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हिमाचल के संगड़ाह क्षेत्र में धार्मिक आस्था और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर प्रहार का एक गंभीर मामला सामने आया है। गांव लगनू में रहने वाले नागा साधु प्रवेश गिरी ने आरोप लगाया है कि स्थानीय पंचायत उप-प्रधान और अन्य ग्रामीणों ने उनके साथ मारपीट की और उनकी धार्मिक पहचान (जटाएं और दाढ़ी) को जबरन काट दिया। घटना का मुख्य विवरणतारीख: यह घटना 15 जनवरी की बताई जा रही है, जिसका वीडियो अब वायरल हुआ है।आरोपी: पंचायत उप-प्रधान सत्तपाल तोमर, स्थानीय निवासी लेखराम और सुरेश के खिलाफ नामजद शिकायत दर्ज की गई है।आरोपियों का तर्क: ग्रामीणों का आरोप है कि साधु शराब पीकर गांव में हंगामा करता था, हालांकि कानूनन किसी की धार्मिक पहचान को नुकसान पहुंचाना अपराध है। पुलिस की कार्रवाई और धाराएं पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है:धारा 299: धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर आहत करना।धारा 122(2): आपराधिक धमकी और बल प्रयोग।धारा 392(2): शारीरिक हिंसा और गंभीर आपराधिक कृत्य।धारा 3(5): सामूहिक रूप से अपराध को अंजाम देना।
साधु का नया बयान: "धमकियां मिल रही हैं" पीड़ित नागा साधु ने एक नया वीडियो जारी कर आरोप लगाया है कि उन पर FIR वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उप-प्रधान ने उन पर झूठा केस दर्ज करवाया है और उन्हें जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। उन्होंने इसे 'सनातन धर्म का अपमान' करार दिया है।
मामले के प्रमुख बिंदुपक्षविवरणपीड़ितनागा साधु प्रवेश गिरी (पिछले 4-5 साल से गांव में रह रहे थे) मुख्य आरोपीसत्तपाल तोमर (पंचायत उप-प्रधान)विवाद का कारणग्रामीणों द्वारा साधु के व्यवहार पर आपत्ति, साधु द्वारा धार्मिक प्रताड़ना का आरोप कानूनी स्थितिसंगड़ाह थाना में FIR दर्ज, पुलिस साक्ष्य (वीडियो) की जांच कर रही है।
धार्मिक महत्व: नागा साधुओं के लिए उनकी जटाएं और दाढ़ी केवल बाल नहीं, बल्कि उनके संन्यास और साधना का प्रतीक होती हैं। इस कृत्य को कानून और समाज दोनों में धार्मिक असहिष्णुता के रूप में देखा जा रहा है।
क्या है पंचकोशी परिक्रमा ?
पंचकोशी परिक्रमा का अर्थ है पांच प्रमुख तीर्थों की यात्रा करना. पंचकोशी परिक्रमा धार्मिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है. पंचकोशी परिक्रमा करने से आत्मा शुद्ध होती है. भगवान के प्रति भक्ति और समर्पण का भाव बढ़ता है. वाराणसी की बात करें तो यहांपंचकोशी परिक्रमा की शुरुआत मणिकर्णिका घाट से होती है. पंचकोशी परिक्रमा कर्दमेश्वर, भीमचंडी, रामेश्वर, शिवपुर, कपिलधारा से होते हुए फिर मणिकर्णिका घाट पर ही खत्म होती है.
नागा साधु क्यों करते हैं परिक्रमा ?
पंचकोशी परिक्रमा नागा साधुओं के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण मानी जाती है. पंचकोशी परिक्रमा में नागा साधु और अखाड़ों के संत शामिल होते हैं. पंचकोशी परिक्रमा के दौरान नागा साधु तीर्थ स्थलों के दर्शन करते हैं. साथ ही इस परिक्रमा के दौरान नागाओं को अपने आराध्यदेव के स्थल पर जाने का अवसर भी मिलता है. पंचकोशी परिक्रमा करके उन्हें आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है. पंचकोशी परिक्रमा उनके ज्ञान, विवेक और आत्मबल को बढ़ाने में सहायक सिद्ध होती है. पंचकोशी परिक्रमा से नागा साधु आत्मिक शांति प्राप्त करते हैं. मान्यता है कि पंचकोशी परिक्रमा मोक्ष के द्वार भी खोलती है.
पंचकोशी परिक्रमा का महत्व
मान्यताओं के अनुसार, जो पंचकोशी परिक्रमा करता है उसके सभी पापों का नाश हो जाता है. जीवन में सुख-समृद्धि और शांति का आगमन होता है. पंचकोशी परिक्रमा पवित्रता, तपस्या, और भक्ति का प्रतीक मानी जाती है. पंचकोशी परिक्रमा पांच विकारों काम, क्रोध, मोह, मद और लोभ से मुक्ति दिला देती है. जो भी पंचकोशी परिक्रमा करता है उसको सभी तीर्थों के दर्शन के बराबर का पुण्य मिल जाता है. पंचकोशी परिक्रमा करने वाले के कुल को भी शुभ फल मिलते हैं.