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भोपाल में दो मस्जिदों को हटाने का आदेश जारी होने के बाद माहौल गरमा गया है। मुस्लिम संगठनों ने सड़क पर उतरने की चेतावनी दी है तो हिंदू संगठनों ने ऐलान किया है कि यदि मस्जिदों को बचाने की कोशिश की गई तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा। इस तरह से भोपाल में बड़ा तालाब के एफटीएल क्षेत्र में बनी दो मस्जिदों दिलकश मस्जिद और मोहम्मदी (भदभदा) मस्जिद को हटाने को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।
जिला प्रशासन ने दी चेतावनी
जिला प्रशासन की ओर से इन्हें सरकारी जमीन पर अतिक्रमण मानते हुए हटाने का नोटिस जारी किया गया है। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि स्वैच्छिक रूप से ढांचा नहीं हटाया गया तो बलपूर्वक बेदखल की कार्रवाई की जाएगी।
NGT के आदेश के बाद नोटिस
एनजीटी के आदेशों के पालन में जारी इस नोटिस के खिलाफ एमपी वक्फ बोर्ड ने मोर्चा खोलते हुए हाईकोर्ट में रिट दाखिल की है। बोर्ड का दावा है कि दोनों मस्जिदें वक्फ संपत्ति हैं और इनके पास वर्षों पुराने कानूनी दस्तावेज मौजूद हैं।
हिन्दू और मुस्लिम संगठन आमने-सामने
मस्जिद हटाने की कार्रवाई की भनक लगते ही मुस्लिम संगठनों ने सड़क पर उतरकर चेतावनी दी कि अगर मस्जिद पर पैर भी रखा तो आर-पार की लड़ाई होगी, लाशों पर से गुजरना होगा।दूसरी ओर हिंदू संगठनों ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मस्जिद टूटनी चाहिए मतलब टूटनी चाहिए।
अतिक्रमण चिन्हित कर हटाने की कार्रवाई
एसडीएम टीटी नगर अर्चना शर्मा के अनुसार, एनजीटी और पर्यावरण मंत्रालय की अधिसूचना के तहत तालाब के 50 मीटर शहरी एवं 250 मीटर ग्रामीण क्षेत्र में आने वाले सभी अतिक्रमण चिन्हित कर हटाने की कार्रवाई की जा रही है। मस्जिदों के अलावा मंदिर व समाधियों सहित कुल 35 अन्य निर्माण भी सूचीबद्ध हैं।
लैंड जिहाद स्वीकार नहीं- मंत्री
राज्य के मंत्री विश्वास सारंग ने बयान दिया कि लैंड जिहाद किसी कीमत पर स्वीकार नहीं होगा। एनजीटी और कानून के आदेशों का पालन अनिवार्य है। वहीं, हिंदू संगठनों ने चेतावनी दी कि अगर मस्जिदों को बचाने का प्रयास हुआ तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
मामला हाईकोर्ट में लंबित
प्रशासन का कहना है कि वक्फ बोर्ड और मस्जिद कमेटी का पक्ष सुनने के बाद निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल मामला हाईकोर्ट में लंबित है। ऐसे में देखना होगा कि अदालत के फैसले के बाद प्रशासन मस्जिदों को हटाता है या दस्तावेजों के आधार पर वक्फ बोर्ड इन धार्मिक स्थलों को बचाने में सफल होता है। फिलहाल भोपाल में दो मस्जिदों को लेकर विवाद गरमा गया है। ऐसे में किसी भी तरह की चूक प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
]]>यह मस्जिद रिहायशी इलाके में बनी है। मस्जिद के आसपास कई भवन सटे हैं। ऐसे में अवैध तीन मंजिलों को गिराने में काफी वक्त लगेगा। इस कार्य के लिए मजदूर लगाए गए हैं। मजदूरों ने पहले दिन मस्जिद की सबसे ऊपर की मंजिल में लगी टीन को उखाड़ना शुरू किया। मस्जिद कमेटी को अपने ख़र्चे पर अवैध निर्माण तोड़ने के आदेश हैं।
संजौली मस्जिद कमेटी के प्रधान लतीफ मोहम्मद की देखरेख में अवैध निर्माण को तोड़ा जा रहा है। लतीफ मोहम्मद ने कहा कि अवैध हिस्से को गिराने में काफी खर्चा आएगा और इसके लिए फंड जुटाया जा रहा है। मस्जिद कमेटी अपने स्तर पर फंड की व्यवस्था कर रहा है। इस कार्य के लिए हमें राज्य सरकार व अन्य किसी संस्था से धनराशि नहीं मिली है। उन्होंने यह भी कहा कि अभी तक फंड की मैनेजमेंट नहीं हुई और काम करने के लिए काफी फंड की जरूरत है। ऐसे में अवैध हिस्से को तोड़ने में तीन से चार महीने का समय लग सकता है और अगली सुनवाई में कोर्ट से अतिरिक्त समय देने का आग्रह किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि अमन, शांति व भाईचारा कायम रखने के लिए मस्जिद कमेटी ने अवैध निर्माण तोड़ने का निर्णय लिया है और नगर निगम कोर्ट के फैसले को चुनौती नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि मस्जिद कमेटी ने इन मंजिलों को गिराने के लिए खुद ही कोर्ट में लिखित आवेदन भी दिया था।
मस्जिद की ऊपर की तीन मंजिले अवैध, दो माह में गिराने के आदेश
सुर्खियों में रहने वाली इस विवादित चार मंजिला मस्जिद में अवैध निर्माण को लेकर बीते 5 अक्टूबर को नगर निगम के कोर्ट में सुनवाई हुई। नगर निगम आयुक्त भूपेंद्र अत्री ने मस्जिद के अवैध निर्माण को लेकर सुनवाई करते हुए मस्जिद कमेटी को अहम आदेश दिया है। मस्जिद की ऊपर की तीन मंजिलें अवैध रूप से बनी हैं। कोर्ट ने फरमान जारी किए हैं कि मस्जिद की दूसरी, तीसरी और चौथी मंजिलों को गिराना होगा।
14 साल में आया फैसला, 46 बार हुई सुनवाई
मस्जिद में अवैध निर्माण की पिछले 14 सालों से आयुक्त कोर्ट में सुनवाई चल रही है। 46वीं सुनवाई पर नगर निगम आयुक्त ने यह फैसला सुनाया है। वक्फ बोर्ड और मस्जिद कमेटी को अपने खर्चे पर तीन मंजिलें गिराने को कहा गया है। कोर्ट ने मामले की आगामी सुनवाई 21 दिसंबर 2024 को निर्धारित की है।
मस्जिद में बिना अनुमति खड़ी कर दीं चार मंजिलें
संजौली की इस विवादित मस्जिद का निर्माण वर्ष 2007 में शुरू हुआ था। स्थानीय लोगों ने मस्जिद को अवैध बताते हुए वर्ष 2010 में इसके खिलाफ नगर निगम की कोर्ट में याचिका दाखिल की। तब से यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है। खास बात यह है कि तब से लेकर प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस की सरकारें रहीं, लेकिन किसी भी सरकार के कार्यकाल ने इसे लेकर गंभीरता नहीं दिखाई। मस्जिद कमेटी के पूर्व प्रधान ने कोर्ट में बताया कि वर्ष 2012 तक मस्जिद दो मंजिला थी। इसके बाद यहां अवैध निर्माण हुआ।
संजौली मस्जिद विवाद पर हिंदु संगठनों ने किये थे उग्र प्रदर्शन
संजौली की इस मस्जिद के मुद्दे पर पूरे प्रदेश में कोहराम का आलम रहा। सितंबर महीने में हिन्दू संगठनों के बैनर तले हिन्दू शिमला सहित अन्य जिलों में सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर अवैध मस्जिदों को गिराने और बाहर से आने वाले विशेष समुदाय के लोगों की रजिस्ट्रेशन की मांग कर रहे हैं। संजौली में बीते 11 सितम्बर को हिंदूओं ने उग्र प्रदर्शन कर विवादित मस्जिद स्थल तक पहुंचने की कोशिश की थी।
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हिमाचल प्रदेश के मंडी में प्रधान सचिव टीसीपी (टाउन एंड कंट्री प्लानिंग) ने अवैध मस्जिद के ढांचे को गिराने और पुरानी स्थिति में बहाल करने के आदेशों पर रोक लगा दी है. इस मामले में अगली सुनवाई प्रधान सचिव टीसीपी के कोर्ट में ही होगी. इस दौरान नगर निगम भी ऑफिस रिकार्ड के साथ अपना पक्ष रखा रखेगा. इस मामले की अगली सुनवाई आने वाली 20 अक्तूबर को होगी.
बता दें कि हिंदू संगठनों द्वारा 10 सिंतबर को नगर निगम के बाहर और 13 सिंतबर को शहर में प्रदर्शन किया गया था. इस दौरान शहर के जेल रोड स्थित अवैध मस्जिद को गिराने की मांग उठाई गई थी. इसी दिन निगम कोर्ट ने मस्जिद के ढांचे को अवैध और टीसीपी नियमों के विरुद्ध बताते हुए गिराने का आदेश दिया था. 20 सितंबर को नगर निगम ने इस मस्जिद के बिजली-पानी के कनेक्शन काट दिए थे. आयुक्त कोर्ट ने इसके लिए मस्जिद संचालन समिति को एक महीने का समय दिया था.
मुस्लिम पक्ष का क्या कहना है
प्रधान सचिव टीसीपी के समक्ष सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष ने अवैध निर्माण की बात को नकारा. मुस्लिम पक्ष के अनुसार 2013 में हुई भारी बारिश के कारण मस्जिद का मुख्य और बड़ा हिस्सा गिर गया था. जिसे अगस्त 2023 को फिर से बनाया गया है. मुस्लिम पक्ष के अनुसार आयुक्त कोर्ट में उनका पक्ष सही तरह से नहीं सुना गया.
हिंदू संगठन भी कोर्ट जाने की तैयारी में
उधर, इस फैसले के आने के बाद शिकायतकर्ता पक्ष और अन्य हिंदू संगठन अब प्रदेश उच्च न्यायालय जाने की तैयारी में हैं. इस बाबत जल्द ही हिंदू संगठनों की मंडी में एक अहम बैठक होगी.
]]>मुंबई के सबसे बड़े स्लिम इलाके धारावी में मस्जिद के एक अवैध हिस्से कि ढहाने बीएमसी टीम पहुंची है। सुरक्षा के लिहाज से बड़ी संख्या में पुलिस तैनात की गई है। टीम पहुंचने के बाद इस इलाके में माहौल तनावपूर्ण हो गया है। मुस्लिम समुदाय बीएमसी के ऐक्शन का विरोध कर रहे हैं और नारेबाजी कर रहे हैं। मस्जिद के अवैध हिस्से को तोड़ने का नोटिस पहले ही भेज दिया गया था। जानकारी के मुताबिक किसी संगठन या मस्जिद की तरफ से नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया गया था।
रिपोर्ट्स के मुताबिक बीएमसी की टीम पहुंचने के बाद ही बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा होने लगे। इसके बाद नारेबाजी शुरू हो गई और कुछ लोग सड़क पर बैठकर प्रदर्शन करने लगे। इसके बाद बीएमसी की टीम ने कुछ लोगों को पुलिस स्टेशन बातचीत के लिए बुलाया। कुछ लोग बात करने के लिए थाने पहुंचे थे। बीएमसी की टीम ने धारावी के लोगों से अपील की है कि वे अपने घर चले जाएं और फिलहाल कार्रवाई वापस ले गई है। हालांकि लोग वापस जाने को तैयार नहीं हैं।
धारावी के 90 फीट रोड पर यह 25 साल पुरानी मस्जिद मौजूद है। मुस्लिम समुदाय का कहना है कि यह मस्जिद काफी पुरानी है। इसके अलावा यहां सड़कों पर नमाज पढ़ने पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद प्रार्थना स्थल की जरूरत है। इस मस्जिद से किसी का कोई निजी फायदा नहीं होता है। मस्जिद का नाम महबूब-ए-सुबानिया मस्जिद है।
धारावी में बढ़ते बवाल को देखकर कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड़ ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मुलाकात की। मिलिंद देवड़ा भी उनके साथ मौजूद थे। दोनों ने इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने कहा कि बीएमसी का कार्रवाई रोकने का आदेश दिया जाए। इस तरह का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले हिमाचल प्रदेश के शिमला में मस्जिद के अवैध हिस्से को गिराने पर बवाल देखने को मिला था। इसको लेकर काफी दिनों तक तनाव व्याप्त रहा।
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हिमाचल प्रदेश के मंडी स्थित मस्जिद मेंअवैध निर्माण को लेकर प्रशासन ने सख्त फऱमान जारी किया है, नगर-निगम ने मस्जिद के बिजली-पानी के कनेक्शन काट दिए हैं. जमीन का लैंड रिकॉर्ड मस्जिद के नाम है, बस कुछ कब्जा पीडब्ल्यूडी की जमीन पर है, जिसको डिमार्केशन के बाद तोड़ा गया.
आपको बता दें कि नगर निगम ने मस्जिद कमेटी को अवैध निर्माण तोड़ने के लिए 30 दिनों का समय दिया गया है. साथ ही सख्त आदेश देते हुए कहा कि या तो मस्जिद कमेटी खुद अवैध ढांचे हो हटा दें या फिर प्रशासन उसको तोड़ेगा. ऐसे में मस्जिद कमेटी को या तो अवैध ढांचा हटाना होगा नहीं तो 30 दिन के अंदर नगर निगम के आदेश के खिलाफ अपील करनी होगी.
मंडी में अवैध मस्जिद निर्माण को लेकर विभिन्न हिंदू संगठनों ने बीते हफ्ते एक रैली भी निकाली थी. ये प्रदर्शन रैली मंडी शहर से सकोडी चौक तक गई. हिंदू संगठनों की इस रैली के मद्देनजर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछार भी की.
मस्जिद विवाद पर क्या बोले CM सुक्खू
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि मंडी में अवैध निर्माण की बात सामने आई है. मस्जिद विवाद को लेकर कमेटी बनेगी. यह शांति प्रिय राज्य है, जहां सभी धर्मों का सम्मान होता है. किसी भी धर्म और जाति को ठेस नहीं पहुंचाई जाएगी. हमारी सरकार कानून के अनुसार कार्रवाई करेगी. अवैध निर्माण स्वीकार्य नहीं है. लेकिन अवैध निर्माण को लेकर भी कानून के दायरे में कार्रवाई होगी.
सीएम सुक्खू ने कहा कि हम चाहते हैं कि विधानसभा स्ट्रीट वेंडर्स को लेकर एक समिति बनाए और स्थानीय विवादों का निपटारा करे. स्ट्रीट वेंडर्स को लेकर एक समिति बनाए जाएगी. बाहर से आकर लोग अवैध निर्माण कर लेते हैं, जिससे लोगों को भी दिक्कत होती है. हिमाचल प्रदेश में प्रदर्शन होते रहते हैं. इनमें कुछ नया नहीं है. हम शिमला मस्जिद मामले में भी कानून के अनुरूप कार्रवाई करेंगे.
]]>हिमाचल प्रदेश के मंडी में अवैध मस्जिद निर्माण को लेकर हिंदू संगठन विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. इस बीच शुक्रवार को मस्जिद में अवैध निर्माण को लेकर नगर निगम में सुनवाई हुई. मंडी नगर निगम ने मस्जिद के अवैध निर्माण को लेकर सुनवाई करते हुए मस्जिद कमेटी को अहम आदेश दिया. नगर निगम ने कहा कि मस्जिद का बिना अनुमति के बनाया गया ढांचा तोड़ना होगा.
नगर निगम ने मस्जिद कमेटी को इसके लिए 30 दिनों का समय दिया गया है. साथ ही सख्त आदेश देते हुए कहा कि या तो मस्जिद कमेटी खुद अवैध ढांचे हो हाट दे या फिर प्रशासन उसको तोड़ेगा. ऐसे में मस्जिद कमेटी को या तो अवैध ढांचा हटाना होगा नहीं तो 30 दिन के अंदर नगर निगम के आदेश के खिलाफ अपील करनी होगी.
बता दें कि मंडी में अवैध मस्जिद निर्माण को लेकर विभिन्न हिंदू संगठन ने शुक्रवार को रैली निकाली. इस रैली के मद्देनजर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछार भी की. मंडी में इस जबरदस्त बवाल के बाद मंडी के डिप्टी कमिश्नर अपूर्व देवगन ने कहा कि अवैध निर्माण पर कार्रवाई होगी. मस्जिद को सील किया जाएगा.
मस्जिद विवाद पर क्या बोले CM सुक्खू?
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि मंडी में अवैध निर्माण की बात सामने आई है. मस्जिद विवाद को लेकर कमेटी बनेगी. यह शांति प्रिय राज्य है, जहां सभी धर्मों का सम्मान होता है. किसी भी धर्म और जाति को ठेस नहीं पहुंचाई जाएगी. हमारी सरकार कानून के अनुसार कार्रवाई करेगी. अवैध निर्माण स्वीकार्य नहीं है. लेकिन अवैध निर्माण को लेकर भी कानून के दायरे में कार्रवाई होगी.
सीएम सुक्खू ने कहा कि हम चाहते हैं कि विधानसभा स्ट्रीट वेंडर्स को लेकर एक समिति बनाए और स्थानीय विवादों का निपटारा करे. स्ट्रीट वेंडर्स को लेकर एक समिति बनाए जाएगी. बाहर से आकर लोग अवैध निर्माण कर लेते हैं, जिससे लोगों को भी दिक्कत होती है. हिमाचल प्रदेश में प्रदर्शन होते रहते हैं. इनमें कुछ नया नहीं है. हम शिमला मस्जिद मामले में भी कानून के अनुरूप कार्रवाई करेंगे.
हिमाचल प्रदेश के मंडी में अवैध मस्जिद निर्माण को लेकर विभिन्न हिंदू संगठन शुक्रवार को रैली निकाल रहे हैं. ये प्रदर्शन रैली मंडी शहर से सकोडी चौक की ओर बढ़ रही है.हिंदू संगठनों की इस रैली के मद्देनजर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछार भी की. बता दें कि कंगना रनौत मंडी से ही बीजेपी सांसद हैं.'अवैध निर्माण वाले हिस्से को गिराया जाएगा', मस्जिद विवाद पर बोले CM सुक्खू.
हिंदू संगठनों की प्रदर्शन रैली जेल रोड स्थित सकोडी चौक के पास पहुंचने वाली है. पुलिस ने इस चौक पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की है. यहां पुलिस ने पूरी तरह से बैरिकेडिंग की है.
मंडी में इस जबरदस्त बवाल के बाद मंडी के डिप्टी कमिश्नर अपूर्व देवगन ने कहा कि अवैध निर्माण पर कार्रवाई होगी. मस्जिद को सील किया जाएगा.
मस्जिद विवाद पर क्या बोले CM सुक्खू?
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि मंडी में अवैध निर्माण की बात सामने आई है. मस्जिद विवाद को लेकर कमेटी बनेगी. यह शांति प्रिय राज्य है, जहां सभी धर्मों का सम्मान होता है. किसी भी धर्म और जाति को ठेस नहीं पहुंचाई जाएगी. हमारी सरकार कानून के अनुसार कार्रवाई करेगी. अवैध निर्माण स्वीकार्य नहीं है. लेकिन अवैध निर्माण को लेकर भी कानून के दायरे में कार्रवाई होगी.
सीएम सुक्खू ने कहा कि हम चाहते हैं कि विधानसभा स्ट्रीट वेंडर्स को लेकर एक समिति बनाए और स्थानीय विवादों का निपटारा करे. स्ट्रीट वेंडर्स को लेकर एक समिति बनाए जाएगी. बाहर से आकर लोग अवैध निर्माण कर लेते हैं, जिससे लोगों को भी दिक्कत होती है. हिमाचल प्रदेश में प्रदर्शन होते रहते हैं. इनमें कुछ नया नहीं है. हम शिमला मस्जिद मामले में भी कानून के अनुरूप कार्रवाई करेंगे.
शिमला में भी हुआ था इसी तरह का प्रदर्शन
शिमला के संजौली इलाके में मस्जिद परिसर में अवैध निर्माण को लेकर हिंदू संगठनों और स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया था. इस दौरान प्रदर्शनकारियों की पुलिसकर्मियों से झड़प भी हुई थी. प्रदर्शनकारियों ने मस्जिद की ओर मार्च करते हुए 'हिमाचल ने ठाना है, देवभूमि को बचाना है' और 'भारत माता की जय' जैसे नारे लगाए थे. इस दौरान पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोकने की कोशिश की थी, जिसे लोगों ने तोड़ दिया और आगे बढ़ने लगे थे. पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए वाटर कैनन चलाया और लाठीचार्ज किया था.
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हिमाचल प्रेदश की राजधानी शिमला के संजौली में मस्जिद को लेकर चल रहा हिंदू संगठनों का प्रोटेस्ट थमने का नाम नहीं ले रहा है. संजौली में आज विरोध-प्रदर्शन के लिए बड़ी तादाद में जमा हुए हिंदू संगठन के लोगों ने पुलिस की बैरिकेडिंग तोड़ दी है. प्रदर्शनकारी अब मस्जिद की तरफ आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं. मौके पर भारी पुलिस बल तैनात है, जो प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश में लगा हुआ है. बैरिकेड तोड़ने के बाद आगे बढ़ रही भीड़ पर पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया है.
इस मुद्दे पर कांग्रेस के सीनियर नेता और हिमाचल प्रदेश के मंत्री विक्रमादित्य सिंह का बयान भी आया है. उन्होंने कहा है कि सभी को शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने का अधिकार है, लेकिन कोई ऐसी स्थिति न बने जिससे प्रदेश की शांति खराब हो. प्रदेश का लॉ एंड ऑर्डर बिगड़ने नहीं दिया जा सकता है. पूरा मामला कोर्ट में है. अगर वो जगह अवैध पाई गई तो कार्रवाई होगी और कानून के तहत उसको ढाहाया जाएगा.
प्रदर्शनकारियों के चलते पुलिस ने आवाजाही की थी बंद
संजौली के मुख्य प्रवेश द्वारों को पैदल व वाहनों की आवाजाही के लिए बंद कर दिया गया है। ढली सब्जी मंडी के पास भारी संख्या में जुटे प्रदर्शनकारी नारेबाजी कर रहे हैं। इन्हें संजौली मस्जिद की ओर बढ़ने से रोकने के लिए ढली टनल के दोनों छोरों पर आवाजाही बंद कर दी गई है। इसके साथ ही अपने समर्थकों संग संजौली पहुंचे हिंदू जागरण मंच के पूर्व महामंत्री कमल गौतम को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।
मस्जिद को सील करके प्रदर्शनकारियों को खदेड़ा
कमल गौतम ने कहा कि हिंदू समाज की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए उनके समर्थन में संजौली पहुंचा हूं। वे बोले कि हिंदूओं की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है। सिविल सोसायटी के बैनर तले कुछ लोग संजौली पहुंचकर नारेबाजी करने लगे, लेकिन पुलिस ने उन्हें खदेड़ दिया। हालात काबू में रखने के लिए पुलिस के दंगा नियंत्रक वाहनों को भी संजौली में तैनात किया गया है। जिला पुलिस ने प्रदेश की सभी छह बटालियन को संजौली में तैनात किया है। मस्जिद स्थल को पूरी तरह सील कर दिया गया है।
संजौली में धारा 163 लागू,धरना-प्रदर्शन पर लगी रोक
संजौली में पुलिस बल के साथ मौजूद शिमला के एसपी संजीव गांधी ने किसी तरह की तनावपूर्ण स्थिति से इंकार किया था। उनका कहना था कि हालात सामान्य हैं और रोजमर्रा के काम अन्य दिनों की तरह हो रहे हैं। मगर देखते ही देखते भीड़ उग्र हो गई। भीड़ को काबू में करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज का सहारा लिया। इसके जवाब में गुस्साई भीड़ ने पथराव करना शुरू कर दिया। शिमला के उपायुक्त अनुपम कश्यप ने कहा कि संजौली क्षेत्र में धारा 163 लागू है। बगैर अनुमति धरना-प्रदर्शन करने वालों पर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उन्होंने लागों से शांति बनाए रखने की अपील की है।
संजौली में धारा 163 लागू,धरना-प्रदर्शन पर लगी रोक
संजौली में पुलिस बल के साथ मौजूद शिमला के एसपी संजीव गांधी ने किसी तरह की तनावपूर्ण स्थिति से इंकार किया था। उनका कहना था कि हालात सामान्य हैं और रोजमर्रा के काम अन्य दिनों की तरह हो रहे हैं। मगर देखते ही देखते भीड़ उग्र हो गई। भीड़ को काबू में करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज का सहारा लिया। इसके जवाब में गुस्साई भीड़ ने पथराव करना शुरू कर दिया। शिमला के उपायुक्त अनुपम कश्यप ने कहा कि संजौली क्षेत्र में धारा 163 लागू है। बगैर अनुमति धरना-प्रदर्शन करने वालों पर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उन्होंने लागों से शांति बनाए रखने की अपील की है।
मस्जिद विवाद से नहीं जोड़ना चाहिए मुद्दा
हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने भी इस मुद्दे पर बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि यह अवैध निर्माण का मुद्दा है, इसे मस्जिद विवाद से नहीं जोड़ना चाहिए. नरेश चौहान ने कहा है कि लोगों ने इस मुद्दे को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया है.
नरेश चौहन ने कहा,'आज के लिए जो आह्वान किया गया था, उसके लिए प्रशासन और पुलिस पूरी तरह तैयार है, ताकि शांति बनी रहे. हमने पहले ही धारा 163 लगा दी है.' बता दें कि हिंदू संगठनों की मांग है कि मस्जिद का अवैध निर्माण तुड़वाया जाए. बीते दिन मल्याणा में दोनों समुदायों के बीच हुई लड़ाई के बाद यह मामला भड़क उठा था.
यह मुद्दा हिमाचल प्रदेश की सियासत में भी छाया हुआ है. हाल ही में हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने विधानसभा में मस्जिद निर्माण के मुद्दे पर कड़ी टिप्पणी की थी. उन्होंने कहा था,'संजौली बाजार में महिलाओं का चलना मुश्किल हो गया है. चोरियां हो रही हैं, लव जिहाद जैसी घटनाएं हो रही हैं, जो प्रदेश और देश के लिए खतरनाक हैं. मस्जिद का अवैध निर्माण हुआ है. पहले एक मंजिल बनाई, फिर बिना परमिशन के बाकी मंजिलें बनाई गईं. 5 मंजिल की मस्जिद बना दी गई है. प्रशासन से यह सवाल है कि मस्जिद के अवैध निर्माण का बिजली-पानी क्यों नहीं काटा गया?'
ओवैसी ने साधा था कांग्रेस पर निशाना
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने हिमाचल प्रदेश के मंत्री अनिरुद्ध सिंह के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी थी. उन्होंने कांग्रेस पर भाजपा की भाषा बोलने का आरोप लगाया था. ओवैसी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट कर कहा था, 'क्या हिमाचल की सरकार भाजपा की है या कांग्रेस की? हिमाचल की 'मोहब्बत की दुकान' में नफरत ही नफरत है.'
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