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मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) ने एक बड़ा और असरदार फैसला लेते हुए आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) को मिलने वाली पांच साल की आयु छूट को समाप्त कर दिया है। यह निर्णय मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के आदेश के बाद लिया गया है, जिससे अब ईडब्ल्यूएस वर्ग के अभ्यर्थियों को अन्य सामान्य वर्ग की तरह अधिकतम 40 वर्ष की आयु सीमा में ही आवेदन करना होगा।
क्या था पुराना नियम?
फरवरी 2022 में आयोग ने ईडब्ल्यूएस अभ्यर्थियों को SC, ST और OBC वर्ग के समान 45 वर्ष तक की आयु छूट का लाभ देना शुरू किया था। इसके बाद से आयोग की कई परीक्षाओं में EWS वर्ग के हजारों उम्मीदवारों को इस सुविधा का लाभ मिला। लेकिन अब, MPPSC द्वारा जारी नवीनतम नोटिफिकेशन के अनुसार, यह लाभ समाप्त कर दिया गया है।
हाईकोर्ट का निर्देश क्यों आया?
हाईकोर्ट में इस नियम को लेकर चुनौती दी गई थी कि आयु में छूट केवल आरक्षित वर्गों के लिए लागू होती है, जबकि ईडब्ल्यूएस वर्ग को संविधान में सिर्फ 10% आरक्षण का प्रावधान दिया गया है, न कि आयु छूट जैसी सुविधाएं। कोर्ट ने यह माना कि ईडब्ल्यूएस को सामाजिक रूप से पिछड़ा वर्ग नहीं माना गया है, इसलिए उन्हें आयु सीमा में छूट देना नियमों के विरुद्ध है।
इससे बड़ा यह झटका, पहले की परीक्षा से भी बाहर होंगे
इसमें भी एक बड़ा झटका यह लगा है कि जिन भर्ती विज्ञापनों में यह छूट मिली थी वह सभी खत्म बैकडेट से खत्म हो गई है। क्योंकि यह छूट याचिका 2022 के अनुपालन में ही मिली थी, इसके बाद ही आयोग ने विविध भर्ती विज्ञापन में यह छूट के लिए लाइन डाली थी, लेकिन अंतिम आदेश के बाद इसे लागू कर दिया गया है। यानी जिन भी भर्ती परीक्षा में ईडब्ल्यूएस पुरुष उम्मीदवारों ने यह छूट ली है, उन्हें बाहर किया जाएगा।
इसका असर पुरानी भर्ती परीक्षा में भी होगा। उन सभी में जिसमें आयु छूट सीमा के तहत आयोग ने 2108/22 की याचिका का हवाला देकर ईडब्ल्यूएस वालों को छूट दी थी।
इस फैसले का असर किन पर होगा?
जिन ईडब्ल्यूएस उम्मीदवारों की उम्र 1 जनवरी 2025 तक 40 वर्ष से अधिक हो चुकी है, वे आगामी परीक्षाओं में आवेदन नहीं कर सकेंगे।
वर्तमान में प्रक्रियाधीन परीक्षाएं, जैसे कि राज्य सेवा परीक्षा, वन सेवा परीक्षा आदि में यह नियम तुरंत प्रभाव से लागू होगा।
आयोग को 2022 से अब तक आयु छूट के आधार पर चयनित ईडब्ल्यूएस अभ्यर्थियों की नियुक्ति रद्द करनी पड़ सकती है।
प्रभावित होंगे हजारों उम्मीदवार
इस आदेश से बड़ी संख्या में ईडब्ल्यूएस वर्ग के युवाओं को झटका लगा है। वे जो आयु छूट के कारण परीक्षा में शामिल हुए थे, अब उनकी नियुक्तियां भी संकट में पड़ सकती हैं। कई उम्मीदवारों ने सोशल मीडिया पर इस फैसले का विरोध भी शुरू कर दिया है और इसे असमानता भरा निर्णय बताया है।
यह सूचना जारी की है आयोग ने
आयोग द्वारा भर्ती विज्ञापन में आयु सीमा में उल्लेख था कि ईडब्ल्यूएस के उम्मीदवारों द्वारा याचिका 2108/2022 में हाईकोर्ट द्वारा 8 फरवरी 2022 को जारी आदेश के अनुपालन में एसटी, एससी व ओबीसी के समान ईडब्ल्यूएस को भी आयु सीमा में छूट होगी। यानी जिन उम्मीदवारों की आयु 1 जनवरी 2025 को 45 साल से अधिक नहीं है वह आवेदन भर सकेंगे। लेकिन यह छूट याचिका 2108/22 के कोर्ट आदेश के अधीन होगी
इस याचिका पर कोर्ट द्वारा 17 मार्च 2025 को अंतिम आदेश जारी करते हुए याचिका खारिज कर दी गई है। इसलिए आयोग विज्ञापनों में ईडब्ल्यूएस के पुरुष अभ्यर्थियों के लिए अधिकतम उम्र सीमा अब अधिकतम 40 साल ही रहेगी। इसलिए जिन पुरुष उम्मीदवारों की सीमा 40 साल से अधिक है वह अपात्र माने जाएंगे।
MPPSC का आधिकारिक नोटिफिकेशन
आयोग की ओर से सोमवार को जारी अधिसूचना में कहा गया 'अब से ईडब्ल्यूएस वर्ग को आयु में किसी भी प्रकार की छूट नहीं दी जाएगी। उन्हें सामान्य वर्ग के समान अधिकतम 40 वर्ष की सीमा में आवेदन करना होगा। यह आदेश हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में पारित किया गया है।'
EWS पुरुषों को छूट खत्म का पूरा मामला 5 पॉइंट्स में
आयु सीमा छूट खत्म: MPPSC ने EWS पुरुष उम्मीदवारों के लिए 5 साल की उम्र छूट खत्म की, अब अधिकतम आयु 40 साल होगी।
हाईकोर्ट आदेश: 17 मार्च 2025 को हाईकोर्ट ने EWS की आयु सीमा छूट को खारिज कर दिया।
बैकडेट से लागू: पहले दी गई छूट अब बैकडेट से खत्म, उम्मीदवार अपात्र होंगे।
प्रभावित परीक्षाएं: राज्य सेवा, असिस्टेंट प्रोफेसर, इंजीनियरिंग और मेडिकल ऑफिसर परीक्षाएं प्रभावित होंगी।
आधिकारिक निर्णय: हाईकोर्ट ने EWS को केवल आर्थिक आरक्षण दिया, उम्र छूट नहीं दी।
यह सभी परीक्षाएं होंगी प्रभावित
राज्य सेवा परीक्षा
राज्य सेवा परीक्षा 2023 के इंटरव्यू शुरू हुए हैं। इसमें तो असर होगा ही, साथ ही राज्य सेवा परीक्षा 2024 जिसके इंटरव्यू अगस्त-सितंबर में प्रस्तावित हैं, साथ ही राज्य सेवा परीक्षा 2025 जिसकी प्री हो चुकी है और अब मेंस का इंतजार है, इसमें भी यह असर आएगा। इसमें कोई चयन सूची में आया है, वह अब अपात्र होगा।
असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती
अभी साल 2022 की भर्ती के रिजल्ट आए हैं और आगे भी कुछ इंटरव्यू होना है। वहीं भर्ती 2024 की भी प्रक्रिया जारी है। इन सभी पर असर होगा। वहीं अभी इसी भर्ती का अगला चरण 27 जुलाई को होना है। इन सभी से यह बाहर होंगे
राज्य इंजीनियरिंग परीक्षा और मेडिकल ऑफिसर भर्ती
राज्य इंजीनियरिंग परीक्षा 23 पदों के लिए तो मेडिकल ऑफिसर भर्ती 890 पदों के लिए होना है। इन सभी पर इनका असर होगा। इसके साथ ही अन्य कई परीक्षाएं इसमें आएंगी जिनके लिए भी इस याचिका का हवाला देकर छूट की बात लिखी थी।
हाईकोर्ट ने यह कहा था आदेश में
जबलपुर में लगी रिट अपील में ईडब्ल्यूएस को भी एसटी, एससी और ओबीसी की तरह ही परीक्षा में बैठने के अधिक बार मिलने वाले अवसर और उम्र छूट सीमा का मुद्दा था। इसमें सभी पक्ष सुनने के बाद 17 मार्च 2025 को हाईकोर्ट ने आदेश दिए और कहा कि ईडब्ल्यूएस को 103वें संविधान संशोधन के तहत आर्थिक आधार पर यह आरक्षण मिला है।
इसके आधार पर अन्य छूट का दावा नहीं कर सकते हैं। एसटी, एसी या ओबीसी हर वर्ग का आरक्षण अलग है और कोई भी एक-दूसरे को ओवरलेप नहीं करता है। इसलिए इस आधार पर ईडब्ल्यूएस उम्र छूट सीमा का दावा नहीं कर सकते हैं।
न परीक्षा कराई, न भर्ती
हर अभ्यर्थी से 540 रुपए शुल्क वसूला गया। यानी 5.4 करोड़ से ज्यादा रुपए। इतना पैसा इकठ्ठा होने के बाद न परीक्षा कराई, न भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ी, सिर्फ अप्रेल में एक पंक्ति का नोटिफिकेशन आया- परीक्षा रद्द है, नया नोटिफिकेशन बाद में जारी किया जाएगा। जब अप्रेल में नोटिफिकेशन जारी किया था तो उसमें पदों की संख्या घटाकर सिर्फ 67 कर दी गई। ये उम्मीदवारों के लिए दूसरा झटका था।
पुरानी फीस पर जवाब नहीं
आयोग ने जो किया, वो बेरोजगार की जेब से 5.4 करोड़ की सीधी वसूली थी। लाखों उम्मीदवारों ने तैयारी के नाम पर किताबें खरीदीं, कोचिंग ली, किराया चुकाया, लेकिन आयोग ने बिना जिम्मेदारी लिए सब रद्द कर दिया। अब फिर से वही परीक्षा हो रही है और फीस मांगी जा रही है। पुरानी फीस को लेकर कोई जवाब नहीं है।
भरोसे से बड़ी वसूली
एमपीपीएससी के लिए परीक्षा से ज्यादा फॉर्म से मिलने वाली करोड़ों की फीस ज्यादा अहम हो गई है। जब मार्च में केंद्र ने योग्यता बदली तो आयोग ने एक माह चुप्पी साधे रखी और अप्रेल में परीक्षा रद्द कर दी। उम्मीदवारों का कहना है कि आयोग ने नोटिफिकेशन रद्द किया है तो फीस लौटा दें।
केस-1: फीस और सपना, दोनों लुट गए
श्योपुर जिले से आए भगवत रावत इंदौर में किराए के कमरे में रहकर तैयारी कर रहे हैं। पिता ने कर्ज लेकर भेजा कि मैं कुछ बन जाऊंगा। अब फिर से फीस भरने कहा जा रहा है। दिल और जेब दोनों पहले ही खाली हो चुके हैं।
केस-2: हमारे भरोसे का मजाक है
13 साल से तैयारी कर रहीं रिया बैरागी का कहती हैं कि यह सिर्फ परीक्षा रद्द नहीं, एक पूरी पीढ़ी की मेहनत का अपमान है। हमारे भरोसे का मजाक है। पैसों के साथ सपना भी डूब गया है।
पद बढ़ाए आयोग
नेशनल एजुकेटेड यूथ यूनियन के राधे जाट का कहना है, उम्मीदवारों की मेहनत, पैसा, समय और आत्मविश्वास सभी आयोग की लापरवाही की भेंट चढ़ गए। अब नए नोटिफिकेशन के नाम पर फिर से पैसा मांगा जा रहा है। गुरुवार को यूनियन के प्रतिनिधिमंडल ने आयोग को ज्ञापन सौंपकर एफएसओ के पद बढ़ाने के साथ असिस्टेंट प्रोफेसर के शेष विषयों के साक्षात्कार की तिथियां घोषित करने, नई असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती व सेट परीक्षा जल्द करवाने, राज्य सेवा मुख्य परीक्षा-2025 की तारीख घोषित करने और एडीपीओ की नई भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की भी मांग की। मामले में आयोग के ओएसडी रवींद्र पंचभाई से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिया।
अब हिम्मत नहीं बची
गजेंद्र कहते हैं, फीस भर दी, तैयारी शुरू की, लेकिन फिर सब रद्द कर दिया गया। अब फिर पैसे मांग रहे हैं। आयोग के रवैये से थक गए हैं, आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं। प्राइवेट नौकरी ही करनी पड़ेगी।
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MPPSC प्रारंभिक परीक्षा 2025 पर हाई कोर्ट की जबलपुर बेंच ने एक बड़ा आदेश जारी किया है कोर्ट ने कहा है कि उसकी अनुमति के बिना प्रारंभिक परीक्षा का रिजल्ट घोषित न किया जाये, इस मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी। कोर्ट ने राज्य सरकार को, एमपीपीएससी को नोटिस जारी किया है और जवाब तलब किया है।
दरअसल भोपाल निवासी अभ्यर्थी ममता देहरिया ने राज्य सेवा परीक्षा 2025 में भाग लिया है, अभ्यर्थी द्वारा परीक्षा आवेदन जमा करने के तत्काल बाद हाई कोर्ट में याचिका दायर कर मध्य प्रदेश राज्य सेवा भर्ती परीक्षा नियम 2015 के नियम 4 (1) (a) (ii), तथा नियम 4 (2) (a) (ii) एवं नियम 4 (3) (a) (ii) की संवैधानिकता सहित सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी सर्कुलर 07/11/2000 तथा लोक सेवा अयोग द्वारा प्रकाशित विज्ञापन दिनांक 31/12/2024 की संवैधानिकता क़ो चुनौती देते हुए उक्त प्रावधानों क़ो भारत के संविधान के अनुच्छेद 14,15,16 तथा 335 एवं लोकसेवा आरक्षण अधिनियम 1994 की धारा 4-अं, से असंगत तथा असंवैधानिक बताया गया है।
याचिका में मप्र सिविल सेवा भर्ती नियम की संवैधानिकता को दी गई है चुनौती
याचिका में कहा गया है कि उक्त प्रावधान आरक्षित वर्ग के प्रतिभावान अभ्यर्थियों क़ो छूट लिए जाने के नाम पर उनको अनारक्षित वर्ग में चयन से रोकते है, ममता देहरिया की याचिका पर आज प्रारंभिक सुनवाई मुख्य न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत तथा न्यायमूर्ति विवेक जैन की खंडपीठ में हुई, वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर एवं विनायक प्रसाद शाह ने कोर्ट को बताया कि मध्य प्रदेश शासन एक ओर आरक्षित वर्ग को विभिन्न प्रकार की छूट दे रही है वहीं दूसरी ओर छूट प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को मेरिट में उच्च स्थान प्राप्त करने पर भी अनारक्षित वर्ग में चयन न होने का नियम बना दिया गया है, जो सविधान में निहित सामाजिक न्याय की अवधारणा के विपरीत होने के साथ साथ कई संवैधानिक प्रावधानों के विपरीत है।
वकील ने तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट के अनेक न्यायिक दृष्टांत हैं जिनमें स्पष्ट किया गया है, राज्य कोई ऐसा कानून नहीं बना सकती जो आरक्षित वर्ग को उनके संवैधानिक अधिकारों के उपभोग से रोकता हो इसलिए मध्य प्रदेश सरकार द्वारा आरक्षित वर्ग क़ो अनारक्षित वर्ग में चयन से रोकने वाले समस्त प्रावधान असंवैधनिक तथा निरस्त किए जाने योग्य है, याचिका कर्ता की ओर से दी गई दलीलो क़ो कोर्ट ने गंभीरता से लिया और याचिका को विचारार्थ स्वीकार कर राज्य सरकार और एमपीपीएससी को नोटिस जारी किया, कोर्ट ने लोक सेवा अयोग क़ो निर्देशित किया कि उक्त विज्ञापन तथा नियमों के अनुसार आयोजित परीक्षाओ के रिजल्ट हाई कोर्ट की अनुमति के बिना घोषित न किए जाए, याचिका पर अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।
]]>1 लाख 18 हजार आवेदन प्राप्त
31 दिसंबर 2024 को आयोग ने परीक्षा को लेकर विज्ञापन निकाला। 18 विभागों में रिक्त 158 पद रखे हैं।
परीक्षा के माध्यम से 10 एसडीएम, 22 उप पुलिस अधीक्षक, 10 अतिरिक्त सहायक विकास आयुक्त, 65 बाल विकास परियोजना अधिकारी, 14 वित्त विभाग, 7 सहकारी निरीक्षक सहित पदों पर भर्ती की जाएंगी।
आयोग ने सीटों का विभाजन कर दिया है। 38 अनारक्षित, 24 एससी, 48 एसटी, 35 ओबीसी और 13 ईडब्ल्यूएस के लिए सीटें आरक्षित हैं।
17 जनवरी तक आयोग को 1 लाख 18 हजार आवेदन प्राप्त हुए हैं।
इंदौर, उज्जैन, धार, झाबुआ, छिंदवाड़ा, शिवपुरी, हरदा, सीहोर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, सतना, सागर सहित 52 जिलों में परीक्षा केंद्र रखे गए है।
16 फरवरी को दो सत्रों में परीक्षा आयोजित होगी।
पहला प्रश्न पत्र सुबह 10 से दोपहर 12 बजे के बीच सामान्य अध्ययन और दूसरा प्रश्न पत्र दोपहर 2.15 से 4.15 बजे के बीच सामान्य अभिरुचि परीक्षण का रखा है।
न्यायालय के आदेश पर पंजीयन
आयोग ने 17 जनवरी को पंजीयन की लिंक बंद कर दी। इसके बाद कुछ अभ्यर्थी आवेदन से वंचित रह गए। उसके बाद उन्होंने न्यायालय की शरण की। अभ्यर्थियों के पक्ष में न्यायालय ने आदेश दिया। फिर आयोग को पंजीयन के लिए दो दिन लिंक खोली। बावजूद इसके अभी कई अभ्यर्थी जो फार्म नहीं भर पाए हैं। इन्होंने आयोग में भी अधिकारियों से गुहार लगाई है। उनका कहना है कि आवेदन के लिए सिर्फ 17 दिन दिए गए थे। जबकि पहले महीनेभर का समय दिया जाता था।
कम हुए हैं आवेदक
पिछले साल से राज्य सेवा में कम पद निकाले जा रहे हैं। इस वजह से अभ्यर्थियों की संख्या लगातार घटती जा रही है। 2024 में 110 पद भर्तियां निकाली थी, जिसमें 1 लाख 84 हजार आवेदन आए थे। ओएसडी रवींद्र पंचभाई ने बताया कि प्रारंभिक परीक्षा का रिजल्ट आने तक पद बढ़ाएं जा सकते है। इसके लिए अभ्यर्थियों को थोड़ा इंतजार करना चाहिए।
नईदुनिया से बातचीत में आयशा ने बताया कि मैंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा रीवा के एक निजी स्कूल से की। इसके बाद 12वीं तक की शिक्षा शासकीय प्रवीण कन्या स्कूल से की।
इसके बाद कॉलेज की शिक्षा शासकीय आदर्श महाविद्यालय रीवा से की। मेरे पिता एक ऑटो चालक हैं। पिछले कुछ समय से उनका स्वास्थ्य सही नहीं रहता। वे एक पिता होने के साथ-साथ मेरे लिए अच्छे गुरु और मार्गदर्शक भी हैं।
माता-पिता को दिया सफलता का श्रेय
उन्होंने आगे बताया कि छोटे शहरों में आमतौर पर ऐसा माना जाता है कि लड़कियां चूल्हे-चौके तक ही सीमित होती हैं। लेकिन मेरे माता-पिता का मानना था कि लड़कियों के लिए शिक्षा सबसे आवश्यक है। घर के काम तो कोई भी कर सकता है।
उसी का परिणाम है कि आज मेरा चयन डिप्टी कलेक्टर के पद पर हुआ है। अगर मेरे माता रुकसाना अंसारी और पिता मुस्लिम अंसारी सहयोग नहीं करते तो यह कभी भी संभव नहीं हो पाता। इसलिए मेरी सफलता का श्रेय मेरे माता-पिता को जाता है।परीक्षा परिणाम के आने के बाद आयशा की इस सफलता पर उन्हें बधाई देने के लिए उनके घर पर उनके रिश्तेदारों और दोस्तों की भीड़ लग रही है।
बिना कोचिंग हासिल की सफलता
आयशा ने बताया कि मैं एक मध्यम वर्ग की परिवार से ताल्लुक रखती हूं। जिस वजह से मैंने सेल्फ स्टडी के माध्यम से ही पढ़ाई की। मैंने किसी कोचिंग में एडमिशन नहीं लिया। रीवा में रहकर ही मेरी स्कूल, कॉलेज से लेकर बाकी शिक्षा हुई।
मैंने अपने घर में ही अपना स्टडी रूम बनाया, उसी में सात से आठ घंटे पढ़ाई करती थी। हालांकि इस दौरान में मोबाइल केवल शिक्षा के लिए इस्तेमाल करती थी। बाकी मैं मोबाइल से दूर रहती थी। मेरे दिनचर्या में नियमित अखबार पढ़ना भी शामिल था। जिससे मुझे करेंट की घटनाओं की जानकारी मिल जाया करती थी।
पिता ने देखा था सपना
आयशा कहा कि मेरे पिता सुबह-सुबह टहलने के लिए सिविल लाइन कॉलोनी ले जाते थे। वहां सभी अधिकारियों के बंगले हैं। जिनकी नेम प्लेट पर कलेक्टर, डिप्टी कलेक्टर और उनके पद लिखे रहते थे। पिता जब घर लौट कर आते तो वहां खड़ी गाड़ियों तथा विभिन्न पदों का नाम लिया करते थे। बचपन से ही वह इसकी इच्छा जाहिर करते रहे कि काश कोई हमारे परिवार में इस पद तक पहुंच जाए।
स्कूल शिक्षा लेने के तक तो मध्य प्रदेश लोक सेवा संघ के बारे में कुछ ज्यादा मालूम नहीं था लेकिन जब कॉलेज में पहुंची तो मुझे मध्य प्रदेश पीएससी का ख्याल आया। बगैर कोचिंग के सपोर्ट के मैं घर में ही तैयारी शुरू की और सफलता मिल गई।
]]>दिसंबर में आयोग परीक्षा-साक्षात्कार के संबंध में बैठक करेंगे। इसके चलते जनवरी से पहले साक्षात्कार के लिए चयनित उम्मीदवारों को नहीं बुलाया जा सकता है। सरकारी कॉलेजों में सहायक प्राध्यापकों के बरसों से पद रिक्त है। आयोग ने दिसंबर 2022 में भर्ती परीक्षा का विज्ञापन निकाला था। 36 विषयों में 1679 पद पर आवेदन बुलाए हैं।
इन्हें तीन चरणों में रखा गया। 9 जून को आठ विषय में 826 और 4 अगस्त को आठ विषय में 744 पद रखे। दोनों चरणों में 55 हजार से अधिक उम्मीदवारों ने परीक्षा दी। आयोग ने दोनों चरण का परिणाम नवंबर तक निकाल दिया है। यहां तक कि चयनित उम्मीदवारों से साक्षात्कार के लिए भी शैक्षणिक योग्यता, प्रमाण पत्र सहित अन्य दस्तावेज बुलाए है।
5 दिसंबर से आना शुरू होगी शीट
आयोग ने तीसरे चरण में 20 विषय के 109 पद 17 नवंबर को परीक्षा हो चुकी है, जिसमें 3100 में से महज 1200 उम्मीदवारों ने परीक्षा दी। 5 दिसंबर से अलग-अलग विषयों की मॉडल आंसर की जारी होना शुरू होगी। उसके पश्चात आयोग रिजल्ट निकाल सकता है। यह प्रक्रिया दिसंबर तक होने की उम्मीद है। उसके तुरंत बाद चयनित उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए आवेदन करना होगा।
कुछ सप्ताह में साक्षात्कार की तारीख तय होगी
ओएसडी रवींद्र पंचभाई ने कहा कि अगले कुछ सप्ताह में साक्षात्कार को लेकर तारीख तय होगी। इसके बारे में पोर्टल पर अधिसूचना जारी की जाएगी। दो साल में सिर्फ परीक्षा सहायक प्राध्यापक परीक्षा देने वाले उम्मीदवार नाराज है, क्योंकि दो साल में आयोग सिर्फ लिखित परीक्षा करवाया पाया है।
इस दौरान परीक्षा को लेकर न्यायालय में भी प्रकरण पहुंचे थे। देरी का एक यह भी कारण बताया है। फिलहाल आयोग से उम्मीदवारों ने साक्षात्कार जल्द करवाने और शासन से नियुक्तियां देने को लेकर गुहार लगाई है।
]]>राज्य सेवा परीक्षा 2022-2023 के साक्षात्कार की प्रक्रिया और राज्य सेवा परीक्षा 2024 का मुख्य परीक्षा का रिजल्ट आना बाकी है। इस बीच आयोग ने अगली परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। जल्दबाजी में आयोग ने राज्य सेवा परीक्षा 2025 की भले ही तारीख घोषित कर दी। मगर रिक्त पदों के बारे में अभ्यर्थियों को जानकारी नहीं दी। आयोग ने 16 फरवरी को दो सत्र में पेपर रखे हैं।
भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM इंदौर) ने वैश्विक शिक्षा के विस्तार को लेकर चीन और नार्वे की शैक्षणिक संस्थानों के बीच दो अनुबंध करार किए गए है। इसके माध्यम से इन संस्थानों में विद्यार्थी-फैकेल्टी एक्सचेंज प्रोग्राम चलाए जा सकेंगे। यहां तक कि संस्थानों में रिसर्च को बढ़ावा दिया जाएगा।
खास बात यह है कि एमओयू के चलते संस्थान आपस में संसाधानों का आदान-प्रदान भी कर सकेंगे। नार्वे की क्रिस्टियानिया यूनिवर्सिटी काॅलेज और चीन में सूचो यूनिवर्सिटी के साथ ही समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए है। इंदौर और नार्वे की क्रिस्टियानिया यूनिवर्सिटी कॉलेज में अनुसंधान व कलात्म विकास पर अनुबंध हुआ है, जिसमें निदेशक प्रो. हिमांशु राय और डा. क्रिस्टी बाक ने हस्ताक्षर किए हैं।
नार्वे की क्रिस्टियानिया यूनिवर्सिटी कालेज नार्वे की स्थापना 1914 में हुई थी। यह 16 हजार से अधिक छात्रों के साथ अभ्यास-उन्मुख शिक्षण वातावरण प्रदान करता है और विपणन, प्रबंधन, रचनात्मकता और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों पर जोर देता है। डा बाक़ ने कहा कि यह साझेदारी दोनों संस्थानों के लिए अपार संभावनाओं के द्वार खोलती है। दोनों देशों की शैक्षणिक पद्धति और प्रणाली को समझा जा सकेंगे।
इसके माध्यम से शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाया जा सकेगा। वे कहते है कि इसे इंडस्ट्री की जरूरत व आवश्यकताओं को समझकर पाठ्यक्रम में संशोधन करेंगे। प्रौद्योगिकी और नवाचार को बढ़ाएंगे।निदेशक प्रो. राय ने कहा कि सतत विकास और नवीन प्रथाओं में उनके अनुभवों से सीखने के लिए उत्सुक हैं, जो हमारी शैक्षिक पाठ्यक्रमों में भी योगदान देगा। वहीं ज्ञान साझा करने व्याख्यानों और संगोष्ठियां आयोजित होगी। वहीं दोनों संस्थान मिलकर पाठ्यक्रम बनाएंगे। साथ ही दोहरी डिग्री के अवसरों की खोज के माध्यम से शैक्षणिक अनुभवों को समृद्ध करेगा। दूसरे एमओयू पर सूचो यूनिवर्सिटी में बिजनेस स्कूल के डीन प्रो. बो फेंग ने हस्ताक्षर किए। उन्होंने कहा कि उनके मूल मूल्य- प्रामाणिकता, जवाबदेही, प्रशंसा और उन्नति- सामाजिक रूप से जागरूक और अभिनव व्यावसायिक लीडरों को तैयार कर सकेंगे। सहयोग ज्ञान के आदान-प्रदान और संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं के लिए मार्ग बनाकर हमारे छात्रों और शिक्षकों की शैक्षिक यात्रा को समृद्ध बनाएगा।
]]>हाई कोर्ट ने पीएससी-2023 की प्रारंभिक परीक्षा के एक प्रश्न (प्रेस की स्वतंत्रता) को गलत मानते हुए उसे डिलीट करने के निर्देश दिए। वहीं एक अन्य प्रश्न (कबड्डी संघ का मुख्यालय) का पीएससी द्वारा दिए गए उत्तर 'दिल्ली' को गलत माना। जस्टिस विवेक अग्रवाल की एकलपीठ ने इसके उत्तर जयपुर को सही करार दिया। डिलीट किए गए प्रश्न के अंक सभी अभ्यर्थियों को दिए जाएंगे। वहीं दूसरे प्रश्न का उत्तर जिन्होंने जयपुर दिया है, उन्हें भी उसके अंक मिलेंगे। हालांकि कोर्ट ने इसके पहले सिविल सेवा की 11 मार्च को आयोजित मुख्य परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दे दी थी। इन उम्मीदवारों का रिजल्ट अब हाईकोर्ट के इस फैसले के आधार पर तैयार किया जाएगा। इसके साथ ही न्यायालय ने राज्य वन सेवा की मुख्य परीक्षा के लिए नई मेरिट लिस्ट जारी करने के निर्देश दिये हैं। यह परीक्षा 30 जून से होना है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अंशुल तिवारी ने बताया कि पीएससी-प्री परीक्षा में पूछे गए सवालों में से कुछ प्रश्न ऐसे हैं, जिन पर आपत्ति पेश की गई थी। इसे लेकर प्रदेश के अलग-अलग जगहों से 19 याचिकाएं मुख्यपीठ में दायर की गई थीं। भोपाल के अभ्यर्थी आनंद यादव ने राज्य सेवा परीक्षा 2023 के प्रारंभिक परीक्षा में पूछे गये तीन विवादित प्रश्नों को चुनौती दी थी। फ्रीडम ऑफ प्रेस से जुड़ा सवाल, ग्रीन मफलर किस प्रदूषण से संबंधित है, एमेच्योर कबड्डी फेडरेशन का हेडक्वार्टर से जुड़े सवालों पर आपत्ति पेश की गई थी। पिछली सुनवाई के दौरान न्यायालय ने स्पष्ट कहा था कि चूंकि यह जनहित याचिका नहीं है, इसलिए उन्हीं उम्मीदवारों के प्रकरणों पर विचार किया जाएगा जिन्होंने आपत्ति पेश की है और याचिका दायर की है। एकलपीठ ने सुनवाई पश्चात् न्यायालय ने उक्त आदेष जारी किये।
उम्मीदवारों ने प्री के सवालों पर आपत्ति लगाई
पीएससी वन परीक्षा में उम्मीदवारों ने प्री के सवालों पर हाईकोर्ट में आपत्ति जताई। उम्मीदवारों के अधिवक्ता ने कोर्ट को वताया की एमपीपीएससी ने उम्मीदवारों से जो सवाल किए थे उसमें एक प्रेस की स्वतंत्रता वाले विलियम बैंटिंक का सवाल और दूसरा कबड्डी संघ के मुख्यालय से जुड़ा था। राज्य वन सेवा में पूछा गया एक सवाल गलत है, जबकि दूसरे सवाल का वैकल्पिक उत्तर सही नहीं है। दोनो सवालों के आधार पर जबलपुर हाईकोर्ट ने पूर्व के आदेश को हटाते हुए कहा कि दोनों सवालों का लाभ केवल हाईकोर्ट आने वाले उम्मीदवार के साथ सभी प्रभावित उम्मीदवार को मिलेगा।
दो सवालों को लेकर पीएससी गलत सभी को मिलेगा फायदा
जबलपुर हाईकोर्ट ने मेंस के पहले की सुनवाई में कहा कि केवल सवालों पर आपत्ति लगाने वाले और हाईकोर्ट आने वालों को ही राहत देंगे, इस आधार पर केवल इन्हें ही मेंस में बैठने की सशर्त पात्रता मिलेगी। गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने साफ कहा कि इसका लाभ अब सभी उम्मीदवारों को मिलेगा। दो सवालों को लेकर पीएससी गलत है। चूंकि राज्य वन सेवा मेंस नहीं हुई इसलिए इसका प्री रिजल्ट रिवाइज होगा, दो सवाल के उत्तर अलग से चेक करते हुए फिर मेरिट बनेगी।
हाईकोर्ट जस्टिस ने प्री का रिजल्ट संशोधित करने के निर्देश देते हुए कहा कि वो सभी उम्मीदवार जो इन दो सवालों के कारण कटऑफ पर अटक गए थे, वो भी इसका लाभ ले सकते हैं। साथ ही कहा कि इसी आधार पर मेंस परीक्षा हो। लेकिन राज्य सेवा मेंस 2023 हो चुकी है इसलिए इसके लिए अलग से आदेश नहीं हो सकते हैं। जो उम्मीदवार इन दो सवालों के कारण कटऑफ पर अटक गए थे, वह इसी आधार पर साल 2019 की तरह स्पेशल मेंस परीक्षा की मांग कर सकते हैं, क्योंकि तकनीकी रूप से जबलपुर हाईकोर्ट के आदेश का उन्हें लाभ होगा और दो सवालों के कारण उनके अंक बढ़ेंगे। जो कटऑफ के दायरे में आएगा उसका अधिकार बनता है कि वह पीएससी मेंस दे सके। लेकिन इसके लिए हाईकोर्ट ने अलग से आदेश नहीं दिया है।
याचिकाकर्ता उमीदवारों के अधिवक्ता अंशुल तिवारी ने बताया कि मामला 2023 राज्य सेवा से संबंधित है इसमे जो फाइनल आंसर थे वह गलत पाए गये थे। इसको लेकर उमीदवारों के द्वार पिटीशन लगाई गई थी। इसकी फाइनली सुनवाई में कोर्ट ने सुनवाई की ओर 2 प्रश्नों को गलत ठहराया है। जिसमे एक प्रश्न प्रेस ओर दूसरा कबड्डी़ को लेकर था इसे कोर्ट ने गलत मानते हुए इसके अंक को दोबारा रिवाइज करने के निर्देश दिए है। इससे उन सभी उमीदवारों को राहत मिलेगी और एक बार फिर से मेरिट लिस्ट तैयार की जाएगी।
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