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महाराष्ट्र सरकार ने सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े मुस्लिम वर्ग को दिए गए 5 फीसदी आरक्षण से जुड़ा पुराना फैसला रद्द कर दिया है. साल 2014 में एक अध्यादेश के जरिए मुस्लिम समाज को विशेष पिछड़ा प्रवर्ग-ए (SBC-A) के तहत सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में 5 फीसदी आरक्षण दिया गया था. इसके आधार पर जाति प्रमाणपत्र और जाति वैधता प्रमाणपत्र भी जारी किए जा रहे थे.
नवंबर 2014 में हाई कोर्ट ने लगा दी थी रोक
लेकिन इस अध्यादेश को मुंबई हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी. 14 नवंबर 2014 को हाईकोर्ट ने इस पर रोक (स्टे) लगा दी. बाद में यह अध्यादेश 23 दिसंबर 2014 तक कानून में नहीं बदल पाया, जिससे वह स्वतः निरस्त (लैप्स) हो गया. अब सरकार ने साफ किया है कि उस अध्यादेश के आधार पर जारी सभी शासन निर्णय और परिपत्र भी रद्द माने जाएंगे.
अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान के दर्जे पर रोक लगाने का आदेश
वहीं सोमवार (16 फरवरी) को महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने उन 75 स्कूलों को दिए गए अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान के दर्जे पर रोक लगाने का आदेश दिया है, जिनके बारे में खबरें थीं कि उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के तुरंत बाद इन विद्यालयों को मंजूरी दी गई थी. इसके अलावा, उपमुख्यमंत्री और अल्पसंख्यक विकास मंत्री सुनेत्रा पवार ने अधिकारियों को अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र जारी करने में कथित अनियमितता की विस्तृत जांच करने और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया.
अल्पसंख्यक विकास विभाग सुनेत्रा पवार के पास
अधिकारियों के अनुसार, 28 जनवरी से दो फरवरी के बीच 75 संस्थानों को अल्पसंख्यक दर्जा दिया गया. बताया जाता है कि पहला प्रमाण पत्र 28 जनवरी को दोपहर तीन बजकर नौ मिनट पर जारी किया गया था, उसी दिन अजित पवार की विमान दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी. उस दिन सात संस्थानों को स्वीकृति मिली और अगले तीन दिनों में यह संख्या बढ़कर 75 हो गई. उस समय अजित पवार अल्पसंख्यक विकास विभाग का कार्यभार संभाल रहे थे. यह विभाग अब सुनेत्रा पवार के अधीन है, जिन्होंने हाल ही में उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है.
]]>हमारे सहयोगी टीओआई के पास रैली का एक वीडियो है, जिनमें ज्यादातर स्थानीय व्यापारी हैं, जो कथित तौर पर भड़काऊ नारे लगाते हुए देखे जा सकते हैं। व्यापारियों के पूर्व संगठन के अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह, जो अब मैथन सेवा समिति के अध्यक्ष हैं, ने टीओआई को बताया कि प्रस्ताव को 'सर्वसम्मति से' कार्रवाई” के रूप में पास किया गया है।
उत्तराखंड के चमोली में खानसर कस्बे में व्यापार मंडल की बैठक में बुधवार को एक प्रस्ताव पारित किया गया, जिसमें मुस्लिम परिवारों से 31 दिसंबर तक शहर छोड़ने को कहा गया। मैथन सेवा समिति के अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, 'बैठक के दौरान यह निर्णय लिया गया कि ऐसे सभी परिवारों को 31 दिसंबर से पहले शहर छोड़ देना चाहिए। ऐसा न करने पर न केवल इन परिवारों के खिलाफ बल्कि उन्हें अपना घर या दुकान किराए पर देने वालों के खिलाफ भी कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मकान मालिकों पर 10,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया जाएगा।'
सिंह ने कहा, "इसके अलावा, खानसर घाटी के गांवों में सभी फेरीवालों के प्रवेश पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया है। व्यापार करते पकड़े गए किसी भी फेरीवाले पर 10,000 रुपये का जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अन्य शहरों में इसी तरह की घटनाओं के मद्देनजर अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों द्वारा हिंदू महिलाओं के खिलाफ किसी भी आपराधिक घटना को रोकने के लिए ये निर्णय लिए गए हैं।'
टाइम्स ऑफ इंडिया के पास व्यापारियों के निकाय द्वारा लिए गए दो फैसलों के प्रस्ताव की एक कॉपी है। नाम न बताने की शर्त पर अल्पसंख्यक समुदाय के एक सदस्य ने कहा, "हममें से कोई भी कभी भी किसी आपराधिक घटना में शामिल नहीं रहा है। यह कार्रवाई न केवल सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने का प्रयास है, बल्कि खुद के फायदे के लिए बाजार से हमें बेदखल करने की भी कोशिश है।
पुलिस को ऐसी किसी घटना की जानकारी नहीं है। पंवार ने कहा, हम मामले की जांच करेंगे और जरूरत पड़ने पर उचित कानूनी कार्रवाई करेंगे।
खानसर घाटी में 11 ग्राम पंचायतें शामिल हैं। सितंबर में, नंदघाट में मुस्लिम दुकानों के खिलाफ हिंसा के बाद हिंदुत्व समूहों ने चमोली जिले के गोपेश्वर शहर में जुलूस निकाला। उन्होंने एक मुस्लिम युवक द्वारा कथित रूप से उत्पीड़न के आरोपों के बाद सभी "बाहरी लोगों" का सत्यापन करने की मांग की। भाजपा के एक पदाधिकारी सहित अल्पसंख्यक समुदाय के कम से कम 10 परिवारों को मौत की धमकियाँ मिलने के बाद भागने पर मजबूर होना पड़ा।
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