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भोपाल में स्वच्छ सर्वेक्षण के लिए टीम अगले 2 दिन के अंदर आ सकती है। टीम के आने से पहले नगर निगम वह सभी कवायदें कर रहा है, जो उसे बेहतर अंक दिला सके। सोमवार को जोन-9 के पंजाबी बाग में एक गली में समुद्र की आकृति की उकेर दी गई। दूसरी ओर, लोगों को बेहतर फीडबैक के लिए प्रेरित भी किया जा रहा है। हालांकि, इस बार भोपाल को कागजों के साथ जमीन पर भी सफाई साबित करनी होगी।
85 वार्ड, 40 स्कूल और हर कोना होगा स्कैन
इस बार सर्वेक्षण टीम का दायरा पहले से कहीं बड़ा है। टीम भोपाल के सभी 85 वार्डों में जाएगी और सफाई व्यवस्था का ग्राउंड लेवल पर निरीक्षण करेगी। इसके अलावा लगभग 40 स्कूलों में भी स्वच्छता की स्थिति जांची जाएगी। बच्चों के आसपास का वातावरण, कचरा प्रबंधन और जागरूकता स्तर भी रैंकिंग का हिस्सा होगा।
नगर निगम ने दिए सख्त निर्देश
स्वच्छ सर्वेक्षण को देखते हुए नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने कचरा ट्रांसफर स्टेशनों की स्थिति सुधारने और मिश्रित कचरा संग्रहण पर पूरी तरह रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। निगम प्रशासन ने नागरिकों से भी अपील की है कि वे गीला और सूखा कचरा अलग-अलग दें, ताकि शहर को स्वच्छ सर्वेक्षण में बेहतर रैंकिंग मिल सके।
शहर को चमकाने की कोशिश जारी
नगर निगम ने शहर को आकर्षक दिखाने के लिए कई जगहों पर पेंटिंग, 3D आर्ट और स्क्रैप से बनी कलाकृतियां लगाई हैं। लगभग 60 हजार वर्गफीट क्षेत्र को इस तरह सजाया गया है।
इसी वजह से सड़कों की सफाई, नालों की सफाई, सार्वजनिक शौचालयों की सफाई, बैक लेन में पेंटिंग और बाजारों में टाइल्स लगाने का काम शुरू किया गया है। न्यू मार्केट, 10 नंबर मार्केट, पुराना शहर, करोंद, कोलार, बैरागढ़ जैसे बड़े बाजारों में सौंदर्यीकरण और कचरा उठाने के काम को प्राथमिकता दी जा रही है।
ये बड़ी चुनौती
हालांकि, जमीन पर अब भी कई जगह गंदगी, टूटे डस्टबिन, उखड़ी सड़कें और खुले नाले जैसी समस्याएं बनी हुई हैं। ऐसे में विजिबल क्लीनलीनेस के लिए तय 1500 अंक भोपाल के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
स्वच्छता रैंकिंग कैसे तय होगी?
इस बार सिस्टम पूरी तरह डेटा और ग्राउंड रियलिटी पर आधारित है। रैंकिंग ऑन-ग्राउंड असेसमेंट, सिटीजन फीडबैक, विजिबल क्लीनलीनेस (1500 अंक), ODF/ODF++ और वॉटर प्लस (1000 अंक) और गारबेज फ्री सिटी रेटिंग (1000 अंक) जैसे पैरामीटर्स पर तय होगी।
बाजारों में सबसे बड़ी चुनौती
भोपाल के न्यू मार्केट, 10 नंबर मार्केट, पुराना शहर, कोलार, करोंद और बैरागढ़ जैसे बड़े बाजारों में भी सफाई एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है। नियम के अनुसार रिहायशी इलाकों में रोज एक बार सफाई, बाजार और स्टेशन और फूड जोन में दिन में दो बार सफाई जरूरी है, लेकिन कई जगह यह सिस्टम अभी भी पूरी तरह लागू नहीं हो पाया है।
बैक लेन और गलियों पर खास फोकस
शहर की बैक लेन यानी पीछे की गलियां भी इस बार स्कोरिंग का बड़ा हिस्सा हैं। यहां सफाई और रखरखाव के लिए 200 अंक तय किए गए हैं। कई जगहों पर इन गलियों में रंगीन पेंटिंग और सफाई अभियान चल रहे हैं, लेकिन स्थायी सुधार अभी बाकी है।
दीवारें साफ, लेकिन नीचे कचरा
150 अंकों वाले इस पैरामीटर में सार्वजनिक जगहों को साफ रखना जरूरी है खासतौर पर पान-गुटखे के निशान और खुले में गंदगी से मुक्त रखना। लेकिन हकीकत यह है कि कई जगह बैरिकेड्स और दीवारें खुद अनचाही गंदगी पॉइंट बन चुकी हैं।
3 करोड़ की पेंटिंग का काम
शहर में वॉल पेंटिंग, म्यूरल्स और आर्टवर्क पर करीब 3 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। इसके साथ गड्ढामुक्त सड़क और ग्रीनरी बढ़ाने की कोशिश भी हो रही है। शहर में कुछ जोन में सफाई पूरी हो चुकी है। भानपुर में 50 करोड़ रुपए की लागत से एसटीपी प्रोजेक्ट भी चल रहा है, जो भविष्य की दिशा तय करेगा।
आदमपुर कचरा खंती- बड़ी चुनौती
भोपाल के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द आदमपुर कचरा खंती है। यहां जमा पुराना कचरा (legacy waste) आज भी वैसा ही है। कचरे का पहाड़, गंदा पानी का रिसाव और बार-बार आग लगने की घटनाएं। यह सब मिलकर शहर की रैंकिंग को हर साल नीचे खींचते हैं।
अंतिम दौर में इन कामों पर फोकस जानकारी के अनुसार, आवास और शहरी कार्य मंत्रालय ने स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 में विजिबल क्लीनलीनेस यानी जमीन पर दिखने वाली सफाई पर विशेष फोकस किया है। नई गाइडलाइंस के तहत शहरों की रैंकिंग 10 मुख्य इंडिकेटर्स के आधार पर तय होगी।
इसी वजह से निगम बैक लेन से लेकर नालों और कचरा पॉइंट तक सुधार कार्यों में जुटा है। सोमवार को पंजाबी बाग की बैक लेन का काम पूरा किया गया। मंगलवार को भी कई जगहों पर पेंटिंग को अंतिम रूप दिया जाएगा।
ऐसे तय होगी रैंकिंग
ऑन-ग्राउंड असेसमेंट और 10,500
सिटीजन फीडबैक
विजिबल क्लीनलीनेस 1,500
ODF/ODF++/वाटर प्लस 1,000
कचरा मुक्त शहर स्टार रेटिंग 1,000
ये कारण- सर्वेक्षण और चुनौती
बाजारों में कचरा बड़ी चुनौती
आवासीय क्षेत्रों और पार्कों में रोज एक बार, जबकि व्यावसायिक स्थलों, बस-रेलवे स्टेशनों, पर्यटन स्थलों और स्ट्रीट फूड जोन में दिन में दो बार सफाई जरूरी होगी। इस पैरामीटर के लिए सबसे ज्यादा 300 अंक हैं। कई मार्केट में अब भी कचरा और गंदगी बड़ी समस्या बनी हुई है।
गंदगी पर कट सकते हैं नंबर
घरों और दुकानों के पीछे की गलियों यानी बैक लेन की सफाई और रखरखाव के लिए 200 अंक तय हैं। शहर के कई इलाकों में बैक लेन में रंगीन पेंटिंग और सफाई अभियान जारी है।
बैरिकेड्स बिगाड़ रहे सफाई स्कोर
सार्वजनिक स्थलों और दीवारों को पान-गुटखे के धब्बों और खुले में पेशाब के निशानों से मुक्त रखने पर 150 अंक मिलेंगे। निर्माण कार्यों के दौरान लगाए गए बैरिकेड्स पीकदान बन चुके हैं। निगम ने एजेंसियों को इन्हें साफ करने की चेतावनी दी है, लेकिन हालात नहीं सुधरे हैं।
]]>दरअसल, शहर में नाम को बदलने के लिए पहला प्रयास नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने किया था। उन्होंने जून महीने में मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था और भोपाल के नवाब हमीदुल्लाह के नाम से संचालित हमीदिया अस्पताल, स्कूल और कॉलेज का नाम बदलकर राष्ट्र भक्तों के नाम पर किए जाने की अपील की थी।
स्कूल, अस्पताल के नाम बदलने का प्रस्ताव
इससे पहले भोपाल में कुछ स्थानों के नाम बदले गए हैं। सितंबर 2023 में हमीदिया रोड का नाम बदलकर गुरु नानक मार्ग किया गया था। यह कार्य नगर निगम द्वारा कर दिया गया था। लेकिन स्कूल, कॉलेज और अन्य स्थानों के नाम बदलने का अधिकार नगर निगम को नहीं है। इसीलिए नगर निगम ने प्रस्ताव पास करवाया है और इसे नगर निगम कमिश्नर को भेज दिया है।
नगर निगम की बैठक में मिली मंजूरी
24 जुलाई को नगर निगम परिषद की बैठक हुई थी। इसमें भाजपा पार्षद देवेंद्र भार्गव ने नाम बदलने का प्रस्ताव रखा था। तब इसके बाद जमकर हंगामा हुआ था। निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने कहा था कि नवाब हमीदुल्लाह गद्दार थे, उनका आरोप था कि नवाब ने भारत के आजाद होने के बाद भी 2 साल तक भोपाल रियासत का विलय नहीं होने दिया। वे इसे पाकिस्तान में शामिल कराना चाहते थे। वहीं, कांग्रेस ने आरोप पर पलटवार करते हुए कहा था कि यह निर्णय दुर्भाग्यपूर्ण है। इतिहास गवाह है कि नवाब हमीदुल्लाह ने इन संस्थान की स्थापना के लिए अपने निजी संपत्ति दान में दी थी।
राजधानी भोपाल में नगर निगम परिषद की बैठक आयोजित की गई थी। जिसमें हमीदिया अस्पताल, कॉलेज और स्कूल के नाम बदलने का प्रस्ताव पास हो गया है। वहीं, ओल्ड अशोका गार्डन का नाम 'राम बाग' करने का प्रस्ताव पारित हो गया है
हमीदिया अस्पताल का नाम बदलने का प्रस्ताव पास
नगर निगम परिषद की बैठक में हमीदिया अस्पताल, कॉलेज और स्कूल के नाम बदलने के नाम बदलने का प्रस्ताव जैसे ही पास हुआ। उसके बाद सदन में पाकिस्तान मुर्दाबाद और हिंदूस्तान जिंदाबाद के नारे लगने लगे। इसी दौरान कांग्रेसी और भाजपाई आमने-सामने आ गए।
राम बाग के नाम से जाना जाएगा ओल्ड अशोका गार्डन
नगर निगम की बैठक में ओल्ड अशोका गार्डन का नाम बदलकर राम बाग करने का प्रस्ताव पारित हुआ है। वहीं 80 फीट रोड स्थित विवेकानंद चौराहे का नाम विवेकानंद चौक का प्रस्ताव पारित हुआ है।
भोपाल के दूसरे नंबर पर आने स्वच्छता मित्रों को मिलेगा सम्मान
महापौर मालती राय ने बताया कि भोपाल देश में दूसरे नंबर पर आया है। नगर निगम के द्वारा 8 हजार स्वच्छता मित्रों को भोज और सम्मान किया जाएगा। 1 हजार कर्मचारियों को परमानेंट किया जाएगा। रक्षाबंधन से पहले वेतन दे दिया जाएगा।
]]>राजधानी भोपाल में एक बार फिर शासकीय नजूल भूमि पर हुए कथित घोटाले ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। “नानी की हवेली” नामक एक विवादास्पद कमर्शियल निर्माण परियोजना के मामले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) को एक विस्तृत, साक्ष्य-समर्थित शिकायत प्राप्त हुई है जिसमें प्रमुख नगर निवेशक (Chief Town Planner) अनूप गोयल, सुरेश चोटरानी और नरेश चोटरानी के खिलाफ गंभीर आर्थिक अनियमितताओं, भ्रष्टाचार और हवाला लेन-देन के आरोप लगाए गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज़ों में खुलासा हुआ है कि उक्त भूखंड, जिसका CLR नंबर 11180024089 है, राज्य शासन की नजूल संपत्ति के रूप में दर्ज है और 2013 से “शत्रु संपत्ति” घोषित है। इसके बावजूद, मुख्य नगर निवेशक अनूप गोयल द्वारा 3 फरवरी 2025 को डिजिटल हस्ताक्षर के माध्यम से इस भूखंड पर कमर्शियल निर्माण की अनुमति जारी की गई।
शिकायत के अनुसार न तो सुरेश और नरेश चोटरानी ने कोई वैध स्वामित्व दस्तावेज़ प्रस्तुत किया और न ही इस भूमि पर किसी प्रकार का नामांतरण हुआ है। बावजूद इसके, भवन अनुज्ञा जारी करना न केवल गंभीर प्रशासनिक चूक माना जा रहा है, बल्कि एक संभावित रिश्वत और बेनामी सौदेबाज़ी का संकेत भी दे रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरोप यह भी है कि इस भूखंड की स्वीकृति प्रक्रिया में भारी मात्रा में हवाला लेनदेन व नकद भुगतान हुआ, जिससे संपत्ति का बाजार मूल्य दर्जनों करोड़ रुपये तक पहुँच गया, लेकिन शासन को एक भी रुपया राजस्व के रूप में प्राप्त नहीं हुआ।
प्रमुख आपराधिक बिंदु जो उजागर हुए हैं:
• शासकीय नजूल भूमि को निजी संपत्ति दर्शाने की साजिश
• फर्जी दस्तावेजों पर भवन अनुमति जारी करना
• वैधानिक स्थिति स्पष्ट होने के बावजूद अधिकारी द्वारा स्वीकृति देना
• बेनामी संपत्ति का निर्माण एवं हवाला नेटवर्क के माध्यम से धनप्राप्ति
• न्यायालय के आदेशों की अवहेलना
सूत्रों के अनुसार, यह मामला केवल एक भूखंड तक सीमित नहीं है, बल्कि भोपाल में फैले एक बड़े भूमि नेटवर्क घोटाले का हिस्सा बताया जा रहा है, जिसमें दर्जनों नजूल या विवादास्पद सरकारी ज़मीनों को फर्जी कागज़ातों के सहारे निजी परियोजनाओं में परिवर्तित किया जा रहा है।
शिकायत में आरोप है कि अनूप गोयल के विरुद्ध पूर्व में भी नगर निगम व सामाजिक संगठनों द्वारा कई बार भ्रष्टाचार की शिकायतें की गई थीं, लेकिन उनके खिलाफ कभी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
मांग की गई कानूनी कार्रवाई में शामिल हैं:
• IPC की धारा 120B, 409, 420, 467, 468, 471 के अंतर्गत अभियोग
• भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988
• धनशोधन निवारण अधिनियम, 2002 (PMLA)
• बेनामी संपत्ति अधिनियम, 1988
• न्यायालय अवमानना अधिनियम, 1971
शिकायत में राजस्व दस्तावेज़, न्यायिक आदेशों की प्रतिलिपियाँ, भवन अनुज्ञा और स्वीकृति पत्रों सहित आवश्यक साक्ष्य संलग्न किए गए हैं।
EOW द्वारा इस शिकायत को दर्ज कर प्रारंभिक जांच प्रारंभ कर दी गई है।
यदि इस प्रकरण में दोषियों पर शीघ्र कठोर कार्रवाई नहीं होती, तो यह उदाहरण बन सकता है कि किस प्रकार राज्य की संपत्तियों को मिलकर लूटा जा सकता है — और यह चिंता का विषय न केवल भोपाल, बल्कि समस्त मध्यप्रदेश और देश के लिए है।
भोपाल में शत्रु संपत्ति की बंदरबांट, नानी की हवेली रिकॉर्ड में सरकारी, निगम ने जारी की बिल्डिंग परमिशन
राजधानी की बहुचर्चित नानी की हवेली मामले में नगर निगम की बिल्डिंग परमिशन शाखा की बड़ी गड़बड़ी सामने आई है. बिल्डिंग परमिशन शाखा ने नानी की हवेली के ऑनरशिप डॉक्यूमेंट की अनदेखी करते हुए इसकी भवन अनुज्ञा जारी कर दी. जबकि सरकारी रिकॉर्ड में नानी की हवेली अब भी नजूल की संपत्ति दर्ज है. उधर गड़बड़ी सामने आने के बाद बिल्डिंग परमिशन शाखा के अधिकारी अपनी गलती छुपाने में जुटे हैं. अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने यह भवन अनुज्ञा एसडीएम कार्यालय द्वारा जारी की गई अनापत्ति के आधार पर जारी की है.
बिना नामांतरण जारी कर दी अनुज्ञा
दरअसल, नानी की हवेली के मामले की सुनवाई वर्ष 2014 से जबलपुर हाईकोर्ट में चल रही है. जिसमें हाईकोर्ट 4 जनवरी 2023 को सुरेश चोटरानी और नरेश चोटरानी के पक्ष में फैसला सुना चुकी है. उधर जिला प्रशासन ने कोर्ट के फैसले के खिलाफ कोर्ट में रिट पिटीशन दायर की है. इस वजह से जिला प्रशासन द्वारा इसका नामांतरण नहीं किया गया. रिकॉर्ड में अभी भी नानी की हवेली शासकीय रिकॉर्ड में नजूल के नाम दर्ज है.
पुरानी एनओसी को बनाया आधार
नगर निगम की बिल्डिंग परमिशन शाखा के मुख्य नगर निवेशक अनूप गोयल ने 3 फरवरी 2025 को नानी की हवेली भूखंड पर कमर्शियल कॉम्पलेक्स की अनुज्ञा जारी कर दी. जबकि इसके लिए जरूरी भूखंड के ऑनरशिप की अनदेखी की गई. भवन अनुज्ञा के लिए आवेदक द्वारा प्रस्तुत की गई शहर एसडीएम की 3 अगस्त 2022 को जारी अनापत्ति को आधार बनाया गया. सीनियर एडवोकेट जगदीश छावानी के मुताबिक "जब मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन था, तो फैसले के पहले अनापत्ति की वैधानिकता ही नहीं है. हाईकोर्ट के फैसले के बाद राजस्व विभाग द्वारा कार्रवाई की जानी चाहिए थी."
शत्रु संपत्ति से जुड़ा है पूरा मामला
बताया जाता है कि 1947 में विभाजन के बाद कराची से आए कन्हैयालाल भाटिया को विस्थापित मानते हुए नुकसान की भरपाई के तौर पर मंगलवारा, जंहागीराबाद और सीहोर में आवास आवंटित किए थे, लेकिन इन आवासों पर अवैध कब्जा होने की वजह से उन्हें 28 दिसंबर 2005 को नानी की हवेली आवंटित कर दी थी. सीहोर में बस चुके भाटिया ने दिसंबर 2006 को नानी की हवेली का कब्जा लेकर सुशील कुमार धनवानी को इसकी पॉवर ऑफ अटॉनी बना दी थी. बाद में नानी की हवेली को सुरेश चोटरानी को विक्रय कर दिया गया था. हालांकि बाद में राज्य शासन ने इसे शत्रु संपत्ति मानकर इसे शासकीय घोषित कर दिया.
क्या कहते हैं अधिकारी
इस मामले में मुख्य नगर निवेशक अनूप गोयल का कहना है कि "नानी की हवेली के समय एसडीएम की अनुज्ञा प्रस्तुत की गई थी. हालांकि बाद में हाईकोर्ट का फैसला भी आवेदक के पक्ष में आया है. सभी दस्तावेज देखने के बाद ही भवन अनुज्ञा जारी की गई है. यदि इसमें कोई गड़बड़ी पाई जाएगी तो अनुज्ञा निरस्त कर दी जाएगी." वहीं एसडीएम शहर दीपक पांडे ने बताया कि "नानी की हवेली का मामला लंबे समय से चला आ रहा है. इस मामले में हाईकोर्ट का फैसला आया है. इस मामले में फिर से रिव्यू पिटीशन लगाई जा रही है."
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राजधानी भोपाल में एक बार फिर शासकीय नजूल भूमि पर हुए कथित घोटाले ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। “नानी की हवेली” नामक एक विवादास्पद कमर्शियल निर्माण परियोजना के मामले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) को एक विस्तृत, साक्ष्य-समर्थित शिकायत प्राप्त हुई है जिसमें प्रमुख नगर निवेशक (Chief Town Planner) अनूप गोयल, सुरेश चोटरानी और नरेश चोटरानी के खिलाफ गंभीर आर्थिक अनियमितताओं, भ्रष्टाचार और हवाला लेन-देन के आरोप लगाए गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज़ों में खुलासा हुआ है कि उक्त भूखंड, जिसका CLR नंबर 11180024089 है, राज्य शासन की नजूल संपत्ति के रूप में दर्ज है और 2013 से “शत्रु संपत्ति” घोषित है। इसके बावजूद, मुख्य नगर निवेशक अनूप गोयल द्वारा 3 फरवरी 2025 को डिजिटल हस्ताक्षर के माध्यम से इस भूखंड पर कमर्शियल निर्माण की अनुमति जारी की गई।
शिकायत के अनुसार न तो सुरेश और नरेश चोटरानी ने कोई वैध स्वामित्व दस्तावेज़ प्रस्तुत किया और न ही इस भूमि पर किसी प्रकार का नामांतरण हुआ है। बावजूद इसके, भवन अनुज्ञा जारी करना न केवल गंभीर प्रशासनिक चूक माना जा रहा है, बल्कि एक संभावित रिश्वत और बेनामी सौदेबाज़ी का संकेत भी दे रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरोप यह भी है कि इस भूखंड की स्वीकृति प्रक्रिया में भारी मात्रा में हवाला लेनदेन व नकद भुगतान हुआ, जिससे संपत्ति का बाजार मूल्य दर्जनों करोड़ रुपये तक पहुँच गया, लेकिन शासन को एक भी रुपया राजस्व के रूप में प्राप्त नहीं हुआ।
प्रमुख आपराधिक बिंदु जो उजागर हुए हैं:
• शासकीय नजूल भूमि को निजी संपत्ति दर्शाने की साजिश
• फर्जी दस्तावेजों पर भवन अनुमति जारी करना
• वैधानिक स्थिति स्पष्ट होने के बावजूद अधिकारी द्वारा स्वीकृति देना
• बेनामी संपत्ति का निर्माण एवं हवाला नेटवर्क के माध्यम से धनप्राप्ति
• न्यायालय के आदेशों की अवहेलना
सूत्रों के अनुसार, यह मामला केवल एक भूखंड तक सीमित नहीं है, बल्कि भोपाल में फैले एक बड़े भूमि नेटवर्क घोटाले का हिस्सा बताया जा रहा है, जिसमें दर्जनों नजूल या विवादास्पद सरकारी ज़मीनों को फर्जी कागज़ातों के सहारे निजी परियोजनाओं में परिवर्तित किया जा रहा है।
शिकायत में आरोप है कि अनूप गोयल के विरुद्ध पूर्व में भी नगर निगम व सामाजिक संगठनों द्वारा कई बार भ्रष्टाचार की शिकायतें की गई थीं, लेकिन उनके खिलाफ कभी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
मांग की गई कानूनी कार्रवाई में शामिल हैं:
• IPC की धारा 120B, 409, 420, 467, 468, 471 के अंतर्गत अभियोग
• भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988
• धनशोधन निवारण अधिनियम, 2002 (PMLA)
• बेनामी संपत्ति अधिनियम, 1988
• न्यायालय अवमानना अधिनियम, 1971
शिकायत में राजस्व दस्तावेज़, न्यायिक आदेशों की प्रतिलिपियाँ, भवन अनुज्ञा और स्वीकृति पत्रों सहित आवश्यक साक्ष्य संलग्न किए गए हैं।
EOW द्वारा इस शिकायत को दर्ज कर प्रारंभिक जांच प्रारंभ कर दी गई है।
यदि इस प्रकरण में दोषियों पर शीघ्र कठोर कार्रवाई नहीं होती, तो यह उदाहरण बन सकता है कि किस प्रकार राज्य की संपत्तियों को मिलकर लूटा जा सकता है — और यह चिंता का विषय न केवल भोपाल, बल्कि समस्त मध्यप्रदेश और देश के लिए है।
भोपाल में शत्रु संपत्ति की बंदरबांट, नानी की हवेली रिकॉर्ड में सरकारी, निगम ने जारी की बिल्डिंग परमिशन
राजधानी की बहुचर्चित नानी की हवेली मामले में नगर निगम की बिल्डिंग परमिशन शाखा की बड़ी गड़बड़ी सामने आई है. बिल्डिंग परमिशन शाखा ने नानी की हवेली के ऑनरशिप डॉक्यूमेंट की अनदेखी करते हुए इसकी भवन अनुज्ञा जारी कर दी. जबकि सरकारी रिकॉर्ड में नानी की हवेली अब भी नजूल की संपत्ति दर्ज है. उधर गड़बड़ी सामने आने के बाद बिल्डिंग परमिशन शाखा के अधिकारी अपनी गलती छुपाने में जुटे हैं. अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने यह भवन अनुज्ञा एसडीएम कार्यालय द्वारा जारी की गई अनापत्ति के आधार पर जारी की है.
बिना नामांतरण जारी कर दी अनुज्ञा
दरअसल, नानी की हवेली के मामले की सुनवाई वर्ष 2014 से जबलपुर हाईकोर्ट में चल रही है. जिसमें हाईकोर्ट 4 जनवरी 2023 को सुरेश चोटरानी और नरेश चोटरानी के पक्ष में फैसला सुना चुकी है. उधर जिला प्रशासन ने कोर्ट के फैसले के खिलाफ कोर्ट में रिट पिटीशन दायर की है. इस वजह से जिला प्रशासन द्वारा इसका नामांतरण नहीं किया गया. रिकॉर्ड में अभी भी नानी की हवेली शासकीय रिकॉर्ड में नजूल के नाम दर्ज है.
पुरानी एनओसी को बनाया आधार
नगर निगम की बिल्डिंग परमिशन शाखा के मुख्य नगर निवेशक अनूप गोयल ने 3 फरवरी 2025 को नानी की हवेली भूखंड पर कमर्शियल कॉम्पलेक्स की अनुज्ञा जारी कर दी. जबकि इसके लिए जरूरी भूखंड के ऑनरशिप की अनदेखी की गई. भवन अनुज्ञा के लिए आवेदक द्वारा प्रस्तुत की गई शहर एसडीएम की 3 अगस्त 2022 को जारी अनापत्ति को आधार बनाया गया. सीनियर एडवोकेट जगदीश छावानी के मुताबिक "जब मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन था, तो फैसले के पहले अनापत्ति की वैधानिकता ही नहीं है. हाईकोर्ट के फैसले के बाद राजस्व विभाग द्वारा कार्रवाई की जानी चाहिए थी."
शत्रु संपत्ति से जुड़ा है पूरा मामला
बताया जाता है कि 1947 में विभाजन के बाद कराची से आए कन्हैयालाल भाटिया को विस्थापित मानते हुए नुकसान की भरपाई के तौर पर मंगलवारा, जंहागीराबाद और सीहोर में आवास आवंटित किए थे, लेकिन इन आवासों पर अवैध कब्जा होने की वजह से उन्हें 28 दिसंबर 2005 को नानी की हवेली आवंटित कर दी थी. सीहोर में बस चुके भाटिया ने दिसंबर 2006 को नानी की हवेली का कब्जा लेकर सुशील कुमार धनवानी को इसकी पॉवर ऑफ अटॉनी बना दी थी. बाद में नानी की हवेली को सुरेश चोटरानी को विक्रय कर दिया गया था. हालांकि बाद में राज्य शासन ने इसे शत्रु संपत्ति मानकर इसे शासकीय घोषित कर दिया.
क्या कहते हैं अधिकारी
इस मामले में मुख्य नगर निवेशक अनूप गोयल का कहना है कि "नानी की हवेली के समय एसडीएम की अनुज्ञा प्रस्तुत की गई थी. हालांकि बाद में हाईकोर्ट का फैसला भी आवेदक के पक्ष में आया है. सभी दस्तावेज देखने के बाद ही भवन अनुज्ञा जारी की गई है. यदि इसमें कोई गड़बड़ी पाई जाएगी तो अनुज्ञा निरस्त कर दी जाएगी." वहीं एसडीएम शहर दीपक पांडे ने बताया कि "नानी की हवेली का मामला लंबे समय से चला आ रहा है. इस मामले में हाईकोर्ट का फैसला आया है. इस मामले में फिर से रिव्यू पिटीशन लगाई जा रही है."
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सांसद आलोक शर्मा की शिकायत के बाद जागे नगर निगम ने रविवार को टीटी नगर नगर में कार्रवाई की, नगर निगम द्वारा सड़कों, फुटपाथों, कॉरीडोर व सार्वजनिक स्थलों आदि से अतिक्रमणों को हटाने तथा अवैध निर्माणों को तोड़ने तथा आवागमन में बाधक वाहनों को हटाने की कार्रवाई की गई,कार्रवाई में जिला प्रशासन और पुलिस विभाग भी शामिल रहा।
सांसद आलोक शर्मा ने की थी शिकायत
दरअसल सांसद आलोक शर्मा ने पुलिस कमिश्नर से कुछ दिनों पहले शिकायत की थी कि शहर के कई हिस्सों में कंडम वाहनों को बेतरतीब तरीके से खड़ा कर दिया जाता है यह वाहन सालों इसी तरह सड़क पर अतिक्रमण कर खड़े किए जाते है और यह रास्ते में अवरोध पैदा करते है। इन वाहनों को न सिर्फ हटाया जाए बल्कि इनके मालिकों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाए, जिसके बाद निगम के अतिक्रमण निरोधक दस्ते ने जिला प्रशासन के साथ कार्रवाई करते हुए एम.पी. नगर के विभिन्न क्षेत्रों में अवैध रूप से खड़े किए गए कंडम वाहन जप्त करने की कारवाई की साथ ही अवैध रूप से बने शेड, छप्पर आदि भी जे.सी.बी के माध्यम से तोड़ने की कार्रवाई की।
भोपाल नगर निगम की सख्ती जारी, सड़क पर सालों से खड़े कंडम वाहन किए जब्त, अवैध तरीके से खड़ी लग्जरी गाड़ियां क्रेन से खींची
हटाए वाहन
निगम के अतिक्रमण निरोधक दस्ते के दलों ने रविवार को जिला प्रशासन की कार्यवाही में सहयोग करते हुए एम.पी. नगर जोन-1 एवं जोन-2 के विभिन्न क्षेत्रों में अवैध रूप से खड़े किए गए लगभग 25 वाहनों को जप्त किया। निगम अमले ने क्रेन व डम्पर आदि के माध्यम से उपरोक्त वाहनों को जप्त कर टी.टी. नगर दशहरा मैदान में रखवाया। कार्यवाही के दौरान एस.डी.एम., तहसीलदार व जिला प्रशासन एवं निगम के अधिकारी मौजूद थे।
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इंदौर नगर निगम के द्वारा शहरभर से कचरा समेटने के लिए 900 से ज्यादा गाड़ियों का संचालन किया जाता है, जिनमें से कई पुरानी डीजल गाड़ियां हैं। इन गाड़ियों पर हर माह करीब 4 करोड़ रुपये का डीजल खर्च होता है। हाल ही में नगर निगम ने सीएनजी गाड़ियां भी खरीदी थीं, लेकिन इनकी लागत भी अपेक्षाओं के मुताबिक नहीं रही। इसके चलते अब नगर निगम ने बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिक गाड़ियों की खरीदारी की योजना बनाई है।
बार बार खराब हो रही डीजल गाड़ियां
नगर निगम द्वारा शहर के 85 वार्डों में कचरा उठाने के लिए रोज़ाना बड़ी संख्या में हल्ला गाड़ियां दौड़ाई जाती हैं। इसके साथ-साथ बड़े वाहनों के जरिए बल्क में कचरा भी उठाया जाता है। हालांकि, इनमें से अधिकांश पुरानी डीजल गाड़ियां बार-बार खराब हो जाती हैं, जिससे निगम को अतिरिक्त खर्च का सामना करना पड़ता है।
सीएनजी गाड़ियों के रिजल्ट भी अच्छे नहीं रहे
सीएनजी गाड़ियां खरीदी जाने के बाद भी खर्च कम नहीं हुआ और इनकी कार्यक्षमता भी उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। इसी कारण निगम ने एक माह पहले 100 इलेक्ट्रिक हल्ला गाड़ियां खरीदी थीं, जिनका संचालन अब विभिन्न वार्डों में कचरा उठाने के लिए किया जा रहा है। इन इलेक्ट्रिक गाड़ियों की कार्यक्षमता बेहतर रही है और अब इन्हें धीरे-धीरे डीजल गाड़ियों की जगह दी जा रही है। इसके साथ-साथ इन गाड़ियों के लिए चार्जिंग स्टेशन और वर्कशॉप विभाग में तैयार किए जा रहे हैं।
4 करोड़ रुपए का खर्च डीजल और सीएनजी पर आ रहा
नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि हर महीने 4 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च डीजल और सीएनजी पर आता है, जिसे कम करने के लिए अब सौ और इलेक्ट्रिक गाड़ियां खरीदी जाएंगी। इन नई गाड़ियों के लिए प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं और पुरानी खटारा गाड़ियों को नीलाम करने की भी योजना है।
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जुर्माने पर नेता प्रतिपक्ष की आपत्ति
सदन की बैठक में कचरा फैलाने वालों पर 50 हजार रुपए तक की जुर्माने के प्रस्ताव पर नेता प्रतिपक्ष रमेश मिश्रा ने भारी विरोध किया, नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि लोगों के घरों तक डोर टू डोर कचरा कलेक्शन नहीं हो रहा है, सफाई व्यवस्था भ्रष्टाचार है ऐसे में कचरा फैलाने पर जुर्माना लगाना कहीं से भी उचित नहीं है।
निगम की बैठक में मुआवजा राशि, महापुरुषों के नाम के मार्गों का नामकरण, आउटसोर्स श्रमिकों को समय वृद्धि एवं एक राष्ट्र एक चुनाव जैसे महत्वपूर्ण विषय पारित किए गए। खास बात यह रही कि सदन की इस बैठक में 18 मिनट में 18 प्रस्ताव सर्व सम्मति से पास किए गए।
]]>इंदौर नगर निगम भले ही दावा करे कि उसने मास्टर प्लान की 23 सड़कों का काम शुरू करने की तैयारी पूरी कर ली है, लेकिन वास्तविकता यह है कि अब तक विस्थापन को लेकर कोई नीति तय ही नहीं हुई है।
मास्टर प्लान की 23 सड़कों के निर्माण में 2875 मकान बाधक हैं। इनमें से करीब 650 ऐसे हैं, जो पूरी तरह से खत्म हो जाएंगे यानी इन मकानों में रह रहे लोगों को वैकल्पिक स्थान देने के अलावा नगर निगम के पास कोई चारा नहीं है।
चौड़ीकरण में जा रहा मकान
नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मास्टर प्लान की सड़कों को लेकर हुई विभागों की बैठक में कहा था कि जो लोग पीढ़ियों से रह रहे हैं और जिनका पूरा मकान चौड़ीकरण में जा रहा है, उन्हें वन बीएचके नहीं, कम से कम टू या थ्री बीएचके फ्लैट दिए जाएं।
फ्लैट नहीं हैं
समस्या यह है कि नगर निगम के पास शहरी क्षेत्र में कहीं भी टू या थ्री बीएचके फ्लैट नहीं हैं। ऐसे में सवाल यह है कि जब निगम के पास टू और थ्री बीएचके फ्लैट उपलब्ध ही नहीं हैं तो विस्थापितों को देंगे कैसे। अब तक निगम ने यह भी तय नहीं किया है कि किस व्यक्ति को कहां विस्थापित किया जाएगा।
किसे क्या मिलेगा, यह अब तक तय नहीं
सड़क चौड़ीकरण में जिन लोगों के मकान शत प्रतिशत जाते हैं, उन्हें नीति के तहत नगर निगम प्रधानमंत्री आवास योजना में तैयार किए गए वन बीएचके फ्लैट देता रहा है। शहर में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 12 हजार आवास तैयार किए गए थे, जिनमें से करीब चार हजार अब भी खाली हैं, लेकिन ये सभी शहर के बाहरी इलाकों में हैं।
समस्या यह भी है कि नगर निगम ने अब तक ऐसी कोई सूची तैयार नहीं की है, जिससे यह पता चल सके कि किस व्यक्ति को कहां फ्लैट दिया जाएगा। अब तक चली आ रही नीति में एक समस्या यह भी है कि सड़क चौड़ीकरण के लिए एक हजार वर्गफीट का मकान देने वाले और 200 वर्गफीट का मकान देने वालों को एक ही चश्मे से देखा जाता है।
मध्यप्रदेश में शहरों को संवारने की कवायद चल रही है। इसके अंतर्गत इंदौर शहर में मास्टर प्लान की 23 सड़कों का निर्माण किया जाना है। चार पैकेज में बांटे गए इस प्रोजेक्ट के पहले चरण में हर पैकेज की दो-दो सड़कों को लिया गया है। सड़क निर्माण के लिए हजारों मकान दुकान तोड़े जाएंगे जिससे भवन मालिक बेचैन हो गए हैं। इधर, सड़कों का काम जल्द शुरू हो, बाधक हटाने में विवाद न हो और गुणवत्तापूर्ण निर्माण हो, इसके लिए विभागीय मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने महापौर पुष्यमित्र भार्गव, विधायक, सांसद और एमआइसी सदस्यों के साथ समीक्षा बैठक की।
नई सड़कों के लिए छोटे-बड़े करीब 3 हजार बाधक मकान और धार्मिक स्थल चिन्हित किए गए हैं। जिनके पूरे मकान तोड़े जाने हैं, उन्हें जनप्रतिनिधियों ने प्लॉट देने की पैरवी की। अफसरों ने कहा कि यह प्रावधान नहीं है, हम सिर्फ फ़्लैट दे सकते हैं, वह भी वन बीएचके। इस पर मंत्री विजयवर्गीय ने कलेक्टर आशीष सिंह ने कहा कि वह टू या थ्री बीएचके का फ़्लैट देने का प्रपोजल दें, मैं स्वीकृति दूंगा।
बैठक में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि कुछ हजार लोगों के लिए लाखों लोगों को सड़क का लाभ मिलने से वंचित नहीं किया जा सकता। शहर हित में कड़े निर्णय लेना जरूरी है। विधायक रमेश मेंदोला ने कहा कि भमोरी में कई लोगों की दुकानें जा रही हैं। ऐसे तो व्यापारी मर जाएंगे। विजयवर्गीय ने दो टूक कहा कि ऐसा ही रहा तो काम ही नहीं कर पाएंगे। मकान की व्यवस्था करेंगे, दुकान की नहीं।
विधायक रमेश मेंदोला ने कहा कि सड़क को 80 फीट की कर दें। विजयवर्गीय ने जवाब दिया कि शहर पहले ही छोटा पड़ रहा है। आप 1000 लोगों की चिंता मत करो, 40 लाख लोगों की करो। सड़क छोटी कर दोगे तो 10 साल बाद फिर कुछ करना पड़ेगा।
बैठक में एक अहम मसला उठा। निगम ने गणेशगंज में कुछ लोगों को विंध्यांचल कॉलोनी में एक बिल्डर के यहां शिफ़्ट करवाया था। इसके बाद से अफसरों ने इस बिल्डिंग को खाली नहीं करवाया है। इसकी शिकायत मंत्री कैलाश विजयवर्गीय तक पहुंची तो समीक्षा बैठक में उन्होंने कहा कि विस्थापितों को मकान देने के बाद भी निजी बिल्डिंग खाली नहीं करवाई है। काकाजी का राज चल रहा है क्या। किसी की भी बिल्डिंग ले लोगे। 15 दिन में बिल्डिंग खाली हो जानी चाहिए।
विधायक रमेश मेंदोला ने कहा कि पाटनीपुरा में तीन मंजिला दुकान तोड़ी थी। उसके बदले मकान आज तक नहीं मिला। एक पार्षद ने कहा कि एरोड्रम से छोटा बांगड़दा क्षेत्र में निगम की दो प्रॉपर्टी में से एक पर धर्मशाला तो दूसरे पर स्कूल बन गया है। मंत्री ने कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बैठक में विधानसभावार प्रेजेंटेशन देखा। बताया गया कि शहर के पुराने मकानों में पीढ़ियों से लोग रह रहे हैं। उनके लिए बीच का रास्ता निकालना चाहिए, सड़क की चौड़ाई कम करने पर भी विचार होना चाहिए। विजयवर्गीय ने अफसरों से कहा कि व्यक्तिगत जाकर सर्वे करो, अगर पूरे मकान जा रहे हैं तो कुछ करेंगे। मेरा मार्गदर्शन लेना, मैं तो निर्दयी हूं। किसी का भी वार्ड हो, मास्टर प्लान की सड़क को लेकर काम होना चाहिए। ऐसी कोई योजना भी बनाएं, जिसमें पीड़ितों को प्लॉट मिल सकें।
जहां सड़क निर्माण होगा, वहां नगर निगम बोर्ड चस्पा करेगा। इसमें लागत, ठेकेदार, समय सीमा और सुपरविजन करने की जानकारी दी जाएगी। महापौर हर 15 दिन में इसकी समीक्षा कर रिपोर्ट मंत्री विजयवर्गीय को देंगे। मंत्री ने कहा कि यदि कहीं धार्मिक स्थल की बाधा है तो हम बात करेंगे।
]]>पूर्व पार्षद सुनील जैन ने कहा कि शहर में स्वच्छता बनाए रखने के लिए निगम आयुक्त एवं प्रशासन नित नए प्रयोग कर रहे हैं, जिससे शहर को साफ सुथरा रखा जा सके. इन सभी प्रयासों का एक ही उद्देश्य है कि खंडवा शहर भी स्वच्छता के मामले में नंबर वन बने. अलग-अलग प्रयोग करके आम जनता के साथ मिलकर स्वच्छता की इस मुहिम को आगे बढ़ाया जा रहा है. पहले रविवार के दिन छुट्टी होने की वजह से कचरा इकट्ठा हो जाता था. कई लोग कचरा बाहर फेंक देते थे जिसकी वजह से परेशानियां होती थीं, लेकिन अब नगर निगम प्रशासन एवं महापौर के आदेश अनुसार रविवार के दिन भी डोर टू डोर कचरा वाहन जाएंगे और कचरा इकट्ठा करेंगे. प्रशासन की मुहिम यही है कि खंडवा शहर को फिर से नंबर वन बनाया जाए और साफ सफाई हर जगह रखी जाए.
हालांकि यह समस्या कई दिनों से थी, रविवार अवकाश होने की वजह से लोगों को मजबूरन कचरा बाहर इकट्ठा करना पड़ता था, लेकिन प्रशासन की इस मुहिम की वजह से अब लोगों को कचरा इकट्ठा नहीं करना पड़ेगा और वाहन डोर टू डोर जाकर कचरा इकट्ठा करके इसका निष्पादन करेगा. इससे यह कह सकते हैं कि सप्ताह भर कचरा वाहन चलने की वजह से कहीं ना कहीं शहर में साफ सफाई जरूर बढ़ेगी.
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