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नीदरलैड्स के द हेग को दुनिया 'सिटी ऑफ पीस' के रूप में जाना जाता है. पीएम मोदी ने यहां भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए कई अहम बाते शेयर की. प्रधानमंत्री ने कहा आज का भारत बड़े सपने देख रहा है. भारत ने चांद पर भी वहां पहुंचकर इतिहास रचा, जहां दुनिया का कोई देश पहले नहीं पहुंच सका।
पीएम मोदी ने कहा कि जब भी उनकी नीदरलैंड्स के नेतृत्व से बातचीत हुई, उन्होंने हमेशा भारतीय समुदाय की प्रशंसा की. समय के साथ कई चीजें बदल गईं, लेकिन भारत की संस्कृति आज भी लोगों के दिलों में बसी हुई है. वक्त बदला, लेकिन संस्कार और अपनापन नहीं बदला। इसके साथ ही, प्रधानमंत्री मोदी ने 16 मई को बेहद विशेष दिन बताया. उन्होंने कहा कि आज के दिन 12 साल पहले 2014 में लोकसभा चुनाव के नतीजे आए थे।
प्रधानमंत्री ने कहा ये दशक दुनिया के लिए आपदाओं का दशक बना है. हालात नहीं सुधरे तो यह दशकों तक भारी पड़ सकता है. बता दें कि पीएम मोदी 5 देशों के दौरे पर हैं और शनिवार को नीदरलैंड्स पहुंचे। पीएम मोदी ने नीदरलैड्स में कहा कि भारत चिप मैन्युफैक्चरिंग और सेमीकंडक्टर सेक्टर में तेजी से बड़े कदम उठा रहा है. उन्होंने बताया कि देश में इस समय 12 सेमीकंडक्टर प्लांट्स पर काम चल रहा है, जिनमें से दो प्लांट्स में प्रोडक्शन भी शुरू हो चुका है. देश दुनिया की सबसे बड़ी गवर्नमेंट-फंडेड हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम योजना का संचालन कर रहा है।
PM मोदी ने नीदरलैंड्स में भारत की विशेषता बताते हुए कहा कि भारत ने UPI ट्रांजैक्शन के क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल की है. आज भारत में 2 लाख से ज्यादा स्टार्टअप सक्रिय हैं। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि जैसे नीदरलैंड्स दुनिया भर में ट्यूलिप के लिए प्रसिद्ध है, वैसे ही भारत कमल के लिए जाना जाता है.इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने भारत में हुए विधानसभा चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में रिकॉर्ड मतदान दर्ज किया गया है।
PM मोदी ने नीदरलैंड्स में बंगाल पर ली चुटकी, खूब लगे ठहाके
पीऐम मोदी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव और उसके परिणामों का जिक्र किया. इस दौरान पीएम मोदी ने उस शब्द का भी जिक्र किया, जो बीते कुछ दिनों पहले नंबर वन ट्रेंड पर था. जी हां, पीएम मोदी ने बंगाल रिजल्ट पर चुटकी लेते हुए झालमुड़ी का जिक्र किया. उन्होंने प्रवासी भारतीयों से पूछा कि क्या झालमुड़ी यहां भी पहुंच गई. पीएम मोदी के इतना बोलते ही लोग ठहाके लगाने लगे. इस तरह पीएम मोदी की बंगाल चुनाव पर टिप्पणी ने नीदरलैंड्स में खूब तालियां बटोरीं।
दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज यानी शनिवार को नीदरलैंड्स दौरे के दौरान झलमुड़ी का हल्के-फुल्के अंदाज में जिक्र किया. बता दें कि कुछ हफ्ते पहले वे पश्चिम बंगाल चुनाव प्रचार के दौरान बंगाली स्ट्रीट स्नैक झालमुड़ी खाते हुए नजर आए थे. इसके बाद पूरे चुनाव में इस झालमुड़ी की चर्चा हुई।
नीदरलैंड में झालमुड़ी का जिक्र
‘क्या झालमुड़ी नीदरलैंड्स भी पहुंच गई है?’ पीएम मोदी ने भारतीय समुदाय के लोगों से बातचीत के दौरान पूछा, जिस पर वहां मौजूद लोगों ने हंसी और तालियों के साथ प्रतिक्रिया दी. पीएम मोदी की यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर फिर चर्चा में आ गई. कारण कि हाल ही में झालमुड़ी बंगाल की राजनीतिक बातचीत का हिस्सा बन गई है. अप्रैल में पश्चिम बंगाल चुनाव प्रचार के दौरान पीएम मोदी ने झारग्राम में एक सड़क किनारे झालमुड़ी खाने के लिए अचानक रुक गए थे, जिसके बाद बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस के बीच राजनीतिक बहस छिड़ गई थी।
पीएम मोदी के स्पीच की खास बातें
नीदरलैंड्स में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत में लोकतांत्रिक भागीदारी पर भी बात की और कहा, ‘हर साल भारत में रिकॉर्ड तोड़ मतदान हो रहा है.’ 2024 लोकसभा चुनाव का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने बताया कि 64 करोड़ से ज्यादा लोगों ने वोट डाला, जो यूरोपीय संघ की आबादी से भी ज्यादा है. वहीं, आर्थिक संबंधों पर बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि प्रस्तावित भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौता नीदरलैंड्स और वहां के लोगों के लिए फायदेमंद होगा. उन्होंने भारतीय समुदाय को भारत और यूरोप के बीच ‘विश्वसनीय पुल’ भी बताया।
अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए उन्होंने कहा, ‘इतना प्यार और उत्साह… सच कहूं तो कुछ देर के लिए मैं भूल ही गया था कि मैं नीदरलैंड में हूं. ऐसे लग रहा है कि जैसे भारत में ही कहीं कोई फेस्टिवल चल रहा है।
भारतीय समुदाय के योगदान पर गौरवान्वित होते हुए कहा, ‘आप नीदरलैंड के समाज और यहां की इकोनॉमी में जो आपकी देन हैं उस पर हर भारतवासी को गर्व है. मैं आज इस अवसर पर नीदरलैंड की जनता और सरकार का आभार व्यक्त करता हूं. मैं यहां की जनता को 140 करोड़ भारतवासियों की तरफ से अपनी शुभकामनाएं देता हूं।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान भारत की विश्व को देन और भारतीय संस्कृति का उल्लेख करते हुए आगे कहा, यहां बैठे अनेक परिवारों की कहानी प्रवासन की कहानी नहीं, यह सांस्कृतिक आस्था के बीच तमाम संघर्षों के बीच प्रगति की कहानी है. उस दौर में तब किसी ने सोचा नहीं था कि दो महासागर पार करने के बाद भी भारतीयों की पहचान इतनी जीवंत रहेगी. आपके पूर्वज बहुत कुछ पीछे छोड़ गए, लेकिन कुछ चीजें उनके साथ रहीं, अपनी मिट्टी की खशबू, त्योहार की संस्कृति, भजन की धुनें और पूर्वजों के संस्कार. समय के साथ अनेक संस्कृतियां मिट गईं लेकिन भार की विविध संस्कृति अपने लोगों के दिलों में धड़कता है।
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इस बात का जवाब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की झुंझलाहट से ही मिल जाता है. आपको याद होगा जब ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने डॉलर का विकल्प बनाने को लेकर रूस, भारत और चीन को धमकी दी थी. ट्रंप ने कहा था कि अगर ब्रिक्स देश मिलकर डॉलर कमजोर करने की साजिश करते हैं तो इन देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगा दिया जाएगा. फिलहाल भारत ने ऐसी कोई कोशिश नहीं की और उस पर ट्रंप 50 फीसदी का टैरिफ लगा चुके हैं. जाहिर है कि उनके मन में इस बात को लेकर काफी डर है कि अगर तीनों देश साथ आ गए तो डॉलर को नुकसान हो सकता है.
कैसे दे सकते हैं डॉलर को टक्कर
अमेरिकी डॉलर को टक्कर देने के लिए भारत ने भले ही अभी तक कोई खास कदम न उठाया हो, लेकिन रूस और चीन लंबे समय से कोशिश कर रहे हैं. चीन ने अपने ज्यादातर साझेदारों से स्थानीय मुद्रा युआन में कारोबार बढ़ाना शुरू कर दिया है. रूस ने भी यूक्रेन युद्ध के बाद डॉलर में लेनदेन को काफी हद तक कम किया है और अपनी स्थानीय मुद्रा में कारोबार कर रहा है. वैसे तो भारत ने भी ईरान, रूस सहित कुछ देशों के साथ रुपये में लेनदेन किया है, लेकिन अभी तक ग्लोबल मार्केट में कोई उल्लेखनीय डील स्थानीय करेंसी में नहीं हुई. हां, अगर तीनों ही देश मिलकर अपनी-अपनी करेंसी में कारोबार शुरू करते हैं तो डॉलर को कड़ी टक्कर दी जा सकती है.
क्या हो सकती है रणनीति
अमेरिका को अपनी बादशाहत कायम रखने और कारोबार बढ़ाने के लिए बड़े बाजार की जरूरत है. यह बात पूरी दुनिया को पता है कि भारत और चीन दो सबसे बड़ी जनसंख्या यानी उपभोक्ता वाले देश हैं. यही दोनों देश दुनिया की फैक्ट्री भी हैं. चीन तो सबसे बड़ा उत्पादक देश है, जबकि भारत दुनिया की दूसरी फैक्ट्री बनने की राह पर है. इसका मतलब है कि यह दोनों देश न सिर्फ बड़े उत्पादक हैं, बल्कि सबसे बड़े उपभोक्ता वाले देश भी हैं. अगर रूस के साथ मिलकर ये तीनों देश अपनी मुद्रा में लेनदेन और कारोबार करते हैं तो निश्चित रूप से डॉलर को बड़ी चुनौती मिल सकती है.
तीनों देशों में कितना कारोबार
भारत, रूस और चीन का आपस में कुल व्यापार भी लगातार बढ़ता जा रहा है. वित्तवर्ष 2023-24 में रूस और भारत के बीच द्विपक्षीय कारोबार 65 अरब डॉलर से ज्यादा रहा था, जबकि भारत और चीन का कारोबार 130 अरब डॉलर से अधिक रहा है. इसी तरह, रूस और चीन का कारोबार भी 200 अरब डॉलर से ज्यादा ही रहा. इस तरह, अगर तीनों देशों के बीच कुल कारोबार को देखा जाए तो यह करीब 390 अरब डॉलर के आसपास रहा है. इसके 400 अरब डॉलर से भी ज्यादा पहुंचने का अनुमान है.
भारत-रूस और चीन का कितना ग्लोबल कारोबार
भारत का कारोबार : पिछले वित्तवर्ष 2024-25 में भारत का कुल अंतरराष्ट्रीय व्यापार करीब 1,830 अरब डॉलर (1.83 ट्रिलियन डॉलर के आसपास) रहा है. इसमें प्रोडक्ट का कारोबार करीब 1,300 अरब डॉलर और सेवाओं का आयात-निर्यात 500 अरब डालर से ज्यादा रहा है.
चीन का कुल कारोबार : चीन ने पिछले वित्तवर्ष 3.59 ट्रिलियन डॉलर का सामान दुनियाभर में निर्यात किया और 2.56 ट्रिलियन डॉलर का सामान मंगाया. इस तरह, सामान का कुल कारोबार 6.15 ट्रिलियन डॉलर रहा, जबकि सेवाओं का कारोबार मिला दें तो यह आंकड़ा 7.56 ट्रिलियन डॉलर पहुंच जाता है.
रूस का कितना कारोबार : पिछले वित्तवर्ष में रूस ने दुनियाभर को 424 अरब डॉलर का सामान बेचा और दुनिया से 304 अरब डॉलर का सामान खरीदा. यानी कुल कारोबार रहा 728 अरब डॉलर का. इसमें सेवाओं का कारोबार जोड़ दिया जाए तो यह 117 अरब डॉलर और बढ़कर करीब 865 अरब डॉलर पहुंच जाएगा.
तीनों का कितना कारोबार : इस तरह रूस, चीन और भारत का कुल अंतरराष्ट्रीय कारोबार करीब 10 ट्रिलियन डॉलर से भी ज्यादा का रहा है.
अमेरिका का कितना ग्लोबल कारोबार
साल 2024 में अमेरिका का कुल कारोबार करीब 7 ट्रिलियन डॉलर का रहा है. इसमें प्रोडक्ट के निर्यात का हिस्सा 2 ट्रिलियन डॉलर और आयात का हिस्सा 3.37 ट्रिलियन डॉलर रहा. इसका मतलब है माल का कुल कारोबार 5.43 ट्रिलियन डॉलर रहा, जबकि सर्विस का निर्यात 928 अरब डॉलर और आयात 700 अरब डॉलर रहा. सर्विस का कुल कारोबार 1.63 ट्रिलियन डॉलर रहा है और कुल कारोबार 7 ट्रिलियन डॉलर के आसपास पहुंच गया है.
आंकड़ों में कौन आगे
अगर तीनों ही देश अकेले-अकेले अमेरिका का मुकाबला करेंगे तो यह मुश्किल होगा, क्योंकि उसका कुल कारोबार चीन से भी ज्यादा है. लेकिन, अगर चीन-भारत और रूस मिलकर अमेरिका के सामने खड़े होते हैं तो यह आंकड़ा अमेरिका के कुल कारोबार से कहीं ज्यादा बैठता है. आंकड़े साफ बताते हैं कि अगर तीनों ही देश मिलकर अमेरिकी डॉलर के सामने खड़े होते हैं तो निश्चित रूप से इसका मुकाबला ग्लोबल मार्केट में कर सकते हैं.
मुख्य कार्यपाल अधिकारी जनपद पंचायत ने बताया कि कॉलोनी में 32 सहरिया हितग्राहियो के आवास बनाए गए हैं। इन आवासों की ख़ास बात ये है कि ये आवास शहरों की तर्ज पर डुप्लेक्स जैसे बनाये गए है। इन आवासों में अब विशेष पिछड़ी जनजाति के सहरिया हितग्राही निवास करेंगे। इसके अतिरिक्त इन आवास में घर-घर नल एवं विद्युत कनेक्शन की सुविधा दी गयी है, साथ ही सड़क, सामुदायिक भवन, चौपाल आदि की सुविधा भी दी जाएगी।
जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने बूड़दा पंचायत की जनमन कॉलोनी की पूर्णता में आ रही समस्त अड़चनों का समयसीमा में निराकरण किया और कॉलोनी की गुणवत्ता के लिए सूक्ष्मता से मॉनिटरिंग की। उनका कहना है कि समस्त जनमन कॉलोनी में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा गया है और आवास बेहद सुन्दर बनाए गए हैं। कॉलोनी का प्रथम आवास पूर्ण करने वाली श्रीमति ललिता का कहना है कि देश के प्रधानमंत्री मोदी का बहुत धन्यवाद, जिन्होंने हमारे लिए इतनी सुन्दर आवास कॉलोनी बनवाई, उन्होंने हमारे घर का सपना पूरा किया है।
कॉलोनी को पूर्ण करने में पोहरी ब्लॉक के सहायक यंत्री, इंजीनियर, सचिव आदि का मुख्य योगदान रहा है। इसके साथ ही राजस्व विभाग द्वारा स्थल चिन्हांकन में योगदान दिया गया। पीएम-जनमन योजना को 15 नवंबर 2023 को बिरसा मुंडा जयंती के अवसर पर विशेष पिछड़ी जनजातियों के उत्थान के लिए शुरू किया गया था। शिवपुरी जिले की जनपद शिवपुरी ने पीएम जनमन योजना में देश का पहला आवास और पहली कॉलोनी बनाकर, देश में प्रदेश का नाम रोशन किया था। साथ ही सर्वप्रथम 100 आवास, एक हजार आवास तथा 2 हजार आवास भी शिवपुरी जिले में पूर्ण किये गये हैं।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज राजस्थान की राजधानी जयपुर पहुंचे। मरुधरा को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए वे 46, 300 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन करेंगे। पीएम मोदी करीब 3 घंटे तक जयपुर में रहेंगे। इस दौरान वह वाटिका रोड पर आयोजित एक वर्ष-परिणाम उत्कर्ष कार्यक्रम में शामिल होंगे और वहां से बिजली, पानी, सड़क, रेलवे से जुड़ी 46300 करोड़ रुपये से अधिक की 24 परियोजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास करेंगे।
इसके अलावा पीएम मोदी पार्वती-कालीसिंध-चंबल पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना का उद्घाटन भी करेंगे। 11 नदियों को इस परियोजना के तहत जोड़ा जाएगा, इससे प्रदेश के 21 जिलों में पानी की समस्या खत्म हो जाएगी। पीकेसी-ईआरसीपी में चंबल और इसकी सहायक नदियां पार्वती, कालीसिंध, कुनो, बनास, बाणगंगा, रूपरेल, गंभीरी और मेज शामिल हैं। नवनेरा बैराज से पानी गलवा बांध तक लाया जाएगा। यहां दो हिस्सों में ईसरदा बांध और बीसलपुर बांध तक पानी पहुंचेगा। नवनेरा से चंबल नदी पर जल सेतु बनाकर पानी मेज नदी तक आएगा। इससे राजस्थान की 2.80 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई करने के लिए पानी मिलेगा। पहले प्रदेश की सिर्फ 80 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित होती थी। लेकिन, अब 2 लाख नया क्षेत्र जोड़ा जाएगा और इसका लाभ 25 लाख किसान परिवारों को होगा। इससे प्रदेश की 40 फीसदी आबादी तक साफ पानी पहुंचेगा। पीकेसी-ईआरसीपी से राजस्थान के झालावाड़, बारां, कोटा, बूंदी, सवाई माधोपुर, गंगापुर सिटी, करौली, धौलपुर, भरतपुर, डीग, दौसा, अलवर, खैरथल-तिजारा, जयपुर, जयपुर ग्रामीण, कोटपूतली-बहरोड़, अजमेर, ब्यावर, केकड़ी, टोंक, दूदू जिले की जनता को पीने के पानी की समस्या से छुटकारा मिलेगा। यहां से पंपिंग कर पहले बने गलवा बांध तक जाएगा, गलवा से 31 किलोमीटर दूर ईसरदा तक पानी पहुंचेगा। अपने इस दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी दो बैराज का भी शिलान्यास करेंगे। बता दें कि कूल नदी पर रामगढ़ बैराज और पार्वती नदी पर महलपुर बैराज का निर्माण होगा। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट कर लिखा, 'विकसित भारत के संकल्प की सिद्धि के लिए विकसित राजस्थान भी जरूरी है। इसी कड़ी में आज दोपहर 12 बजे जयपुर में राज्य सरकार के ‘एक वर्ष-परिणाम उत्कर्ष’ कार्यक्रम का हिस्सा बनूंगा, इसमें रेल-सड़क सहित कई परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास का भी सौभाग्य मिलेगा।'
]]>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi), रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के निमंत्रण पर 22-23 अक्टूबर को कजान (Kazan) में आयोजित होने वाले 16वें BRICS सिमट में भाग लेने के लिए रूस का दौरा करेंगे. विदेश मंत्रालय ने एक ऑफिशियल नोटिस में कहा, "Strengthening Multilateralism for Just Global Development and Security" थीम पर आयोजित होने वाला यह शिखर सम्मेलन नेताओं को अहम ग्लोबल मुद्दों पर चर्चा करने के लिए एक अच्छा मंच प्रदान करेगा. विदेश मंत्रालय ने कहा, "शिखर सम्मेलन ब्रिक्स द्वारा शुरू की गई पहलों की प्रगति का आकलन करने और भविष्य में सहयोग के लिए संभावित सेक्टर्स की पहचान करने का एक मूल्यवान मौका प्रदान करेगा."
अपनी यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी BRICS सदस्य देशों के अपने समकक्षों और रूस के शहर कजान में बुलाए गाए नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगे.
पीएम मोदी की अन्य नेताओं के साथ हो सकती हैं द्विपक्षीय बैठकें
यह शिखर सम्मेलन ब्रिक्स की ओर से शुरू की गई पहलों की प्रगति का आकलन करने और भविष्य में सहयोग के लिए संभावित क्षेत्रों की पहचान करने का भी अवसर प्रदान करेगा। अपनी यात्रा के दौरान पीएम मोदी रूस में ब्रिक्स सदस्य देशों के अपने समकक्षों और आमंत्रित नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी कर सकते हैं।
ब्रिक्स के सदस्य देश
रूस इस साल ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है। ब्रिक्स में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीक शामिल हैं। सऊदी अरब, ईरान, इथियोपिया, मिस्र, अर्जेंटीना और संयुक्त अरब अमीरात इसके नए सदस्य हैं।
जुलाई में पीएम मोदी गए थे रूस
इससे पहले 8 जुलाई को पीएम मोदी अपनी दो दिवसीय रूस गए ते। यहां रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रूस के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द एपोस्टल से सम्मानित किया था। इस पर पीएम मोदी ने पुतिन को धन्यवाद दिया था। उन्होंने कहा था कि यह 140 करोड़ भारतीयों का सम्मान है। यह भारत और रूस के बीच सदियों पुरानी दोस्ती का प्रतिबिंब है।
एक साल में दूसरा रूस दौरा
यह इस साल प्रधानमंत्री मोदी की रूस की दूसरी यात्रा होगी. वे रूस के राष्ट्रपति के साथ अनौपचारिक मुलाकात के लिए मास्को गए थे. यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के बाद से उनकी मास्को की यह पहली यात्रा भी थी.
पिछले दिनों अगस्त महीने में प्रधानमंत्री मोदी ने रूसी राष्ट्रपति से बात की और यूक्रेन संघर्ष के जल्द समाधान का आग्रह किया. यह बातचीत प्रधानमंत्री मोदी द्वारा कीव का दौरा करने और यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की से मिलने के कुछ दिनों बाद हुई थी.
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कौन कौन शामिल हुआ
राष्ट्रपति भवन के पोस्ट के अनुसार, श्रीलंका के राष्ट्रपति रनिल विक्रमसिंघे, मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू, सेशेल्स के उपराष्ट्रपति अहमद अफीफ, बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना, मॉरिशिस के प्रधानमंत्री प्रविंद कुमार जुगनौथ, नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्पदहल कमल, भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोब्गे रात्रि भोज में का हिस्सा बने।
भारत और मालदीव के रिश्ते
खास बात है कि मुइज्जू को चीन समर्थक नेता माना जाता है। मालदीव के चुनाव के दौरान भी उन्होंने मालदीव से भारतीय सैनिकों को वापस भेजने की मुहिम छेड़ रखी थी। इसके बाद जब पीएम मोदी लक्षद्वीप पहुंचे, तो मुइज्जू सरकार के तीन मंत्रियों ने आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी थी। हालांकि, बाद में तीनों को हटा दिया गया था। इधर, इस मामले के बढ़ने के बाद भारत में सोशल मीडिया पर मालदीव के बहिष्कार की मांग उठने लगी थी। खास बात है कि भारत के प्रति रुख को लेकर मालदीव में ही मुइज्जू सरकार पर विपक्ष ने गंभीर सवाल उठाए थे।
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नीतीश-नायडू सभी सहमत-:
प्रधानमंत्री आवास पर बुधवार को हुई एनडीए की बैठक में सभी दलों ने सर्वसम्मति से नरेंद्र मोदी को अपना नेता चुन लिया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एनडीए की बैठक में प्रधानमंत्री पद के लिए नरेंद्र मोदी के नाम का प्रस्ताव रखा, जिसका टीडीपी के अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू, बिहार के मुख्यमंत्री एवं जेडीयू प्रमुख नीतीश कुमार और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एवं शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे सहित एनडीए के सभी नेताओं ने समर्थन किया। प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में पीएम आवास, 7 लोक कल्याण मार्ग पर हुई एनडीए की महत्वपूर्ण बैठक में एनडीए के 16 पार्टियों के प्रमुख नेता मौजूद रहे।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए पीएम मोदी ने सर्वप्रथम जनता-जनार्दन का आभार प्रकट किया और एनडीए को लगातार तीसरा कार्यकाल देने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि हम विकसित भारत के संकल्प को आगे लेकर चलना चाहते हैं और इसके लिए आगे भी अटूट निष्ठा के साथ कार्य करते रहेंगे। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने एनडीए के सभी सहयोगी दलों के नेताओं का स्वागत किया। बैठक में एनडीए के सभी नेताओं ने एक स्वर से प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की भूरि-भूरि सराहना की और कहा कि उनके यशस्वी नेतृत्व में ही एनडीए को लगातार तीसरी बार स्पष्ट जनादेश मिला है।
एनडीए के सभी नेताओं ने कहा कि एनडीए की जीत में पीएम मोदी की चमत्कारिक छवि और उनके परिश्रम की पराकाष्ठा का विशेष योगदान है और इसने राज्यों के विधान सभा चुनावों में भी एनडीए को बड़ी जीत दिलाने में ठोस आधार प्रदान किया है। एनडीए के सभी नेताओं ने कहा कि जनता का निर्णय है कि नरेंद्र मोदी जल्द से जल्द शपथ लें और एनडीए सरकार का गठन हो ताकि इन 10 वर्षों में उनके नेतृत्व में गरीब, दलित, पिछडे और वंचित समुदाय को मुख्यधारा से जोड़ने एवं उनके उत्थान के लिए एनडीए सरकार द्वारा जो कल्याणकारी कार्य शुरू किए गए हैं, वह अविरल चलता रहे।
सभी ने एकमत से कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में विगत दस वर्षों में किए गए लोक कल्याणकारी कार्यों के कारण ही जनता ने अकेले भाजपा को पूरे विपक्षी गठबंधन से अधिक सीटों पर विजयी बनाया है और एनडीए को सरकार बनाने का स्पष्ट बहुमत दिया है। प्रधानमंत्री मोदी की ऊर्जा देश के युवाओं में उत्साह प्रदान करती है जो बिना थके काम करते हैं। देश की जनता ने फिर एक बार उन पर विश्वास जताया है और हम सब मिलकर विकसित भारत के संकल्प को पूरा करेंगे।
बैठक में मौजूद एनडीए के सभी नेताओं ने प्रधानमंत्री मोदी को उनके नेतृत्व और उनके नेतृत्व में देश द्वारा की गई प्रगति के लिए बधाई दी। उन्होंने राष्ट्र निर्माण में पीएम मोदी की मेहनत और प्रयासों की सराहना की। एनडीए सहयोगियों ने कहा कि पीएम के पास विकसित भारत के लिए एक स्पष्ट दृष्टिकोण है और वे इस लक्ष्य में भागीदार हैं। उन्होंने दुनिया में भारत का गौरव बढ़ाने में पीएम मोदी की भूमिका की सराहना की। एनडीए नेताओं ने गरीबी उन्मूलन की दिशा में पीएम के प्रयासों की सराहना की और अच्छा काम जारी रखने का संकल्प भी लिया।
बैठक में भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, बिहार के मुख्यमंत्री एवं जेडीयू नेता नीतीश कुमार, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एवं शिवसेना (शिंदे गुट) के नेता एकनाथ शिंदे, टीडीपी मुखिया चंद्रबाबू नायडू, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) से चिराग पासवान, एनसीपी (अजित पवार गुट) से प्रफुल्ल पटेल एवं सुनील तटकरे, अपना दल (एस) से अनुप्रिया पटेल, आरएलडी से जयंत चौधरी, जेडीएस से एचडी कुमारस्वामी, जनसेना पार्टी से पवन कल्याण, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा से जीतन राम मांझी, असम गण परिषद से अतुल बोरा, यूपीपीएल से प्रमोद बोरो, एसकेएम से इंद्रा हंग सुब्बा, आजसू से सुदेश महतो, जेडीयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह एवं जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव संजय झा मौजूद रहे।
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