायलों के जल्द ठीक होने की प्रार्थना करते हैं। भारत और कतर अपने नागरिकों की सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और एक-दूसरे के साथ एकजुटता से खड़े हैं।'
12 भारतीय नागरिकों की मौत
कतर के दोहा स्थित भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पोस्ट में पुष्टि करते हुए बताया, ''रविवार रात हुए रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी हादसे में 12 भारतीय नागरिकों की दुर्भाग्यपूर्ण मौत हो गई है। हम इस दुख की घड़ी में मृतकों के परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं और दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं।''
अधिकारियों ने बताया है कि हादसे में घायल हुए सभी लोग अभी स्थिर हालत में हैं और उन्हें सही इलाज दिया जा रहा है। दूतावास कतर के अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है और इस हादसे से प्रभावित भारतीय नागरिकों और उनके परिवारों को हर संभव मदद पहुंचाने का काम कर रहा है। इसमें मृतकों के पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द भारत भेजने की व्यवस्था करना भी शामिल है।
दुनिया के सबसे अहम एनर्जी हब में से एक है रास लाफान
रविवार रात, दुनिया के सबसे अहम एनर्जी हब में से एक, रास लाफान इंडस्ट्रियल एरिया में धमाका हुआ। यह धमाका तब हुआ, जब फैसिलिटी में कामकाज फिर से शुरू करने की कोशिशें चल रही थीं। इस घटना के बाद बरजान गैस सप्लाई फैसिलिटी में जबरदस्त आग लग गई, जिसके बाद इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं।
सरकारी कंपनी कतर एनर्जी ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि एक्सपोर्ट टर्मिनल के कुछ हिस्सों को फिर से चालू करने का काम चल रहा था, तभी धमाका हुआ। कंपनी के मुताबिक, रविवार रात इसी काम के दौरान बरजान गैस सप्लाई फैसिलिटी में धमाका हुआ और आग लग गई।
बरजान फैसिलिटी कतर के गैस आधारभूत संरचना का एक अहम हिस्सा है, जिसकी उत्पादन क्षमता लगभग 1.4 बिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक फीट प्रतिदिन है। इसका उत्पादन मुख्य रूप से घरेलू बिजली उत्पादन और डिसेलिनेशन प्लांट (खारे पानी को मीठा बनाने वाले प्लांट) को चलाने के लिए किया जाता है, जो इस सूखे खाड़ी देश में पानी की आपूर्ति करते हैं।
]]>प्रधानमंत्री ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करके बताया कि कतर के रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी में हुए हादसे को लेकर कतर के अमीर ने जान गंवाने वाले भारतीय नागरिकों के लिए संवेदना व्यक्त की है।
पीएम मोदी ने क्या कहा?
पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा- 'मैं कतर के अमीर का शुक्रिया अदा करता हूं कि उन्होंने फोन करके कतर के रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी में हुए दुखद हादसे में जान गंवाने वाले भारतीय नागरिकों के लिए संवेदना जताई। हम दोनों उन परिवारों के दुख में शामिल हैं जिन्होंने अपने अपनों को खो दिया है और घायलों के जल्द ठीक होने की प्रार्थना करते हैं। भारत और कतर अपने नागरिकों की सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और एक-दूसरे के साथ एकजुटता से खड़े हैं।'
12 भारतीय नागरिकों की मौत
कतर के दोहा स्थित भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पोस्ट में पुष्टि करते हुए बताया, ''रविवार रात हुए रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी हादसे में 12 भारतीय नागरिकों की दुर्भाग्यपूर्ण मौत हो गई है। हम इस दुख की घड़ी में मृतकों के परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं और दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं।''
अधिकारियों ने बताया है कि हादसे में घायल हुए सभी लोग अभी स्थिर हालत में हैं और उन्हें सही इलाज दिया जा रहा है। दूतावास कतर के अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है और इस हादसे से प्रभावित भारतीय नागरिकों और उनके परिवारों को हर संभव मदद पहुंचाने का काम कर रहा है। इसमें मृतकों के पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द भारत भेजने की व्यवस्था करना भी शामिल है।
दुनिया के सबसे अहम एनर्जी हब में से एक है रास लाफान
रविवार रात, दुनिया के सबसे अहम एनर्जी हब में से एक, रास लाफान इंडस्ट्रियल एरिया में धमाका हुआ। यह धमाका तब हुआ, जब फैसिलिटी में कामकाज फिर से शुरू करने की कोशिशें चल रही थीं। इस घटना के बाद बरजान गैस सप्लाई फैसिलिटी में जबरदस्त आग लग गई, जिसके बाद इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं।
सरकारी कंपनी कतर एनर्जी ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि एक्सपोर्ट टर्मिनल के कुछ हिस्सों को फिर से चालू करने का काम चल रहा था, तभी धमाका हुआ। कंपनी के मुताबिक, रविवार रात इसी काम के दौरान बरजान गैस सप्लाई फैसिलिटी में धमाका हुआ और आग लग गई।
बरजान फैसिलिटी कतर के गैस आधारभूत संरचना का एक अहम हिस्सा है, जिसकी उत्पादन क्षमता लगभग 1.4 बिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक फीट प्रतिदिन है। इसका उत्पादन मुख्य रूप से घरेलू बिजली उत्पादन और डिसेलिनेशन प्लांट (खारे पानी को मीठा बनाने वाले प्लांट) को चलाने के लिए किया जाता है, जो इस सूखे खाड़ी देश में पानी की आपूर्ति करते हैं।
]]>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक राजनीति पर बात करते हुए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर प्रशंसा की. उन्होंने शी जिनपिंग को ऐसा नेता बताया जो पूरी तरह अपने काम पर केंद्रित रहते हैं और हर मुद्दे को गंभीरता से संभालते हैं. वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ट्रंप ने बेहद सख़्त, निर्णायक और मजबूत नेतृत्व क्षमता वाला नेता बताया. ट्रंप के मुताबिक, दोनों नेता अपने-अपने देशों में प्रभावशाली भूमिका निभा रहे हैं और वैश्विक स्तर पर भी उनकी छवि काफी मजबूत है, जिसकी वह व्यक्तिगत रूप से सराहना करते हैं।
इससे पहले भी फ्रांस में जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान PM मोदी से मुलाकात के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उनकी जमकर प्रशंसा की. लंच के दौरान ट्रंप ने कहा कि वह प्रधानमंत्री मोदी जितने शांत स्वभाव के नहीं हैं. उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी के विपरीत, जो शांत, संयमित और बेहद प्रभावशाली हैं, मैं ऐसा नहीं हूं।
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजा गया गाजा बोर्ड ऑफ पीस का हिस्सा बनने का आमंत्रण पत्र सोशल मीडिया पर साझा किया. उन्होंने लिखा "प्रधानमंत्री @narendramodi को बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने के लिए @POTUS का आमंत्रण साझा करते हुए गर्व महसूस हो रहा है, जो गाजा में स्थायी शांति लाएगा. बोर्ड स्थिरता और समृद्धि प्राप्त करने के लिए प्रभावी शासन का समर्थन करेगा!"
]]>आखिरकार पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच मुलाकात हो ही गई. पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच आखिरी मुलाकात फरवरी 2025 में अमेरिका में हुई थी. उस मुलाकात के 16 महीने बाद फ्रांस में G7 सम्मेलन के दौरान मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच संक्षिप्त मुलाकात हुई. इस मुलाकात में हैंडशेक भी हुआ, बातचीत भी हुई लेकिन Hug नहीं हुआ. यानी दोनों नेताओं के बीच पहले की तरह गर्मजोशी वाला हग नहीं दिखा. हैंडशेक और हग (गले लगना) के बीच पिछले 16 महीने के भारत और अमेरिका के बीच कई मुद्दों पर संबंधों में आई खटास शायद सामने थी।
जी-7 के आउटरीच सत्र में जाने से पहले ग्रुप फोटो के दौरान पीएम मोदी और ट्रंप के बीच में सिर्फ फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रो खड़े थे लेकिन ग्रुप फोटो के दौरान दोनों नेता दो मिनट से अधिक वक्त तक एक दूसरे के आसपास रहे. हालांकि, न तो दोनों के बीच आई कॉन्टैक्ट हुआ और न ही दोनों एक दूसरे के तरफ बढ़ते हुए दिखे जबकि इस दौरान दोनों नेताओं की बाकी कई नेताओं के साथ बातचीत हुई।
पीएम मोदी के मन में क्या चल रहा था
प्रधानमंत्री मोदी का रुख बहुत ही संतुलित दिखा और ट्रंप से मिलने की कोई बहुत उत्सुकता उन्होंने नहीं दिखाई. शायद पीएम के मन में हाल में अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत से लेकर ट्रेड टैरिफ, भारत पाकिस्तान मध्यस्थता के दावे और दूसरे वो तमाम विषय रहे होंगे, जिससे भारत और अमेरिका के संबंध पिछले 20 वर्षों में सबसे कमजोर दौर से गुजरे हैं.
पीएम मोदी ने इशारों में ट्रंप को मैसेज दे दिया।
कैसे दोनों की हुई मुलाकात
प्रधानमंत्री मोदी के G7 आउटरीच सत्र की शुरुआत से पहले के ग्रुप फोटो के दौरान दोनों नेताओं के बीच में कोई मुलाकात नहीं हुई. दोनों नेता जब आउटरीच सत्र में पहुंचे तो ट्रंप अपनी जगह ले चुके थे. दूसरी तरफ से अपनी सीट पर मोदी आ रहे थे. क्योंकि ट्रंप और मोदी का सत्र में बैठने का स्थान अगल बगल ही था, इसलिए पीएम मोदी की नजर ट्रंप पर पड़ी और दोनों के बीच हैंडशेक हुआ और संक्षिप्त बातचीत हुई. बातचीत कुछ ऐसी थी कि ट्रंप ने पीएम मोदी की बाजू थपथपाई…लेकिन दोनों की मुलाकात हैंडशेक और संक्षिप्त बातचीत तक ही रही।
मोदी ने पब्लिकली बर्थडे विश भी नहीं किया
अभी तीन दिन पहले ही डोनाल्ड ट्रंप ने 14 जून को अपना 80वा जन्मदिन मनाया था. इस दौरान दुनिया के कई देशों के नेताओं ने ट्रंप को शुभकामनाएं भेजी लेकिन पीएम मोदी की तरफ से कोई सार्वजनिक बधाई संदेश सामने नहीं आया. खासकर ऐसी पृष्ठभूमि में जब पीएम मोदी के 75 साल पूरे होने और भारत में निर्वाचित पीएम का रिकॉर्ड बनाने पर ट्रंप ने मोदी को शुभकामनाएं दी थी।
पीएम मोदी स्टार्मर से मिले गले, ट्रंप से सिर्फ हैंडशेक
जी-7 शिखर सम्मेलन में पहुंचते ही मैक्रों ने पीएम मोदी का ग्रैंड वेलकम किया. इसके बाद वो मीटिंग हॉल में पहुंचे, दुनिया भर के बड़े-बड़े नेताओं से खचाखच भरे हॉल में पीएम मोदी और ट्रंप की सीट अगल-बगल थी. जिस पर बैठने से पहले औपचारिक तौर पर पीएम मोदी और ट्रंप ने एक-दूसरे से हाथ मिलाया, दोनों के बीच थोड़ी-बहुत बातचीत हुई. हालांकि, ये बातचीत काफी फॉर्मल दिखाई दी. दोनों पहले की तरह एक-दूसरे से गले नहीं मिले।
इसके बाद जब जी7 फैमिली फोटो के लिए सभी नेता लॉन में गए तो ऐसा मालूम हुआ कि पीएम मोदी ने ट्रंप से दूरी बना ली है. फ्रंट लाइन में एक तरफ ट्रंप और दूसरी तरफ पीएम मोदी नजर आए और दोनों के बीच में मैक्रों खड़े हुए. इस फोटो सेशन के दौरान ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर पीएम मोदी से गले मिले, कई और नेता हाथ मिलाते, बात करते दिखे लेकिन ट्रंप से दूरी बनी रही।
मोदी के नो हग का मैसेज
हालांकि, पिछले 16 महीने में दोनों नेताओं की फोन पर कई बार बात हुई है लेकिन भारत और पीएम मोदी ने ट्रंप और अमेरिका से अपनी कूटनीति को संतुलित रखा है. ट्रंप और मोदी की मंगलवार की द्विपक्षीय बातचीत से पहले मोदी ने कूटनीति को हैंडेशक तक ही ही सीमित रखकर शायद ये बताने की कोशिश की हो कि हैंडशेक से Hug तक पहुंचने में अब ट्रंप और अमेरिका को भारत की बहुत सारी भावनाओं का ध्यान रखना होगा. तब तक हेंडेशेक से ही काम चलेगा।
पीएम मोदी ने उन्हीं की भाषा में समझाया कैसे निभाते हैं रिश्ते
कहते हैं कि किसी को कोई बात समझ न आए, तो उसे उसकी भाषा में समझाना चाहिए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिल्कुल वही किया. जिस रोनाल्ड रीगन को डोनाल्ड ट्रंप अपना आइकॉन मानते हैं, जिनका नारा Make America Great Again चुराकर वे सत्ता में आए हैं, उन्हीं की भाषा में पीएम मोदी ने समझाया कि जो दुनियाभर में जो आप कर रहे हैं, वो ठीक नहीं है. भारत का उदाहरण देकर बताया कि दूसरे देशों के साथ रिश्ते कैसे निभाते हैं।
मौका G7 समिट का था. पीएम मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत ही ‘भरोसे में कमी’ से की. उन्होंने कहा- आज दुनिया इंटरकनेक्टेड है. एक दूसरे पर डिपेंडेंट है. ऐसे में पार्टनरशिप का महत्व बढ़ जाता है. लेकिन ऐसी पार्टनरशिप तभी सफल होती है, जब उनके केंद्र में विश्वास हो. यह भरोसा हो कि सप्लाई चेन का इस्तेमाल हथियार के रूप में नहीं होगा. इसके बाद पीएम मोदी ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा, रोनाल्ड रीगन कहते थे कि Trust but Verify. यह आज के समय में भी उतना ही प्रासंगिक है. भावी पीढ़ियों के प्रति हमारा दायित्व है कि हम नए युग के अनुरूप ट्रस्टेड रूल बेस्ड ऑर्डर का निर्माण करें. यह उस ट्रंप को सीधा जवाब था, जो किसी रूल बेस्ड ऑर्डर को नहीं मानते. सप्लाई चेन को हथियार बना रहे हैं. कभी टैरिफ लगा दिया तो कभी धमकी दी, तेल लोगो को ये कर देंगे, वो कर देंगे।
भारत का उदाहरण देकर समझाया
पीएम मोदी ने भारत का उदाहरण देकर दोस्ती के मायने समझाए. मोदी ने कहा, भारत ने हमेशा विश्व को एक परिवार के रूप में देखा है. हमारे सभी प्रयास सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय यानि, welfare and happiness for all के मूल सिद्धांत पर आधारित रहे हैं. जब संकट आया तो भारत ने दुनिया की मदद करना अपना दायित्व समझा. कोविड महामारी के दौरान भारत ने डेढ़ सौ से अधिक देशों को दवाइयां और vaccines भेजी. श्रीलंका में cyclone हो, अफगानिस्तान में भूकंप हो, मोजाम्बिक में floods हों, या क्यूबा और जमैका में hurricane, भारत ने सदैव Humanity First के सिद्धांत पर कार्य किया. हम पार्टनर को ऐसे ही देखते हैं. जंग ऐसे भरोसे को खत्म करती है. आज जरूरत है भरोसे को बनाए रखने की. यह सीधा ट्रंप को मैसेज था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते का खुलकर स्वागत किया है. उन्होंने सोशल मीडिया पर ट्वीट करके कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को खत्म करने के लिए दोनों देशों के बीच जो सहमति बनी है, वह बेहद सराहनीय कदम है. पीएम मोदी के मुताबिक, इस युद्ध की वजह से पूरी दुनिया में गंभीर आर्थिक संकट पैदा हो गया था, जिसके चलते कई देशों को जान-माल का भारी नुकसान उठाना पड़ा।
पीएम मोदी ने उम्मीद जताई कि इस शांति समझौते के लागू होने से पूरे क्षेत्र में स्थिरता वापस आएगी. इसके साथ ही समुद्र में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही और व्यापार का रास्ता भी पूरी तरह साफ हो सकेगा. उन्होंने कहा कि भारत को पूरी उम्मीद है कि बाकी बचे हुए मुद्दों पर भी दोनों देश आगे बातचीत जारी रखेंगे, जिससे आने वाले समय में एक स्थायी और मजबूत अंतिम समझौता हो सके।
बता दें कि दोनों देशों के बीच 107 दिनों तक चली भीषण जंग के बाद आखिरकार इस शांति समझौते पर अंतिम सहमति बन सकी है. ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने सरकारी टीवी पर फोन के जरिए पुष्टि की है कि अमेरिका के साथ यह डील अब पूरी तरह अंतिम रूप ले चुकी है. आगामी शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में इस पर दोनों देशों के बीच आधिकारिक हस्ताक्षर होने की उम्मीद है।
ईरानी सरकारी मीडिया ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए इस समझौते के 14 बिंदुओं वाले एक समझौता ज्ञापन (MOU) के मसौदे का ब्योरा प्रकाशित करने का दावा किया है. हालांकि, इन बिंदुओं की आधिकारिक पुष्टि अभी तक किसी भी देश ने नहीं की है, लेकिन अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी मेहर के अनुसार, इस मसौदे में दोनों देशों के हितों से जुड़ी कई अहम बातें शामिल हैं।
उन्होंने आगे कहा, 'भारत को उम्मीद है कि इस सहमति को लागू करने से क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करने में मदद मिलेगी और आवाजाही व व्यापार की स्वतंत्रता सुनिश्चित होगी।'
उन्होंने कहा कि भारत को उम्मीद है कि दोनों पक्षों के बीच बाकी बचे मुद्दों पर भी बातचीत के जरिए एक स्थायी और टिकाऊ अंतिम समझौता होगा।
अमेरिका-ईरान समझौते का ऑस्ट्रेलिया PM ने किया समर्थन
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने सोमवार को अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते का स्वागत किया। इसके सात ही उन्होंने दोनों पक्षों से लगातार संयम बरतने की अपील की।
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ने क्या कहा?
न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, विदेश मंत्री पेनी वोंग के साथ एक संयुक्त बयान में पीएम अल्बनीज ने कहा कि ऑस्ट्रेलियाई सरकार इस बात से खुश है कि इस समझौते में होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने और नेविगेशन की आजादी को बहाल करने की दिशा में कदम शामिल हैं। उन्होंने कहा, 'ऑस्ट्रेलिया लंबे समय से लेबनान समेत सभी जगहों पर तनाव कम करने और लड़ाई खत्म करने की मांग कर रहा है। जैसा कि हमने कहा है यह लड़ाई जितनी लंबी चलेगी इसका प्रभाव उतना ही ज्यादा होगा। लड़ाई को और बढ़ने से रोकने और एक पक्का समझौता करने के लिए लगातार संयम और अच्छे काम करना जरूरी होगा।'
'बुरे प्रभाव से बचाने की कोशिश करेगी'
उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता और सुरक्षा को बढ़ावा देता रहेगा। सरकार ऑस्ट्रेलियाई लोगों को लड़ाई के सबसे बुरे प्रभाव से बचाने के लिए हर मुमकिन कोशिश करेगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एलान किया कि अमेरिका और ईरान ने एक डील पूरी कर ली है जिससे होर्मुज स्ट्रेट फिर से खुल जाएगा और अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी खत्म हो जाएगी। उन्होंने इसे महीनों की लड़ाई के बाद एक बड़ी कामयाबी बताया, जिसने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिलाकर रख दिया था और एक बड़े इलाके में लड़ाई का डर पैदा कर दिया था।
जर्मन चांसलर ने क्या कहा?
वहीं जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने कहा, 'मैं अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते का स्वागत करता हूं। इस कूटनीतिक कामयाबी के लिए, मैं राष्ट्रपति ट्रंप और ईरानी पक्ष को बधाई देता हूं। इससे दुनिया की अर्थव्यवस्था की रिकवरी और इलाके में स्थिरता का रास्ता बन सकता है। जो बातें तय हुई हैं, उन्हें पक्के इरादे और फोकस के साथ लागू करना जरूरी है।' राष्ट्रपति ट्रंप ने टूथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा, 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ डील अब पूरी हो गई है। सभी को बधाई!'
यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब दुनिया का ध्यान होर्मुज स्ट्रेट पर था, जिससे दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। होर्मुज स्ट्रेट कई महीनों से वाशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव का केंद्र रहा है। शिपिंग में रुकावटों की वजह से दुनिया भर में ऊर्जा की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि वह अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग को फिर से खोलने और अमेरिकी नाकेबंदी को हटाने की मंजूरी दे रहे हैं। उन्होंने लिखा, 'मैं होर्मुज स्ट्रेट को टोल फ्री खोलने की पूरी मंजूरी देता हूं। इसके साथ ही, अमेरिका नेवल ब्लॉकेड को तुरंत हटाने जा रहा है। दुनिया भर के जहाजों, अपने इंजन चालू करो। तेल का प्रवाह शुरू होने दो।'
]]>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्लोवाकिया के ब्रातिस्लावा में स्लोवाक रिपब्लिक के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको के साथ जॉइंट प्रेस मीट को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने भारत स्लोवाकिया के रिश्ते को रेखांकित किया. दोनों देशों के प्रधानमंत्री ने रक्षा सहयोग के लिए लेटर ऑफ इंटेट साइन किया है।
पीएम ने अपने संबोधन में कहा, "मैं स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री को गर्मजोशी से स्वागत के लिए धन्यवाद देता हूं. वह एक अनुभवी नेता और भारत के सच्चे दोस्त हैं. भारत-स्लोवाकिया की दोस्ती को ऊंचाइयों तक ले जाने में उनका अहम रोल रहा है. मुझे खुशी है कि उनसे मिलकर मुझे हमारे दोनों देशों के रिश्तों में एक ऐतिहासिक पल देखने का मौका मिला।
रक्षा सहयोग के लिए साइन की डील
पीएम ने कहा, "मेरी यह यात्रा किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री की स्लोवाकिया की पहली यात्रा है. मुझे खुशी है कि इस ऐतिहासिक अवसर पर हमने अपने संबंधों को व्यापक भागीदारी का दर्जा देने का फैसला किया है।
पीएम मोदी ने कहा, "रक्षा सहयोग हमारे गहरे आपसी विश्वास और रणनीतिक अभिसरण का प्रमाण है. मुझे खुशी है कि इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में आज हमने लेटर ऑफ इंटेंट साइन किया. इससे संयुक्त विकास, संयुक्त उत्पादन और रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग को नई गति मिलेगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्लोवाकिया के ब्रातिस्लावा में स्लोवाक रिपब्लिक के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको के साथ जॉइंट प्रेस मीट को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने भारत स्लोवाकिया के रिश्ते को रेखांकित किया. दोनों देशों के प्रधानमंत्री ने रक्षा सहयोग के लिए लेटर ऑफ इंटेट साइन किया है।
पीएम ने अपने संबोधन में कहा, "मैं स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री को गर्मजोशी से स्वागत के लिए धन्यवाद देता हूं. वह एक अनुभवी नेता और भारत के सच्चे दोस्त हैं. भारत-स्लोवाकिया की दोस्ती को ऊंचाइयों तक ले जाने में उनका अहम रोल रहा है. मुझे खुशी है कि उनसे मिलकर मुझे हमारे दोनों देशों के रिश्तों में एक ऐतिहासिक पल देखने का मौका मिला।
रक्षा सहयोग के लिए साइन की डील
पीएम ने कहा, "मेरी यह यात्रा किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री की स्लोवाकिया की पहली यात्रा है. मुझे खुशी है कि इस ऐतिहासिक अवसर पर हमने अपने संबंधों को व्यापक भागीदारी का दर्जा देने का फैसला किया है."
पीएम मोदी ने कहा, "रक्षा सहयोग हमारे गहरे आपसी विश्वास और रणनीतिक अभिसरण का प्रमाण है. मुझे खुशी है कि इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में आज हमने लेटर ऑफ इंटेंट साइन किया. इससे संयुक्त विकास, संयुक्त उत्पादन और रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग को नई गति मिलेगी।
दोनों देशों के बीच गहरे सांस्कृतिक और लोगों से लोगों के बीच संबंध हमारे संबंधों को मजबूत आधार प्रदान करते हैं. भारत के प्राचीन उपनिषदों का “स्लोवाक” भाषा में अनुवाद किया जाना हमारी सांस्कृतिक निकटता का उत्कृष्ट उदाहरण है. स्लोवाकिया में रह रहे भारतीय मूल के लोग यहां की अर्थव्यवस्था और समाज में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
भारत स्लोवाकिया स्पेस मिशन को किया याद
पीएम मोदी बोले, "2017 में स्लोवाकिया की पहली सैटेलाइट भारत द्वारा लांच की गई थी. आज भारत में स्पेस सेक्टर अभूतपूर्व गति से नई ऊंचाइयां छू रहा है. मैं स्लोवाकिया की कंपनियों को इस विकास-यात्रा में शामिल होने के लिए आमंत्रित करता हूं।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट के आसपास लगातार बिगड़ते सुरक्षा हालात के बीच फ्रांस ने भारत को एक अहम समुद्री सुरक्षा पहल में शामिल करने का प्रस्ताव दिया है. G7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की होने वाली द्विपक्षीय बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा होने की उम्मीद है।
फ्रांस कई साझेदार देशों के साथ मिलकर होर्मुज स्ट्रेट में फ्री शिपिंग और समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक बहुराष्ट्रीय पहल पर काम कर रहा है. इस पहल में भारत को भी शामिल किए जाने की संभावना है. होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों की बातचीत में रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, सैन्य उपकरणों की खरीद, रणनीतिक साझेदारी और पश्चिम एशिया के ताजा हालात प्रमुख मुद्दे होंगे. हाल के महीनों में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़े तनाव के कारण खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा वैश्विक चिंता बन गई है।
भारत-अमेरिका-कतर समेत कई देशों की अलग मीटिंग
G7 सम्मेलन के इतर पश्चिम एशिया पर केंद्रित एक विशेष बैठक भी होगी, जिसमें भारत, अमेरिका, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के नेताओं के शामिल होने की संभावना है. इस बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा पर चर्चा हो सकती है।
विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने प्रधानमंत्री मोदी की फ्रांस और स्लोवाकिया यात्रा की जानकारी देते हुए कहा कि मोदी और मैक्रों की बैठक में पश्चिम एशिया समेत सभी वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा होगी. उन्होंने संकेत दिया कि विभिन्न देशों द्वारा हाल में की गई नई पहलों और घोषणाओं पर भी विचार-विमर्श होगा।
फ्रांस युद्ध में शामिल नहीं, लेकिन समुद्री सुरक्षा जरूरी
फ्रांसीसी अधिकारियों ने कहा कि समुद्री मार्गों का खुला और सुरक्षित रहना पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी है. उनका कहना है कि फ्रांस किसी युद्ध का हिस्सा नहीं है, लेकिन खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है. इसलिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना जरूरी है।
फ्रांस ने भारत को अपना प्रमुख रणनीतिक साझेदार बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग का स्तर बेहद मजबूत है. रिपोर्ट में फ्रांसीसी सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि, भारत अब G7 से जुड़े लगभग सभी प्रमुख मंचों का हिस्सा बन चुका है और वैश्विक मामलों में उसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है. इस बीच सिबी जॉर्ज ने यह भी संकेत दिया कि 14 से 16 जून के बीच होने वाली प्रधानमंत्री मोदी की स्लोवाकिया यात्रा के दौरान रक्षा क्षेत्र से जुड़े कुछ अहम ऐलान किए जा सकते हैं।
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