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एमपी के इंदौर में स्थित एमवाय अस्पताल (Maharaja Yashwantrao Hospital or MYH) में वहीं के स्टाफ द्वारा किराये के कर्मचारियों से कैजुअल्टी में काम कराने के खुलासे के बाद प्रबंधन मनमानी को दबाने में जुट गया है। आए दिन अस्पताल की लापरवाही उजागर होने से किरकिरी न हो, इसलिए एमवायएच अधीक्षक डॉ. अशोक यादव ने मीडिया का अस्पताल में प्रवेश प्रतिबंधित (Media Banned) कर दिया है। दलील दी कि कर्मचारियों ने शिकायत की थी कि कुछ लोगों के फोटो-वीडियो बनाने से परेशानी होती है। इसलिए मीडियाकर्मियों के प्रवेश पर रोक लगाई है।
मालूम हो, एमवायएच में एवजियों का मामला उजागर होने से प्रबंधन की काफी फजीहत हुई थी। अस्पताल के कुछ लोगों ने कैजुअल्टी में काम करने के लिए 500 रुपए रोज पर अनाधिकृत रूप से कर्मचारियों को रख लिया था। यह काम वर्षों से चल रहा था, लेकिन किसी भी जिम्मेदार ने एक्शन नहीं लिया। मामला उजागर होने के बाद भी ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। सख्ती के तौर पर मरीजों के साथ आने वालों से मुख्य गेट पर पूछताछ की जा रही है। कैजुअल्टी में मरीज के साथ एक ही परिजन को नियमानुसार जाने की अनुमति है।
मरीजों की आवाज खामोश करने की साजिश
मीडिया के प्रवेश पर प्रतिबंध का काला आदेश मरीजों की पीड़ा को खामोश करने की साजिश है। अस्पताल में सेवाभावी डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मचारियों की कमी नहीं है। वे हर पल इस प्रयास में रहते हैं कि किस तरह मरीज की पीड़ा कम की जाए। तकलीफ उन्हें है जो सरकारी नौकरी में आराम की गुंजाइश तलाशते हैं।
वे नहीं चाहते हैं कि उनके अस्पताल से नदारद होने या मनमानी करने की बात उजागर हो। अस्पताल में मीडियाकर्मी या और किसी को मरीजों के इलाज में अड़चन बनने की इजाजत नहीं है। लेकिन, इस काले आदेश को वापस लेना होगा। मामले में स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन को भी हस्तक्षेप करना होगा।
ताकि मनमर्जी जारी रहे
एमवायएच में डॉक्टरों के समय पर नहीं आने, मरीजों से दुर्व्यवहार और इलाज में लापरवाही उजागर होती रहती है। मरीजों के परिजन से मारपीट, शव ले जाने में एंबुलेंस माफिया की मनमानी और निजी अस्पतालों में मरीजों को रेफर करने जैसे घटनाक्रम साबित हो चुके हैं। कहा जा रहा है कि इन्हें दबाने के लिए अधीक्षक ने मीडिया पर प्रतिबंध का आदेश दिया है।
चार दिन बाद भी नहीं लगे फोटो
एमवायएच में पीजी स्टूडेंट्स द्वारा बाहरी लोगों को किराये पर रखकर ओटी टेक्नीशियन व ड्रेसर का काम लिया जा रहा था। मामले में कार्रवाई नहीं हुई और नौकरी पर रखे एवजियों के फोटो भी नहीं लगाए गए। पुलिस को भी सूचना नहीं दी है। नाम सामने नहीं आने से पुलिस पूछताछ नहीं कर पा रही है।
कोई आपराधिक प्रवृत्ति का तो नहीं
इससे यह पता चल जाएगा कि अस्पतालों में काम करने वालों में से कोई किसी आपराधिक प्रवृत्ति का तो नहीं है? इसके अलावा सभी अस्पतालों के अधीक्षकों को निर्देश दिए हैं कि अस्पताल की सुरक्षा और सीसीटीवी कैमरों की जानकारी उपलब्ध करवाएं। इससे अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता हो सकेगी। क्योंकि इन अस्पतालों में बड़ी संख्या में महिला डाॅक्टर दिन-रात ड्यूटी करती हैं।
सुरक्षा की व्यवस्था उचित नहीं
बता दें कि वर्तमान में अस्पतालों में सुरक्षा की व्यवस्था उचित नहीं है। एमवाय अस्पताल में रेजिडेंट डाॅक्टर एक साथ ड्यूटी रूम साझा करने के लिए मजबूर हैं, क्योंकि यहां पुरुष और महिला डाॅक्टरों के लिए अलग-अलग कमरे नहीं हैं।
एमजीएम मेडिकल काॅलेज से जुड़े सभी अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए सभी कर्मचारियों की पृष्ठभूमि की जांच करने के लिए कहा है। साथ ही सभी अस्पतालों के अधीक्षकों को सुरक्षा व्यवस्था और सीसीटीवी कैमरे की जांच के लिए निर्देश दिए हैं। – डाॅ. संजय दीक्षित, डीन
कई बार शिकायत कर चुके डाॅक्टर, पर सुनवाई नहीं
हैरानी की बात यह है कि डाॅक्टरों ने खराब स्थिति के खिलाफ जिम्मेदार अधिकारियों से कई बार शिकायत की है, लेकिन अभी तक कोई फायदा नहीं हुआ।
अस्पताल में डाॅक्टरों के लिए कोई सुरक्षा व्यवस्था नहीं है। कोई भी घूमते हुए किसी भी वार्ड में घुस सकता है।
रेजिडेंट डाॅक्टरों ने कहा कि बड़ी संख्या में स्वजन और कई असामाजिक तत्व बिना किसी जांच के गलियारों में बैठे रहते हैं।
मरीजों के स्वजन द्वारा दुर्व्यवहार के समय भी मौके पर गार्ड नहीं होता है, हमें उसे ढूंढना पड़ता है।
कमरों के दरवाजे टूटे, कैमरा भी नहीं
वर्तमान में यहां बने ड्यूटी रूम में कोई सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हैं। कमरों के दरवाजे भी टूटे हुए हैं। कई बार कोई गार्ड भी ड्यूटी पर नहीं होता है। अस्पताल के कर्मचारियों के अनुसार मेडिसिन विभाग में 63 ड्यूटी डाॅक्टर हैं और एक समय में 15 से अधिक ड्यूटी पर रहते हैं, लेकिन यहां सिर्फ दो सामान्य ड्यूटी रूम हैं, जो काफी छोटे हैं। शौचालय की स्थिति खराब है, टूटे हुए बिस्तर हैं और वेंटिलेशन के लिए कोई जगह नहीं है। कई बिस्तरों पर तो सिर्फ सामान ही रखा जा रहा है।
इतनी बार कर चुके शिकायत
मरीज के स्वजन द्वारा दुर्व्यवहार की शिकायत 30 मार्च 2024 को दर्ज कराई गई थी।
सुरक्षा चूक की ऐसी ही स्थिति को लेकर 10 मई 2024 को शिकायत दर्ज की गई थी।
29 अक्टूबर 2023 को तीन स्वजन ने डाॅक्टरों पर हमला किया, लेकिन गार्ड मूकदर्शक बने रहे।
एक मरीज के स्वजन के खिलाफ हिंसा की शिकायत दर्ज की गई थी।
29 नवंबर 2023 को पुलिस को भी सूचित किया गया था।
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